तप-त्याग की देवी ब्रह्मचारिणी के जयघोष से गूंजा काशी का आकाश
नवरात्रि के
दूसरे
दिन
घाटों
से
मंदिरों
तक
उमड़ी
भक्ति
की
सरिता,
संयम
और
साहस
का
संदेश
देती
ब्रह्मचारिणी
मां
की
आराधना
में
डूबे
श्रद्धालु
सुरेश गांधी
वाराणसी. काशी की गलियों में आज भोर की पहली किरण के साथ ही घंटों-घड़ियालों की अनुगूंज गूंज उठी। गंगा की धार पर जैसे सुनहरी आभा उतर आई हो, हर घाट, हर मंदिर देवी के व्रतियों की आस्था से आलोकित दिखा।
शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, और आज संपूर्ण नगर उसी तप और साधना की छटा में डूबा रहा।सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता माता अन्नपूर्णा, दुर्गाकुंड, पंचगंगा, दशाश्वमेध अस्सी के घाटों पर और संकटमोचन मंदिर की ओर उमड़ा। कन्याओं और व्रतधारियों ने स्वच्छ वस्त्र धारण कर मां को श्वेत पुष्प अर्पित किए।
कहीं शंखनाद
की मधुर ध्वनि, तो
कहीं वेद-मंत्रों की
अनुगूंज, लगता था मानो
काशी का कण-कण
साधना के पारस से
दीप्त हो उठा हो।
मां ब्रह्मचारिणी की आराधना तप,
संयम और आत्मबल का
प्रतीक है।
पुराणों के अनुसार यही वह रूप है जिसने कठिन तपस्या कर शिव को पति रूप में प्राप्त किया।
काशी के पंडितों ने आज यही संदेश दिया कि इस दिन का ध्यान साधक के भीतर धैर्य और संकल्प को दृढ़ करता है। दोपहर तक दशाश्वमेध घाट पर विशेष गंगा आरती का आयोजन हुआ।
दीपों की कतारें जलधारा पर तैरतीं तो लग रहा था मानो आकाश के तारे पृथ्वी पर उतर आए हों। घर-घर दीपक की ज्योति, उपवासियों के मंत्रोच्चार और प्रसाद के साथ पूरा नगर भक्ति और सौम्यता की अद्भुत सुगंध से महकता रहा। रात्रि में चंद्रमा की कोमल रौशनी और गंगा की नीरवता के बीच, काशी के हर कोने में एक ही संदेश गूंजता रहा, तप, संयम और अडिग श्रद्धा से ही जीवन में सच्ची सिद्धि प्राप्त होती है। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से यह दिवस काशीवासियों के हृदय में आत्मबल और उजास का अमिट दीप जलाकर गया।विंध्य धाम में भी उमड़े श्रद्धालु
विंध्याचल धाम में चल रहे शारदीय नवरात्र मेला के दूसरे दिन मंगलवार को आदिशक्ति जगत कल्याणी के जयकारे से संपूर्ण विंध्य दरबार गुंजायमान हो उठा। माता की एक झलक पाने के लिए भक्त बेताब नजर आए।
गलियां भक्तों से पटी रहीं। वहीं घाटों पर स्नान करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। देवी धाम में दर्शन पूजन करने के बाद आस्थावानों ने अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान महाकाली और अष्टभुजी देवी धाम में शीश नवाकर सुख समृद्धि की कामना की।
माता की पुष्प और आभूषण से की गई दिव्य श्रृंगार की भव्यता देख श्रद्धालु विभोर हो उठे। मां का दर्शन पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में आस्थावान मंदिर के गुंबद का परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने। देवी मंदिरों में दर्शन पूजन करने के उपरांत नर नारियों ने विंध्य की गलियों में सजी तरह-तरह की दुकानों पर पहुंचकर अपने-अपने जरूरतों की वस्तुओं की जमकर खरीदारी
भी की। माला- फूल प्रसाद और नारियल चुनरी की दुकानों पर भक्तों की भारी भीड़ को देखकर दुकानदार भी गदगद नजर आए। विंध्याचल दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की तरफ से चाक-चौबंद इंतजाम कराए गए थे। वहीं श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष और मंत्री सहित समस्त पदाधिकारी और सदस्य दूर- दराज से आए श्रद्धालुओं की सेवा में तल्लीन नजर आए।




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