Monday, 26 October 2026

गंगा किनारे जनसैलाब, गांजारी में सजेगा जनउत्सव!

गंगा किनारे जनसैलाब, गांजारी में सजेगा जनउत्सव! 

एयर शो की भीड़ ने दिखाई काशी की ताकत, 30 हजार की क्षमता वाले क्रिकेट स्टेडियम पर टिकी निगाहें

साल के अंत तक मैचों की मेजबानी की उम्मीद, पूर्वांचल के क्रिकेट प्रेमियों को मिलेगा नया ठिकाना; 2027 के चुनाव से पहले विकास की नई तस्वीर

सुरेश गांधी

वाराणसी। काशी ने आसमान में भारत का शौर्य देखा, गंगा के तट पर जनसैलाब का सामर्थ्य दिखाया और अब निगाहें गांजारी पर हैं। भारतीय वायुसेना के एयर शो में उमड़ी भीड़ ने एक सवाल छोड़ दिया है—जब गंगा के ऊपर लड़ाकू विमानों की गर्जना सुनने के लिए पूरा शहर उमड़ पड़ा, तब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के उद्घाटन और पहले बड़े मुकाबले पर कैसा जनउत्सव देखने को मिलेगा? यह सवाल महज भीड़ का आकलन नहीं, बल्कि बदलती काशी, बढ़ती आकांक्षाओं और विकास के राजनीतिक निहितार्थों को समझने की एक खिड़की भी है।

एयर शो की तस्वीरें बहुत कुछ कहती हैं। गंगा के घाटों से लेकर नदी के दोनों किनारों तक, दूर-दूर तक नजर आते जनसमूह और आसमान में करतब दिखाते लड़ाकू विमान। ड्रोन से कैद ये दृश्य आयोजन के व्यापक आकर्षण की गवाही देते हैं। आयोजन में 25 लाख से अधिक लोगों के पहुंचने का दावा किया जा रहा है, हालांकि इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि के बिना इसे अंतिम आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा। लेकिन तस्वीरों में दिखाई दे रही भीड़ का विस्तार अपने आप में असाधारण जनभागीदारी का संकेत है।

गंगा के तट से गांजारी के मैदान तक

काशी की पहचान सदियों से आस्था, अध्यात्म और संस्कृति की रही है। अब इसी पहचान के साथ आधुनिक विकास, खेल और बड़े आयोजनों की नई तस्वीर भी जुड़ रही है। एयर शो ने जहां भारतीय वायुसेना की क्षमता और शौर्य को जनमानस के सामने साकार किया, वहीं गांजारी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम पूर्वांचल को खेल के वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की क्षमता रखता है। कल्पना कीजिए, स्टेडियम का उद्घाटन हो, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का मुकाबला खेला जाए और मैदान में देश-दुनिया के दिग्गज खिलाड़ी उतरें। दर्शक दीर्घा में क्रिकेट का रोमांच हो, बाहर शहर की सड़कों पर उत्सव जैसा माहौल और आसपास के जिलों से काशी पहुंचने को आतुर प्रशंसकों की कतारें। वाराणसी के साथ गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली, मिर्जापुर, भदोही, आजमगढ़ और मऊ तक के क्रिकेटप्रेमियों के लिए यह आयोजन आकर्षण का केंद्र बन सकता है। जिस तरह एयर शो ने लोगों को गंगा के तट तक खींचा, उसी तरह क्रिकेट का जुनून गांजारी तक लोगों को पहुंचा सकता है। यह केवल खेल का आयोजन नहीं होगा। इसके साथ होटल, परिवहन, खानपान, स्थानीय कारोबार और पर्यटन की गतिविधियों को गति मिलने की संभावना भी जुड़ी है। स्टेडियम के आसपास रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और स्थानीय युवाओं को खेल से जुड़ी नई संभावनाएं मिल सकती हैं। बशर्ते, आयोजन की चमक के साथ बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय जरूरतों पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए।

भीड़ का उत्साह, विकास की कसौटी

बड़े आयोजनों की सफलता का एक चेहरा भीड़ है, लेकिन दूसरा चेहरा वह बदलाव है जो आयोजन के बाद लोगों के जीवन में दिखाई देता है। सड़कें कितनी सुधरीं, यातायात कितना सुगम हुआ, स्थानीय कारोबार को कितना लाभ मिला, रोजगार के कितने अवसर बने और आम नागरिक को विकास का कितना हिस्सा मिला—इन सवालों के जवाब ही किसी आयोजन की वास्तविक उपलब्धि तय करते हैं। एयर शो ने काशी की आयोजन क्षमता, जनभागीदारी और राष्ट्रीय गौरव के प्रति लोगों के उत्साह को सामने रखा है। गांजारी स्टेडियम के सामने इससे आगे जाने का अवसर होगा। वह खेल के साथ अर्थव्यवस्था, पर्यटन और स्थानीय प्रतिभाओं के विकास का केंद्र बन सकता है। इसके लिए जरूरी होगा कि स्टेडियम तक पहुंचने के रास्ते, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन, सुरक्षा और आसपास की नागरिक सुविधाओं को भी मजबूत किया जाए।

2027 के सियासी समीकरणों पर भी नजर

इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक पहलू भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ते माहौल में विकास की परियोजनाएं, बड़े आयोजन और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं। एयर शो में उमड़ी भीड़ और गांजारी स्टेडियम को लेकर पैदा हो रहा उत्साह सत्तारूढ़ दल के लिए विकास की उपलब्धियां गिनाने का अवसर बन सकता है। लेकिन लोकतंत्र में भीड़ को सीधे वोटों में बदलकर देखना राजनीतिक भूल होगी। एयर शो देखने पहुंचा हर व्यक्ति किसी दल का समर्थक नहीं होता और क्रिकेट का प्रशंसक होना किसी राजनीतिक विचारधारा का प्रमाण नहीं है। किसी आयोजन की लोकप्रियता और चुनावी समर्थन के बीच अंतर समझना जरूरी है। आखिरकार, मतदाता का फैसला केवल भव्य आयोजनों से नहीं बनता। रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था, स्थानीय समस्याओं का समाधान और सरकार के प्रति भरोसा भी उसकी कसौटी होते हैं। बड़े आयोजन सकारात्मक माहौल जरूर बनाते हैं, लेकिन उस माहौल को स्थायी जनसमर्थन में बदलने के लिए विकास का लाभ आम आदमी तक पहुंचना चाहिए।

जनउत्साह से जनविश्वास तक का सफर

काशी के सामने इस समय अवसर भी बड़ा है और जिम्मेदारी भी। गंगा के तट पर एयर शो की भव्यता ने जनभागीदारी की तस्वीर दिखाई है। गांजारी का स्टेडियम इस उत्साह को खेल, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ सकता है। यदि इन परियोजनाओं का लाभ पूर्वांचल के गांवों और कस्बों तक पहुंचता है, तो उनका प्रभाव केवल वाराणसी तक सीमित नहीं रहेगा। एयर शो ने भीड़ जुटाने की ताकत दिखाई है, गांजारी उस ताकत को विकास के अवसर में बदलने की परीक्षा होगी। और 2027? उसका फैसला न तो ड्रोन से ली गई तस्वीरें करेंगी, न स्टेडियम की दर्शक दीर्घा और न ही किसी आयोजन की चमक। अंतिम निर्णय जनता करेगी। मगर इतना तय है कि विकास की ये तस्वीरें चुनावी बहस का हिस्सा जरूर बनेंगी। गंगा के तट पर उमड़ा जनसैलाब एक दृश्य था; गांजारी में संभावित जनउत्सव एक संभावना है। इन दोनों के बीच भविष्य का वह सवाल खड़ा है, जिसका जवाब काशी को आने वाले समय में अपने अनुभवों से देना है—क्या भव्य आयोजनों का उत्साह जनविश्वास में बदलेगा और क्या विकास की चमक आम आदमी के जीवन तक पहुंचेगी?

 गांजारी स्टेडियम: काशी के क्रिकेट का नया ठिकाना

₹450 करोड़ की लागत, 30 हजार दर्शकों की क्षमता

स्थान: गांजारी, राजातालाब, वाराणसी।

निर्माण लागत: करीब 450 करोड़ रुपये। भूमि अधिग्रहण पर करीब 121 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

दर्शक क्षमता: लगभग 30 हजार।

खास पहचान: भगवान शिव की थीम पर आधारित वास्तुकला, त्रिशूल के आकार की फ्लडलाइटें, अर्धचंद्राकार छत और डमरू की आकृति वाला मीडिया सेंटर।

पहले मैच की संभावना

साल के अंत तक घरेलू क्रिकेट मुकाबले शुरू होने की उम्मीद है। दिसंबर में अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफी के दो मुकाबलों—उत्तर प्रदेश बनाम पुडुचेरी और उत्तर प्रदेश बनाम छत्तीसगढ़—की मेजबानी की तैयारी की खबरें हैं। जरूरी शर्त : प्रतिस्पर्धी मुकाबलों के आयोजन के लिए बीसीसीआई का निरीक्षण और आवश्यक मंजूरी अहम होगी। आगे की उम्मीद: वर्ष 2027 में महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) के मुकाबलों की मेजबानी की संभावना भी जताई गई है।

पूर्वांचल को क्या मिलेगा?

अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं के साथ स्थानीय कारोबार, होटल, परिवहन, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

मोदी के पिता पर टिप्पणी से भड़की भाजपा, काशी में खड़गे-राहुल के पुतले फूंके

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कचहरी स्थित जिला मुख्यालय पर भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग

जगदीश पटेल की मौजूदगी में उतरे भाजपाई, मंत्रियों, महापौर और विधायकों ने खोला मोर्चा; सड़क से संसद तक विरोध की चेतावनी

सुरेश गांधी

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कथित अमर्यादित टिप्पणी पर काशी में भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सोमवार को कचहरी स्थित भाजपा जिला मुख्यालय पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के पुतले फूंककर विरोध जताया। भाजपा नेताओं ने इसे राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक माफी की मांग की।

प्रदर्शन में भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी जगदीश पटेल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, राज्य सरकार के मंत्रियों, महापौर और विधायकों समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। युवा, महिला और अनुसूचित मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने भी कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की। भाजपा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध की आड़ में व्यक्तिगत टिप्पणियां करना लोकतांत्रिक संवाद की मर्यादा के खिलाफ है।

पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री के फैसलों की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन व्यक्तिगत आक्षेपों को राजनीतिक विरोध का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। भाजपा ने टिप्पणी पर कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा और चेतावनी दी कि सार्वजनिक माफी नहीं मिलने पर विरोध का सिलसिला जारी रहेगा।

विचारों से हो मुकाबला, भाषा से नहीं : जगदीश पटेल

भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी जगदीश पटेल ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन इसकी आड़ में मर्यादा लांघना स्वीकार्य नहीं हो सकता। राजनीतिक लड़ाई विचारों, तथ्यों और तर्कों के आधार पर होनी चाहिए। ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, जिससे सार्वजनिक संवाद का स्तर गिरे। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से टिप्पणी पर अपना पक्ष स्पष्ट करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने कांग्रेस पर राजनीतिक मर्यादा भूलने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ता इस तरह की टिप्पणियों पर चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने सड़क से संसद तक विरोध जारी रखने की चेतावनी दी।

प्रधानमंत्री के सम्मान का सवाल : रविंद्र जायसवाल

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के सम्मान का प्रश्न करोड़ों देशवासियों की भावनाओं से जुड़ा है। प्रधानमंत्री की नीतियों और नेतृत्व का विरोध तथ्यों के आधार पर होना चाहिए। व्यक्तिगत टिप्पणियों से राजनीतिक विमर्श को दूषित करना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से जवाबदेही तय करने और सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री और उनके परिवार को लेकर बार-बार अमर्यादित टिप्पणियां करते हैं। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के पास विकास और जनकल्याण जैसे मुद्दों पर ठोस बहस नहीं रह जाती, तब वह व्यक्तिगत आक्षेपों का सहारा लेता है। उन्होंने कहा कि जनता राजनीतिक दलों के आचरण पर नजर रखती है और समय आने पर अपना फैसला सुनाती है। महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा राजनीतिक संस्कारों की पहचान होती है। लोकतंत्र में स्वस्थ बहस की परंपरा मजबूत होनी चाहिए। व्यक्तिगत टिप्पणियों से राजनीतिक कटुता बढ़ती है और जनसंवाद प्रभावित होता है। विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि राजनीतिक दलों को सरकार की नीतियों का विरोध तथ्यों और तर्कों के आधार पर करना चाहिए। असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन अमर्यादित भाषा किसी तर्क को मजबूत नहीं करती। विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अमर्यादित टिप्पणी पर कांग्रेस नेतृत्व को स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की भाषा में संयम और जवाबदेही होनी चाहिए। मजबूत विपक्ष की पहचान तथ्यपरक आलोचना से होती है, विवादित शब्दों से नहीं।

ये रहे मौजूद

प्रदर्शन में पूर्व महापौर रामगोपाल मोहले, क्षेत्र उपाध्यक्ष नवरतन राठी, अमित राय, अनूप जायसवाल, जगदीश त्रिपाठी, शैलेश राम, रजनीश कनौजिया, मधुकर चित्रांश, नवीन कपूर, पूजा दीक्षित, शैलेंद्र मिश्रा, अशोक जाटव, राहुल सिंह, चंद्रशेखर उपाध्याय, जगन्नाथ ओझा, प्रज्ञा पाण्डेय, प्रमिल पाण्डेय, सत्येंद्र सिंह, नेहा कक्कड़, शोभनाथ मौर्य, मनोज सोनकर, विवेक पाण्डेय, राकेश जायसवाल, सपना सिंह, योगेश सिंह ‘पिंकू’, साधना वेदांती, विभव सिंह, अनुराग शर्मा, मधुप सिंह और हीरा यादव समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।

गंगा किनारे जनसैलाब, गांजारी में सजेगा जनउत्सव!

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