‘ट्रिलियन डॉलर यूपी’ की ओर बढ़ता बजट
उत्तर
प्रदेश
का
वर्ष
2025-26 का बजट केवल आंकड़ों
का
दस्तावेज
नहीं,
बल्कि
राज्य
की
आर्थिक
दिशा
और
राजनीतिक
संकल्प
का
स्पष्ट
रोडमैप
बनकर
सामने
आया
है।
30.8 लाख
करोड़
रुपये
के
अनुमानित
सकल
राज्य
घरेलू
उत्पाद
(जीएसडीपी)
के
साथ
प्रदेश
ने
विकास
की
नई
छलांग
का
संकेत
दिया
है।
वित्तीय
अनुशासन,
आधारभूत
संरचना
विस्तार,
औद्योगिक
निवेश
और
सामाजिक
योजनाओं
के
संतुलित
समन्वय
से
यह
बजट
‘विकसित
उत्तर
प्रदेश
2047’ की
आधारशिला
रखने
की
कोशिश
करता
दिखता
है
सुरेश गांधी
उत्तर प्रदेश का वर्ष 2025-26 का
बजट केवल आय-व्यय
का लेखा-जोखा भर
नहीं है, बल्कि यह
उस आर्थिक आत्मविश्वास का दस्तावेज है
जो प्रदेश को देश की
अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में
आगे बढ़ रहा है।
30.8 लाख करोड़ रुपये के
अनुमानित सकल राज्य घरेलू
उत्पाद (जीएसडीपी) के साथ 12 प्रतिशत
की वृद्धि का लक्ष्य यह
दर्शाता है कि प्रदेश
अब विकास की रफ्तार को
बनाए रखने के साथ
उसे नई ऊंचाइयों तक
ले जाने की तैयारी
में है। खास बात
यह है कि यह
बजट विकास योजनाओं के विस्तार और
वित्तीय अनुशासन के संतुलन का
संकेत देता है, जो
किसी भी उभरती अर्थव्यवस्था
के लिए बेहद जरूरी
माना जाता है।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025-26 में
7.57 लाख करोड़ रुपये के
शुद्ध व्यय का लक्ष्य
रखा है, जो पिछले
वर्ष के संशोधित अनुमानों
से 17 प्रतिशत अधिक है। यह
वृद्धि स्पष्ट संकेत देती है कि
सरकार आधारभूत संरचना, औद्योगिक निवेश और सामाजिक योजनाओं
के विस्तार पर जोर दे
रही है। इसके साथ
ही 6.65 लाख करोड़ रुपये
की शुद्ध प्राप्तियों का अनुमान यह
बताता है कि सरकार
राजस्व संग्रह को मजबूत करने
में भी सफल रही
है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू
यह है कि सरकार
ने जीएसडीपी के 2.6 प्रतिशत राजस्व अधिशेष का अनुमान जताया
है। आम तौर पर
बड़े विकास बजट में राजस्व
घाटा देखने को मिलता है,
लेकिन अधिशेष की स्थिति प्रदेश
की वित्तीय मजबूती और बेहतर कर
प्रबंधन को दर्शाती है।
राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत
तक सीमित रखने का लक्ष्य
भी वित्तीय अनुशासन की दिशा में
मजबूत कदम माना जा
सकता है। यह न
केवल प्रदेश की आर्थिक विश्वसनीयता
को बढ़ाएगा बल्कि भविष्य में बड़े निवेश
को आकर्षित करने में भी
सहायक होगा। निवेशकों के लिए यह
संकेत महत्वपूर्ण होता है कि
राज्य अपनी आर्थिक सीमाओं
के भीतर रहकर विकास
योजनाओं को आगे बढ़ा
रहा है। इस बजट
की सबसे बड़ी विशेषता
आधारभूत संरचना पर निरंतर जोर
है। चार नए एक्सप्रेसवे
निर्माण की योजना प्रदेश
के औद्योगिक और व्यापारिक विस्तार
के लिए महत्वपूर्ण साबित
हो सकती है। एक्सप्रेसवे
केवल परिवहन सुविधा नहीं होते, बल्कि
वे औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के
नए अवसरों का मार्ग भी
खोलते हैं। आगरा-लखनऊ,
गंगा, विंध्य और बुंदेलखंड-रीवा
एक्सप्रेसवे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों
को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में
अहम भूमिका निभाएंगे। साथ ही मुख्यमंत्री
ग्राम सड़क योजना के
तहत ग्रामीण सड़कों के निर्माण और
मरम्मत के लिए किया
गया प्रावधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा
देगा।
औद्योगिक विकास की दिशा में
रक्षा औद्योगिक गलियारे की स्थापना का
प्रस्ताव भी अत्यंत महत्वपूर्ण
है। बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से
औद्योगिक निवेश की प्रतीक्षा करता
रहा है। रक्षा गलियारे
से न केवल लगभग
9,500 करोड़ रुपये के निवेश की
संभावना है बल्कि इससे
क्षेत्रीय रोजगार और तकनीकी विकास
को भी नई गति
मिलेगी। यह पहल प्रदेश
को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में
राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत
पहचान दिला सकती है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में
प्रदेश का कदम भी
उल्लेखनीय है। आठ डेटा
सेंटर पार्क स्थापित करने की योजना
उत्तर प्रदेश को तकनीकी निवेश
के केंद्र के रूप में
स्थापित कर सकती है।
डिजिटल सेवाओं और सूचना प्रौद्योगिकी
के क्षेत्र में बढ़ता निवेश
आने वाले समय में
प्रदेश की आर्थिक संरचना
को मजबूत करेगा। यह संकेत है
कि प्रदेश पारंपरिक उद्योगों के साथ आधुनिक
तकनीकी क्षेत्रों में भी संतुलित
विकास की नीति अपना
रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र में सौर परियोजनाओं
का विस्तार सतत विकास की
दिशा में सकारात्मक पहल
है। जालौन और झांसी में
प्रस्तावित सौर ऊर्जा परियोजनाएं
न केवल प्रदेश की
ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने
में सहायक होंगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में
भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी। ऊर्जा आत्मनिर्भरता औद्योगिक विकास की बुनियादी आवश्यकता
होती है और यह
पहल उसी दिशा में
उठाया गया कदम है।
सामाजिक विकास के क्षेत्र में
अटल आवासीय विद्यालयों की क्षमता बढ़ाने
का निर्णय श्रमिक परिवारों के बच्चों को
शिक्षा से जोड़ने की
दिशा में सराहनीय प्रयास
है। यह पहल सामाजिक
समावेशन और शिक्षा के
विस्तार को मजबूत करेगी।
विकास तभी सार्थक माना
जाता है जब उसका
लाभ समाज के अंतिम
व्यक्ति तक पहुंचे और
यह योजना उसी सोच को
दर्शाती है।
हालांकि प्रदेश की प्रति व्यक्ति
आय अभी राष्ट्रीय औसत
से कम है, लेकिन
इसमें लगातार वृद्धि यह संकेत देती
है कि आर्थिक विकास
का लाभ धीरे-धीरे
व्यापक स्तर पर पहुंच
रहा है। सेवा क्षेत्र,
कृषि और विनिर्माण क्षेत्र
का संतुलित योगदान प्रदेश की अर्थव्यवस्था को
स्थिरता प्रदान करता है। विनिर्माण
क्षेत्र की तेज वृद्धि
औद्योगिक विस्तार की संभावनाओं को
मजबूत करती है। कुल
मिलाकर यह बजट उत्तर
प्रदेश की आर्थिक महत्वाकांक्षा
और प्रशासनिक रणनीति का स्पष्ट संकेत
देता है। इसमें विकास,
निवेश, सामाजिक योजनाओं और वित्तीय अनुशासन
का संतुलित मिश्रण दिखाई देता है। हालांकि
बजट की सफलता अंततः
उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
यदि योजनाएं समयबद्ध और पारदर्शी तरीके
से लागू होती हैं
तो यह बजट उत्तर
प्रदेश को देश की
आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में
महत्वपूर्ण मील का पत्थर
साबित हो सकता है।
उत्तर प्रदेश का यह बजट
विकास की तेज रफ्तार
और वित्तीय अनुशासन का संतुलित मिश्रण
प्रस्तुत करता है। यह
न केवल प्रदेश की
अर्थव्यवस्था को मजबूती देने
का प्रयास है, बल्कि निवेश,
रोजगार और सामाजिक विकास
के बहुआयामी मॉडल को स्थापित
करने की दिशा में
भी महत्वपूर्ण कदम है। अब
चुनौती इन योजनाओं को
धरातल पर उतारने की
है, क्योंकि बजट की सफलता
अंततः उसके प्रभावी क्रियान्वयन
पर ही निर्भर करेगी।
आर्थिक मजबूती का संकेत देता संतुलित वित्तीय ढांचा
प्रदेश सरकार ने 2025-26 में 7,57,333 करोड़ रुपये के
शुद्ध व्यय का लक्ष्य
रखा है, जो पिछले
वर्ष के संशोधित अनुमानों
से 17 प्रतिशत अधिक है। वहीं
6,65,933 करोड़ रुपये की शुद्ध प्राप्तियों
का अनुमान वित्तीय संसाधनों की मजबूत स्थिति
को दर्शाता है। सबसे उल्लेखनीय
तथ्य यह है कि
सरकार ने जीएसडीपी के
2.6 प्रतिशत (79,516 करोड़ रुपये) के
राजस्व अधिशेष का अनुमान जताया
है। यह संकेत देता
है कि सरकार खर्च
बढ़ाने के बावजूद आय
और वित्तीय अनुशासन में संतुलन बनाए
रखने की दिशा में
आगे बढ़ रही है।
राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत
तक सीमित रखने का लक्ष्य
भी वित्तीय प्रबंधन की गंभीरता को
दर्शाता है। पिछले वर्ष
यह आंकड़ा 3.4 प्रतिशत रहने की संभावना
थी। यह सुधार प्रदेश
की आर्थिक विश्वसनीयता को मजबूत करेगा
और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने
में सहायक होगा।
एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटीः विकास की रीढ़
प्रदेश के विकास मॉडल
में आधारभूत संरचना हमेशा प्रमुख रही है। इस
बजट में 1,050 करोड़ रुपये की
लागत से चार नए
एक्सप्रेसवे निर्माण की योजना इस
दिशा में बड़ा कदम
है। आगरा-लखनऊ, गंगा,
विंध्य और बुंदेलखंड-रीवा
एक्सप्रेसवे प्रदेश के औद्योगिक और
व्यापारिक नक्शे को नई दिशा
देंगे। ग्रामीण कनेक्टिविटी को भी नजरअंदाज
नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के
तहत नई सड़कों के
निर्माण और मरम्मत के
लिए 200 करोड़ रुपये का
प्रावधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देगा।
बेहतर सड़कें कृषि उत्पादों की
बाजार तक पहुंच और
रोजगार अवसरों को बढ़ाने में
अहम भूमिका निभाएंगी।
रक्षा गलियारा और औद्योगिक निवेश की नई संभावनाएं
बुंदेलखंड-रीवा एक्सप्रेसवे के
समानांतर 461 करोड़ रुपये की
लागत से प्रस्तावित रक्षा
औद्योगिक गलियारा प्रदेश की औद्योगिक पहचान
को मजबूत करेगा। अनुमानित 9,500 करोड़ रुपये का
निवेश न केवल रोजगार
सृजन करेगा बल्कि उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन
के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में
स्थापित कर सकता है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते कदम
प्रदेश में आठ डेटा
सेंटर पार्क स्थापित करने की योजना
डिजिटल क्रांति की दिशा में
बड़ा संकेत है। 900 मेगावाट क्षमता वाले इन डेटा
सेंटरों से आईटी और
डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में
व्यापक निवेश और रोजगार के
अवसर पैदा होने की
संभावना है। इससे प्रदेश
राष्ट्रीय और वैश्विक तकनीकी
निवेश के नक्शे पर
मजबूत स्थान बना सकता है।
हरित ऊर्जा और सतत विकास का संतुलन
जालौन में 500 मेगावाट और झांसी में
200 मेगावाट की सौर ऊर्जा
परियोजनाएं पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता
की दिशा में महत्वपूर्ण
पहल हैं। 2,500 करोड़ रुपये की
लागत से बनने वाली
यह परियोजना प्रदेश के ऊर्जा ढांचे
को मजबूत करने के साथ
औद्योगिक विकास को भी गति
देगी।
सामाजिक विकास में शिक्षा का विस्तार
अटल आवासीय विद्यालयों
की क्षमता 360 से बढ़ाकर 1,000 करने
का निर्णय श्रमिक परिवारों के बच्चों की
शिक्षा को नई दिशा
देगा। यह पहल सामाजिक
न्याय और समावेशी विकास
की नीति को मजबूत
करती है।
आर्थिक संरचना में संतुलित क्षेत्रीय विकास
प्रदेश की अर्थव्यवस्था में
सेवा क्षेत्र 46 प्रतिशत योगदान के साथ अग्रणी
है, जबकि कृषि और
विनिर्माण दोनों मिलकर 27 प्रतिशत योगदान दे रहे हैं।
विनिर्माण क्षेत्र की 13 प्रतिशत वृद्धि दर औद्योगिक विस्तार
की संभावनाओं को दर्शाती है।
हालांकि प्रति व्यक्ति आय अभी राष्ट्रीय
औसत से कम है,
लेकिन 10.4 प्रतिशत की वृद्धि यह
संकेत देती है कि
प्रदेश धीरे-धीरे आर्थिक
असमानता कम करने की
दिशा में बढ़ रहा
है।
राजनीतिक और विकासात्मक संदेश
यह बजट स्पष्ट
रूप से विकास और
निवेश आधारित शासन मॉडल को
आगे बढ़ाता है। आधारभूत ढांचे,
उद्योग, डिजिटल क्षेत्र और सामाजिक योजनाओं
का संतुलित संयोजन सरकार की दीर्घकालिक रणनीति
को दर्शाता है। आगामी वर्षों
में यदि इन योजनाओं
का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है, तो
उत्तर प्रदेश देश की अग्रणी
अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो
सकता है।