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Friday, 9 October 2026

गज पर सवार आएंगी जगदंबा, नौ रातों तक जागेगी शक्ति

गज पर सवार आएंगी जगदंबा, नौ रातों तक जागेगी शक्ति

11 अक्टूबर को घटस्थापना के साथ शुरू होगा देवी आराधना का महापर्व—चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में होगा शक्ति का आह्वान, 19 को अष्टमी-नवमी का अद्भुत मिलन, 20 को विजयादशमी पर चरणायुध से विदाई. देवी भागवत पुराण के अनुसार, माता का वाहन यह तय करता है कि आने वाला समय देश-दुनिया और सभी राशियों के लिए कैसा रहेगा. माता रानी का हाथी पर सवार होकर आना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है. हाथी को सुख, ऐश्वर्य, समृद्धि, और अच्छी बारिश (अच्छी फसल) का प्रतीक माना गया है. इसके प्रभाव से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भक्तों को ऐश्वर्य व धन-धान्य की प्राप्ति होती है

सुरेश गांधी

काशी में पर्व सिर्फ कैलेंडर की तारीख नहीं होता। वह शहर की सांसों में उतरता है, गलियों में गूंजता है और घाटों की लहरों तक अपना रंग छोड़ जाता है। अब जब शरद की दस्तक के साथ मौसम करवट ले रहा है, तब काशी एक बार फिर मां की आराधना में नौ रातों के लिए जागने को तैयार है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला शारदीय नवरात्र इस बार 11 अक्टूबर से आरंभ होगा। घरों में कलश सजेगा, मंदिरों में घंटे गूंजेंगे, दुर्गासप्तशती के मंत्र वातावरण में तैरेंगे और देवी पंडालों में शक्ति के विविध रूप आकार लेने लगेंगे। नौ दिनों तक काशी में भक्ति, व्रत, साधना और उत्सव का ऐसा संगम दिखाई देगा, जिसमें परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चलेंगी। सबसे खास बात यह कि इस बार देवी का आगमन गज यानी हाथी पर माना जा रहा है, जबकि विजयादशमी के दिन उनका प्रस्थान चरणायुध यानी मुर्गे पर माना जाएगा। वहीं 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी का विशेष संयोग नवरात्र के उत्सव को और महत्वपूर्ण बनाएगा।

चित्रा नक्षत्र में शक्ति का आह्वान, वैधृति योग में घटस्थापना

11 अक्टूबर, रविवार को नवरात्र का पहला दिन होगा। उदया तिथि के अनुसार इसी दिन प्रतिपदा मानी जाएगी और मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना के साथ नौ दिवसीय साधना शुरू होगी। वाराणसी में घटस्थापना का प्रमुख मुहूर्त सुबह 5:54 से 9:48 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त 11:21 से 12:08 बजे तक रहेगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग भी रहेगा। पंचांग परंपरा में इन दोनों की अपनी विशेष स्थिति मानी जाती है। इसलिए घटस्थापना के लिए स्थानीय पंचांग और आचार्य द्वारा निर्धारित उपयुक्त समय का पालन किया जाएगा। कलश में जल, आम्रपल्लव, नारियल और मिट्टी में बोए जाने वाले जौ के साथ नवरात्र का संकल्प लिया जाएगा। जौ की हरियाली अगले नौ दिनों में साधना की बढ़ती ऊर्जा का प्रतीक बनेगी।

नौ दिन, नौ रूप... शक्ति के नौ रंग

नवरात्र के प्रत्येक दिन देवी का एक अलग स्वरूप पूजित होगा।

11 अक्टूबर—मां शैलपुत्री : पर्वत राज हिमालय की पुत्री। नवरात्र का आरंभ संकल्प और स्थिरता के प्रतीक रूप से।

12 अक्टूबर—मां ब्रह्मचारिणी : तप और त्याग की देवी। साधना, संयम और आत्मबल का संदेश।

13 अक्टूबर—मां चंद्रघंटा : मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने वाली देवी। साहस और शौर्य का प्रतीक।

14 अक्टूबर—मां कूष्मांडा : सृष्टि की ऊर्जा और सृजन शक्ति का स्वरूप।

15 अक्टूबर—मां स्कंदमाता : मां की ममता और वात्सल्य का स्वरूप।

16 अक्टूबर—मां कात्यायनी : अन्याय के विरुद्ध शक्ति और पराक्रम की प्रतीक।

17 अक्टूबर—मां कालरात्रि : भय और अंधकार का नाश करने वाली शक्ति।

18 अक्टूबर—मां महागौरी : शुद्धता, शांति और निर्मलता का स्वरूप।

19 अक्टूबर—मां सिद्धिदात्री : सिद्धि और पूर्णता प्रदान करने वाली देवी।

नौ स्वरूपों की यह यात्रा वास्तव में मनुष्य के भीतर की यात्रा भी है—संकल्प से सिद्धि तक।

19 अक्टूबर को एक साथ अष्टमी और नवमी

इस बार नवरात्र का सबसे बड़ा आकर्षण 19 अक्टूबर होगा। इसी दिन अष्टमी और नवमी के अनुष्ठान पड़ेंगे दुर्गाष्टमी पर विशेष पूजन, दुर्गासप्तशती पाठ, हवन और कन्या पूजन की परंपरा रहेगी। नवमी पर मां सिद्धिदात्री की आराधना के साथ नवरात्र साधना पूर्णता की ओर बढ़ेगी। कई घरों में इसी दिन कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजन कराया जाएगा। उनके चरण धोकर भोजन कराया जाएगा और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया जाएगा। काशी की गलियों में इस दिन छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर घरों से निकलते देखना अपने आप में एक भावुक दृश्य होगा।

गज पर आएंगी मां, समृद्धि का संदेश

नवरात्र के आगमन को लेकर इस बार धार्मिक मान्यता भी विशेष है। रविवार को नवरात्र आरंभ होने के कारण मां दुर्गा का वाहन हाथी माना जा रहा है। हाथी भारतीय धार्मिक परंपरा में ऐश्वर्य, स्थिरता, वर्षा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण धार्मिक मान्यता में मां का गज पर आगमन शुभ और समृद्धिदायक माना जाता है। काशी में इसे लेकर श्रद्धालुओं के बीच उत्सुकता है।इस बार मां आएंगी तो गज पर... मान्यता है कि साथ में समृद्धि का संदेश भी लाएंगी। वहीं 20 अक्टूबर को मंगलवार के दिन विजयादशमी होने के कारण प्रचलित मान्यता में देवी की विदाई चरणायुध यानी मुर्गे पर मानी जाएगी।bइस तरह नवरात्र की पूरी यात्रा प्रतीकों से भरी होगी— गज पर आगमन... नौ रूपों की आराधना...अष्टमी-नवमी का मिलन... और चरणायुध पर विदाई।

काशी में मंदिरों से पंडालों तक शक्ति की आराधना

शारदीय नवरात्र आते ही काशी का धार्मिक भूगोल बदल जाता है। सुबह मंदिरों में घंटियां बजती हैं तो शाम होते-होते पंडालों में आरती की लौ जगमगाने लगती है. दुर्गाकुंड स्थित मां दुर्गा मंदिर नवरात्र में विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। यहां दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। इसके अलावा काशी के विभिन्न देवी मंदिरों में विशेष शृंगार, आरती और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां होंगी। गलियों और मोहल्लों में छोटे-बड़े पंडाल सजेंगे। कहीं पारंपरिक दुर्गा प्रतिमा होगी तो कहीं आधुनिक साज-सज्जा के बीच देवी का अलौकिक स्वरूप दिखाई देगा। शाम ढलते ही काशी की हवा में धूप-अगरबत्ती की खुशबू और आरती के स्वर घुलेंगे। बच्चे पंडालों की रोशनी में उत्सव खोजेंगे तो बुजुर्ग देवी के दरबार में शांति।

बाजार में भी नवरात्र की दस्तक

नवरात्र केवल मंदिरों का पर्व नहीं, बाजार भी इसके स्वागत में सजने लगा है। व्रत के सामान की मांग बढ़ेगी। सिंघाड़े का आटा, कुट्टू, साबूदाना, मखाना, फल, दूध, दही और पूजा सामग्री की बिक्री तेज होगी। घरों में कलश स्थापना के लिए नारियल, चुनरी, रोली, मौली, कलश, जौ और पूजन सामग्री की खरीदारी होगी। देवी की चुनरी से लेकर श्रृंगार सामग्री तक दुकानों पर रंग और आस्था दोनों दिखाई देंगे। दशमी की ओर बढ़ते हुए बाजार में मूर्ति, सजावटी सामग्री और विसर्जन से जुड़ी तैयारियां भी जोर पकड़ेंगी।

पंडालों में दिखेगी परंपरा और तकनीक की जुगलबंदी

काशी के दुर्गापूजा पंडाल हर वर्ष अपनी अलग पहचान बनाते हैं। कहीं बंगाल की पारंपरिक शैली की झलक दिखेगी तो कहीं काशी की लोक संस्कृति। इस बार भी पंडालों में आधुनिक रोशनी, थीम आधारित सजावट और कलात्मक प्रतिमाओं का आकर्षण रहेगा। लेकिन तकनीक की चकाचौंध के बीच देवी की आंखों में उतरती वही पारंपरिक करुणा और तेज लोगों को बांधे रखेगा। यही काशी की खूबसूरती है—यहां आधुनिकता आती है, मगर परंपरा की चौखट पर सिर झुकाकर।

कन्या पूजन में दिखेगी शक्ति की सबसे सरल तस्वीर

नवरात्र का सबसे भावुक पड़ाव कन्या पूजन भी होगा। नौ छोटी कन्याओं को नवदुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनका पूजन किया जाएगा। उनके चरण धोकर भोजन कराया जाएगा और उपहार-दक्षिणा दी जाएगी। यह परंपरा बताती है कि देवी की तलाश केवल मंदिर की मूर्ति में नहीं, बल्कि नारी के सम्मान में भी है। यही संदेश नवरात्र को केवल धार्मिक पर्व से आगे ले जाकर सामाजिक चेतना का पर्व बना देता है।

पंचांग में भी हर दिन की अपनी कहानी

नवरात्र के दौरान तिथि के साथ नक्षत्र और योग भी बदलते रहेंगे। 11 अक्टूबर को चित्रा-वैधृति, 12 को स्वाती-विष्कम्भ, 13 को विशाखा-प्रीति, 14 को अनुराधा-आयुष्मान, 15 को ज्येष्ठा-सौभाग्य, 16 को ज्येष्ठा-शोभन, 17 को मूल-अतिगण्ड, 18 को पूर्वाषाढ़ा-सुकर्मा और 19 अक्टूबर को उत्तराषाढ़ा-धृति का संयोग रहेगा। 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा।सनातन परंपरा में पंचांग केवल तारीख बताने का माध्यम नहीं है। तिथि, वार, नक्षत्र और योग मिलकर समय की प्रकृति का संकेत देते हैं और इसी के आधार पर पूजा-अनुष्ठान के मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं।

नवरात्र में काशी का अपना दर्शन

काशी में नवरात्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां देवी की आराधना किसी एक स्थान तक सीमित नहीं रहती। यह घर के कलश से लेकर मंदिर की घंटी तक, गंगा किनारे की आरती से लेकर गली के पंडाल तक, व्रत रखने वाली मां से लेकर कन्या पूजन कराने वाले परिवार तक—हर जगह दिखाई देती है। यहां देवी सिर्फ प्रतिमा नहीं हैं। वे मां हैं, शक्ति हैं, विश्वास हैं और संकट के समय मनुष्य के भीतर उठने वाला वह साहस हैं, जो कहता है—अभी सब खत्म नहीं हुआ।

दशमी पर शक्ति से विजय तक

19 अक्टूबर को नवमी के अनुष्ठान पूरे होने के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी आएगी। दशमी केवल रावण-वध का पर्व नहीं, बल्कि नौ रातों की शक्ति साधना के बाद अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव भी है। देवी प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ नौ दिनों तक गूंजता जयकारा कुछ समय के लिए थमेगा, मगर आस्था की वह लौ मन में बनी रहेगी।  मां आएंगी तो काशी उनका स्वागत करेगी... नौ दिन तक उनकी आराधना करेगी... और विदा करते समय यही कहेगी— “अगले बरस फिर आइए मां।”**

एक नजर में : नवरात्र 2026

11 अक्टूबर, रविवार — घटस्थापना, मां शैलपुत्री

12 अक्टूबर, सोमवार — मां ब्रह्मचारिणी

13 अक्टूबर, मंगलवार — मां चंद्रघंटा

14 अक्टूबर, बुधवार — मां कूष्मांडा

15 अक्टूबर, गुरुवार — मां स्कंदमाता

16 अक्टूबर, शुक्रवार — मां कात्यायनी

17 अक्टूबर, शनिवार — मां कालरात्रि

18 अक्टूबर, रविवार — मां महागौरी

19 अक्टूबर, सोमवार — अष्टमी-नवमी, मां सिद्धिदात्री, कन्या पूजन

20 अक्टूबर, मंगलवार — विजयादशमी और विसर्जन

पंचांग विशेष

आरंभ: 11 अक्टूबर

घटस्थापना: 5:54–9:48 बजे

अभिजीत मुहूर्त: 11:21–12:08 बजे

आगमन वाहन: गज

विदाई वाहन: चरणायुध

इन राशियों के जीवन में बरसेगी मां दुर्गा की कृपा

इस शारदीय नवरात्र कुछ खास राशियों के जीवन में मां दुर्गा की विशेष कृपा बरसने वाली है. वृषभ राशि के जातकों के लिए शारदीय नवरात्र का यह पूरा पावन काल बेहद शानदार और उन्नतिशील रहने वाला है. आपके लंबे समय से अटके हुए और रुके हुए कार्य माता रानी की कृपा से तेजी से पूरे होने लगेंगे. धन प्राप्ति के नए मार्ग खुलेंगे. आर्थिक स्थिति में जबरदस्त मजबूती आएगी. विद्यार्थियों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिलेगा. इसके अलावा, विवाहित जातकों के दांपत्य जीवन में प्रेम, मिठास और आपसी सामंजस्य और अधिक गहरा होगा. पुरानी परेशानियों से मुक्ति मिलेगी. कन्या राशि वालों के लिए यह शारदीय नवरात्र जीवन में नए अवसरों की सौगात लेकर आ रही है. आपके करियर और कारोबार में एक बड़ा और सकारात्मक उछाल देखने को मिलेगा. नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को कोई बेहतरीन अवसर मिल सकता है. पहले किए गए किसी पुराने निवेश से आपको तगड़ा मुनाफा हाथ लग सकता है. आय के नए स्रोत बनेंगे, जिससे बैंक-बैलेंस में इजाफा होगा. शिक्षा और पठन-पाठन से जुड़े लोगों को खास उपलब्धियां हासिल हो सकती हैं. धनु राशि के जातकों के लिए भी मां दुर्गा का यह आगमन बेहद अनुकूल और फलदायी साबित होगा. यदि आप बिजनेस करते हैं, तो आपको किसी नए और बड़े प्रोजेक्ट से तगड़ा लाभ मिलने की पूरी संभावना है. नौकरी या कारोबार के सिलसिले में आपको विदेश यात्रा करने का सुनहरा अवसर भी मिल सकता है. लव पार्टनर या जीवनसाथी के साथ आपके रिश्ते पहले से अधिक मजबूत होंगे. हालांकि, इस दौरान सलाह दी जाती है कि बिना सोचे-समझे या भावनाओं में बहकर कोई बड़ा आर्थिक निर्णय लेने से बचें और अपनी परिस्थितियों को परखकर ही आगे बढ़ें.

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