Friday, 15 May 2026

ट्रांसफार्मर फुंकने और दंडात्मक कार्रवाई से नाराज जेई संगठन का प्रदर्शन

ट्रांसफार्मर फुंकने और दंडात्मक कार्रवाई से नाराज जेई संगठन का प्रदर्शन

संसाधनों की कमी से बिगड़ रही बिजली व्यवस्था, डीएम के माध्यम से प्रबंधन को भेजा ज्ञापन

सुरेश गांधी

वाराणसी। राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर शुक्रवार को जनपद शाखा वाराणसी के पदाधिकारियों और अवर अभियंताओं ने बिजली व्यवस्था से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद की। संगठन ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रबंध निदेशक, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को ज्ञापन भेजकर वितरण परिवर्तकों की बढ़ती क्षतिग्रस्ता, अवर अभियंताओं पर हो रही दंडात्मक कार्रवाइयों तथा फील्ड स्तर की अव्यवस्थाओं पर तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

बिना संसाधन कराया जा रहा संचालन

ज्ञापन में संगठन ने कहा कि वर्तमान समय में पर्याप्त संसाधन, सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराए बिना विद्युत व्यवस्था का संचालन कराया जा रहा है। इसका सीधा असर वितरण ट्रांसफार्मरों पर पड़ रहा है और लगातार उनके जलने तथा तकनीकी खराबियों की घटनाएं बढ़ रही हैं। संगठन का कहना है कि फील्ड कर्मचारियों पर कार्य का अत्यधिक दबाव है, जबकि आवश्यक तकनीकी सहयोग और सुरक्षा मानक पूरी तरह लागू नहीं किए जा रहे हैं।

बिना जांच हो रही कार्रवाई

संगठन ने आरोप लगाया कि अवर अभियंताओं और विद्युत कर्मचारियों के विरुद्ध बिना समुचित जांच दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। ज्ञापन में ऐसी कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाने और निष्पक्ष जांच व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई गई।

ऑन साइट मरम्मत की उठाई मांग

संगठन ने जले हुए ट्रांसफार्मरों की त्वरित मरम्मत के लिए पर्याप्त कार्यदायी संस्थाओं की नियुक्ति, आवश्यक सामग्री और आधुनिक टी एंड पी उपलब्ध कराने की भी मांग की। पदाधिकारियों का कहना था कि यदि मौके पर ही त्वरित मरम्मत की व्यवस्था मजबूत होगी तो उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

सुरक्षा और रिक्त पदों पर भी जोर

ज्ञापन में विद्युत उपकेंद्रों एवं लाइनों के अनुरक्षण कार्यों के लिए पर्याप्त और प्रशिक्षित मैनपावर उपलब्ध कराने, फील्ड कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने की मांग की गई। साथ ही संगठन ने अवर अभियंताओं के रिक्त पदों को शीघ्र भरने और फील्ड में व्यावहारिक कार्य व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।

समाधान नहीं हुआ तो प्रभावित होगी उपभोक्ता सेवा

संगठन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो बिजली व्यवस्था और उपभोक्ता सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी। उन्होंने शासन और प्रबंधन से सकारात्मक एवं व्यावहारिक निर्णय लेते हुए अभियंताओं और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने की मांग की। इस दौरान केंद्रीय उपमहासचिव . दीपक गुप्ता, जनपद अध्यक्ष . सतीश बिंद, क्षेत्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष . अभिषेक मौर्य, क्षेत्रीय लेखा निरीक्षक . लालब्रत, जनपद सचिव . ज्योति भास्कर सिन्हा, . विशाल श्रीवास्तव, . पीयूष कुमार मिश्रा सहित बड़ी संख्या में अवर अभियंता एवं प्रोन्नत अभियंता उपस्थित रहे।

रोजगार देने वाले उद्यमियों का होगा सम्मान

रोजगार देने वाले उद्यमियों का होगा सम्मान 

खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की पुरस्कार योजना शुरू, सफल इकाइयों को मिलेगा नकद पुरस्कार

पीएमईजीपी और मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना से जुड़ी इकाइयों से मांगे गए आवेदन

तीन वर्षों से लगातार संचालित उद्योगों को चयन में मिलेगी प्राथमिकता

प्रथम पुरस्कार 15 हजार, द्वितीय 12 हजार और तृतीय पुरस्कार 10 हजार रुपये

सुरेश गांधी

वाराणसी। ग्रामीण रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिएखादी एवं ग्रामोद्योग पुरस्कार योजनाशुरू कर दी है। इस योजना के तहत ऐसे उद्यमियों और ग्रामोद्योग इकाइयों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपने उद्योगों के माध्यम से केवल उत्पादन और बिक्री बढ़ाई है, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है।

योजना के तहत प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमजीपी) तथा मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत स्थापित इकाइयों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। विभाग का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सफल उद्योगों को प्रोत्साहित करना और अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है।

जिला ग्रामोद्योग कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति यूपी सिंह के अनुसार पुरस्कार के लिए वही इकाइयां पात्र होंगी, जो पिछले तीन वर्षों से लगातार संचालित हो रही हों और उत्पादन, बिक्री तथा रोजगार सृजन के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रही हों। चयन प्रक्रिया के दौरान इकाइयों के कार्य, रोजगार देने की क्षमता और आर्थिक योगदान का मूल्यांकन किया जाएगा।

पुरस्कार योजना के तहत प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली इकाई को 15 हजार रुपये, द्वितीय स्थान पाने वाली इकाई को 12 हजार रुपये तथा तृतीय पुरस्कार पाने वाली इकाई को 10 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे छोटे उद्यमियों और ग्रामीण उद्योगों को नई पहचान मिलेगी तथा स्वरोजगार को भी मजबूती मिलेगी।

आवेदन के लिए विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप जारी किया गया है, जिसमें इकाई का नाम, उद्योग का प्रकार, उत्पाद का विवरण, वित्तीय स्थिति, बैंक ऋण, पिछले तीन वर्षों का उत्पादन, बिक्री और रोजगार से जुड़ी जानकारी भरनी होगी। इच्छुक उद्यमी 20 मई 2026 तक अपने आवेदन जिला ग्रामोद्योग कार्यालय टकटकपुर, वाराणसी में जमा कर सकते हैं। प्राप्त आवेदनों के आधार पर गठित चयन समिति द्वारा जांच और मूल्यांकन के बाद पुरस्कार के लिए अंतिम चयन किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करने वाले उद्यमियों को सम्मानित करने से अन्य युवाओं में भी उद्योग स्थापित करने की प्रेरणा बढ़ेगी। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए जिला ग्रामोद्योग कार्यालय या मोबाइल नंबर 9580503155 पर संपर्क किया जा सकता है।

आवेदन के लिए जरूरी बातें

इकाई का पिछले तीन वर्षों से संचालित होना जरूरी

पीएमईजीपी या मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना से जुड़ी इकाई हो

उत्पादन, बिक्री और रोजगार का विवरण देना होगा

आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि : 20 मई 2026

आवेदन स्थल : जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, टकटकपुर, वाराणसी

उम्रकैद के बाद अब 10 साल की सजा, विजय मिश्र परिवार पर कानून का डबल अटैक

देर से ही सही, कर्मों का हिसाब शुरू. 48 घंटे में दूसरी सजा 

उम्रकैद के बाद अब 10 साल की सजा, विजय मिश्र परिवार पर कानून का डबल अटैक  

हत्या के बाद अब रिश्तेदार की संपत्ति हड़पने के मामले में भी दोषी, पत्नी-बेटे को 10-10 साल, बहू को 4 साल कारावास

दबंगई पर न्याय का डंडा : रसूख टूटा, रौब बिखरा

रसूख, रुतबा और बाहुबल कानून से ऊपर नहीं : विजय मिश्र परिवार को कोर्ट का कड़ा संदेश

आरोप : अपराध, रसूख और संपत्ति कब्जा

सुरेश गांधी

भदोही. ज्ञानपुर विधानसभा के पूर्व विधायक बाहुबली विजय मिश्र पर कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। 46 वर्ष पुराने चर्चित कचहरी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा मिलने के महज 48 घंटे बाद अब रिश्तेदार की पैतृक संपत्ति पर अवैध कब्जा और दबाव बनाकर वसीयतनामा कराने के मामले में भी अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

एमपी-एमएलए कोर्ट की अपर जिला जज पुष्पा सिंह की अदालत ने पूर्व विधायक विजय मिश्र, उनकी पत्नी पूर्व एमएलसी रामलली मिश्र और बेटे विष्णु मिश्र को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं बहू रूपा मिश्र को चार वर्ष के साधारण कारावास की सजा दी गई। अदालत ने सभी दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया है। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को ही सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस फैसले के बाद पूर्वांचल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक समय क्षेत्र में दबंग छवि और राजनीतिक प्रभाव के लिए चर्चित रहे विजय मिश्र अब लगातार न्यायिक फैसलों के घेरे में आते दिख रहे हैं।

पैतृक संपत्ति पर कब्जे का आरोप

गोपीगंज कोतवाली क्षेत्र के कवलापुर निवासी कृष्ण मोहन तिवारी ने अगस्त 2020 में मुकदमा दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि विजय मिश्र और उनके परिवार ने उनकी पैतृक संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लिया और जबरन वसीयतनामा पर हस्ताक्षर कराने के लिए धमकियां दीं। मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अदालत ने साक्ष्यों, गवाहों और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद चारों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

अदालत का संदेश: अपराध पुराना हो सकता है, न्याय नहीं

न्यायालय के इस फैसले को सिर्फ एक आपराधिक मामले की सजा नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था के सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि राजनीतिक प्रभाव, बाहुबल और रसूख कानून से ऊपर नहीं हो सकते। कानूनी जानकारों का मानना है कि लगातार दो बड़े मामलों में सजा मिलने से विजय मिश्र की शेष कानूनी लड़ाइयां और कठिन हो सकती हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार विजय मिश्र के खिलाफ हत्या, रंगदारी, जमीन कब्जा, अपहरण और धोखाधड़ी समेत 80 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज रहे हैं।  

46 साल पुराने हत्याकांड में भी मिली उम्रकैद

इससे पहले प्रयागराज की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने 1980 के चर्चित कचहरी हत्याकांड में विजय मिश्र समेत अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह मामला प्रयागराज कचहरी परिसर में प्रकाश नारायण पांडेय की हत्या से जुड़ा था। लंबे समय तक केस की फाइल और केस डायरी गायब रहने के कारण सुनवाई प्रभावित रही, लेकिन बाद में रिकॉर्ड पुनर्निर्मित होने पर मुकदमे का ट्रायल पूरा हुआ।

पूर्वांचल की राजनीति में बड़ा संदेश

लगातार दो सजाओं के बाद यह मामला अब सिर्फ एक नेता की कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि पूर्वांचल की उस राजनीति पर भी बड़ा सवाल बन गया है जिसमें वर्षों तक बाहुबल और भय का प्रभाव देखा जाता रहा। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि अदालत के इन फैसलों ने साफ कर दिया है कि न्याय में भले देर हो जाए, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया अंततः अपराध और दबंगई के खिलाफ खड़ी होती है। देर से ही सही, कर्मों का हिसाब शुरू हो चुका हैभदोही और प्रयागराज के राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है।

ट्रांसफार्मर फुंकने और दंडात्मक कार्रवाई से नाराज जेई संगठन का प्रदर्शन

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