सुधार जनता के पैसे से, मुनाफा निजी घरानों को क्यों?
अरबों खर्च फिर भी 6500 करोड़ में बिक्री? नजीकरण नहीं चलेगा
275वें दिन भी बिजलीकर्मी
सड़कों
पर,
निजीकरण
पर
आर-पार
की
लड़ाई
एक लाख
करोड़
की
परिसंपत्तियां
6500 करोड़
में
बेचने
का
आरोप,
प्रांतव्यापी
विरोध
तेज
आरडीएसएस और
बिजनेस
प्लान
पर
16 हजार
करोड़
से
ज्यादा
खर्च,
फिर
भी
निजी
कंपनियों
को
सौंपने
की
तैयारी
सुरेश गांधी
वाराणसी. विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर
बनारस में बिजलीकर्मियों ने
लगातार 275वें दिन निजीकरण
के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कहा कि
जब अरबों रुपये सुधार योजनाओं पर खर्च हो
चुके हैं, तो पूर्वांचल
और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को मात्र
6500 करोड़ रुपये की रिजर्व प्राइस
पर बेचने का औचित्य नहीं
है।
बिजलीकर्मियों का आरोप है
कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन
निजी कंपनियों से मिलीभगत कर
रहा है। करीब एक
लाख करोड़ रुपये की
परिसंपत्तियों को कौड़ियों के
भाव बेचने की साजिश। बिजनेस
प्लान और आरडीएसएस स्कीम
से निगमों में हजारों करोड़
रुपये पहले ही लगाए
जा चुके हैं। पूर्वांचल
में 3842 करोड़ और दक्षिणांचल
में 3247 करोड़ रुपये आरडीएसएस
के तहत खर्च हो
रहे हैं। बिजनेस प्लान
के तहत पूर्वांचल में
824.65 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी
गई है।
कर्मचारियों ने सवाल किया,
जब सुधार पर इतनी धनराशि
खर्च हो रही है,
तो फिर इतनी कम
रिजर्व प्राइस पर निगमों को
निजी घरानों को क्यों बेचा
जा रहा है? यह
कौन सा सुधार है
जिसमें जनता के पैसों
से व्यवस्था दुरुस्त कर निजी कंपनियों
को सौंप दिया जाए?
सभा को ई. मायाशंकर
तिवारी, ई. ओ.पी.
सिंह, ई. नीरज बिंद,
अंकुर पांडेय, धर्मेंद्र यादव, अलका कुमारी, पूजा
कुमारी, सत्यम सिंह, पंकज यादव, रोहित
कुमार, सन्नी कुमार, प्रशांत कुमार, कृष्णा सिंह, विवेक कुमार और संजय गौतम
सहित कई नेताओं ने
संबोधित किया।
संघर्ष के 275 दिन
शुरुआत
: नवंबर 2023 से बिजली कर्मियों
का आंदोलन जारी
मांग
: पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत
निगमों का निजीकरण रोकना
आरोप
: एक लाख करोड़ की
परिसंपत्तियों को 6500 करोड़ में बेचने
की साजिश
नारा
: सरकारी धन से सुधार,
निजी घरानों को उपहार नहीं
चलेगा
अब
तक : वाराणसी समेत पूरे प्रदेश
में प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
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