हरित क्रांति का संकल्प: संकट मोचन से उठी पर्यावरण बचाने की हुंकार
विश्व पर्यावरण
दिवस
की
पूर्व
संध्या
पर
महंत
प्रो.
विश्वम्भरनाथ
मिश्र
ने
किया
वृहद
वृक्षारोपण,
छात्रों
और
समाज
को
दिया
प्रकृति
संरक्षण
का
संदेश
सुरेश गांधी
वाराणसी। बढ़ते तापमान, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय संकट के बीच काशी से हरित क्रांति की एक मजबूत पहल सामने आई। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर संकट मोचन फाउंडेशन और मदर्स फॉर मदर के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को शहर में वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। अभियान का शुभारंभ संकट मोचन मंदिर के महंत एवं संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने पौधरोपण कर किया। उन्होंने कहा कि पेड़ लगाना आज केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व को बचाने की आवश्यकता बन चुका है।
अभियान के तहत नगवा
स्थित तुलसी विद्या निकेतन (टीवीएन) परिसर और संकट मोचन
मंदिर परिसर में विभिन्न प्रजातियों
के छायादार, फलदार और औषधीय पौधे
लगाए गए। कार्यक्रम में
छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं
ने बढ़-चढ़कर भाग
लेते हुए पर्यावरण संरक्षण
का संकल्प लिया। महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ
मिश्र ने कहा कि
जिस गति से पृथ्वी
का तापमान बढ़ रहा है,
उससे भविष्य की पीढ़ियों के
सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती
हैं। ऐसे में वृक्षारोपण
ही प्रकृति के संतुलन को
बनाए रखने का सबसे
प्रभावी माध्यम है। उन्होंने छात्रों
से आह्वान किया कि वे
केवल पौधे लगाएं ही
नहीं, बल्कि उनकी देखभाल की
जिम्मेदारी भी निभाएं।
कार्यक्रम में पूर्व आईआईटी-बीएचयू निदेशक प्रो. एस.एन. उपाध्याय,
बीएचयू के प्रो. एन.के. दुबे, अदिति
मिश्रा, सुमेधा मिश्रा, तुलसी विद्या निकेतन के प्रधानाचार्य एस.एन. श्रीवास्तव सहित
अनेक शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी
उपस्थित रहे। विद्यालय के
छात्रों ने भी पर्यावरण
संरक्षण से जुड़े संदेशों
के माध्यम से जागरूकता का
संकल्प दोहराया। आयोजकों ने कहा कि
आज लगाए गए पौधे
आने वाले वर्षों में
स्वच्छ हवा, हरियाली और
स्वस्थ जीवन का आधार
बनेंगे। अभियान के माध्यम से
समाज को यह संदेश
दिया गया कि पर्यावरण
संरक्षण केवल सरकार की
जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का
कर्तव्य है। काशी से
शुरू हुई यह हरित
पहल आने वाले दिनों
में व्यापक जनभागीदारी का आधार बनेगी।


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