Thursday, 15 January 2026

गोपेश पांडेय के निधन से काशी का पत्रकार जगत शोकाकुल

गोपेश पांडेय के निधन से काशी का पत्रकार जगत शोकाकुल 

काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष रहे वरिष्ठ पत्रकार के अवसान पर पत्रकारों से लेकर राजनीतिक जगत तक श्रद्धांजलि, कहाउनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता 

सुरेश गांधी

वाराणसी। काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं मानद सदस्य, वरिष्ठ पत्रकार गोपेश पांडेय के निधन से काशी ही नहीं, बल्कि संपूर्ण पूर्वांचल का पत्रकारिता जगत गहरे शोक में डूब गया है। निष्पक्ष, निर्भीक और मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले गोपेश पांडेय के अवसान को पत्रकारिता की अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है। उनके निधन की खबर मिलते ही पत्रकारों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों में शोक की लहर दौड़ गई। घर-घर से लेकर सोशल मीडिया तक उन्हें याद कर श्रद्धांजलि दी जा रही है। उन्होंने समाचार को सिर्फ सूचना नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम माना। सच्चाई के पक्ष में खड़े रहना, सत्ता और व्यवस्था से सवाल पूछना तथा आम जन की आवाज़ को प्रमुखता से उठाना उनकी पत्रकारिता की पहचान रही। काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को मजबूती दी और पत्रकारों के हितों की लड़ाई को मर्यादित, लेकिन दृढ़ स्वर में आगे बढ़ाया।

उनके निधन पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। भाजपा काशी क्षेत्र अध्यक्ष दिलीप पटेल, जिलाध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि और क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी नवरतन राठी सहित कई नेताओं ने संयुक्त शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि गोपेश पांडेय का जाना पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। नेताओं ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के माध्यम से समाज को जागरूक करने का कार्य किया, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।

पत्रकार साथियों ने उन्हें एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में याद किया, जिन्होंने नई पीढ़ी को पत्रकारिता के मूल्यों से परिचित कराया। उनका सादा जीवन, स्पष्ट विचार और निर्भीक लेखनी हमेशा प्रेरणा देती रहेगी। कई वरिष्ठ पत्रकारों ने कहा कि गोपेश पांडेय जैसे लोग पत्रकारिता के स्तंभ होते हैं, जिनके जाने से एक खालीपन पैदा हो जाता है, जिसकी भरपाई आसान नहीं।

सोशल मीडिया पर भी उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। फेसबुक, व्हाट्सएप और एक्स जैसे मंचों पर उनके साथियों और शिष्यों ने पुरानी तस्वीरें और संस्मरण साझा कर उन्हें याद किया। सभी ने एक स्वर में कहा कि गोपेश पांडेय का योगदान काशी की पत्रकारिता के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। भाजपा नेताओं एवं पत्रकार संगठनों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति दें। निस्संदेह, गोपेश पांडेय की कलम भले ही शांत हो गई हो, लेकिन उनके विचार, मूल्य और योगदान पत्रकारिता की पीढ़ियों को हमेशा मार्गदर्शन देते रहेंगे।

गंगा से गगन तक आस्था का उत्सव, उल्लास की पतंगों से सजी काशी

गंगा से गगन तक आस्था का उत्सवउल्लास की पतंगों से सजी काशी 

मकर संक्रांति पर गंगा घाटों में डुबकी, विश्वनाथ धाम में विशेष भोग-आरती, हर छत पर पतंगबाजी और शहर भर में दान - पुण्य का महापर्व

सुरेश गांधी

वाराणसी. मकर संक्रांति के पावन अवसर पर धर्म एवं आस्था की नगरी काशी गुरुवार को पूरी तरह श्रद्धा, परंपरा और उल्लास के रंगों में डूबी नजर आई। तड़के सुबह से ही गंगा घाटों पर स्नान, दान और सूर्योपासना का क्रम शुरू हो गया, जो दोपहर तक अनवरत चलता रहा। ठंड की परवाह किए बिना श्रद्धालु गंगा, वरुणा सहित अन्य नदियों और तालाबों में स्नान कर तिल, गुड़, खिचड़ी और वस्त्र का दान करते दिखे। मकर संक्रांति पर काशी में आस्था, उत्सव और सामाजिक सहभागिता का ऐसा संगम दिखा, जहां गंगा की लहरों से लेकर आसमान की पतंगों तक हर ओर श्रद्धा और उल्लास की झलक साफ नजर आई।

बाबा विश्वनाथ की विशेष मध्याह्न भोग आरती

मकर संक्रांति पर काशी विश्वनाथ धाम में विशेष मध्याह्न भोग आरती संपन्न हुई। परंपरागत एवं सात्त्विक अन्न से बाबा का भोग लगाया गया। खिचड़ी, चिवड़ा, मूंगफली की पट्टी, पापड़ और अचार अर्पित कर विधि-विधान से आरती की गई। आरती के दौरान मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। बाबा के दर्शन-पूजन के लिए सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।

गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब

दशाश्वमेध, अस्सी, पंचगंगा, मणिकर्णिका समेत सभी प्रमुख घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। स्नान के बाद श्रद्धालु काल भैरव, काशी विश्वनाथ, बड़ा गणेश, संकट मोचन और दुर्गा मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे। काशी तीर्थ पुरोहित सभा की ओर से घाटों पर खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया। नगर निगम द्वारा अस्सी घाट पर निःशुल्क चाय की व्यवस्था भी की गई।

पतंगों से रंगा काशी का आसमान

मकर संक्रांति की दोपहर काशी की हर छत, हर मैदान और हर गली पतंगबाजी के उत्साह से भरी रही। आकर्षक और रंग-बिरंगी डिजाइन वाली पतंगों से पूरा आसमान सजा नजर आया। बच्चों के साथ-साथ बुजुर्गों ने भी पतंगबाजी का भरपूर आनंद लिया। खास बात यह रही कि इस बार पतंगबाजी में महिलाएं और युवतियां भी बढ़-चढ़कर शामिल हुईं और पारंपरिक सोच की सीमाएं टूटती दिखीं।

भजन, संगीत और शृंगार के आयोजन

रथयात्रा स्थित कन्हैया लाल स्मृति भवन में आवर्तन के 9वें वार्षिक उत्सव के तहत बच्चों ने गायन की प्रस्तुति दी। वहीं मणिकर्णिका घाट स्थित बाबा मसाननाथ मंदिर में भव्य शृंगार किया गया। सुगंधित पुष्पों और रंग-बिरंगी पतंगों से सजे बाबा मसाननाथ को ढुंढा, लाई, पट्टी और विविध मिष्ठानों का भोग अर्पित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरती के बाद सैकड़ों श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।

सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम

मेले, घाटों और मंदिरों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। हालांकि घाटों की ओर जाने वाली सकरी गलियों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण जाम जैसी स्थिति भी बनी रही। प्रशासन और पुलिस बल लगातार व्यवस्था संभालने में जुटा रहा।

चीनी मांझा बना खतरा

उत्सव के बीच एक चिंता भी सामने आई। पतंगबाजी में इस्तेमाल हो रहा चीनी मांझा जानलेवा साबित हो रहा है। वाराणसी में इसकी चपेट में आकर करीब दस राहगीर घायल हो गए। गनीमत रही कि मफलर और जैकेट ने कई लोगों की जान बचा ली। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित मांझे के प्रयोग की अपील की है।

गोपेश पांडेय के निधन से काशी का पत्रकार जगत शोकाकुल

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