Monday, 21 September 2026

एच-1बी वीजा पर अमेरिका का नया शिकंजा, भारतीय पेशेवरों की बढ़ी मुश्किलें

एच-1बी वीजा पर अमेरिका का नया शिकंजा, भारतीय पेशेवरों की बढ़ी मुश्किलें 

ट्रंप प्रशासन ने एक लाख डॉलर भुगतान की शर्त को 21 सितंबर 2026 से अगले 12 माह के लिए बढ़ाया

आईटी, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में भारत पर असर की आशंका

पूर्व राज्यमंत्री सरवर सिद्दीकी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की

सुरेश गांधी

वाराणसी। अमेरिका में रोजगार का सपना देख रहे भारतीय उच्च-कुशल पेशेवरों के लिए एच-1बी वीजा का रास्ता अब और महंगा तथा जटिल हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम पर लागू एक लाख अमेरिकी डॉलर के भुगतान की शर्त को आगे भी जारी रखने का फैसला किया है।

18 सितंबर को जारी राष्ट्रपति की घोषणा के अनुसार यह व्यवस्था 21 सितंबर 2026 से अगले 12 महीने तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत अमेरिका से बाहर मौजूद ऐसे एच-1बी आवेदकों के लिए संबंधित नियोक्ता को याचिका के साथ एक लाख डॉलर का भुगतान करना होगा, हालांकि राष्ट्रीय हित में कुछ अपवादों का प्रावधान भी रखा गया है।

पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार सरवर सिद्दीकी ने अमेरिकी फैसले को भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर इस मामले में हस्तक्षेप और भारतीय पेशेवरों के हितों की रक्षा के लिए समाधान निकालने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका की नई नीति का असर भारत के उन हजारों पेशेवरों पर पड़ सकता है जो आईटी, इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उच्च-कौशल वाले क्षेत्रों में काम करने के लिए अमेरिका जाते हैं। उनके अनुसार इससे भारतीय युवाओं और अमेरिकी कंपनियों, दोनों के सामने नई आर्थिक और रोजगार संबंधी चुनौती खड़ी हो सकती है।

भारतीय प्रतिभा की बड़ी हिस्सेदारी

एच-1बी कार्यक्रम लंबे समय से भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए अमेरिका में रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। हालांकि भारतीयों की हिस्सेदारी को लेकर अलग-अलग वर्षों और आंकड़ों में अंतर रहा है, इसलिए इसे स्थायी रूप से 75 प्रतिशत बताने के बजाय उपलब्ध वर्ष-विशेष के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर देखा जाना चाहिए। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य एच-1बी कार्यक्रम में कथित दुरुपयोग को रोकना, कम वेतन वाले विदेशी श्रम के माध्यम से अमेरिकी कर्मचारियों के विस्थापन की आशंका को कम करना और अधिक उच्च-कौशल तथा उच्च-वेतन वाली नियुक्तियों को प्राथमिकता देना है। व्हाइट हाउस के अनुसार 2025 में लागू की गई एक लाख डॉलर भुगतान वाली व्यवस्था के बाद बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों की एच-1बी पंजीकरण संख्या में 92 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

नियोक्ता पर आर्थिक बोझ, असर भारतीयों पर

नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक लाख डॉलर की राशि को सीधे भारतीय आवेदक का वीजा शुल्क नहीं कहा जा सकता। राष्ट्रपति की घोषणा के मुताबिक भुगतान संबंधित नियोक्ता को एच-1बी याचिका के साथ करना होगा। इसके बावजूद इसका अप्रत्यक्ष असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है, क्योंकि कंपनियां इतनी बड़ी अतिरिक्त लागत वाली नियुक्तियों पर पुनर्विचार कर सकती हैं। सरवर सिद्दीकी ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि भारत सरकार इस मुद्दे को अमेरिकी प्रशासन के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाए और भारतीय तकनीकी एवं उच्च-कुशल पेशेवरों के हितों को सुरक्षित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर पहल करे। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को बड़ी संख्या में आईटी और तकनीकी प्रतिभा उपलब्ध कराता है। ऐसे में एच-1बी व्यवस्था में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव केवल व्यक्तिगत रोजगार का विषय नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका के बीच तकनीकी सहयोग, सेवा क्षेत्र और कुशल मानव संसाधन के आवागमन से भी जुड़ा हुआ है।

21 सितंबर से लागू नया चरण

18 सितंबर की अमेरिकी घोषणा में कहा गया है कि एक लाख डॉलर भुगतान वाली प्रवेश पाबंदी 21 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी और मौजूदा आदेश के अनुसार 12 महीने बाद समाप्त होगी, जब तक कि इसे आगे नहीं बढ़ाया जाता। घोषणा में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय हित में अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग कुछ मामलों में इस प्रतिबंध से अपवाद दे सकता है। इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी आवेदनों की जांच और कड़ी करने के लिए अलग कार्यकारी आदेश भी जारी किया है। इसमें संबंधित कंपनियों में हाल में हुई या प्रस्तावित छंटनी जैसे पहलुओं को भी एच-1बी आवेदन पर विचार करते समय ध्यान में रखने का निर्देश दिया गया है।

भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती

सरवर सिद्दीकी का प्रधानमंत्री को लिखा पत्र ऐसे समय आया है जब एच-1बी नीति अमेरिका और भारत के बीच कुशल पेशेवरों की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है। भारत सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि भारतीय पेशेवरों के हितों को उठाते हुए अमेरिका के रोजगार और श्रम-बाजार संबंधी हितों के साथ संतुलन कायम किया जाए।

गंगा के ऊपर गरजेगी वायुशक्ति, काशी देखेगी आसमान का शौर्य

गंगा के ऊपर गरजेगी वायुशक्ति, काशी देखेगी आसमान का शौर्य 

25 अक्तूबर को नमो घाट परइंडियन एयर फोर्स एरियल डिस्प्ले-2026’  

युद्धभूमि से आपदा राहत तक मध्य वायु कमान की छह दशक से अधिक की गौरवगाथा होगी प्रदर्शित

वायु योद्धाओं की सटीकता, साहस, समन्वय और सेवा-समर्पण से रूबरू होंगे काशीवासी

सुरेश गांधी

वाराणसी। एक ओर सदियों से अविरल बहती गंगा की धारा, दूसरी ओर घाटों की आध्यात्मिक आभा और इनके ऊपर भारतीय वायुशक्ति की गर्जना। अक्तूबर में काशी का आसमान कुछ ऐसे ही अद्भुत दृश्य का साक्षी बनने जा रहा है। 25 अक्तूबर को नमो घाट परइंडियन एयर फोर्स एरियल डिस्प्ले-2026’ का आयोजन होगा। गंगा के भव्य तट की पृष्ठभूमि में होने वाला यह हवाई प्रदर्शन काशीवासियों और यहां आने वाले देश-दुनिया के पर्यटकों को भारतीय वायुसेना की सटीकता, व्यावसायिक दक्षता और अद्भुत समन्वय से रूबरू कराएगा। यह आयोजन केवल आसमान में विमानों की कलाबाजियों का रोमांच नहीं होगा, बल्कि इसके साथ मध्य वायु कमान की छह दशक से अधिक लंबी गौरवशाली परिचालन यात्रा भी सामने आएगी। युद्ध के मोर्चे से लेकर बाढ़, आपदा और मानवीय संकटों तक राष्ट्रसेवा में निभाई गई भूमिका की झलक भी इस आयोजन के माध्यम से लोगों तक पहुंचेगी।

आसमान में दिखेगा अनुशासन और सटीकता का अद्भुत मेल

भारतीय वायुसेना के हवाई प्रदर्शन में कुछ क्षण ऐसे होते हैं, जब आकाश केवल आकाश नहीं रह जाता। विमानों की गति, उनके बीच का सटीक अंतर, निर्धारित दिशा में एक साथ बदलती संरचनाएं और पायलटों का अद्भुत तालमेलहर दृश्य के पीछे वर्षों का प्रशिक्षण, अनुशासन और असाधारण कौशल छिपा होता है। नमो घाट पर होने वाला एरियल डिस्प्ले नागरिकों को भारतीय वायुसेना की इसी पेशेवर क्षमता को करीब से महसूस करने का अवसर देगा। गंगा का विस्तृत आकाश और ऐतिहासिक घाट इस प्रदर्शन को विशिष्ट पृष्ठभूमि प्रदान करेंगे। यह आयोजन काशी के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यहां राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य सामर्थ्य की आधुनिक तस्वीर का सामना उस प्राचीन सांस्कृतिक विरासत से होगा, जिसके लिए वाराणसी दुनिया भर में पहचानी जाती है।

मध्य वायु कमान की छह दशक से अधिक की दास्तां

हवाई प्रदर्शन की चमक के पीछे एक लंबी और गौरवशाली सेवा-यात्रा भी है। मध्य वायु कमान और उसके अधीनस्थ संगठनों ने अपनी स्थापना के बाद से विस्तृत और परिचालन की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस कमान की परिचालन विरासत में 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध, मालदीव में ऑपरेशन कैक्टस तथा कारगिल संघर्ष के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर जैसे महत्वपूर्ण अभियान शामिल रहे हैं। इन अभियानों ने भारतीय वायुसेना की उस क्षमता को सामने रखा, जिसमें चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचना, तेजी से निर्णय लेना और मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करना शामिल है। काशी में होने वाला प्रदर्शन इसी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। आसमान में उड़ते विमान केवल तकनीक और ताकत का प्रदर्शन नहीं करेंगे, बल्कि उनके पीछे खड़े उन वायु योद्धाओं की कहानी भी कहेंगे, जिनके लिए कर्तव्य सर्वोपरि रहा है।

जब युद्ध नहीं, तब राहत का मिशन

वायुसेना की भूमिका युद्ध तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक आपदा के समय जब सड़कें बंद हो जाती हैं, पुल टूट जाते हैं या दुर्गम इलाकों तक जमीन के रास्ते पहुंचना कठिन हो जाता है, तब आसमान राहत का रास्ता बनता है। मध्य वायु कमान ने भी समय-समय पर निकासी, बाढ़ राहत, आकस्मिक चिकित्सा निकासी और मानवीय सहायता अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कठिन भूभाग और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक निकालना और जरूरत के समय चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना इसकी सेवा-परंपरा का हिस्सा रहा है। यानी एक ही वायुशक्ति कभी सीमा पर दुश्मन के सामने देश की सुरक्षा की ढाल बनती है तो कभी आपदा में फंसे नागरिक के लिए आसमान से उतरती उम्मीद।

युवाओं के लिए आसमान से आएगा संदेश

नमो घाट पर होने वाला यह आयोजन युवाओं के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। भारतीय वायुसेना की विविध भूमिकाओं, तकनीकी क्षमताओं, प्रशिक्षण, अनुशासन और सेवा परंपरा को करीब से समझने का अवसर युवाओं को मिलेगा। आसमान में उड़ते विमान निश्चित रूप से रोमांच पैदा करेंगे, लेकिन उससे आगे यह प्रदर्शन युवाओं के सामने राष्ट्रसेवा, साहस, अनुशासन और पेशेवर उत्कृष्टता का एक जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करेगा। भारतीय वायुसेना के हालिया सार्वजनिक एयर डिस्प्ले में भी युवाओं और विद्यार्थियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली है। 19-20 सितंबर को मेरठ में सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम के प्रदर्शन को एक लाख से अधिक लोगों ने देखा, जिनमें बड़ी संख्या विद्यार्थियों, एनसीसी कैडेट और एनएसएस स्वयंसेवकों की थी। 

काशी के आसमान से देश को दिखेगी वायुसेना की तस्वीर

काशी सदियों से आस्था और अध्यात्म की नगरी रही है। यहां हर दिन गंगा के घाटों पर देश-विदेश से आने वाले लाखों लोग भारतीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर देखते हैं। अब इसी काशी के आसमान में आधुनिक भारत की सैन्य क्षमता की झलक भी दिखाई देगी। नमो घाट इस आयोजन के लिए इसलिए भी खास है कि यह आधुनिक स्वरूप में विकसित काशी के प्रमुख नदी तटीय स्थलों में शामिल है। गंगा के किनारे खुले आसमान में होने वाला प्रदर्शन घाटों पर मौजूद दर्शकों के लिए लंबे समय तक याद रहने वाला दृश्य बन सकता है।

सिर्फ प्रदर्शन नहीं, सेवा की पहचान

भारतीय वायुसेना के लिए हवाई प्रदर्शन अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने के साथ-साथ जनता से जुड़ने का माध्यम भी है। विमानों की गति और करतब जितने आकर्षक होंगे, उनके पीछे छिपी तैयारी उतनी ही गंभीर होगी। एक सफल फॉर्मेशन के पीछे पायलटों का प्रशिक्षण, तकनीकी टीमों की तैयारी, ग्राउंड स्टाफ की सतर्कता और हर स्तर पर समयबद्ध समन्वय काम करता है। यही समन्वय युद्धकाल में अभियान की सफलता का आधार बनता है और आपदा के समय राहत मिशन की गति तय करता है। नमो घाट पर 25 अक्तूबर को होने वाला एरियल डिस्प्ले इसी व्यापक तस्वीर को काशी के सामने रखेगावायुसेना केवल आकाश की प्रहरी नहीं, बल्कि आवश्यकता की हर घड़ी में राष्ट्र के साथ खड़ी सेवा-शक्ति भी है।

दर्शकों की सुरक्षा सर्वोपरि

आयोजन के दौरान दर्शकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी। निर्धारित दर्शक क्षेत्र, यातायात व्यवस्था, पार्किंग और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश आयोजन की तिथि के करीब अधिकृत माध्यमों से जारी किए जाएंगे। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया या अन्य अनधिकृत माध्यमों से प्रसारित सूचनाओं पर भरोसा करें। कार्यक्रम से जुड़ी समय, दर्शक क्षेत्र, यातायात, पार्किंग और सुरक्षा संबंधी जानकारी केवल अधिकृत स्रोतों से ही प्राप्त करें। साथ ही जिला प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बलों और आयोजन से जुड़े अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।

गंगा की लहरें और आसमान की उड़ान

25 अक्तूबर को जब नमो घाट पर गंगा अपनी गति से बह रही होगी और घाटों पर काशी का जीवन अपनी रफ्तार में होगा, उसी समय ऊपर आसमान में भारतीय वायुसेना की उड़ान एक अलग ही दृश्य रचेगी। नीचे सदियों की सभ्यता की साक्षी गंगा होगी और ऊपर आधुनिक भारत की वायुशक्ति। मध्य वायु कमान की छह दशक से अधिक लंबी सेवा-यात्रा, युद्धभूमि का साहस, कारगिल का शौर्य, मानवीय सहायता की संवेदना और आपदा के समय नागरिकों तक पहुंचती मददइन सबकी स्मृतियां इस आयोजन के साथ जुड़ेंगी। काशी के लिए यह केवल कुछ घंटों का हवाई प्रदर्शन नहीं होगा। यह उस भारत की तस्वीर होगी, जहां विरासत और आधुनिकता, आस्था और तकनीक तथा सेवा और शौर्य एक ही आकाश के नीचे साथ दिखाई देंगे।

एच-1बी वीजा पर अमेरिका का नया शिकंजा, भारतीय पेशेवरों की बढ़ी मुश्किलें

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