Saturday, 21 March 2026

बनारस से पूर्वांचल तक ईद की नमाज़ बनी अमन, आस्था और गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत उत्सव

सजदों में सजी सुबह, मुहब्बत में डूबी शाम

बनारस से पूर्वांचल तक ईद की नमाज़ बनी अमन, आस्था और गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत उत्सव 

शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में देखने को मिली. नमाज़ के बाद लोगों ने गले मिलकर एक-दूसरे कोईद मुबारककहा

सुरेश गांधी

वाराणसी. रमज़ान की तपस्या, इबादत और सब्र के 30 रोज़ों के बाद जब ईद की सुबह दस्तक देती है, तो सिर्फ एक त्योहार नहीं आताआती है दिलों को जोड़ने वाली एक रूहानी रोशनी। शनिवार की सुबह ऐसा ही नज़ारा पूरे पूर्वांचल में देखने को मिला, जब वाराणसी सहित गाजीपुर, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, भदोही और मिर्जापुर की मस्जिदों और ईदगाहों में हजारों-लाखों अकीदतमंदों ने एक साथ सजदा किया। हर हाथ दुआ के लिए उठा, हर दिल में मोहब्बत की लहर थी और हर ज़ुबान पर एक ही पैगामअमन, भाईचारा और इंसानियत।

खास यह है कि पूर्वांचल में इस बार ईद जिस तरह शांति और सौहार्द के बीच सम्पन्न हुई, वह अपने आप में एक सकारात्मक संकेत है। यह बताता है कि बदलते समय में भी हमारी सांस्कृतिक जड़ें और आपसी रिश्ते मजबूत हैं। बनारस ने एक बार फिर यह साबित किया कि यहां की गंगा-जमुनी तहज़ीब सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में बसती है। आज जब समाज कई तरह की चुनौतियों से गुजर रहा है, ऐसे में ईद जैसे त्योहार हमें याद दिलाते हैं कि असली ताकत एकता, सहिष्णुता और आपसी सम्मान में ही है। मतलब साफ है ईद-उल-फितर का यह पर्व पूर्वांचल में सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा अवसर बना, जिसने समाज को एकजुट होने, एक-दूसरे के करीब आने और इंसानियत को सबसे ऊपर रखने का संदेश दिया। सजदों में झुके सिर और गले मिलते लोगयही है असली भारत, यही है पूर्वांचल की पहचान।

बनारस : जहां हर इबादत में बसती है इंसानियत

काशी की सुबह इस बार भी अपनी परंपरा के अनुरूप आध्यात्मिक रंगों में रंगी रही। बड़ी ईदगाह, मदनपुरा, बड़ागांव, नई सड़क और दालमंडी जैसे इलाकों में नमाज़ियों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह की हल्की ठंडक और अलसाई हवा के बीच जबअल्लाहु अकबरकी गूंज फिजाओं में फैली, तो पूरा शहर जैसे एक ही सुर में झूम उठा। नमाज़ के बाद लोगों ने गले मिलकर एक-दूसरे कोईद मुबारककहा। बच्चों के चेहरे पर ईदी की खुशी थी, तो बुजुर्गों की आंखों में संतोषकि एक और रमज़ान मुकम्मल हुआ और समाज में भाईचारे की डोर और मजबूत हुई।

सुरक्षा और संवेदनशीलता : सतर्क प्रशासन, शांतिपूर्ण आयोजन

इस बार ईद के मौके पर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती, ड्रोन से निगरानी, सीसीटीवी कैमरों की पैनी नजरहर पहलू पर खास ध्यान दिया गया। सड़कों पर नमाज़ हो, इसके लिए पहले से ही दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, जिसका पालन भी देखने को मिला। प्रशासन की इस सख्ती ने यह संदेश दिया कि त्योहार की खुशियां और कानून का सम्मान साथ-साथ चल सकते हैं।

 जौनपुर : ऐतिहासिक अटाला मस्जिद और शाही ईदगाह में नमाज़ के दौरान अपार भीड़ उमड़ी। नमाज़ के बाद बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई।

गाजीपुर : गहमर, सैदपुर और शहर के विभिन्न हिस्सों में नमाज़ शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुई। प्रशासन की मुस्तैदी साफ दिखी।

आजमगढ़ : मुबारकपुर और शहर की प्रमुख मस्जिदों में हजारों नमाज़ियों ने एक साथ इबादत की। बच्चों में उत्साह देखते ही बन रहा था।

मऊ और भदोही : कारपेट सीटी भदोही में ईद की खरीदारी का असर नमाज़ के बाद भी जारी रहा। मऊ में भी हर गली मोहल्ला उत्सव में डूबा नजर आया।

मिर्जापुर में इमामबाड़ा स्थित ईदगाह में ईद की नमाज अदा की गई। बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की और एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी।

दुआओं में देश, समाज और इंसानियत

ईद की नमाज़ सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश भी है। उलेमा ने अपने खुत्बों में देश की तरक्की, समाज में शांति और आपसी भाईचारे की दुआ कराई। साथ ही, ज़कात और फितरा के माध्यम से गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश भी दिया गयाताकि खुशियां हर घर तक पहुंचे।

मिठास में घुला अपनापन

ईद की पहचान सिर्फ नमाज़ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसके बाद की खुशियों में भी झलकती है। घर-घर सेवइयां, शीरखुरमा और तरह-तरह के पकवान बने। रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां जाने का सिलसिला शुरू हुआ, और हर मुलाकात में मिठास घुली रही। बच्चों को मिलीईदीने इस खुशी को और खास बना दिया।

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