Friday, 26 June 2026

शरीर का 'मौन प्रहरी' खतरे में, हर दूसरे दिन जा रही एक जान

शरीर का 'मौन प्रहरी' खतरे में, हर दूसरे दिन जा रही एक जान 

बेकाबू मोटापा और अनियंत्रित ब्लड शुगर बना रहे लीवर के सबसे बड़े दुश्मन

अब 30 से 45 वर्ष के युवा भी तेजी से हो रहे शिकार

अस्पतालों में गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ी, कई को पड़ रही लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत

सुरेश गांधी

वाराणसी। शरीर का सबसे मेहनती और मौन प्रहरीलीवरआज एक ऐसे खतरे से जूझ रहा है, जो तो अचानक दिखाई देता है और ही शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट चेतावनी देता है। आधुनिक जीवनशैली, बढ़ता मोटापा, अनियंत्रित ब्लड शुगर, जंक फूड और शारीरिक निष्क्रियता ने इस महत्वपूर्ण अंग को धीरे-धीरे बीमार करना शुरू कर दिया है। परिणाम यह है कि अस्पतालों में लीवर सिरोसिस और फैटी लीवर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि चिकित्सकों के अनुसार हर दो दिन में एक मरीज की जान लीवर की गंभीर खराबी के कारण जा रही है। चिंताजनक बात यह है कि जो बीमारी कभी 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों तक सीमित मानी जाती थी, वह अब 30 से 45 वर्ष के युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रही है। विशेषज्ञइसे बदलती जीवनशैली की सबसे बड़ी चेतावनी मान रहे हैं। 

बता दें, देश में मोटापा और मधुमेह जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उसी रफ्तार से लीवर की बीमारियां भी एक 'साइलेंट महामारी' का रूप लेती जा रही हैं। यह केवल स्वास्थ्य विभाग की चुनौती नहीं, बल्कि पूरे समाज के सामने खड़ा जीवनशैली का संकट है। यदि समय रहते खानपान, व्यायाम और नियमित स्वास्थ्य जांच को दैनिक जीवन का हिस्सा नहीं बनाया गया तो आने वाले वर्षों में लीवर सिरोसिस, ट्रांसप्लांट और असमय मृत्यु के मामलों में और तेज वृद्धि हो सकती है। शरीर का यह 'मौन प्रहरी' तब तक हमारी रक्षा करता है, जब तक हम उसकी अनदेखी नहीं करते। इसलिए यह चेतावनी केवल डॉक्टरों की नहीं, बल्कि हर परिवार के लिए एक गंभीर संदेश हैजीवनशैली बदलिए, वरना लीवर चुपचाप जवाब दे देगा।

ओपीडी में बढ़ रहे मरीज, गंभीर हालत में पहुंच रहे अस्पताल

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागों की ओपीडी में प्रतिदिन 350 से 400 मरीज पेट और पाचन तंत्र से जुड़ी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। इनमें 10 से 15 मरीजों की हालत इतनी गंभीर होती है कि उन्हें तत्काल भर्ती करना पड़ता है। ओपीडी और आईपीडी में आने वाले कुल मरीजों में 40 से 45 प्रतिशत किसी किसी गंभीर लीवर रोग से पीड़ित हैं। इनमें लगभग 10 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं, जिनके लीवर को नुकसान पहुंचाने का प्रमुख कारण मोटापा और अनियंत्रित ब्लड शुगर है।

अब शराब ही नहीं, बिगड़ी जीवनशैली भी बन रही बड़ी वजह

विशेषज्ञ बताते हैं कि पहले लीवर सिरोसिस का सबसे बड़ा कारण अत्यधिक शराब का सेवन माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। आज मोटापा, मधुमेह, असंतुलित खानपान, जंक फूड, मीठे पेय, देर रात तक जागना और व्यायाम से दूरी जैसी आदतें भी लीवर को तेजी से नुकसान पहुंचा रही हैं। शरीर में जमा अतिरिक्त वसा धीरे-धीरे लीवर तक पहुंचकर फैटी लीवर का रूप लेती है। समय रहते इलाज और जीवनशैली में सुधार होने पर यही बीमारी आगे चलकर लीवर सिरोसिस और अंततः लीवर फेलियर तक पहुंच सकती है।

जब दिखते हैं ये लक्षण, तब तक काफी देर हो चुकी होती है

चिकित्सकों का कहना है कि लीवर की बीमारी को "साइलेंट डिजीज" इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके लक्षण बहुत कम दिखाई देते हैं। अधिकांश मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। गंभीर मरीजों में अक्सरखून की उल्टी, पेट में पानी भर जाना,  बार-बार बेहोशी, पीलिया, शरीर में सूजन, मानसिक भ्रम, अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई मरीजों के लिए अंतिम विकल्प लीवर ट्रांसप्लांट ही बचता है।

युवा सबसे ज्यादा खतरे में क्यों?

आज का युवा लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करता है। फास्ट फूड, मीठे पेय, तनाव, कम नींद और व्यायाम का अभाव शरीर में मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा रहा है। यही स्थिति धीरे-धीरे लीवर को नुकसान पहुंचाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युवा अभी नहीं संभले तो आने वाले वर्षों में भारत में लीवर रोगों का बोझ कई गुना बढ़ सकता है।

बचाव के पांच बड़े मंत्र

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश मामलों में इस बीमारी से बचा जा सकता है। इसके लिए जरूरी हैवजन नियंत्रित रखें। ब्लड शुगर नियमित जांचते रहें। संतुलित एवं पौष्टिक भोजन लें। जंक फूड और अत्यधिक मीठे पेय से दूरी बनाएं। प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट व्यायाम करें। शराब और तंबाकू से बचें। नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं। फैटी लीवर या डायबिटीज होने पर चिकित्सकीय सलाह का पालन करें।

हर दूसरे दिन जा रही एक जान

चिकित्सकों के अनुसार, अस्पतालों में लीवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि हर दो दिन में एक मरीज की मृत्यु लीवर फेल होने की वजह से हो रही है। यह आंकड़ा केवल एक अस्पताल की तस्वीर नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली का भयावह संकेत माना जा रहा है।

No comments:

Post a Comment