Sunday, 21 June 2026

काशी बनी योग की राजधानी, घाट से लेकर गलियों और ग्रामीण अंचलों तक एक साथ गूंजा—'करें योग, रहें निरोग'

काशी बनी योग की राजधानी, घाट से लेकर गलियों और ग्रामीण अंचलों तक एक साथ गूंजा—'करें योग, रहें निरोग'

गंगा तट पर साधना, सड़कों पर अनुशासन और गांवों में स्वास्थ्य का संकल्प

सुरेश गांधी

वाराणसी. विश्व की प्राचीनतम जीवंत नगरी काशी ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि योग उसके लिए केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने की शाश्वत पद्धति है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को काशी का ऐसा स्वरूप देखने को मिला, जहां गंगा के घाटों से लेकर शहर की सड़कों, पार्कों, विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, मंदिर परिसरों और गांव-गिरांव तक हर ओर योग की एक ही लय दिखाई दी। ऐसा लगा मानो पूरी काशी एक साथ प्राणायाम की लय में सांस ले रही हो और स्वस्थ, संतुलित तथा जागरूक समाज का संकल्प दोहरा रही हो।

भोर की पहली किरण के साथ ही अस्सी, दशाश्वमेध, नमो घाट, राजघाट, पंचगंगा और अन्य प्रमुख घाट योग साधकों से भर उठे। गंगा की अविरल धारा, मंदिरों की घंटियां, वैदिक मंत्रोच्चार और उगते सूर्य की लालिमा के बीच हजारों लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास किया। विदेशी पर्यटक, साधु-संत, विद्यार्थी, महिलाएं, बुजुर्ग और युवासभी एक साथ योग करते नजर आए। यह दृश्य केवल स्वास्थ्य का संदेश नहीं दे रहा था, बल्कि भारत की उस सांस्कृतिक विरासत का भी जीवंत परिचय था जिसने योग को पूरी दुनिया की साझा धरोहर बना दिया।

शहर की सड़कों पर भी सुबह का वातावरण सामान्य दिनों से अलग दिखाई दिया। जगह-जगह सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और विभिन्न विभागों द्वारा योग शिविर आयोजित किए गए। पुलिस, प्रशासन, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, व्यापारियों और कर्मचारियों ने भी सामूहिक रूप से योग कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। विद्यालयों में योग के साथ स्वास्थ्य, अनुशासन और मानसिक संतुलन पर आधारित गतिविधियां आयोजित की गईं।

काशी का ग्रामीण अंचल भी इस महाअभियान में पीछे नहीं रहा। विकासखंडों, पंचायत भवनों, प्राथमिक विद्यालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्राम सभाओं में हजारों ग्रामीणों ने योगाभ्यास किया। खेतों की मेड़ों से लेकर पंचायत परिसरों तक योग की गूंज सुनाई दी। ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि योग अब केवल शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि गांवों की जीवनशैली का भी हिस्सा बनता जा रहा है।

इस बार योग दिवस का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि योग अब केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज के निर्माण का राष्ट्रीय अभियान बन चुका है। तनावपूर्ण जीवनशैली, बढ़ती मानसिक चुनौतियों और बदलती दिनचर्या के बीच योग को अपनाने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। काशी में आयोजित कार्यक्रमों ने इसी सोच को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्षों पहले वैश्विक मंच पर उठाई गई योग की पहल आज विश्वव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप ले चुकी है। काशी ने इस अभियान को केवल अपनाया ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक चेतना से उसे और अधिक जीवंत बना दिया है। यहां योग केवल आसनों तक सीमित नहीं, बल्कि अध्यात्म, अनुशासन, आत्मसंयम और प्रकृति के साथ सामंजस्य का माध्यम बनकर सामने आता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर काशी का यह विराट स्वरूप एक बार फिर यह संदेश दे गया कि जब परंपरा और आधुनिकता का संगम होता है, तब केवल आयोजन नहीं होते, बल्कि जनचेतना का नया इतिहास रचा जाता है। गंगा के पावन तट से लेकर गांव की पगडंडियों तक एक साथ हुआ योगाभ्यास इस बात का प्रमाण है कि काशी आज भी भारतीय संस्कृति की आत्मा है और योग उसकी शाश्वत पहचान।

उमड़ा जनसैलाब, हर वर्ग ने लिया स्वस्थ जीवन का संकल्प

मुख्य आयोजन महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मैदान में हुआ, जहां उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा भगवान धन्वंतरि के चित्र पर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रातः छह बजे से प्रशिक्षित योगाचार्यों के निर्देशन में कॉमन योग प्रोटोकॉल के अंतर्गत सामूहिक योगाभ्यास कराया गया। इसके बाद उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री के योग दिवस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा और योग को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार सहित अनेक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षक, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। उधर, नमो घाट पर भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने की। गंगा तट पर उगते सूर्य की स्वर्णिम आभा और वैदिक वातावरण के बीच हजारों लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। कार्यक्रम में आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी सहित अनेक अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। पुलिस लाइन कमिश्नरेट में पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट मोहित अग्रवाल के अगुवाई में समस्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारीगण, पुलिस कर्मी अन्य स्टाफ ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास किया । योग दिवस का उत्साह केवल शहर तक सीमित नहीं रहा। जनपद की सभी विधानसभा क्षेत्रों में भी व्यापक स्तर पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। उत्तरी विधानसभा में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी विहार, दक्षिणी में नमो घाट, कैंट में निवेदिता शिक्षा निकेतन महमूरगंज, रोहनिया में पारस बालिका इंटर कॉलेज (बीएलडब्ल्यू), सेवापुरी एवं शिवपुर के विकास खंड परिसरों, पिंडरा के नेशनल इंटर कॉलेज तथा अजगरा के अमर शहीद इंटर कॉलेज आयर सहित विभिन्न स्थलों पर हजारों लोगों ने योगाभ्यास किया। इसके अलावा जनपद के सभी प्रमुख घाटों, विकास खंडों, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों, पार्कों, विद्यालयों और ग्राम पंचायतों में भी सामूहिक योग सत्र आयोजित हुए। युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों, बुजुर्गों, स्वयं सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि योग अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है।

Saturday, 20 June 2026

जनगणना का पहला मिशन फतह, यूपी ने रचा इतिहास

जनगणना का पहला मिशन फतह, यूपी ने रचा इतिहास 

30 दिन में 100% मकान-सूचीकरण पूरा • 75 जिलों में पांच लाख कर्मियों ने 3.90 लाख से अधिक ब्लॉकों में घर-घर पहुंचकर जुटाए आंकड़े, अब अगले चरण की बारी

सुरेश गांधी

वाराणसी. देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश ने जनगणना-2027 के पहले चरण में बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य में 22 मई से 20 जून 2026 तक चले मकान-सूचीकरण एवं मकान जनगणना (हाउस लिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस) का कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। इसे जनगणना-2027 की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पड़ाव माना जा रहा है।

इस महाअभियान के तहत प्रदेश के 75 जिलों, 350 तहसीलों, 17 नगर निगमों, 200 नगर पालिका परिषदों, 545 नगर पंचायतों, 13 छावनी परिषदों तथा आठ औद्योगिक टाउनशिप में व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण किया गया। लगभग 1.04 लाख गांवों और 14,983 वार्डों में बनाए गए 3,90,717 मकान-सूचीकरण ब्लॉकों में घर-घर जाकर आंकड़े जुटाए गए। इस विशाल कार्य को सफल बनाने के लिए करीब पांच लाख प्रगणकों और पर्यवेक्षकों ने भीषण गर्मी के बावजूद घर-घर पहुंचकर सूचनाएं एकत्र कीं। उनके समर्पण और मेहनत के कारण निर्धारित समय में पूरा अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।

जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तर प्रदेश ने इस सफलता का श्रेय मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन तथा भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त के प्रभावी नेतृत्व और सतत मार्गदर्शन को दिया है। निदेशालय ने कहा कि शासन स्तर से मिले सहयोग और प्रशासनिक समन्वय के कारण इतने बड़े अभियान को समयबद्ध ढंग से पूरा करना संभव हो पाया। अभियान में सभी जिलाधिकारियों, नगर आयुक्तों, जिला जनगणना अधिकारियों, अपर नगर आयुक्तों, चार्ज अधिकारियों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी रही। वहीं एनआईसी के जिला सूचना विज्ञान अधिकारियों ने तकनीकी सहायता देकर डिजिटल प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

निदेशालय ने विशेष रूप से उन प्रगणकों और पर्यवेक्षकों का अभिनंदन किया है, जिन्होंने कठिन मौसम में भी घर-घर पहुंचकर पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ अपने दायित्व का निर्वहन किया। उनके अथक प्रयासों ने इस अभियान को सफलता तक पहुंचाया। जनगणना कार्य निदेशालय ने मीडिया संस्थानों और पत्रकारों का भी आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने अभियान की जानकारी आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही प्रदेश की जनता को धन्यवाद देते हुए कहा गया कि लोगों ने अपने घरों के द्वार खोलकर प्रगणकों का सहयोग किया और सही जानकारी उपलब्ध कराई। अधिकारियों के अनुसार सरकार, प्रशासन, क्षेत्रीय कर्मियों, मीडिया और आम नागरिकों के इस सामूहिक सहयोग ने जनगणना-2027 के पहले चरण को पूरी तरह सफल बनाते हुए अगले चरण के लिए मजबूत आधार तैयार कर दिया।

एक नजर में

22 मई से 20 जून तक चला पहला चरण

100 प्रतिशत मकान-सूचीकरण कार्य पूरा

75 जिले, 350 तहसीलें अभियान में शामिल

1.04 लाख गांव और 14,983 वार्ड कवर

3,90,717 मकान-सूचीकरण ब्लॉक

करीब 5 लाख प्रगणक और पर्यवेक्षक रहे तैनात

जनगणना-2027 के अगले चरण की तैयारियों को मिली मजबूत आधारशिला

काशी बनी योग की राजधानी, घाट से लेकर गलियों और ग्रामीण अंचलों तक एक साथ गूंजा—'करें योग, रहें निरोग'

काशी बनी योग की राजधानी , घाट से लेकर गलियों और ग्रामीण अंचलों तक एक साथ गूंजा —' करें योग , रहें निरोग ' गंगा तट...