कूरियर कॉल, एक डायल कोड… और हैक हो गया पत्रकार का व्हाट्सएप
वाराणसी में
सामने
आया
साइबर
ठगी
का
नया
तरीका
| कॉल
फॉरवर्डिंग
के
जरिए
कुछ
ही
मिनटों
में
अकाउंट
पर
कब्जा
| जागरूकता
से
टला
बड़ा
नुकसान
सुरेश गांधी
वाराणसी. डिजिटल युग में मोबाइल
फोन जितना सुविधा का साधन बन
चुका है, उतना ही
साइबर अपराधियों के लिए आसान
हथियार भी। वाराणसी में
हाल ही में सामने
आई एक घटना ने
साइबर ठगी के एक
नए और खतरनाक तरीके
को उजागर किया है, जिसमें
कूरियर डिलीवरी का बहाना बनाकर
लोगों से एक विशेष
डायल कोड डलवाया जाता
है और कुछ ही
मिनटों में उनका व्हाट्सएप
अकाउंट हैक कर लिया
जाता है। यह घटना वरिष्ठ पत्रकार
सुरेश गांधी के साथ घटी,
जिसने यह साफ कर
दिया कि साइबर अपराधी
अब तकनीकी हैकिंग से ज्यादा लोगों
की सहजता और तकनीकी जानकारी
की कमी का फायदा
उठा रहे हैं।
कूरियर का फोन और शुरू हुआ जाल
गुरुवार की शाम लगभग
पांच बजे एक अज्ञात
नंबर से फोन आया।
कॉल करने वाले ने
खुद को नामी कूरियर
कंपनी ब्लू डार्ट का
कर्मचारी बताया और कहा कि
आपके नाम से एक
पार्सल आया था, लेकिन
डिलीवरी के समय आप
घर पर नहीं मिले।
चौंकाने वाली बात यह
थी कि कॉल करने
वाले का नंबर ट्रूकॉलर
पर भी ब्लू डार्ट
के नाम से ही
दिखाई दे रहा था,
जिससे उसकी बात पर
भरोसा करना स्वाभाविक लगा।
कॉलर ने कहा कि
पार्सल की डिलीवरी प्रक्रिया
पूरी करने के लिए
मोबाइल में एक छोटा-सा कोड डायल
करना होगा। उसने एक मैसेज
भेजा और उसमें लिखे
कोड को डायल करने
के लिए कहा।
वह कोड था — *21*8102723870#
सामान्य व्यक्ति के लिए यह
केवल एक तकनीकी प्रक्रिया
जैसा लगता है, लेकिन
वास्तव में यही वह
क्षण था जब साइबर
अपराधियों का खेल शुरू
हो गया।
कॉल फॉरवर्डिंग से हुआ खेल
परिचितों को भेजे गए इमरजेंसी संदेश
क्योंकि
संदेश परिचित व्यक्ति के नंबर से
जा रहा था, इसलिए
कई लोग इसे सच
मान बैठे। हालांकि एक करीबी परिचित
को संदेश संदिग्ध लगा और उसने
फोन कर स्थिति की
जानकारी ली। तभी यह
स्पष्ट हुआ कि व्हाट्सएप
अकाउंट हैक हो चुका
है।
तुरंत दर्ज कराई गई शिकायत
क्यों खतरनाक है यह तरीका
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह
तरीका इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसमें
अपराधी किसी जटिल हैकिंग
सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं
करते। वे केवल मोबाइल
नेटवर्क की एक सामान्य
सुविधा—कॉल फॉरवर्डिंग—का
दुरुपयोग करते हैं। लोगों को
यह जानकारी नहीं होती कि
21 जैसे डायल कोड उनके
फोन की कॉल व्यवस्था
को बदल सकते हैं।
अपराधी इसी अनभिज्ञता का
फायदा उठाते हैं।
छोटे शहर बन रहे आसान निशाना
सावधानी : इन बातों का रखें ध्यान
▪ किसी भी अनजान
व्यक्ति के कहने पर
मोबाइल में कोई कोड
डायल न करें।
▪ ओटीपी या वेरिफिकेशन कॉल
की जानकारी किसी से साझा
न करें।
▪ संदिग्ध कॉल आने पर
तुरंत फोन काट दें।
▪ व्हाट्सएप में टू-स्टेप
वेरिफिकेशन सक्रिय रखें।
साइबर ठगी की शिकायत ऐसे करें
▪ वेबसाइट:
www.cybercrime.gov.in�
यहां शिकायत दर्ज
कराने पर पुलिस और
साइबर विशेषज्ञ मामले की जांच करते
हैं।
जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा










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