Saturday, 3 October 2026

एक्सपो से सिर्फ ऑर्डर नहीं, भदोही के हर हाथ को काम बढ़ने की उम्मीद

एक्सपो से सिर्फ ऑर्डर नहीं, भदोही के हर हाथ को काम बढ़ने की उम्मीद 

अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ अध्यक्ष उमेश कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’ बोले—विदेशी खरीदार बढ़ेंगे तो निर्यातक, बुनकर और छोटे उद्यमी सभी होंगे लाभान्वित

सुरेश गांधी

भदोही। कालीन नगरी में शुरू हो रहे 50वें गोल्डन जुबली इंडिया कार्पेट एक्सपो को लेकर उद्योग जगत की उम्मीदें कारोबार के आंकड़ों से कहीं आगे हैं। अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ के अध्यक्ष उमेश कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’ के मुताबिक, भदोही में दुनिया के अलग-अलग देशों से खरीदारों का पहुंचना केवल निर्यातकों के लिए कारोबारी अवसर नहीं, बल्कि इससे जुड़े बुनकरों, डिजाइनरों, रंगाई-धुलाई इकाइयों, छोटे-मझोले निर्माताओं, परिवहन कारोबारियों और दूसरे सहायक उद्यमों तक काम की नई संभावनाएं पहुंचने का रास्ता खोल सकता है। उनके अनुसार, 50वां गोल्डन जुबली एक्सपो ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक बाजार तेजी से बदल रहा है। खरीदारों की पसंद, डिजाइन, रंग, आकार, गुणवत्ता और कीमत को लेकर मांग लगातार बदल रही है। ऐसे में विदेशी खरीदारों का सीधे भदोही पहुंचना स्थानीय उद्यमियों को यह समझने का अवसर देगा कि दुनिया का बाजार आखिर किस तरह के कालीन तलाश रहा है।

छोटे निर्यातकों के लिए बड़ा बाजार

गुप्ता के मुताबिक एक्सपो की सबसे महत्वपूर्ण संभावनाओं में छोटे और मध्यम निर्यातकों को नए खरीदारों तक पहुंच मिलना है। बड़े निर्यातकों के पास अंतरराष्ट्रीय बाजारों से पहले से संपर्क होते हैं, लेकिन ऐसे आयोजनों में छोटे निर्माता भी अपने उत्पाद सीधे विदेशी खरीदारों के सामने रख सकते हैं। “एक खरीदार एक कालीन देखता है, लेकिन उसके पीछे पूरा रोजगार तंत्र खड़ा होता है। ऑर्डर बढ़ता है तो करघे पर काम बढ़ता है, बुनकर को काम मिलता है, धागा, रंग, धुलाई, फिनिशिंग, पैकिंग और परिवहन से जुड़े कारोबार को गति मिलती है।”

—उमेश कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, अध्यक्ष, अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ

बुनकर की उंगलियों तक पहुंचे बाजार का फायदा

कालीन उद्योग की असली ताकत मशीन नहीं, बल्कि बुनकर के हाथ हैं। भदोही और आसपास के क्षेत्रों में पीढ़ियों से इस हुनर को जीवित रखने वाले कारीगर ही इस उद्योग की रीढ़ हैं। गुप्ता के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने का सीधा असर बुनकरों के काम पर पड़ता है। बेहतर डिजाइन और नए ऑर्डर आने पर उत्पादन बढ़ता है और पारंपरिक हुनर को रोजगार से जोड़ने का अवसर मिलता है। यही कारण है कि एक्सपो को केवल निर्यातकों का आयोजन मानना इस उद्योग की पूरी तस्वीर नहीं होगी। इसके परिणाम का दायरा बुनकर से लेकर निर्यातक और छोटे उद्यमी से लेकर स्थानीय सेवा कारोबार तक फैल सकता है।

‘भदोही’ खुद एक बाजार की पहचान

भदोही को लंबे समय से वैश्विक कालीन पहचान से जोड़ा जाता रहा है। सार्वजनिक रिपोर्टों में भी उद्योग प्रतिनिधियों ने ‘भदोही’ नाम को कालीन कारोबार की अंतरराष्ट्रीय ब्रांड पहचान से जोड़कर देखा है। गुप्ता के अनुसार गोल्डन जुबली एक्सपो इस पहचान को कारोबारी संबंधों में बदलने का अवसर है। दुनिया के खरीदार जब यहां आते हैं तो उन्हें सिर्फ तैयार कालीन नहीं दिखता, बल्कि वे उत्पादन की पूरी परंपरा, बुनकरों का हुनर और भदोही की कारोबारी क्षमता को करीब से समझते हैं।

डिजाइन बदले, बाजार की पसंद समझे उद्योग

आज वैश्विक बाजार में सिर्फ खूबसूरत कालीन पर्याप्त नहीं है। डिजाइन के साथ गुणवत्ता, टिकाऊपन, रंगों की पसंद, आकार, कीमत, समय पर आपूर्ति और बदलती जीवनशैली के अनुरूप उत्पाद भी महत्वपूर्ण हैं। एक्सपो के दौरान खरीदारों से मिलने वाला फीडबैक स्थानीय निर्माताओं के लिए बाजार की दिशा समझने का माध्यम बन सकता है। इसीलिए गुप्ता की नजर में यह आयोजन ‘ऑर्डर लेने का मंच’ भर नहीं, बल्कि बाजार को पढ़ने का अवसर भी है।

निर्यात बढ़ा तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति

एक्सपो में 65 देशों के 430 विदेशी खरीदारों का पंजीकरण और 223 से अधिक प्रदर्शकों की भागीदारी इसे बड़े कारोबारी मंच का स्वरूप देती है। खासकर BRICS देशों के 106 खरीदारों की मौजूदगी नए बाजारों और कारोबारी संपर्कों की संभावनाओं को बढ़ाती है। गुप्ता के मुताबिक विदेशी खरीदारों की आवाजाही का असर केवल एक्सपो परिसर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन, पैकेजिंग, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला और अन्य सेवाओं को भी इसका लाभ मिल सकता है।

आधी सदी के पड़ाव पर नई उम्मीद

अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ के अध्यक्ष का मानना है कि 50वें गोल्डन जुबली संस्करण का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह सिर्फ एक व्यापारिक आयोजन की निरंतरता नहीं, बल्कि भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की लंबी यात्रा का पड़ाव है। भदोही के लिए असली सफलता तब मानी जाएगी जब एक्सपो की चकाचौंध खत्म होने के बाद भी उसके करघों पर काम बढ़े, बुनकरों के हाथों में लगातार रोजगार रहे, छोटे उद्यमियों को नए खरीदार मिलें और ‘भदोही कार्पेट’ की पहचान दुनिया के बाजार में और मजबूत हो।

मुन्ना की नजर में एक्सपो का असर

विदेशी खरीदार → नए बाजार और कारोबारी संपर्क

निर्यातक → नए ऑर्डर और बाजार की सीधी समझ

छोटे उद्यमी → बड़े खरीदारों तक पहुंच

बुनकर → बढ़ते ऑर्डर के साथ रोजगार की संभावनाएं

डिजाइनर → वैश्विक पसंद और नए डिजाइन का फीडबैक

सहायक उद्योग → धागा, रंगाई, धुलाई, फिनिशिंग, पैकिंग व परिवहन में काम

भदोही → ‘कालीन नगरी’ की वैश्विक कारोबारी पहचान को मजबूती

करघे से ग्लोबल मार्केट तक, भदोही ने बुना आधी सदी का सफर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे 50वें गोल्डन जुबली इंडिया कार्पेट एक्सपो का उद्घाटन; 65 देशों के 430 विदेशी खरीदार, 223 से अधिक प्रदर्शक जुटेंगे

भदोही में गोल्डन जुबली एक्सपो का महासंगम नहीं, वैश्विक कारोबार 

50वें गोल्डन जुबली इंडिया कार्पेट एक्सपो में 223 से अधिक प्रदर्शक; BRICS देशों के 106 खरीदार भी पहुंचे, वैश्विक बाजार में भारतीय कालीन की नई उड़ान

एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील, सांसद भदोही डॉ. विनोद कुमार बिंद, विधायक औराई दीनानाथ भास्कर, विधायक ज्ञानपुर विपुल दुबे , जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, विंध्याचल मंडलायुक्त राजेश प्रकाश तथा जिलाधिकारी भदोही शैलेष कुमार की गरिमामयी उपस्थिति एवं आशीर्वाद प्राप्त होगा

सुरेश गांधी

भदोही। धागे-धागे में हुनर, गांठ-गांठ में परंपरा और रंगों में सदियों की विरासत...। भदोही की धरती एक बार फिर उस कला की वैश्विक मेजबानी के लिए तैयार है, जिसने इस कालीन नगरी को दुनिया के नक्शे पर अलग पहचान दी है। हाथों की महीन कारीगरी से बुने भारतीय कालीन अब केवल फर्श की खूबसूरती नहीं, बल्कि भारत की शिल्प-संस्कृति, रचनात्मकता और निर्यात क्षमता के दूत बनकर दुनिया के बाजारों तक पहुंच रहे हैं। इसी विरासत का उत्सव 50वें गोल्डन जुबली इंडिया कार्पेट एक्सपो में दिखाई देगा। कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) की ओर से 04 से 07 अक्टूबर 2026 तक कार्पेट एक्सपो मार्ट, भदोही में इंडिया कार्पेट एक्सपो का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 50वें गोल्डन जुबली इंडिया कार्पेट एक्सपो का उद्घाटन करेंगे। कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) की ओर से 04 से 07 अक्टूबर तक कार्पेट एक्सपो मार्ट में आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में 65 देशों के 430 विदेशी खरीदार और 223 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं। इनमें BRICS देशों के 106 खरीदार भी शामिल हैं। भदोही में यह एक्सपो पांचवीं बार आयोजित हो रहा है। हस्तनिर्मित कालीन, रग्स और फ्लोर कवरिंग्स की दुनिया में यह प्रदर्शनी एशिया के प्रमुख व्यापारिक मंचों में अपनी पहचान बना चुकी है।

65 देशों से आएंगे कालीन के खरीदार

गोल्डन जुबली संस्करण का सबसे बड़ा आकर्षण इसका अंतरराष्ट्रीय स्वरूप है। इस बार 223 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं, जबकि 65 देशों के 430 विदेशी खरीदारों ने पंजीकरण कराया है। इनमें BRICS देशों के 106 खरीदार शामिल हैं। परिषद की ओर से करीब 196 विदेशी खरीदारों को आतिथ्य पैकेज दिया गया है। इनमें 168 पूर्ण आतिथ्य और 28 केवल होटल पैकेज शामिल हैं। यह आंकड़ा बताता है कि भदोही के करघों पर बुनी जा रही कला की पहुंच अब स्थानीय बाजारों से निकलकर वैश्विक कारोबारी गलियारों तक पहुंच चुकी है।

धागों में परंपरा, डिजाइनों में आधुनिकता

एक्सपो में भारतीय बुनकरों और निर्माताओं की पारंपरिक बुनाई के साथ आधुनिक डिजाइन और समकालीन रचनात्मकता का मेल देखने को मिलेगा। सदियों पुरानी भारतीय हस्तनिर्मित कालीन परंपरा जहां अपनी मौलिक पहचान बनाए रखेगी, वहीं बदलते वैश्विक बाजार की पसंद और जरूरतों के अनुरूप नए डिजाइन भी आकर्षण का केंद्र होंगे। यह आयोजन भारतीय निर्माताओं और निर्यातकों को दुनिया भर के खरीदारों से सीधे संवाद और कारोबारी साझेदारी का अवसर देगा। ऐसे में एक्सपो को केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारतीय कालीन उद्योग के लिए वैश्विक बाजार का महत्वपूर्ण संपर्क-बिंदु माना जा रहा है।

टैरिफ की चुनौती के बीच बाजार विस्तार की कोशिश

CEPC अध्यक्ष कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर ने कहा कि इंडिया कार्पेट एक्सपो वैश्विक हस्तनिर्मित कालीन बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए रणनीतिक मंच के रूप में उभरा है। प्रमुख आयातक देशों में टैरिफ संबंधी चुनौतियों के बीच परिषद सरकार के साथ लगातार संवाद कर रही है। इसमें प्रस्तावित भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (India-UK FTA) से जुड़े प्रयास भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद और मजबूत नीतिगत सहयोग से भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों के लिए बेहतर बाजार पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार के सहयोग को भी उन्होंने उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बताया।

BRICS के बहाने दुनिया से संवाद

गोल्डन जुबली संस्करण में ‘BRICS Carpet & Craft Conclave 2026’ भी आयोजित किया जा रहा है। इसकी थीम ‘Three Days – Three Themes – One Global Conversation’ रखी गई है। इसमें BRICS देशों के साथ वैश्विक कालीन एवं हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े हितधारक संवाद, ज्ञान-विनिमय और कारोबारी सहभागिता करेंगे। CEPC के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने इसे परिषद की यात्रा का गौरवपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि वर्षों में इंडिया कार्पेट एक्सपो ऐसा वैश्विक मंच बन चुका है, जहां भारतीय निर्माता और निर्यातक दुनिया के प्रतिष्ठित खरीदारों से सीधे जुड़ते हैं। BRICS देशों के खरीदारों और प्रतिनिधियों की भागीदारी से बाजार विस्तार और दीर्घकालिक कारोबारी साझेदारियों के नए अवसर बनने की उम्मीद है।

छह ज्ञान सत्रों में उद्योग के भविष्य पर मंथन

एक्सपो के दौरान CEPC की ओर से छह ज्ञानवर्धक सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। इनमें हस्तनिर्मित कालीन और फ्लोर-कवरिंग उद्योग से जुड़े समकालीन विषयों, बदलते वैश्विक बाजार और महत्वपूर्ण औद्योगिक विकास पर चर्चा होगी। यानी भदोही में चार दिन सिर्फ कालीनों के रंग और डिजाइन नहीं बोलेंगे, बल्कि उद्योग के भविष्य पर भी गंभीर विमर्श होगा।

‘नवसृष्टि 2026’ में दिखेगा भारतीय हुनर का श्रेष्ठ रूप

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कार्पेट टेक्नोलॉजी (IICT) की ओर से ‘Navshristi 2026 – A Curated Showcase of the Best Indian Handmade Carpets’ का आयोजन भी किया जा रहा है। यह आयोजन 03 से 07 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इसमें सहभागी प्रदर्शकों के चुनिंदा और उत्कृष्ट कालीन प्रदर्शित किए जाएंगे। उद्देश्य भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की उत्कृष्टता, नवाचार, रचनात्मकता और शिल्पकौशल को दुनिया के सामने प्रमुखता से रखना है।

भदोही की मिट्टी से वैश्विक बाजार तक

कार्यकारी निदेशक-सह-सचिव डॉ. स्मिता नागरकोटी के अनुसार, एक्सपो से महत्वपूर्ण व्यावसायिक अवसर पैदा होने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की उपस्थिति मजबूत होने और हस्तनिर्मित कालीन, रग्स एवं फ्लोर कवरिंग्स के अग्रणी उत्पादक-निर्यातक के रूप में भारत की प्रतिष्ठा और मजबूत होने की उम्मीद है। गोल्डन जुबली का यह आयोजन उस उद्योग की यात्रा का उत्सव भी है, जिसमें मशीनों की चमक से कहीं अधिक हाथों की गर्माहट है। हर कालीन के पीछे किसी बुनकर की उंगलियों की मेहनत, किसी परिवार की पीढ़ियों पुरानी परंपरा और किसी डिजाइनर की कल्पना छिपी है। भदोही का यह एक्सपो इन्हीं हाथों की मेहनत को दुनिया के बाजार से जोड़ने का प्रयास है। परिषद ने भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग को मजबूत करने और उसकी वैश्विक पहचान बढ़ाने के लिए वस्त्र मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग के प्रति आभार जताया है।

एक्सपो में दिग्गजों की मौजूदगी

गोल्डन जुबली संस्करण को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील, सांसद भदोही डॉ. विनोद कुमार बिंद, विधायक औराई दीनानाथ भास्कर, विधायक ज्ञानपुर विपुल दुबे, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, विंध्याचल मंडलायुक्त राजेश प्रकाश तथा जिलाधिकारी भदोही शैलेष कुमार की गरिमामयी उपस्थिति एवं आशीर्वाद प्राप्त होगा।

प्रशासनिक समिति ने संभाली कमान

गोल्डन जुबली संस्करण को भव्य बनाने के लिए CEPC की प्रशासनिक समिति सक्रिय है। समिति में अध्यक्ष कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर, एकमाध्यक्ष उमेश गुप्ता मुन्ना, उपाध्यक्ष असलम महबूब के साथ अनिल कुमार सिंह, बोध राज मल्होत्रा, दीपक खन्ना, हुसैन जफर हुसैनी, इम्तियाज अहमद, कुलदीप राज वट्टल, पीयूष कुमार बरनवाल, महावीर प्रताप शर्मा, मेहराज यासीन जान, मोहम्मद वसीफ अंसारी, रवि पाटोदिया, रोहित गुप्ता, संजय कुमार गुप्ता, शौकत खान, शेख आशिक अहमद तथा सूर्य मणि तिवारी शामिल हैं। गोल्डन जुबली इंडिया कार्पेट एक्सपो ऐसे समय में हो रहा है, जब भदोही के करघों की आवाज को वैश्विक बाजार की नई जरूरतों से जोड़ने की चुनौती सामने है। चार दिन का यह आयोजन तय करेगा कि आधी सदी पुरानी यह व्यापारिक परंपरा आने वाले वर्षों में किन नए बाजारों, नए रिश्तों और नए डिजाइनों के साथ आगे बढ़ती है।

एक्सपो से सिर्फ ऑर्डर नहीं, भदोही के हर हाथ को काम बढ़ने की उम्मीद

एक्सपो से सिर्फ ऑर्डर नहीं , भदोही के हर हाथ को काम बढ़ने की उम्मीद  अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ अध्यक्ष उमेश कुमार ...