Saturday, 13 June 2026

12 साल में बदली देश और काशी की तस्वीर, विकास का बना नया मॉडल : सुरेश खन्ना

12 साल में बदली देश और काशी की तस्वीर, विकास का बना नया मॉडल : सुरेश खन्ना 

विश्वनाथ धाम से रिंग रोड तक विकास की नई पहचान • ₹36,211 करोड़ की 536 परियोजनाएं पूरी • ₹25 हजार करोड़ की योजनाएं निर्माणाधीन

सुरेश गांधी

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर शनिवार को सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा वाराणसी के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि इन वर्षों में देश और काशी दोनों की तस्वीर बदली है। जनकल्याण, सुशासन और विकास की योजनाओं ने भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया है। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में काशी का सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और धार्मिक पुनर्जागरण हुआ है। श्री काशी विश्वनाथ धाम परियोजना, नमामि गंगे अभियान, पंचकोशी परिक्रमा मार्ग के विकास और घाटों के सौंदर्यीकरण ने वाराणसी को वैश्विक पहचान दिलाई है। पंचकोशी मार्ग चौड़ीकरण पर लगभग 97 करोड़ रुपये तथा धार्मिक एवं पर्यटन विकास पर 39.30 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

सुरेश खन्ना ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में वाराणसी में 36,211 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 536 बड़ी परियोजनाएं पूरी कर जनता को समर्पित की गई हैं, जबकि 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। रिंग रोड, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग और सेतु निर्माण की 127 परियोजनाएं 22,829 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हुई हैं। इसके अलावा सड़क और पुल निर्माण की 5,813 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर कार्य जारी है।

उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 877 करोड़ रुपये से अधिक की 34 परियोजनाएं पूरी की गई हैं। काशी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, 720 स्थानों पर सर्विलांस कैमरे, सिगरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और मल्टीलेवल पार्किंग जैसी सुविधाओं ने शहर को आधुनिक स्वरूप दिया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर इंस्टीट्यूट, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और महिला चिकित्सालयों के विस्तार सहित 1,870 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी हुई हैं।

प्रभारी मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला और जनधन जैसी योजनाओं से लाखों लोगों को लाभ मिला है। स्वयं सहायता समूहों की 59 हजार से अधिक महिलाएंलखपति दीदीबनी हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य लेकर सरकार कार्य कर रही है। आज वाराणसी विरासत और विकास के संतुलन का राष्ट्रीय मॉडल बन चुकी है तथा नए भारत की विकास यात्रा को दिशा और प्रेरणा दे रही है।

सारंगतालाब में बनेगा तीसरा मियावाकी वन

40 हजार से अधिक पौधे रोपे जायेंगे

वाराणसी। शहर में बढ़ते शहरीकरण के बीच हरियाली और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए नगर निगम ने सारंगतालाब में शहर के तीसरे मियावाकी वन की शुरुआत की है। इस परियोजना के तहत 40 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे, जिससे काशी को एक बड़ेऑक्सीजन हबके रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शनिवार को प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री एवं जनपद प्रभारी सुरेश खन्ना, महापौर अशोक कुमार तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या और विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने पौधरोपण कर अभियान का शुभारंभ किया। पहले दिन पीपल, पाकड़, बरगद, जामुन, अमलताश, गुलमोहर और मौलश्री सहित 20 प्रजातियों के पौधे रोपे गए। डोमरी और कंचनपुर में मियावाकी वन की सफलता के बाद सारंगतालाब शहर का तीसरा अर्बन फॉरेस्ट बनेगा। महापौर ने बताया कि मियावाकी तकनीक से पौधे तेजी से विकसित होते हैं, जिससे प्रदूषण नियंत्रण, हरित क्षेत्र विस्तार और नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि डोमरी में एक घंटे में 2.51 लाख पौधे रोपकर नगर निगम विश्व रिकॉर्ड भी बना चुका है।

किसान था पहला इनोवेटर, कारीगर हैं आत्मनिर्भर भारत की ताकत : योगी

किसान था पहला इनोवेटर, कारीगर हैं आत्मनिर्भर भारत की ताकत : योगी 

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अधिवेशन में बोले मुख्यमंत्री, कृषि और एमएसएमई को बताया विकास का आधारबीएचयू में 150 करोड़ से बन रहे नेशनल एजिंग सेंटर का किया निरीक्षण

सुरेश गांधी

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि भारत की असली ताकत उसके किसान, कारीगर और उद्यमी हैं। एक समय किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि नवाचार करने वाला पहला इनोवेटर था और भारतीय व्यापारी देश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी। उन्होंने कहा कि विज्ञान का वास्तविक उद्देश्य लोककल्याण है और दुनिया में जिन देशों ने प्रगति की है, उनके विकास के केंद्र में यही भावना रही है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, कृषि व्यवस्था और व्यापारिक कौशल ने कभी देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाया था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पहले भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी लगातार घटती गई, इसलिए हमें अपनी परंपराओं और वैज्ञानिक सोच के समन्वय से आगे बढ़ना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि कभी घाटे का सौदा नहीं थी। किसान अपनी जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप नवाचार करता था। भारत आज भी कृषि प्रधान देश है और कृषि तथा एमएसएमई क्षेत्र उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 के बाद "एक जिला-एक उत्पाद" योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को नया बाजार उपलब्ध कराया है। डिजाइन, पैकेजिंग और विपणन की सुविधाओं से उन्हें वैश्विक मंच मिला है।

योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश का निर्यात दो लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है, जिसमें एमएसएमई क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में लगभग तीन करोड़ लोग कार्य कर रहे हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं और बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय कमी आई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मां गंगा के प्रति भारत की सनातन आस्था रही है और भारतीय संस्कृति में प्रकृति तथा विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने किसानों को रसायनों के अनावश्यक प्रयोग से बचने की सलाह देते हुए ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही अनुसंधान और नवाचार को विकसित भारत की अनिवार्य आवश्यकता बताया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। इस दौरान विज्ञान भारती की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. शेखर पांडेय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

नेशनल एजिंग सेंटर का किया निरीक्षण

अधिवेशन से पहले मुख्यमंत्री ने बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 200 बेड के सात मंजिला अत्याधुनिक नेशनल सेंटर फॉर एजिंग का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य को समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। यह केंद्र देश का तीसरा और उत्तर भारत का प्रमुख जरा चिकित्सा संस्थान होगा। यहां बुजुर्गों के लिए मल्टी-स्पेशियलिटी ओपीडी, मेमोरी क्लिनिक, गठिया क्लिनिक, आईसीयू, पुनर्वास सेवाएं और आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही जरा चिकित्सा के क्षेत्र में चिकित्सकों और नर्सों के प्रशिक्षण तथा अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुख्य बातें

🔹 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में 3 करोड़ लोगों को रोजगार

🔹 ओडीओपी से कारीगरों को मिला नया बाजार

🔹 बीएचयू में  150 करोड़ की लागत से बन रहा 200 बेड का नेशनल एजिंग सेंटर

🔹 ऑर्गेनिक जीरो बजट खेती को बढ़ावा देने पर जोर

🔹मां गंगा के प्रति आस्था और विज्ञान साथ-साथ चलते हैं

विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन

विज्ञान को बताया लोककल्याण का माध्यम

कृषि और एमएसएमई को बताया भारत की सबसे बड़ी ताकत

12 साल में बदली देश और काशी की तस्वीर, विकास का बना नया मॉडल : सुरेश खन्ना

12 साल में बदली देश और काशी की तस्वीर , विकास का बना नया मॉडल : सुरेश खन्ना  विश्वनाथ धाम से रिंग रोड तक विकास की नई ...