“प्रधानमंत्री के क्षेत्र
में
लोकतंत्र
पर
हमला”
काशी में ‘वोट जिहाद’ का सनसनीखेज खुलासा!
451 बूथों की जांच में
9000 डुप्लीकेट
नाम
मिलने
का
दावा
मंत्री रविंद्र
जायसवाल
बोले,
लोकतंत्र
को
हाईजैक
करने
की
रची
गई
साजिश
सुरेश गांधी
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में मतदाता सूची को लेकर बड़ा सियासी विस्फोट हुआ है। शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र में कराए गए मतदाता सूची के गहन परीक्षण में करीब 9000 मतदाताओं के नाम एक से अधिक बूथों पर दर्ज पाए जाने का सनसनीखेज दावा सामने आया है। इस मामले को लेकर स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री तथा वाराणसी उत्तरी विधानसभा के पूर्व विधायक रविंद्र जायसवाल ने सीधे तौर पर इसे ‘वोट जिहाद’ की संगठित साजिश करार देते हुए चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंत्री ने गुरुवार को जिला निर्वाचन अधिकारी सत्येंद्र कुमार को संदिग्ध मतदाताओं की सूची सौंपते हुए आधार आधारित सत्यापन और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है।451 बूथों की जांच में खुली गड़बड़ियों की परतें
5 फरवरी को शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के 388 क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 451 बूथों पर मतदाता सूची के स्वतः परीक्षण के दौरान यह मामला सामने आने का दावा किया गया। जांच में कथित तौर पर हजारों ऐसे मतदाताओं के नाम सामने आए, जो दो से पांच अलग-अलग मतदान केंद्रों पर दर्ज पाए गए।
मंत्री रविंद्र जायसवाल ने आरोप लगाया
कि बड़ी संख्या में
ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें
विवाह के वर्षों बाद
भी महिलाओं का नाम मायके
और ससुराल दोनों स्थानों पर वोटर सूची
में बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि कई
महिलाएं 30 से 40 वर्ष की आयु
पार कर चुकी हैं,
लेकिन अभी भी पिता
के नाम से मतदाता
सूची में दर्ज हैं,
जो गंभीर चुनावी अनियमितता की ओर संकेत
करता है।
“प्रधानमंत्री के क्षेत्र में लोकतंत्र पर हमला”
लाखों नाम हटने के बाद भी बच गए हजारों संदिग्ध वोटर
आधार सत्यापन से होगी ‘फर्जी वोटिंग’ पर चोट!
मंत्री रविंद्र जायसवाल ने प्रशासन से
मांग की है कि
सभी संदिग्ध नामों का आधार कार्ड
से लिंक कर सत्यापन
कराया जाए और यदि
किसी प्रकार की धांधली सामने
आती है तो संबंधित
लोगों के खिलाफ कठोर
कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने
कहा कि “मतदाता सूची
लोकतंत्र की रीढ़ होती
है। इसमें किसी भी प्रकार
की गड़बड़ी पूरे चुनावी तंत्र
को प्रभावित कर सकती है।
दोषियों को किसी भी
कीमत पर बख्शा नहीं
जाना चाहिए।”
सियासत गरमाने के संकेत, चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल
काशी जैसे राष्ट्रीय
महत्व के संसदीय क्षेत्र
में मतदाता सूची को लेकर
उठे इस विवाद ने
सियासी माहौल को गरमा दिया
है। विपक्ष और चुनावी एजेंसियों
की प्रतिक्रिया अब इस मुद्दे
की दिशा तय करेगी,
लेकिन इतना तय है
कि इस खुलासे के
बाद मतदाता सूची की विश्वसनीयता
और चुनावी शुचिता पर बहस तेज
होना तय माना जा
रहा है। अब सबकी
नजर जिला निर्वाचन प्रशासन
की जांच और संभावित
कार्रवाई पर टिकी हुई
है, क्योंकि यह मामला केवल
काशी ही नहीं बल्कि
पूरे चुनावी सिस्टम की पारदर्शिता से
जुड़ा माना जा रहा
है।





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