Wednesday, 27 August 2025

जाति नहीं, काम और मेरिट के आधार पर होती हैं नियुक्तियां

जाति नहीं, काम और मेरिट के आधार पर होती हैं नियुक्तियां 

बेनकाब हुआ ठाकुरवाद का झूठा नरेटिव, डीएम पोस्टिंग पर जातिगत भ्रम फैलाने वालों की पोल खुली, योगी सरकार ने गढ़ा संतुलन

डीएम पोस्टिंग में सबसे ज्यादा ओबीसी, ठाकुर सबसे कम, योगी सरकार को बदनाम करने की कोशिश नाकाम

सुरेश गांधी

वाराणसी. उत्तर प्रदेश को लेकर यह नरेटिव फैलाने की कोशिश हुई कि प्रदेश में सिर्फ ठाकुर अफसरों का दबदबा है और जिलाधिकारी की पोस्टिंग जातिवाद पर आधारित है। मगर हकीकत इसके उलट सामने आई है। या यूं कहे यूपी में जातिवाद का झूठा नरेटिव गढ़कर योगी सरकार को बदनाम करने की कोशिश करने वालों की पोल अब खुल चुकी है। 

विपक्षी खेमे से लेकर कुछ मीडिया हलकों तक यह अफवाह उड़ाई गई कि यूपी में “ठाकुरवाद चल रहा है और सबसे ज्यादा जिलाधिकारी ठाकुर वर्ग से हैं। लेकिन वास्तविक आंकड़े इस प्रचार को करारा तमाचा हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि योगी सरकार में डीएम की नियुक्तियां जातिगत दबाव पर नहीं बल्कि काम, दक्षता और मेरिट के आधार पर हुई हैं। मतलब साफ है यूपी में “ठाकुरवाद का शोर मचाने वालों को आंकड़ों ने आईना दिखा दिया है। योगी सरकार ने साबित किया है कि यह “सनातन सरकार जातिवाद नहीं, विकास और कामकाज पर चलती है। साथ ही प्रशासनिक नियुक्तियों के जरिये योगी सरकार ने यह संदेश दे दिया है कि “काम ही पहचान है, जाति नहीं।

संतुलन की तस्वीर

ठाकुर डीएम (12) : गोरखपुर, आज़मगढ़, बहराइच, देवरिया, प्रतापगढ़, सोनभद्र, बलरामपुर, अयोध्या, फतेहपुर, कन्नौज, मथुरा और बिजनौर।

ओबीसी डीएम (21) : वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, बलिया, बस्ती, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, श्रावस्ती, गोंडा, सीतापुर, बाराबंकी, हरदोई, उन्नाव, जालौन, झांसी, चंदौली, भदोही और अमेठी।

ब्राह्मण डीएम (19) : मेरठ, सहारनपुर, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, रामपुर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर, बरेली, फर्रुखाबाद, एटा, कासगंज, कानपुर, हमीरपुर और बांदा।

एससी/एसटी व अल्पसंख्यक डीएम (23) : मिर्जापुर, चित्रकूट, महोबा, ललितपुर, गाजियाबाद, नोएडा (गौतमबुद्ध नगर), हापुड़, अमरोहा, संभल, बरेली, सीतापुर, संतकबीरनगर, महाराजगंज, चंदौली, बलिया, अमेठी, रायबरेली, कानपुर देहात, शाहजहांपुर, सिद्धार्थनगर, कौशांबी, अंबेडकरनगर और आजमगढ़।

क्या कहते हैं आंकड़े?

यह स्पष्ट है कि प्रदेश में डीएम की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी ओबीसी वर्ग के अफसरों के पास है। दलित-आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग को भी बड़ा प्रतिनिधित्व मिला है। जबकि ठाकुर, जिन पर सबसे ज्यादा आरोप लगाए गए, वे वास्तव में सबसे कम संख्या में हैं।

नरेटिव की पोल

प्रचार :यूपी में ठाकुर डीएम ही सबसे ज्यादा हैं

सच्चाई : हकीकत में ठाकुर सबसे कम हैं। सबसे ज्यादा जिम्मेदारी ओबीसी व एससी-एसटी अधिकारियों के पास है।

सनातन सरकार, सनातन सोच

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार को लोग सनातन सरकार भी कह रहे हैं, क्योंकि यह शासन न केवल धर्म-संस्कृति की रक्षा कर रहा है बल्कि विकास कार्यों में भी नये मानक स्थापित कर रहा है।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर से लेकर राम मंदिर तक आस्था के केंद्र सशक्त हुए।

बुनियादी ढांचे में एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट और निवेश योजनाएं तेजी से आगे बढ़ी हैं।

प्रशासनिक नियुक्तियों में जातिवाद की जगह कार्यकुशलता और ईमानदारी को महत्व मिला है।

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