Saturday, 23 May 2026

मदरसा नियुक्तियों में भ्रष्टाचार का आरोप, कार्रवाई की मांग तेज

मदरसा नियुक्तियों में भ्रष्टाचार का आरोप, कार्रवाई की मांग तेज 

पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सरवर सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री से की जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग

वाराणसी। उत्तर प्रदेश में मदरसों की कार्यप्रणाली और नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सरवर सिद्दीकी ने प्रदेश सरकार से कथित मदरसा माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में कुछ कथित तत्व मदरसा शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं और इससे समाज में भय एवं असंतोष का वातावरण पैदा हो रहा है।

सरवर सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि कुछ कथित लोग धर्म और सामाजिक पहचान की आड़ लेकर प्रभावशाली छवि बनाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज में सफेदपोश बनकर रहते हैं और अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मदरसों में नियुक्तियों के नाम पर बड़े स्तर पर अनियमितताएं हो रही हैं। 

उनके अनुसार, मदरसा में नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 20 से 25 लाख रुपये तक की धनराशि वसूले जाने की शिकायतें सामने रही हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल शिक्षा व्यवस्था बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है।

पूर्व राज्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में किसी भी प्रकार की भ्रष्ट व्यवस्था समाज के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई व्यक्ति या संगठन दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था स्थापित करना है, ऐसे में शिक्षा संस्थानों में किसी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए. 

जब स्वर्ग से उतरी थी मुक्ति की धारा, तब जन्मी थी भारत की आत्मा

जब स्वर्ग से उतरी थी मुक्ति की धारा, तब जन्मी थी भारत की आत्मा 

            हिमालय की गोद से निकलकर मैदानों के हृदय को स्पर्श करती हुई जब गंगा बहती है, तो वह केवल जल नहीं बहाती, वह अपने साथ हजारों वर्षों की सभ्यता, संस्कृति, इतिहास और भावनाओं को भी प्रवाहित करती चलती है। भारत में नदियां केवल भौगोलिक संरचना नहीं हैं, वे जीवन की वाहक, संस्कृति की संरक्षिका और आस्था की आधारशिला हैं। इनमें भी मां गंगा का स्थान सर्वोच्च है। गंगा भारतीय जनमानस में एक नदी नहीं, बल्कि मां के रूप में पूजित हैं। उनकी लहरों में मोक्ष की कामना है, घाटों पर अध्यात्म की अनुभूति है और जल की हर बूंद में जीवन का संदेश छिपा है। गंगा दशहरा उसी दिव्य क्षण की स्मृति है, जब राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। यह केवल धार्मिक आस्था का उत्सव नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के बीच उस पवित्र संबंध का प्रतीक भी है, जो हमें संवेदनशीलता, करुणा और संरक्षण की सीख देता है। गंगा के प्रति श्रद्धा केवल दीपदान या स्नान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनकी निर्मलता और अविरलता की रक्षा भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। क्योंकि यदि गंगा बहती रहेंगी, तभी संस्कृति सांस लेती रहेगी, और यदि संस्कृति जीवित रहेगी, तभी भारत अपनी आत्मा के साथ खड़ा रहेगा… 

सुरेश गांधी

गंगे तव दर्शनात् मुक्तिःअर्थात गंगा के दर्शन मात्र से मुक्ति प्राप्त होती है। यह केवल शास्त्रों का वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय जनमानस की सदियों पुरानी आस्था का सार है। भारत की सांस्कृतिक चेतना में यदि कोई धारा निरंतर बहती रही है, तो वह गंगा है। वह केवल हिमालय से निकलने वाली एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता का प्राणतत्व, संस्कृति की आत्मा और करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। उसकी लहरों में इतिहास बोलता है, घाटों पर परंपराएं सांस लेती हैं और उसकी धारा में भारतीयता का दर्शन प्रवाहित होता है। गंगा दशहरा उसी दिव्य क्षण का उत्सव है, जब स्वर्ग से पृथ्वी पर मां गंगा का अवतरण हुआ था। यह केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता के उद्धार, प्रकृति के सम्मान और आत्मिक शुद्धि का उत्सव है। यह दिन हमें बताता है कि गंगा केवल पूजा का विषय नहीं, संरक्षण का भी विषय है। है। स्कंद पुराण के अनुसार

ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे प्राप्य प्रतिपदं तिथिम्।

दशाश्वमेधिके स्नात्वा मुच्यते जन्मपातकैः।।

ज्येष्ठे शुक्लद्वितीयायां स्नात्वा रुद्रसरोवरे।

जन्मद्वयकृतं पापं तत्क्षणादेव नश्यति।।

अर्थात ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा को इस दशाश्वमेधतीर्थ में स्नान करने से जन्म भर के संचित पाप दूर हो जाते हैं और उसी जेठ सुदी द्वितीया को इस रुद्रसरोवर तीर्थ में स्नान करने से दो जन्म के संचित पापों से तुरंत छुट्टी मिल जाती है।

भागीरथ तपस्या और गंगा अवतरण की अमर कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्यवंशी राजा सगर के 60 हजार पुत्र महर्षि कपिल के श्राप से भस्म हो गए थे। उनके उद्धार के लिए पीढ़ियों तक तपस्या होती रही। अंततः राजा भगीरथ ने कठोर तप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने गंगा को पृथ्वी पर भेजने की सहमति दी, लेकिन समस्या यह थी कि गंगा का वेग इतना प्रचंड था कि पृथ्वी उसका भार सह नहीं सकती थी। तब भगवान शिव ने अपनी विशाल जटाओं में गंगा को धारण किया और धीरे-धीरे उसे पृथ्वी पर प्रवाहित किया। इसी कारण शिव कोगंगाधरकहा जाता है और गंगा के पृथ्वी पर प्रथम स्पर्श का दिनगंगा दशहराकहलाया। गंगा की यह कथा केवल पौराणिक आख्यान नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि महान उपलब्धियां त्याग, तपस्या और धैर्य से प्राप्त होती हैं।

तिथि और शुभ संयोग

वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 25 मई 2026 को प्रातः 4:28 बजे आरंभ होगी और 26 मई को प्रातः 5:11 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर गंगा दशहरा सोमवार, 25 मई 2026 को मनाया जाएगा। इस वर्ष पर्व कई विशेष ज्योतिषीय संयोग लेकर आया है। दोपहर 3:44 बजे सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिसके साथ नौतपा की शुरुआत होगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य का यह गोचर विशेष रूप से वृषभ, मिथुन, सिंह और धनु राशि के लिए शुभ माना जा रहा है। हालांकि ज्योतिषीय फलादेश आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं और इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इन राशियों को होगा लाभ

25 मई को गंगा दशहरा पर दोपहर 03: 44 पर सूर्य रोहिणी नक्षत्र में गोचर करेंगे, जिसके बाद नौतपा भी शुरू हो जाएगा. सूर्य का इस नक्षत्र में आना 4 राशियों के लिए लाभकारी होगा. खास यह है कि गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर ग्रहों के राजा सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन होने वाला है. ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, गंगा दशहरा पर सूर्य चंद्रमा के स्वामित्व वाले नक्षत्र रोहिणी में गोचर करेंगे. और 8 जून तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. यह गोचर सभी के राशियों में बदलाव लाएगा, लेकिन वृषभ, मिथुन, सिंह समेत चार राशियों के लिए सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में आना लाभकारी हो सकता है. वृषभ राशि- सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में गोचर वृषभ राशि वालों के लिए करियर क्षेत्र में तरक्की के मार्ग खोलने वाला साबित होगा. इस समय आर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी और सेहत-संबंधों में सुधार होगा. इस दौरान पुराने निवेश से भी लाभ मिल सकता है. मिथुन राशि- गंगा दशहरा पर सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन का लाभ मिथुन राशि वाले जातकों को भी मिलेगा. मां गंगा के आशीर्वाद से करियर के नए द्वार खुलेंगे और उनकी मेहनत का फल मिलने का समय शुरू होगा. व्यापार में भी अच्छी उन्नति होगी, जिससे उन्हें मानसिक रूप से शांति मिलेगी. सिंह राशि- सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. लंबे समय से रुका प्रमोशन या सैलरी बढ़ने की उम्मीद लगाए लोगों की मुराद पूरी हो सकती है. आमदनी के नए रास्ते खुलने से बैंक बैलेंस बढ़ेगा और मानसिक तनाव दबाव हमेशा के लिए विदा हो जाएंगे.  धनु राशि- गंगा दशहरा पर होने वाला सूर्य नक्षत्र परिवर्तन धनु राशि वालों की परेशानियों को कम करने वाला साबित होगा. आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है. इस समय यात्रा के योग भी बन सकते हैं.

दशहरा : दस पापों का नाश

दशहराशब्द संस्कृत केदशऔरहरासे बना है अर्थातदस पापों का हरण करने वाला। शास्त्रों के अनुसार मनुष्य के दस प्रमुख पाप माने गए हैं :कायिक पाप, हिंसा, चोरी, परस्त्रीगमन, वाचिक पाप, झूठ, कटु वचन,चुगली, असत्य प्रचार, मानसिक पाप, : काम, क्रोध, लोभ. मान्यता है कि गंगा दशहरा पर श्रद्धा पूर्वक स्नान, दान और पूजन से इन पापों से मुक्ति प्राप्त होती है।

गंगा : धर्म ही नहीं, पर्यावरण चेतना की भी धारा

आज गंगा के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती बाहरी नहीं, बल्कि मानवीय व्यवहार है। करोड़ों लोग गंगा को मां कहते हैं, लेकिन वही गंगा प्लास्टिक, रासायनिक अपशिष्ट और सीवेज प्रदूषण की मार भी झेल रही है। विडंबना यह है कि जिस नदी को हम मोक्षदायिनी कहते हैं, उसी को प्रदूषण से मुक्त रखने में अक्सर पीछे रह जाते हैं। गंगा दशहरा का वास्तविक अर्थ केवल दीप प्रवाहित करना नहीं, बल्कि यह संकल्प लेना भी है : गंगा को पूजेंगे ही नहीं, संरक्षित भी करेंगे। गंगा में प्लास्टिक नहीं डालेंगे. जल का अनावश्यक दुरुपयोग नहीं करेंगे. नदियों के प्राकृतिक प्रवाह का सम्मान करेंगे. पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली बनाएंगे. गंगा की स्वच्छता ही वास्तविक गंगा भक्ति है।

गंगा स्नान, दान और पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना, सूर्य को अर्घ्य देना, दीपदान करना, अन्न, वस्त्र और जल का दान करना, गंगा मंत्रों का जप करना विशेष पुण्यदायी माना गया है।

प्रचलित मंत्र

" ऐं ह्रीं श्रीं भगवती गंगे नमो नमः"

" नमः शिवाय नारायणाय दशहरायै गंगायै नमः"

मान्यता है कि निष्कपट भाव से मां गंगा का स्मरण भी आत्मिक शांति प्रदान करता है।

काशी और दशाश्वमेध : जहां आस्था का महासंगम होता है

काशी में गंगा केवल नदी नहीं, जीवन का दर्शन है। यहां के घाट केवल पत्थरों की सीढ़ियां नहीं, बल्कि भारतीय अध्यात्म की जीवंत पाठशाला हैं। दशाश्वमेध घाट का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि यहां स्नान और दशाश्वमेधेश्वर महादेव के दर्शन से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है। सुबह की आरती से लेकर शाम की गंगा आरती तक काशी में गंगा दशहरा आध्यात्मिक ऊर्जा के महाउत्सव में बदल जाता है।

जहां दिखती है गंगा दशहरा की भव्यता

हरिद्वारहर की पौड़ी पर लाखों श्रद्धालुओं का स्नान और भव्य आरती

वाराणसीघाटों पर दीपदान, गंगा आरती और विशेष पूजन

प्रयागराज संगम में स्नान और धार्मिक अनुष्ठान

गंगोत्री गंगा उद्गम स्थल पर विशेष पूजा

गंगा को श्रद्धा से आगे संरक्षण तक ले जाना होगा

गंगा दशहरा हमें केवल पूजा की विधि नहीं सिखाता, बल्कि जीवन की संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाता है। यदि गंगा हमारी संस्कृति की सांसें हैं, तो उन सांसों को जीवित रखने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है। आज आवश्यकता केवल गंगा की आरती उतारने की नहीं, बल्कि उसके अस्तित्व की रक्षा करने की भी है। क्योंकि सभ्यताएं तब तक जीवित रहती हैं, जब तक उनकी नदियां जीवित रहती हैं। मां गंगा के प्रति हमारी श्रद्धा तब सार्थक होगी, जब आने वाली पीढ़ियां भी उसी निर्मल धारा को देखें, जिसे हमारे पूर्वजों नेमोक्षदायिनीकहा था। गंगा केवल नदी नहींवह भारत की बहती हुई संस्कृति है, और संस्कृति की सांसें कभी रुकनी नहीं चाहिए।

मदरसा नियुक्तियों में भ्रष्टाचार का आरोप, कार्रवाई की मांग तेज

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