Monday, 9 February 2026

बजट में समावेशी विकास की झलक दिखे, तभी मजबूत होगा प्रदेश : सरवर सिद्दीकी

बजट में समावेशी विकास की झलक दिखे, तभी मजबूत होगा प्रदेश : सरवर सिद्दीकी 

अल्पसंख्यक समाज की शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार योजनाओं को प्राथमिकता देने की मांग, डैडम् और महिला सशक्तिकरण पर विशेष फोकस की जरूरत बताई

सुरेश गांधी

वाराणसी. उत्तर प्रदेश के आगामी बजट को लेकर पूर्व अल्पसंख्यक मोर्चा सदस्य सरवर सिद्दीकी ने कहा है कि प्रदेश का बजट केवल आर्थिक प्रबंधन का दस्तावेज नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और संतुलित विकास का आधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है, जो निश्चित रूप से स्वागत योग्य पहल है, लेकिन इस विकास यात्रा में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

सरवर सिद्दीकी ने कहा कि अल्पसंख्यक समाज विशेषकर शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अभी भी कई चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में आगामी बजट में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना तथा युवाओं को कौशल विकास योजनाओं से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि अल्पसंख्यक युवाओं को स्टार्टअप और स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ा जाता है तो इससे प्रदेश की आर्थिक प्रगति को भी गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में छोटे व्यापार, कुटीर उद्योग और पारंपरिक व्यवसायों में अल्पसंख्यक समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए सरकार को एमएसएमई सेक्टर के लिए आसान ऋण सुविधा, प्रशिक्षण कार्यक्रम और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजनाएं लागू करनी चाहिए। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

सरवर सिद्दीकी ने महिला सशक्तिकरण योजनाओं को और प्रभावी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमिता योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से लागू किया जाए ताकि महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।

उन्होंने सरकार से यह भी अपेक्षा जताई कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार उन क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर किया जाए जहां अल्पसंख्यक आबादी अधिक है। उनका कहना था कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब समाज का अंतिम व्यक्ति भी उससे लाभान्वित हो।

सरवर सिद्दीकी ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश का आगामी बजट प्रदेश के विकास को नई दिशा दे सकता है, बशर्ते उसमें समावेशी विकास और सामाजिक संतुलन की भावना को प्रमुखता दी जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार ऐसा बजट प्रस्तुत करेगी जो समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर प्रदेश को प्रगति के नए आयाम तक पहुंचाने का कार्य करेगा।

कृषि से अर्थशक्ति, स्वास्थ्य से मानवशक्ति...आर्थिक सर्वे में विकसित यूपी 2047 का खाका

यूपी बजट  विकास की रफ्तार या चुनावी धार?

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प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि की बढ़ती हिस्सेदारी, स्वास्थ्य क्षेत्र में रिकॉर्ड निवेश

बढ़ती प्रति व्यक्ति आय के सहारे विकसित राज्य बनने का दावा

अब सबकी नजर 11 फरवरी को आने वाले बजट पर टिकी है

सुरेश गांधी

उत्तर प्रदेश का बजट सिर्फ आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि यह प्रदेश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज भी माना जाता है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश होने जा रहा उत्तर प्रदेश का बजट इसी मायने में कई दृष्टियों से अहम माना जा रहा है। करीब नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक के अनुमानित आकार वाला यह बजट प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट बनने की ओर अग्रसर है। सरकार इसे विकास, निवेश और जनकल्याण के संतुलन का बजट बताने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी सालों की तैयारी का आर्थिक खाका करार दे रहा है।

प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं पर नजर डालें तो साफ संकेत मिलते हैं कि इस बार बजट का सबसे बड़ा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार सृजन, कृषि सशक्तिकरण और महिला कल्याण योजनाओं पर रहने वाला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय कर चुके हैं और यह बजट उसी लक्ष्य को गति देने का आर्थिक रोडमैप माना जा रहा है। खास यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण ने प्रदेश की आर्थिक दिशा और भविष्य की विकास रणनीति का विस्तृत खाका सामने रख दिया है।

विकसित उत्तर प्रदेश 2047’ के विजन को आधार बनाकर तैयार किया गया यह सर्वेक्षण प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन को विकास की केंद्रीय धुरी के रूप में स्थापित करता है। सरकार ने किसानों की आय तीन गुना करने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का संकल्प दोहराया है, जो प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. विधानमंडल का बजट सत्र सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ। इसके बाद वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की। सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2016-17 में जहां प्रदेश का योगदान लगभग आठ प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर नौ प्रतिशत से अधिक हो गया है। यह संकेत देता है कि प्रदेश देश की आर्थिक विकास यात्रा में तेजी से अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।

कृषि बनी अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की भूमिका लगातार सशक्त हुई है। वर्ष 2017-18 में जहां कृषि क्षेत्र का योगदान 24 प्रतिशत था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 24.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है। खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश में 737.4 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन दर्ज किया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की मजबूत कृषि क्षमता को दर्शाता है। कुल खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 18.1 प्रतिशत से बढ़कर 20.6 प्रतिशत तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि कृषि क्षेत्र में तकनीक, सिंचाई और नीतिगत सुधारों का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। वहीं फसलों के प्रति हेक्टेयर सकल मूल्यवर्धन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो 2017-18 के 0.98 लाख रुपये से बढ़कर 1.73 लाख रुपये तक पहुंच गई है। तिलहन उत्पादन क्षेत्र में लगभग 165 प्रतिशत की वृद्धि कृषि विविधीकरण की दिशा में प्रदेश की प्रगति को दर्शाती है।

प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी, विकास का संकेत

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार चालू वित्त वर्ष में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय लगभग 1.20 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह आंकड़ा प्रदेश की आर्थिक स्थिति में सुधार और विकास की रफ्तार का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वृद्धि लगातार बनी रहती है तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में रिकॉर्ड निवेश का संकेत

सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश भी दिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 46,728.48 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो अब तक का सर्वाधिक निवेश माना जा रहा है। इस बजट के माध्यम से अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों और स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। साथ ही जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं को विस्तार देने का प्रयास भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। कोविड महामारी के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

विकसित उत्तर प्रदेश 2047 का विजन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट सत्र शुरू होने से पहले मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य विकास, सुशासन और जनकल्याण को प्राथमिकता देना है। उन्होंने विपक्ष से रचनात्मक सहयोग की अपील करते हुए कहा कि प्रदेश के विकास के लिए सभी दलों का सहयोग आवश्यक है। सरकार काविकसित उत्तर प्रदेश 2047’ का विजन प्रदेश को आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक रूप से सशक्त बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है। इसमें कृषि आधुनिकीकरण, औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और सामाजिक योजनाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बजट सत्र में राजनीतिक गर्माहट तय

9 फरवरी से शुरू हुआ यह बजट सत्र 20 फरवरी तक चलेगा। 11 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना विधानसभा में वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। जहां सरकार अपनी उपलब्धियों और विकास योजनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत करने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष प्रदेश की कानून व्यवस्था, एसआईआर और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। मतलब साफ है यह बजट सत्र केवल आर्थिक बहस का मंच नहीं बल्कि प्रदेश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण अवसर भी साबित हो सकता है।

विकास और क्रियान्वयन की असली परीक्षा

आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े प्रदेश की प्रगति का सकारात्मक चित्र प्रस्तुत करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही वास्तविक सफलता तय करेगा। कृषि, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में यदि योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक शक्ति के रूप में उभर सकता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे बड़ा दांव

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और मेट्रो परियोजनाओं के जरिए देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे राज्यों में शामिल हुआ है। इस बार भी बजट में सड़क, परिवहन और शहरी विकास परियोजनाओं पर बड़े निवेश की संभावना जताई जा रही है। गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र की सड़क परियोजनाओं के साथ-साथ लॉजिस्टिक पार्क और औद्योगिक कॉरिडोर पर विशेष जोर दिया जा सकता है। सरकार का मानना है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा देता है।

किसानों को राहत और कृषि में तकनीकी बदलाव

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है और सरकार इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सिंचाई परियोजनाओं, प्राकृतिक खेती और पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा निवेश कर सकती है। कृषि यंत्रीकरण, डेयरी उद्योग और फसल बीमा योजनाओं को मजबूती देने की भी संभावना जताई जा रही है। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक राहत मिल सकती है। हालांकि किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और फसल लागत जैसे मुद्दे अभी भी राजनीतिक और आर्थिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।

युवाओं के रोजगार और शिक्षा पर जोर

प्रदेश की बड़ी युवा आबादी को ध्यान में रखते हुए बजट में रोजगार और स्किल डेवलपमेंट योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। नए मेडिकल कॉलेज, तकनीकी संस्थान और कौशल प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना सरकार के एजेंडे में शामिल बताई जा रही है। स्टार्टअप और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास भी इस बजट का अहम हिस्सा बन सकते हैं। यदि यह योजनाएं जमीन पर उतरीं तो प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

महिला सशक्तिकरण योजनाओं का विस्तार

प्रदेश सरकार लगातार महिला सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करती रही है। स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता, महिला सुरक्षा योजनाओं और मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त बजट की संभावना जताई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों की सफलता को देखते हुए सरकार इन योजनाओं को और विस्तार देने की रणनीति बना सकती है।

सरकारी कर्मचारियों और रोजगार की उम्मीदें

सरकारी कर्मचारियों को वेतन और भत्तों में बड़ी राहत मिलने की संभावना भले कम दिखाई दे रही हो, लेकिन नई भर्तियों की घोषणा की उम्मीद जरूर जताई जा रही है। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में संस्थानों के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

उद्योग और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

प्रदेश सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाना है। डैडम् सेक्टर, छोटे उद्योगों और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई नीतियां और प्रोत्साहन योजनाएं इस बजट में शामिल हो सकती हैं। डिफेंस कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर को भी बढ़ावा देने की संभावना है, जिससे रोजगार सृजन को गति मिल सकती है।

राजनीतिक और आर्थिक संतुलन की परीक्षा

उत्तर प्रदेश का यह बजट सिर्फ विकास योजनाओं का दस्तावेज नहीं बल्कि सरकार की आर्थिक और राजनीतिक रणनीति की भी परीक्षा माना जा रहा है। सरकार जहां इसे विकास और जनकल्याण का संतुलित बजट बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा करार दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा जब योजनाओं का प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रदेश की दिशा तय करेगा बजट

उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है और यहां की आर्थिक प्रगति का असर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। ऐसे में यह बजट सिर्फ प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की विकास गति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि सरकार अपने घोषित लक्ष्यों को जमीन पर उतारने में सफल होती है तो यह बजट उत्तर प्रदेश को विकास के नए आयाम देने वाला साबित हो सकता है।

बजट में समावेशी विकास की झलक दिखे, तभी मजबूत होगा प्रदेश : सरवर सिद्दीकी

बजट में समावेशी विकास की झलक दिखे , तभी मजबूत होगा प्रदेश : सरवर सिद्दीकी  अल्पसंख्यक समाज की शिक्षा , रोजगार और स्वरोजगार...