Wednesday, 9 September 2026

बेटी की सुरक्षा में सेंध तो जेल या जहन्नुम योगी

बेटी की सुरक्षा में सेंध तो जेल या जहन्नुम : योगी 

बाबतपुर में कामकाजी महिलाओं के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री का सख्त संदेश—‘तीसरा कोई रास्ता नहीं

सुरेश गांधी  

वाराणसी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को बाबतपुर-पिंडरा स्थित आशा एजुकेशन ग्रुप परिसर में कामकाजी महिला सम्मान समारोह में कहा कि बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के लिए जेल या जहन्नुम जाने के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन शक्ति ने प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत आधार दिया है। पुलिस में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। 2017 से पहले प्रदेश पुलिस में करीब 10 हजार महिलाएं थीं, अब यह संख्या लगभग 45 हजार हो गई है। महिला सशक्तीकरण के तहत पीएसी की तीन महिला बटालियनों का नाम रानी अवंतीबाई लोधी, ऊदा देवी और झलकारी बाई के नाम पर रखा गया है।

सम्मान से आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता से शक्ति

योगी ने कहा कि आधी आबादी को सम्मान और उनके योगदान का एहसास कराने वाले ऐसे आयोजन जरूरी हैं। सरकार महिला सुरक्षा से आगे बढ़कर उनके सम्मान, शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन पर भी काम कर रही है। स्वयं सहायता समूहों से करीब 28 लाख महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। बीसी सखी और ड्रोन दीदी जैसी पहल महिलाओं को नई जिम्मेदारियां और रोजगार के अवसर दे रही हैं। उन्होंने कहा कि पूंजी के अभाव में अब किसी महिला का सपना अधूरा नहीं रहेगा। बेटियों की शिक्षा के लिए अटल आवासीय विद्यालयों में आधी सीटें आरक्षित हैं, जबकि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के माध्यम से भी उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है। मेधावी छात्राओं को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना का लाभ देने की बात भी उन्होंने कही।

योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचा

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास, मुख्यमंत्री आवास, उज्ज्वला, शौचालय, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, कन्या सुमंगला, सामूहिक विवाह और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि काशी की आध्यात्मिक-सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक पहचान में बदलने का काम हो रहा है। काशी में करीब एक लाख करोड़ रुपये के विकास कार्य हुए हैं। बेहतर सड़क, पुल, फ्लाईओवर, हाईवे, एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे से आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को गति मिल रही है।

आंगनबाड़ी से आशा वर्कर तक सम्मान

समारोह में मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, रसोइयों, सफाई मित्रों, आशा वर्करों समेत कामकाजी महिलाओं को सम्मानित किया। मंच पर पहुंचते ही महिलाओं ने तालियों की गड़गड़ाहट और गुलाब की पंखुड़ियों से मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

काशी में दिखा योगी का ‘डिजिटल अवतार’

भाषण मंच पर, नजर टैबलेट पर!

काशी में दिखा योगी का ‘डिजिटल अवतार

राष्ट्रीय पोषण माह के मंच प र दिखा अलग अंदाज : भाषण से पहले योजना से खुद को अपडेट किया, कार्यक्रम के बीच जरूरी निर्देश भी दिए

सुरेश गांधी

वाराणसी। मंच पर राष्ट्रीय पोषण माह का शंखनाद हो रहा था। एक के बाद एक वक्ता पोषण, आंगनबाड़ी और बच्चों के भविष्य की बात कर रहे थे। सामने बैठे हजारों लोगों की निगाहें मंच की ओर थीं। लेकिन इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निगाहें एक औरमंचपर टिकी थींउनके हाथ में मौजूद टैबलेट की स्क्रीन पर। बुधवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में नौवें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ समारोह की यह तस्वीर भाषणों और घोषणाओं से अलग एक ऐसी कहानी कहती दिखी, जो शायद पूरे कार्यक्रम की सबसे दिलचस्प तस्वीर बन गई। मुख्यमंत्री कभी स्क्रीन पर जानकारी देखते, कभी उसे पढ़ते और जरूरत के मुताबिक अपने सहयोगियों को निर्देश देते नजर आए। यानी मंच पर केवल भाषण सुनना नहीं, योजना को समझना, उससे खुद को अपडेट रखना और उसी क्षण प्रशासनिक दृष्टि से जरूरी बातों पर नजर रखना भी जारी था। यह दृश्य इसलिए भी खास हो गया क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तकनीकी दक्षता को लेकर अतीत में राजनीतिक तंज कसे जाते रहे हैं। 2019 में अखिलेश यादव की ओर से उन्हेंलैपटॉप नहीं जाननेवाला कहे जाने की रिपोर्टें सामने आई थीं। 2022 में भी इसी तरह के आरोपों के जवाब में योगी ने कहा था कि वे सरकारी योजनाओं की निगरानी -डैशबोर्ड के माध्यम से करते हैं। काशी का यह दृश्य उसी पुराने राजनीतिक नैरेटिव के बरक्स अपने आप में एक मौन जवाब जैसा नजर आया।  

तब कहा गया था—‘लैपटॉप क्या जानें

    2019 में योगी को लेकर ऐसा राजनीतिक तंज सामने आया था। 2022 में भी लैपटॉप-टैबलेट को लेकर सवाल उठे। उसी दौर में योगी ने सरकारी योजनाओं की समीक्षा ई-डैशबोर्ड से करने की बात कही थी। बुधवार को काशी की तस्वीर में हाथ में टैबलेट था और नजर स्क्रीन पर

भाषण सुनते हुएअपडेटभी होते रहे

राष्ट्रीय पोषण माह का कार्यक्रम कोई सामान्य सरकारी समारोह नहीं था। काशी से शुरू हुआ यह अभियान देश के करीब 14 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ा है। ऐसे में मुख्यमंत्री का वक्ताओं को सुनते हुए टैबलेट पर लगातार नजर रखना महज तकनीक का इस्तेमाल नहीं, बल्कि कार्यक्रम की विषयवस्तु से उनकी सक्रिय भागीदारी का संकेत भी माना जा सकता है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी पोषण की गुणवत्ता और आंगनबाड़ी की भूमिका पर बोल रही थीं। केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर देशभर में अभियान के विस्तार की बात कर रही थीं। प्रदेश की मंत्री बेबी रानी मौर्य जनभागीदारी और बच्चों के समग्र विकास पर जोर दे रही थीं। इसी दौरान मुख्यमंत्री की नजरें टैबलेट पर बनी रहीं। ऐसा लगा मानो मंच पर चल रहे भाषण और स्क्रीन पर मौजूद सूचनाएं एक साथ उनके सामने दो समानांतर पाठ खोल रही होंएक सार्वजनिक, दूसरा प्रशासनिक।

सिर्फ स्क्रीन नहीं, निर्णय की मेज भी साथ

मुख्यमंत्री का यह अंदाज इसलिए और महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रीय पोषण माह का अभियान केवल भाषणों तक सीमित नहीं है। इसमें आहार विविधता, पर्याप्त प्रोटीन, ताजा पका भोजन, सामुदायिक जवाबदेही, प्रारंभिक बाल विकास, माताओं की देखभाल और डिजिटल निगरानी जैसे कई स्तर जुड़े हैं। योगी ने अपने संबोधन में खुद इन विषयों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों का कायाकल्प किया गया है। मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों, ताजा भोजन, टीएचआर प्लांट, क्यूआर कोड और रियल टाइम निगरानी जैसी व्यवस्थाओं पर भी उन्होंने विस्तार से बात की। ऐसे में उनके हाथ में टैबलेट की मौजूदगी महजगैजेटकी तस्वीर नहीं रह जाती। यह उस बदलती शासन शैली की तस्वीर बन जाती है जिसमें फाइलों के साथ स्क्रीन और आंकड़ों के साथ रियल टाइम जानकारी भी निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बन रही है।

लैपटॉप नहीं चलाना जानतेवाले तंज का उलटा फ्रेम

राजनीतिक गलियारों में योगी को लेकर यह तंज नया नहीं है। 2019 में अखिलेश यादव के बयान को मीडिया ने इसी शीर्षक के साथ रिपोर्ट किया था किबाबा लैपटॉप क्या जानें 2022 में भी अखिलेश की ओर से लैपटॉप और टैबलेट इस्तेमाल करने की क्षमता पर सवाल उठाए गए थे। जवाब में योगी ने कहा था कि वे -डैशबोर्ड के जरिए सरकारी योजनाओं की समीक्षा करते हैं। लेकिन काशी में बुधवार की तस्वीर में किसी जवाब की जरूरत नहीं थी। स्क्रीन पर चलती उंगलियां और लगातार बदलती निगाहें ही अपना जवाब देती दिखीं। यह किसी राजनीतिक आरोप का प्रतिवाद करने के लिए मंच से दिया गया बयान नहीं था। कोई कटाक्ष, कोई पलटवार। बस काम के बीच तकनीक का सहज इस्तेमाल। और शायद इसी वजह से तस्वीर अधिक प्रभावी है।

बाबाकी छवि के साथडिजिटल प्रशासकका फ्रेम

योगी की सार्वजनिक छवि लंबे समय से धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और कठोर प्रशासनिक शैली के इर्द-गिर्द रही है। भगवा वस्त्र, मंच से तीखे प्रशासनिक निर्देश और कानून-व्यवस्था पर स्पष्ट रुख उनकी पहचान का हिस्सा हैं। लेकिन रुद्राक्ष में दिखाई दी यह तस्वीर उसी छवि में एक नया फ्रेम जोड़ती हैतकनीक के जरिए जानकारी लेने वाला प्रशासक। मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केसुपोषित भारतके विजन की चर्चा हो रही थी और सामने मुख्यमंत्री डिजिटल स्क्रीन पर उसी अभियान से जुड़े विषयों पर नजर रखे थे। कागज के भाषण से आगे बढ़कर स्क्रीन पर सूचनाओं को पढ़ना आज के शासन तंत्र का हिस्सा है।

आंकड़े नहीं, गुणवत्ता मायने रखती है

दिलचस्प यह भी रहा कि केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने अपने संबोधन में पोषण अभियान की सफलता को केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि गुणवत्ता से जोड़ने की बात कही। उन्होंने प्रोटीन के साथ स्वस्थ वसा, विटामिन और विविध पोषक तत्वों पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने भी पोषण को बच्चे के शरीर और मस्तिष्क के विकास से जोड़ा। यानी कार्यक्रम का पूरा विमर्श ही डेटा, गुणवत्ता, निगरानी और परिणाम के आसपास घूम रहा था। ऐसे में मुख्यमंत्री का टैबलेट पर नजर रखना कार्यक्रम के विषय से बिल्कुल अलग दृश्य नहीं, बल्कि उसी बदलती कार्यशैली का दृश्यात्मक विस्तार लगता है।

काशी ने देखी दो तस्वीरें

बुधवार को काशी ने एक ही मंच पर दो तस्वीरें देखीं। एक ओर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता थीं, जो घर-घर जाकर गर्भवती माताओं और बच्चों के पोषण की जानकारी पहुंचाने की कहानी सुना रही थीं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री थे, जो मंच पर भाषण सुनते हुए डिजिटल स्क्रीन पर उसी व्यवस्था की जानकारी से खुद को जोड़े हुए दिखाई दिए। एक जमीन पर काम कर रहा था, दूसरा स्क्रीन पर उस काम की दिशा देख रहा था। शायद यही इस तस्वीर का सबसे बड़ा अर्थ है।

खबर सिर्फयोगी ने टैबलेट चलायानहीं  

इस दृश्य को केवलमुख्यमंत्री ने टैबलेट चलायालिख देना इस तस्वीर के साथ न्याय नहीं होगा। असली खबर यह है कि एक बड़े राष्ट्रीय अभियान के शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री भाषणों के बीच भी योजना की जानकारी से खुद को अपडेट रखने और प्रशासनिक फोकस बनाए रखने की कोशिश करते दिखे। राजनीतिक आरोपों में चाहे जितने शब्द हों, तस्वीर अक्सर उनसे अधिक बोलती है। काशी में बुधवार की तस्वीर ने भी यही कियामंच पर मुख्यमंत्री का भाषण चल रहा था, लेकिन उनकी उंगलियां स्क्रीन पर थीं। और स्क्रीन शायद यही कह रही थी— ‘शासन अब सिर्फ मंच से नहीं, स्क्रीन से भी देखा जा रहा है।

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