Sunday, 25 October 2026

डमरुओं की गूंज, शंखनाद और पुष्पवर्षा से मोदी का अभिनंदन

पुलिस लाइन से नमोघाट तक सजे स्वागत मंच, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंजे रास्ते • महिला मोर्चा से मंत्री, विधायक, महापौर और संगठन के पदाधिकारियों तक ने संभाली कमान 

सुरेश गांधी 

वाराणसी। ढोल-नगाड़ों की थाप, डमरुओं की गूंज, शंखनाद और गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश...। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में रविवार को काशी की सड़कें उत्सव के रंग में रंगी नजर आईं। पुलिस लाइन से नमोघाट तक जगह-जगह सजे मंचों से प्रधानमंत्री का अभिनंदन हुआ। कहीं महिला कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाला तो कहीं मंत्रियों, विधायकों, महापौर और संगठन के पदाधिकारियों की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने पुष्पवर्षा की। ‘हर-हर महादेव’ और ‘मोदी जी’ के समर्थन में नारों के साथ ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष ने माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया।

प्रधानमंत्री के आगमन को यादगार बनाने के लिए भाजपा ने पुलिस लाइन से नमोघाट तक स्वागत स्थलों की श्रृंखला तैयार की थी। प्रमुख चौराहों और मार्गों पर सजे मंचों के आसपास कार्यकर्ता और समर्थक पहले से जुटे रहे। जैसे ही प्रधानमंत्री का काफिला पहुंचा, ढोल-नगाड़ों और डमरुओं की थाप के बीच गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान भाजपा ने अपने संगठन की सक्रियता और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी प्रदर्शित की।

महिला मोर्चा ने किया स्वागत, पुलिस लाइन पर मंत्रियों ने संभाली कमान

स्वागत अभियान की शुरुआत पुलिस लाइन के मुख्य द्वार पर महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने की। सुनीता राजेश सिंह, पूजा दीक्षित, कुसुम पटेल, नेहा कक्कड़, प्रज्ञा पांडेय और महिमा चिंतक समेत सैकड़ों महिला कार्यकर्ता मौजूद रहीं। पुलिस लाइन के सामने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल और अरविंद सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया। पुलिस लाइन चौराहे पर महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, अशोक जाटव और अखिलेंद्र सिंह सन्नी की अगुवाई में स्वागत हुआ।

खजूरी से गोलगड्डा तक जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा

खजूरी-मकबूल आलम रोड पर यस बैंक के सामने हुकुलगंज तिरमुहानी के पास महापौर अशोक कुमार तिवारी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। नवीन कपूर, नीरज जायसवाल और मदन मोहन दुबे समेत मंडल के पदाधिकारी मौजूद रहे। चौकाघाट लकड़ी मंडी में विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र राय और प्रदेश उपाध्यक्ष शंकर गिरी की अगुवाई में अजय गुप्ता, अमित खरे और शोभनाथ मौर्य समेत कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया। गोलगड्डा तिराहे पर विधायक सौरभ श्रीवास्तव और प्रदेश कोषाध्यक्ष मनीष कपूर के नेतृत्व में राहुल सिंह, दिनेश सिंह दिनू और दीपेश वशिष्ठ समेत सैकड़ों कार्यकर्ता जुटे। कज्जाकपुरा में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ और विद्यासागर राय की अगुवाई में जगन्नाथ ओझा, मधुप सिंह और योगेश सिंह पिंकू समेत कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। भदऊं चुंगी मोड़ पर विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी के नेतृत्व में आत्मा विश्वेश्वर, संदीप चौरसिया और सुनील यादव समेत दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया।

रेलवे डाट पुल से नमोघाट तक पुष्पवर्षा

रेलवे डाट पुल से पहले अमित पटेल रिंकू, कृष्णकांत मिश्र कल्लू, विनय मौर्य, शशिकांत कुशवाहा और डिम्पल उपाध्याय समेत कार्यकर्ता स्वागत के लिए मौजूद रहे। नमोघाट जाने वाली ढलान पर विजय राज यादव, गोविन्द दास गुप्ता, शशांक श्रीवास्तव और शशिकांत गिरी की अगुवाई में समर्थकों ने प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया। नमोघाट के नीचे गजीबो रोड पर बृजेश राजभर, अमन सोनकर, युसूफ खान और अमित सिंह पीयूष समेत कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। नमोघाट स्थित सीएनजी स्टेशन के सामने जिलाध्यक्ष राम सकल पटेल, सुरेंद्र गौतम, विजय गौंड, ज्ञानचंद पटेल और गुड्डू सिंह समेत सैकड़ों कार्यकर्ता जुटे। पूरे मार्ग पर स्वागत मंचों, पुष्पवर्षा और नारों के बीच प्रधानमंत्री के काफिले का अभिनंदन किया गया। काशी में स्वागत का यह सिलसिला केवल पुष्पवर्षा तक सीमित नहीं रहा। महिला मोर्चा से लेकर वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों की भागीदारी ने इसे भाजपा के बड़े संगठनात्मक आयोजन का स्वरूप दिया।


काशी की विरासत के साथ डाक टिकट पर वायुसेना का पराक्रम

काशी की विरासत के साथ डाक टिकट पर वायुसेना का पराक्रम 

वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने जारी किया ‘विंग्स ओवर गंगा’ का स्मारक टिकट, लड़ाकू विमानों के साथ दिखी बनारस की सांस्कृतिक विरासत

सुरेश गांधी

वाराणसी। गंगा के आसमान में भारतीय वायुसेना के शौर्य का प्रदर्शन और डाक टिकट पर काशी की सांस्कृतिक विरासत। ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो ने रविवार को एक और यादगार अध्याय दर्ज किया। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने नमो घाट पर भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एयर शो का स्मारक डाक टिकट जारी किया।

टिकट पर गंगा के ऊपर उड़ान भरते लड़ाकू विमानों के साथ काशी की सांस्कृतिक छवि उकेरी गई है। इस तरह आसमान में देश की सैन्य ताकत का प्रदर्शन करने वाले विमानों की छवि अब डाक टिकट के जरिये भी इस ऐतिहासिक आयोजन की स्मृति को सहेजेगी। समारोह में वाराणसी की डाक प्रमुख समेत डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि मौजूद रहे। टिकट जारी करने के बाद वायुसेना प्रमुख सुरक्षा घेरे से बाहर निकलकर लोगों के बीच पहुंचे। उन्होंने बच्चों और युवाओं से हाथ मिलाया, उनकी बातें सुनीं और उन्हें वायुसेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। एयर चीफ मार्शल को अपने बीच पाकर लोगों में खासा उत्साह दिखा। कई लोगों ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। गंगा के ऊपर विमानों के रोमांचक करतबों के बीच जारी यह स्मारक टिकट काशी की सांस्कृतिक पहचान और भारतीय वायुसेना के पराक्रम को एक साथ जोड़ने की पहल है।

एयर शो में 370 लोगों की बिगड़ी तबीयत, स्वास्थ्य टीमों ने संभाला मोर्चा

एयर शो में 370 लोगों की बिगड़ी तबीयत, स्वास्थ्य टीमों ने संभाला मोर्चा

घाटों पर चिकित्सा शिविर, प्रमुख मार्गों पर एंबुलेंस तैनात; तीन मरीज अस्पताल में भर्ती

सुरेश गांधी

वाराणसी। ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो के अंतिम दिन रविवार को जहां गंगा के ऊपर लड़ाकू विमानों के करतब देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी, वहीं दर्शकों की सेहत की निगरानी में स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी पूरे दिन मुस्तैद रहीं। गर्मी, भीड़ और लंबे समय तक खड़े रहने के कारण कई लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हुईं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दिनभर में कुल 370 लोगों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। इनमें सिरदर्द, बुखार, बदन दर्द, पेट दर्द, चक्कर, उल्टी और निर्जलीकरण जैसी समस्याओं से पीड़ित लोग शामिल थे।

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के निर्देशन में गंगा घाटों, आयोजन स्थल के आसपास और प्रमुख मार्गों पर चिकित्सा व्यवस्था की गई थी। घाटों पर विशेष चिकित्सा शिविर लगाए गए, जबकि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल टीमें सक्रिय रहीं। आपात स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न स्थानों पर एंबुलेंस भी तैनात की गईं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने बताया कि चिकित्सा शिविरों में लोगों की प्राथमिक जांच कर आवश्यक दवाएं दी गईं और चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया गया। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा को अलर्ट पर रखा गया था।

तीन मरीजों को अस्पताल पहुंचाया

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, एंबुलेंस की मदद से दो मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चौकाघाट और एक मरीज को श्री शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। अस्पतालों में उनका उपचार किया गया और चिकित्सकों ने उनकी स्थिति पर निगरानी रखी। व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए जिले के निजी अस्पतालों और ब्लड बैंकों को भी सतर्क किया गया था। वाराणसी के स्वास्थ्य संस्थानों के अलावा अन्य मेडिकल कॉलेजों, निजी अस्पतालों और दूसरे जिलों से आई चिकित्सा टीमों ने भी सहयोग किया।

कमांड सेंटर से निगरानी

एयर शो के दौरान चिकित्सा सेवाओं और स्वास्थ्य टीमों की गतिविधियों की निगरानी त्रिनेत्र भवन स्थित काशी कमांड सेंटर से की जा रही थी। सीएमओ ने बताया कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भारी भीड़ के बीच अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस कर्मियों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के योगदान की सराहना की।

गंगा के आकाश से भारत का उद्घोष, दुश्मन का कोई ठिकाना पहुंच से बाहर नहीं

गंगा के आकाश से भारत का उद्घोष, दुश्मन का कोई ठिकाना पहुंच से बाहर नहीं 

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के नेतृत्व में ‘विंग्स ओवर गंगा’ ने रचा इतिहास, ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया को भारत की सामरिक क्षमता का संदेश. जी हां, ऑपरेशन सिंदूर ने न सिर्फ वायुशक्ति की क्षमता दिखाई बल्कि काशी में गंगा के आकाश से देश को सामर्थ्य का संदेश भी दिया. गंगा के ऊपर लड़ाकू विमानों की गर्जना, नमो घाट पर उमड़ा जनसमुद्र और देश की वायुशक्ति का प्रदर्शन के साथ ही ‘विंग्स ओवर गंगा’ ने काशी को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया। इस ऐतिहासिक आयोजन के बीच भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह से मुलाकात का अवसर भी यादगार रहा। उनकी वर्दी पर सजे पदक सैन्य सेवा के गौरव की गवाही दे रहे थे, तो आम लोगों के बीच उनकी सहज मौजूदगी नेतृत्व का आत्मीय पक्ष सामने ला रही थी

सुरेश गांधी

गंगा की लहरों पर सूरज की किरणें उतर रही थीं और ऊपर आसमान में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान अपनी गति, संतुलन और सामर्थ्य का परिचय दे रहे थे। कहीं राफेल की गर्जना थी, कहीं सुखोई की तीव्र उड़ान, कहीं तेजस की फुर्ती और कहीं सूर्यकिरण की टीम का रोमांचक हवाई प्रदर्शन। नीचे नमो घाट पर उमड़ा जनसमुद्र हर करतब के साथ उत्साह से भर उठता था। यह केवल विमानों का प्रदर्शन नहीं था; यह आधुनिक भारत की तकनीकी क्षमता, सैन्य अनुशासन और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का सार्वजनिक उद्घोष था।

‘विंग्स ओवर गंगा’ के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने आयोजन को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया। काशी के आकाश में वायुसेना का यह प्रदर्शन देश की सामरिक तैयारियों को सामने लाने के साथ ही उस सांस्कृतिक धरातल की भी याद दिला रहा था, जिस पर भारत की राष्ट्रीय चेतना विकसित हुई है। गंगा यहां केवल एक नदी नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सभ्यता की साक्षी है। इसी गंगा के ऊपर आधुनिक युद्धक विमानों का अनुशासित प्रदर्शन अतीत की विरासत और भविष्य की तकनीकी शक्ति को एक ही दृश्य में समेट रहा था।

इस आयोजन के केंद्र में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी रहे। उनकी वर्दी पर सजे पदक सैन्य सेवा और जिम्मेदारी की कहानी कहते थे, जबकि नमो घाट पर आम लोगों के बीच उनकी सहज मौजूदगी नेतृत्व का आत्मीय पक्ष सामने ला रही थी। बच्चों और युवाओं से हाथ मिलाना, लोगों की बातें सुनना और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाना उस दूरी को कम करता दिखाई दिया, जो अक्सर सैन्य प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों के बीच महसूस की जाती है। लेकिन इस भव्य आयोजन का महत्व केवल रोमांच, उत्साह और जनभागीदारी तक सीमित नहीं था। इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा का एक गंभीर संदेश भी था—भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए तकनीक, प्रशिक्षण, खुफिया जानकारी और आधुनिक हथियार प्रणालियों के समन्वय से लगातार अपनी क्षमताएं विकसित कर रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर : वायुशक्ति की निर्णायक भूमिका का संदेश

ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमता और आधुनिक सैन्य अभियानों में उसकी भूमिका को नए सिरे से चर्चा के केंद्र में ला दिया। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने इस अभियान के संदर्भ में कहा है कि पश्चिमी मोर्चे पर की गई सटीक कार्रवाई ने साबित किया कि कोई भी लक्ष्य भारतीय वायुसेना की पहुंच से बाहर नहीं है। इस कथन का महत्व केवल उसकी दृढ़ता में नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद सैन्य दृष्टिकोण में है। आधुनिक युद्ध में किसी एक लड़ाकू विमान की गति, किसी एक मिसाइल की मारक क्षमता या किसी एक हथियार की तकनीक अपने आप में निर्णायक नहीं होती। वास्तविक सामर्थ्य तब बनती है, जब खुफिया सूचनाएं, निगरानी तंत्र, सुरक्षित संचार नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता, सटीक मारक हथियार और वायु रक्षा प्रणालियां एक-दूसरे के साथ समन्वित होकर काम करती हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में वायुसेना प्रमुख के सार्वजनिक वक्तव्यों का केंद्रीय संदेश भी यही रहा है। उन्होंने अभियान की सफलता को किसी एक विमान या हथियार का परिणाम मानने के बजाय विभिन्न क्षमताओं के एकीकृत इस्तेमाल से जोड़कर देखा। इस दृष्टिकोण में वायुसेना केवल विमानों का समूह नहीं, बल्कि एक ऐसी समन्वित व्यवस्था है, जिसमें सूचना से लेकर कार्रवाई तक हर स्तर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यह बदलाव आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को भी रेखांकित करता है। आज किसी सैन्य बल की शक्ति का आकलन केवल उसके पास मौजूद विमानों की संख्या से नहीं किया जा सकता। उसकी वास्तविक क्षमता इस बात से तय होती है कि वह बदलती परिस्थितियों में कितनी तेजी से निर्णय ले सकता है, उपलब्ध संसाधनों का कितना प्रभावी इस्तेमाल करता है और विभिन्न प्रणालियों को किस तरह एकीकृत कर पाता है।

सफलता के बाद ठहरना नहीं, क्षमताओं का विस्तार जरूरी

सैन्य अभियानों की सफलता अक्सर आत्मविश्वास बढ़ाती है, लेकिन भविष्य की चुनौतियां केवल पिछली उपलब्धियों के सहारे नहीं जीती जा सकतीं। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने तथा बदलती परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति में तेजी से बदलाव करने की जरूरत पर भी जोर दिया है। यह संदेश सैन्य तैयारी की निरंतरता को रेखांकित करता है। प्रतिद्वंद्वी की रणनीति बदलने पर उसके अनुरूप जवाब देने के लिए एक से अधिक विकल्प उपलब्ध होने चाहिए। यही कारण है कि आधुनिक वायुसेना के लिए बहुस्तरीय वायु रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, निगरानी प्रणालियां, मानवरहित हवाई प्रणालियों से निपटने की क्षमता और सुरक्षित नेटवर्क लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। भविष्य की वायुशक्ति का स्वरूप भी इसी बदलाव से तय होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वदेशी तकनीक, सटीक हथियार और नेटवर्क आधारित संचालन सैन्य अभियानों की प्रकृति बदल रहे हैं। ऐसे में वायुसेना की चुनौती केवल वर्तमान क्षमताओं को बनाए रखने की नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की जरूरतों को समझते हुए नई तकनीक और प्रशिक्षण में निवेश करने की भी है। ‘विंग्स ओवर गंगा’ में दिखाई गई उड़ानें इस तैयारी का सार्वजनिक चेहरा थीं। दर्शकों ने विमानों के करतब देखे, लेकिन उन करतबों के पीछे वर्षों का प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता, अनुशासन और समन्वय भी काम कर रहा था। यही वह अदृश्य श्रम है, जो किसी हवाई प्रदर्शन को सैन्य पेशेवर क्षमता की अभिव्यक्ति में बदल देता है।

नमो घाट पर वर्दी का गौरव और सहजता का संवाद

किसी सैन्य आयोजन की पहचान उसके हथियारों और तकनीक से बनती है, लेकिन जनता की स्मृति में कई बार उससे जुड़े मानवीय दृश्य अधिक समय तक बने रहते हैं। नमो घाट पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का आम लोगों के बीच पहुंचना ऐसा ही दृश्य रहा। बच्चों और युवाओं से हाथ मिलाते, उनकी बातें सुनते और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते वायुसेना प्रमुख को देखकर लोगों में उत्साह दिखाई दिया। उनके लिए यह केवल किसी बड़े अधिकारी को देखने का अवसर नहीं था, बल्कि उस संस्थान के नेतृत्व को करीब से अनुभव करने का क्षण भी था, जिसे देश की सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। वर्दी अपने साथ अधिकार और अनुशासन लेकर आती है, लेकिन उसका वास्तविक सम्मान उस जिम्मेदारी से निर्मित होता है, जिसका निर्वहन उसके माध्यम से किया जाता है। जब सैन्य नेतृत्व जनता के बीच सहजता से उपस्थित होता है, तो संस्थान और नागरिक समाज के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत होता है। विशेष रूप से युवाओं के लिए ऐसे आयोजन प्रेरणा का माध्यम बन सकते हैं। आसमान में विमानों को देखकर पैदा होने वाला कौतूहल उन्हें विमानन, इंजीनियरिंग, विज्ञान और सैन्य सेवा की ओर आकर्षित कर सकता है। देश की रक्षा केवल सीमा पर तैनात जवानों का दायित्व नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और अनुसंधानकर्ताओं के सामूहिक प्रयास का परिणाम भी है। इस दृष्टि से नमो घाट पर वायुसेना प्रमुख की जनता के बीच मौजूदगी आयोजन का एक महत्वपूर्ण मानवीय पक्ष बनकर सामने आई।

गंगा के नाम विशेष डाक टिकट, इतिहास में दर्ज हुई स्मृति

‘विंग्स ओवर गंगा’ की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि विशेष डाक टिकट का जारी होना रहा। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस हवाई प्रदर्शन को स्मरणीय बनाने के लिए डाक विभाग द्वारा तैयार टिकट का अनावरण किया। टिकट पर गंगा के ऊपर उड़ान भरते विमान और काशी की सांस्कृतिक छवियां अंकित हैं। यह चित्रांकन अपने आप में एक अर्थपूर्ण संदेश देता है। एक ओर आधुनिक भारत की सामरिक शक्ति है, दूसरी ओर हजारों वर्षों की सांस्कृतिक विरासत। दोनों को एक साथ प्रस्तुत कर यह स्मारक टिकट उस पहचान को सामने लाता है, जिसमें आधुनिकता और परंपरा परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे की पूरक हैं। हवाई प्रदर्शन कुछ समय के लिए होता है। विमान अपने ठिकानों पर लौट जाते हैं और घाट पर उमड़ी भीड़ धीरे-धीरे अपने घरों को चली जाती है। लेकिन स्मारक डाक टिकट किसी आयोजन को उसकी तत्कालीन भव्यता से आगे ले जाकर ऐतिहासिक स्मृति का हिस्सा बना देता है। काशी के संदर्भ में इसका महत्व और बढ़ जाता है। यहां गंगा, घाट, मंदिर, संगीत और सांस्कृतिक परंपराएं शहर की पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। इसी धरातल पर आधुनिक वायुसेना की छवि अंकित होना भारत के उस स्वरूप को सामने लाता है, जो अपनी जड़ों से जुड़ा रहते हुए भविष्य की ओर देखता है।

सुबह-ए-बनारस में वायुसेना प्रमुख, गंगा तट पर संगीत की सुरलहरियां

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का काशी प्रवास केवल सैन्य प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने ब्रह्म मुहूर्त में गंगा तट पर सुबह-ए-बनारस का आनंद लिया। पत्नी सरिता सिंह के साथ प्रात:कालीन दैनिक हवन में शामिल हुए और कलाकारों की वाद्यवृंद प्रस्तुति सुनी। इस अवसर पर तबले पर पंडित किशोर मिश्र और डॉ. संदीप केवले, सितार पर बुधादित्य प्रधान, सारंगी पर अनीश मिश्र तथा बांसुरी पर डॉ. शनीष ग्यावली ने प्रस्तुति दी। गंगा तट पर सुबह की शांति, शास्त्रीय वाद्यों की सुरलहरियां और काशी का आध्यात्मिक वातावरण इस यात्रा का अलग ही पक्ष प्रस्तुत कर रहे थे। एयर चीफ मार्शल ने गंगा किनारे की इस सुबह को अभिभूत करने वाला अनुभव बताया। यह प्रतिक्रिया उस सांस्कृतिक आकर्षण की भी झलक देती है, जिसके कारण काशी देश-दुनिया के लोगों को अपनी ओर खींचती है। एक ओर गंगा के ऊपर लड़ाकू विमानों की गर्जना थी, दूसरी ओर सुबह के शांत वातावरण में सितार, सारंगी और बांसुरी की धुनें। ये दोनों दृश्य देखने में भले ही अलग हों, लेकिन इनके केंद्र में अनुशासन, साधना और निरंतर अभ्यास की समान भावना दिखाई देती है। सैन्य कौशल हो या शास्त्रीय संगीत, उत्कृष्टता वर्षों की तैयारी और समर्पण से ही हासिल होती है।

प्रधानमंत्री की मौजूदगी से राष्ट्रीय महत्व का आयोजन

‘विंग्स ओवर गंगा’ के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने इस आयोजन को व्यापक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रदान किया। नमो घाट पर उमड़ी भीड़ ने भी आयोजन के प्रति लोगों के उत्साह को सामने रखा। गंगा के ऊपर लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन को देखने के लिए पहुंचे लोगों के लिए यह दृश्य रोमांच और गौरव से भरा अनुभव रहा। प्रधानमंत्री की मौजूदगी, वायुसेना प्रमुख का नेतृत्व, विशेष डाक टिकट का अनावरण और आम लोगों की भागीदारी—इन सभी ने आयोजन को कई स्तरों पर महत्वपूर्ण बनाया। यह सैन्य क्षमता के प्रदर्शन के साथ नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच संवाद का अवसर भी बना। हालांकि, किसी आयोजन की वास्तविक सफलता केवल भीड़ के आकार या विमानों के करतबों से नहीं आंकी जा सकती। उसकी उपलब्धि इस बात में भी होती है कि वह लोगों तक क्या संदेश पहुंचाता है, युवाओं को किस तरह प्रेरित करता है और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति समाज की समझ को कितना व्यापक बनाता है। इस कसौटी पर ‘विंग्स ओवर गंगा’ को आधुनिक सैन्य शक्ति और नागरिक सहभागिता को एक मंच पर लाने वाले आयोजन के रूप में देखा जा सकता है।

आसमान की गर्जना से आगे भी गूंजता रहेगा संदेश

काशी में ‘विंग्स ओवर गंगा’ का महत्व केवल तीन दिनों के हवाई प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसने भारत की वायुशक्ति, आधुनिक सैन्य तकनीक, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान को एक साथ प्रस्तुत किया। ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा सामरिक संदेश इस आयोजन को व्यापक संदर्भ देता है, जबकि गंगा के ऊपर उड़ते विमानों वाला विशेष डाक टिकट इसकी स्मृति को स्थायित्व प्रदान करता है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का जनता के बीच सहज व्यवहार और सुबह-ए-बनारस में उनकी सहभागिता आयोजन के मानवीय और सांस्कृतिक पक्ष को सामने लाती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय संस्थानों की शक्ति केवल उनकी तकनीकी क्षमता में नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और उनके साथ संवाद में भी निहित होती है। गंगा के ऊपर विमानों की गर्जना थम चुकी है, लेकिन उसके साथ जुड़ी छवियां लंबे समय तक स्मृति में रहेंगी—आसमान में उड़ते लड़ाकू विमान, नमो घाट पर उमड़ा जनसमुद्र, वायुसेना प्रमुख की सहज मुलाकात और गंगा के नाम जारी विशेष डाक टिकट। काशी ने इन दृश्यों में एक ऐसे भारत की झलक देखी, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए आधुनिक सामरिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। यही ‘विंग्स ओवर गंगा’ का सबसे व्यापक संदेश है—परंपरा से जुड़ाव, तकनीक में प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति निरंतर सजगता।

डमरुओं की गूंज, शंखनाद और पुष्पवर्षा से मोदी का अभिनंदन पुलिस लाइन से नमोघाट तक सजे स्वागत मंच, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से ...