Saturday, 29 March 2025

बिजली निजीकरण के विरोध में प्रबन्ध निदेशक कार्यालय के समक्ष कर्मचारियों का प्रदर्शन

प्रधानमंत्री से बिजली निजीकरण प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग

बिजली निजीकरण के विरोध में प्रबन्ध निदेशक कार्यालय के समक्ष कर्मचारियों का प्रदर्शन 

आंदोलनकारियों ने पीएम को भेजा हस्ताक्षरित पत्र

बिजली महापंचायत में उमड़ी कर्मचारियों एवं आमजनमानस की भारी भीड़

कहा, दरें 3 गुना तक बढ़ सकती हैं निजी कंपनियां

सुरेश गांधी

वाराणसी। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स तथा विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर शनिवार को भिखारीपुर स्थित प्रबन्ध निदेशक कार्यालय पर बिजली कर्मचारियों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। इस दौरान आयोजित महाविशाल बिजली महा पंचायत में प्रस्ताव पारित कर आंदोलनकारियों ने वाराणसी के सांसद एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हस्ताक्षरित पत्र भेजकर बिजली निजीकरण प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की गई। साथ ही उत्तर प्रदेश की आम जनता के व्यापक हित में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाएं। इस मौके पर हजारों की संख्या में बिजली कर्मचारी और आमजनमानस की भारी भीड़ उमड़ी। 

संघर्ष समिति उप्र के प्रदेश संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक ने निगम के प्रांगण में बिजली महापंचायत करने से रोकने के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का सिर्फ मुख्य द्वार बंद करवा दिया, बल्कि प्रबंध निदेशक ने इस प्रकार अनावश्यक रूप से औद्योगिक अशांति पैदा करने की कोशिश की। संघर्ष समिति ने पूरे संयम और अनुशासन से काम लिया और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्य द्वार पर 3 घंटे तक शांतिपूर्वक बिजली महापंचायत की।

बिजली महापंचायत में पारित मुख्य प्रस्ताव में कहा गया है कि
बिजली
का निजीकरण ही किसानों और गरीब बिजली उपभोक्ताओं के हक में है और ही बिजली कर्मचारियों के हित में। प्रस्ताव में कहा गया है कि बिजली के निजीकरण से बिजली की दरों में कम से कम तीन गुना की वृद्धि होगी। मुंबई में निजी क्षेत्र के चलते घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें 17 से 18 रुपए प्रति यूनिट तक है जबकि उत्तर प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की अधिकतम दरें भी 06.50 रुपए प्रति यूनिट है। इसी प्रकार निजी क्षेत्र में कोलकाता में 12 रुपए प्रति यूनिट और दिल्ली में 10 रुपए प्रति यूनिट बिजली की दरें हैं। उत्तर प्रदेश में ही ग्रेटर नोएडा और आगरा में निजी कंपनी है जो गरीबों को ट्यूबवेल के लिए मुक्त बिजली नहीं दे रही है।

समिति के संयोजक पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि पूर्वांचल बिजली कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का विरोध जारी है। वाराणसी में आयोजित बिजली महापंचायत में हजारों कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। महापंचायत में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण को रोकने की मांग की गई। संघर्ष समिति के संयोजक विवेक कुमार ने कहा कि निजीकरण से बिजली की दरें तीन गुना तक बढ़ सकती हैं। उन्होंने बताया कि मुंबई में निजी कंपनियां 17-18 रुपये, कोलकाता में 12 रुपये और दिल्ली में 10 रुपये प्रति यूनिट तक वसूल रही हैं। यूपी में अभी अधिकतम दर 6.50 रुपये प्रति यूनिट है।

आगरा का उदाहरण देते हुए बताया गया कि टोरेंट कंपनी को बिजली आपूर्ति सौंपने से पावर कॉरपोरेशन को सालाना 275 करोड़ का नुकसान हो रहा है। आगरा में एटीएंडसी हानियां 9.86 हैं। वहीं सरकारी नियंत्रण वाले कानपुर में यह मात्र 8.6 है। आगरा में बिजली 5.55 रुपये प्रति यूनिट में खरीदकर टोरेंट को 4.36 रुपये प्रति यूनिट में बेची जा रही है। इसके बावजूद प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रदेश के 42 जनपदों के बिजली वितरण का निजीकरण करने की जिद पर अड़े हुए हैं। संघर्ष समिति ने वाराणसी के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से प्रस्ताव के माध्यम से मांग की है कि वह प्रभावी हस्तक्षेप करने की कृपा करें और बिजली के निजीकरण का निर्णय निरस्त कराएं। बिजली महापंचायत में संविदा कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर हटाए जाने को लेकर भारी गुस्सा दिखा। मार्च 2023 की हड़ताल के बाद ऊर्जा मंत्री के साथ हुए समझौते के अनुसार संविदा कर्मचारियों को आज 2 वर्ष से ज्यादा समय व्यतीत हो जाने के बाद भी बहाल किए जाने से बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश दिखा।

प्रस्ताव के माध्यम से मांग की गई है कि मार्च 2023 की हड़ताल में हटाए गए सभी संविदा कर्मचारियों को बहाल किया जाए, संविदा कर्मचारियों को हटाए जाने की प्रक्रिया बंद की जाए, सभी हटाए गए संविदा कर्मचारी नौकरी में वापस लिए जाए और निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त किया जाए साथ अल्पवेतन भोगी बिजलिकर्मियो संविदाकर्मियों को स्मार्टफोन खरीदकर फेसिअल अटेंडेंस लगाने को मजबूर कर इसको उधोगहित में निरस्त किया जाये। वाराणसी की बिजली महापंचायत में 9 अप्रैल को लखनऊ में होने वाली विशाल रैली में चलने का आह्वान किया गया। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि लखनऊ की रैली में निर्णायक आंदोलन का शंखनाद होगा।

         वाराणसी की बिजली महापंचायत में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ओर से सुभाष लांबा मुख्य रूप से सम्मिलित हुए और संबोधित किया। ऑल इंडिया पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष जयप्रकाश और राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष अजय कुमार तथा शिक्षक नेता रीना त्रिपाठी ने भी सभा को संबोधित किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से केंद्रीय पदाधिकारियों शैलेंद्र दुबे, जितेंद्र सिंह गुर्जर, आर बी सिंह ,महेंद्र राय, पी के दीक्षित, माया शंकर तिवारी, चन्द्र भूषण उपाध्याय, श्री चन्द, सरजू त्रिवेदी, देवेन्द्र पांडेय, राजेंद्र सिंह, अंकुर पांडेय,  राम कुमार झा,नरेंद्र वर्मा, नीरज बिंद, मनीष श्रीवास्तव ,आरबी यादव,संतोष वर्मा,राजेश कुमार, रमाशंकर पाल,ने मुख्यतया सम्बोधित किया।

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