Thursday, 1 January 2026

काशी में वॉलीबॉल का महाकुंभ : 4 से 11 जनवरी तक 72वीं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप

काशी में वॉलीबॉल का महाकुंभ : 4 से 11 जनवरी तक 72वीं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप 

प्रधानमंत्री करेंगे वर्चुअल शुभारंभ, ‘खेलो इंडियाविजन को मिलेगी नई उड़ान

पूर्वांचल में पहली बार, 73 टीमें और 1000$ खिलाड़ी होंगे शामिल

सुरेश गांधी

वाराणसी। खेल केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, संस्कृति और अनुशासन का उत्सव भी होता है, और यही दृश्य 4 से 11 जनवरी तक डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, सिगरा में देखने को मिलेगा। मौका है राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप का, जहां देश भर के श्रेष्ठ खिलाड़ी अपने कौशल, गति और ताकत का प्रदर्शन करेंगे। मतलब साफ है राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप के बहाने काशी एक बार फिर खेल, संस्कृति और अतिथि-सत्कार के अपने विशिष्ट स्वरूप के साथ राष्ट्रीय पटल पर चमकने को तैयार है. खास यह है कि 72वीं सीनियर राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप (पुरुष एवं महिला) का आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केखेलो इंडियाविजन से प्रेरित है और पूर्वांचल क्षेत्र में पहली बार इतने बड़े राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हो रही है। 

इस ऐतिहासिक आयोजन का वर्चुअल शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी सहभागिता प्रस्तावित है। प्रतियोगिता में देशभर से 73 टीमें भाग लेंगी, जिनमें पुरुष और महिला वर्ग के 1200 से अधिक खिलाड़ी शामिल होंगे। आयोजकों के अनुसार, कुल प्रतिभागियों की संख्या 1500 के आसपास पहुंच सकती है, जिनमें लगभग 150 अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी शामिल हैं। खिलाड़ी संख्या के लिहाज से यह देश की सबसे बड़ी वॉलीबॉल चैंपियनशिप मानी जा रही है।

चैंपियनशिप से पहले गुरुवार को उत्तर प्रदेश की महिला और पुरुष टीम का चयन परीक्षण संपन्न हुआ। चयन प्रक्रिया के दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं महापौर अशोक तिवारी की मौजूदगी ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि चयन पूरी तरह ओवरऑल प्रदर्शन के आधार पर किया जा रहा है, ताकि प्रदेश की सबसे सशक्त और संतुलित टीम तैयार हो सके। चयन परीक्षण में 18 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं और शुक्रवार को अंतिम टीम की घोषणा कर दी जाएगी।

वॉलीबॉल जैसे तेज़-तर्रार खेल में गति और चपलता की भूमिका अहम होती है। आयोजकों के अनुसार, जहां दक्षिण भारत के खिलाड़ी गति में आगे माने जाते हैं, वहीं उत्तर भारत के खिलाड़ी ताकत और आक्रामक खेल के लिए पहचाने जाते हैं। उत्तर प्रदेश के पास हर पोजीशन के लिए सक्षम और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का संतुलन मौजूद है, जो टीम को मजबूती देगा।

चैंपियनशिप को दर्शकों और खिलाड़ियों, दोनों के लिए खास बनाने की तैयारी है। प्रतियोगिता में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रहेगा, ताकि खेल प्रेमी बिना किसी बाधा के राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों का आनंद ले सकें। साथ ही, बाहर से आने वाली टीमों को चरणबद्ध तरीके से काशी दर्शन भी कराया जाएगा, जिससे वे खेल के साथ शहर की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू हो सकें।

आयोजन सचिव सर्वेश पाण्डेय ने बताया कि खिलाड़ियों के आतिथ्य में काशी की पहचान भी झलकेगी। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों को बनारसी नाश्ता परोसा जाएगा। देश के कोने-कोने से आए खिलाड़ियों को किसी तरह की असुविधा हो, इसके लिए हर टीम के साथ स्थानीय प्रबंधक तैनात किए गए हैं। चैंपियनशिप का विस्तृत कार्यक्रम शीघ्र जारी किया जाएगा।

 

काशी की मेजबानी, यूपी को गौरव

वर्ष 1985 के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश को सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप की मेजबानी मिली है और यह गौरव काशी को प्राप्त हुआ है। अत्याधुनिक इनडोर स्टेडियम अब इस राष्ट्रीय खेल महोत्सव का केंद्र बनेगा, जिसे वाराणसी की खेल पहचान के लिए एक टर्निंग प्वाइंट माना जा रहा है।

तैयारियों की समीक्षा, व्यवस्थाओं पर जोर

आगामी आयोजन की तैयारियों को लेकर मंगलवार को महापौर अशोक तिवारी की अध्यक्षता में आयोजन समिति और प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में सुरक्षा, आवागमन, आवास, चिकित्सा सुविधा, दर्शक प्रबंधन, यातायात और प्रशासनिक समन्वय जैसे सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। महापौर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यह आयोजन केवल भव्य हो, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित, अनुशासित और सुव्यवस्थित भी हो, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर काशी की छवि और मजबूत हो। इससे पूर्व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने स्टेडियम परिसर और आसपास की व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने खेल मैदान, दर्शक दीर्घा, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग, साफ-सफाई और यातायात प्रबंधन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। नगर आयुक्त ने कहा कि यह प्रतियोगिता वाराणसी के लिए ऐतिहासिक अवसर है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

खेल के साथ संस्कृति का संगम

चैंपियनशिप के लिए विशेष शुभंकर भी प्रस्तुत किए गए हैं, ‘नंदू’, जो नंदी से प्रेरित है, औरनीरा’, जो गंगा डॉल्फिन पर आधारित है। ये शुभंकर काशी की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहचान को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेंगे।

राष्ट्रीय टीम चयन की राह

बैठक में यह भी बताया गया कि वॉलीबॉल कोभारत का गांव-घर का खेलमाना जाता है और इस आयोजन से इसकी लोकप्रियता को नई ऊर्जा मिलेगी। प्रतियोगिता में प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष 8 टीमें फेडरेशन कप के लिए क्वालीफाई करेंगी, वहीं यही प्रदर्शन राष्ट्रीय टीम चयन के लिए भी निर्णायक साबित होगा।

दर्शकों से सहभागिता की अपील

आयोजन समिति ने काशीवासियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में स्टेडियम पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाएं। आयोजकों का कहना है कि किसी भी राष्ट्रीय आयोजन की सफलता केवल प्रशासन या समिति से नहीं, बल्कि दर्शकों की सक्रिय भागीदारी से सुनिश्चित होती है। कुल मिलाकर, 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि खेल, संस्कृति और संगठन के स्तर पर वाराणसी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला एक ऐतिहासिक अध्याय बनने जा रही है।

आज माघ मेला क्षेत्र में विराजेंगे कुंभेश्वर महादेव

काशी से प्रयाग की ओर शिव की यात्रा

आज माघ मेला क्षेत्र में विराजेंगे कुंभेश्वर महादेव 

माघ मेला प्रयागराज 3 जनवरी से प्रारंभ

भगवान विश्वनाथ के चल स्वरूप हैं कुंभेश्वर महादेव

काशी विश्वनाथ धाम में हुआ विधिवत रुद्राभिषेक

माघ मेला शिविर में विशेष मंदिर में होगी स्थापना

सुरेश गांधी

वाराणसी. सनातन परंपरा की जीवंत धारा एक बार फिर काशी से प्रयाग की ओर प्रवाहित होने जा रही है। माघ मेला प्रयागराज के शुभारंभ से पूर्व आज भगवान विश्वनाथ के चल स्वरूप कुंभेश्वर महादेव काशी से प्रयागराज के लिए प्रस्थान करेंगे। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि काशी और प्रयाग के बीच आध्यात्मिक एकात्मता का प्रतीक है।

माघ मेला प्रयागराज दिनांक 3 जनवरी से आरंभ होगा. परंपरा के अनुसार कुंभ और माघ पर्व के दौरान काशी में विराजमान कुंभेश्वर महादेव कुम्भ परिक्षेत्र में स्थापित होते हैं। गत वर्ष 2025 में पहली बार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के शिविर में कुंभेश्वर महादेव की स्थापना की गई थी, जिसे श्रद्धालुओं से व्यापक आस्था प्राप्त हुई। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष से माघ मेला स्नान पर्व में भी कुंभेश्वर महादेव का विराजमान होना सुनिश्चित किया गया है।

आज प्रातः श्री काशी विश्वनाथ धाम में कुंभेश्वर महादेव स्वरूप का विधिवत रुद्राभिषेक संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के बीच संपन्न इस अनुष्ठान के पश्चात कुंभेश्वर महादेव को समारोहपूर्वक विशेष वाहन से प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र के लिए रवाना किया जाएगा। वहां श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास शिविर में विशेष रूप से निर्मित मंदिर में उनकी प्रतिष्ठा की जाएगी।

कुंभेश्वर महादेव का माघ मेला क्षेत्र में विराजमान होना काशी और प्रयाग, दोनों तीर्थों की आध्यात्मिक चेतना को जोड़ने वाला दुर्लभ संयोग है। स्नान पर्व पर आने वाले श्रद्धालु गंगा स्नान के साथ-साथ भगवान विश्वनाथ के चल स्वरूप के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकेंगे। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करती है, बल्कि सनातन संस्कृति की सतत यात्रा को भी रेखांकित करती है।


आस्था, आरती और उल्लास में डूबी काशी, हर हर महादेव के जयघोष संग नववर्ष 2026 का स्वागत

नए साल की पहली सुबह बाबा के नाम, घाटों पर गूंजा शंखनाद

आस्था, आरती और उल्लास में डूबी काशी, हर हर महादेव के जयघोष संग नववर्ष 2026 का स्वागत

मंदिरों-घाटों से बाजारों तक उमड़ा जनसैलाब

विश्वनाथ धाम में रिकॉर्डतोड़ भीड़, मार्कंडेय महादेव और स्वर्वेद महामंदिर में भक्तों का रेला

दशाश्वमेध घाट पर विशेष गंगा आरती और सूर्य पूजा, नमो घाट पर पर्यटकों की चहल-पहल

समय बदला, संकल्प बदले, पर काशी की चेतना वही रही

दीप, धूप और दर्शन के बीच काशी ने थामा नववर्ष 2026 का हाथ

सुरेश गांधी

वाराणसी. नववर्ष 2026 का स्वागत काशी ने अपने शाश्वत अंदाज में किया. जहां एक ओर उल्लास, संगीत और रोशनी थी, वहीं दूसरी ओर आस्था, साधना और संयम का अद्भुत संगम नजर आया। घड़ी की सुइयों ने जैसे ही रात के बारह बजाए, ‘हैप्पी न्यू ईयर 2026’ के उद्घोष के साथ पूरा शहर रोशनी और आतिशबाजी से जगमगा उठा। होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट और सांस्कृतिक स्थलों पर देर रात तक जश्न चलता रहा, तो गंगा घाटों और मंदिरों में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। नए वर्ष की पहली सुबह काशी में आध्यात्मिक चेतना के साथ आरंभ हुई। दशाश्वमेध घाट पर नववर्ष की विशेष गंगा आरती और सूर्य पूजा का आयोजन हुआ।

ठंड और कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। मंत्रोच्चार, शंखनाद और दीपों की कतारों के बीच गंगा की लहरों पर झिलमिलाती रोशनी ने नववर्ष 2026 को दिव्यता प्रदान की। उत्सव के बीच कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। घाटों, मंदिरों, बाजारों और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे नववर्ष का जश्न शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। आस्था, आनंद और अनुशासन के इस त्रिवेणी संगम के साथ काशी ने नववर्ष 2026 का स्वागत किया, जहां हर उत्सव साधना में और हर उल्लास परंपरा में ढलता नजर आया। 

काशी विश्वनाथ धाम में ऐतिहासिक भीड़, टूटे पुराने रिकॉर्ड

नववर्ष 2026 पर काशी विश्वनाथ धाम में दर्शनार्थियों की संख्या ने एक बार फिर नए कीर्तिमान स्थापित किए। तड़के चार बजे मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं, जो देर रात तक जारी रहीं। धाम प्रशासन के अनुसार, एक ही दिन में लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में मत्था टेका। पूर्व में बनाए गए सभी रिकॉर्ड इस वर्ष पीछे छूट गए।
भीड़ को देखते हुए पहले से की गई व्यवस्थाओं के चलते दर्शन व्यवस्था सुचारू बनी रही। गंगाद्वार समेत सभी प्रवेश द्वार पर भक्तों की भारी भीड़ रही। मंदिर प्रशासन की ओर से लागू प्रोटोकॉल के तहत विशेष दर्शन और स्पर्श दर्शन पर प्रतिबंध है। मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से भीड़ बढ़ी है। 20 लाख से अधिक लोग दर्शन कर चुके हैं। बृहस्पतिवार की सुबह से श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला जारी है। लाखों भक्तों ने बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किए। भक्तों को कोई असुविधा हो इसके लिए बैरिकेडिंग की गई है।

मार्कंडेय महादेव मंदिर और स्वर्वेद महामंदिर में उमड़ा आस्था का जनसागर

नववर्ष पर कैथी स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर और उमरहां स्थित स्वर्वेद महामंदिर में भी श्रद्धालुओं का जनसैलाब देखने को मिला। पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों के साथ-साथ अन्य प्रांतों से आए भक्त सपरिवार दर्शन को पहुंचे। स्वर्वेद महामंदिर की भव्यता, संगमरमर पर उकेरी गई नक्काशियां और कलात्मक शिल्प श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने। वाहनों की अधिकता के चलते प्रमुख मार्गों पर रुक-रुक कर यातायात प्रभावित रहा।

घाटों और नमो घाट पर सैलानियों की चहल-पहल

नववर्ष की सुबहसुबहे--बनारसके साथ हुई। देश-विदेश से आए पर्यटकों ने गंगा में नौकाविहार कर घाटों की आध्यात्मिक छटा को निहारा। पर्यटन के आधुनिक केंद्र के रूप में विकसित हो चुके नमो घाट पर भी भारी भीड़ उमड़ी। काशी के बदले स्वरूप और विकास कार्यों ने पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित किया, जिससे स्थानीय पर्यटन और कारोबार को नई गति मिली।

बाजारों में रौनक, भक्ति और मस्ती का संगम

नववर्ष की पूर्व संध्या पर शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक उत्सव का माहौल रहा। कहीं डीजे की धुनों पर युवा थिरकते दिखे, तो कहीं भजन संध्या और देवी जागरण में लोग प्रभु आराधना में लीन नजर आए। फूल, गिफ्ट, ग्रीटिंग कार्ड और नववर्ष से जुड़े सामानों की दुकानों पर दिनभर भीड़ रही। बाजार रोशनी और सजावट से दुल्हन की तरह सजे नजर आए।

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