Wednesday, 11 February 2026

‘विकास की रफ्तार, आत्मनिर्भरता का आधार’, विकास और सुशासन की नई इबारत

विकास की रफ्तार, आत्मनिर्भरता का आधार’, विकास और सुशासन की नई इबारत

युवा, महिला, किसान और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस, काशी-विंध्य क्षेत्र को पर्यटन हब बनाने की बड़ी तैयारी

सुरेश गांधी 

वाराणसी. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत किया गया ₹9,12,696.35 करोड़ का बजट प्रदेश के समग्र विकास, सुशासन और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के संकल्प को मजबूत करने वाला बताया जा रहा है। प्रदेश के आयुष, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्रदयालुने विधान सभा में बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट 25 करोड़ प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला और उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।

डॉ. दयालु ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा प्रस्तुत यह बजट जनकल्याण, सामाजिक संतुलन और आर्थिक उन्नति का संतुलित खाका प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह प्रयास प्रदेश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत नींव रखेगा। वहीं भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल ने बजट को प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा और दूरदर्शी बजट बताते हुए कहा कि इसमें युवाओं, महिलाओं, किसानों और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में यह बजट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह बजट समावेशी विकास और आधुनिक तकनीक के संतुलन का सशक्त उदाहरण है औरसबका साथ, सबका विकासकी भावना को मजबूती प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि इस बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल की गई हैं, जो प्रदेश को नई विकास गति प्रदान करेंगी। वाराणसी में पर्यटन और संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान विशेष रूप से स्वागत योग्य बताया गया है। बजट की सराहना करने वालों में अशोक चौरसिया, राकेश शर्मा, क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी नवरतन राठी और संतोष सोलापुरकर सहित कई नेताओं ने इसे प्रदेश के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इस बजट के माध्यम से वाराणसी जिले को विशेष सौगातें मिली हैं, जिससे काशी के पर्यटन और धार्मिक महत्व को वैश्विक पहचान मिलने की संभावना बढ़ेगी।

सरकार ने वाराणसी और विंध्याचल में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटक सुविधाओं के विस्तार की बड़ी योजना बनाई है। विंध्यवासिनी देवी धाम और वाराणसी में पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए 100-100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इन योजनाओं से वाराणसी-मिर्जापुर क्षेत्र को प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। साथ ही संपर्क व्यवस्था और पर्यटक अनुभव में व्यापक सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। बजट में पूर्वांचल के बड़े शहरों बनारस, गोरखपुर और प्रयागराज के लिए मेट्रो परियोजनाओं का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिससे शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप मिलने की संभावना है।

प्रदेश सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह बजटविकसित भारत के संकल्पऔरविजन-2047’ को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2017-18 में प्रदेश का बजट जहां लगभग 3.85 लाख करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 9.13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। नौ वर्षों में बजट आकार में यह अभूतपूर्व वृद्धि प्रदेश की मजबूत होती अर्थव्यवस्था और विकास की तेज रफ्तार को दर्शाती है। संतोष सोलापुरकर का कहना है कि यदि बजट की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं तो उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला अग्रणी राज्य बन सकता है.

‘ट्रिलियन डॉलर यूपी’ की ओर बढ़ता बजट

ट्रिलियन डॉलर यूपीकी ओर बढ़ता बजट  

उत्तर प्रदेश का वर्ष 2025-26 का बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक दिशा और राजनीतिक संकल्प का स्पष्ट रोडमैप बनकर सामने आया है। 30.8 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के साथ प्रदेश ने विकास की नई छलांग का संकेत दिया है। वित्तीय अनुशासन, आधारभूत संरचना विस्तार, औद्योगिक निवेश और सामाजिक योजनाओं के संतुलित समन्वय से यह बजटविकसित उत्तर प्रदेश 2047’ की आधारशिला रखने की कोशिश करता दिखता है

सुरेश गांधी

उत्तर प्रदेश का वर्ष 2025-26 का बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा भर नहीं है, बल्कि यह उस आर्थिक आत्मविश्वास का दस्तावेज है जो प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 30.8 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के साथ 12 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य यह दर्शाता है कि प्रदेश अब विकास की रफ्तार को बनाए रखने के साथ उसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी में है। खास बात यह है कि यह बजट विकास योजनाओं के विस्तार और वित्तीय अनुशासन के संतुलन का संकेत देता है, जो किसी भी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025-26 में 7.57 लाख करोड़ रुपये के शुद्ध व्यय का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमानों से 17 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि स्पष्ट संकेत देती है कि सरकार आधारभूत संरचना, औद्योगिक निवेश और सामाजिक योजनाओं के विस्तार पर जोर दे रही है। इसके साथ ही 6.65 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध प्राप्तियों का अनुमान यह बताता है कि सरकार राजस्व संग्रह को मजबूत करने में भी सफल रही है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकार ने जीएसडीपी के 2.6 प्रतिशत राजस्व अधिशेष का अनुमान जताया है। आम तौर पर बड़े विकास बजट में राजस्व घाटा देखने को मिलता है, लेकिन अधिशेष की स्थिति प्रदेश की वित्तीय मजबूती और बेहतर कर प्रबंधन को दर्शाती है।

राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य भी वित्तीय अनुशासन की दिशा में मजबूत कदम माना जा सकता है। यह केवल प्रदेश की आर्थिक विश्वसनीयता को बढ़ाएगा बल्कि भविष्य में बड़े निवेश को आकर्षित करने में भी सहायक होगा। निवेशकों के लिए यह संकेत महत्वपूर्ण होता है कि राज्य अपनी आर्थिक सीमाओं के भीतर रहकर विकास योजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता आधारभूत संरचना पर निरंतर जोर है। चार नए एक्सप्रेसवे निर्माण की योजना प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। एक्सप्रेसवे केवल परिवहन सुविधा नहीं होते, बल्कि वे औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के नए अवसरों का मार्ग भी खोलते हैं। आगरा-लखनऊ, गंगा, विंध्य और बुंदेलखंड-रीवा एक्सप्रेसवे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे। साथ ही मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए किया गया प्रावधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगा।

औद्योगिक विकास की दिशा में रक्षा औद्योगिक गलियारे की स्थापना का प्रस्ताव भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से औद्योगिक निवेश की प्रतीक्षा करता रहा है। रक्षा गलियारे से केवल लगभग 9,500 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है बल्कि इससे क्षेत्रीय रोजगार और तकनीकी विकास को भी नई गति मिलेगी। यह पहल प्रदेश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिला सकती है। डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में प्रदेश का कदम भी उल्लेखनीय है। आठ डेटा सेंटर पार्क स्थापित करने की योजना उत्तर प्रदेश को तकनीकी निवेश के केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है। डिजिटल सेवाओं और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बढ़ता निवेश आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिक संरचना को मजबूत करेगा। यह संकेत है कि प्रदेश पारंपरिक उद्योगों के साथ आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में भी संतुलित विकास की नीति अपना रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र में सौर परियोजनाओं का विस्तार सतत विकास की दिशा में सकारात्मक पहल है। जालौन और झांसी में प्रस्तावित सौर ऊर्जा परियोजनाएं केवल प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायक होंगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी। ऊर्जा आत्मनिर्भरता औद्योगिक विकास की बुनियादी आवश्यकता होती है और यह पहल उसी दिशा में उठाया गया कदम है। सामाजिक विकास के क्षेत्र में अटल आवासीय विद्यालयों की क्षमता बढ़ाने का निर्णय श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में सराहनीय प्रयास है। यह पहल सामाजिक समावेशन और शिक्षा के विस्तार को मजबूत करेगी। विकास तभी सार्थक माना जाता है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और यह योजना उसी सोच को दर्शाती है।

हालांकि प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय अभी राष्ट्रीय औसत से कम है, लेकिन इसमें लगातार वृद्धि यह संकेत देती है कि आर्थिक विकास का लाभ धीरे-धीरे व्यापक स्तर पर पहुंच रहा है। सेवा क्षेत्र, कृषि और विनिर्माण क्षेत्र का संतुलित योगदान प्रदेश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करता है। विनिर्माण क्षेत्र की तेज वृद्धि औद्योगिक विस्तार की संभावनाओं को मजबूत करती है। कुल मिलाकर यह बजट उत्तर प्रदेश की आर्थिक महत्वाकांक्षा और प्रशासनिक रणनीति का स्पष्ट संकेत देता है। इसमें विकास, निवेश, सामाजिक योजनाओं और वित्तीय अनुशासन का संतुलित मिश्रण दिखाई देता है। हालांकि बजट की सफलता अंततः उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। यदि योजनाएं समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू होती हैं तो यह बजट उत्तर प्रदेश को देश की आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

उत्तर प्रदेश का यह बजट विकास की तेज रफ्तार और वित्तीय अनुशासन का संतुलित मिश्रण प्रस्तुत करता है। यह केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का प्रयास है, बल्कि निवेश, रोजगार और सामाजिक विकास के बहुआयामी मॉडल को स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। अब चुनौती इन योजनाओं को धरातल पर उतारने की है, क्योंकि बजट की सफलता अंततः उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर ही निर्भर करेगी।

आर्थिक मजबूती का संकेत देता संतुलित वित्तीय ढांचा

प्रदेश सरकार ने 2025-26 में 7,57,333 करोड़ रुपये के शुद्ध व्यय का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमानों से 17 प्रतिशत अधिक है। वहीं 6,65,933 करोड़ रुपये की शुद्ध प्राप्तियों का अनुमान वित्तीय संसाधनों की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि सरकार ने जीएसडीपी के 2.6 प्रतिशत (79,516 करोड़ रुपये) के राजस्व अधिशेष का अनुमान जताया है। यह संकेत देता है कि सरकार खर्च बढ़ाने के बावजूद आय और वित्तीय अनुशासन में संतुलन बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य भी वित्तीय प्रबंधन की गंभीरता को दर्शाता है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 3.4 प्रतिशत रहने की संभावना थी। यह सुधार प्रदेश की आर्थिक विश्वसनीयता को मजबूत करेगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में सहायक होगा।

एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटीः विकास की रीढ़

प्रदेश के विकास मॉडल में आधारभूत संरचना हमेशा प्रमुख रही है। इस बजट में 1,050 करोड़ रुपये की लागत से चार नए एक्सप्रेसवे निर्माण की योजना इस दिशा में बड़ा कदम है। आगरा-लखनऊ, गंगा, विंध्य और बुंदेलखंड-रीवा एक्सप्रेसवे प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक नक्शे को नई दिशा देंगे। ग्रामीण कनेक्टिविटी को भी नजरअंदाज नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देगा। बेहतर सड़कें कृषि उत्पादों की बाजार तक पहुंच और रोजगार अवसरों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगी।

रक्षा गलियारा और औद्योगिक निवेश की नई संभावनाएं

बुंदेलखंड-रीवा एक्सप्रेसवे के समानांतर 461 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित रक्षा औद्योगिक गलियारा प्रदेश की औद्योगिक पहचान को मजबूत करेगा। अनुमानित 9,500 करोड़ रुपये का निवेश केवल रोजगार सृजन करेगा बल्कि उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते कदम

प्रदेश में आठ डेटा सेंटर पार्क स्थापित करने की योजना डिजिटल क्रांति की दिशा में बड़ा संकेत है। 900 मेगावाट क्षमता वाले इन डेटा सेंटरों से आईटी और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। इससे प्रदेश राष्ट्रीय और वैश्विक तकनीकी निवेश के नक्शे पर मजबूत स्थान बना सकता है।

हरित ऊर्जा और सतत विकास का संतुलन

जालौन में 500 मेगावाट और झांसी में 200 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। 2,500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना प्रदेश के ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने के साथ औद्योगिक विकास को भी गति देगी।

सामाजिक विकास में शिक्षा का विस्तार

अटल आवासीय विद्यालयों की क्षमता 360 से बढ़ाकर 1,000 करने का निर्णय श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा को नई दिशा देगा। यह पहल सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की नीति को मजबूत करती है।

आर्थिक संरचना में संतुलित क्षेत्रीय विकास

प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र 46 प्रतिशत योगदान के साथ अग्रणी है, जबकि कृषि और विनिर्माण दोनों मिलकर 27 प्रतिशत योगदान दे रहे हैं। विनिर्माण क्षेत्र की 13 प्रतिशत वृद्धि दर औद्योगिक विस्तार की संभावनाओं को दर्शाती है। हालांकि प्रति व्यक्ति आय अभी राष्ट्रीय औसत से कम है, लेकिन 10.4 प्रतिशत की वृद्धि यह संकेत देती है कि प्रदेश धीरे-धीरे आर्थिक असमानता कम करने की दिशा में बढ़ रहा है।

राजनीतिक और विकासात्मक संदेश

यह बजट स्पष्ट रूप से विकास और निवेश आधारित शासन मॉडल को आगे बढ़ाता है। आधारभूत ढांचे, उद्योग, डिजिटल क्षेत्र और सामाजिक योजनाओं का संतुलित संयोजन सरकार की दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाता है। आगामी वर्षों में यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है, तो उत्तर प्रदेश देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है।

‘विकास की रफ्तार, आत्मनिर्भरता का आधार’, विकास और सुशासन की नई इबारत

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