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Wednesday, 14 October 2026

धन के लिए धर्म नहीं त्यागूंगा, युद्ध हुआ तो बम-गोले भी दागूंगा

धन के लिए धर्म नहीं त्यागूंगा, युद्ध हुआ तो बम-गोले भी दागूंगा

भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह में बोले योगी—देश और धर्म के लिए किया गया हर त्याग महान

100 परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल, मुख्यमंत्री ने पांच परिवारों को अपने हाथों से सौंपीं सिलाई मशीनें 

सुरेश गांधी 

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर संघर्ष के लिए भी तैयार रहना चाहिए। एक संन्यासी के जीवन का ध्येय होना चाहिए कि धन के लिए धर्म नहीं त्यागूंगा और युद्ध छिड़ गया तो बम-गोले भी दागूंगा। देश और धर्म के लिए किया गया हर त्याग महान है। शांति के समय धर्म का स्वरूप संयम, सौहार्द और लोककल्याण है, लेकिन राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए।

मुख्यमंत्री बुधवार को सिगरा स्थित भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संघ की सौ वर्ष की सेवा यात्रा, सामाजिक कार्यों और आध्यात्मिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। राष्ट्रोन्नति को आत्मोन्नति का माध्यम बनाकर संघ ने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्र जागरण और लोककल्याण से जोड़ा है।

बंटवारे का दुष्परिणाम देश को भुगतना पड़ा

योगी ने कहा कि जब राष्ट्र संकट में होता है तो उसकी आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत भी संकट में पड़ जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि विदेशी आक्रांता सफल नहीं होते तो क्या काशी विश्वनाथ मंदिर को क्षतिग्रस्त करने का दुस्साहस होता? क्या राम जन्मभूमि पर पांच सौ वर्षों तक गुलामी का कलंक रहता? उन्होंने कहा कि आपसी बंटवारे का दुष्परिणाम देश को भुगतना पड़ा। इसी के परिमार्जन के लिए संतों ने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्रीय जागरण का माध्यम बनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण राष्ट्रीय चेतना और संकल्प का परिणाम है। भारत सेवाश्रम संघ ने राष्ट्रवाद को जीवन का ध्येय बनाया और देश-विदेश में सनातन मूल्यों तथा ऋषि परंपरा को आगे बढ़ाया है।

स्वामी प्रणवानंद का गोरक्षपीठ से गहरा संबंध

मुख्यमंत्री ने संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद महाराज के गोरक्षपीठ से जुड़ाव का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1912-13 में स्वामी प्रणवानंद गोरखपुर पहुंचे थे, जहां उन्होंने सिद्ध योगी बाबा गंभीरनाथ के सानिध्य में साधना की। योगी ने उनके बचपन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि लगभग 12-13 वर्ष की आयु में वह गुरु की खोज में गोरखपुर पहुंचे थे। बाबा गंभीरनाथ ने उन्हें जन्म से सिद्ध योगी बताया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, गोरखपुर से मिली आध्यात्मिक प्रेरणा को स्वामी प्रणवानंद ने राष्ट्र जागरण का माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1926 में स्थापित काशी शाखा ने सेवा और राष्ट्र जागरण की परंपरा के सौ वर्ष पूरे किए हैं। संघ के संन्यासियों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। प्रयागराज कुंभ में अन्नक्षेत्र सेवा सहित संस्था की लोककल्याणकारी गतिविधियां इसी परंपरा का उदाहरण हैं।

100 परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

शताब्दी समारोह में भारत सेवाश्रम संघ की ओर से 100 परिवारों को सिलाई मशीनें देने की पहल की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने हाथों से पांच परिवारों को मशीनें सौंपीं। उन्होंने कहा कि यह प्रयास परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। आत्मनिर्भर परिवार ही आत्मनिर्भर और विकसित भारत की संकल्पना को मजबूती देंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री ने स्वामी प्रणवानंद महाराज के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर आरती की। मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना भी की। संघ के प्रधान सचिव स्वामी विश्वात्मानंद ने उन्हें अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। समारोह में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, मंत्री रविन्द्र जायसवाल, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, हंसराज विश्वकर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, महापौर अशोक तिवारी, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, डॉ. अवधेश सिंह, सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम और सुनील पटेल सहित भारत सेवाश्रम संघ के संत, संन्यासी और स्वयंसेवक मौजूद रहे।

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