Wednesday, 6 May 2026

बंगाल विजय के बाद पहली बार काशी पहुंचे योगी, आस्था और संदेश दोनों साधे

बंगाल विजय के बाद पहली बार काशी पहुंचे योगी, आस्था और संदेश दोनों साधे

शेड्यूल बदला, बाबा विश्वनाथ-कालभैरव के दरबार में टेका माथा

राजनीतिक जीत के बाद काशी में आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रदर्शन

सुरेश गांधी

वाराणसी. पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काशी दौरा कई मायनों में विशेष महत्व रखता है। यह केवल एक प्रशासनिक यात्रा नहीं, बल्कि राजनीतिक सफलता के बाद सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आधार से पुनः जुड़ने का प्रतीकात्मक क्षण भी बन गया।

मौसम की प्रतिकूलता के कारण सोमवार को स्थगित हुआ यह दौरा मंगलवार को साकार हुआ, लेकिन घटनाक्रम ने इसे सामान्य कार्यक्रम से अलग बना दिया। पूर्व निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत मुख्यमंत्री को समयबद्ध तरीके से प्रयागराज रवाना होना था, किंतु काशी पहुंचते ही उनका कार्यक्रम बदला और उन्होंने सीधे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तथा बाबा कालभैरव के दरबार में जाकर दर्शन-पूजन किया।

यह बदलाव केवल कार्यक्रम का फेरबदल नहीं था, बल्कि उस परंपरा का निर्वहन था जिसमें काशी, विशेषकर बाबा विश्वनाथ और कालभैरव का आशीर्वाद किसी भी बड़े कार्य या उपलब्धि के बाद आवश्यक माना जाता है। बंगाल में मिली सफलता के बाद योगी आदित्यनाथ का काशी आना और यहां शीश नवाना इसी सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाता है। प्रशासन ने भी तत्परता दिखाते हुए बदले हुए कार्यक्रम के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं। यह समन्वय इस बात का संकेत है कि काशी में शासन केवल नियमों तक सीमित नहीं, बल्कि यहां की आस्था और परंपराओं के साथ कदमताल करता है।

योगी आदित्यनाथ, जो स्वयं एक संन्यासी परंपरा से आते हैं, के लिए यह दौरा और भी अधिक अर्थपूर्ण हो जाता है। राजनीतिक विजय के बाद आध्यात्मिक स्थलों पर पहुंचकर आशीर्वाद लेना भारतीय जनमानस में गहराई से जुड़ी परंपरा है, और काशी इसका केंद्र बिंदु है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री का एक निजी विवाह समारोह में शामिल होना यह दर्शाता है कि सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच सामाजिक और मानवीय संबंधों को भी महत्व दिया जाता है। मतलब साफ है कि काशी में योगी आदित्यनाथ का यह दौरा केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक संदेश है राजनीतिक सफलता और आध्यात्मिक आस्था, दोनों का संतुलन ही भारतीय राजनीति की विशिष्ट पहचान है।

महिला उत्पीड़न पर सख्त पहल, 7 को लगेगा जनसुनवाई दरबार

महिला उत्पीड़न पर सख्त पहल, 7 को लगेगा जनसुनवाई दरबार 

घरेलू हिंसा, दहेज और जमीनी विवाद से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई का भरोसा, पीड़ित महिलाओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील

सुरेश गांधी

वाराणसी। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते उत्पीड़न और पारिवारिक विवादों के मामलों के त्वरित निस्तारण के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल के तहत 7 मई को वाराणसी में जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग, लखनऊ सदस्य श्रीमती गीता विश्वकर्मा की अध्यक्षता में यह जनसुनवाई सर्किट हाउस सभागार में पूर्वाह्न 11 बजे से शुरू होगी।

इस जनसुनवाई में घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, जमीनी विवाद तथा अन्य प्रकार के महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करना है, जहां वे बिना किसी भय या झिझक के अपनी समस्याएं सीधे आयोग के समक्ष रख सकें और उन्हें त्वरित न्याय मिल सके।

जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज मिश्र ने जनपद की सभी महिलाओं से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और अपनी शिकायतें लेकर जनसुनवाई में अवश्य पहुंचें। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा प्राप्त शिकायतों पर गंभीरता से विचार करते हुए संबंधित विभागों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे, जिससे पीड़ितों को शीघ्र राहत मिल सके।

प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के जनसुनवाई कार्यक्रम महिलाओं को न्याय दिलाने की दिशा में प्रभावी साबित हो रहे हैं। इससे केवल पीड़ितों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है, बल्कि संबंधित मामलों के त्वरित समाधान की प्रक्रिया भी सुनिश्चित होती है।

Tuesday, 5 May 2026

शिक्षामित्रों को सम्मान का संबल: बढ़े मानदेय के साथ मिला आत्मविश्वास

शिक्षामित्रों को सम्मान का संबल: बढ़े मानदेय के साथ मिला आत्मविश्वास

गोरखपुर से मुख्यमंत्री का लाइव संदेश, वाराणसी में चेक वितरण के साथ हुआ भव्य सम्मान समारोह

शिक्षामित्रों को डमी चेक देकर सम्मानित किया गया

सुरेश गांधी

वाराणसी. प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षामित्रों के मानदेय में की गई वृद्धि को लेकर मंगलवार को वाराणसी में एक गरिमामय और उत्साहपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। चौकाघाट स्थित गिरिजा देवी संकुल में आयोजित इस समारोह में शिक्षामित्रों को बढ़े हुए मानदेय के प्रतीक चेक वितरित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि गोरखपुर में आयोजित मुख्य समारोह, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि थे, उसका सजीव प्रसारण भी यहां उपस्थित जनसमूह को दिखाया गया। 

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन समन्वय मंत्री अनिल राजभर, स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, एमएलसी धर्मेंद्र सिंह, विधायक सौरभ श्रीवास्तव और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया। समारोह के दौरान शिक्षामित्रों को डमी चेक देकर सम्मानित किया गया। पूरे कार्यक्रम में शिक्षामित्रों के चेहरों पर संतोष और उत्साह स्पष्ट नजर आया। परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को सांस्कृतिक गरिमा भी प्रदान की।

राष्ट्र निर्माण की नींव हैं शिक्षामित्र : अनिल राजभर

श्रम मंत्री अनिल राजभर ने शिक्षामित्रों और शिक्षकों की भूमिका को देश के भविष्य की आधारशिला बताते हुए कहा कि ये वर्ग केवल शिक्षा नहीं दे रहा, बल्कि राष्ट्र के चरित्र का निर्माण कर रहा है। उन्होंने मानदेय वृद्धि को शिक्षामित्रों के मनोबल को सशक्त करने वाला ऐतिहासिक निर्णय बताया।

सम्मान और आत्मसम्मान से जुड़ा फैसला : रविन्द्र जायसवाल

स्टाम्प मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि उनके सम्मान और आत्मसम्मान को मजबूत करने वाला कदम है।

जनप्रतिनिधियों ने सराहा निर्णय

एमएलसी धर्मेंद्र सिंह ने इसे शिक्षामित्रों के लिए प्रेरणादायक पहल बताया, वहीं विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए शिक्षामित्रों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, प्रदीप अग्रहरि, अदिति पटेल, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव सहित कई अधिकारी और शिक्षा विभाग से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।

शिक्षा व्यवस्था में जमीनी स्तर को मजबूती

शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि का यह कदम सिर्फ उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम है, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूती देने की एक बड़ी पहल के रूप में भी देखा जा रहा है। सरकार का यह संदेश साफ है कि शिक्षा के आधार स्तंभ को मजबूत किए बिना समग्र विकास संभव नहीं।

नन्हें लेखकों ने गंगा की गूंज को दिया शब्दों का स्वर

नन्हें लेखकों ने गंगा की गूंज को दिया शब्दों का स्वर 

सनबीम के 23 विद्यार्थियों की पुस्तकगंगा - विस्पर्स ऑफ रिवरका भव्य विमोचन, काशी की संस्कृति और संवेदना का अनूठा संगम

सुरेश गांधी

वाराणसी. शिक्षा, संस्कृति और सृजनशीलता का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब सनबीम शिक्षण समूह के विद्यार्थियों द्वारा लिखित पुस्तकगंगा - विस्पर्स ऑफ रिवरका भव्य विमोचन लहरतारा स्थित परिसर में किया गया। यह अवसर केवल एक पुस्तक के लोकार्पण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि काशी की आत्मागंगाके प्रति नई पीढ़ी की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का सशक्त प्रदर्शन भी बना। 

सनबीम समूह की इस पांचवीं छात्र-लेखित पुस्तक का विमोचन देश के प्रतिष्ठित विद्वानों और गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में संकटमोचन मंदिर के महंत एवं प्रख्यात पर्यावरणविद प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथियों में 39 जीटीसी वाराणसी के स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर जयदीप चंदा, कैंटोनमेंट बोर्ड के सीईओ सत्यम मोहन, मेजर कंवरदीप सिंह नेगी, शिक्षाविद संदीप सेठी, परनब मुखर्जी, स्कॉलास्टिक इंडिया के नवीन कुमार सिंह, लेखकीय सलाहकार राहुल सैनी सहित सनबीम समूह के अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक, उपाध्यक्ष श्रीमती भारती मधोक और निदेशिका श्रीमती अमृता बर्मन मौजूद रहीं।

इस पुस्तक को 23 मेधावी छात्र-छात्राओं ने मिलकर लिखा और संकलित किया है, जिसमें गंगा के प्रति उनके व्यक्तिगत अनुभव, विचार और संवेदनाएं समाहित हैं। पुस्तक का संपादन और प्रकाशन स्कॉलास्टिक्स राइटर्स अकादमी द्वारा किया गया है, जबकि कवर डिजाइन छात्र कार्तिकेय कुमार गोंड ने तैयार किया। कार्यक्रम का शुभारंभ तुलसी के पौधे पर गंगाजल अर्पित कर किया गया और छात्र राघवेंद्र ने गंगाष्टकम का सस्वर पाठ कर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक-शिक्षिकाएं और काशी के गणमान्य नागरिक इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।

प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि यह पुस्तक केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि गंगा के प्रति जिम्मेदारी का संदेश है। उन्होंने विद्यार्थियों की मेधा और संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। ब्रिगेडियर जयदीप चंदा ने कहा कि आधुनिकता के दौर में भी यदि बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े रहकर इतना परिपक्व लेखन कर रहे हैं, तो यह शिक्षा की वास्तविक सफलता है। वहीं सीईओ सत्यम मोहन ने इसे वैश्विक विरासत पर आधारित सारगर्भित प्रयास बताया।

सनबीम समूह की निदेशिका अमृता बर्मन ने इसेआशीर्वाद का क्षणबताते हुए कहा कि इतने विद्वानों की उपस्थिति विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ा सम्मान है। अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक और उपाध्यक्ष भारती मधोक ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को बधाई देते हुए इसे समाज के लिए एक अमूल्य उपहार बताया। यह पुस्तक गंगा के ऐतिहासिक, भौगोलिक, जैविक और आध्यात्मिक पहलुओं को समेटते हुए केवल उसकी महिमा का गुणगान करती है, बल्कि उसके संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी रेखांकित करती है। सनबीम के इन युवा लेखकों ने केवल एक पुस्तक नहीं लिखी, बल्कि गंगा के प्रति एक संवेदनशील विचारधारा को जन्म दिया हैजो आने वाले समय में समाज को दिशा देने का काम करेगी।

बंगाल विजय के बाद पहली बार काशी पहुंचे योगी, आस्था और संदेश दोनों साधे

बंगाल विजय के बाद पहली बार काशी पहुंचे योगी , आस्था और संदेश दोनों साधे शेड्यूल बदला , बाबा विश्वनाथ - कालभैरव के दरबार में...