Sunday, 21 September 2025

नवरात्रि पर महंगाई को मात, जेब में खुशियों की बरसात

त्योहारी सीजन की सौगात : अब 100 रुपये के सामान पर होगी लगभग 5 से 10 रुपये तक की बचत

नवरात्रि पर महंगाई को मात, जेब में खुशियों की बरसात 

आज से जीएसटी कटौती : रोज़मर्रा से लेकर गाड़ियों तक हर खरीद होगी सस्ती, उपभोक्ता की बचत से व्यापारी का कारोबार चमकेगा

मध्यमवर्गीय परिवार को प्रति माह 800 से 1000 रुपये तक की होगी बचत

सुरेश गांधी

वाराणसी। त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों को बड़ी राहत दी है। सोमवार, 22 सितंबर से देशभर में जीएसटी की नई दरें लागू होंगी, जिससे रसोई के सामान, दवाइयों, इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट, वाहन समेत लगभग 375 वस्तुएं और कई सेवाएं पहले से सस्ती हो जाएंगी। यह सिर्फ़ खरीदारी करने वालों के लिए नहीं, बल्कि व्यापारियों और पूरे बाजार तंत्र के लिए भी एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। मतलब साफ है त्योहारी मौसम में सरकार का यह फैसला आम आदमी की जेब में राहत और बाजार में रौनक दोनों लेकर आएगा। त्योहारी सीजन में यह बदलाव आम आदमी के बजट को राहत देने वाला साबित होगा। रसोई से लेकर गाड़ी खरीदने तक हर क्षेत्र में उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम होगा।

100 रुपये की वस्तु पर अब 5 से 10 रुपये तक की सीधी बचत होगी। एक औसत मध्यमवर्गीय परिवार का मासिक ग्रॉसरी बिल लगभग 5,000 रुपये होता है, जिसमें रोज़मर्रा के टॉयलेटरीज़ और रसोई के सामान पर करीब 600 से 700 रुपये कर का बोझ था। नई दरों से यह घटकर 200 से 250 रुपये रह सकता है, यानी हर महीने 400 से 500 रुपये की राहत। राज्यों की आमदनी पर असर पड़ेगा, पर बढ़ी हुई खपत से टैक्स कलेक्शन में अंततः संतुलन आने की उम्मीद है। कुल मिलाकर मध्यमवर्गीय परिवार को प्रति माह 800 से 1000 रुपये तक की बचत। सरकार इसे महंगाई पर काबू और अर्थव्यवस्था को गति देने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी साल का लोकलुभावन ऐलान कह रहा है। राज्यों की आमदनी पर कुछ असर जरूर पड़ेगा, लेकिन खपत बढ़ने से टैक्स कलेक्शन में संतुलन आने की संभावना है। सरकार का तर्क है कि महंगाई पर काबू और आर्थिक मंदी को थामने के लिए यह जरूरी था। कुल मिलाकर मध्यमवर्गीय परिवार को हर महीने 800 से 1000 रुपये तक की सीधी बचत होने वाली है। घर या गाड़ी खरीदने वालों को लाखों रुपये तक का लाभ होगा। खाकर व्यापारियों को बिक्री और मुनाफे में बढ़ोतरी का मौका मिलेगा।

रसोई और रोज़मर्रा का खर्च

टूथपेस्ट, शैम्पू, बालों का तेल, साबुन जैसी वस्तुओं पर जीएसटी 12से 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है। अब 100 रुपये के सामान पर लगभग 5 से 10 रुपये तक की बचत होगी।

दवाइयां मेडिकल उपकरण

अधिकांश आवश्यक दवाओं, ग्लूकोमीटर और डायग्नॉस्टिक किट पर अब सिर्फ 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। पुरानी बीमारियों वाले रोगियों के सालाना दवा खर्च में 8 से 10 फीसदी तक राहत मिलेगी। या यूं कहे मधुमेह, हृदय रोग या पुरानी बीमारियों के रोगियों के लिए सालाना औसत दवा खर्च में 8 से 10 फीसदी तक की बचत होगी।

मकान और निर्माण सामग्री

सीमेंट पर जीएसटी 28 फीसदी से घटकर 18 फीसदी हो गया है। 1000 वर्गफुट के मकान में सीमेंट पर करीब 10 से 12 हजार रुपये तक की बचत संभव है। यानी 1000 वर्गफुट के मकान में लगभग 300 बैग सीमेंट लगते हैं। प्रति बैग 400 रुपये की दर से करीब 1,20,000 रुपये का खर्च आता था, जिसमें 28 फीसदी कर शामिल था। अब 18 फीसदी कर से लगभग 10,000 से 12,000 रुपये तक की बचत संभव है।

वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स

कई मध्यम श्रेणी की कारों पर कर दर 28 फीसदी से घटकर 18 फीसदी हो सकती है। 10 लाख रुपये की गाड़ी पर लगभग 80,000 से 1,00,000 रुपये तक सीधी राहत मिलेगी। यानी 10 लाख रुपये की गाड़ी पर उपभोक्ता को लगभग 80,000 से 1,00,000 रुपये तक की सीधी बचत होगी।

व्यापारी और बाजार पर असर

खुदरा व्यापारः दरें घटने से मांग बढ़ेगी और त्योहारी सीजन में बिक्री 15 से 20 फीसदी तक बढ़ सकती है।

थोक और निर्माता : इनपुट टैक्स क्रेडिट का ढांचा सरल होगा, उत्पादन बढ़ने पर लागत और घट सकती है।

ऑटोमोबाइल रियल एस्टेट : लंबे समय से मंदी झेल रहे सेक्टर में नई जान आने की उम्मीद।

खुदरा व्यापारी

सस्ती दरों से मांग बढ़ेगी, स्टॉक क्लियर करना आसान होगा। त्योहारी सीजन में बिक्री 15 से 20 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, कम कर से शुरुआती कुछ हफ्तों में मार्जिन समायोजित करना पड़ेगा।

थोक व्यापारी और निर्माता

इनपुट टैक्स क्रेडिट में बदलाव से लेखा-जोखा आसान होगा। उत्पादन बढ़ने पर स्केल इकोनॉमी का फायदा, यानी लंबी अवधि में लागत और कम।

ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट

लंबे समय से मंदी झेल रहे दोनों सेक्टर में नई जान आने की उम्मीद है। कार डीलरशिप और सीमेंट-स्टील सप्लायर्स के लिए यह त्योहारी सीजन रिकॉर्ड तोड़ बिक्री का मौका है।  

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