एक्सपो में दिखा बदलता बाजार, नई वैरायटी के चक्कर में खंगाले गोदाम
स्टॉल-दर-स्टॉल कालीनों
की पड़ताल, पसंद नहीं आई तो निर्यातकों ने खरीदारों को गोदाम तक पहुंचाया
विदेशी खरीदारों और बाइंग
एजेंटों ने कारोबार को लेकर जताया उत्साह
225 स्टॉल, 35 देश और
189 खरीदार; भदोही में कालीन कारोबार का ग्लोबल कनेक्शन
दूसरे दिन 42 विदेशी खरीदार
और 65 बाइंग रिप्रेजेंटेटिव पहुंचे
हर स्टॉल पर नई डिजाइन,
रंग और कॉन्सेप्ट ने खींचा खरीदारों का ध्यान
50वें गोल्डन जुबली एक्सपो
में बढ़ी कारोबारी संभावनाएं
सुरेश गांधी
भदोही। इंडिया कार्पेट एक्सपो के दूसरे दिन कालीनों
की नई वैरायटी की तलाश में विदेशी खरीदारों ने स्टॉलों को सिर्फ देखा नहीं, बल्कि खंगाल
डाला। एक स्टॉल पर डिजाइन पसंद आई तो दूसरे पर रंग और तीसरे पर गुणवत्ता तलाशते नजर
आए। खरीदारों की नजर सिर्फ तैयार कालीन पर नहीं, बल्कि उस कलेक्शन पर थी जो उनके देश
और बाजार की पसंद के अनुरूप हो। कई खरीदारों ने एक ही स्टॉल पर रखे दर्जनों नमूनों
को उलट-पुलट कर देखा और पसंद के डिजाइन, रंग, आकार तथा गुणवत्ता की बारीकियां समझीं।
एक्सपो में स्टॉलों पर उपलब्ध वैरायटी
देखने के बाद भी जब कुछ खरीदारों की तलाश पूरी नहीं हुई तो कुछ निर्यातक उन्हें अपने
गोदामों तक लेकर गए। वहां मौजूद अतिरिक्त कलेक्शन, नई डिजाइन और अलग-अलग गुणवत्ता के
कालीन दिखाए गए। यानी एक्सपो का दायरा सिर्फ प्रदर्शनी स्थल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि
खरीदारों की पसंद के मुताबिक कारोबारी बातचीत गोदामों तक पहुंच गई। इससे यह भी संकेत
मिला कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अब खरीदार एक जैसी पारंपरिक डिजाइन के बजाय हर बार
कुछ नया तलाश रहे हैं। निर्यातकों ने भी इस बदलती मांग को समझते हुए नए रंग, डिजाइन,
आकार और आधुनिक पैटर्न के कलेक्शन तैयार किए हैं।
कारोबार को लेकर सकारात्मक माहौल
दो दिनों के दौरान विदेशी खरीदारों और
बाइंग एजेंटों की लगातार मौजूदगी से निर्यातक उत्साहित दिखे। स्टॉलों पर उत्पाद देखने,
कीमत, डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार की जरूरत पर बातचीत का सिलसिला चलता रहा। निर्यातकों
और बाइंग एजेंटों का कहना है कि एक्सपो में कारोबार का माहौल अच्छा है और आने वाले
दिनों में इसका असर नए ऑर्डरों के रूप में दिखाई दे सकता है। एक खरीदार ने कहा कि
“प्रत्येक स्टॉल एक नई और अलग अवधारणा प्रस्तुत कर रहा है, जो व्यापार के नए अवसर पैदा
कर रही है।” खरीदारों की यही तलाश भदोही के कालीन उद्योग के लिए सबसे
बड़ा संकेत है—बाजार अब सिर्फ कालीन नहीं, हर बार कुछ नया मांग रहा है।
बता दें, कालीन के धागों में बुनी भदोही
की पहचान अब वैश्विक बाजार में नए डिजाइन, बदलते रंग और कारोबारी संभावनाओं के साथ
अपनी नई जगह बना रही है। कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) के गोल्डन जुबली
50वें इंडिया कार्पेट एक्सपो के दूसरे दिन भी विदेशी खरीदारों और बाइंग रिप्रेजेंटेटिव्स
की आवाजाही तेज रही। एक-एक स्टॉल पर सजे अलग-अलग कलेक्शन ने न सिर्फ खरीदारों को आकर्षित
किया, बल्कि बदलते अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग और भारतीय निर्यातकों की तैयारी की
तस्वीर भी सामने रखी।
दो दिन में 189 विदेशी खरीदार
चार से सात अक्टूबर तक आयोजित एक्सपो
के पहले दो दिनों में 35 से अधिक देशों के करीब 189 विदेशी कालीन खरीदार पहुंच चुके
हैं। पहले दिन 147 और दूसरे दिन 42 विदेशी खरीदारों ने एक्सपो का दौरा किया। इनके अलावा
पहले दिन 146 और दूसरे दिन 65 समेत कुल 211 बाइंग रिप्रेजेंटेटिव्स भी पहुंचे। अर्जेंटीना,
ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, चिली, चीन, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस,
ग्वाटेमाला, इजराइल, इटली, जापान, कजाकिस्तान, केन्या, लेबनान, मैक्सिको, नेपाल, नीदरलैंड,
रूस, सऊदी अरब, सेनेगल, स्पेन, तुर्की, अमेरिका, यूक्रेन, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन
और उरुग्वे सहित कई देशों के खरीदारों की मौजूदगी ने एक्सपो को अंतरराष्ट्रीय कारोबारी
मंच का रूप दिया है।
डिजाइन से लेकर रंग और आकार तक बदला बाजार
एक्सपो में इस बार केवल पारंपरिक कालीन
ही आकर्षण का केंद्र नहीं हैं। निर्यातकों ने खरीदारों की जरूरत और अलग-अलग देशों की
पसंद के अनुसार नए आकार, आधुनिक डिजाइन, बदले हुए रंग संयोजन और अलग गुणवत्ता के कलेक्शन
पेश किए हैं। कहीं पारंपरिक भारतीय शिल्प की झलक है तो कहीं आधुनिक इंटीरियर के अनुरूप
मिनिमल डिजाइन। रग्स, फ्लोर-कवरिंग और हस्तनिर्मित कालीनों की विविधता यह संकेत दे
रही है कि भदोही का उद्योग अब केवल पारंपरिक बाजार पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक
उपभोक्ता की बदलती पसंद को समझकर उत्पाद तैयार कर रहा है। खरीदार स्टॉलों पर उत्पादों
की डिजाइन के साथ उसकी बुनाई, फिनिशिंग, रंग, आकार और गुणवत्ता को भी परखते नजर आए।
कारोबारियों के मुताबिक खरीदारों की बढ़ती रुचि आने वाले दिनों में नए ऑर्डर और नए
बाजारों के दरवाजे खोल सकती है।
न्यूजीलैंड की ऊन और अमेजन ग्लोबल पर चर्चा
एक्सपो में कारोबार के साथ ज्ञान और बाजार
विस्तार पर भी चर्चा हुई। काउंसिल की ओर से दो विशेष ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए गए।
पहले सत्र में “New Zealand Wool – Come to Meet Our Wool Growers” विषय पर
Woolworks की कमर्शियल डेवलपमेंट मैनेजर केटी रिचेस ने सदस्यों को न्यूजीलैंड की ऊन
की उपलब्धता और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। इससे भारतीय निर्माताओं और निर्यातकों
को कच्चे माल की गुणवत्ता तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी उपलब्धता को समझने का अवसर
मिला। दूसरे सत्र में Amazon Global की ओर से Head–New Seller Recruitment (India)
कुणाल खिलारे ने Amazon Global Seller Programme की जानकारी दी। डिजिटल प्लेटफॉर्म
के जरिए भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों को अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंचाने की संभावनाओं
पर सदस्यों को जानकारी दी गई।
डीएम ने परिवार संग देखा एक्सपो
भदोही के जिलाधिकारी शैलेश कुमार ने परिवार
के साथ एक्सपो का दौरा किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों पर प्रदर्शित उत्पादों को देखा
और नए डिजाइन तथा आकर्षक कलेक्शन की सराहना की। उन्होंने प्रदर्शकों के उत्पादों और
उनके प्रदर्शन को भी देखा।
कारीगरों की रोजी से जुड़ा 20 लाख का रोजगार
इंडिया कार्पेट एक्सपो सिर्फ कारोबार
का मंच नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा आयोजन है। हस्तनिर्मित कालीन
उद्योग देश के उन लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है, जिनकी मेहनत से धागा कालीन
का रूप लेता है। सरकार के संरक्षण में आयोजित यह एक्सपो ऐसे श्रम-प्रधान उद्योग को
वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रयास है। उद्योग से करीब 20 लाख श्रमिकों और कारीगरों
को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का दावा किया जाता है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों
की महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भागीदारी है।
एक छत के नीचे दुनिया का बाजार
225 से अधिक प्रदर्शकों की भागीदारी वाला
गोल्डन जुबली इंडिया कार्पेट एक्सपो एशिया के बड़े हस्तनिर्मित कालीन मेलों में शामिल
है। इसकी खासियत यह है कि विदेशी खरीदारों को एक ही छत के नीचे अलग-अलग गुणवत्ता, डिजाइन,
आकार और शैली के हस्तनिर्मित कालीन, रग्स और फ्लोर-कवरिंग उत्पाद देखने को मिल रहे
हैं। दो दिन की प्रतिक्रिया से आयोजक उत्साहित हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि एक्सपो
के शेष दिनों में खरीदारों की संख्या और बढ़ेगी तथा बातचीत ऑर्डर में बदलने के साथ
भदोही के कालीन कारोबार को नए अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेंगे।
दूसरे दिन का कारोबार कनेक्शन
42
विदेशी खरीदार
65
बाइंग रिप्रेजेंटेटिव्स
35+
देशों की भागीदारी
225+
प्रदर्शक
189 विदेशी खरीदारों की दो दिन में मौजूदगी
एक्सपो
में दिखा बदलता बाजार डिजाइन वही नहीं, मांग भी बदल रही
खरीदार
अब केवल पारंपरिक भारतीय कालीन नहीं देख रहे। वे आधुनिक डिजाइन, नए रंग संयोजन, अलग-अलग
आकार, गुणवत्ता और अपने बाजार के अनुरूप कलेक्शन तलाश रहे हैं।
डिजिटल बाजार पर भी नजर
अमेजन
ग्लोबल ने दिखाया नया रास्ता
एक्सपो
में Amazon Global Seller Programme पर विशेष सत्र ने निर्यातकों को ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय
बाजार तक पहुंच बनाने की संभावनाओं से परिचित कराया।
धागे से डॉलर तक
भदोही
के गांवों में बुना कालीन अब सिर्फ घरों की सजावट नहीं, बल्कि विदेशी बाजार में भारतीय
हस्तशिल्प की पहचान और ग्रामीण रोजगार का बड़ा माध्यम है।