Monday, 4 August 2025

श्रावण के चतुर्थ सोमवार पर बाबा दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब

श्रावण के चतुर्थ सोमवार पर बाबा दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब 

मंगला आरती के साथ हुआ दिव्य शुभारंभ

काशी विश्वनाथ धाम दुल्हन की तरह सजा, श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा कर किया गया स्वागत

सुरेश गांधी

वाराणसी. श्रावण मास के चतुर्थ सोमवार को काशी नगरी एक बार फिर शिवमय हो उठी। बाबा विश्वनाथ के धाम में तड़के मंगला आरती के साथ दिन की शुरुआत हुई। हर-हर महादेव के उद्घोष और घंटा-घड़ियाल की गूंज के बीच भक्तों की लहरें धाम की ओर उमड़ पड़ीं।

श्रद्धालु रात से ही मैदागिन और गोदौलिया की ओर से पंक्तिबद्ध होकर दर्शन के लिए डटे रहे। आरती के उपरांत धाम के मुख्य प्रवेश मार्गों पर श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान श्री कोविलूर स्वामी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर; डिप्टी कलेक्टर, नायब तहसीलदार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और मंदिर के कर्मी मौजूद रहे। मंदिर प्रशासन द्वारा दर्शन व्यवस्था को सुगम और सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए कड़े इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा के साथ-साथ पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, मार्ग व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया गया।

इस अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम को दुल्हन की तरह सजाया गया था। रंग-बिरंगी रोशनी, पारंपरिक पुष्प सज्जा और आकर्षक सजावट ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरी काशी शिवमय हो गई, और गंगा घाटों से लेकर बाबा दरबार तक सिर्फ आस्था का प्रवाह देखने को मिला। श्रावण मास में हर सोमवार का अपना विशेष महत्व है, लेकिन चतुर्थ सोमवार को लेकर भक्तों में अलग ही उत्साह देखा गया। मंदिर प्रशासन की ओर से बताया गया कि दर्शन व्यवस्था पूरी तरह से नियंत्रित और सुचारू रही, और किसी भी श्रद्धालु को कठिनाई हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया। 

रुद्राक्ष से सजा दरबार

सावन के अंतिम सोमवार पर काशीपुराधिपति की नगरी में गजब का उत्साह देखने को मिला. बाबा विश्वनाथ का रुद्राक्ष शृंगार किया गया। 

भक्त बाबा के रुद्राक्ष से सजे हुए स्वरूप का दर्शन कर प्रसन्न हो उठे। मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया। 

फूलों और रंगोली के साथ रुद्राक्ष से बाबा के धाम परिसर को सजाया गया है। 

सावन के आखिरी सोमवार, जिसे अंतिम सोमवारी भी कहा जाता है, इस दिन का विशेष महत्व है। 

इस दिन बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त काशी आते हैं। इस दिन मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। 

आधी रात के बाद से ही दूरदराज से आए कांवरियों और शिवभक्तों ने मंगला आरती के बाद पट खुलने पर महादेव का जलाभिषेक शुरू किया। 

जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, भक्तों की भीड़ बढ़ती गई। आरती के बाद धाम के बाहर मैदागिन एवं गोदौलिया की तरफ कतारबद्ध श्रद्धालुओं पर कोविलूर स्वामी,  मुख्य कार्यपालक अधिकारी, डिप्टी कलेक्टर, नायब तहसीलदार अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।

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