गंगा के ऊपर गरजेगा राफेल, आसमान में सूर्य किरण की कलाबाजियां
25 अक्टूबर को नमो
घाट
पर
मुख्य
एयर
शो,
प्रधानमंत्री
मोदी
के
शामिल
होने
की
संभावना
22, 24 और 25 अक्टूबर
को
वायुसेना
के
हवाई
प्रदर्शन
की
तैयारी;
गंगा
में
मानेकशा
और
विवेकानंद
जलयान
बनेंगे
निगरानी
केंद्र,
रस्सी
के
सहारे
उतरेंगे
कमांडो
सुरेश गांधी
वाराणसी। एक ओर गंगा
की लहरों पर उगते सूरज
की स्वर्णिम आभा, दूसरी ओर
सदियों की आस्था को
अपने आंचल में समेटे
काशी के घाट और
उनके ऊपर आसमान में
गर्जना करते अत्याधुनिक लड़ाकू
विमान। आध्यात्मिकता और सामरिक शक्ति
का यह अनूठा दृश्य
25 अक्टूबर को वाराणसी के
नमो घाट पर साकार
होने की तैयारी में
है। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ
के अवसर पर प्रस्तावित
‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर
शो में राफेल, सुखोई-30
एमकेआई और तेजस जैसे
लड़ाकू विमानों के साथ सूर्य
किरण एरोबैटिक टीम और सारंग
हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम अपने कौशल
का प्रदर्शन करेंगी।
काशी में 22, 24 और
25 अक्टूबर को एयर शो
से जुड़ी गतिविधियां प्रस्तावित हैं। आयोजन के
अंतिम दिन 25 अक्टूबर को मुख्य हवाई
प्रदर्शन होगा। इस अवसर पर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल
होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तैयारियों
का जायजा ले चुके हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत अन्य
विशिष्ट अतिथियों के भी पहुंचने
की संभावना जताई गई है।
गंगा के ऊपर होने
वाला यह आयोजन महज
विमानों की रफ्तार और
ताकत का प्रदर्शन नहीं
होगा। इसके जरिए भारतीय
वायुसेना की तकनीकी दक्षता,
पायलटों के असाधारण कौशल,
अनुशासन और विभिन्न रक्षा
सेवाओं के बीच तालमेल
को भी सामने लाने
की तैयारी है। काशी की
सांस्कृतिक पहचान के साथ आधुनिक
भारत की सैन्य क्षमता
का यह प्रदर्शन पर्यटन
और युवाओं को विमानन क्षेत्र
से जोड़ने के लिहाज से
भी खास होगा।
गंगा में तैनात होंगे मानेकशा और विवेकानंद
एयर शो की
तैयारियों में गंगा की
भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
आयोजन के दौरान नदी
में होने वाली गतिविधियों
के संचालन और निगरानी के
लिए अलकनंदा क्रूजलाइन के दो बड़े
जलयानों मानेकशा और विवेकानंद को
चुना गया है। इन
जलयानों पर आयोजन से
जुड़े अधिकारियों की तैनाती के
साथ निगरानी केंद्र बनाए जाने की
तैयारी है। गंगा में
नमो घाट के आसपास
इनकी तैनाती से जल क्षेत्र
की गतिविधियों पर नजर रखने
में मदद मिलेगी। जलयानों
के जरिए आयोजन के
दौरान नदी में सुरक्षा
और समन्वय संबंधी जिम्मेदारियां निभाई जाएंगी। एयर शो के
लिए इनकी उपयोगिता परखने
को लेकर अभ्यास भी
किया गया है। अलकनंदा
क्रूजलाइन के संचालक विकास
मालवीय के मुताबिक, तीनों
निर्धारित तिथियों के लिए दोनों
जलयानों की तैनाती की
गई है। इन पर
आयोजन से संबंधित गतिविधियां
होंगी और अधिकारी भी
मौजूद रहेंगे। सुरक्षा की दृष्टि से
तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
रस्सी के सहारे जलयानों पर उतरेंगे कमांडो
एयर शो का
रोमांच केवल आसमान तक
सीमित नहीं रहेगा। गंगा
की लहरों के बीच जलयानों
पर कमांडो के उतरने का
प्रदर्शन भी प्रस्तावित है।
पैरा ट्रूपर कमांडो रस्सी के सहारे जलयानों
पर उतरकर अपने प्रशिक्षण, साहस
और सटीक तालमेल का
परिचय देंगे। इस प्रदर्शन की
तैयारी के क्रम में
12 अक्टूबर को अभ्यास किए
जाने की जानकारी सामने
आई थी। योजना के
मुताबिक, जलयानों को इस तरह
इस्तेमाल किया जाएगा कि
गंगा में होने वाली
गतिविधियों पर निगरानी के
साथ प्रदर्शन का समन्वय भी
बना रहे। इस तरह
नदी, घाट और आसमान
तीनों स्तरों पर अलग-अलग
गतिविधियों का संचालन एयर
शो को बहुआयामी बनाएगा।
हालांकि, प्रदर्शन का अंतिम स्वरूप
निर्धारित कार्यक्रम और सुरक्षा संबंधी
मंजूरियों के अनुरूप रहेगा।
राफेल, सुखोई और तेजस दिखाएंगे उड़ान का दम
एयर शो का
सबसे बड़ा आकर्षण लड़ाकू
विमानों की उड़ानें होंगी।
राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और स्वदेशी हल्के
लड़ाकू विमान तेजस के प्रदर्शन
के जरिए दर्शकों को
भारतीय वायुसेना की हवाई क्षमताओं
की झलक मिलेगी। इसके
साथ हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड और आईएल-76, आईएल-78,
सी-295 तथा एएन-32 जैसे
परिवहन और अन्य सैन्य
विमानों की भागीदारी भी
प्रस्तावित है। इन विमानों
की अलग-अलग भूमिकाएं
वायुसेना की व्यापक परिचालन
क्षमता को रेखांकित करेंगी।
राफेल और सुखोई जैसे
लड़ाकू विमानों की तेज उड़ान,
दिशा में सटीक बदलाव
और निर्धारित संरचनाओं में उड़ान का
कौशल दर्शकों के लिए आकर्षण
का केंद्र होगा। वहीं परिवहन विमान
सैन्य साजो-सामान और
अन्य आवश्यक संसाधनों को पहुंचाने में
वायुसेना की भूमिका की
याद दिलाएंगे। प्रदर्शन में भारतीय नौसेना
और थल सेना के
विमानों की भागीदारी भी
प्रस्तावित है। इससे विभिन्न
रक्षा सेवाओं के बीच समन्वय
और संयुक्त परिचालन क्षमता को प्रदर्शित करने
का अवसर मिलेगा।
सूर्य किरण की कलाबाजियां, सारंग का अनूठा प्रदर्शन
आसमान में रंग और
रोमांच भरने की जिम्मेदारी
सूर्य किरण एरोबैटिक टीम
और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम संभालेंगी। सूर्य
किरण के पायलट एक
साथ उड़ान भरते हुए सटीक
संरचनाएं बनाएंगे। तेज गति से
उड़ते विमानों के बीच दूरी,
दिशा और समय का
संतुलन बनाए रखना उनके
कठिन प्रशिक्षण और असाधारण एकाग्रता
का प्रमाण होगा। दूसरी ओर, सारंग टीम
के हेलीकॉप्टर अपने विशेष हवाई
करतबों से दर्शकों का
ध्यान खींचेंगे। हेलीकॉप्टरों की नियंत्रित उड़ान
और आपसी तालमेल से
होने वाला प्रदर्शन लड़ाकू
विमानों की तेज रफ्तार
से अलग रोमांच पैदा
करेगा। हर करतब के
पीछे केवल पायलट का
कौशल नहीं, बल्कि इंजीनियरों, तकनीशियनों, ग्राउंड सपोर्ट स्टाफ और संचार व्यवस्था
से जुड़े कर्मियों का सामूहिक योगदान
होता है। एयर शो
इसी व्यापक तैयारी और अनुशासन की
झलक आम लोगों तक
पहुंचाने का माध्यम बनेगा।
25 अक्टूबर को काशी पहुंच सकते हैं प्रधानमंत्री
एयर शो के
मुख्य आयोजन को लेकर प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के 25 अक्टूबर
को वाराणसी पहुंचने की संभावना है।
प्रस्तावित कार्यक्रम में उनके नमो
घाट पर मुख्य हवाई
प्रदर्शन देखने की योजना बताई
गई है। रक्षा मंत्री
राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित
शाह और मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ समेत अन्य विशिष्ट
अतिथियों की मौजूदगी भी
संभावित है। आयोजन में
लगभग चार हजार विशिष्ट
अतिथियों के शामिल होने
की चर्चा है। इसे देखते
हुए प्रशासन और पुलिस के
सामने अतिथियों की आवाजाही, सुरक्षा,
पार्किंग और आम लोगों
की सुविधा के बीच संतुलन
बनाने की चुनौती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
तैयारियों की समीक्षा के
दौरान सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और गंगा के
अन्य घाटों पर भी आवश्यक
इंतजाम करने के निर्देश
दिए हैं। प्रशासन का
जोर इस बात पर
है कि बड़े आयोजन
के दौरान सुरक्षा में कोई चूक
न हो और आम
लोगों को अनावश्यक परेशानी
का सामना भी न करना
पड़े।
नमो घाट से गंगा किनारे तक सुरक्षा का घेरा
एयर शो के
मद्देनजर नमो घाट और
आसपास के गंगा तट
पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही
है। आयोजन स्थल पर प्रवेश
और निकास के रास्तों, बैरिकेडिंग
तथा विभिन्न स्तरों पर निगरानी की
व्यवस्था की जा रही
है। घाटों पर भीड़ बढ़ने
की संभावना को देखते हुए
प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता
बरतनी होगी। तैयारी के तहत नमो
घाट पर 21 से 25 अक्टूबर तक आम आवाजाही
बंद रखने और गंगा
में स्नान पर रोक संबंधी
व्यवस्था की जानकारी भी
सामने आई है। गंगा
किनारे अस्सी घाट से नमो
घाट तक सुरक्षा और
भीड़ नियंत्रण के इंतजाम किए
जा रहे हैं। आयोजन
के दौरान निर्धारित प्रतिबंधों और प्रशासन की
ओर से जारी निर्देशों
का पालन करना जरूरी
होगा। वायुसेना के विमानों की
उड़ान के समय पक्षियों
से टकराव की आशंका कम
करने के लिए आयोजन
क्षेत्र के आसपास मांस,
मछली और पोल्ट्री की
दुकानों तथा कटान पर
प्रतिबंध लगाने की तैयारी भी
की गई है। बड़े
हवाई प्रदर्शन में सुरक्षा केवल
दर्शकों तक सीमित नहीं
रहती; उड़ान क्षेत्र, पक्षियों की गतिविधियों और
जमीन पर मौजूद लोगों
की आवाजाही का समन्वय भी
उतना ही महत्वपूर्ण होता
है।
युवाओं के लिए खुलेगी आसमान की नई खिड़की
‘विंग्स ओवर गंगा’ का
एक उद्देश्य युवाओं को विमानन, एयरोस्पेस
तकनीक और राष्ट्रसेवा से
जुड़े अवसरों के प्रति प्रेरित
करना भी है। लड़ाकू
विमानों और हेलीकॉप्टरों को
करीब से देखने का
अवसर उन्हें तकनीकी शिक्षा, उड़ान प्रशिक्षण और रक्षा सेवाओं
में करियर की संभावनाओं से
परिचित करा सकता है।
भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य
‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ यानी ‘गर्व के साथ
आकाश को छूना’ इस
आयोजन की भावना को
अभिव्यक्त करता है। यह
वाक्य केवल ऊंचाई पर
उड़ने का संदेश नहीं,
बल्कि दक्षता, साहस, जिम्मेदारी और राष्ट्र के
प्रति समर्पण का भी प्रतीक
है। काशी में गंगा
की अविरल धारा के ऊपर
जब विमानों की संरचनाएं गुजरेंगी,
तो प्राचीन नगर की पहचान
और आधुनिक भारत की तकनीकी
क्षमता एक ही दृश्य
में दिखाई देंगी। आयोजन तय कार्यक्रम के
अनुरूप हुआ तो यह
एयर शो वाराणसी के
लिए एक विशिष्ट अनुभव
होगा—जहां घाटों की
शांति के ऊपर गूंजती
इंजनों की गर्जना, आकाश
में सधे करतब और
गंगा पर सक्रिय जलयानों
की हलचल मिलकर एक
यादगार दृश्य रचेंगे।
