Saturday, 25 April 2026

काशी की बेटियों की गूंज : ‘नारी शक्ति’ की स्कूटी रैली से पीएम मोदी के स्वागत का शंखनाद

काशी की बेटियों की गूंज : ‘नारी शक्ति की स्कूटी रैली से पीएम मोदी के स्वागत का शंखनाद 

सिगरा से लहुराबीर तक सैकड़ों महिलाओं का शक्ति प्रदर्शन | नारी शक्ति वंदन बिल के समर्थन में दिखा उत्साह | 28 को पीएम के स्वागत को लेकर माहौल गरमाया

सुरेश गांधी

वाराणसी. काशी की सड़कों पर शनिवार को ‘नारी शक्ति का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी महानगर महिला मोर्चा के नेतृत्व में सिगरा से लहुराबीर तक विशाल स्कूटी रैली निकाली गई। यह रैली न सिर्फ नारी शक्ति वंदन बिल के समर्थन में थी, बल्कि आगामी 28 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित काशी आगमन के भव्य स्वागत का आगाज भी साबित हुई। 

भीषण गर्मी के बावजूद दोपहर बाद से ही महिलाएं कार्यक्रम स्थल पर जुटने लगीं। हाथों में तिरंगा और दिलों में उत्साह लिए महिलाओं ने “भारत माता की जय, “वंदे मातरम, “विश्वनाथ की नगरी में मोदी जी का स्वागत है और “नारी का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान जैसे गगनभेदी नारों से माहौल को देशभक्ति और ऊर्जा से भर दिया। रैली का शुभारंभ सिगरा स्थित तिलक प्रतिमा से हुआ, जहां भाजपा महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य भावना सिंह ने हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना किया। इसके बाद स्कूटी पर सवार सैकड़ों महिलाओं का काफिला सिगरा, आईपी मॉल, मलदहिया चौराहा होते हुए लहुराबीर स्थित आजाद पार्क तक पहुंचा, जहां रैली का समापन हुआ।

इस अवसर पर महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने कहा कि “काशी की बहनें हमेशा प्रधानमंत्री के विजन के साथ खड़ी रही हैं। आज की यह रैली इस बात का स्पष्ट संकेत है कि काशी अपने प्रिय नेता के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। रैली में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में समाजसेवी महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही, जिससे यह आयोजन केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक बन गया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जया शुक्ला, कुसुम सिंह पटेल, साधना वेदांती, निर्मला सिंह पटेल, डॉ. रचना अग्रवाल, गीता शास्त्री, पूजा दीक्षित, अनीशा शाही, मुमताज बानो, गौरी यादव, शकुंतला देवी, निशि तिवारी, सुमन यादव, संध्या विश्वकर्मा, इशा प्रजापति सहित सैकड़ों महिलाएं उपस्थित रहीं। काशी में यह स्कूटी रैली केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक परिदृश्य में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और राजनीतिक जागरूकता का सशक्त संकेत है। प्रधानमंत्री के दौरे से पहले जिस तरह नारी शक्ति सड़कों पर उतरी है, उसने स्पष्ट कर दिया है कि काशी में स्वागत अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि जन-उत्सव का रूप ले चुका है।

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