शिक्षा की नींव से विकसित भारत का शंखनाद, शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ
कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, यह केवल सरकार नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री योगी
• 12 लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों,
रसोइयों
व
कार्मिकों
को
कैशलेस
स्वास्थ्य
सुरक्षा
• बोले योगी : मजबूत नींव
वाले
बच्चे
ही
सशक्त
भारत
की
इमारत
खड़ी
करेंगे
सुरेश गांधी
वाराणसी। काशी की आध्यात्मिक
चेतना से एक बार
फिर शिक्षा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व
का संदेश पूरे प्रदेश में
गूंजा। बड़ालालपुर स्थित ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर (टीएफसी) से मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ ने ऐसी योजनाओं
का शुभारंभ किया, जिनका केंद्र केवल सरकारी व्यवस्था
नहीं बल्कि भविष्य का भारत था।
मंच से मुख्यमंत्री का
स्वर केवल घोषणा का
नहीं, बल्कि उस राष्ट्रीय संकल्प
का प्रतीक था जिसमें शिक्षा
को राष्ट्रनिर्माण का सबसे सशक्त
माध्यम माना गया। उन्होंने स्पष्ट
कहा कि कोई भी
बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं
रहना चाहिए। यह केवल शिक्षकों
या अभिभावकों का नहीं, बल्कि
समाज के प्रत्येक नागरिक
का दायित्व है।" उनके इस संदेश
ने कार्यक्रम को सरकारी औपचारिकता
से ऊपर उठाकर सामाजिक
आंदोलन का स्वरूप दे
दिया।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के
एक करोड़ दस लाख से
अधिक छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के
खातों में 1320 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से
हस्तांतरित किए। इसके साथ
ही मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना का शुभारंभ किया
गया, जिससे प्रदेश के लगभग 12 लाख
शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक, अनुदेशक, कस्तूरबा विद्यालयों के कर्मचारी तथा
मध्यान्ह भोजन योजना के
रसोइये और उनके परिवार
स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में
आएंगे। समारोह में शिक्षकों को
सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए बेसिक
शिक्षा विभाग और स्टेट बैंक
ऑफ इंडिया के बीच महत्वपूर्ण
एमओयू का भी आदान-प्रदान हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि
किसी भी राष्ट्र का
भविष्य उसकी कक्षाओं में
आकार लेता है। बच्चे
कोरा कागज होते हैं
और शिक्षक उनके व्यक्तित्व के
प्रथम शिल्पकार। यदि प्रारंभिक शिक्षा
की नींव मजबूत होगी
तो राष्ट्र की इमारत भी
उतनी ही सुदृढ़ बनेगी।
उन्होंने कहा, "मजबूत नींव पर ही
मजबूत भवन खड़ा होता
है। ठीक उसी प्रकार
यदि हमारे बच्चों की शिक्षा और
संस्कार मजबूत होंगे तो विकसित और
आत्मनिर्भर भारत का सपना
स्वतः साकार होगा।" मुख्यमंत्री ने निपुण भारत
अभियान को शिक्षा सुधार
का आधार बताते हुए
कहा कि अब शिक्षा
केवल परीक्षा पास करने तक
सीमित नहीं रहेगी, बल्कि
प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत क्षमता
को विकसित करने का माध्यम
बनेगी। हर विद्यार्थी अपनी
रुचि और योग्यता के
अनुसार पारंगत बने, यही अभियान
का लक्ष्य है।
उन्होंने शिक्षकों का आह्वान करते
हुए कहा कि विद्यालय
केवल पढ़ाई का स्थान नहीं
बल्कि संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की
प्रयोगशाला होने चाहिए। विद्यालय
का वातावरण स्वच्छ, सुंदर, अनुशासित और प्रेरणादायी हो,
ताकि वहां प्रवेश करने
वाला प्रत्येक बच्चा अपने भीतर भविष्य
के भारत की झलक
महसूस कर सके। मुख्यमंत्री
ने विकसित भारत के संकल्प
को नई राष्ट्रीय शिक्षा
नीति से जोड़ते हुए
कहा कि आधुनिक शिक्षा,
भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों
का समन्वय ही आने वाले
भारत की वास्तविक शक्ति
बनेगा। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने
प्रदेश की बदली हुई
तस्वीर का उल्लेख करते
हुए कहा कि कभी
उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य
कहा जाता था, लेकिन
पिछले नौ वर्षों में
डबल इंजन सरकार के
प्रयासों ने प्रदेश को
देश के अग्रणी राज्यों
की कतार में खड़ा
कर दिया है। उन्होंने
कहा कि शिक्षा में
किया गया निवेश कभी
व्यर्थ नहीं जाता और
आज उत्तर प्रदेश ने नकलमुक्त परीक्षा
प्रणाली स्थापित कर युवाओं के
भविष्य को सुरक्षित किया
है।
उन्होंने दो टूक कहा
कि सरकार किसी भी कीमत
पर युवाओं के भविष्य से
खिलवाड़ नहीं होने देगी।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और
गुणवत्ता दोनों समान रूप से
आवश्यक हैं। मुख्यमंत्री ने
राष्ट्रनिर्माण में भारतीय चिंतन
की भूमिका को रेखांकित करते
हुए कहा कि आचार्य
चाणक्य और पंडित मदन
मोहन मालवीय जैसे महापुरुष हमारे
आदर्श होने चाहिए। उन्होंने
कहा कि ऐसे आदर्शों
पर चलने वाला समाज
इतना सक्षम बनता है कि
कोई भी शक्ति उसकी
ओर टेढ़ी नजर से देखने
का साहस नहीं कर
सकती। उन्होंने प्रोजेक्ट अलंकार का उल्लेख करते
हुए बताया कि माध्यमिक विद्यालयों
के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने
के लिए सरकार ने
व्यापक निवेश किया है। आधुनिक
कक्षाएं, बेहतर प्रयोगशालाएं, स्वच्छ परिसर और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं
विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य
की आधारशिला बन रही हैं।
कार्यक्रम में शुभारंभ की
गई मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना को शिक्षकों के
सम्मान और सुरक्षा की
दिशा में ऐतिहासिक कदम
माना जा रहा है।
इस योजना के अंतर्गत राज्य
सरकार प्रत्येक शिक्षक के लिए वार्षिक
प्रीमियम वहन करेगी। सरकारी
एवं सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में
लगभग 1900 से अधिक उपचार
पैकेजों के माध्यम से
गंभीर बीमारियों, हृदय रोग, कैंसर,
किडनी रोग और जटिल
सर्जरी जैसी सुविधाएं कैशलेस
उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप
से 15 शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा
कार्ड भी प्रदान किए।
इसके साथ ही बेसिक
शिक्षा विभाग और स्टेट बैंक
ऑफ इंडिया के बीच हुए
समझौते के माध्यम से
लाखों शिक्षकों एवं कर्मचारियों को
जीवन बीमा, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, स्थायी विकलांगता सुरक्षा, एयर एक्सीडेंट कवर
तथा आकस्मिक परिस्थितियों में बच्चों की
शिक्षा और बेटियों के
विवाह हेतु आर्थिक सहायता
जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
समारोह में स्वच्छ एवं
हरित विद्यालय योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय
स्तर पर चयनित 12 विद्यालयों
के प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों को
भी सम्मानित किया गया। यह
सम्मान केवल विद्यालयों की
उपलब्धि नहीं बल्कि स्वच्छ,
सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल
शिक्षा संस्कृति की राष्ट्रीय पहचान
का प्रतीक बना। श्रम एवं
सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने
कहा कि मुख्यमंत्री का
यह कार्यक्रम "सबका साथ, सबका
विकास, सबका विश्वास" की
भावना का सजीव उदाहरण
है। उन्होंने कहा कि उत्तर
प्रदेश आज अनेक क्षेत्रों
में देश के लिए
मॉडल बन चुका है
और अन्य राज्य भी
यहां की योजनाओं को
अपनाने लगे हैं। समारोह में
माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, लोक निर्माण राज्य
मंत्री कुंवर बृजेश सिंह, पूर्व मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी,
महापौर अशोक तिवारी, जिला
पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, मंडलायुक्त
एस. राजलिंगम, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, सीडीओ प्रखर कुमार सहित अनेक जनप्रतिनिधि
एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
मतलब साफ है काशी से उठी यह
पहल केवल योजनाओं के
शुभारंभ तक सीमित नहीं
है। यह उस सोच
का विस्तार है जिसमें शिक्षा
को राष्ट्र की सबसे बड़ी
पूंजी माना गया है।
जब एक ओर विद्यार्थियों
तक संसाधन सीधे पहुंचाने के
लिए डीबीटी की व्यवस्था हो,
दूसरी ओर शिक्षक स्वास्थ्य
और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में
आएं तथा विद्यालयों को
स्वच्छ, आधुनिक और संस्कारित बनाने
का अभियान चले, तब शिक्षा
केवल पाठ्यक्रम नहीं रहती—वह
राष्ट्र के भविष्य का
निर्माण बन जाती है।
यदि समाज, शिक्षक, अभिभावक और सरकार इसी
प्रकार साझा जिम्मेदारी निभाते
रहे तो मुख्यमंत्री का
यह विश्वास निश्चित ही साकार होगा
कि मजबूत नींव वाले बच्चे
ही विकसित, आत्मनिर्भर और विश्वगुरु भारत
की सबसे मजबूत इमारत
तैयार करेंगे।



