भव्य पंडाल तैयार, बाजार में रौनक, अब जाम और सुरक्षा की अग्निपरीक्षा
प्रतिमाओं को
अंतिम
स्पर्श,
कलश
से
लेकर
सजावटी
सामान
तक
की
खरीदारी
तेज;
मां
के
स्वागत
में
सज
रही
काशी,
प्रशासन
ने
भी
कसी
कमर
पंडालों में
बिजली
से
लेकर
विसर्जन
मार्गों
तक
दुरुस्ती
के
निर्देश,
महिला
पुलिस
और
सीसीटीवी
से
होगी
निगरानी
शांति समिति
की
बैठक
में
साफ
संदेश—नई
परंपरा
नहीं,
तय
मार्ग
से
ही
विसर्जन
कलश, चुनरी
और
सजावटी
सामान
की
खरीदारी
तेज,
पंडालों
को
अंतिम
रूप
देने
में
जुटे
आयोजक
जिलाधिकारी ने
जर्जर
तार
और
क्षतिग्रस्त
सड़कें
तत्काल
दुरुस्त
कराने
को
कहा,
पुलिस
आयुक्त
ने
सुरक्षा
पर
दिया
जोर
श्रद्धालुओं की
सुविधा
के
लिए
पेयजल,
सफाई,
प्रकाश
और
बैरिकेडिंग
की
व्यवस्था
करने
के
निर्देश
सुरेश गांधी
वाराणसी। मां दुर्गा के
आगमन की आहट के
साथ काशी में उत्सव
का रंग गहराने लगा
है। कहीं भव्य पंडालों
को अंतिम रूप दिया जा
रहा है तो कहीं
मां की प्रतिमाओं को
शिल्पकार अपने हुनर और
श्रद्धा के रंगों से
संवारने में जुटे हैं।
बाजारों में कलश, चुनरी,
पूजन सामग्री, झालर, कृत्रिम फूल और सजावट
के सामान की खरीदारी तेज
हो गई है। घरों
से लेकर पूजा समितियों
तक तैयारियों की हलचल है।
हर ओर उत्साह है,
उमंग है और मां
के स्वागत की आतुरता। दुर्गा
पूजा का उल्लास अब
धीरे-धीरे सड़कों और
बाजारों से निकलकर शहर
के कोने-कोने में
दिखाई देने लगा है।
लेकिन इस धार्मिक उल्लास
के बीच व्यवस्था से
जुड़ा एक बड़ा सवाल
भी खड़ा है। भव्य
पंडालों और उमड़ने वाली
श्रद्धालुओं की भीड़ के
बीच शहर को जाम
से मुक्ति दिलाना प्रशासन के लिए सबसे
बड़ी चुनौती होगी। प्रमुख मार्गों और चौराहों के
आसपास पंडालों की स्थापना, दर्शनार्थियों
की आवाजाही, रामलीला-मेला स्थलों पर
जुटने वाली भीड़ और
मूर्ति विसर्जन के जुलूस यातायात
व्यवस्था की परीक्षा लेंगे।
ऐसे में त्योहार की
तैयारियों का वास्तविक आकलन
केवल पंडालों की भव्यता से
नहीं, बल्कि इस बात से
भी होगा कि श्रद्धालुओं
को दर्शन के लिए पहुंचने
और वापस लौटने में
कितनी सहूलियत मिलती है।
इसी चुनौती को
ध्यान में रखते हुए
जिला प्रशासन और पुलिस ने
तैयारियां तेज कर दी
हैं। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और पुलिस आयुक्त
मोहित अग्रवाल की संयुक्त अध्यक्षता
में शुक्रवार को यातायात पुलिस
लाइंस सभागार में जिला शांति
समिति की बैठक हुई।
इसमें दुर्गा पूजा और रामलीला
समितियों के पदाधिकारियों से
तैयारियों, समस्याओं और सुझावों पर
विस्तार से चर्चा की
गई। अधिकारियों ने संबंधित विभागों
को बिजली, सड़क, पेयजल, साफ-सफाई, प्रकाश
और सुरक्षा व्यवस्था समय से दुरुस्त
करने के निर्देश दिए।
पुलिस को भीड़ नियंत्रण,
यातायात प्रबंधन और संवेदनशील स्थलों
पर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया।
कहीं लटकते तार तो कहीं सड़क के गड्ढे, समय से दुरुस्ती की चुनौती
दुर्गा पूजा समितियों के
आयोजकों ने बैठक में
बिजली के जर्जर खंभों,
लटकते तारों, मूर्ति स्थापना स्थलों और विसर्जन मार्गों
पर सड़क के गड्ढों
तथा प्रकाश व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं
उठाईं। जिलाधिकारी ने बिजली विभाग
और लोक निर्माण विभाग
के अधिकारियों को तत्काल आवश्यक
सुधार कराने के निर्देश दिए।
पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और
जिला पंचायत को अभियान चलाकर
सड़कों की मरम्मत और
पैचवर्क का काम शीघ्र
पूरा कराने को कहा गया।
त्योहार के दौरान बिजली
की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष
जोर दिया गया। पंडालों
में रोशनी और सजावट के
लिए बड़ी संख्या में
विद्युत उपकरणों का इस्तेमाल होता
है। ऐसे में जर्जर
तारों और असुरक्षित खंभों
की अनदेखी दुर्घटना का कारण बन
सकती है। जिलाधिकारी ने
आयोजकों से भी कहा
कि पंडालों में वैकल्पिक प्रकाश
व्यवस्था के लिए इमरजेंसी
लाइट और जनरेटर की
व्यवस्था अवश्य रखें, ताकि बिजली आपूर्ति
बाधित होने पर अंधेरे
की स्थिति न बने। प्रशासन
के सामने चुनौती केवल बिजली की
आपूर्ति बनाए रखने की
नहीं, बल्कि पंडालों के आसपास विद्युत
सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी
है। ऐसे स्थलों पर
जहां बड़ी संख्या में
श्रद्धालु एकत्र होंगे, वहां बिजली के
तारों, अस्थायी कनेक्शनों और जनरेटर की
सुरक्षित व्यवस्था पर विशेष ध्यान
देना होगा।
जाम से निपटना होगा सबसे बड़ा इम्तिहान
दुर्गा पूजा के दौरान
शहर के विभिन्न इलाकों
में पंडालों के आसपास श्रद्धालुओं
की आवाजाही बढ़ेगी। शाम के समय
दर्शनार्थियों की भीड़, बाजारों
में खरीदारी और वाहनों का
दबाव एक साथ बढ़ने
से प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित
होने की आशंका रहती
है। रामलीला मंचन, मेला और रावण
दहन के आयोजन भीड़
को और बढ़ा सकते
हैं। वहीं, विसर्जन जुलूसों के दौरान मार्गों
पर वाहनों की आवाजाही बनाए
रखना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण
होगा। ऐसे में यातायात
प्रबंधन की सफलता इस
बात पर निर्भर करेगी
कि भीड़ के संभावित
दबाव वाले स्थलों की
पहचान कितनी पहले की जाती
है और वहां पुलिसकर्मियों
की तैनाती कितनी प्रभावी रहती है। पंडालों
के आसपास वाहनों की आवाजाही, पार्किंग,
पैदल श्रद्धालुओं के लिए जगह
और जुलूसों के आवागमन के
बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने अधिकारियों को
यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण
के लिए पर्याप्त पुलिस
बल तैनात करने के निर्देश
दिए। उन्होंने कहा कि मूर्ति
विसर्जन के दौरान पूरी
सड़क नहीं घेरी जाए।
जुलूस और विसर्जन के
लिए पहले से निर्धारित
मार्गों का ही इस्तेमाल
किया जाए। आयोजकों को
कार्यक्रम निर्धारित समय पर समाप्त
करने की हिदायत भी
दी गई। प्रशासन के
सामने असली चुनौती यह
होगी कि श्रद्धालुओं की
आस्था का प्रवाह बना
रहे, लेकिन सड़कों पर अव्यवस्था की
स्थिति न पैदा हो।
इसके लिए पुलिस, यातायात
विभाग, नगर निगम और
पूजा समितियों के बीच बेहतर
समन्वय आवश्यक होगा।
पंडालों से विसर्जन स्थलों तक सुरक्षा का घेरा
त्योहार के दौरान सुरक्षा
व्यवस्था को मजबूत बनाने
के लिए पुलिस आयुक्त
ने पंडालों, रामलीला मंचन स्थलों और
रावण दहन के आयोजनों
में पर्याप्त बैरिकेडिंग कराने के निर्देश दिए।
बड़े पंडालों में सीसीटीवी कैमरे
लगाने पर भी जोर
दिया गया, ताकि भीड़
की निगरानी की जा सके
और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई
हो। रामलीला मंचन और मेला
स्थलों पर महिला पुलिसकर्मियों
की ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए
गए हैं। पुलिस अधिकारियों
से अपने-अपने क्षेत्रों
में विशेष सतर्कता बरतने और दुर्गा पूजा
समितियों के साथ समन्वय
बैठक करने को कहा
गया। थाना प्रभारियों को
पंडालों और मूर्ति विसर्जन
स्थलों का निरीक्षण करने
की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
आयोजकों को पंडालों में पर्याप्त संख्या
में स्वयंसेवक रखने के निर्देश
दिए गए। स्वयंसेवकों को
अलग जर्सी, बिल्ला अथवा पहचान पत्र
उपलब्ध कराने और उनकी सूची
संबंधित थाने में जमा
कराने को कहा गया,
ताकि जरूरत पड़ने पर पुलिस उनसे
तत्काल संपर्क कर सके। त्योहारों
के दौरान अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं
से भी माहौल प्रभावित
होने की आशंका रहती
है। पुलिस आयुक्त ने आयोजकों से
ऐसी किसी भी सूचना
की जानकारी तत्काल पुलिस प्रशासन को देने का
आग्रह किया। उन्होंने विसर्जन जुलूसों में अश्लील गाने
बजाने से परहेज करने
और ध्वनि उपकरणों का सीमित इस्तेमाल
करने की हिदायत भी
दी।
साफ-सफाई, पेयजल और रोशनी पर भी नजर
दुर्गा पूजा के दौरान
श्रद्धालुओं की सुविधा के
लिए बुनियादी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखना भी प्रशासन
की प्राथमिकता में है। जिलाधिकारी
ने जलकल विभाग को
शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित
करने के निर्देश दिए।
जरूरत वाले स्थानों पर
मोबाइल शौचालयों की व्यवस्था करने
को भी कहा गया।
नगर निगम को नगरीय
क्षेत्रों में पंडालों, मूर्ति
स्थापना स्थलों, विसर्जन स्थलों और संबंधित कुंडों
की सूची तैयार कर
साफ-सफाई सुनिश्चित करने
की जिम्मेदारी दी गई। ग्रामीण
क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था
के लिए जिला पंचायती
राज अधिकारी को निर्देशित किया
गया। विसर्जन स्थलों तक पहुंचने वाले
रास्तों पर पर्याप्त रोशनी,
सफाई और सुरक्षित आवागमन
सुनिश्चित करने पर जोर
दिया गया। जिलाधिकारी ने
संबंधित विभागों से कहा कि
पोखरों, तालाबों और पर्याप्त पानी
वाले निर्धारित स्थलों पर ही मूर्तियों
का विसर्जन कराया जाए। विसर्जन स्थलों
तक जाने वाले मार्गों
पर झाड़-झंखाड़ न
रहने देने और समुचित
प्रकाश व्यवस्था करने के निर्देश
भी दिए गए। इन
व्यवस्थाओं का महत्व इसलिए
भी बढ़ जाता है,
क्योंकि पूजा के अंतिम
दिनों में श्रद्धालुओं की
आवाजाही के साथ विसर्जन
की तैयारियां भी तेज हो
जाती हैं। ऐसे में
रास्तों की बदहाली, गंदगी,
अंधेरा या पेयजल की
कमी श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ा
सकती है।
नई परंपरा नहीं, तय मार्ग से ही होगा विसर्जन
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया
कि दुर्गा पूजा और दशहरा
के आयोजन में किसी नई
परंपरा की शुरुआत नहीं
होगी। मूर्ति विसर्जन निर्धारित स्थलों पर ही कराया
जाएगा। आयोजकों से श्रद्धा और
भक्ति के साथ त्योहार
मनाने तथा शांति व्यवस्था
बनाए रखने की अपील
की गई। पुलिस आयुक्त
ने भी स्पष्ट किया
कि जुलूस और विसर्जन के
लिए पहले से निर्धारित
मार्गों का ही पालन
करना होगा। विसर्जन के दौरान सड़क
पर अनावश्यक कब्जा नहीं किया जाएगा।
सभी थाना प्रभारियों को
अपने क्षेत्रों की समितियों के
साथ समन्वय बनाकर कार्यक्रमों को व्यवस्थित ढंग
से संपन्न कराने के निर्देश दिए
गए। प्रशासन का जोर इस
बात पर है कि
धार्मिक आयोजनों की परंपरा और
मर्यादा बनी रहे तथा
किसी भी स्थिति में
कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। आयोजकों
से भी अपेक्षा की
गई कि वे निर्धारित
समय और मार्ग का
पालन करते हुए पुलिस
प्रशासन का सहयोग करें।
तैयारियों के दावों की धरातल पर होगी परीक्षा
काशी में दुर्गा
पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान
नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक उल्लास
का पर्व भी है।
पंडालों की सजावट से
लेकर प्रतिमाओं के निर्माण तक
हजारों हाथ इस उत्सव
को भव्य बनाने में
जुटे हैं। बाजारों में
बढ़ती चहल-पहल से
लेकर पूजा समितियों की
तैयारियों तक हर तरफ
उत्साह दिखाई दे रहा है।
ऐसे में प्रशासन की
जिम्मेदारी भी बढ़ गई
है। बिजली, सड़क, सफाई, पेयजल और सुरक्षा से
जुड़े निर्देश तभी सार्थक होंगे,
जब संबंधित विभाग समय रहते काम
पूरा करेंगे। यातायात व्यवस्था को लेकर भी
केवल पुलिस बल की तैनाती
पर्याप्त नहीं होगी; पंडालों
के आसपास वाहनों के दबाव, पैदल
श्रद्धालुओं की आवाजाही और
विसर्जन मार्गों पर प्रभावी नियंत्रण
जरूरी होगा। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और पुलिस आयुक्त
मोहित अग्रवाल की संयुक्त अध्यक्षता
में हुई बैठक में
इन सभी पहलुओं पर
संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए
गए। बैठक में अपर
पुलिस आयुक्त शिवहरी मीणा, डीसीपी गौरव वंशवाल, राजेश
पांडेय, एडीसीपी ट्रैफिक, एडीएम सिटी पंकज कुमार
सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और
दुर्गा पूजा समितियों के
आयोजक मौजूद रहे। अब निगाहें
इस बात पर होंगी
कि तैयारियों के दावे कितनी
मुस्तैदी से जमीन पर
उतरते हैं। मां के
भव्य दरबार सजें, बाजारों में रौनक बनी
रहे और श्रद्धालु बिना
अनावश्यक परेशानी के दर्शन कर
सकें—दुर्गोत्सव की सफलता का
असली पैमाना यही होगा।

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