Sunday, 11 October 2026

साइकिल के पहियों पर सवार हुआ नशामुक्त भारत का संकल्प

साइकिल के पहियों पर सवार हुआ नशामुक्त भारत का संकल्प 

नमो घाट से संस्कृत विश्वविद्यालय तक गूंजा स्वस्थ युवा, सशक्त भारत का संदेश

केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 5.5 किलोमीटर की साइकिल रैली का किया नेतृत्व, 500 से अधिक साइकिल चालकों और एक हजार से ज्यादा प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

ध्यान, कथक और जुम्बा से शुरू हुआ फिटनेस का उत्सव, एशियाई खेलों के पदक विजेताओं की मौजूदगी ने बढ़ाया युवाओं का उत्साह

सुरेश गांधी

वाराणसी। गंगा की लहरों के सानिध्य में रविवार की सुबह काशी ने सेहत, अनुशासन और नशामुक्ति का ऐसा संदेश दिया, जिसकी गूंज साइकिल के पहियों के साथ सड़कों तक पहुंची। नमो घाट पर उगती सुबह की पहली किरणों के बीच कहीं ध्यान के जरिए मन को साधने की पहल हुई तो कहीं कथक की थाप और जुम्बा की लय पर शरीर को सक्रिय रखने का संदेश दिया गया। इसके बाद साइकिलों का कारवां निकला तो उसका मकसद केवल कुछ किमी की दूरी तय करना नहीं, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रखकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने रविवार को वाराणसी में ‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ के 94वें संस्करण का नेतृत्व किया। नमो घाट से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय तक करीब 5.5 किमी की साइकिल रैली में 500 से अधिक साइकिल चालकों ने हिस्सा लिया, जबकि पूरे आयोजन में एक हजार से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी रही। ‘विकसित भारत के लिए नशामुक्त युवा’ की थीम पर आयोजित कार्यक्रम में युवाओं ने नशे से दूरी और स्वस्थ जीवन के प्रति प्रतिबद्धता जताई। इस अवसर पर 2026 आइची-नागोया एशियाई खेलों के पदक विजेता प्राची चौधरी, पारुल चौधरी, जय कुमार और राज कुमार पाल भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का मूल संदेश साफ था—राष्ट्र की प्रगति के लिए युवाओं का स्वस्थ होना जरूरी है। शरीर की मजबूती, मन का संतुलन और नशे से दूरी केवल व्यक्तिगत जीवन की जरूरत नहीं, बल्कि एक सशक्त समाज की बुनियाद भी है।

ध्यान से शुरुआत, फिटनेस के रंग में रंगी सुबह

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह छह बजे नमो घाट पर ध्यान सत्र से हुई। हैदराबाद के कान्हा शांतिवनम स्थित हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट की युवा कार्यक्रम निदेशक डॉ. निवेदिता श्रेयांस ने इसका नेतृत्व किया। उन्होंने शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया। ध्यान के माध्यम से प्रतिभागियों को यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ जीवन के लिए केवल शरीर को सक्रिय रखना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि मन को शांत, संतुलित और तनावमुक्त रखना भी जरूरी है। ध्यान सत्र के बाद भारतीय संस्कृति और आधुनिक फिटनेस का सुंदर मेल देखने को मिला। कथक की प्रस्तुति ने सांस्कृतिक विरासत की छटा बिखेरी तो जुम्बा सत्र ने प्रतिभागियों में नई ऊर्जा भर दी। इन गतिविधियों ने आयोजन को महज औपचारिक कार्यक्रम बनने से आगे बढ़ाकर सामूहिक सहभागिता और उत्साह का मंच बना दिया। इस क्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने युवाओं को संबोधित करते हुए फिटनेस को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। नशे के दुष्परिणामों से समाज को बचाने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने प्रतिभागियों के साथ ‘नशामुक्त भारत’ की शपथ ली। इस दौरान नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ सामूहिक प्रयास और नशामुक्त पीढ़ी तैयार करने का संकल्प दोहराया गया।

साइकिल रैली के साथ सड़कों पर उतरा जनजागरण

शपथ के बाद डॉ. मांडविया ने नमो घाट से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय तक साइकिल रैली का नेतृत्व किया। साइकिलों के इस कारवां ने वाराणसी की सड़कों पर ‘विकसित भारत के लिए नशामुक्त युवा’ का संदेश पहुंचाया। इस रैली की खासियत यह रही कि इसमें फिटनेस को केवल व्यक्तिगत अभ्यास के रूप में नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया गया। साइकिल चलाना एक ऐसी गतिविधि है, जिसे आम लोग भी अपनी दिनचर्या में सहजता से शामिल कर सकते हैं। नियमित साइकिलिंग शरीर को सक्रिय रखने और सहनशक्ति बढ़ाने में मदद करती है। जब ऐसी गतिविधियां सामूहिक आयोजन का रूप लेती हैं, तो उनका संदेश लोगों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचता है। नशामुक्ति का संकल्प इस आयोजन का केंद्रीय भाव रहा। युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रखने के लिए जागरूकता के साथ सकारात्मक विकल्प उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। खेल, व्यायाम और रचनात्मक गतिविधियां युवाओं को अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाने तथा अनुशासन विकसित करने का अवसर देती हैं। इसी सोच को साइकिल रैली के जरिए जनभागीदारी से जोड़ा गया।

पदक विजेताओं की उपलब्धियों ने जगाई प्रेरणा

कार्यक्रम में एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को सम्मानित कर भारतीय खेल उपलब्धियों का उत्सव मनाया गया। खिलाड़ियों की मौजूदगी ने युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक विजेता प्राची चौधरी को सम्मानित किया गया। वहीं, पारुल चौधरी ने महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज और 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ाया। जय कुमार को मिश्रित 4×400 मीटर रिले में रजत पदक और पुरुषों की 4×400 मीटर रिले में कांस्य पदक जीतने वाली टीमों में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के सदस्य राज कुमार पाल को स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा बनने के लिए सम्मान मिला। इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां बताती हैं कि खेलों में सफलता किसी एक दिन के प्रयास का परिणाम नहीं होती। इसके पीछे वर्षों का अभ्यास, कठिन परिश्रम, अनुशासन, धैर्य और लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण होता है। खिलाड़ियों की मौजूदगी ने आयोजन को प्रेरणा का ऐसा मंच बनाया, जहां युवा खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने के माध्यम के रूप में देख सकते हैं।

फिटनेस केवल व्यायाम नहीं, जीवन जीने की शैली

‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ के 94वें संस्करण ने फिटनेस की व्यापक अवधारणा को सामने रखा। स्वस्थ रहने का अर्थ केवल शारीरिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य, संतुलित दिनचर्या, अनुशासन और जिम्मेदार जीवनशैली भी इसके अभिन्न अंग हैं। कार्यक्रम में ध्यान, कथक, जुम्बा और साइकिलिंग को एक साथ शामिल करना इसी समग्र सोच को दर्शाता है। ध्यान ने मानसिक संतुलन का संदेश दिया, सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया और साइकिल रैली ने सक्रिय जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा दी। नशामुक्त भारत की शपथ ने इन सभी गतिविधियों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ दिया। ऐसे आयोजनों की सार्थकता तभी पूरी होती है, जब उनका संदेश कार्यक्रम स्थल से निकलकर लोगों की दिनचर्या में जगह बनाए। युवाओं के लिए नियमित व्यायाम, खेलों में भागीदारी और नशीले पदार्थों से दूरी स्वस्थ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। परिवार, शैक्षणिक संस्थान और सामाजिक संगठन भी इस दिशा में सकारात्मक वातावरण बनाने में योगदान दे सकते हैं।

विकसित भारत की बुनियाद है स्वस्थ युवा शक्ति

भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। इस ताकत को राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए स्वस्थ, जागरूक और अनुशासित बनाना जरूरी है। नशामुक्ति का संदेश इसी व्यापक लक्ष्य से जुड़ा है। युवाओं को अपनी क्षमता पहचानने, खेलों में आगे बढ़ने और स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करना समय की आवश्यकता है। वाराणसी में आयोजित ‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ ने इसी सोच को केंद्र में रखा। गंगा किनारे ध्यान से शुरू हुई सुबह साइकिल रैली के साथ जनजागरण में बदल गई। एशियाई खेलों के पदक विजेताओं की मौजूदगी ने खेलों के प्रति आकर्षण बढ़ाया तो नशामुक्त भारत की शपथ ने सामाजिक प्रतिबद्धता को मजबूत किया। काशी से निकला यह संदेश स्पष्ट है—विकसित भारत का सपना केवल संसाधनों और आर्थिक उपलब्धियों से पूरा नहीं होगा। उसके लिए स्वस्थ शरीर, संतुलित मन और नशे से मुक्त युवा शक्ति भी चाहिए। साइकिल के पहियों पर आगे बढ़ा यह संकल्प युवाओं को अपनी सेहत की जिम्मेदारी लेने, सकारात्मक आदतें अपनाने और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य में सहभागी बनने की प्रेरणा देता है।

साइकिल के पहियों पर सवार हुआ नशामुक्त भारत का संकल्प

साइकिल के पहियों पर सवार हुआ नशामुक्त भारत का संकल्प  नमो घाट से संस्कृत विश्वविद्यालय तक गूंजा स्वस्थ युवा , सशक्त भारत...