भाषण मंच पर, नजर टैबलेट पर!
काशी में दिखा योगी का ‘डिजिटल अवतार’
राष्ट्रीय पोषण
माह
के
मंच
प र
दिखा
अलग
अंदाज
: भाषण
से
पहले
योजना
से
खुद
को
अपडेट
किया,
कार्यक्रम
के
बीच
जरूरी
निर्देश
भी
दिए
सुरेश गांधी
वाराणसी। मंच पर राष्ट्रीय
पोषण माह का शंखनाद
हो रहा था। एक
के बाद एक वक्ता
पोषण, आंगनबाड़ी और बच्चों के
भविष्य की बात कर
रहे थे। सामने बैठे
हजारों लोगों की निगाहें मंच
की ओर थीं। लेकिन
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ की निगाहें एक
और ‘मंच’ पर टिकी
थीं—उनके हाथ में
मौजूद टैबलेट की स्क्रीन पर।
बुधवार को सिगरा स्थित
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में नौवें राष्ट्रीय
पोषण माह के शुभारंभ
समारोह की यह तस्वीर
भाषणों और घोषणाओं से
अलग एक ऐसी कहानी
कहती दिखी, जो शायद पूरे
कार्यक्रम की सबसे दिलचस्प
तस्वीर बन गई। मुख्यमंत्री कभी स्क्रीन पर
जानकारी देखते, कभी उसे पढ़ते
और जरूरत के मुताबिक अपने
सहयोगियों को निर्देश देते
नजर आए। यानी मंच
पर केवल भाषण सुनना
नहीं, योजना को समझना, उससे
खुद को अपडेट रखना
और उसी क्षण प्रशासनिक
दृष्टि से जरूरी बातों
पर नजर रखना भी
जारी था। यह दृश्य
इसलिए भी खास हो
गया क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की
तकनीकी दक्षता को लेकर अतीत
में राजनीतिक तंज कसे जाते
रहे हैं। 2019 में अखिलेश यादव
की ओर से उन्हें
‘लैपटॉप नहीं जानने’ वाला
कहे जाने की रिपोर्टें
सामने आई थीं। 2022 में
भी इसी तरह के
आरोपों के जवाब में
योगी ने कहा था
कि वे सरकारी योजनाओं
की निगरानी ई-डैशबोर्ड के
माध्यम से करते हैं।
काशी का यह दृश्य उसी
पुराने राजनीतिक नैरेटिव के बरक्स अपने
आप में एक मौन
जवाब जैसा नजर आया।
तब कहा गया था—‘लैपटॉप क्या जानें’
2019 में योगी को लेकर
ऐसा राजनीतिक तंज सामने आया था। 2022 में भी लैपटॉप-टैबलेट को लेकर सवाल उठे। उसी दौर
में योगी ने सरकारी योजनाओं की समीक्षा ई-डैशबोर्ड से करने की बात कही थी। बुधवार को काशी की तस्वीर
में हाथ में टैबलेट था और नजर स्क्रीन पर
भाषण सुनते हुए ‘अपडेट’ भी होते रहे
राष्ट्रीय पोषण माह का
कार्यक्रम कोई सामान्य सरकारी
समारोह नहीं था। काशी
से शुरू हुआ यह
अभियान देश के करीब
14 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ा है।
ऐसे में मुख्यमंत्री का
वक्ताओं को सुनते हुए
टैबलेट पर लगातार नजर
रखना महज तकनीक का
इस्तेमाल नहीं, बल्कि कार्यक्रम की विषयवस्तु से
उनकी सक्रिय भागीदारी का संकेत भी
माना जा सकता है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास
मंत्री अन्नपूर्णा देवी पोषण की
गुणवत्ता और आंगनबाड़ी की
भूमिका पर बोल रही
थीं। केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर देशभर में अभियान के
विस्तार की बात कर
रही थीं। प्रदेश की
मंत्री बेबी रानी मौर्य
जनभागीदारी और बच्चों के
समग्र विकास पर जोर दे
रही थीं। इसी दौरान
मुख्यमंत्री की नजरें टैबलेट
पर बनी रहीं। ऐसा
लगा मानो मंच पर
चल रहे भाषण और
स्क्रीन पर मौजूद सूचनाएं
एक साथ उनके सामने
दो समानांतर पाठ खोल रही
हों—एक सार्वजनिक, दूसरा
प्रशासनिक।
सिर्फ स्क्रीन नहीं, निर्णय की मेज भी साथ
मुख्यमंत्री का यह अंदाज
इसलिए और महत्वपूर्ण है
कि राष्ट्रीय पोषण माह का
अभियान केवल भाषणों तक
सीमित नहीं है। इसमें
आहार विविधता, पर्याप्त प्रोटीन, ताजा पका भोजन,
सामुदायिक जवाबदेही, प्रारंभिक बाल विकास, माताओं
की देखभाल और डिजिटल निगरानी
जैसे कई स्तर जुड़े
हैं। योगी ने अपने
संबोधन में खुद इन
विषयों का विस्तार से
उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश
में पिछले साढ़े नौ वर्षों में
70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी
केंद्रों का कायाकल्प किया
गया है। मॉडल आंगनबाड़ी
केंद्रों, ताजा भोजन, टीएचआर
प्लांट, क्यूआर कोड और रियल
टाइम निगरानी जैसी व्यवस्थाओं पर
भी उन्होंने विस्तार से बात की।
ऐसे में उनके हाथ
में टैबलेट की मौजूदगी महज
‘गैजेट’ की तस्वीर नहीं
रह जाती। यह उस बदलती
शासन शैली की तस्वीर
बन जाती है जिसमें
फाइलों के साथ स्क्रीन
और आंकड़ों के साथ रियल
टाइम जानकारी भी निर्णय प्रक्रिया
का हिस्सा बन रही है।
‘लैपटॉप नहीं चलाना जानते’ वाले तंज का उलटा फ्रेम
राजनीतिक गलियारों में योगी को
लेकर यह तंज नया
नहीं है। 2019 में अखिलेश यादव
के बयान को मीडिया
ने इसी शीर्षक के
साथ रिपोर्ट किया था कि
‘बाबा लैपटॉप क्या जानें’।
2022 में भी अखिलेश की
ओर से लैपटॉप और
टैबलेट इस्तेमाल करने की क्षमता
पर सवाल उठाए गए
थे। जवाब में योगी
ने कहा था कि
वे ई-डैशबोर्ड के
जरिए सरकारी योजनाओं की समीक्षा करते
हैं। लेकिन काशी में बुधवार
की तस्वीर में किसी जवाब
की जरूरत नहीं थी। स्क्रीन
पर चलती उंगलियां और
लगातार बदलती निगाहें ही अपना जवाब
देती दिखीं। यह किसी राजनीतिक
आरोप का प्रतिवाद करने
के लिए मंच से
दिया गया बयान नहीं
था। न कोई कटाक्ष,
न कोई पलटवार। बस
काम के बीच तकनीक
का सहज इस्तेमाल। और
शायद इसी वजह से
तस्वीर अधिक प्रभावी है।
‘बाबा’ की छवि के साथ ‘डिजिटल प्रशासक’ का फ्रेम
योगी की सार्वजनिक
छवि लंबे समय से
धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और कठोर प्रशासनिक
शैली के इर्द-गिर्द
रही है। भगवा वस्त्र,
मंच से तीखे प्रशासनिक
निर्देश और कानून-व्यवस्था
पर स्पष्ट रुख उनकी पहचान
का हिस्सा हैं। लेकिन रुद्राक्ष
में दिखाई दी यह तस्वीर
उसी छवि में एक
नया फ्रेम जोड़ती है—तकनीक के
जरिए जानकारी लेने वाला प्रशासक।
मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी के ‘सुपोषित भारत’
के विजन की चर्चा
हो रही थी और
सामने मुख्यमंत्री डिजिटल स्क्रीन पर उसी अभियान
से जुड़े विषयों पर नजर रखे
थे। कागज के भाषण
से आगे बढ़कर स्क्रीन
पर सूचनाओं को पढ़ना आज
के शासन तंत्र का
हिस्सा है।
‘आंकड़े नहीं, गुणवत्ता मायने रखती है’
दिलचस्प यह भी रहा
कि केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने अपने
संबोधन में पोषण अभियान
की सफलता को केवल आंकड़ों
से नहीं, बल्कि गुणवत्ता से जोड़ने की
बात कही। उन्होंने प्रोटीन
के साथ स्वस्थ वसा,
विटामिन और विविध पोषक
तत्वों पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने भी पोषण
को बच्चे के शरीर और
मस्तिष्क के विकास से
जोड़ा। यानी कार्यक्रम का
पूरा विमर्श ही डेटा, गुणवत्ता,
निगरानी और परिणाम के
आसपास घूम रहा था।
ऐसे में मुख्यमंत्री का
टैबलेट पर नजर रखना
कार्यक्रम के विषय से
बिल्कुल अलग दृश्य नहीं,
बल्कि उसी बदलती कार्यशैली
का दृश्यात्मक विस्तार लगता है।
काशी ने देखी दो तस्वीरें
बुधवार को काशी ने
एक ही मंच पर
दो तस्वीरें देखीं। एक ओर आंगनबाड़ी
कार्यकर्ता थीं, जो घर-घर जाकर गर्भवती
माताओं और बच्चों के
पोषण की जानकारी पहुंचाने
की कहानी सुना रही थीं।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री थे,
जो मंच पर भाषण
सुनते हुए डिजिटल स्क्रीन
पर उसी व्यवस्था की
जानकारी से खुद को
जोड़े हुए दिखाई दिए।
एक जमीन पर काम
कर रहा था, दूसरा
स्क्रीन पर उस काम
की दिशा देख रहा
था। शायद यही इस
तस्वीर का सबसे बड़ा
अर्थ है।
खबर सिर्फ ‘योगी ने टैबलेट चलाया’ नहीं
इस दृश्य को
केवल ‘मुख्यमंत्री ने टैबलेट चलाया’
लिख देना इस तस्वीर
के साथ न्याय नहीं
होगा। असली खबर यह
है कि एक बड़े
राष्ट्रीय अभियान के शुभारंभ के
दौरान मुख्यमंत्री भाषणों के बीच भी
योजना की जानकारी से
खुद को अपडेट रखने
और प्रशासनिक फोकस बनाए रखने
की कोशिश करते दिखे। राजनीतिक
आरोपों में चाहे जितने
शब्द हों, तस्वीर अक्सर
उनसे अधिक बोलती है।
काशी में बुधवार की
तस्वीर ने भी यही
किया—मंच पर मुख्यमंत्री
का भाषण चल रहा
था, लेकिन उनकी उंगलियां स्क्रीन
पर थीं। और स्क्रीन
शायद यही कह रही
थी— ‘शासन अब सिर्फ
मंच से नहीं, स्क्रीन
से भी देखा जा
रहा है।’