Thursday, 12 February 2026

काशी के स्वाभिमान की आवाज़ बने अजीत सिंह बग्गा

काशी के स्वाभिमान की आवाज़ बने अजीत सिंह बग्गा 

भारतीय जन क्रांति परिषद (आस्था) ने वाराणसी व्यापार मंडल अध्यक्ष को सौंपी राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी, व्यापारियों सामाजिक संगठनों में हर्ष की लहर

सुरेश गांधी

वाराणसी. धर्म, संस्कृति और व्यापारिक परंपराओं की समृद्ध विरासत को संजोए काशी की धरती से एक और महत्वपूर्ण सामाजिक-संगठनात्मक संदेश सामने आया है। भारतीय जन क्रांति परिषद (आस्था) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कन्हैया महराज द्वारा वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा को राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में मनोनीत किए जाने की घोषणा ने व्यापारिक और सामाजिक जगत में नई ऊर्जा का संचार कर दिया है। इस निर्णय को काशी के व्यापारिक समुदाय के साथ-साथ सामाजिक संगठनों ने सकारात्मक और दूरगामी महत्व का बताया है।

अजीत सिंह बग्गा काशी के उन प्रतिष्ठित नागरिकों में शामिल हैं, जिन्होंने व्यापारिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी समान प्राथमिकता दी है। उनके नेतृत्व में वाराणसी व्यापार मंडल ने कई अवसरों पर व्यापारियों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाया और समाधान के लिए प्रशासन सरकार के साथ संवाद कायम किया। उनका व्यक्तित्व संघर्षशील, जुझारू और संगठनात्मक कौशल से परिपूर्ण माना जाता रहा है। यही कारण है कि व्यापारिक समाज में उनकी मजबूत पकड़ और विश्वसनीयता स्थापित है।

भारतीय जन क्रांति परिषद (आस्था) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कन्हैया महराज ने इस मनोनयन के माध्यम से संगठन की विचारधारा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी बग्गा को सौंपी है। संगठन का मानना है कि बग्गा के अनुभव, स्पष्ट वक्तृत्व शैली और जनसंपर्क कौशल से परिषद की नीतियों उद्देश्यों को व्यापक समाज तक पहुंचाने में नई गति मिलेगी।

यह नियुक्ति पत्र राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष त्रिपाठी द्वारा अध्यक्ष के निर्देश पर जारी किया गया। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि परिषद देश में सांस्कृतिक जागरूकता, सामाजिक समरसता और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में अजीत सिंह बग्गा जैसे अनुभवी और सक्रिय व्यक्तित्व का राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में चयन संगठन की रणनीतिक मजबूती को दर्शाता है।

काशी के व्यापारिक समुदाय में इस घोषणा के बाद खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। व्यापारियों ने इसे काशी के सम्मान और प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा है। उनका मानना है कि बग्गा की सक्रियता और नेतृत्व क्षमता केवल व्यापारिक हितों को मजबूती देगी बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर भी काशी की आवाज को बुलंद करेगी।

सामाजिक दृष्टि से यह मनोनयन काशी के उस परंपरागत मूल भाव को भी रेखांकित करता है, जहां व्यापार केवल आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि समाज सेवा का माध्यम भी माना जाता है। अजीत सिंह बग्गा की पहचान एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में रही है, जो व्यापारिक दायित्वों के साथ सामाजिक उत्तरदायित्वों को भी गंभीरता से निभाते आए हैं।

भारतीय जन क्रांति परिषद (आस्था) द्वारा लिया गया यह निर्णय संगठनात्मक विस्तार और सामाजिक सहभागिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। काशी जैसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगर से जुड़े व्यक्तित्व को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी सौंपना संगठन की दूरदर्शिता और सामाजिक समावेशिता का संकेत भी है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अजीत सिंह बग्गा राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में संगठन की विचारधारा, सामाजिक प्रतिबद्धता और जनहित के मुद्दों को किस प्रकार राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करते हैं। फिलहाल, काशी के व्यापारिक और सामाजिक समाज में इस निर्णय को सम्मान और विश्वास की नई पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

सम्मान की तलवार, सेवा का संकल्प : केंट इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा को व्यापार मंडल ने किया गौरवान्वित

सम्मान की तलवार, सेवा का संकल्प : केंट इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा को व्यापार मंडल ने किया गौरवान्वित 

राष्ट्रपति पदक से सम्मानित होने पर व्यापारियों ने जताया गर्व, मालाओं और अंगवस्त्र के साथ भेंट की प्रतीकात्मक तलवार

कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और अन्याय के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए इंस्पेक्टर मिश्रा की सराहना

सुरेश गांधी

वाराणसी. काशी की धरती सदैव से सम्मान, परंपरा और साहस के प्रतीकों को संजोए रखने के लिए जानी जाती रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वाराणसी व्यापार मंडल ने केंट थाना प्रभारी इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा को उनके उत्कृष्ट कार्यों और राष्ट्रसेवा के लिए मिले राष्ट्रपति पदक के उपलक्ष्य में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया। यह सम्मान समारोह केवल एक अधिकारी के कार्यों की सराहना का अवसर बना, बल्कि समाज और प्रशासन के बीच मजबूत विश्वास और समन्वय का भी प्रतीक बनकर सामने आया।

व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा के नेतृत्व में व्यापार मंडल के पदाधिकारियों और सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल केंट थाना पहुंचा, जहां उन्होंने इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा को मालाओं से लादकर, अंगवस्त्र ओढ़ाकर और सम्मान स्वरूप तलवार भेंट कर गौरवान्वित किया। तलवार भेंट करने की परंपरा वीरता, न्याय और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक मानी जाती है, जो शिवाकांत मिश्रा के कर्तव्यनिष्ठ और निर्भीक व्यक्तित्व को दर्शाती है।

इस अवसर पर व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा ने कहा कि इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा ने अपने कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ व्यापारियों की सुरक्षा और समस्याओं के समाधान के लिए सदैव तत्परता दिखाई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे वाराणसी के लिए गौरव का विषय है। यह सम्मान उनकी ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता और साहसिक निर्णयों का प्रमाण है।

व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि शिवाकांत मिश्रा की कार्यशैली तेजतर्रार, निष्पक्ष और जनहितकारी रही है। उन्होंने अपराध और अन्याय के खिलाफ जिस दृढ़ता से कार्रवाई की है, उससे समाज में सुरक्षा और विश्वास की भावना मजबूत हुई है। व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी वह इसी समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ समाज की सेवा करते रहेंगे और वाराणसी का नाम रोशन करेंगे। सम्मान समारोह के दौरान व्यापार मंडल के प्रमुख पदाधिकारी संजय गुप्ता, मनीष गुप्ता, राजीव वर्मा, अरविंद जायसवाल, राधेश्याम लोहिया, प्रिया अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे। सभी ने इंस्पेक्टर मिश्रा के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित व्यापारियों ने कहा कि जब प्रशासन और समाज एक साथ खड़े होते हैं, तब शहर की व्यवस्था और विकास की दिशा और अधिक सशक्त होती है। इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा जैसे अधिकारी केवल कानून व्यवस्था के प्रहरी हैं, बल्कि समाज के भरोसे और न्याय के स्तंभ भी हैं। यह सम्मान समारोह वाराणसी में प्रशासन और व्यापारिक समाज के बीच मजबूत समन्वय और पारस्परिक विश्वास का संदेश देता है, जो शहर की सुरक्षा और विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रपति पदक से सम्मानित इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा की कार्यशैली आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और यह सम्मान उनके सेवा पथ को और अधिक ऊर्जा प्रदान करेगा।

सरला माहेश्वरी : सादगी, विश्वसनीयता और गरिमा की वह आवाज, जो एक युग की पहचान बन गई...

स्क्रीन से स्मृतियों तक अमिट उपस्थिति

सरला माहेश्वरी : सादगी, विश्वसनीयता और गरिमा की वह आवाज, जो एक युग की पहचान बन गई... 

कुछ आवाज़ें केवल सूचना नहीं देतीं, वे समय का दस्तावेज़ बन जाती हैं। सरला माहेश्वरी उन्हीं दुर्लभ आवाज़ों में शामिल थीं, जिन्होंने समाचार पढ़ने की परंपरा को केवल पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का स्वरूप दिया। वे उस दौर की प्रतिनिधि थीं, जब समाचार प्रस्तुति में चमक-दमक नहीं, बल्कि गंभीरता, गरिमा और विश्वसनीयता का वर्चस्व हुआ करता था। सरला माहेश्वरी का चेहरा केवल दूरदर्शन की स्क्रीन पर दिखने वाला चेहरा नहीं था, बल्कि वह करोड़ों भारतीय परिवारों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। उनकी सधी हुई वाणी, संतुलित भाव-भंगिमा और सादगी से सजी उपस्थिति यह भरोसा दिलाती थी कि जो शब्द उनके होंठों से निकल रहे हैं, वे केवल खबर नहीं बल्कि तथ्य और विश्वास की धरोहर हैं। उस समय जब सूचना के साधन सीमित थे, तब उनके माध्यम से देश-दुनिया की हलचलें घर-घर तक पहुंचती थीं 

सुरेश गांधी

भारतीय पत्रकारिता और दूरदर्शन के स्वर्णिम इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय अब स्मृतियों में दर्ज हो गया है। दूरदर्शन की जानी-मानी वरिष्ठ समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का 71 वर्ष की आयु में निधन केवल मीडिया जगत के लिए, बल्कि उस पीढ़ी के करोड़ों दर्शकों के लिए भावनात्मक क्षति है, जिसने समाचारों को उनके स्वर में विश्वसनीयता और मर्यादा का रूप लेते देखा था। उनका जाना केवल एक व्यक्तित्व का अवसान नहीं, बल्कि पत्रकारिता के उस अनुशासित और संयमित दौर का धुंधलाना है, जहां शब्दों की गरिमा और प्रस्तुति की शालीनता ही पहचान हुआ करती थी। सरला जी का जीवन पत्रकारिता के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि सादगी, शालीनता और भाषा की शुद्धता भी दर्शकों के दिलों में स्थायी स्थान बना सकती है। आज जब मीडिया निरंतर बदलाव के दौर से गुजर रहा है, तब उनका व्यक्तित्व एक आदर्श की तरह सामने आता है, जो पत्रकारिता को उसकी मूल आत्मा से जोड़ता है।  

सरला माहेश्वरी अब भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भारतीय मीडिया के इतिहास में उनकी उपस्थिति सदैव उस मजबूत आधारशिला की तरह दर्ज रहेगी, जिस पर विश्वास और गरिमा की पत्रकारिता खड़ी होती है। उनकी आवाज़ भले ही मौन हो गई हो, लेकिन उनकी स्मृति और योगदान आने वाली पीढ़ियों को पत्रकारिता के मूल मूल्यों की याद दिलाते रहेंगे। आज जब मीडिया का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और प्रस्तुति की शैली में आकर्षण और प्रतिस्पर्धा हावी हो चुकी है, ऐसे में सरला माहेश्वरी जैसे व्यक्तित्व उस युग की याद दिलाते हैं, जब पत्रकारिता में मर्यादा, संतुलन और गरिमा सर्वोपरि हुआ करती थी। वे केवल समाचार वाचक नहीं थीं, बल्कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता का जीवंत प्रतीक थीं। उनका जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि उस युग की स्मृतियों का धुंधलाना भी है, जिसने भारतीय जनमानस को सूचना और विश्वास के सूत्र में बांधकर रखा। सरला जी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़, उनकी शैली और उनकी सादगी भारतीय मीडिया इतिहास में सदैव एक आदर्श के रूप में गूंजती रहेगी।

विश्वास की वह आवाज, जिसने घर-घर में बनाई जगह

1970 के दशक में जब भारत में संचार के साधन सीमित थे और दूरदर्शन सूचना का सबसे सशक्त माध्यम माना जाता था, उस समय सरला माहेश्वरी ने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की। धीरे-धीरे वे केवल समाचार पढ़ने वाली एंकर नहीं रहीं, बल्कि भारतीय समाज में भरोसे का पर्याय बन गईं। उस दौर में समाचार वाचकों की भूमिका मनोरंजन नहीं, बल्कि जनविश्वास को मजबूत करने की जिम्मेदारी से जुड़ी होती थी और सरला माहेश्वरी ने इस दायित्व को पूरी गरिमा के साथ निभाया। उनकी प्रस्तुति में कृत्रिम आकर्षण नहीं, बल्कि सहज आत्मविश्वास और स्पष्ट उच्चारण की दृढ़ता दिखाई देती थी। सलीके से पहनी हुई साड़ी, माथे की सादगी भरी बिंदी और कैमरे से संवाद करती उनकी गंभीर दृष्टि दर्शकों को यह विश्वास दिलाती थी कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व का दस्तावेज है।

सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा व्यक्तित्व

सरला माहेश्वरी का संबंध राजस्थान की सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े माहेश्वरी समाज से था, जो भारतीय वैश्य परंपरा का एक प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक समुदाय माना जाता है। यह समाज अपनी व्यापारिक दक्षता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक अनुशासन के लिए प्रसिद्ध रहा है। भगवान शिव और माता माहेश्वरी के प्रति गहरी श्रद्धा रखने वाला यह समुदाय सामाजिक मूल्यों और परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है। संभवतः यही सांस्कृतिक संस्कार सरला जी के व्यक्तित्व में झलकते थे, जो उनकी भाषा की शुद्धता और प्रस्तुति की मर्यादा में स्पष्ट रूप से दिखाई देते थे।

तीन दशकों का गौरवशाली और प्रेरणादायक सफर

सरला माहेश्वरी ने वर्ष 1976 में दूरदर्शन से अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की थी। प्रारंभिक दिनों में उन्होंने बच्चों के कार्यक्रमों के लिए लेखन का कार्य भी किया। इस अनुभव ने उनकी भाषा को संवेदनशीलता, सहजता और प्रभावशीलता प्रदान की। यह गुण आगे चलकर उनकी समाचार प्रस्तुति की सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के विकास को बहुत करीब से देखा और जिया। वह दौर जब दूरदर्शन ब्लैक एंड व्हाइट प्रसारण से रंगीन दुनिया की ओर बढ़ रहा था, उस ऐतिहासिक परिवर्तन की वह प्रत्यक्ष साक्षी रहीं। तकनीकी बदलावों के साथ-साथ उन्होंने पत्रकारिता की मूल आत्मा को कभी कमजोर नहीं होने दिया।

इतिहास के संवेदनशील क्षणों की साक्षी आवाज

सरला माहेश्वरी केवल सामान्य समाचार वाचन तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटनाक्रमों को अपनी आवाज के माध्यम से जनता तक पहुंचाया। मई 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की खबर जब देश में स्तब्धता और शोक का वातावरण लेकर आई, तब उसी गंभीर और संतुलित स्वर में यह दुखद समाचार देशवासियों तक पहुंचा था। ऐसे अवसरों पर उनकी प्रस्तुति केवल सूचना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भावनाओं का संयमित प्रतिबिंब बन जाती थी।

जब एंकर होते थे गरिमा के प्रतीक

आज का मीडिया तेज प्रतिस्पर्धा, दृश्य आकर्षण और त्वरित प्रस्तुति के युग में प्रवेश कर चुका है, जहां समाचार अक्सर शैली और प्रभाव के बीच संतुलन खोजते नजर आते हैं। लेकिन सरला माहेश्वरी उस पीढ़ी की प्रतिनिधि थीं, जब एंकर लोकप्रियता के नहीं, बल्कि सम्मान और विश्वसनीयता के प्रतीक हुआ करते थे। उनका व्यक्तित्व यह संदेश देता था कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति नैतिक दायित्व है।

स्मृतियों में जीवित रहेगा एक युग

पिछले कुछ वर्षों से सरला माहेश्वरी सार्वजनिक जीवन से दूर थीं। समय की धारा में कई चेहरे ओझल हो जाते हैं, लेकिन कुछ आवाजें स्मृतियों में स्थायी रूप से अंकित हो जाती हैं। उनके निधन की खबर ने उन अनगिनत दर्शकों को भावुक कर दिया है, जिनके लिए समाचार का अर्थ ही सरला माहेश्वरी का स्वर हुआ करता था।

काशी के स्वाभिमान की आवाज़ बने अजीत सिंह बग्गा

काशी के स्वाभिमान की आवाज़ बने अजीत सिंह बग्गा  भारतीय जन क्रांति परिषद ( आस्था ) ने वाराणसी व्यापार मंडल अध्यक्ष को सौं...