श्रद्धा और भक्ति से महक रही काशी
बप्पा के दरबार में उमड़ा भक्तों का सैलाब, दूसरे दिन भी गूंजे गणपति बप्पा मोरया के जयकारे
मंदिरों में
विशेष
पूजन-अर्चन
के
साथ
भक्त
ले
रहे
ऋद्धि-सिद्धि
संग
बप्पा
का
आशीर्वाद
नैवेद्य, आरती
और
अनुष्ठान
से
सजी
काशी
की
गलियां
सुरेश गांधी
वाराणसी। दस दिवसीय गणेशोत्सव के दुसरे दिन गुरुवार को भी भक्ति-उत्साह की चरम पराकाष्ठा पर है। शहर के गणपति मंदिरों और पंडालों में विशेष पूजन-अर्चन हुए। श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के बीच अपने आराध्य पुत्र प्रथमेश का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। सुबह से ही गली-मोहल्लों और मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी। काशी की फिजा गणपति आरती, मंगल गीतों और ढोल-ताशों की गूंज से सराबोर रही। या यूं कहे काशी भक्ति, आनंद और उत्सव के रंग में रंग गया है। देर रात तक “गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया” के जयकारों से पूरा शहर गूंजता रहा। जगह-जगह श्रद्धालु गणपति जी के दरबार में नैवेद्य अर्पित कर समृद्धि और सुख-शांति की कामना करते दिखे।
ठठेरी बाजार स्थित शेरवाली कोठी में लालबाग
के राजा की प्रतिमा
के समक्ष सहस्त्रनाम का पाठ और
विशेष आरती हुई। मछोदरी
स्थित श्रीकाशी विद्या मंदिर में अष्टधातु और
संगमरमर की गणेश प्रतिमाओं
का पूजन कर वैदिक
मंत्रोच्चार से अभिषेक हुआ।
मानसरोवर स्थित श्री रामतारक आंध्रा
आश्रम में पंचधातु गणेश
की मूर्ति के समक्ष गणेश
सहस्त्रावर्तन पाठ से वातावरण
भक्तिमय हो उठा। गढ़वासी
टोला के श्री सिद्धिविनायक
मंदिर में दूसरे दिन
भी पांच दिवसीय गणेशोत्सव
के अंतर्गत वैदिक पूजन और भजन-कीर्तन हुए। अगस्त्यकुंडा स्थित
शारदा भवन के 97वें
गणेशोत्सव में आकर्षक झांकियों
ने भक्तों को अपनी ओर
खींचा। यहां गणपति संग
ऋद्धि-सिद्धि की झांकी ने
दर्शकों का मन मोह
लिया।
काशी में उत्साह का माहौल
शहर में जगह-जगह गणेश प्रतिमाओं
के पंडालों में दीप, नैवेद्य
और फूलों से सजी सजावट
देखते ही बन रही
थी। भक्तों ने परिवार सहित
बप्पा की आरती उतारकर
मंगलकामनाएं कीं। तीसरे दिन
भी गणेशोत्सव की धूम-धाम
और अधिक बढ़ने की
संभावना है। आयोजकों ने
बताया कि आने वाले
दिनों में भजन संध्या,
झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रमों
की श्रृंखला से भक्तों का
मनोभाव और भी प्रफुल्लित
होगा। इस अवसर पर
भगवान गणेश की नयनाभिराम
झांकी सजाई गई। भोर
में पंचामृत स्नान कराने के बाद गणपति
का सिंदूर लेपन कर गुलाब,
चंपा, पान और मोरपंखी
की माला से विशेष
श्रृंगार किया गया। इसके
बाद विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल
और पकवान का भोग लगाकर
दर्शन के लिए कपाट
खोले गए। कपाट खुलते
ही “ॐ गणपतये नमः”
के जयकारों से पूरा क्षेत्र
गणेशमय हो उठा।
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