Thursday, 4 June 2026

हरित क्रांति का संकल्प: संकट मोचन से उठी पर्यावरण बचाने की हुंकार

हरित क्रांति का संकल्प: संकट मोचन से उठी पर्यावरण बचाने की हुंकार 

विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने किया वृहद वृक्षारोपण, छात्रों और समाज को दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

सुरेश गांधी

वाराणसी। बढ़ते तापमान, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय संकट के बीच काशी से हरित क्रांति की एक मजबूत पहल सामने आई। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर संकट मोचन फाउंडेशन और मदर्स फॉर मदर के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को शहर में वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। अभियान का शुभारंभ संकट मोचन मंदिर के महंत एवं संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने पौधरोपण कर किया। उन्होंने कहा कि पेड़ लगाना आज केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व को बचाने की आवश्यकता बन चुका है।

अभियान के तहत नगवा स्थित तुलसी विद्या निकेतन (टीवीएन) परिसर और संकट मोचन मंदिर परिसर में विभिन्न प्रजातियों के छायादार, फलदार और औषधीय पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने कहा कि जिस गति से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, उससे भविष्य की पीढ़ियों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में वृक्षारोपण ही प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे केवल पौधे लगाएं ही नहीं, बल्कि उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी निभाएं।

कार्यक्रम में पूर्व आईआईटी-बीएचयू निदेशक प्रो. एस.एन. उपाध्याय, बीएचयू के प्रो. एन.के. दुबे, अदिति मिश्रा, सुमेधा मिश्रा, तुलसी विद्या निकेतन के प्रधानाचार्य एस.एन. श्रीवास्तव सहित अनेक शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे। विद्यालय के छात्रों ने भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों के माध्यम से जागरूकता का संकल्प दोहराया। आयोजकों ने कहा कि आज लगाए गए पौधे आने वाले वर्षों में स्वच्छ हवा, हरियाली और स्वस्थ जीवन का आधार बनेंगे। अभियान के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। काशी से शुरू हुई यह हरित पहल आने वाले दिनों में व्यापक जनभागीदारी का आधार बनेगी।


बाबा के दरबार में श्रद्धालु की बिगड़ी तबीयत, इलाज के बावजूद नहीं बच सकी जान

बाबा के दरबार में श्रद्धालु की बिगड़ी तबीयत, इलाज के बावजूद नहीं बच सकी जान

काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन के दौरान अचानक हुए अचेत, मंदिर कर्मियों ने तत्काल पहुंचाई चिकित्सा सहायता, मंडलीय अस्पताल में उपचार के दौरान हुई मृत्यु

सुरेश गांधी

वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम में गुरुवार दोपहर दर्शन के लिए पहुंचे राजस्थान के जयपुर निवासी 64 वर्षीय श्रद्धालु रामप्रकाश शर्मा की अचानक तबीयत बिगड़ने से मृत्यु हो गई। मंदिर प्रशासन के अनुसार श्रद्धालु दर्शन के दौरान अस्वस्थ होकर गिर पड़े, जिसके बाद धाम परिसर में तैनात कर्मियों ने तत्काल उन्हें प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया और एंबुलेंस से मंडलीय अस्पताल कबीरचैरा भेजा गया।

मंदिर प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार दोपहर करीब 2.15 बजे श्रद्धालु रामप्रकाश शर्मा अचानक चक्कर खाकर गिर गए। सूचना मिलते ही धाम परिसर में मौजूद सुरक्षा एवं सेवा कर्मी तत्काल मौके पर पहुंचे और आवश्यक सहायता प्रदान की। स्थिति को देखते हुए बिना देर किए उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से उपचार के लिए कबीरचैरा स्थित शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय भेजा गया।

अस्पताल में चिकित्सकों ने उनका परीक्षण कर आवश्यक उपचार शुरू किया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी हालत गंभीर हो गई। बाद में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रशासन के मुताबिक घटना की जानकारी तत्काल स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को दे दी गई।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालु को अस्वस्थ होने के तुरंत बाद प्राथमिक चिकित्सा और एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई गई तथा पूरे प्रकरण में आवश्यक प्रक्रिया का पालन किया गया। मृतक अपने परिवार के साथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए वाराणसी आए थे।

घटना के बाद प्रशासन ने परिजनों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया। पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियमानुसार आवश्यक विधिक और चिकित्सीय कार्रवाई की जा रही है। मृत्यु के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।

धाम में मौजूद है त्वरित चिकित्सा व्यवस्था

श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए चिकित्सा सहायता, एंबुलेंस सेवा तथा प्रशिक्षित कर्मियों की व्यवस्था उपलब्ध है। किसी भी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने की स्थिति में तत्काल प्राथमिक उपचार और अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। गुरुवार की घटना में भी कर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए श्रद्धालु को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई।

सूर्य ऊर्जा में यूपी का जलवा, देश में बजा डंका

सूर्य ऊर्जा में यूपी का जलवा, देश में बजा डंका 

पीएम सूर्य घर योजना में कई श्रेणियों में अव्वल, लखनऊ बना देश का नंबर-1 सोलर जिला

सुरेश गांधी

लखनऊ. उत्तर प्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। नई दिल्ली में आयोजित "पीएम सूर्य घर पुरस्कार समारोह" में प्रदेश ने कई महत्वपूर्ण श्रेणियों में शीर्ष स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास के लक्ष्य की दिशा में वह तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश की इस उपलब्धि ने न केवल देशभर का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा कर दिया है।

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत देशभर में हुए सोलर इंस्टॉलेशन के आधार पर उत्तर प्रदेश को "टॉप थ्री स्टेट इंस्टॉलेशन" श्रेणी में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। इस श्रेणी में गुजरात पहले स्थान पर रहा, जबकि उत्तर प्रदेश ने अपने विशाल उपभोक्ता आधार और तेजी से बढ़ते सोलर नेटवर्क के बल पर राष्ट्रीय मंच पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई। सबसे बड़ी उपलब्धि जिला स्तर पर सामने आई, जहां राजधानी लखनऊ ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया। लखनऊ में 1,02,596 सोलर इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए, जो देश के किसी भी जिले में सबसे अधिक हैं। दूसरे स्थान पर रहे नागपुर में 89,255 इंस्टॉलेशन हुए। यह आंकड़ा बताता है कि शहरी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा को अपनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश ने प्रभावी कार्य किया है।

राज्य को "वेरी हाई कंज्यूमर बेस" श्रेणी में भी पहला स्थान प्राप्त हुआ। इसके अलावा सर्वाधिक उपभोक्ता आवेदन, सर्वाधिक सोलर इंस्टॉलेशन और अधिकतम वेंडर रजिस्ट्रेशन जैसी महत्वपूर्ण श्रेणियों में भी प्रदेश ने देश में शीर्ष स्थान हासिल किया। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह उपलब्धि राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जनजागरूकता और तकनीकी सुविधाओं के विस्तार का परिणाम है। ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए. के. शर्मा ने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। सौर ऊर्जा के माध्यम से न केवल बिजली उत्पादन बढ़ रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लक्ष्य भी पूरे हो रहे हैं।

श्री शर्मा ने प्रदेश के अधिकारियों, डिस्कॉम कर्मियों, वेंडरों तथा योजना से जुड़े लाखों लाभार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए और व्यापक अभियान चलाएगी ताकि प्रत्येक घर तक स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा पहुंचाई जा सके। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज सौर ऊर्जा क्रांति का अग्रदूत बनकर उभरा है। आने वाले समय में प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यूपी की बड़ी उपलब्धियां

पीएम सूर्य घर योजना में देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल

"वेरी हाई कंज्यूमर बेस" श्रेणी में प्रथम स्थान

सर्वाधिक उपभोक्ता आवेदन में देश में नंबर-1

सर्वाधिक सोलर इंस्टॉलेशन में प्रथम स्थान

सर्वाधिक वेंडर रजिस्ट्रेशन में भी अव्वल

लखनऊ बना देश का नंबर-1 सोलर जिला

1.02 लाख से अधिक सोलर इंस्टॉलेशन के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड

"उत्तर प्रदेश आज सौर ऊर्जा क्रांति का अग्रदूत बनकर उभरा है। प्रदेश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने और स्वच्छ ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा।" — ए. के. शर्मा, ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री, उत्तर प्रदेश

होटलों पर पुलिस की सख्ती, हर मेहमान का होगा सत्यापन

होटलों पर पुलिस की सख्ती, हर मेहमान का होगा सत्यापन 

सीसीटीवी, फायर सेफ्टी और साइबर जागरूकता पर जोर

अवैध गतिविधियों की सूचना तत्काल देने की अपील

बड़ागांव में होटल संचालकों की गोष्ठी, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत देने के निर्देश

सुरेश गांधी

वाराणसी। पर्यटन और होटल व्यवसाय से जुड़े प्रतिष्ठानों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए गोमती जोन पुलिस ने होटल एवं गेस्ट हाउस संचालकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। अपर पुलिस उपायुक्त गोमती जोन नृपेन्द्र ने बड़ागांव थाना क्षेत्र के होटल संचालकों के साथ बैठक कर कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और साइबर अपराधों की रोकथाम को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए।

बैठक में कहा गया कि सभी होटल एवं गेस्ट हाउस वैध लाइसेंस के तहत ही संचालित किए जाएं और परिसर में लाइसेंस स्पष्ट रूप से प्रदर्शित रहे। होटल में ठहरने वाले प्रत्येक व्यक्ति का वैध पहचान पत्र के आधार पर सत्यापन और रजिस्टर में अनिवार्य प्रविष्टि सुनिश्चित की जाए। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति अथवा गतिविधि की जानकारी तत्काल स्थानीय पुलिस को देने के निर्देश दिए गए।

अपर पुलिस उपायुक्त ने होटल परिसर और आसपास उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा उनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सीसीटीवी फुटेज तत्काल पुलिस को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

बैठक में अग्नि सुरक्षा को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया। होटलों में फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता, नियमित जांच, प्रशिक्षित स्टाफ तथा स्पष्ट रूप से चिन्हित इमरजेंसी एग्जिट बनाए रखने के निर्देश दिए गए। साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता पोस्टर लगाने तथा डिजिटल लेन-देन में सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई।

यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए होटलों के आसपास व्यवस्थित पार्किंग सुनिश्चित करने तथा स्वच्छता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध या अराजक गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दी जाए, जिससे समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

होटल संचालकों के लिए प्रमुख निर्देश

हर मेहमान का अनिवार्य सत्यापन

वैध लाइसेंस का प्रदर्शन

सीसीटीवी कैमरे व रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना

फायर सेफ्टी उपकरण और इमरजेंसी एग्जिट अनिवार्य

संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को देना

साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना

होटल परिसर में सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करना

मौत के मुहाने पर तीर्थनगरियां : क्या सिस्टम को अगली त्रासदी का इंतजार है?

मौत के मुहाने पर तीर्थनगरियां : क्या सिस्टम को अगली त्रासदी का इंतजार है

दिल्ली में 21 लोग आग से नहीं मरे, वे उस व्यवस्था के शिकार हुए जो हादसों के बाद जागती है और समय बीतते ही फिर सो जाती है। मालवीय नगर के एक भवन में लगी आग ने केवल 21 जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि देश के धार्मिक और पर्यटन नगरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जिस इमारत को छह कमरों की अनुमति थी, वहां 25 कमरे चल रहे थे। फायर एनओसी नहीं थी, आपातकालीन निकास नहीं था और जिम्मेदार एजेंसियां वर्षों तक अनजान बनी रहीं। यह कहानी सिर्फ दिल्ली की नहीं है। आज वाराणसी की गलियों से लेकर अयोध्या के नए होटल कॉरिडोर और प्रयागराज के तीर्थ क्षेत्रों तक, हजारों होटल, धर्मशालाएं, होम-स्टे और पेइंग गेस्ट हाउस श्रद्धालुओं से भरे रहते हैं। पर्यटन और आस्था के बढ़ते दबाव के बीच कमरों की संख्या तो बढ़ी, लेकिन क्या सुरक्षा भी उतनी ही बढ़ी? क्या संकरी गलियों, पुराने भवनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में किसी संभावित आपदा से निपटने की तैयारी है? या फिर हम एक और त्रासदी का इंतजार कर रहे हैं? दिल्ली की आग ने एक बार फिर याद दिलाया है कि जब नियम कागजों तक सीमित हो जाएं, तब हादसे नहीं होते, व्यवस्थाएं लोगों की जान लेती हैं. मतलब साफ है दिल्ली की आग ने जो सवाल उठाए हैं, उनका जवाब वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज को देना होगा

सुरेश गांधी

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी आग में 21 लोगों की मौत ने देश को झकझोर दिया है। लेकिन यह केवल एक होटल में लगी आग की कहानी नहीं है। यह उस व्यवस्था का आईना है जिसमें नियम बनाए जाते हैं, फाइलों में दर्ज होते हैं, निरीक्षण भी होते हैं, लेकिन जमीन पर सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है। जांच में सामने आया कि जिस प्रतिष्ठान को छह कमरों के लिए अनुमति मिली थी, वहां 25 कमरे संचालित हो रहे थे। फायर एनओसी नहीं थी, आपातकालीन निकास नहीं था और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा था। सवाल यह है कि यह सब एक दिन में नहीं हुआ होगा। फिर जिम्मेदार एजेंसियों को यह सब दिखाई क्यों नहीं दिया? यह प्रश्न केवल दिल्ली का नहीं है। यह प्रश्न वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा, वृंदावन और हरिद्वार जैसे उन धार्मिक नगरों का भी है जहां हर दिन लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। जहां होटल, धर्मशालाएं, होम-स्टे और पेइंग गेस्ट हाउस तेजी से बढ़ रहे हैं। जहां पर्यटन विकास की दौड़ तो तेज है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था उसी अनुपात में मजबूत हुई है या नहीं, इसका उत्तर किसी के पास नहीं है।

विकास की चमक के पीछे छिपा खतरा

पिछले कुछ वर्षों में देश के धार्मिक पर्यटन का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में राम मंदिर, प्रयागराज महाकुंभ और मथुरा-वृंदावन के विस्तार ने करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित किया है। यह बदलाव आर्थिक दृष्टि से स्वागतयोग्य है। स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है, होटल उद्योग बढ़ा है, व्यापार में तेजी आई है। लेकिन इसी विकास ने एक नया संकट भी पैदा किया है। कम समय में अधिक से अधिक पर्यटकों को ठहराने की होड़ ने अनेक शहरों में आवासीय भवनों को व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया। पुराने मकान गेस्ट हाउस बन गए, घर होम-स्टे बन गए और पेइंग गेस्ट हाउसों की संख्या तेजी से बढ़ गई। यह स्वाभाविक भी था क्योंकि मांग बढ़ रही थी। लेकिन क्या इसके साथ सुरक्षा मानकों की भी उतनी ही गंभीरता से समीक्षा हुई? यही वह प्रश्न है जो दिल्ली की त्रासदी के बाद सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

काशी की गलियां और सुरक्षा की चुनौती

वाराणसी की पहचान उसकी प्राचीनता, संस्कृति और गलियों से है। लेकिन यही गलियां किसी बड़े हादसे के समय सबसे बड़ी चुनौती भी बन सकती हैं। गोदौलिया, दशाश्वमेध, चौक, विश्वनाथ गली, सोनारपुरा, शिवाला और अस्सी जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में होटल, धर्मशालाएं और पेइंग गेस्ट हाउस संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई भवन दशकों पुराने हैं। अनेक स्थानों पर पहुंच मार्ग इतने संकरे हैं कि दमकल वाहन पहुंचना कठिन हो जाता है। यदि किसी बहुमंजिला भवन में रात के समय आग लग जाए तो बचाव कार्य कितना आसान होगा, इसकी कल्पना ही भयावह है। आज जरूरत यह पूछने की है कि कितने प्रतिष्ठानों का नियमित फायर ऑडिट होता है? कितनों में कार्यशील अग्निशमन यंत्र हैं? कितनों के पास वैकल्पिक निकास मार्ग है? और कितने भवन स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप हैं?

अयोध्या की नई चुनौती

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद पर्यटन और तीर्थाटन का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। हजारों नए कमरे तैयार किए गए हैं। नए होटल, धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस खुले हैं। लेकिन विकास की यह रफ्तार अपने साथ नई जिम्मेदारियां भी लेकर आई है। यदि भवन निर्माण, अग्निशमन सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था और आपदा प्रबंधन पर कठोर निगरानी नहीं होगी तो भीड़ और निर्माण का यह दबाव किसी भी दिन संकट का कारण बन सकता है। दिल्ली की घटना ने यही चेतावनी दी है कि केवल भवन बना देने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती।

पेइंग गेस्ट हाउस मॉडल की समीक्षा जरूरी

कॉमनवेल्थ गेम्स के समय शुरू हुई बेड एंड ब्रेकफास्ट नीति का उद्देश्य अच्छा था। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिला और स्थानीय लोगों को आय का स्रोत मिला। लेकिन जब निगरानी कमजोर होती है तो अच्छी नीतियां भी दुरुपयोग का शिकार हो जाती हैं। आज वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे शहरों में बड़ी संख्या में पेइंग गेस्ट हाउस संचालित हो रहे हैं। यह व्यवस्था पर्यटन के लिए उपयोगी है, लेकिन इसकी नियमित जांच और सुरक्षा मूल्यांकन उतना ही आवश्यक है। यदि कोई भवन कागजों में छह कमरों का है और व्यवहार में बीस कमरों का संचालन कर रहा है तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि संभावित खतरे को आमंत्रण देना है।

हर हादसे के बाद वही कहानी

देश का दुर्भाग्य यह है कि हर बड़े हादसे के बाद हमारी प्रतिक्रिया लगभग एक जैसी होती है। जांच समिति बनती है। एफआईआर दर्ज होती है। कुछ अधिकारियों का निलंबन होता है। मुआवजे की घोषणा होती है। मीडिया में चर्चा होती है। फिर धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य हो जाता है। उपहार सिनेमा अग्निकांड से लेकर करोलबाग होटल, अनाज मंडी, मुंडका और अब दिल्ली के ताजा हादसे तक हर बार जांच रिपोर्टों ने सुरक्षा में गंभीर खामियां उजागर की हैं। लेकिन क्या हमने उनसे स्थायी सबक सीखा? दुर्भाग्य से जवाब उत्साहजनक नहीं है। धार्मिक नगरों में खतरा अधिक क्यों? धार्मिक शहरों की प्रकृति उन्हें विशेष रूप से संवेदनशील बनाती है। पहला, यहां भीड़ अत्यधिक होती है। सावन, देव दीपावली, रामनवमी, कुंभ, कार्तिक पूर्णिमा और अन्य पर्वों पर लाखों लोग एक साथ पहुंचते हैं। दूसरा, अधिकांश धार्मिक नगरों के पुराने हिस्से घनी आबादी और संकरी गलियों वाले हैं। तीसरा, आवासीय भवनों का व्यावसायिक उपयोग तेजी से बढ़ा है। इन तीनों कारणों का संयोजन किसी भी आपदा को और गंभीर बना सकता है।

अब कार्रवाई का समय है, प्रतीक्षा का नहीं

दिल्ली की आग को केवल एक स्थानीय घटना मानना बड़ी भूल होगी। यह एक राष्ट्रीय चेतावनी है। विशेष रूप से उन शहरों के लिए जहां हर दिन लाखों लोग आस्था के साथ पहुंचते हैं। वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज में होटल, धर्मशाला, होम-स्टे और पेइंग गेस्ट हाउसों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए। फायर सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा, भवन मानचित्र, निकास व्यवस्था और वास्तविक क्षमता की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। यह कार्रवाई किसी हादसे के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले होनी चाहिए। क्योंकि किसी भी सभ्य समाज की पहचान यह नहीं है कि वह हादसे के बाद कितनी तेजी से जांच करता है। उसकी पहचान यह है कि वह हादसों को होने से पहले रोकने के लिए कितना सजग है। दिल्ली की आग में 21 लोग मारे गए। उनके लिए अब कोई सुधार, कोई जांच और कोई आदेश मायने नहीं रखता। लेकिन यदि इस त्रासदी से भी हम नहीं चेते, तो अगली आग केवल किसी इमारत को नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक लापरवाही को फिर बेनकाब करेगी। और तब शायद फिर वही प्रश्न गूंजेगाक्या सिस्टम को अगली लाशों का इंतजार था?

ये हादसे नहीं, व्यवस्था की हत्याएं हैं

दिल्ली का अग्निकांड कोई पहला मामला नहीं है। 1997 में उपहार सिनेमा अग्निकांड में 59 लोगों की मौत। 2011 में कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल में 90 से अधिक लोगों की मौत। 2019 में करोलबाग होटल अग्निकांड में 17 लोगों की मौत। 2019 में अनाज मंडी फैक्ट्री अग्निकांड में 43 लोगों की मौत। 2022 में मुंडका फैक्ट्री हादसे में दर्जनों लोगों की मौत। 2026 में दिल्ली के फ्लूरिश स्टे में 21 लोगों की मौत। हर जांच रिपोर्ट में लगभग एक जैसी बातें सामने आईंअवैध निर्माण, बंद निकास, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक ढिलाई।

कागजों में जांच, जमीन पर धंधा

हर बड़े हादसे के बाद वही क्रम दोहराया जाता हैमजिस्ट्रेटी जांच. एफआईआर. निलंबन. मुआवजे की घोषणा. विशेष जांच अभियान. लेकिन कुछ महीनों बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है। नियम फिर टूटते हैं, निरीक्षण फिर कमजोर पड़ जाते हैं और अगली त्रासदी की जमीन तैयार होने लगती है। यही कारण है कि दिल्ली की आग के बाद सबसे बड़ा सवाल किसी एक होटल का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम का है।

धार्मिक शहरों में खतरा अधिक क्यों?

धार्मिक नगरों में जोखिम कई गुना बढ़ जाता है क्योंकित्योहारों और विशेष आयोजनों में क्षमता से कई गुना अधिक भीड़ उमड़ती है। पुराने शहरों की गलियां संकरी और घनी आबादी वाली हैं। बड़ी संख्या में आवासीय भवनों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। आपदा की स्थिति में निकासी और बचाव अभियान जटिल हो जाता है।

पड़ताल

दिल्ली में 21 लोग केवल आग से नहीं मरे। वे नियमों की अनदेखी, कमजोर निगरानी, बंद निकास, सुरक्षा मानकों की अवहेलना और प्रशासनिक उदासीनता के शिकार हुए। यदि वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज और अन्य तीर्थनगरियों में होटल, धर्मशालाओं, होम-स्टे और पेइंग गेस्ट हाउसों का स्वतंत्र और व्यापक सुरक्षा ऑडिट आज नहीं हुआ, तो अगली बड़ी खबर किसी और शहर से सकती है। सवाल यह नहीं कि अगला हादसा होगा या नहीं। सवाल यह है कि क्या सिस्टम उसके होने का इंतजार कर रहा है?

चेतावनी देते आंकड़े : 29 साल में बड़े अग्निकांड, सैकड़ों मौतें

वर्ष         घटना                                                                    मृतक

1997       उपहार सिनेमा, दिल्ली                                        59

2011       एएमआरआई अस्पताल, कोलकाता                90+

2019       होटल अर्पित पैलेस, दिल्ली                                17

2019       अनाज मंडी फैक्ट्री, दिल्ली                                 43

2022       मुंडका फैक्ट्री                                                       दर्जनों

2026       फ्लूरिश स्टे, दिल्ली                                               21

हरित क्रांति का संकल्प: संकट मोचन से उठी पर्यावरण बचाने की हुंकार

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