Sunday, 16 August 2026

गंजारी में सज रहा ‘खेलों का काशीधाम’, अंतिम दौर में निर्माण

गंजारी में सज रहाखेलों का काशीधाम’, अंतिम दौर में निर्माण 

पीएम मोदी के जन्मदिन पर लोकार्पण की सुगबुगाहट, सितंबर में उद्घाटन की संभावना से बढ़ी हलचल

451 करोड़ की लागत से 30.66 एकड़ में आकार ले रहा पूर्वांचल का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम

• 30 हजार दर्शकों की क्षमताशिवत्व से सजा स्थापत्य, त्रिशूलनुमा फ्लडलाइट और डमरू आकार का पवेलियनमैदान, मीडिया सेंटर और प्रमुख मंडपों का काम लगभग पूरा

सुरेश गांधी

वाराणसी। काशी की पहचान सदियों से मंदिरों, घाटों और आध्यात्मिक चेतना से रही है। अब इसी शहर की धरती पर गेंद और बल्ले की गूंज काशी के नए परिचय की पटकथा लिखने जा रही है। राजातालाब के गंजारी में आकार ले रहा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम अब निर्माण के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। रविवार को जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के निरीक्षण में सामने आई तस्वीर बताती है कि वर्षों से प्रतीक्षित यह सपना अब मूर्त रूप लेने से कुछ ही कदम दूर है।

सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य अंतिम दौर में है और शेष काम को तेजी से पूरा कराया जा रहा है। सब कुछ निर्धारित योजना के अनुरूप रहा तो सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के आसपास स्टेडियम के लोकार्पण की संभावना पर भी मंथन चल रहा है। हालांकि उद्घाटन की अंतिम तिथि और कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। जून में भी विभिन्न रिपोर्टों में निर्माण 90 से 95 प्रतिशत तक पूरा होने की बात सामने आई थी।

अब डमरू परियोजना ही शेष

रविवार के निरीक्षण में परियोजना अधिकारियों ने जिलाधिकारी को बताया कि स्टेडियम के लगभग सभी प्रमुख हिस्सों का काम पूरा हो चुका है। डमरू परियोजना का कार्य अंतिम शेष कार्यों में है, जिसे निर्धारित समय में पूरा कराने की तैयारी है। वीआईपी/दक्षिण मंडप तथा पश्चिम और पूर्व मंडप तैयार हो चुके हैं। मीडिया सेंटर और आंतरिक कार्य भी पूरे किए जा चुके हैं। क्रिकेट मैदान में घास बिछाने का काम पूरा है, जबकि बाहरी विकास कार्य 80 फीसदी से अधिक हो चुका है। जिलाधिकारी ने निर्माण की गुणवत्ता का जायजा लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अंतिम चरण में गति बढ़े, लेकिन गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता हो। नियमित निगरानी और प्रगति की लगातार समीक्षा के भी निर्देश दिए गए।

शिवत्व में ढली क्रिकेट की दुनिया

गंजारी का स्टेडियम केवल ईंट-पत्थर और कंक्रीट का विशाल ढांचा नहीं है। इसकी वास्तुकला में काशी और भगवान शिव की सांस्कृतिक छाप को विशेष रूप से उकेरा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2023 को इसकी आधारशिला रखी थी। लगभग 450-451 करोड़ रुपये की लागत और 30 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में विकसित हो रहा यह स्टेडियम करीब 30 हजार दर्शकों की क्षमता वाला होगा। स्टेडियम की प्रस्तावित स्थापत्य पहचान में अर्धचंद्राकार छत, त्रिशूल के आकार की फ्लडलाइट, घाट की सीढ़ियों जैसी दर्शक दीर्घाएं और बेलपत्र की आकृति से प्रेरित बाहरी डिजाइन शामिल हैं। यानी टीवी स्क्रीन पर जब यहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का रोमांच दुनिया देखेगी तो कैमरे के फ्रेम में क्रिकेट के साथ काशी की सांस्कृतिक आत्मा भी दिखाई देगी।

पूर्वांचल की प्रतिभाओं को मिलेगा अपना मैदान

गंजारी का महत्व केवल अंतरराष्ट्रीय मैचों तक सीमित नहीं रहने वाला। यह पूर्वांचल के उन युवाओं के लिए उम्मीद का मैदान होगा, जिन्हें अब तक बड़े स्तर के प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए दूसरे शहरों की ओर देखना पड़ता था। अत्याधुनिक सुविधाओं, अभ्यास पिचों, मीडिया सेंटर और खिलाड़ियों के लिए विकसित किए जा रहे आधुनिक इंतजामों के साथ यह परिसर क्रिकेट प्रतिभाओं को नया मंच देगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैचों की मेजबानी के साथ इसके आसपास खेल आधारित गतिविधियों और अधोसंरचना के विस्तार की भी संभावनाएं बढ़ेंगी। गंजारी क्षेत्र में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी की योजना भी इसी बदलती तस्वीर की ओर संकेत करती है।

स्टेडियम बदलेगा काशी की अर्थव्यवस्था का खेल

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट केवल चौके-छक्कों का उत्सव नहीं होता। उसके साथ होटल, परिवहन, खानपान, पर्यटन, स्थानीय कारोबार और रोजगार की पूरी अर्थव्यवस्था चलती है। मैच देखने आने वाले हजारों दर्शक काशी के घाटों, मंदिरों और बाजारों तक पहुंचेंगे। ऐसे में गंजारी का स्टेडियम काशी के धार्मिक पर्यटन के साथ खेल पर्यटन का नया केंद्र भी बन सकता है। एक ओर विश्वनाथ धाम में आस्था का सैलाब होगा तो दूसरी ओर गंजारी में क्रिकेट का जुनून। यही संगम आने वाले वर्षों में काशी की नई पहचान गढ़ सकता है।

शिलान्यास से लोकार्पण तकतीन साल का इंतजार

23 सितंबर 2023 को जिस परियोजना की नींव रखी गई थी, उसके लोकार्पण की घड़ी अब करीब आती दिखाई दे रही है। शुरुआती समयसीमा में बदलाव और निर्माण संबंधी विभिन्न चरणों के कारण परियोजना को अपेक्षित समय से अधिक अवधि लगी, लेकिन अब निर्माण की तस्वीर तेजी से बदल रही है। काशी के लिए यह सिर्फ एक स्टेडियम का तैयार होना नहीं होगा। यह उस शहर की बदलती आकांक्षाओं का संकेत होगा, जहां आध्यात्म की ऊंचाई के साथ अब खेलों का क्षितिज भी फैल रहा है। गंगा की लहरों और मंदिरों की घंटियों के बीच जब गंजारी में पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की रोशनी जलेगी, तब काशी की सदियों पुरानी कथा में एक नया अध्याय जुड़ेगाजहां महादेव की नगरी में खेल भी अपनी नई महाशक्ति के साथ दुनिया के सामने खड़ा होगा।

कलम से कैमरे तक, आजादी की रोशनी में नारी शक्ति का सम्मान

कलम से कैमरे तक, आजादी की रोशनी में नारी शक्ति का सम्मान 

पराड़कर भवन में स्वतंत्रता दिवस की शाम बनी पत्रकारिता, संस्कृति और बदलती काशी के नामअन्नपूर्णा सिंह ने सोलर सिस्टम की घोषणा की, महापौर नेबदलती काशी की तस्वीरफोटोग्राफी प्रतियोगिता का किया ऐलान

सुरेश गांधी

वाराणसी. आजादी का पर्व केवल तिरंगे को सलाम करने का अवसर नहीं, बल्कि उन मूल्यों को फिर से याद करने का दिन है, जिनके लिए देश ने लंबा संघर्ष किया। इसी भाव को काशी की पत्रकारिता ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने अंदाज में जीवंत किया। पराड़कर स्मृति भवन का गर्दे सभागार शनिवार को उस शाम का साक्षी बना, जहां कलम की ताकत, नारी सम्मान, बदलती काशी की तस्वीर और संस्कृति के रंग एक साथ दिखाई दिए। काशी पत्रकार संघ से संचालित वाराणसी प्रेस क्लब की ओर से आयोजित सम्मान समारोह एवं सांस्कृतिक संध्या में दस महिला पत्रकारों को सम्मानित कर पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को नमन किया गया। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया।

आजादी की लड़ाई में पत्रकारिता की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता

एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। पत्रकारिता ने केवल घटनाओं को दर्ज नहीं किया, बल्कि जनचेतना को स्वर दिया और समाज को दिशा देने का काम किया। उन्होंने कहा कि आज महिला पत्रकारों का सम्मान करते हुए उन्हें विशेष प्रसन्नता हो रही है। महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों के साथ समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने पराड़कर स्मृति भवन की जरूरतों को देखते हुए अपनी निधि से सोलर सिस्टम लगवाने की घोषणा की। यह घोषणा ऐसे भवन में ऊर्जा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसकी दीवारों ने दशकों से काशी की पत्रकारिता के संघर्ष, सरोकार और इतिहास को अपने भीतर संजोया है।

बदलते बनारस को कैमरे में कैद करेंगे छायाकार

समारोह में मुख्य अतिथि महापौर अशोक तिवारी ने सम्मानित पत्रकारों को बधाई देते हुए काशी के बदलते स्वरूप को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बनारस केवल एक शहर नहीं, बल्कि निरंतर बदलती हुई जीवंत तस्वीर है। इसके पुराने घाट, गलियां, मंदिर, आधुनिक परियोजनाएं और बदलती जीवनशैलीसब अपने भीतर एक कहानी समेटे हुए हैं। उन्होंनेबदलती काशी की तस्वीरविषय पर विशेष फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। प्रेस क्लब अध्यक्ष चंदन रुपानी ने प्रस्ताव स्वीकार करते हुए कहा कि काशी के छायाकार इस पहल के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसके बाद महापौर ने प्रतियोगिता में उत्कृष्ट तस्वीरें प्रस्तुत करने वाले फोटोग्राफरों को प्राइज मनी से सम्मानित करने की घोषणा कर दी। यानी अब काशी की बदलती तस्वीर केवल शब्दों में नहीं, कैमरे की आंख से भी दर्ज होगी।

दस महिला पत्रकारों का सम्मान, मेधावी विद्यार्थियों को भी प्रशस्ति

समारोह में डॉ. प्रभा रानी, मीरा वोहरा, मनीषा चौरसिया, निधि मिश्रा, काजल सेठ समेत दस महिला पत्रकारों को सम्मानित किया गया। सम्मान के इस क्षण में पत्रकारिता के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनकी प्रतिबद्धता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अंकिता चौधरी और आर्यन चौधरी को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। पत्रकारिता और समाज के बीच शिक्षा की इस कड़ी ने समारोह को नई पीढ़ी की उपलब्धियों से भी जोड़ा।

पत्रकारों की सुविधा में सहयोग करने वाले भी सम्मानित

एसएसपीजी अस्पताल में पत्रकारों के लिए अलग काउंटर खोले जाने पर अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार का महापौर ने स्वागत किया। पत्रकारों की व्यावहारिक जरूरतों के प्रति इस पहल को समारोह में सराहा गया। वहीं संघ भवन में अग्निशमन यंत्र लगवाने में सहयोग देने वाले काशी केराना व्यापार मंडल के महामंत्री संजय केशरी, उपाध्यक्ष महेंद्र केशरी और मंत्री अजय गुप्ता को भी सम्मानित किया गया। इस बहाने पत्रकारिता और समाज के बीच सहयोग की उस परंपरा को भी सम्मान मिला, जो किसी संस्था को केवल अपने सदस्यों तक सीमित नहीं रहने देती।

देशभक्ति के गीतों से गूंजा पराड़कर भवन

सम्मान समारोह के बाद सांस्कृतिक संध्या ने माहौल में देशभक्ति और उल्लास के रंग भर दिए। आलोक मालवीय और गायक योगेश फिलिप ने देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियों से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। वहीं बालिकाओं संस्कृति और स्वीकृति की नृत्य प्रस्तुतियों ने समारोह में सांस्कृतिक छटा बिखेरी। कार्यक्रम का संचालन वाराणसी प्रेस क्लब के मंत्री विनय शंकर सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन काशी पत्रकार संघ के महामंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव ने किया।

सुबह तिरंगे को सलाम, शाम कलम के प्रहरी सम्मानित

इससे पहले स्वतंत्रता दिवस की सुबह काशी पत्रकार संघ भवन में संघ अध्यक्ष अरुण मिश्रा ने ध्वजारोहण किया। तिरंगे को सलामी देने के साथ पत्रकारों ने देश की लोकतांत्रिक चेतना, संविधान और पत्रकारिता के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। समारोह में संघ के पूर्व अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्त, कृष्णदेव नारायण राय, डॉ. अत्रि भारद्वाज, पूर्व महामंत्री अखिलेश मिश्रा, उपाध्यक्ष सुनील शुक्ला, पुरुषोत्तम चतुर्वेदी, प्रेस क्लब के कोषाध्यक्ष संदीप गुप्ता, अजय राय, कृष्ण बहादुर रावत, कैलाश यादव, दीनबन्धु राय, रवीन्द्र प्रकाश त्रिपाठी, डॉ. नागेन्द्र पाठक, नरेन्द्र यादव, रोहित चतुर्वेदी, पंकज त्रिपाठी, सुरेश गांधी, ओंकार तिवारी, अमित शर्मा, डॉ. जिनेश कुमार, जावेद, मनोज राय, संजय गुप्ता, राकेश सिंह, उमेश गुप्ता, शैलेश चौरसिया, प्रदीप सिंह, राजेश यादव, विनोद यादव, प्रतीक रंजन श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में पत्रकार साथी और विशिष्टजन मौजूद रहे। पराड़कर भवन की यह शाम इसलिए भी खास रही कि यहां आजादी के पर्व पर सिर्फ सम्मान नहीं हुआ, बल्कि पत्रकारिता की विरासत से भविष्य की काशी तक एक संवाद बना। एक ओर महिला पत्रकारों की मेहनत को सलाम था, दूसरी ओर कैमरे के जरिए बदलते बनारस को सहेजने का संकल्प। और इन सबके बीच तिरंगे की छांव में यह संदेश भी कि काशी की पत्रकारिता की असली ताकत उसकी कलम, उसकी संवेदना और समाज के प्रति उसकी जवाबदेही में है। 

गंजारी में सज रहा ‘खेलों का काशीधाम’, अंतिम दौर में निर्माण

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