Thursday, 2 April 2026

काशी हुई ‘राममय’ : हर तरफ ध्वजों का समंदर व डमरू की रही गूंज

काशी हुईराममय : हर तरफ ध्वजों का समंदर डमरू की रही गूंज 

सुंदरपुर से निकली संकटमोचन तक 5.25 किमी लंबी ऐतिहासिक ध्वज यात्रा, एक लाख पताकाएं, 1100 गदाधारी भक्त

रथ पर सजी श्रीराम झांकी, 30 हजार श्रद्धालुओं के जनसैलाब में डूबी शिवनगरी  

सुरेश गांधी

वाराणसी. भगवान शिव की नगरी काशी में हनुमान जयंती का पर्व इस बार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विराटता का ऐसा अद्भुत दृश्य बनकर सामने आया, जिसने पूरे शहर कोराममयऔरहनुमंतमयकर दिया। 

बृहस्पतिवार की सुबह जैसे ही सूरज की किरणें गंगा तट पर पड़ीं, वैसे ही काशी की गलियांजय श्रीरामऔरजय हनुमानके उद्घोष से गूंज उठीं। 

ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा शहर एक साथ भक्ति के महासागर में डुबकी लगा रहा हो।

हर ओर भगवा ध्वज लहरा रहे थे, मंदिरों में घंटियों की अनुगूंज थी और सड़कों पर उमड़ी भीड़ में एक अद्भुत उत्साह दिखाई दे रहा था। 

काशी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यहां पर्व केवल मनाए नहीं जाते, बल्कि पूरी आत्मा से जिए जाते हैं। 

इस भव्य आयोजन का केंद्र रही सुंदरपुर से संकटमोचन मंदिर तक निकली काशी की सबसे विशाल ध्वज यात्रा, जिसने आस्था के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। 

करीब 5.25 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में एक लाख से अधिक ध्वजों का समुद्र लहराता नजर आया, जिसने सड़कों को भगवामय कर दिया।

यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। 1100 गदाधारी भक्तों की टोली, हाथों में गदा और डमरू लिए जब आगे बढ़ी, तो हर कदम के साथहर-हर महादेवऔरजय बजरंगबलीका गगनभेदी उद्घोष वातावरण को रोमांचित कर रहा था। 

डमरू की लय और श्रद्धा की ऊर्जा ने इस यात्रा को एक अलौकिक अनुभव में बदल दिया। यात्रा का सबसे आकर्षक केंद्र रहा लंबा भव्य रथ, जिस पर भगवान श्रीराम की सजीव झांकी सजाई गई थी। 

रथ के साथ चल रही श्रीराम दरबार, शिव दरबार और बाबा के गणों की झांकियों ने श्रद्धालुओं को भक्ति में सराबोर कर दिया। 

वहीं मसाननाथ की झांकियां काशी की अद्वितीय आध्यात्मिक और तांत्रिक परंपरा का जीवंत चित्र प्रस्तुत कर रही थीं।

इस विराट आयोजन में 30 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए, जिनमें लगभग 15 हजार महिलाओं की भागीदारी ने इस आयोजन को और अधिक गरिमा प्रदान की। 

51 महिलाओं द्वारा सामूहिक आरती का दृश्य श्रद्धा, शक्ति और समर्पण का अद्भुत संगम बन गया। 

वहीं करीब 1200 भक्त गदा लिए यात्रा में शामिल हुए, जो बजरंगबली की वीरता और भक्तिभाव का प्रतीक थे। पूरे शहर में इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही। मंदिरों में सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का अखंड पाठ हुआ, तो वहीं प्रभात फेरियों ने भक्ति की अलख जगाई। धर्मसंघ द्वारा आयोजित 15 दिवसीय प्रभातफेरी का समापन भी इसी दिन हुआ, जिसमें जगह-जगह रामचरितमानस और सुंदरकांड का पाठ कर भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया गया।

यात्रा के समापन पर संकटमोचन मंदिर में भगवान हनुमान और श्रीराम को रजत ध्वज अर्पित किया गया। 

यह क्षण अत्यंत भावुक और दिव्य था, जब हजारों श्रद्धालु एक साथ प्रभु के चरणों में नतमस्तक होकर अपनी आस्था अर्पित कर रहे थे। 

इधर, शहर के प्रमुख मंदिरों, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, बड़े महाबीर मंदिर अर्डलीबाजार, प्राचीन हनुमान मंदिर, पांडेयपुर समेत सभी हनुमान मंदिरों, में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। 

दर्शन-पूजन के लिए उमड़ी भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि काशी में हनुमान जयंती केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जन-जन की आस्था का उत्सव है। 


शहर के विभिन्न हिस्सों में शोभायात्राएं निकाली गईं, भंडारों का आयोजन हुआ और जगह-जगह प्रसाद वितरण किया गया।

डीजे पर बजते बजरंगबली के भजनों पर श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आए, जिससे पूरे शहर में उत्सव का वातावरण और भी जीवंत हो उठा। 

हनुमान जयंती के इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि काशी की पहचान केवल उसके घाटों और मंदिरों से नहीं, बल्कि उस अदृश्य आस्था से है, जो हर पर्व पर जनसैलाब बनकर उमड़ पड़ती है। 

यहां हर ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की उस निरंतर प्रवाहित होती धारा का प्रतीक है, जो युगों से लोगों को जोड़ती आई है। 

काशी ने इस बार भी दिखा दियाकृयह केवल एक शहर नहीं, बल्कि भक्ति का वह अनंत आकाश है, जहां हर जयघोष सीधे ईश्वर तक पहुंचता है।

No comments:

Post a Comment