Monday, 11 May 2026

आक्रांताओं का जिक्र कर मोदी ने फिर छेड़ा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा नैरेटिव

सोमनाथ से साधा ‘सियासी शिवधनुष!

आक्रांताओं का जिक्र कर मोदी ने फिर छेड़ा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा नैरेटिव 

गजनवी, खिलजी और ‘स्वाभिमान की उपेक्षा वाले बयान के कई राजनीतिक मायने

• राम मंदिर के बाद अब सोमनाथ के जरिए हिंदुत्व की नई वैचारिक धार तेज करने की कोशिश

• विपक्ष के लिए जवाब देना आसान नहीं

सुरेश गांधी

सोमनाथ अमृत महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सांस्कृतिक स्मृति, ऐतिहासिक पीड़ा और राजनीतिक संदेशतीनों के संगम में बदल दिया। मंच से महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी और “आजादी के बाद स्वाभिमान प्रतीकों की उपेक्षा का जिक्र महज इतिहास दोहराना नहीं था, बल्कि 2027 और उससे आगे की राजनीति का संकेत भी माना जा रहा है।

मोदी ने सोमनाथ को सिर्फ मंदिर नहीं, बल्कि “भारत की अस्मिता पर हुए हमलों का प्रतीक बनाकर पेश किया। यही वह बिंदु है जहां भाजपा का सबसे मजबूत वैचारिक आधार खड़ा होता हैसांस्कृतिक राष्ट्रवाद। राम मंदिर के बाद अब सोमनाथ को उसी भावनात्मक धुरी पर स्थापित करने की कोशिश साफ दिखाई दी। प्रधानमंत्री का यह कहना कि “आक्रांताओं ने सोमनाथ को पत्थर समझा, लेकिन यह हमारी आस्था का केंद्र था सीधे तौर पर उस बहस को फिर जिंदा करता है जिसमें इतिहास, हिंदुत्व और राष्ट्रीय पहचान एक साथ जुड़ जाते हैं। भाजपा लंबे समय से यह नैरेटिव गढ़ती रही है कि सदियों तक भारत की सांस्कृतिक पहचान को दबाया गया और अब उसका पुनर्जागरण हो रहा है।

लोगों की नजर मोदी के उस बयान पर भी रही जिसमें उन्होंने आजादी के बाद की सरकारों पर स्वाभिमान प्रतीकों की उपेक्षा का आरोप लगाया। बिना सीधे हमला किए यह इशारा कांग्रेस और नेहरू युग की राजनीति की ओर था। सरदार पटेल और डॉ. राजेंद्र प्रसाद का नाम लेकर मोदी ने एक बार फिर कांग्रेस की ऐतिहासिक विरासत के भीतर वैचारिक विभाजन को उभारने की कोशिश की।

सोमनाथ का मंच भाजपा के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि “हमले और पुनर्जागरण की कहानी है। यही कारण है कि मोदी ने इसे पोखरण परमाणु परीक्षण, ऑपरेशन शक्ति और शिव-शक्ति जैसे प्रतीकों से जोड़ा। संदेश साफ थाभारत अब “आस्था और शक्ति दोनों का राष्ट्र है। राजनीतिक तौर पर इसका सबसे बड़ा फायदा भाजपा को हिंदू वोटों के भावनात्मक ध्रुवीकरण के रूप में मिल सकता है। खासकर तब, जब विपक्ष अभी भी हिंदुत्व के मुद्दों पर स्पष्ट वैचारिक जवाब खोजता नजर आता है। राम मंदिर के समय की तरह ही सोमनाथ का विमर्श भी विपक्ष के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता हैक्योंकि इसका विरोध करना आस्था के विरोध की तरह पेश किया जा सकता है और समर्थन देना भाजपा के नैरेटिव को मजबूती देता है।

हालांकि विपक्ष इसे चुनावी ध्रुवीकरण की रणनीति बताकर हमला कर सकता है। आलोचक कह सकते हैं कि इतिहास के आक्रांताओं को बार-बार उठाकर वर्तमान राजनीति को धार्मिक भावनाओं से जोड़ा जा रहा है। लेकिन भाजपा के लिए यही उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी भी हैऐसा नैरेटिव जिसमें इतिहास का दर्द, धार्मिक गौरव और राष्ट्रवाद एक साथ जुड़ जाते हैं। सोमनाथ से निकला संदेश केवल मंदिर तक सीमित नहीं दिखा। यह उस व्यापक राजनीति का हिस्सा नजर आया जिसमें भाजपा खुद को “सभ्यता के पुनर्जागरण की वाहक और विपक्ष को “उस इतिहास की उपेक्षा करने वाली ताकत के रूप में स्थापित करना चाहती है।

आस्था का महासागर उमड़ा

समुद्र की गर्जन करती लहरों, डमरुओं की गूंज, शंखनाद, वैदिक मंत्रों औरहर-हर महादेवके आसमान चीरते उद्घोष के बीच सोमवार को प्रभास पाटन सिर्फ एक तीर्थ नहीं रहा, वह भारत की हजार वर्षों की सभ्यता, संघर्ष और सनातन स्वाभिमान का जीवंत घोष बन गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब मंदिर शिखर पर स्थापित 760 किलो वजनी कलश का 11 तीर्थों के जल से अभिषेक कराया तो ऐसा लगा मानो सदियों के घावों पर भारत अपनी आस्था का अमृत चढ़ा रहा हो। सुबह से ही लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर और प्रभास क्षेत्र में उमड़ पड़ी थी। हाथों में भगवा ध्वज, माथे पर भस्म और होंठों परजय सोमनाथका उद्घोष लिए भक्तों का सैलाब सड़कों पर दिखाई देता रहा। पीएम मोदी जब जामनगर से हेलिकॉप्टर द्वारा सोमनाथ पहुंचे और रोड शो करते हुए मंदिर की ओर बढ़े तो पूरा रास्ता शिवभक्ति से भर उठा। जगह-जगह पुष्पवर्षा हुई, डमरू बजे और शंखनाद के बीच लोगों नेमोदी-मोदीऔरहर-हर महादेवके नारे लगाए। समारोह का सबसे दिव्य क्षण तब आया जब मंदिर शिखर पर लगे विशाल कलश का कुंभाभिषेक हुआ। 90 मीटर ऊंची क्रेन से बंधे इस कलश में 1100 लीटर जल भरा गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने रिमोट के जरिए देश के 11 प्रमुख तीर्थों के पवित्र जल से उसका अभिषेक कराया। उस समय पूरा परिसर नमः शिवायके जाप से कांप उठा। सोमनाथ परिसर में दिनभर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, नृत्य-नाटिकाएं और शिव स्तुति का आयोजन चलता रहा। भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने छह हॉक विमानों के साथ आसमान में तिरंगा और दिल का आकार बनाकर लोगों को रोमांचित कर दिया। हेलिकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा ने पूरे आयोजन को अलौकिक बना दिया।

सनातन को मिटाने वाले खुद मिट गए: मोदी

गजनवी टूट गया, सोमनाथ नहीं झुका!

सनातन को मिटाने वाले खुद मिट गए: मोदी 

हजार साल के हमलों परअमृत अभिषेक

पीएम मोदी ने साधा इतिहास और राजनीति दोनों पर निशाना

कहा, आक्रांताओं ने मंदिर तोड़े, आस्था नहीं, तलवारें हार गईं, शिव का ध्वज फिर लहराया

प्रभास पाटन में गूंजाजय सोमनाथ

जो भारत की आस्था से टकराया, इतिहास से मिट गया

सरदार पटेल और राजेंद्र प्रसाद को बताया पुनर्जागरण का नायक

मंदिर को पत्थर समझने वालों ने भारत की आत्मा को नहीं पहचाना

जो काल से परे है, वही भारत की आत्मा है

75वें पुनर्निर्माण वर्ष पर सोमनाथ में भव्य अमृत महोत्सव

पीएम ने जारी किया स्मारक सिक्का और डाक टिकट

11 तीर्थों के जल से हुआ शिखर कलश अभिषेक

एयर शो, पुष्पवर्षा और वैदिक मंत्रों से गूंजा प्रभास पाटन

सुरेश गांधी

प्रभास पाटन की धरती सोमवार को सिर्फ एक धार्मिक आयोजन की साक्षी नहीं बनी, बल्कि उसने भारत की हजार वर्षों की संघर्षगाथा, स्वाभिमान और सनातन चेतना का विराट उत्सव देखा। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजितसोमनाथ अमृत महोत्सवमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान शिव की महापूजा, जलाभिषेक और मंदिर शिखर पर स्थापित विशाल कलश का 11 तीर्थों के जल से अभिषेक कर इतिहास और आस्था के संगम को नया आयाम दिया। पूरे प्रभास क्षेत्र मेंहर-हर महादेवऔरजय सोमनाथके उद्घोष गूंजते रहे। मंदिर परिसर पर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा हुई, वैदिक मंत्रों की ध्वनि और समुद्र की लहरों के बीच ऐसा वातावरण बना मानो स्वयं इतिहास वर्तमान में उतर आया हो।

प्रधानमंत्री मोदी ने समारोह में स्मारक डाक टिकट और विशेष सिक्का जारी करते हुए कहा, सोमनाथ केवल पत्थरों का मंदिर नहीं, यह भारत की आत्मा, आस्था और अमर चेतना का प्रतीक है। जो काल से परे हैं, वही महादेव आज भी इस राष्ट्र की ऊर्जा बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि महमूद गजनवी, खिलजी और तुगलक जैसे आक्रांताओं ने सोमनाथ को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि यह केवल भौतिक ढांचा नहीं, करोड़ों भारतीयों की आत्मा का केंद्र है। पहले विध्वंस के हजार साल बाद भी सोमनाथ अडिग खड़ा है। यह भारत की अमरता का प्रतीक है.

 प्रधानमंत्री ने आजादी के बाद के राजनीतिक दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के स्वाभिमान से जुड़े प्रतीकों की लंबे समय तक उपेक्षा हुई। उन्होंने बिना नाम लिए तत्कालीन सत्ता व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि सोमनाथ पुनर्निर्माण को भी वैसी ही उपेक्षा झेलनी पड़ी, लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बनाकर पुनर्जीवित किया। मोदी ने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद राम मंदिर निर्माण का भी विरोध हुआ, लेकिन भारत की सांस्कृतिक चेतना को कभी दबाया नहीं जा सकता।

मोदी ने कहा, सोमनाथ गजनवी, खिलजी और तुगलक से लड़ा, लेकिन कभी झुका नहीं. 11 मई 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण को याद करते हुएशक्ति और भक्तिके संगम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया के दबाव के बावजूद परमाणु परीक्षण किया और उसका नामऑपरेशन शक्तिरखा गया। भारत में शक्ति का आधार भी शिव हैं और भक्ति का केंद्र भी शिव हैं.

समारोह का सबसे भव्य क्षण तब आया जब 760 किलो वजनी और 1100 लीटर जल क्षमता वाले कलश का 90 मीटर ऊंची क्रेन के जरिए अभिषेक किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने रिमोट संचालन से देश के 11 प्रमुख तीर्थों के जल से यह कुंभाभिषेक कराया। सोमनाथ मंदिर परिसर में सुबह से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहा। भगवा ध्वज, डमरू, शंखनाद और शिवभक्ति के बीच सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सोमनाथ के संघर्ष और पुनर्जागरण की कथा जीवंत कर दी। भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने भी आसमान में तिरंगा बनाकर समारोह को रोमांच से भर दिया। छह हॉक एमके-132 विमानों के एयर शो ने श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक संकटों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए देशवासियों से संयम और राष्ट्रहित में योगदान की अपील भी की। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और एक वर्ष तक सोने के आभूषणों की खरीद से बचने का आग्रह किया ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके। सोमनाथ मंदिर, जिसे 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है, सदियों से भारत की सांस्कृतिक शक्ति और समृद्धि का प्रतीक रहा है। बार-बार टूटने और फिर खड़े होने की इसकी गाथा ही उसे केवल मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सनातन जिजीविषा का सबसे बड़ा प्रतीक बनाती है।

सोमनाथ पर 17 आक्रमण हुए, लेकिन सनातन की चेतना को कोई पराजित नहीं कर सका : योगी

सोमनाथ पर 17 आक्रमण हुए, लेकिन सनातन की चेतना को कोई पराजित नहीं कर सका : योगी 

काशी से मुख्यमंत्री योगी का संदेश जो भारत की आत्मा मिटाने आए थे, इतिहास से स्वयं मिट गए

सोमनाथ स्वाभिमान पर्वमें गरजे मुख्यमंत्री, बोलेकृ काशी और सोमनाथ भारत की सांस्कृतिक चेतना के दो अमर ज्योति स्तंभ

सुरेश गांधी

वाराणसी। सोमनाथ पर आक्रमण हुए, मंदिर तोड़े गए, शिखर गिराए गए, लेकिन भारत की सनातन चेतना को कोई पराजित नहीं कर सका। जो भारत की आत्मा मिटाने आए थे, वे स्वयं इतिहास की धूल में खो गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को काशी विश्वनाथ धाम में आयोजितसोमनाथ स्वाभिमान पर्वके दौरान यह उद्गार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी और सोमनाथ केवल मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्रीय पुनर्जागरण के जीवंत प्रतीक हैं।

काशी विश्वनाथ धाम परिसर में आयोजितसोमनाथ संकल्प महोत्सवमें प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, आयुष राज्य मंत्री दयाशंकर दयालु, विधायक एवं पूर्व मंत्री नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव, एमएलसी धर्मेंद्र सिंह, महापौर अशोक तिवारी और बड़ी संख्या में संत, विद्वान एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा सेएक भारत-श्रेष्ठ भारतकी संकल्पना साकार रूप ले रही है। सोमनाथ, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक और अयोध्या में राम मंदिर जैसे प्रकल्प केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि आज भारत वैभव और विकास की नई यात्रा पर आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा की प्रेरक शक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जिन्होंने भारत को उसकी सांस्कृतिक चेतना से पुनः जोड़ने का कार्य किया है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी और सोमनाथ मंदिर भारत की सनातन चेतना के दो अमर ज्योति स्तंभ हैं। एक उत्तर में गंगा तट पर स्थित है, जिसने सनातन धर्म की आध्यात्मिक धारा को अक्षुण्ण रखा, जबकि दूसरा पश्चिमी समुद्र तट पर भारत के स्वाभिमान और पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर हजारों वर्षों तक खड़ा रहा। 

उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की उस अमर चेतना का प्रतीक है, जहां धर्म, संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय अस्मिता एकाकार हो जाती है। इतिहास हमें सिखाता है कि सनातन संस्कृति पर आक्रमण हो सकते हैं, लेकिन उसे समाप्त नहीं किया जा सकता। विनाश क्षणिक होता है, जबकि सनातन शाश्वत है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर पर 17 बार हमला किया। महमूद गजनवी से लेकर औरंगजेब तक अनेक शासकों ने मंदिरों को ध्वस्त कर भारत की आध्यात्मिक चेतना को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।

उन्होंने कहा, “आक्रांताओं ने समझा कि मूर्तियां तोड़कर और वैभव लूटकर भारत की आत्मा को समाप्त किया जा सकता है, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सनातन केवल मंदिरों की दीवारों में नहीं, बल्कि भारत की चेतना में बसता है। मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम का उल्लेख करते हुए कहा कि औरंगजेब ने यहां प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर गुलामी का प्रतीक खड़ा किया था, लेकिन वह भी भारत की आत्मा को नहीं तोड़ सका। आज काशी विश्वनाथ धाम पुनः दिव्य और भव्य स्वरूप में पूरी दुनिया के सामने खड़ा है।

उन्होंने कहा कि आज भी कुछ शक्तियां भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आध्यात्मिक स्वाभिमान को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहतीं।जिन लोगों ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का विरोध किया, वही मानसिकता सोमनाथ और काशी के पुनरुत्थान के खिलाफ भी दिखाई देती रही है। लेकिन अब भारत अपनी सांस्कृतिक अस्मिता के साथ आगे बढ़ रहा है।मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभ भाई पटेल को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। अनेक चुनौतियों और विरोधों के बावजूद उन्होंने राष्ट्र की आत्मप्रतिष्ठा के रूप में इस कार्य को आगे बढ़ाया। उन्होंने भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद का भी उल्लेख किया, जिन्होंने 75 वर्ष पूर्व तत्कालीन विरोध के बावजूद सोमनाथ मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लिया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उस समय कहा था कि भौतिक संरचनाओं को क्षतिग्रस्त किया जा सकता है, लेकिन भारत की आत्मा अजर, अमर और शाश्वत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत की उसी शाश्वत चेतना का उत्सव है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा के पुनर्जागरण का महापर्व है। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत की ज्योतिर्लिंग परंपरा राष्ट्रीय एकता की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का स्वागत करते हुए आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

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