Wednesday, 2 September 2026

बनारस के बाने को यूरोप की उड़ान, एफटीए से खुलेंगे ग्लोबल बाजार के द्वार

बनारस के बाने को यूरोप की उड़ान, एफटीए से खुलेंगे ग्लोबल बाजार के द्वार 

टेक्सटाइल कमिश्नर ने उद्योग जगत से कहाबदलते वैश्विक बाजार के साथ कदम मिलाएं, सरकारी योजनाओं का उठाएं पूरा लाभ

सुरेश गांधी 

वाराणसी। बनारस और पूर्वांचल के वस्त्र उद्योग को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में बुधवार को महत्वपूर्ण पहल हुई। वस्त्र मंत्रालय के अधीन वस्त्र समिति द्वारा संचालित टेक्सटाइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर (TEFC), वाराणसी की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर निर्यातकों और वस्त्र निर्माताओं को संभावनाओं और चुनौतियों से रूबरू कराया गया।

कार्यक्रम का मुख्य विषयबिल्डिंग ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस: इंडिया-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन फॉर टेक्सटाइल सेक्टररहा। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वस्त्र मंत्रालय की टेक्सटाइल कमिश्नर सुश्री वृंदा मनोहर देसाई ने दीप प्रज्वलित कर सत्र का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार तेजी से बदल रहा है। ऐसे में वस्त्र उद्योग को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता, मानकों और खरीदारों की बदलती जरूरतों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा। उन्होंने स्थानीय उद्यमियों से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाकर निर्यात क्षमता बढ़ाने का आह्वान किया।  वस्त्र समिति के सचिव कार्तिकेय ढांडा ने कहा कि TEFC निर्यातकों के लिए सुविधा और मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में आने वाली व्यावहारिक अड़चनों को दूर करना और निर्यातकों को हर स्तर पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है।

एफटीए से लेकर टैरिफ तक समझीं बारीकियां

वस्त्र समिति के सहायक निदेशक श्री अम्बरीश सिंह ने भारत-ईयू एफटीए के तहत वस्त्र उद्योग के लिए संभावित अवसरों, टैरिफ रियायतों, रूल्स ऑफ ओरिजिन और आवश्यक दस्तावेजीकरण की जानकारी दी। एक्जिम बैंक, लखनऊ के रीजनल हेड श्री आशीष सोनी ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) के साथ निर्यातकों और एमएसएमई के लिए उपलब्ध वित्तीय एवं रणनीतिक सहायता की जानकारी साझा की। डीजीएफटी की ओर से भी निर्यात संबंधी दिशा-निर्देशों पर प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में संयुक्त डीजीएफटी-वाराणसी आलोक द्विवेदी, कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) के वाइस चेयरमैन असलम महबूब और पूर्वी उत्तर प्रदेश निर्यातक संघ (EUPEA) के कोषाध्यक्ष राजेश कुशवाहा समेत अनेक प्रतिनिधि मौजूद रहे। अंत में प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्र में वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे वस्त्र निर्माताओं, निर्यातकों और एमएसएमई प्रतिनिधियों ने भारत-ईयू एफटीए, एचएस कोडिंग, निर्यात प्रक्रिया और नियामकीय अनुपालनों से जुड़े सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने सवालों के समाधान के साथ वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनने की रणनीति भी साझा की।

काशी से मथुरा पहुंचा कान्हा के लिए बाबा का नेह-उपहार

काशी से मथुरा पहुंचा कान्हा के लिए बाबा का नेह-उपहार

विश्वनाथ के आंगन से लड्डू गोपाल को भेंट, 15 देशों के 100 से अधिक देवालयों के शुभकामना संदेश भी भेजे गए

सुरेश गांधी 

वाराणसी. काशी के बाबा विश्वनाथ के आंगन से मथुरा के लड्डू गोपाल के लिए एक बार फिर प्रेम, आस्था और सनातन एकात्मता का संदेश रवाना हुआ। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम की ओर से भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान मथुरा स्थित श्री लड्डू गोपाल के लिए विशेष भेंट एवं उपहार सामग्री विधि-विधानपूर्वक पूजित कर श्रद्धा के साथ प्रेषित की गई। काशी और मथुरा के बीच शुरू हुई यह अनूठी धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा अब सनातन संस्कृति के दो प्रमुख तीर्थों को भावनात्मक सूत्र में पिरोने लगी है।

4 सितंबर को मनाए जाने वाले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव से पहले बुधवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष अनुष्ठान हुआ। लड्डू गोपाल के लिए तैयार भेंट सामग्री को बाबा विश्वनाथ के समक्ष विधिवत पूजित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बीच सामग्री भगवान श्री विश्वेश्वर को समर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया गया। इसके बाद इसे श्रद्धापूर्वक श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा के लिए रवाना किया गया। मंदिर न्यास के अधिकारी और कार्मिक इस भावपूर्ण आयोजन के साक्षी बने।

2024 में जली थी श्रद्धा की यह ज्योति

काशी और मथुरा के बीच भेंट और शुभकामना के इस आध्यात्मिक संवाद की शुरुआत वर्ष 2024 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर हुई थी। तब श्री काशी विश्वनाथ धाम की ओर से भगवान श्री विश्वेश्वर की ओर से श्रीकृष्ण जन्मस्थान में विराजमान लड्डू गोपाल के लिए उपहार भेजा गया था। इसके बाद रंगभरी एकादशी पर भी दोनों तीर्थों के बीच भेंट और श्रद्धा संदेशों का आदान-प्रदान हुआ। इस पहल का उद्देश्य देश के प्रमुख मंदिरों और तीर्थों के बीच आध्यात्मिक संवाद, सांस्कृतिक समन्वय और पारस्परिक श्रद्धा को नई ऊंचाई देना है।

15 देशों से आए 100 से अधिक संदेश

इस वर्ष इस पहल को और व्यापक स्वरूप दिया गया है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने संस्थागत नॉलेज पार्टनर टेम्पल कनेक्ट के सहयोग से देश-विदेश के देवालयों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुभकामना संदेश भेजने के लिए जोड़ा। अब तक करीब 15 देशों के 100 से अधिक देवालयों से शुभकामना संदेश प्राप्त हो चुके हैं। इन संदेशों को भी लड्डू गोपाल के लिए भेजी जा रही भेंट सामग्री के साथ श्रीकृष्ण जन्मस्थल न्यास को सौंपा जा रहा है। यह पहल मानो सीमाओं से परे सनातन आस्था की एक ऐसी कड़ी है, जिसमें अलग-अलग भूभागों में विराजमान देवालय एक-दूसरे के पर्व में सहभागी बन रहे हैं। वर्ष 2024 में शुरू हुई इस परंपरा को देश-विदेश के मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं से मिल रही सराहना ने इसके विस्तार की राह और प्रशस्त की है।

शिव-कृष्ण भक्ति के सेतु पर एकात्मता का संदेश

काशी में बाबा विश्वनाथ और मथुरा में श्रीकृष्णदोनों सनातन चेतना के ऐसे आराध्य हैं, जिनकी भक्ति भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को गहराई और विस्तार देती है। एक ओर शिव की नगरी काशी, दूसरी ओर कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा। दोनों के बीच उपहार और शुभकामनाओं का यह सिलसिला केवल धार्मिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सहभक्ति और सनातन एकात्मता का जीवंत संदेश बन रहा है। मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने बताया अधिकारियों और कार्मिकों को इस प्रकार के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं जनहितकारी नवाचारों को निरंतर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परंपराओं की श्रृंखला भविष्य में भी निर्बाध रूप से जारी रहनी चाहिए और इन्हें स्थायी स्वरूप देने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जाना चाहिए। उपस्थित अधिकारियों एवं कार्मिकों ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता जताई।

मथुरा में स्वयं शामिल होंगे सीईओ

इस आध्यात्मिक रिश्ते को और मजबूती देने के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी स्वयं मथुरा में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में शामिल होंगे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर काशी की ओर से पहुंची भेंट और शुभकामना संदेशों के साथ यह सहभागिता दोनों तीर्थों के बीच स्थापित हो रहे सांस्कृतिक संवाद को नया आयाम देगी। काशी से निकली यह भेंट इसलिए भी खास है कि इसमें वस्तुओं से कहीं अधिक भावनाएं यात्रा कर रही हैं। बाबा विश्वनाथ के धाम से लड्डू गोपाल की जन्मभूमि तक पहुंचता यह उपहार उस सनातन भाव का प्रतीक है, जिसमें देवालय अलग हो सकते हैं, आराध्य के स्वरूप अलग हो सकते हैं, लेकिन श्रद्धा का हृदय एक ही रहता है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर देशवासियों और सनातन श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए भगवान श्रीकृष्ण और बाबा विश्वनाथ से समस्त विश्व के कल्याण, सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की है।

बनारस के बाने को यूरोप की उड़ान, एफटीए से खुलेंगे ग्लोबल बाजार के द्वार

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