रात बनारस में गुजारिए, सुबह दिल्ली में उतरिए!
काशी को
मिली
पहली
वंदे
भारत
स्लीपर
ट्रेन,
प्रयागराज
और
राजातालाब
के
लिए
मेमू
सेवाओं
की
सौगात;
रेल
मंत्री
का
दावा—प्रधानमंत्री
ने
नॉर्थ
कॉरिडोर
बुलेट
ट्रेन
को
दी
मंजूरी
तीन नई
रेल
सेवाओं
को
हरी
झंडी,
वाराणसी
से
दिल्ली
का
सफर
3 घंटे
33 मिनट
में
समेटने
का
प्रस्ताव
बनारस-प्रयागराज
रामबाग
और
बनारस-राजातालाब
के
बीच
मेमू
सेवा
से
दैनिक
यात्रियों,
विद्यार्थियों
और
कारोबारियों
को
राहत
रेल मंत्री
ने
बरेका
में
कर्मचारियों
के
साथ
कैंटीन
में
किया
भोजन,
चार
कर्मचारी
संगठनों
और
महिला
कर्मचारियों
से
भी
किया
संवाद
वाराणसी. काशी की रेल
यात्रा अब केवल एक
शहर से दूसरे शहर
पहुंचने का जरिया नहीं,
बल्कि बदलते भारत की रफ्तार
और भविष्य की कनेक्टिविटी का
नया अध्याय बनने जा रही
है। एक ओर रात
में बनारस से रवाना होकर
सुबह दिल्ली पहुंचाने वाली पहली वंदे
भारत स्लीपर ट्रेन की सौगात मिली,
तो दूसरी ओर प्रयागराज और
राजातालाब के लिए मेमू
सेवाओं ने स्थानीय यात्रियों
की राह आसान करने
का रास्ता खोला। इसी के साथ
बुलेट ट्रेन के नॉर्थ कॉरिडोर
को प्रधानमंत्री की मंजूरी मिलने
की रेल मंत्री की
घोषणा ने काशी के
सामने भविष्य की हाईस्पीड रेल
यात्रा का बड़ा खाका
भी रख दिया। केंद्रीय
रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा
इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी
मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ ने शनिवार को
मंडुआडीह रेलवे स्टेशन से वाराणसी-नई
दिल्ली वंदे भारत स्लीपर
ट्रेन समेत तीन नई
रेल सेवाओं को हरी झंडी
दिखाकर रवाना किया।
वंदे भारत स्लीपर
ट्रेन इस आयोजन का
सबसे बड़ा आकर्षण रही।
अब तक चेयरकार वंदे
भारत से दिन की
यात्रा करने वाले यात्रियों
को काशी से राष्ट्रीय
राजधानी के बीच रात
में सफर करने का
नया विकल्प मिला है। रेल
मंत्री ने कहा कि
इस ट्रेन में यात्रियों की
सुविधा के साथ लोको
पायलट और रेल कर्मचारियों
की जरूरतों का भी बारीकी
से ध्यान रखा गया है।
ट्रेन में बेहतर डिजाइन
वाली बर्थ, यात्रियों की आवाजाही को
सुविधाजनक बनाने वाली व्यवस्था और
स्टाफ के लिए अलग
सुविधाओं पर ध्यान दिया
गया है। इसका किराया
भी सामान्य यात्रियों और मध्यम वर्ग
की पहुंच को ध्यान में
रखकर रखने की बात
कही गई। मंत्री के
मुताबिक, यात्री रात में बनारस
से सफर शुरू कर
सुबह दिल्ली पहुंच सकेंगे। यह ट्रेन मेक
इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत
की सोच का उदाहरण
है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
इसे आध्यात्मिक राजधानी काशी को राष्ट्रीय
राजधानी से जोड़ने वाली
महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने
याद दिलाया कि 15 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी ने दिल्ली से
वाराणसी के बीच पहली
वंदे भारत चेयरकार ट्रेन
को हरी झंडी दिखाई
थी। अब स्लीपर संस्करण
के आने से लंबी
दूरी की रात्रिकालीन यात्रा
में एक नया विकल्प
जुड़ा है। उनके मुताबिक,
रेलवे में आधुनिक सुविधाओं
के विस्तार और यात्रियों की
सहूलियत के लिए लगातार
काम हो रहा है।
मेमू से छोटे सफर को मिलेगी बड़ी राहत
बड़े शहरों के
बीच तेज रफ्तार रेल
संपर्क के साथ स्थानीय
यात्रियों की जरूरतों को
भी इस आयोजन में
जगह मिली। बनारस-प्रयागराज रामबाग और बनारस-राजातालाब
के बीच मेमू सेवाओं
को भी हरी झंडी
दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने
कहा कि काशी से
प्रयागराज तक मेमू ट्रेनों
का संचालन दो आध्यात्मिक नगरों
के साथ शिक्षा के
महत्वपूर्ण केंद्रों को जोड़ने का
काम करेगा। इससे विद्यार्थियों, नौकरीपेशा
लोगों, व्यापारियों और रोजाना आवागमन
करने वाले यात्रियों को
लाभ मिलेगा। रेल मंत्री ने
कहा कि इन सेवाओं
के संचालन के लिए प्रधानमंत्री
ने स्वयं निर्देश दिए थे, ताकि
बनारस के नौजवानों, व्यापारियों
और किसानों को सुविधा मिल
सके। उन्होंने कार्यक्रम में 10 मेमू सर्विसेज के
उद्घाटन का उल्लेख किया।
मासिक सीजन टिकट के
किराये के बारे में
उन्होंने बताया कि वाराणसी से
राजातालाब के लिए 95 रुपये
और वाराणसी से प्रयागराज रामबाग
के लिए 220 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
कम किराये वाली यह सुविधा
नियमित यात्रियों के लिए आर्थिक
रूप से उपयोगी साबित
हो सकती है।
बुलेट ट्रेन के नक्शे पर काशी, दिल्ली 3:33 घंटे में!
कार्यक्रम में सबसे दूरगामी
घोषणा बुलेट ट्रेन के नॉर्थ कॉरिडोर
को लेकर रही। रेल
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस
कॉरिडोर को मंजूरी दे
दी है। प्रस्तावित मार्ग
में दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, पटना, सिलीगुड़ी और गुवाहाटी जैसे
शहरों को शामिल किया
गया है। मंत्री के
अनुसार, इस हाईस्पीड नेटवर्क
के बनने पर वाराणसी
से दिल्ली की यात्रा महज
3 घंटे 33 मिनट में पूरी
हो सकेगी। उन्होंने वाराणसी से लखनऊ के
लिए 1 घंटा 21 मिनट, पटना के लिए
एक घंटा और प्रयागराज
के लिए 33 मिनट की संभावित
यात्रा अवधि का भी
उल्लेख किया। यह घोषणा काशी
के लिए इसलिए भी
अहम है कि प्रस्तावित
मार्ग धार्मिक पर्यटन, शिक्षा, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों
के कई बड़े केंद्रों
को एक हाईस्पीड नेटवर्क
से जोड़ने की संभावना रखता
है। अयोध्या, काशी और प्रयागराज
जैसे धार्मिक नगरों के बीच संपर्क
मजबूत होने से पर्यटन
को नया विस्तार मिल
सकता है। वहीं कानपुर,
लखनऊ, पटना और पूर्वोत्तर
के शहरों से तेज संपर्क
व्यापार और रोजगार के
अवसरों को भी प्रभावित
कर सकता है। हालांकि,
मंत्री की घोषणा के
बाद अब इस कॉरिडोर
के विस्तृत तकनीकी खाके, अंतिम मार्ग, लागत, वित्तीय व्यवस्था और निर्माण की
समय-सीमा से जुड़ी
आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा।
घोषित यात्रा समय को प्रस्तावित
परियोजना की संभावित अवधि
के रूप में ही
देखा जाना चाहिए।
रेलवे बजट में बीस गुना बढ़ोतरी का दावा
रेल मंत्री ने
अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश
में रेलवे के बजट का
उल्लेख करते हुए कहा
कि जब प्रदेश में
समाजवादी पार्टी की सरकार और
केंद्र में कांग्रेस की
सरकार थी, तब उत्तर
प्रदेश को रेलवे के
लिए लगभग 1,100 करोड़ रुपये मिलते थे। आज यह
राशि बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपये
हो गई है। उन्होंने
इसे रेलवे के विस्तार और
आधुनिकीकरण की दिशा में
बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि वंचित
और मध्यम वर्ग के यात्रियों
की सुविधाओं का लगातार ध्यान
रखा जा रहा है।
भारतीय युवाओं, इंजीनियरों और तकनीकी कर्मियों
की भागीदारी से रेलवे को
आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर
दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
कहा कि भारतीय रेल
पूरब से पश्चिम और
उत्तर से दक्षिण तक
देश को जोड़ने का
माध्यम बन रही है।
प्रदेश में रेलवे लाइनों
के ब्रॉडगेज में परिवर्तन, रेलगाड़ियों
की गति बढ़ाने, फ्रेट
कॉरिडोर और रेलवे क्रॉसिंग
पर सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं से यात्रियों को
लाभ मिला है। उन्होंने
दावा किया कि उत्तर
प्रदेश के 157 रेलवे स्टेशनों पर आधुनिक सुविधाओं
का विस्तार किया गया है।
काशी के रेलवे स्टेशनों
और घाटों पर साफ-सफाई
तथा आधुनिक सुविधाओं का उल्लेख करते
हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री
के संकल्प के अनुरूप शहर
की बुनियादी सुविधाओं में बदलाव दिखाई
दे रहा है। मुख्यमंत्री
ने दीपावली और छठ पूजा
से पहले नई रेल
सेवाओं की शुरुआत को
स्थानीय लोगों के लिए उपयोगी
बताते हुए काशीवासियों को
धन्यवाद दिया। उन्होंने लौह पुरुष सरदार
वल्लभभाई पटेल की 151वीं
जयंती का उल्लेख करते
हुए कहा कि सरदार
पटेल ने अखंड भारत
के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान
दिया। भारतीय रेल भी देश
के विभिन्न हिस्सों को जोड़कर एकता
और एकीकरण की भावना को
मजबूत कर रही है।
बरेका में प्रोटोकॉल से परे दिखे रेल मंत्री
ट्रेनों के शुभारंभ के
बाद रेल मंत्री अश्विनी
वैष्णव ने बनारस रेल
इंजन कारखाना (बरेका) का भी दौरा
किया। यहां प्रशासनिक भवन
स्थित स्वागती हॉल में सरदार
वल्लभभाई पटेल के चित्र
पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित
किए। इसके बाद उन्होंने
औपचारिकता से अलग हटकर
कर्मचारी कैंटीन में कर्मचारियों के
साथ बैठकर दोपहर का भोजन किया।
इस दौरान उन्होंने कैंटीन के खान-पान,
भोजन की गुणवत्ता, कार्यस्थल
की सुविधाओं और कर्मचारियों के
अनुभवों व सुझावों के
बारे में जानकारी ली।
रेल मंत्री को अपने बीच
बैठकर भोजन करते और
सहजता से बातचीत करते
देख कर्मचारियों में उत्साह रहा।
उन्होंने बरेका कर्मचारी परिषद, एससी/एसटी एसोसिएशन,
बीएलडब्ल्यू मजदूर संघ और मेंस
कांग्रेस ऑफ बीएलडब्ल्यू के
प्रतिनिधियों से भी मुलाकात
की। कर्मचारी संगठनों ने अपनी समस्याओं,
मांगों और सुझावों से
संबंधित ज्ञापन सौंपे। मंत्री ने उनकी बातें
सुनीं और उचित सकारात्मक
कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बरेका में कार्यरत महिला
कर्मचारियों से भी उन्होंने
विशेष संवाद किया। महिला सशक्तिकरण, सुरक्षित एवं अनुकूल कार्यस्थल,
बेहतर सुविधाओं और रेलवे में
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
पर चर्चा की। उन्होंने रेलवे
की प्रगति में महिला कर्मचारियों
की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में श्रम एवं
सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, स्टाम्प
मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल, आयुष मंत्री डॉ.
दयाशंकर मिश्र दयालु, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, महापौर अशोक तिवारी, विधायक
डॉ. नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव, डॉ.
अवधेश सिंह, डॉ. सुनील पटेल,
जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, विधान
परिषद सदस्य तथा अन्य जनप्रतिनिधि
मौजूद रहे। प्रयागराज रामबाग
से उप मुख्यमंत्री केशव
प्रसाद मौर्य समेत कुछ जनप्रतिनिधि
वर्चुअल माध्यम से जुड़े। बरेका
दौरे के दौरान रेलवे
बोर्ड के अध्यक्ष एवं
मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश कुमार, बरेका
के महाप्रबंधक आशुतोष पंत, प्रमुख विभागाध्यक्ष,
वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी संगठनों
के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। एक ही
दिन में काशी को
मिली रेल सुविधाओं की
तीन परतें—रात की लंबी
दूरी की यात्रा के
लिए स्लीपर ट्रेन, रोजमर्रा के सफर के
लिए मेमू और आने
वाले समय में हाईस्पीड
कनेक्टिविटी का प्रस्ताव। अब
इन घोषणाओं की असली कसौटी
इनके समयबद्ध क्रियान्वयन और यात्रियों को
मिलने वाली वास्तविक सुविधा
होगी।


