8 लाख उपभोक्ताओं का बोझ, 2 हजार बिजलीकर्मियों के भरोसे बनारस!
22 हजार ट्रांसफॉर्मर, 500 से
अधिक
फीडर;
बिजलीकर्मियों
का
सवाल—व्यवस्था
ध्वस्त
तो
कार्रवाई
हम
पर
क्यों?
उत्पीड़नात्मक कार्रवाई
के
विरोध
में
कल
भिखारीपुर
स्थित
प्रबंध
निदेशक
कार्यालय
पर
बिजलीकर्मी
करेंगे
प्रदर्शन,
संघर्ष
समिति
ने
प्रबंधन
पर
संवादहीनता
का
लगाया
आरोप
सुरेश गांधी
वाराणसी। भीषण गर्मी के
बीच बनारस की बिजली व्यवस्था
को लेकर बिजली कर्मचारियों
और प्रबंधन के बीच टकराव
खुलकर सामने आ गया है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने दावा किया
है कि शहर में
आठ लाख से अधिक
बिजली उपभोक्ता, 22 हजार से ज्यादा
ट्रांसफॉर्मर और 500 से अधिक फीडरों
की जिम्मेदारी महज दो हजार
बिजलीकर्मियों के भरोसे छोड़
दी गई है।
मीडिया प्रभारी अंकुर पांडेय का
कहना है कि निगम
के निर्धारित मानकों के अनुसार कम
से कम चार हजार
कर्मचारियों की आवश्यकता है,
लेकिन कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने
के बजाय लगातार कटौती
और कार्रवाई की जा रही
है। संघर्ष समिति ने घोषणा की
है कि कर्मचारियों के
विरुद्ध जारी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई
के विरोध में सोमवार 25 मई
को शाम तीन बजे
भिखारीपुर स्थित प्रबंध निदेशक कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन
किया जाएगा।
समिति का कहना है
कि उत्तर प्रदेश इस समय देश
में सर्वाधिक बिजली मांग वाले राज्यों
में शामिल है। तापमान बढ़ने
के साथ बिजली की
खपत लगातार नए स्तर पर
पहुंच रही है। ऐसे
में बिजली कर्मचारी दिन-रात फील्ड
में काम कर निर्बाध
विद्युत आपूर्ति बनाए रखने का
प्रयास कर रहे हैं,
लेकिन दूसरी ओर प्रबंधन का
रवैया कर्मचारियों के प्रति कठोर
और एकतरफा बना हुआ है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया
कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के
अनुरूप बिजली कर्मचारी पूरी निष्ठा के
साथ काम कर रहे
हैं, लेकिन प्रबंधन कर्मचारियों और अभियंताओं के
साथ संवाद स्थापित करने को तैयार
नहीं है। बिजली व्यवस्था
में सुधार के लिए कर्मचारियों
की ओर से कई
व्यावहारिक सुझाव दिए गए, मगर
उन पर विचार करने
के बजाय कार्रवाई का
रास्ता अपनाया जा रहा है।
समिति ने यह भी
आरोप लगाया कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग
जैसे निर्णय बिना कर्मचारियों को
विश्वास में लिए लागू
किए गए।
इसके अलावा 20 से
25 वर्षों का अनुभव रखने
वाले कई संविदा कर्मचारियों
को कार्य से अलग कर
दिया गया, जिसका सीधा
असर बिजली व्यवस्था पर पड़ा है।
समिति के अनुसार इसका
नुकसान उपभोक्ताओं को उठाना पड़
रहा है, क्योंकि अब
कई बार लोगों को
यह तक स्पष्ट नहीं
हो पा रहा कि
उनकी समस्या का समाधान कौन
करेगा। बिजली कर्मचारियों का कहना है
कि आगामी दिनों में तापमान और
बढ़ने की संभावना है
तथा बिजली मांग भी नए
रिकॉर्ड बना सकती है।
ऐसी स्थिति में व्यवस्था को
मजबूत करने के लिए
टकराव नहीं, बल्कि संवाद और समन्वय की
आवश्यकता है।
प्रमुख बिंदु
◾
बनारस में 8 लाख से अधिक
बिजली उपभोक्ता
◾
22 हजार से अधिक ट्रांसफॉर्मर
संचालन में
◾
500 से अधिक फीडरों का
नेटवर्क
◾
मात्र 2000 कर्मचारियों के सहारे पूरी
व्यवस्था
◾
निगम मानक के अनुसार
4000 कर्मचारियों की जरूरत
◾
25 मई को भिखारीपुर में
विरोध प्रदर्शन
गर्मी बढ़ी, फॉल्ट बढ़े और बढ़ा दबाव
गर्मी के बढ़ते असर
के साथ शहर में
ट्रांसफॉर्मरों पर लोड बढ़ने
और लोकल फॉल्ट की
घटनाएं भी बढ़ रही
हैं। ऐसे में सीमित
संख्या में कर्मचारियों पर
कई-कई क्षेत्रों की
जिम्मेदारी आ गई है।
कई इलाकों में शिकायतों के
निस्तारण में देरी होने
से उपभोक्ताओं की नाराजगी भी
बढ़ रही है। बिजलीकर्मियों
का कहना है कि
पर्याप्त स्टाफ और संसाधन के
बिना व्यवस्था को सुचारु रखना
बड़ी चुनौती बनता जा रहा
है।

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