जब संत सियासत में आता है, सियासत इबादत बन जाती है...
एशियाई आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र माने जाने वाले सिंगापुर में आयोजित प्रवासी भारतीय कार्यक्रम के दौरान उस समय भावनात्मक और वैचारिक दोनों तरह का माहौल बन गया, जब मंच से ‘स्वाति’ नाम की एक भारतीय मूल की महिला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत करते हुए कहा, “जब संत सियासत में आता है, सियासत इबादत बन जाती है।” यह एक सामान्य स्वागत वाक्य नहीं था, बल्कि उस राजनीतिक शैली की ओर संकेत था जिसे पिछले कुछ वर्षों में “कानून-व्यवस्था आधारित शासन मॉडल” के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। स्वाति ने अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ को “भैया” कहकर संबोधित किया और कहा कि उन्होंने यूपी की “साढ़े 11 करोड़ महिलाओं” को सुरक्षा का भरोसा दिया है। उनका कथन था कि अब “महिलाएं नहीं, अपराधी डरते हैं।” यह वक्तव्य केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उस बड़े राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है जिसमें शासन, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान, तीनों को एक साथ जोड़ा जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उद्धृत यह पंक्ति “दुर्लभं भारते जन्म मानुष्यं तत्र दुर्लभम्”, भारत की प्राचीन आध्यात्मिक दृष्टि और सांस्कृतिक आत्मबोध को व्यक्त करती है। इसका आशय है कि भारत की भूमि पर जन्म लेना स्वयं में सौभाग्य है, और उस जन्म को मानव रूप में प्राप्त करना उससे भी अधिक दुर्लभ अवसर है, क्योंकि भारतीय परंपरा में मनुष्य जीवन को केवल भौतिक अस्तित्व नहीं, बल्कि आत्मोन्नति और लोककल्याण का माध्यम माना गया है
सुरेश गांधी
फिरहाल, सिंगापुर में आयोजित यह
कार्यक्रम मुख्यतः निवेश, सांस्कृतिक संवाद और प्रवासी भारतीयों
से संपर्क को लेकर था,
लेकिन स्वाति के संबोधन ने
इसे सामाजिक-राजनीतिक विमर्श में बदल दिया।
उन्होंने कहा कि भारत
से दूर रहकर भी
प्रवासी भारतीय अपने राज्य और
देश की बदलती तस्वीर
को करीब से देख
रहे हैं। स्वाति ने
अपने संबोधन में कहा कि
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था
को लेकर जो छवि
पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनती
थी, उसमें बदलाव आया है। उन्होंने
इसे “सख्त प्रशासन” और
“राजनीतिक इच्छाशक्ति” का परिणाम बताया।
उनका यह कथन स्पष्ट
रूप से उस धारणा
को मजबूत करता है, जो
हाल के वर्षों में
राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के
रूप में प्रचारित होती
रही है : अपराध नियंत्रण,
महिला सुरक्षा और निवेश वातावरण
का निर्माण। स्वाति द्वारा योगी आदित्यनाथ को
“भैया” कहना भी प्रतीकात्मक
रूप से महत्वपूर्ण रहा।
भारतीय सामाजिक संरचना में “भैया” केवल
पारिवारिक संबोधन नहीं, बल्कि संरक्षण, विश्वास और जिम्मेदारी का
भाव भी व्यक्त करता
है। राजनीतिक दृष्टि से यह संदेश
उस भावनात्मक जुड़ाव की ओर इशारा
करता है जिसे भारतीय
राजनीति में अक्सर “सांस्कृतिक
नेतृत्व” कहा जाता है।
यह शैली केवल प्रशासनिक
उपलब्धियों पर नहीं, बल्कि
सामाजिक मनोविज्ञान पर भी आधारित
होती है।
मेरा मानना है
कि जब राजनीतिक व्यक्तित्व
को परिवार या समाज के
संरक्षक के रूप में
प्रस्तुत किया जाता है,
तो उससे जनविश्वास का
भाव मजबूत होता है। हालांकि
लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह
के भावनात्मक प्रतीकों के साथ-साथ
संस्थागत संतुलन और तथ्यात्मक मूल्यांकन
भी उतना ही आवश्यक
होता है। स्वाति के
भाषण का सबसे प्रमुख
हिस्सा महिला सुरक्षा रहा। उन्होंने कहा
कि यूपी में अब
महिलाएं अधिक आत्मविश्वास के
साथ सार्वजनिक जीवन में भाग
ले रही हैं। पिछले
कुछ वर्षों में राज्य सरकार
द्वारा एंटी-रोमियो स्क्वॉड,
महिला हेल्पलाइन, मिशन शक्ति जैसे
अभियानों को प्रमुखता से
प्रचारित किया गया है।
इन अभियानों का उद्देश्य महिलाओं
के खिलाफ अपराधों को नियंत्रित करना
और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना
बताया गया। हालांकि किसी
भी राज्य में महिला सुरक्षा
का आकलन केवल भावनात्मक
अनुभवों से नहीं, बल्कि
अपराध के आंकड़ों, न्यायिक
प्रक्रिया की गति और
सामाजिक जागरूकता जैसे कई कारकों
से किया जाना चाहिए।
इस दृष्टि से स्वाति का
बयान एक सामाजिक धारणा
को दर्शाता है, लेकिन व्यापक
विश्लेषण के लिए बहुआयामी
आंकड़ों का अध्ययन भी
आवश्यक है।
खास यह है
कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश
मानचित्र पर मजबूत पहचान
दिलाने के उद्देश्य से
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के
सिंगापुर दौरे का पहला
दिन बेहद सफल रहा।
सिंगापुर में आयोजित निवेश
बैठकों के दौरान राज्य
सरकार ने लगभग ₹6,650 करोड़
के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनाई,
जिससे करीब 20 हजार रोजगार सृजन
की संभावना जताई जा रही
है। इस दौरान प्रमुख
अंतरराष्ट्रीय कंपनी युनिवर्सल सक्सेस ग्रूप के साथ तीन
महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर हुए,
जो उत्तर प्रदेश में शहरी विकास
और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई दिशा
देंगे। सिंगापुर दौरे की सबसे
बड़ी उपलब्धि जेवर क्षेत्र में
विकसित हो रहे नोयेडा
इंटरनेशनल एअरपोर्ट के आसपास इंटरनेशनल
टाउनशिप परियोजना को लेकर हुई
सहमति रही। इस परियोजना
के तहत विश्वस्तरीय आवासीय
परिसर, कॉमर्शियल स्पेस, आईटी पार्क, होटल
और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जाएंगे। माना
जा रहा है कि
एयरपोर्ट के संचालन के
साथ यह क्षेत्र उत्तर
भारत का नया आर्थिक
केंद्र बन सकता है।
मतलब साफ है एयरपोर्ट
आधारित शहरी विकास मॉडल
(एयरोट्रोपोलिस) निवेश, पर्यटन और निर्यात गतिविधियों
को तेज करेगा।
इसके अलावा एमओयू
के तहत दूसरा बड़ा
प्रोजेक्ट कानपुर - लखनऊ औद्योगिक कॉरिडोर
में लॉजिस्टिक्स पार्क के विकास से
जुड़ा है, जो प्रदेश
की औद्योगिक सप्लाई चेन को मजबूत
करेगा। यह परियोजना कानपुर
और लखनऊ के बीच
तेजी से विकसित हो
रहे औद्योगिक क्षेत्र को नई गति
देगी। इस लॉजिस्टिक्स पार्क
में वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट हब और ई-कॉमर्स सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, जिससे
डैडम् सेक्टर और निर्यात गतिविधियों
को सीधा लाभ मिलेगा।
139 साल पहले स्वामी विवेकानंद
ने विश्व को भारत का
आत्मा-दर्शन कराया था। आज योगी
आदित्यनाथ उसी आत्मविश्वास को
आर्थिक शक्ति में बदलने की
कोशिश कर रहे हैं।
यह यात्रा केवल प्रतीकात्मक नहीं,
बल्कि परिणाम आधारित दिख रही है।
हालांकि चुनौतियां अभी भी कम
नहीं हैं, निवेश प्रस्तावों
को जमीन पर उतारना,
रोजगार को स्थायी बनाना
और कौशल विकास को
मजबूत करना सबसे बड़ी
परीक्षा होगी। यदि ये निवेश
परियोजनाएं समय पर लागू
होती हैं, तो उत्तर
प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था
का प्रमुख इंजन बन सकता
है। सिंगापुर यात्रा ने यह स्पष्ट
संकेत दिया है कि
अब भारत का नेतृत्व
केवल दिल्ली तक सीमित नहीं
है, बल्कि राज्य भी वैश्विक मंच
पर अपनी पहचान बना
रहे हैं। सांस्कृतिक विरासत,
मजबूत नेतृत्व और निवेश आकर्षणकृइन
तीनों का संगम ही
नए भारत की कहानी
लिख रहा है।
संत और राजनीति : परंपरा बनाम आधुनिकता
“जब संत सियासत
में आता है, सियासत
इबादत बन जाती है”,
यह वाक्य भारतीय राजनीति की उस ऐतिहासिक
परंपरा को भी याद
दिलाता है जहां आध्यात्मिकता
और सार्वजनिक जीवन का संबंध
रहा है। भारत में
कई ऐसे उदाहरण मिलते
हैं जहां आध्यात्मिक विचारधारा
ने सामाजिक आंदोलनों को दिशा दी।
आधुनिक राजनीति में यह परंपरा
नए रूप में दिखाई
देती है, जहां सांस्कृतिक
पहचान, धार्मिक प्रतीक और प्रशासनिक मॉडल
एक साथ प्रस्तुत किए
जाते हैं। समर्थकों का
मानना है कि इससे
राजनीति में नैतिकता और
अनुशासन का संदेश जाता
है, जबकि आलोचक इसे
राजनीतिक प्रतीकवाद का हिस्सा मानते
हैं। सच्चाई इन दोनों के
बीच संतुलन में निहित है,
जहां शासन का अंतिम
उद्देश्य नागरिकों का कल्याण और
कानून का समान अनुपालन
होना चाहिए।
प्रवासी भारतीय और बदलती राजनीतिक छवि
सिंगापुर कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण
पहलू यह भी रहा
कि प्रवासी भारतीय अब केवल सांस्कृतिक
आयोजनों तक सीमित नहीं
हैं, बल्कि वे भारत के
राज्यों की प्रशासनिक छवि
और निवेश संभावनाओं पर भी चर्चा
कर रहे हैं। उत्तर
प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और अंतरराष्ट्रीय
रोड शो के माध्यम
से राज्य को निवेश गंतव्य
के रूप में प्रस्तुत
कर रही है। ऐसे
कार्यक्रमों में भावनात्मक और
सांस्कृतिक संवाद भी राजनीतिक छवि
निर्माण का हिस्सा बनते
जा रहे हैं। स्वाति
का भाषण इसी प्रवृत्ति
का उदाहरण माना जा सकता
है, जहां व्यक्तिगत अनुभव,
सामाजिक धारणा और राजनीतिक संदेश
एक मंच पर दिखाई
दिए।
भावनाओं से आगे तथ्य का संतुलन
स्वाति का संबोधन निश्चित
रूप से भावनात्मक था
और उसने कार्यक्रम का
वातावरण प्रभावित किया। महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय
पर सकारात्मक अनुभव साझा करना महत्वपूर्ण
है, लेकिन लोकतांत्रिक विमर्श की दृष्टि से
यह भी आवश्यक है
कि ऐसे दावों का
मूल्यांकन ठोस आंकड़ों और
दीर्घकालिक सामाजिक परिवर्तनों के आधार पर
किया जाए। राजनीति में
आध्यात्मिक प्रतीकों की भूमिका भारत
की परंपरा का हिस्सा रही
है, परंतु शासन की सफलता
अंततः प्रशासनिक पारदर्शिता, न्यायिक प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों
की मजबूती से ही तय
होती है। सिंगापुर के
मंच से उठी यह
आवाज केवल एक स्वागत
भाषण नहीं, बल्कि उस बदलती राजनीतिक
कथा का संकेत है
जिसमें नेतृत्व की छवि, सांस्कृतिक
पहचान और सुरक्षा का
मुद्दा एक साथ जुड़ते
जा रहे हैं। आने
वाले समय में यह
देखना महत्वपूर्ण होगा कि भावनात्मक
समर्थन के साथ-साथ
नीतिगत परिणाम किस प्रकार समाज
के सभी वर्गों तक
पहुंचते हैं।
सिंगापुर में गूंजा भारत का आत्मविश्वास
वैश्विक मंच पर भारत
की बदलती छवि अब केवल
आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं
रही, बल्कि यह सांस्कृतिक आत्मविश्वास,
निवेश आकर्षण और नेतृत्व की
नई शैली के साथ
सामने आ रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की
हालिया सिंगापुर यात्रा इसी परिवर्तन का
प्रतीक बनकर उभरी है।
139 वर्ष पहले स्वामी विवेकानंद
ने विश्व मंच पर भारत
की आध्यात्मिक पहचान को स्थापित किया
था, और आज उसी
परंपरा को आगे बढ़ाते
हुए योगी आदित्यनाथ ने
आर्थिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक भारत
का समन्वित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
सांस्कृतिक आत्मविश्वास से आर्थिक विश्वास तक
1893 में शिकागो में
दिए गए ऐतिहासिक भाषण
के माध्यम से स्वामी विवेकानंद
ने भारत की आध्यात्मिक
शक्ति का परिचय कराया
था। आज वैश्विक अर्थव्यवस्था
के दौर में वही
आत्मविश्वास निवेश के रूप में
परिवर्तित हो रहा है।
सिंगापुर में आयोजित निवेश
बैठकों में योगी आदित्यनाथ
ने उत्तर प्रदेश को “न्यू ग्रोथ
इंजन ऑफ इंडिया” के
रूप में प्रस्तुत किया।
यह केवल भाषण नहीं
था, बल्कि ठोस परिणामों से
जुड़ा प्रयास था। सिंगापुर की
कंपनियों और निवेशकों के
साथ हुई बैठकों में
लगभग 6650 करोड़ रुपये के
निवेश प्रस्ताव सामने आए, जिससे करीब
20 हजार रोजगार सृजित होने की संभावना
व्यक्त की जा रही
है। यह निवेश मुख्य
रूप से लॉजिस्टिक्स, डेटा
सेंटर, शहरी अवसंरचना, फूड
प्रोसेसिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर
से जुड़ा बताया गया
है।
यूपी की बदलती औद्योगिक पहचान
एक समय “बीमारू
राज्य” की श्रेणी में
गिने जाने वाले उत्तर
प्रदेश की औद्योगिक छवि
में तेजी से परिवर्तन
हुआ है। कानून व्यवस्था
में सुधार, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर और निवेशक-अनुकूल
नीतियों ने राज्य को
वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक
बनाया है। योगी आदित्यनाथ
ने अपने संबोधन में
स्पष्ट कहा कि उत्तर
प्रदेश अब केवल जनसंख्या
का राज्य नहीं, बल्कि संभावनाओं का राज्य है।
उन्होंने राज्य की 25 करोड़ से अधिक
आबादी को “सबसे बड़ा
उपभोक्ता बाजार” बताते हुए निवेशकों को
दीर्घकालिक लाभ का भरोसा
दिलाया।
प्रधानमंत्री की वैश्विक कूटनीति का प्रभाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की
इस यात्रा को व्यापक राष्ट्रीय
रणनीति से जोड़कर भी
देखा जा रहा है।
पिछले एक दशक में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत
की वैश्विक छवि को आर्थिक
साझेदार के रूप में
स्थापित किया है। “मेक
इन इंडिया”, “डिजिटल इंडिया” और “ग्लोबल सप्लाई
चेन” जैसे अभियानों ने
राज्यों को भी अंतरराष्ट्रीय
निवेश आकर्षित करने के लिए
प्रेरित किया है। इसी
क्रम में यूपी ने
भी “इन्वेस्ट यूपी” मॉडल के माध्यम
से निवेश प्रक्रिया को सरल बनाया
है। सिंगापुर दौरे के दौरान
योगी ने यह संदेश
देने का प्रयास किया
कि भारत में निवेश
का सबसे सुरक्षित और
तेज़ी से विकसित होता
केंद्र अब उत्तर प्रदेश
है।
निवेश से रोजगार तक, युवा शक्ति पर फोकस
लगभग 6650 करोड़ के निवेश
से 20 हजार रोजगार सृजन
की संभावना केवल आंकड़ा नहीं,
बल्कि उत्तर प्रदेश के युवाओं के
लिए अवसरों का नया द्वार
है। राज्य सरकार का लक्ष्य है
कि आने वाले वर्षों
में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, एआई, डेटा सेंटर
और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में
बड़े पैमाने पर रोजगार तैयार
किए जाएं। यह भी उल्लेखनीय
है कि सिंगापुर की
कंपनियां स्किल डेवलपमेंट मॉडल के लिए
जानी जाती हैं। ऐसे
में तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के
बीच बेहतर तालमेल बनने की उम्मीद
है।
सांस्कृतिक कूटनीति की नई शैली
योगी आदित्यनाथ ने
अपने संबोधन में केवल उद्योग
और निवेश की चर्चा नहीं
की, बल्कि भारत की सांस्कृतिक
विरासत को भी प्रमुखता
से रखा। उन्होंने अयोध्या,
काशी और मथुरा जैसे
धार्मिक केंद्रों के विकास को
पर्यटन और अर्थव्यवस्था से
जोड़ते हुए बताया कि
सांस्कृतिक पुनर्जागरण भी आर्थिक विकास
का आधार बन सकता
है। यह वही दृष्टिकोण
है जो स्वामी विवेकानंद
ने दिया थाकृआध्यात्मिकता और
आधुनिकता का संतुलन।
भारत की नई पहचान, विश्वसनीय साझेदार
वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के
बीच भारत एक स्थिर
और भरोसेमंद बाजार के रूप में
उभर रहा है। सिंगापुर
जैसे वित्तीय केंद्र से निवेश आकर्षित
करना इस बात का
संकेत है कि भारत
की आर्थिक नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय विश्वास
बढ़ रहा है। उत्तर
प्रदेश की भूमिका इसमें
इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह
राज्य अकेले कई देशों से
अधिक आबादी और बाजार क्षमता
रखता है।
निवेश से रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा
करीब ₹6,650 करोड़ के निवेश
से राज्य में प्रत्यक्ष और
अप्रत्यक्ष रूप से 20 हजार
रोजगार उत्पन्न होने की संभावना
है। राज्य सरकार का फोकस केवल
निवेश लाना ही नहीं,
बल्कि स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण
से जोड़ना भी है। सिंगापुर
की कंपनियों के साथ स्किल
डेवलपमेंट सहयोग पर भी चर्चा
हुई, जिससे आधुनिक औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित
मानव संसाधन तैयार किए जा सकें।
उत्तर प्रदेश की निवेश नीति का दिखा असर
पिछले कुछ वर्षों में
उत्तर प्रदेश ने कानून व्यवस्था,
एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर और डिजिटल सिंगल
विंडो सिस्टम के जरिए निवेश
प्रक्रिया को सरल बनाया
है। इसी का परिणाम
है कि विदेशी निवेशक
अब राज्य को बड़े बाजार
और तेज़ी से विकसित
हो रहे औद्योगिक केंद्र
के रूप में देख
रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ ने निवेशकों को
भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश
सरकार “नीति स्थिरता और
तेज़ निर्णय” के मॉडल पर
काम कर रही है,
जिससे परियोजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध
तरीके से सुनिश्चित किया
जाएगा।
वैश्विक मंच पर बढ़ता उत्तर प्रदेश का आर्थिक प्रभाव
सिंगापुर दौरे का पहला
दिन यह संकेत देता
है कि अब उत्तर
प्रदेश केवल घरेलू निवेश
तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पूंजी का भी बड़ा
केंद्र बनने की दिशा
में आगे बढ़ रहा
है। जेवर एयरपोर्ट, औद्योगिक
कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर
जैसे प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों
में राज्य की अर्थव्यवस्था को
नई गति दे सकते
हैं। यदि इन निवेश
प्रस्तावों को तेजी से
जमीन पर उतारा गया,
तो उत्तर प्रदेश देश की औद्योगिक
विकास यात्रा में निर्णायक भूमिका
निभा सकता है।
भारतीय दर्शन में मानव जन्म का महत्व
भारतीय ऋषि परंपरा में
यह मान्यता रही है कि
मनुष्य ही ऐसा प्राणी
है जो धर्म, अर्थ,
काम और मोक्षकृचारों पुरुषार्थों
को समझकर जीवन को सार्थक
बना सकता है। पुराणों
और धर्मग्रंथों में मानव जीवन
को आत्मचेतना और कर्तव्यबोध से
जोड़कर देखा गया है।
इसी संदर्भ में ऐसी पंक्तियाँ
कई ग्रंथों में मिलती हैं,
जिनमें जीवन को साधना
और सेवा का अवसर
बताया गया है। विद्वानों
के अनुसार यह भाव विशेष
रूप से स्कंद पुराण
और अन्य पुराणों की
शिक्षाओं से जुड़ा माना
जाता है।

