Sunday, 1 February 2026

अंतरराष्ट्रीय मंच पर काशी की सीए सुदेशना बसु को वुमेन्स एक्सीलेंस अवॉर्ड

जब पेशे से आगे बढ़कर करुणा बनी पहचान

अंतरराष्ट्रीय मंच पर काशी की सीए सुदेशना बसु को वुमेन्स एक्सीलेंस अवॉर्ड

आवारा घायल पशुओं की सेवा को मिली वैश्विक सराहना

पेशेवर सफलता और सामाजिक संवेदना का संगम

सुरेश गांधी

वाराणसी. ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 30 जनवरी से 1 फरवरी 2026 तक आयोजित वर्ल्ड फोरम ऑफ अकाउंटेंट्स (WOFA) का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इस वर्ष कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) द्वारा आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन में भारत सहित दुनिया भर के लगभग दस हजार चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने भाग लेकर लेखा, वित्त और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े विमर्श को नई दिशा दी।

इसी भव्य आयोजन के समापन सत्र में काशी की वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट और समाजसेवी सीए श्रीमती सुदेशना बसु को Women's Excellence Award से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें किसी कॉर्पोरेट उपलब्धि या आर्थिक नवाचार के लिए नहीं, बल्कि सड़कों पर बेसहारा, घायल और बीमार पशुओं की निस्वार्थ सेवा के लिए प्रदान किया गयाजो अपने आप में इस सम्मेलन की सबसे संवेदनशील और प्रेरक उपलब्धि रही।  

कानून, संस्कृति और समाज के संगम पर सम्मान

सम्मान समारोह के दौरान भारत के केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री तथा संस्कृति एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल और जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने अपने कर-कमलों से सीए सुदेशना बसु को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर जब काशी की एक बेटी का नाम सामाजिक करुणा और सेवा के लिए गूंजा, तो यह क्षण केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल और काशी की सांस्कृतिक चेतना के लिए गौरवपूर्ण बन गया।  

जब अकाउंट्स से आगे बढ़कर इंसानियत बोली

सीए सुदेशना बसु वर्षों से वाराणसी की सड़कों पर घायल, बीमार और त्यक्त पशुओं के उपचार, संरक्षण और पुनर्वास के लिए समर्पित रूप से कार्य कर रही हैं। व्यस्त पेशेवर जीवन के बावजूद उन्होंने यह सिद्ध किया कि संवेदनशीलता समय या सुविधा की मोहताज नहीं होती। कई बार आधी रात को घायल पशु के इलाज के लिए निकल पड़ना, स्वयं संसाधन जुटाकर उपचार कराना और समाज को पशु कल्याण के प्रति जागरूक करनायह सब उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। उनकी यह सेवा तो प्रचार की आकांक्षा से प्रेरित रही, ही किसी मंच की अपेक्षा से। शायद इसी निस्वार्थ भाव ने उन्हें आज अंतरराष्ट्रीय सम्मान तक पहुंचाया।  

काशी के लिए गौरव, समाज के लिए संदेश 

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पेशेवर उत्कृष्टता और सामाजिक जिम्मेदारी एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। काशी, जो सदियों से करुणा, सह-अस्तित्व और जीवदया की भूमि रही है, आज उसी परंपरा को आधुनिक संदर्भ में आगे बढ़ते हुए देख रही है। सीए सुदेशना बसु की यह उपलब्धि विशेष रूप से युवाओं और पेशेवर वर्ग के लिए प्रेरणा है कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक ऊंचाइयों में नहीं, बल्कि समाज के सबसे असहाय वर्गचाहे वह इंसान हो या पशुके प्रति संवेदनशील होने में निहित है।  

अंतरराष्ट्रीय मंच से उठा मानवीय स्वर

वर्ल्ड फोरम ऑफ अकाउंटेंट्स जैसे वैश्विक मंच पर जब पशु सेवा जैसे विषय को सम्मान मिला, तो यह सम्मेलन के उद्देश्य को भी व्यापक बनाता है। यह दर्शाता है कि आज की वैश्विक सोच केवल बैलेंस शीट और मुनाफे तक सीमित नहीं, बल्कि करुणा, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व देती है। सीए सुदेशना बसु का सम्मान इस बात का प्रमाण है कि काशी केवल मोक्ष की नगरी ही नहीं, बल्कि करुणा की जीवंत प्रयोगशाला भी हैजहां सेवा, संवेदना और संस्कार आज भी सांस लेते हैं।

गुरु रविदास की जन्मस्थली पर उमड़ा आस्था का सैलाब, सीर गोवर्धनपुर में मेले सा दृश्य

गुरु रविदास की जन्मस्थली पर उमड़ा आस्था

का सैलाब, सीर गोवर्धनपुर में मेले सा दृश्य 

देशदृप्रदेश के कोने-कोने से पहुंचे रैदासी श्रद्धालु

नगीना सांसद चंद्रशेखर रावण ने टेका मत्था, लंगर में हुए शामिल

पीएम मोदी और सीएम योगी ने जयंती पर दी शुभकामनाएं

सुरेश गांधी

वाराणसी। संत शिरोमणि गुरु रविदास की जयंती के अवसर पर उनकी जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर आस्था, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का विराट केंद्र बन गई। रविवार को तड़के से ही बड़ी संख्या में रैदासी श्रद्धालु मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा और जन्मस्थली परिसर मेले के रूप में तब्दील हो गया।

श्रद्धालुओं ने संत रविदास के चरणों में मत्था टेककर सामाजिक समानता, मानवता और बंधुत्व के संदेश को स्मरण किया। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, जयघोष और गुरु वाणी की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह सेवा शिविर और लंगर की व्यवस्था की गई, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

इस अवसर पर नगीना सांसद चंद्रशेखर रावण भी संत रविदास की जन्मस्थली पहुंचे। उन्होंने मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन किया और रैदासी समाज के लोगों से मुलाकात कर उन्हें जयंती की बधाई दी। सांसद चंद्रशेखर रावण ने लंगर में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया और संत रविदास के विचारों को आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास का जीवन जाति, भेदभाव और असमानता के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है।

गुरु रविदास जयंती के अवसर पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी श्रद्धा प्रकट की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंचएक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर गुरु रविदास को सामाजिक समरसता और मानवता का महान प्रतीक बताते हुए देशवासियों को जयंती की शुभकामनाएं दीं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गुरु रविदास जयंती पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि संत रविदास ने अपने विचारों और कर्मों से समाज को समानता और सद्भाव का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि संतों की वाणी आज भी सामाजिक एकता की प्रेरणा है।

सीर गोवर्धनपुर में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था चाक-चौबंद रही। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार व्यवस्था संभालते नजर आए। श्रद्धालुओं के आवागमन, दर्शन और लंगर व्यवस्था को लेकर विशेष इंतज़ाम किए गए थे। गुरु रविदास की जयंती पर उमड़ा यह जनसैलाब केवल धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि वह संदेश भी था कि संत रविदास की विचारधारा आज भी समाज को जोड़ने और समरस भारत की कल्पना को साकार करने की शक्ति रखती है।

इतिहास, विज्ञान, हास्य और युवा चेतना का संगम बना बीएलएफ

इतिहास, विज्ञान, हास्य और युवा चेतना का संगम बना बीएलएफ 

अश्विन सांघी बोले, इतिहास अतीत नहीं, रचनात्मक भविष्य की नींव

खगोल विज्ञान से राष्ट्र निर्माण तक, युवाओं को मिला दिशा-संदेश

बाइचुंग भूटिया, एम.जे. अकबर और स्टैंडअप कॉमेडी ने रचा यादगार माहौल

सुरेश गांधी

वाराणसी। ताज गंगेज में आयोजित काशी साहित्य कला उत्सव (बनारस लिटरेचर फेस्टिवल4) के तीसरे दिन साहित्य केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इतिहास, विज्ञान, खेल, हास्य और एआई युग के राष्ट्र-निर्माण जैसे विषयों के साथ विचारों का विराट मंच बन गया। तीसरा दिन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि साहित्य, विज्ञान और संस्कृति मिलकर ही भविष्य का भारत गढ़ते हैं। सूबे के मंत्री रवीन्द्र जायसवाल व दयाशंकर मिश्र दयालु ने बीएलएफ के मेधावियों एवं विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय योगदान के लिए स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया.

सारस्वत मंच पर प्रख्यात लेखक अश्विन सांघी नेआध्यात्मिकता, आधुनिकता और साहित्यविषय पर संवाद में कहा कि इतिहास अतीत की कथा नहीं, बल्कि रचनात्मक भविष्य की मजबूत नींव है। तकनीक ने लेखकों के लिए शोध और लेखन को आसान बनाया है और कल्पनाशीलता के साथ इतिहास का प्रयोग साहित्य को गहराई देता है। इसी मंच पर अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त खगोल भौतिक विज्ञानी डॉ. देबीप्रसाद दुआरी नेन्यू होराइजन्सः खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान की चुनौतियाँविषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने चंद्रयान-3, मंगल मिशन, सूर्य-चंद्रमा, ग्रहण और अंतरिक्ष-समय जैसे विषयों को युवाओं से जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्र का निर्माण चेतन युवा पीढ़ी से ही होगा।

महिला-केंद्रित साहित्य पर आयोजित सत्रबीजी वोमेनमें लेखिका सिंजिनी कुमान और लेखक-पत्रकार सौरभ चक्रवर्ती ने महिलाओं की स्वतंत्रता, लेखन और सामाजिक जिम्मेदारियों पर सार्थक संवाद किया। सिंजिनी ने कहा कि यात्रा और लेखन महिलाओं को आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास देता है। ज्ञान गंगा मंच पर बीएलएफ की यात्रा पर संवाद में फेस्टिवल अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक और सचिव बृजेश सिंह ने इसे एक सांस्कृतिक आंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि बीएलएफ का लक्ष्य आधुनिकीकरण के साथ सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखना है।

दरबार हॉल में स्टैंडअप कॉमेडियन संदीप शर्मा की प्रस्तुति ने दर्शकों को ठहाकों से भर दिया, वहीं पूर्व फुटबॉल कप्तान बाइचुंग भूटिया ने संघर्ष, अनुशासन और समर्पण की प्रेरक कहानी साझा की। वरिष्ठ लेखक एम.जे. अकबर ने मुग़ल इतिहास और ज्योतिष पर बोलते हुए सांस्कृतिक सह-अस्तित्व का संदेश दिया, जबकि एआई युग में युवाओं की भूमिका पर पैनल चर्चा ने तकनीक, मूल्य और मानवता के संतुलन पर जोर दिया।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर काशी की सीए सुदेशना बसु को वुमेन्स एक्सीलेंस अवॉर्ड

जब पेशे से आगे बढ़कर करुणा बनी पहचान अंतरराष्ट्रीय मंच पर काशी की सीए सुदेशना बसु को वुमेन्स एक्सीलेंस अवॉर्ड आवारा ...