मीट-मुर्गा की दुकानों पर कार्रवाई, लेकिन सवाल बरकरार
क्या शहर
की
तस्वीर
बिगाड़ने
के
लिए
केवल
एक
कारोबार
जिम्मेदार?
शराब,
नशे
और
अतिक्रमण
पर
कब
चलेगा
बुलडोजर?
शहर को
सुंदर
बनाना
है
तो
नियम
सब
पर
लागू
हों,
केवल
एक
कारोबार
को
निशाना
बनाने
से
नहीं
बदलेगी
तस्वीर
सुरेश गांधी
वाराणसी। शहर को स्वच्छ,
सुंदर और व्यवस्थित बनाने
के नाम पर नगर
प्रशासन ने सड़कों और
प्रमुख मार्गों से मीट-मुर्गा
की दुकानों को हटाने की
कवायद तेज कर दी
है। प्रशासन का तर्क है
कि खुले में मांस
की बिक्री, गंदगी और दुर्गंध से
शहर की छवि प्रभावित
होती है। लेकिन इस
कार्रवाई के साथ ही
सोशल मीडिया और आम नागरिकों
के बीच एक बड़ा
सवाल भी तेजी से
उठ रहा है—क्या
शहर की बदहाली और
अव्यवस्था के लिए केवल
मीट-मुर्गा की दुकानें ही
जिम्मेदार हैं?
लोगों का कहना है
कि यदि सौंदर्यीकरण और
स्वच्छता ही कार्रवाई का
आधार है तो फिर
सार्वजनिक स्थानों के आसपास खुलेआम
बिक रही शराब, तंबाकू,
गांजा और अन्य नशे
से जुड़े अवैध कारोबारों पर
उतनी ही कठोर कार्रवाई
क्यों नहीं दिखाई देती?
कई नागरिकों का तर्क है
कि शहर की सड़कों,
गलियों और चौराहों पर
फैला अतिक्रमण, अवैध ठेले, कूड़े
के ढेर और नशे
का बढ़ता प्रचलन भी नगर की
छवि को उतना ही
नुकसान पहुंचाता है जितना कोई
अन्य अव्यवस्थित कारोबार।
हालांकि इस बहस का
दूसरा पक्ष भी है।
नगर प्रशासन का कहना है
कि कार्रवाई किसी समुदाय या
व्यवसाय विशेष के खिलाफ नहीं,
बल्कि शहरी नियोजन, स्वच्छता
मानकों और निर्धारित नियमों
के पालन के लिए
की जा रही है।
यदि कोई दुकान लाइसेंस,
स्वच्छता और स्थान संबंधी
मानकों का उल्लंघन करती
है तो उसके खिलाफ
कार्रवाई होना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञ भी मानते हैं
कि किसी भी शहर
में खाद्य सामग्री की बिक्री तय
नियमों और स्वास्थ्य मानकों
के अनुसार ही होनी चाहिए।
फिर भी नागरिकों
की मांग है कि
नियमों का पालन सभी
के लिए समान रूप
से सुनिश्चित किया जाए। यदि
शहर को वास्तव में
स्मार्ट, स्वच्छ और सुंदर बनाना
है तो कार्रवाई केवल
एक प्रकार की दुकानों तक
सीमित नहीं रहनी चाहिए।
सड़क किनारे शराब पीने वालों,
अवैध नशे के कारोबार,
अतिक्रमण और गंदगी फैलाने
वाले हर तत्व पर
समान कठोरता दिखनी चाहिए।
शहर में चल
रही इस बहस ने
प्रशासन के सामने एक
बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया
है—क्या सौंदर्यीकरण का
पैमाना सबके लिए एक
जैसा होगा, या फिर कार्रवाई
चुनिंदा कारोबारों तक ही सीमित
रह जाएगी? नागरिक अब इसी सवाल
का जवाब चाहते हैं।

No comments:
Post a Comment