Thursday, 27 August 2026

पेड़ से बांधा, लाठियों से पीटा... फिर खेत में फेंक दिया मजदूर का शव

पेड़ से बांधा, लाठियों से पीटा... फिर खेत में फेंक दिया मजदूर का शव 

चोरी के शक में रामजनम वनवासी को दी ऐसी सजा कि लौटकर घर ही नहीं पहुंच सका; वीडियो सामने आया तो खुली खौफनाक कहानी, भट्ठा मालिक समेत दो गिरफ्तार

सुरेश गांधी

वाराणसी। जिस समाज में किसी पर चोरी का संदेह भर होने पर भी उसे कानून के हवाले करने की व्यवस्था है, उसी समाज में एक मजदूर को पेड़ से बांधकर लाठियों से पीटने और उसकी जान चले जाने की घटना ने इंसानियत को झकझोर दिया है। चोलापुर के गोसाईंपुर में सामने आई यह घटना सिर्फ एक मजदूर की मौत की कहानी नहीं, बल्कि उस खतरनाक मानसिकता का आईना है जिसमें कानून हाथ में लेकर किसी इंसान को सजा देने का अधिकार खुद ही हासिल कर लिया जाता है।

मृतक रामजनम वनवासी (45) चंदौली के धरायन गांव का रहने वाला था और चोलापुर क्षेत्र के गोसाईंपुर स्थित अपनी ससुराल में रहकर ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करता था। पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को वह हड़ियाडीह स्थित ईंट-भट्ठे के पास दिखाई दिया। आरोप है कि चोरी के शक में भट्ठा मालिक अजय सिंह ने अपने साथी विशाल सिंह के साथ उसे पकड़ लिया। इसके बाद रामजनम को पेड़ से बांधकर लाठी-डंडों से पीटा गया।

पेड़ से बंधा मजदूर... और बरसती रही लाठियां

इस पूरी घटना की सबसे भयावह कड़ी वह वीडियो है, जिसने पुलिस की जांच का रुख बदल दिया। वीडियो में रामजनम को पेड़ से बांधकर पीटते हुए लोग दिखाई दे रहे हैं। जिस व्यक्ति ने जीवनभर मेहनत कर परिवार का पेट पालने के लिए मजदूरी की, वह उस समय बंधा हुआ था और उसके पास अपने बचाव का कोई रास्ता नहीं था। पिटाई के बाद रामजनम बेसुध हो गया। पुलिस के अनुसार, इसके बाद उसे उसकी ससुराल पहुंचाने के लिए ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। आरोप है कि इसके बाद उसका शव खेत में छोड़ दिया गया।

पांच दिन तक गुमशुदगी... फिर खेत में मिला शव

21 अगस्त को चोलापुर क्षेत्र में अज्ञात शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली। शव की हालत ऐसी थी कि उसकी पहचान भी तत्काल आसान नहीं थी। बाद में परिजनों ने उसकी शिनाख्त रामजनम के रूप में की। शुरुआती जांच के बाद पोस्टमार्टम और शरीर पर मिले चोट के निशानों ने पुलिस को घटना की तह तक जाने के लिए मजबूर किया।  इसी बीच सामने आए पिटाई के वीडियो ने उस कहानी को खोल दिया, जो एक अज्ञात शव मिलने से शुरू हुई थी। वीडियो के आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और अजय सिंह तथा विशाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ हत्या के मामले में कार्रवाई की है।

सवाल सिर्फ एक मजदूर की मौत का नहीं

रामजनम की मौत के साथ सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा होता है कि आखिर किसी व्यक्ति को चोरी के शक में खुद सजा देने का अधिकार किसने दे दिया? शक था तो पुलिस थी, कानून था, जांच की पूरी व्यवस्था थी। लेकिन आरोप है कि कानून की जगह लाठियों ने फैसला किया और उस फैसले की कीमत एक मजदूर को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। इस घटना को किसी जाति या समुदाय के खिलाफ सामान्यीकृत करने के बजाय एक खतरनाक सामाजिक और आपराधिक मानसिकता के रूप में देखना जरूरी है। किसी की सामाजिक हैसियत, गरीबी, पेशा या पहचान उसे कमतर इंसान नहीं बनाती। गरीब मजदूर की जिंदगी भी उतनी ही कीमती है जितनी किसी प्रभावशाली व्यक्ति की।

कानून से बड़ा कोई नहीं

रामजनम अब वापस नहीं आएगा। उसके परिवार के लिए खेत में मिला वह शव सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि पूरे घर की जिंदगी पर पड़ा ऐसा घाव है जो शायद कभी नहीं भरेगा। इस घटना का सबसे जरूरी संदेश यही हैसंदेह अपराध का प्रमाण नहीं होता और भीड़, मालिक या कोई व्यक्ति अदालत नहीं बन सकता। किसी पर आरोप हो तो कानून अपना काम करे। किसी मजदूर को पेड़ से बांधकर पीटना, उसके साथ अमानवीय व्यवहार करना और उसकी जान चले जाने के बाद शव को खेत में छोड़ देना किसी भी सभ्य समाज के लिए अस्वीकार्य है। अब जरूरत सिर्फ गिरफ्तारी की नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और गहन जांच की है। जो भी व्यक्ति इस अपराध में शामिल रहा हो, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कठोरतम कार्रवाई हो और रामजनम के परिवार को न्याय मिलेयही उस मजदूर के प्रति समाज की सच्ची श्रद्धांजलि होगी। एक पेड़ से बंधा रामजनम सिर्फ एक तस्वीर नहीं छोड़ गया है। वह तस्वीर हमसे पूछ रही हैक्या कानून पर भरोसा खत्म हो गया है, या हमने इंसानियत को ही पीछे छोड़ दिया है?

कालीन की बुनावट से कारोबार की नई इबारत लिखेगा भदोही

कालीन की बुनावट से कारोबार की नई इबारत लिखेगा भदोही 

50वां इंडिया कार्पेट एक्सपो 4 से 7 अक्टूबर तक • 48 देशों के 164 खरीदारों का पंजीकरण • 170 भारतीय निर्यातक भी मैदान में, 30 से अधिक ब्रिक्स देशों की भागीदारी पर फोकस

सुरेश गांधी

भदोही। भारतीय हस्तनिर्मित कालीन की पांच दशक लंबी वैश्विक यात्रा अब अपने स्वर्णिम पड़ाव पर पहुंचने जा रही है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) की ओर से वाणिज्य मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से 50वां इंडिया कार्पेट एक्सपो (स्वर्ण जयंती संस्करण) 4 से 7 अक्टूबर तक भदोही में आयोजित होगा। पांच दशकों से भारतीय कालीन निर्माताओं और निर्यातकों को दुनिया के बाजारों से जोड़ता आया यह एक्सपो इस बार परंपरा, डिजाइन और वैश्विक कारोबार का बड़ा संगम बनने जा रहा है।

स्वर्ण जयंती संस्करण में भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी, पानीपत, जम्मू-कश्मीर, जयपुर और बीकानेर समेत देश के प्रमुख कालीन उत्पादक क्षेत्रों के 170 निर्यातक अब तक पंजीकरण करा चुके हैं। यहां भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की पारंपरिक बुनाई, आधुनिक डिजाइन, विविधता और गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने पेश किया जाएगा। एक्सपो में विदेशी खरीदारों की भागीदारी भी उत्साहजनक है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों समेत करीब 48 देशों के 164 विदेशी खरीदार अब तक पंजीकरण करा चुके हैं। पिछले एक्सपो में करीब 400 विदेशी खरीदार पहुंचे थे। आयोजकों को इस बार स्वर्ण जयंती संस्करण में इससे भी व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की उम्मीद है।

ब्रिक्स बाजार पर खास नजर

इस बार उभरते वैश्विक बाजारों को साधने पर विशेष जोर है। ब्रिक्स समूह से जुड़े ब्राजील, रूस, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात समेत देशों के खरीदारों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। 30 से अधिक ब्रिक्स देशों के खरीदारों की सहभागिता अब तक सुनिश्चित हो चुकी है। इससे भारतीय कालीन निर्यातकों के लिए नए बी2बी कारोबार और नए बाजार खुलने की उम्मीद है।

पांच दशक की विरासत, नई उड़ान

विश्व के प्रमुख हस्तनिर्मित कालीन उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में पहचान रखने वाले भदोही में एक्सपो का आयोजन स्थानीय उद्योग के लिए भी गौरव का अवसर है। यह केवल व्यापारिक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि कारीगरों की पीढ़ियों से चली रही कला, भारतीय कालीन उद्योग की पांच दशक की उपलब्धियों और वैश्विक बाजार में बनी उसकी पहचान का उत्सव है। स्वर्ण जयंती संस्करण भारतीय कालीनों की पारंपरिक विरासत को आधुनिक वैश्विक मांग से जोड़ते हुए निर्यात कारोबार को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

पेड़ से बांधा, लाठियों से पीटा... फिर खेत में फेंक दिया मजदूर का शव

पेड़ से बांधा , लाठियों से पीटा ... फिर खेत में फेंक दिया मजदूर का शव  चोरी के शक में रामजनम वनवासी को दी ऐसी सजा कि ...