Tuesday, 11 August 2026

2027 का शंखनाद : काशी की सभी 71 सीटों पर कमल खिलाने का लक्ष्य

 

2027 का शंखनाद : काशी की सभी 71 सीटों पर कमल खिलाने का लक्ष्य 

पहली बार काशी पहुंचे क्षेत्र प्रभारी रमेश सिंह ने सर्किट हाउस में की तीन बड़ी संगठनात्मक बैठकें, सांसद-विधायकों पदाधिकारियों को दिया एकजुटता का मंत्र

सुरेश गांधी

वाराणसी. भाजपा ने काशी क्षेत्र में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का औपचारिक शंखनाद कर दिया है। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं काशी क्षेत्र के नवनियुक्त प्रभारी रमेश सिंह ने मंगलवार को अपने प्रथम काशी प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में लगातार तीन महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठकें कर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक सक्रिय होने का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2027 में काशी क्षेत्र की सभी 71 विधानसभा सीटों पर कमल खिलाना भाजपा का लक्ष्य है और इसे हासिल करने के लिए संगठन को एक लय, एक स्वर और एक वातावरण में काम करना होगा।

बैठकों में काशी क्षेत्र के 16 संगठनात्मक जिलों के सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, प्रदेश एवं क्षेत्र पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष, जिला प्रभारी तथा तिरंगा यात्रा व्यवस्था टोली के पदाधिकारी शामिल हुए। चुनावी तैयारियों, संगठन विस्तार, बूथ सशक्तीकरण और आगामी अभियानों की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया गया। रमेश सिंह ने कहा कि चुनाव के समय देश और दुनिया की निगाहें काशी क्षेत्र पर रहती हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि काशी के कार्यकर्ता कर्मठ, अनुशासित और परिश्रमी हैं तथा यही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने आह्वान किया कि हर कार्यकर्ता बूथ तक पहुंचकर पार्टी की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को जन-जन तक पहुंचाए।

काशी के कण-कण में शंकर

प्रथम काशी प्रवास पर मिले स्वागत से भावुक दिखे रमेश सिंह ने काशी से अपने पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा कि बचपन में जब वे काशी आते थे तो लोग कहते थे किकाशी के कण-कण में शंकर बसते हैं।आज उन्हें वही भाव भाजपा कार्यकर्ताओं में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का समर्पण ही संगठन की वास्तविक पूंजी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि काशी को विश्व पटल पर नई पहचान मिली है और उनके नेतृत्व में भारत की प्रतिष्ठा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी है। उन्होंने कहा कि काशी क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है क्योंकि प्रधानमंत्री स्वयं यहां के सांसद हैं।

टिकट से बड़ा संगठन

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश संगठनात्मक एकता रहा। रमेश सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव लड़ने की इच्छा रखना स्वाभाविक है, लेकिन पार्टी जिस उम्मीदवार को कमल का निशान दे, उसके बाद सभी कार्यकर्ताओं का पहला दायित्व उसकी जीत सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत आकांक्षाएं संगठन से बड़ी नहीं हो सकतीं और मतभेदों को चुनावी सफलता के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि चुनाव व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि विचारधारा और संगठन की विजय का अभियान है। इसलिए गिले-शिकवे भुलाकर पूरी शक्ति के साथ पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में जुटना होगा।

 त्याग और तपस्या से बनी भाजपा

भाजपा के इतिहास का स्मरण कराते हुए क्षेत्र प्रभारी ने कहा कि पार्टी आज जिस ऊंचाई पर पहुंची है, वह वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के त्याग, तपस्या और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और कल्याण सिंह जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने गांव-गांव जाकर संगठन खड़ा किया। उसी परंपरा को आगे बढ़ाना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है। उन्होंने जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों से बेहतर समन्वय बनाकर टीम भावना से काम करने पर जोर दिया और कहा कि संगठन विस्तार तथा बूथ सुदृढ़ीकरण ही 2027 की जीत की आधारशिला बनेगा।

तिरंगा यात्रा पर भी विशेष चर्चा

सर्किट हाउस में हुई बैठकों में आगामी तिरंगा यात्रा अभियान को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। जिला और महानगर स्तर की व्यवस्था टोलियों से संवाद कर कार्यक्रमों को प्रभावी, अनुशासित और व्यापक जनभागीदारी वाला बनाने पर जोर दिया गया। संगठनात्मक जिलों की समीक्षा के दौरान सदस्यता, बूथ समितियों की सक्रियता और आगामी कार्यक्रमों की तैयारी का भी आकलन किया गया। बैठक की अध्यक्षता काशी क्षेत्र अध्यक्ष अशोक चौरसिया ने की। स्वागत उद्बोधन भी उन्होंने ही दिया। संचालन क्षेत्र महामंत्री संतोष पटेल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रदेश उपाध्यक्ष एवं किसान मोर्चा प्रभारी शंकर गिरी ने किया।

ये रहे मंचासीन

मंच पर प्रदेश उपाध्यक्ष एवं काशी क्षेत्र प्रभारी रमेश सिंह, क्षेत्र अध्यक्ष अशोक चौरसिया, शंकर गिरी, कृष्ण बिहारी राय, सुरेश मौर्य, प्रदेश कोषाध्यक्ष मनीष कपूर, प्रदेश मंत्री राकेश बिंद, राज्य मंत्री संजीव गौड़ और क्षेत्र महामंत्री संतोष पटेल उपस्थित रहे।

प्रमुख उपस्थिति

बैठक में जिलाध्यक्ष राम सकल पटेल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, रमेश जायसवाल, रत्नाकर मिश्रा और कैलाश आचार्य, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र राय और विनीत सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे। भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि काशी क्षेत्र में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन अब अभियान मोड में प्रवेश कर चुका है। बूथ स्तर तक सक्रियता, संगठनात्मक अनुशासन और व्यापक जनसंपर्क के सहारे पार्टी ने काशी की सभी 71 सीटों पर विजय का लक्ष्य तय कर दिया है। 

भोलेनाथ के त्रिशूल पर बसी काशी में सावन का शिवमय स्पंदन

श्रावण मास में काशी विश्वनाथ धाम से लेकर गंगा तट तक गूंजता है शिवत्व का सनातन स्वर

भोलेनाथ के त्रिशूल पर बसी काशी में सावन का शिवमय स्पंदन 

श्रावण के आरंभ से अब तक करीब 29 लाख 31 हजार 249 श्रद्धालुओं ने किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन; गंगा तट से धाम तक उमड़ी आस्था की अविरल धारा

सुरेश गांधी

वाराणसी. सावन का पवित्र माह आते ही काशी का कण-कण शिवमय हो उठता है। प्रातःकाल गंगा की धारा पर पड़ती सूर्य की पहली किरण, मंदिरों की घंटियों की अनुगूंज और हर-हर महादेव का उद्घोष पूरी नगरी को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। श्रद्धालुओं की अखंड आस्था मिलकर ऐसा वातावरण रचते हैं, मानो स्वयं कैलास काशी में उतर आया हो। यही वह महीना है, जब शिव की नगरी अपनी आध्यात्मिक चेतना के सर्वोच्च शिखर पर दिखाई देती है।

धार्मिक मान्यता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर स्थित है। इसी कारण इसे अविनाशी नगरी कहा गया है। इतिहास में अनेक उतार-चढ़ाव आए, किंतु काशी की आध्यात्मिक पहचान कभी लुप्त नहीं हुई। गंगा और विश्वनाथ का यह अद्वैत संबंध ही काशी की आत्मा है। स्कन्दपुराण के काशीखण्ड में कहा गया है 

काश्यां तु मरणान्मुक्तिः”, अर्थात काशी मोक्षदायिनी नगरी है। अर्थात काशी में मृत्यु भी मोक्ष का द्वार बन जाती है। यह श्लोक केवल दार्शनिक कथन नहीं, बल्कि काशी की उस सनातन परंपरा का प्रमाण है, जिसने उसे युगों से आध्यात्मिक राजधानी बनाए रखा है। श्रावण मास में शिव उपासना के महत्व का उल्लेख शिवपुराण में भी मिलता है, जहाँ श्रद्धापूर्वक शिवपूजन को कल्याणकारी बताया गया है।

श्रावणे मासि यः भक्त्या शिवं पूजयते नरः।

सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोकं गच्छति॥

अर्थात जो भक्त श्रावण मास में श्रद्धापूर्वक शिव की पूजा करता है, वह पापों से मुक्त होकर शिवलोक को प्राप्त होता है। इसी विश्वास से कांवड़िए गंगाजल लेकर दूर-दूर से काशी पहुंचते हैं और बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इसकी महत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है श्रावण की शुरुआत से अब तक लगभग 29 लाख 31 हजार 249 भक्त बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर चुके हैं।

प्रत्येक सोमवार को भोर से ही विश्वनाथ धाम, ज्ञानवापी क्षेत्र और प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई देती हैं। कांवड़िए गंगाजल लेकर जलाभिषेक कर रहे हैं, वहीं देश-विदेश से आए श्रद्धालु रुद्राभिषेक, बिल्वपत्र अर्पण और शिवनाम जप में सहभागी बन रहे हैं। कहा जा सकता है गंगा स्नान, रुद्राभिषेक, बिल्वपत्र अर्पण और शिवनाम जपये सभी अनुष्ठान केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि की साधना हैं।

काशी की विशेषता केवल उसके मंदिर नहीं, बल्कि उसकी जीवंत परंपरा है। गंगा स्नान, आरती, शिवभक्ति और लोकजीवन का अद्भुत संगम इस नगरी को अन्य तीर्थों से अलग पहचान देता है। वर्षा ऋतु में गंगा का उफान और सावन की हरियाली इस आध्यात्मिक वातावरण को और भी अलौकिक बना देती है। काशी विश्वनाथ धाम में उमड़ती भीड़ यह प्रमाणित करती है कि आधुनिकता के तीव्र प्रवाह के बीच भी आस्था की यह धारा अविरल है।

आज जब जीवन भागदौड़ और तनाव से घिरा है, तब सावन की काशी हमें ठहरकर भीतर झांकने का अवसर देती है। गंगा तट पर बैठा साधक हो या विश्वनाथ धाम में खड़ा सामान्य श्रद्धालुहर किसी के भीतर एक ही प्रार्थना गूंजती है: “सबका कल्याण हो।सावन का यह उल्लास केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की उस सनातन आत्मा का उत्सव है जो सदियों से गंगा, विश्वनाथ और लोकआस्था के सहारे अविरल बह रही है।

सावन का संदेश केवल पूजा तक सीमित नहीं है। यह प्रकृति, जल और जीवन के संरक्षण का भी पर्व है। वर्षा ऋतु में धरती का नवजीवन आरंभ होता है और शिव, जो स्वयं प्रकृति के अधिपति माने गए हैं, हमें संतुलन, संयम और करुणा का पाठ पढ़ाते हैं। सावन का यह पावन मास हमें स्मरण कराता है कि काशी केवल एक नगर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की धड़कन है। यहां शिव केवल पूजे नहीं जाते, वे जीवन के प्रत्येक स्वर में अनुभव किए जाते हैं। यही काशी की सनातन महिमा है, यही सावन का अमर संदेश।

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