Friday, 26 June 2026

अब 'जय जगन्नाथ' से गूंजेगी काशी…!

अब 'जय जगन्नाथ' से गूंजेगी काशी…!

22 दिनों तक शिव की नगरी बनेगी महाप्रभु की कर्मभूमि, 236 वर्ष पुरानी रथयात्रा परंपरा का शुभारंभ 29 जून से; लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत को तैयार शहर

सुरेश गांधी

वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी एक बार फिर भगवान जगन्नाथ की भक्ति में डूबने जा रही है। सदियों से चली रही आस्था, परंपरा और लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम 29 जून से शुरू होगा, जब भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दिव्य विग्रहों का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महास्नान एवं जलाभिषेक किया जाएगा। इसी के साथ 236 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रथयात्रा परंपरा और 22 दिनों तक चलने वाले रथयात्रा मेले का विधिवत शुभारंभ हो जाएगा। यह महोत्सव 20 जुलाई तक चलेगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु भगवान के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन कर पुण्य अर्जित करेंगे।

जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह ने शुक्रवार को महमूरगंज स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि इस वर्ष भी रथयात्रा महोत्सव को भव्य और दिव्य स्वरूप देने की सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिर परिसर से लेकर रथयात्रा मेला क्षेत्र तक धार्मिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा संबंधी सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा हो।

उन्होंने बताया कि काशी में भगवान जगन्नाथ के दिव्य विग्रह की स्थापना वर्ष 1790 में पुरी के मुख्य पुजारी पंडित स्वामी तेजोनिधि ब्रह्मचारी ने की थी। इसके बाद वर्ष 1802 से शापुरी राजवंश द्वारा निरंतर इस ऐतिहासिक रथयात्रा मेले का आयोजन किया जा रहा है। यही कारण है कि काशी की यह रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली विरासत का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।

महास्नान से शुरू होगी उत्सव की पावन यात्रा

ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर 29 जून की सुबह 5:11 बजे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का भव्य स्नान-यात्रा एवं जलाभिषेक होगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और घंटों की गूंज के बीच भगवान का महास्नान कराया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को भी स्वयं भगवान का जलाभिषेक करने का दुर्लभ अवसर मिलेगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान का जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं।

14 दिनों तक 'बीमार' रहेंगे भगवान, औषधीय काढ़े का मिलेगा प्रसाद

महास्नान के बाद 30 जून से 14 जुलाई तक भगवान 'अनवसर काल' (अंशातवास) में रहेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार अत्यधिक स्नान के कारण भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और विश्राम करते हैं। इस अवधि में मंदिर के कपाट सामान्य दर्शन के लिए बंद रहेंगे तथा भगवान के स्वास्थ्य लाभ के लिए पारंपरिक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से विशेष औषधीय काढ़ा तैयार किया जाएगा। यह काढ़ा प्रतिदिन श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाएगा। इसमें अनेक दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों का मिश्रण होता है। वर्षों से यह मान्यता चली रही है कि श्रद्धापूर्वक इस प्रसाद का सेवन करने से अनेक रोगों से राहत मिलती है। यही कारण है कि इस अवधि में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु केवल इस प्रसाद को ग्रहण करने के लिए मंदिर पहुंचते हैं।

14 जुलाई को होंगे नवयौवन दर्शन

लगातार 14 दिनों के विश्राम और उपचार के बाद 14 जुलाई को भगवान जगन्नाथ भक्तों को 'नवयौवन स्वरूप' में दर्शन देंगे। इस दिन भगवान के दिव्य और आकर्षक श्रृंगार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इस अवसर पर भगवान को परवल के रस का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा, जिसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि बीमारी से पूर्ण स्वस्थ होने के बाद भगवान का यह नवयौवन दर्शन जीवन में नई ऊर्जा, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

15 जुलाई को निकलेगी भव्य डोली यात्रा

नवयौवन दर्शन के अगले दिन 15 जुलाई को दोपहर तीन बजे भगवान की डोली को आकर्षक फूलों और पारंपरिक सजावट से अलंकृत किया जाएगा। शाम चार बजे भगवान की भव्य डोली यात्रा अस्सी चौराहा स्थित मंदिर से प्रारंभ होगी। यह यात्रा दुर्गाकुंड, नवाबगंज, खोजवां और शंकुलधारा होते हुए पंडित बेनीराम बाग स्थित रथयात्रा क्षेत्र पहुंचेगी। पूरे मार्ग पर श्रद्धालु पुष्पवर्षा, आरती और भजन-कीर्तन के साथ भगवान का स्वागत करेंगे। काशी की गलियां "जय जगन्नाथ" के उद्घोष से गूंज उठेंगी और पूरा वातावरण भक् जाएगा।

आस्था, संस्कृति और लोकजीवन का अद्भुत उत्सव

काशी की रथयात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह शहर की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। 22 दिनों तक चलने वाला यह ऐतिहासिक मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ लोक संस्कृति, पारंपरिक व्यापार, हस्तशिल्प, लोककलाओं और सामाजिक समरसता का भी अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालु भगवान के दर्शन के साथ इस ऐतिहासिक मेले का आनंद भी लेते हैं। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा और यातायात सहित सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। काशी अब एक बार फिर उस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है, जब शिव की नगरी में भगवान जगन्नाथ का रथ भक्तों के प्रेम, श्रद्धा और जयघोष के बीच आगे बढ़ेगा। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा, अटूट आस्था और भारतीय संस्कृति की जीवंत विरासत का भव्य उत्सव है।

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