Sunday, 24 May 2026

काशी में गूंजेगा चौके-छक्कों का शंखनाद, गंजारी बनेगा ‘खेलों का काशीधाम’

काशी में गूंजेगा चौके-छक्कों का शंखनाद, गंजारी बनेगाखेलों का काशीधाम’ 

नवंबर-दिसंबर में प्रधानमंत्री मोदी कर सकते हैं उद्घाटन | टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले से हो सकती है शुरुआत | 90% निर्माण कार्य पूरा, शिवमय स्वरूप में तैयार हो रहा पूर्वांचल का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम

सुरेश गांधी

वाराणसी. महादेव की नगरी काशी अब सिर्फ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी की पहचान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि खेलों की दुनिया में भी अपनी नई छाप छोड़ने को तैयार है। गंजारी में बन रहा पूर्वांचल का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। लगभग 451 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का करीब 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब इसकी भव्य तस्वीर धीरे-धीरे सामने आने लगी है।

संभावना जताई जा रही है कि नवंबर-दिसंबर 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके उद्घाटन के लिए वाराणसी सकते हैं। इसके साथ ही चर्चा यह भी है कि इस स्टेडियम की शुरुआत किसी अंतरराष्ट्रीय टी-20 मुकाबले से हो सकती है। करीब 30 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित किया जा रहा यह स्टेडियम केवल ईंट, पत्थर और सीमेंट का ढांचा नहीं होगा, बल्कि काशी की सांस्कृतिक आत्मा और आधुनिक खेल अधोसंरचना का अद्भुत संगम भी बनेगा। इसकी परिकल्पना में भगवान शिव की नगरी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को विशेष रूप से समाहित किया गया है। यही कारण है कि इसके डिजाइन में शिव तत्व की स्पष्ट झलक दिखाई दे रही है।

स्टेडियम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनूठी वास्तुकला होगी। यहां लगाई जा रही फ्लडलाइट्स को त्रिशूल के आकार में डिजाइन किया गया है, जो भगवान शिव के प्रतीक के रूप में दिखाई देंगी। इसके अलावा दर्शकों के बैठने की व्यवस्था गंगा घाटों की तर्ज पर सीढ़ीनुमा शैली में तैयार की जा रही है। यह दृश्य केवल दर्शकों को एक अलग अनुभव देगा, बल्कि देश और दुनिया में इसे एक अलग पहचान भी प्रदान करेगा। स्टेडियम की बाहरी संरचना और अन्य कलात्मक हिस्सों में भी काशी की सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई देगी।

स्टेडियम में 30 हजार से अधिक दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी। यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सभी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अत्याधुनिक फ्लडलाइट्स, डिजिटल स्कोरबोर्ड, मीडिया गैलरी, कॉर्पोरेट बॉक्स, खिलाड़ियों के लिए विशेष लॉन्ज और प्रसारण सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। इसके अलावा दिव्यांगजनों के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है, ताकि वे बिना किसी बाधा के मैच का आनंद उठा सकें। विशेष रैंप, अलग सीटिंग जोन, पार्किंग और अन्य सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है।

गंजारी का यह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम केवल बड़े क्रिकेट मुकाबलों का केंद्र नहीं होगा, बल्कि पूर्वांचल के उभरते खिलाड़ियों के लिए भी नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। यहां क्रिकेट अकादमी, प्रशिक्षण केंद्र और खेल विज्ञान से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना भी है। इससे पूर्वांचल के युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध होंगे और उन्हें बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। लंबे समय से खेल अधोसंरचना की कमी महसूस कर रहे क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए यह किसी बड़े अवसर से कम नहीं माना जा रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेडियम के शुरू होने के बाद इसका प्रभाव सिर्फ खेलों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे वाराणसी में खेल पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों के आयोजन से होटल व्यवसाय, परिवहन, खानपान और छोटे व्यापारियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।

जिस काशी की पहचान अब तक गंगा घाटों, मंदिरों और आध्यात्मिक विरासत से होती रही है, अब वही शहर चौके-छक्कों की गूंज और खेलों के नए उत्साह के लिए भी जाना जाएगा। गंजारी में आकार ले रहा यह स्टेडियम केवल एक खेल परिसर नहीं, बल्कि पूर्वांचल के युवाओं के सपनों, आकांक्षाओं और बदलती तस्वीर का प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में जब यहां पहली बार दर्शकों की तालियों के बीच गेंद हवा में उछलेगी, तब काशी के इतिहास में खेलों का एक नया अध्याय भी दर्ज हो जाएगा।

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