काशी में योग का महासंकल्प, घाटों से गांव तक बिछेगा स्वास्थ्य का आसन
21 जून को 337 मंडलों,
प्रमुख
घाटों,
पार्कों
और
सार्वजनिक
स्थलों
पर
सामूहिक
योगाभ्यास
• सांसद,
मंत्री,
विधायक,
कार्यकर्ताओं
के
साथ
हजारों
नागरिक
होंगे
सहभागी
सुरेश गांधी
वाराणसी। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को
जनभागीदारी का विराट उत्सव
बनाने के लिए काशी
में तैयारियां पूरी कर ली
गई हैं। भारतीय जनता
पार्टी काशी क्षेत्र और
आयुष विभाग के संयुक्त प्रयासों
से 21 जून को शहर
से लेकर गांव तक
योग का व्यापक आयोजन
होगा। इस दौरान नमो
घाट, अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट
समेत प्रमुख सार्वजनिक स्थलों के साथ भाजपा
के सभी संगठनात्मक मंडलों
में सामूहिक योगाभ्यास कराया जाएगा।
भाजपा काशी क्षेत्र के
अध्यक्ष दिलीप पटेल ने रोहनिया
स्थित क्षेत्रीय मुख्यालय में आयोजित तैयारी
बैठक में बताया कि
काशी क्षेत्र के 16 संगठनात्मक जिलों की 71 विधानसभा क्षेत्रों के 337 मंडलों में योग कार्यक्रम
होंगे। इनमें सांसद, मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता, चिकित्सक, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या
में आम नागरिक भाग
लेंगे। सभी मंडलों में
संयोजकों की जिम्मेदारियां तय
कर तैयारियों को अंतिम रूप
दे दिया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के प्रयासों
से योग को वैश्विक
पहचान मिली है और
आज यह स्वस्थ जीवनशैली
का विश्वव्यापी अभियान बन चुका है।
योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर
है, जो शारीरिक स्वास्थ्य
के साथ मानसिक संतुलन
और सकारात्मक जीवन दृष्टि का
संदेश देता है।
उधर, आयुष राज्यमंत्री
(स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र
'दयालु' ने नागरिकों से
योग दिवस में अधिकाधिक
संख्या में भाग लेने
की अपील की। उन्होंने
कहा कि इस वर्ष
की थीम 'योग स्वयं
और समाज के लिए'
व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ सामाजिक
समरसता का भी संदेश
देती है। योग केवल
व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा
के संतुलन का माध्यम है,
जो स्वस्थ समाज और सशक्त
राष्ट्र की आधारशिला रखता
है।
आयुष विभाग के
अनुसार वाराणसी के प्रमुख घाटों,
पार्कों और सार्वजनिक स्थलों
पर प्रशिक्षकों एवं आवश्यक व्यवस्थाओं
की तैनाती की जा चुकी
है। जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, विद्यार्थियों और युवाओं की
सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए
व्यापक अभियान चलाया गया है। प्रशासन
और संगठन का लक्ष्य योग
दिवस को केवल एक
औपचारिक आयोजन तक सीमित न
रखकर जनआंदोलन का स्वरूप देना
है, ताकि अधिकाधिक लोग
नियमित योग को अपनी
जीवनशैली का हिस्सा बना
सकें।


