नए लेबर कोड से बदलेगा कारपेट उद्योग का चेहरा
सीईपीसी के
वेबिनार
में
निर्यातकों
की
भागीदारी,
कारीगरों
की
सुरक्षा
और
व्यापार
को
गति
देने
पर
गहन
मंथन
निर्यातकों को
किया
जागरूक,
कारीगरों
के
अधिकार
और
बिज़नेस
ग्रोथ
पर
फोकस
श्रम कानूनों
में
बदलाव
से
कालीन
निर्यात
को
मिलेगी
नई
ताकत
नए नियमों
से
सुरक्षा,
सम्मान
और
‘ईज़
ऑफ
डूइंग
बिज़नेस’
को
मिलेगा
बढ़ावा
सुरेश गांधी
वाराणसी. कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (सीईपीसी) ने अपने रजिस्टर्ड
सदस्य निर्यातकों को नए श्रम
कानूनों और उनके प्रभाव
से अवगत कराने के
लिए एक विशेष वेबिनार
का आयोजन किया। इस वेबिनार में
50 से अधिक निर्यातकों ने
हिस्सा लिया, जहां इंडियन हैंडमेड
कारपेट इंडस्ट्री पर नए लेबर
कोड्स के प्रभाव पर
विस्तार से चर्चा हुई।
वेबिनार की शुरुआत सीईपीसी
की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ऑफिशिएटिंग) डॉ. स्मिता नागरकोटी
के स्वागत संबोधन से हुई। इसके
बाद चेयरमैन कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर ने अपने कीनोट
एड्रेस में इस पहल
के उद्देश्य को स्पष्ट करते
हुए कहा कि बदलते
श्रम कानूनों के बीच निर्यातकों
को जागरूक करना समय की
जरूरत है।
मुख्य वक्ता के रूप में
वी.वी. गिरी नेशनल
लेबर इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो
डॉ. संजय उपाध्याय ने
बताया कि केंद्र सरकार
ने 29 श्रम कानूनों को
समाहित कर चार लेबर
कोड बनाए हैं, जिनका
उद्देश्य कानूनों को सरल बनाना,
सामाजिक सुरक्षा को सार्वभौमिक करना
और कार्यबल को औपचारिक रूप
देना है। उन्होंने कोड
ऑन वेजेज 2019, कोड ऑन सोशल
सिक्योरिटी 2020, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस
कोड 2020 और इंडस्ट्रियल रिलेशन्स
कोड 2020 की विस्तार से
जानकारी दी।
उन्होंने जोर देकर कहा
कि यदि इन कोड्स
को प्रभावी तरीके से लागू किया
जाए तो यह कारीगरों
को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर अवसर
प्रदान कर सकते हैं,
जिससे भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग को वैश्विक स्तर
पर मजबूती मिलेगी। पूर्व उप मुख्य श्रम
आयुक्त (केंद्रीय) तेज बहादुर ने
अपने संबोधन में मजदूरी की
नई परिभाषा, पीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण
पर पड़ने वाले प्रभावों
की विस्तार से जानकारी दी।
साथ ही अनुबंध श्रम
व्यवस्था में नियोक्ता और
ठेकेदार की जिम्मेदारियों और
श्रमिकों के अधिकारों पर
भी प्रकाश डाला।
वेबिनार के ओपन हाउस
सत्र में निर्यातकों ने
सक्रिय रूप से अपने
सवाल रखे, जिनका विशेषज्ञों
ने विस्तार से जवाब दिया।
समापन सत्र में सीईपीसी
के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने
कहा कि यह वेबिनार
निर्यातकों के लिए बेहद
उपयोगी और मार्गदर्शक साबित
हुआ। उन्होंने सभी प्रतिभागियों और
विशेषज्ञों का आभार व्यक्त
किया। यह इंटरैक्टिव सत्र
न केवल जागरूकता बढ़ाने
में सफल रहा, बल्कि
कारपेट उद्योग को नए श्रम
कानूनों के अनुरूप ढालने
की दिशा में एक
महत्वपूर्ण पहल भी साबित
हुआ।

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