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Wednesday, 14 October 2026

त्योहार की थाली पर महंगाई का वार, मिठाई पर भी अब तारीख का पहरा!

त्योहार की थाली पर महंगाई का वार, मिठाई पर भी अब तारीख का पहरा!

त्योहार की मिठास महंगाई के बोझ तले दबनी नहीं चाहिए और न ही चमकदार दुकानें बासी मिठाई की आड़ बननी चाहिए। सरकार और बाजार की असली परीक्षा यही है—आम आदमी की थाली तक उचित कीमत पर सुरक्षित भोजन पहुंचे। आखिर त्योहार खुशियां खरीदने का अवसर है, महंगाई के आगे बेबस होने या सेहत दांव पर लगाने की मजबूरी नहीं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल क्या प्याज ने रुलाया, अदरक-लहसुन ने बिगाड़ा रसोई का जायका; क्या 23 महीने के शिखर पर खुदरा महंगाई पहुंच गयी है?; क्या खाने-पीने की महंगाई दर 7.74% पर पहुंच गयी है?; और इन सबके बीच अब 15 अक्टूबर से मिठाइयों पर ‘यूज बाय डेट’ अनिवार्य है

सुरेश गांधी

त्योहार खुशियां बांटने, अपनों के साथ मिठास घोलने और घर-आंगन को रौनक से भरने के लिए आते हैं। लेकिन इस बार बाजार का मिजाज कुछ ऐसा है कि खुशियों की खरीदारी से पहले जेब का हिसाब लगाना पड़ रहा है। रसोई में प्याज के दाम आंसू निकाल रहे हैं, अदरक-लहसुन का तड़का महंगा हो गया है और मिठाइयों की खरीदारी में अब ताजगी की तारीख पर भी नजर रखनी होगी। एक तरफ महंगाई ने त्योहार के बजट की कमर तोड़ी है, तो दूसरी तरफ मिठाई की दुकान पर रखे हर पकवान की उपयोग अवधि बताने की जिम्मेदारी तय होने जा रही है। यानी इस बार त्योहार में सवाल सिर्फ यह नहीं कि क्या खरीदें, बल्कि यह भी कि कितने में खरीदें और खरीदी गई मिठाई कब तक खाने योग्य है।

महंगाई 23 महीने के शिखर पर, रसोई से राहत गायब

सितंबर के महंगाई आंकड़ों ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। खुदरा महंगाई दर अगस्त के 4.83 प्रतिशत से उछलकर सितंबर में 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह पिछले 23 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। सबसे ज्यादा मार खाने-पीने की चीजों पर पड़ी है, जिनकी महंगाई दर 7.74 प्रतिशत दर्ज की गई। इसका सीधा अर्थ है कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परिवारों को अपनी जेब पहले से ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। महंगाई का असली चेहरा तब सामने आता है, जब महीने का राशन खरीदने के बाद हाथ में बचने वाली रकम घटने लगती है। त्योहार में मिठाई, मेवे, फल, सब्जियां और दूसरे जरूरी सामान खरीदने हों तो सीमित आमदनी वाले परिवारों के सामने खर्च घटाने की मजबूरी खड़ी हो जाती है। खुशियां मनाने की इच्छा अपनी जगह है, लेकिन खाली होती जेब हर इच्छा को पूरा करने से पहले हिसाब मांगती है।

प्याज की महंगाई 108% पार, अदरक-लहसुन भी महंगे

रसोई का जायका बिगाड़ने वाली सबसे बड़ी चोट प्याज की कीमतों से लगी है। सितंबर में प्याज की सालाना महंगाई दर 108.09 प्रतिशत दर्ज की गई, जो अगस्त के 48.78 प्रतिशत से कहीं अधिक है। अदरक की महंगाई दर 62.85 प्रतिशत और लहसुन की 54.62 प्रतिशत तक पहुंच गई। नींबू भी 36.41 प्रतिशत की सालाना महंगाई के साथ आम आदमी की पहुंच पर दबाव डाल रहा है। इन आंकड़ों के पीछे केवल बाजार में बढ़ती कीमतों की कहानी नहीं, बल्कि घरों के बदलते बजट की हकीकत छिपी है। सब्जी खरीदते समय मात्रा कम करना, जरूरी सामान की जगह सस्ता विकल्प तलाशना और दूसरे खर्चों में कटौती करना अनेक परिवारों की मजबूरी बन सकता है। हालांकि, आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 11.50 प्रतिशत और टमाटर में 8.62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन दो सब्जियों की सस्ती कीमतें प्याज, अदरक, लहसुन और नींबू की महंगाई से पैदा हुए दबाव को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकतीं।

गांवों पर महंगाई की चोट ज्यादा

महंगाई का दबाव शहरों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में अधिक दिखाई दिया। सितंबर में ग्रामीण खुदरा महंगाई दर 6.08 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.88 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण खाद्य महंगाई 8.06 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 7.18 प्रतिशत रही। इस अंतर का असर उन परिवारों पर ज्यादा पड़ सकता है, जिनकी आमदनी सीमित है और जिनके लिए भोजन तथा दूसरी बुनियादी जरूरतों पर होने वाला खर्च टालना संभव नहीं है। घर से जुड़े खर्च और कपड़े-जूतों की महंगाई में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में चुनौती सिर्फ त्योहार मनाने की नहीं, बल्कि पूरे महीने का बजट संभालने की है। कच्चे तेल की ऊंची वैश्विक कीमतें और रुपये की कमजोरी भी चिंता बढ़ाने वाले कारक हैं। महंगा ईंधन माल ढुलाई की लागत बढ़ा सकता है, जिसका असर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। हालांकि, आने वाले महीनों में महंगाई किस दिशा में जाएगी, यह खाद्य वस्तुओं की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

मिठाई खरीदने से पहले देखिएगा ‘यूज बाय डेट’

महंगाई के बीच मिठाई खरीदने जा रहे लोगों के लिए एक और अहम बदलाव होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर 2026 से मिठाइयों की उपयोग की अंतिम तिथि यानी ‘यूज बाय डेट’ प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने 27 सितंबर को इस संबंध में आदेश जारी किया था। खास बात यह है कि व्यवस्था सिर्फ पैक्ड मिठाइयों तक सीमित नहीं रहेगी। दुकानों पर खुले में बिक्री के लिए सजाकर रखी गई मिठाइयों पर भी उपयोग की अंतिम तिथि की जानकारी ग्राहकों को स्पष्ट रूप से देनी होगी। यह जानकारी ऐसी जगह प्रदर्शित करनी होगी, जहां खरीदार आसानी से उसे देख सकें। मिठाई की उपयोग अवधि उसकी प्रकृति, सामग्री, निर्माण प्रक्रिया और भंडारण की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। कुछ मिठाइयां एक दिन में इस्तेमाल करने योग्य होती हैं, जबकि कुछ की अवधि 30 दिन तक हो सकती है। इसलिए सभी मिठाइयों के लिए एक ही समय-सीमा तय नहीं होगी। दुकानदारों को अपने उत्पाद के अनुरूप अवधि निर्धारित करनी होगी और घोषित समय तक उसकी गुणवत्ता तथा खाद्य सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इस व्यवस्था से ग्राहकों को खरीदारी के समय अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। लंबे समय से रखी मिठाई की पहचान करने और उसकी उपयोग अवधि को लेकर सवाल पूछने का आधार भी मिलेगा। हालांकि, तारीख प्रदर्शित करना तभी सार्थक होगा, जब दुकानदार सही जानकारी दें और खाद्य सुरक्षा मानकों का ईमानदारी से पालन करें।

अगस्त बनाम सितंबर: महंगाई ने पकड़ी रफ्तार

महंगाई का पैमाना           अगस्त 2026        सितंबर 2026

खुदरा महंगाई                       4.83%                    5.54%

खाद्य महंगाई                         5.97%                    7.74%

ग्रामीण खुदरा महंगाई         5.24%                    6.08%

शहरी खुदरा महंगाई           4.31%                    4.88%

ग्रामीण खाद्य महंगाई           6.17%                    8.06%

शहरी खाद्य महंगाई             5.64%                    7.18%

एक महीने में खुदरा महंगाई 0.71 प्रतिशत अंक और खाद्य महंगाई 1.77 प्रतिशत अंक बढ़ी। ग्रामीण परिवारों पर महंगाई का दबाव शहरों से अधिक रहा।

प्याज ने रुलाया, लहसुन ने बढ़ाई जलन

प्रमुख खाद्य वस्तुओं की सालाना महंगाई

वस्तु        अगस्त                    सितंबर

प्याज      48.78%                  108.09%

अदरक  73.82%                  62.85%

लहसुन   43.60%                  54.62%

नींबू         15.15%                  36.41%

आलू       -13.15% -             11.50%

टमाटर   -31.09% -             8.62%

सबसे बड़ा झटका : प्याज की सालाना महंगाई दर एक महीने में 48.78 प्रतिशत से बढ़कर 108.09 प्रतिशत हो गई। अदरक की महंगाई दर में कुछ कमी आई, लेकिन लहसुन और नींबू की महंगाई बढ़ी। आलू और टमाटर की कीमतें पिछले साल के मुकाबले नीचे रहीं।

15 अक्टूबर से मिठाई खरीदने के नियम में बदलाव

खुली मिठाई: बिक्री के लिए प्रदर्शित मिठाई की उपयोग की अंतिम तिथि बतानी होगी।

पैक्ड मिठाई: इस पर भी नई व्यवस्था लागू होगी।

जानकारी कहां मिलेगी: ऐसी जगह, जहां ग्राहक आसानी से देख सकें।

उपयोग अवधि: मिठाई की प्रकृति और भंडारण के अनुसार अलग-अलग होगी।

जिम्मेदारी किसकी: मिठाई विक्रेता को घोषित अवधि के दौरान गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा बनाए रखनी होगी।

खरीदार के लिए सलाह: मिठाई खरीदते समय उपयोग की अंतिम तिथि पूछें। केवल रंग, सजावट या खुशबू देखकर उसकी ताजगी का फैसला न करें।

लागू होने की तारीख: 15 अक्टूबर 2026।

गांव की थाली पर शहर से ज्यादा दबाव

तुलना    ग्रामीण क्षेत्र          शहरी क्षेत्र

खुदरा महंगाई       6.08%    4.88%

खाद्य महंगाई         8.06%    7.18%

अंतर समझिए: ग्रामीण खुदरा महंगाई शहरी दर से 1.20 प्रतिशत अंक अधिक रही। खाने-पीने की वस्तुओं में यह अंतर 0.88 प्रतिशत अंक का था।क्यों अहम है? जब आमदनी सीमित हो और भोजन पर खर्च बढ़ जाए, तो परिवारों को दूसरी जरूरतों में कटौती करनी पड़ सकती है। यही वजह है कि महंगाई का राष्ट्रीय औसत हर परिवार की वास्तविक परेशानी को पूरी तरह नहीं बताता।

हर मिठाई की उम्र एक जैसी नहीं!

एक दिन से 30 दिन तक हो सकती है उपयोग अवधि. मिठाई कितने समय तक खाने योग्य रहेगी, यह कई बातों पर निर्भर करता है : इस्तेमाल की गई सामग्री। मिठाई बनाने की प्रक्रिया। नमी और तापमान। भंडारण की परिस्थितियां। उत्पाद की प्रकृति। याद रखें: सभी मिठाइयों की उपयोग अवधि एक जैसी नहीं होती। किसी एक मिठाई की अवधि देखकर दूसरी मिठाई के लिए वही समय मान लेना उचित नहीं है।  ग्राहक का सवाल: यह मिठाई कब तक खाने योग्य है? दुकानदार की जिम्मेदारी: स्पष्ट जानकारी देना और घोषित अवधि के दौरान खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना। उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली नई व्यवस्था के संदर्भ में।

जेब बचानी है तो खरीदारी में बरतें सावधानी

1. पहले बजट तय करें: मिठाई, फल, सब्जी और राशन के लिए अलग-अलग राशि निर्धारित करें।

2. जरूरत के हिसाब से खरीदें: केवल छूट या आकर्षक सजावट देखकर अधिक सामान न लें।

3. कीमत की तुलना करें: अलग-अलग दुकानों पर गुणवत्ता और कीमत की तुलना करें।

4. मिठाई की तारीख पूछें: उपयोग की अंतिम तिथि स्पष्ट न हो तो दुकानदार से जानकारी लें।

5. सुरक्षित भंडारण करें: मिठाई को उसकी प्रकृति के अनुरूप रखें और निर्धारित अवधि के बाद सेवन न करें।

6. बिल लें: खरीदारी का बिल शिकायत या विवाद की स्थिति में उपयोगी हो सकता है।

त्योहार में दोहरी परीक्षा

एक तरफ महंगाई का चाबुक, दूसरी तरफ खाद्य सुरक्षा की चुनौती। आम आदमी को ऐसी व्यवस्था चाहिए, जहां त्योहार की खरीदारी उसकी जेब पर असहनीय बोझ न बने और मिठाई की चमक उसकी सेहत के लिए खतरा भी न बने। दुकानदारों की जवाबदेही और बाजार की पारदर्शिता ही त्योहार की असली मिठास बचा सकती है।

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