काशी बनी योग की राजधानी, घाट से लेकर गलियों और ग्रामीण अंचलों तक एक साथ गूंजा—'करें योग, रहें निरोग'
गंगा तट
पर
साधना,
सड़कों
पर
अनुशासन
और
गांवों
में
स्वास्थ्य
का
संकल्प
सुरेश गांधी
वाराणसी. विश्व की प्राचीनतम जीवंत
नगरी काशी ने एक
बार फिर यह सिद्ध
कर दिया कि योग
उसके लिए केवल एक
दिवस का आयोजन नहीं,
बल्कि जीवन जीने की
शाश्वत पद्धति है। अंतरराष्ट्रीय योग
दिवस के अवसर पर
रविवार को काशी का
ऐसा स्वरूप देखने को मिला, जहां
गंगा के घाटों से
लेकर शहर की सड़कों,
पार्कों, विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, मंदिर परिसरों और गांव-गिरांव
तक हर ओर योग
की एक ही लय
दिखाई दी। ऐसा लगा
मानो पूरी काशी एक
साथ प्राणायाम की लय में
सांस ले रही हो
और स्वस्थ, संतुलित तथा जागरूक समाज
का संकल्प दोहरा रही हो।
शहर की सड़कों
पर भी सुबह का
वातावरण सामान्य दिनों से अलग दिखाई
दिया। जगह-जगह सामाजिक
संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और विभिन्न विभागों
द्वारा योग शिविर आयोजित
किए गए। पुलिस, प्रशासन,
चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, व्यापारियों और कर्मचारियों ने
भी सामूहिक रूप से योग
कर स्वस्थ जीवन का संदेश
दिया। बच्चों में विशेष उत्साह
देखने को मिला। विद्यालयों
में योग के साथ
स्वास्थ्य, अनुशासन और मानसिक संतुलन
पर आधारित गतिविधियां आयोजित की गईं।
काशी का ग्रामीण
अंचल भी इस महाअभियान
में पीछे नहीं रहा।
विकासखंडों, पंचायत भवनों, प्राथमिक विद्यालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्राम सभाओं
में हजारों ग्रामीणों ने योगाभ्यास किया।
खेतों की मेड़ों से
लेकर पंचायत परिसरों तक योग की
गूंज सुनाई दी। ग्रामीण महिलाओं,
स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और युवाओं की
सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश
दिया कि योग अब
केवल शहरों तक सीमित नहीं,
बल्कि गांवों की जीवनशैली का
भी हिस्सा बनता जा रहा
है।
इस बार योग
दिवस का सबसे महत्वपूर्ण
संदेश यह रहा कि
योग अब केवल शारीरिक
व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज के निर्माण
का राष्ट्रीय अभियान बन चुका है।
तनावपूर्ण जीवनशैली, बढ़ती मानसिक चुनौतियों और बदलती दिनचर्या
के बीच योग को
अपनाने की आवश्यकता पहले
से कहीं अधिक महसूस
की जा रही है।
काशी में आयोजित कार्यक्रमों
ने इसी सोच को
जन-जन तक पहुंचाने
का प्रयास किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्षों
पहले वैश्विक मंच पर उठाई
गई योग की पहल
आज विश्वव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप ले
चुकी है। काशी ने
इस अभियान को केवल अपनाया
ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक चेतना
से उसे और अधिक
जीवंत बना दिया है।
यहां योग केवल आसनों
तक सीमित नहीं, बल्कि अध्यात्म, अनुशासन, आत्मसंयम और प्रकृति के
साथ सामंजस्य का माध्यम बनकर
सामने आता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
पर काशी का यह
विराट स्वरूप एक बार फिर
यह संदेश दे गया कि
जब परंपरा और आधुनिकता का
संगम होता है, तब
केवल आयोजन नहीं होते, बल्कि
जनचेतना का नया इतिहास
रचा जाता है। गंगा
के पावन तट से
लेकर गांव की पगडंडियों
तक एक साथ हुआ
योगाभ्यास इस बात का
प्रमाण है कि काशी
आज भी भारतीय संस्कृति
की आत्मा है और योग
उसकी शाश्वत पहचान।
उमड़ा जनसैलाब, हर वर्ग ने लिया स्वस्थ जीवन का संकल्प
मुख्य आयोजन महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मैदान में हुआ, जहां उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा भगवान धन्वंतरि के चित्र पर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रातः छह बजे से प्रशिक्षित योगाचार्यों के निर्देशन में कॉमन योग प्रोटोकॉल के अंतर्गत सामूहिक योगाभ्यास कराया गया। इसके बाद उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री के योग दिवस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा और योग को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार सहित अनेक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षक, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। उधर, नमो घाट पर भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने की। गंगा तट पर उगते सूर्य की स्वर्णिम आभा और वैदिक वातावरण के बीच हजारों लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। कार्यक्रम में आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी सहित अनेक अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। पुलिस लाइन कमिश्नरेट में पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट मोहित अग्रवाल के अगुवाई में समस्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारीगण, पुलिस कर्मी व अन्य स्टाफ ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास किया । योग दिवस का उत्साह केवल शहर तक सीमित नहीं रहा। जनपद की सभी विधानसभा क्षेत्रों में भी व्यापक स्तर पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। उत्तरी विधानसभा में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी विहार, दक्षिणी में नमो घाट, कैंट में निवेदिता शिक्षा निकेतन महमूरगंज, रोहनिया में पारस बालिका इंटर कॉलेज (बीएलडब्ल्यू), सेवापुरी एवं शिवपुर के विकास खंड परिसरों, पिंडरा के नेशनल इंटर कॉलेज तथा अजगरा के अमर शहीद इंटर कॉलेज आयर सहित विभिन्न स्थलों पर हजारों लोगों ने योगाभ्यास किया। इसके अलावा जनपद के सभी प्रमुख घाटों, विकास खंडों, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों, पार्कों, विद्यालयों और ग्राम पंचायतों में भी सामूहिक योग सत्र आयोजित हुए। युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों, बुजुर्गों, स्वयं सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि योग अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है।



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