Thursday, 1 January 2026

आस्था, आरती और उल्लास में डूबी काशी, हर हर महादेव के जयघोष संग नववर्ष 2026 का स्वागत

नए साल की पहली सुबह बाबा के नाम, घाटों पर गूंजा शंखनाद

आस्था, आरती और उल्लास में डूबी काशी, हर हर महादेव के जयघोष संग नववर्ष 2026 का स्वागत

मंदिरों-घाटों से बाजारों तक उमड़ा जनसैलाब

विश्वनाथ धाम में रिकॉर्डतोड़ भीड़, मार्कंडेय महादेव और स्वर्वेद महामंदिर में भक्तों का रेला

दशाश्वमेध घाट पर विशेष गंगा आरती और सूर्य पूजा, नमो घाट पर पर्यटकों की चहल-पहल

समय बदला, संकल्प बदले, पर काशी की चेतना वही रही

दीप, धूप और दर्शन के बीच काशी ने थामा नववर्ष 2026 का हाथ

सुरेश गांधी

वाराणसी. नववर्ष 2026 का स्वागत काशी ने अपने शाश्वत अंदाज में किया. जहां एक ओर उल्लास, संगीत और रोशनी थी, वहीं दूसरी ओर आस्था, साधना और संयम का अद्भुत संगम नजर आया। घड़ी की सुइयों ने जैसे ही रात के बारह बजाए, ‘हैप्पी न्यू ईयर 2026’ के उद्घोष के साथ पूरा शहर रोशनी और आतिशबाजी से जगमगा उठा। होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट और सांस्कृतिक स्थलों पर देर रात तक जश्न चलता रहा, तो गंगा घाटों और मंदिरों में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। नए वर्ष की पहली सुबह काशी में आध्यात्मिक चेतना के साथ आरंभ हुई। दशाश्वमेध घाट पर नववर्ष की विशेष गंगा आरती और सूर्य पूजा का आयोजन हुआ।

ठंड और कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। मंत्रोच्चार, शंखनाद और दीपों की कतारों के बीच गंगा की लहरों पर झिलमिलाती रोशनी ने नववर्ष 2026 को दिव्यता प्रदान की। उत्सव के बीच कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। घाटों, मंदिरों, बाजारों और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे नववर्ष का जश्न शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। आस्था, आनंद और अनुशासन के इस त्रिवेणी संगम के साथ काशी ने नववर्ष 2026 का स्वागत किया, जहां हर उत्सव साधना में और हर उल्लास परंपरा में ढलता नजर आया। 

काशी विश्वनाथ धाम में ऐतिहासिक भीड़, टूटे पुराने रिकॉर्ड

नववर्ष 2026 पर काशी विश्वनाथ धाम में दर्शनार्थियों की संख्या ने एक बार फिर नए कीर्तिमान स्थापित किए। तड़के चार बजे मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं, जो देर रात तक जारी रहीं। धाम प्रशासन के अनुसार, एक ही दिन में लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में मत्था टेका। पूर्व में बनाए गए सभी रिकॉर्ड इस वर्ष पीछे छूट गए।
भीड़ को देखते हुए पहले से की गई व्यवस्थाओं के चलते दर्शन व्यवस्था सुचारू बनी रही। गंगाद्वार समेत सभी प्रवेश द्वार पर भक्तों की भारी भीड़ रही। मंदिर प्रशासन की ओर से लागू प्रोटोकॉल के तहत विशेष दर्शन और स्पर्श दर्शन पर प्रतिबंध है। मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से भीड़ बढ़ी है। 20 लाख से अधिक लोग दर्शन कर चुके हैं। बृहस्पतिवार की सुबह से श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला जारी है। लाखों भक्तों ने बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किए। भक्तों को कोई असुविधा हो इसके लिए बैरिकेडिंग की गई है।

मार्कंडेय महादेव मंदिर और स्वर्वेद महामंदिर में उमड़ा आस्था का जनसागर

नववर्ष पर कैथी स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर और उमरहां स्थित स्वर्वेद महामंदिर में भी श्रद्धालुओं का जनसैलाब देखने को मिला। पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों के साथ-साथ अन्य प्रांतों से आए भक्त सपरिवार दर्शन को पहुंचे। स्वर्वेद महामंदिर की भव्यता, संगमरमर पर उकेरी गई नक्काशियां और कलात्मक शिल्प श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने। वाहनों की अधिकता के चलते प्रमुख मार्गों पर रुक-रुक कर यातायात प्रभावित रहा।

घाटों और नमो घाट पर सैलानियों की चहल-पहल


नववर्ष
की सुबहसुबहे--बनारसके साथ हुई। देश-विदेश से आए पर्यटकों ने गंगा में नौकाविहार कर घाटों की आध्यात्मिक छटा को निहारा। पर्यटन के आधुनिक केंद्र के रूप में विकसित हो चुके नमो घाट पर भी भारी भीड़ उमड़ी। काशी के बदले स्वरूप और विकास कार्यों ने पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित किया, जिससे स्थानीय पर्यटन और कारोबार को नई गति मिली।

बाजारों में रौनक, भक्ति और मस्ती का संगम

नववर्ष की पूर्व संध्या पर शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक उत्सव का माहौल रहा। कहीं डीजे की धुनों पर युवा थिरकते दिखे, तो कहीं भजन संध्या और देवी जागरण में लोग प्रभु आराधना में लीन नजर आए। फूल, गिफ्ट, ग्रीटिंग कार्ड और नववर्ष से जुड़े सामानों की दुकानों पर दिनभर भीड़ रही। बाजार रोशनी और सजावट से दुल्हन की तरह सजे नजर आए।


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