निजीकरण के खिलाफ़ हुंकार : संविदा कर्मियों की छंटनी और स्मार्ट मीटर थोपने पर गुस्से में बिजली कर्मचारी
वेतन रोके जाने और निजीकरण की तैयारी पर प्रबंधन को खुली चुनौती
बनारस में
बिजली
कर्मियों
का
संघर्ष
290वें
दिन
भी
जारी
फेसियल अटेंडेंस
का
दबाव
: बिना
संसाधन
उपलब्ध
कराए
अनिवार्य,
हजारों
कर्मियों
का
वेतन
तीन
माह
से
रोका
निजीकरण के
खिलाफ़
हुंकार
: संविदा
कर्मियों
की
छंटनी
और
स्मार्ट
मीटर
थोपने
पर
गुस्से
में
बिजली
कर्मचारी
अमानवीय उत्पीड़न
का
आरोप
: काम
करने
के
बावजूद
जून
से
अगस्त
तक
वेतन
नहीं,
आंदोलन
रुकने
के
आसार
नहीं
दृढ़ ऐलान
: निर्णय
वापस
और
सभी
दमनात्मक
कार्रवाइयों
की
समाप्ति
तक
विरोध
जारी
रहेगा
सुरेश गांधी
कर्मचारियों ने आरोप लगाया
कि प्रबंधन ने बिना पर्याप्त
संसाधन उपलब्ध कराए फेसियल अटेंडेंस
को अनिवार्य बना दिया है
और इसी आधार पर
हजारों कर्मियों का वेतन रोक
दिया गया है। वक्ताओं
ने इसे “तानाशाही” करार
देते हुए कहा कि
वेतन रोककर निजीकरण स्वीकार कराने की कोशिश सफल
नहीं होगी। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने
बताया कि जून, जुलाई
और अगस्त माह का वेतन
अब तक कई हजार
कर्मियों को नहीं मिला
है, जबकि वे लगातार
ड्यूटी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि काम
करने के बावजूद तीन
माह तक वेतन न
देना “अमानवीय और गंभीर उत्पीड़नात्मक”
कार्रवाई है।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया
कि नौ माह से
चल रहा यह आंदोलन
तब तक जारी रहेगा
जब तक निजीकरण का
निर्णय वापस नहीं लिया
जाता और सभी उत्पीड़नात्मक
कार्रवाइयों को समाप्त नहीं
किया जाता। सभा
को ई. मायाशंकर तिवारी,
ई. विजय सिंह, अंकुर
पांडेय, योगेंद्र कुमार, विशाल कुमार, गुलजार अहमद, संदीप कुमार, अमित कुमार, नागेंद्र
कुमार, जितेंद्र कुमार और राजेंद्र सिंह
सहित कई नेताओं ने
संबोधित किया।


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