Thursday, 15 October 2026

सड़क खोदने में तेजी, मरम्मत में मनमानी!

सड़क खोदने में तेजी, मरम्मत में मनमानी! 

कहीं सीवर पिट बंद, कहीं उखड़े चौके; विरोध पर ठेकेदार की दोटूक—शिकायत करिए, कोई फर्क नहीं पड़ता

रानीपुर की गली में गैस पाइपलाइन बिछाने के बाद मरम्मत की खुली पोल, बिना मिट्टी-गिट्टी डाले पाट दी गई सड़क | ढलान ऐसा कि घरों में घुस सकता है बारिश का पानी, शहरभर में सड़क खोदकर छोड़ने का सिलसिला जारी

सुरेश गांधी

वाराणसी। काशी में विकास के नाम पर सड़कें खोदने का सिलसिला थम नहीं रहा। कहीं गैस पाइपलाइन बिछाई जा रही है तो कहीं पानी की पाइपलाइन, सीवर, नाली या बिजली के तारों के लिए सड़कें खोदी जा रही हैं। लेकिन काम पूरा होने के बाद सड़क को पहले जैसी स्थिति में लौटाने की जिम्मेदारी मानो किसी की नहीं रह जाती। नतीजा यह कि लोगों को टूटी सड़कों, उखड़े पत्थरों, बंद सीवर पिट और जलभराव के खतरे के बीच आवागमन करना पड़ रहा है। रानीपुर वार्ड की एक गली में गैस पाइपलाइन बिछाने के बाद हुई मरम्मत ने इस व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्थानीय नागरिक का आरोप है कि विरोध करने पर ठेकेदार ने कथित तौर पर दोटूक जवाब दिया—'हम ऐसे ही बनाएंगे, शिकायत करिए। जमकर करिए, कोई फर्क नहीं पड़ता।' सवाल यह है कि जब शिकायत का भी कोई असर नहीं पड़ने का भरोसा हो, तो सड़क की गुणवत्ता और नागरिकों की परेशानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

चौके उखाड़े, गड्ढा पाटा और खत्म हो गई जिम्मेदारी!

रानीपुर वार्ड में पूरबी ट्रांसफार्मर के सामने वाली गली में गेल की गैस पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़क मरम्मत की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिक के मुताबिक, गली के चौके उखाड़ दिए गए, लेकिन खुदाई के बाद गड्ढे में पर्याप्त मिट्टी और गिट्टी डालकर जमीन को ठीक से तैयार किए बिना ही मरम्मत कर दी गई। आरोप है कि सड़क के चौकों को भी सही ढंग से जमाने की जहमत नहीं उठाई गई। यही वजह है कि कई चौके बचे रह गए, जबकि आसपास के हिस्से उखड़े या असमान दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब सड़क को व्यवस्थित ढंग से बनाया गया होता, तो चौकों की यह स्थिति क्यों बनती? क्या मरम्मत के नाम पर केवल खुदाई वाले हिस्से को ऊपर से पाट देना ही पर्याप्त है? क्या काम की गुणवत्ता की जांच करने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा?

ढलान बिगड़ा तो घरों में घुसेगा पानी

सड़क की मरम्मत में कथित लापरवाही का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। स्थानीय नागरिक ने आरोप लगाया कि गली का ढलान भी ठीक नहीं रखा गया है। ऐसे में बारिश होने पर पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है और घरों में पानी घुसने का खतरा पैदा हो सकता है। गली में सीवर और अन्य पिट बंद हो जाने की शिकायत भी सामने आई है। यह स्थिति बताती है कि सड़क की मरम्मत में जरा-सी लापरवाही भी स्थानीय लोगों के लिए लंबे समय की मुसीबत बन सकती है। सड़क ऊंची-नीची हो जाए, जलनिकासी के रास्ते बंद हो जाएं और बारिश का पानी घरों की ओर मुड़ने लगे, तो इसका खामियाजा उन परिवारों को भुगतना पड़ता है जिनका इस काम में कोई दोष नहीं है। 

शिकायत से भी नहीं पड़ता फर्क?

सबसे गंभीर सवाल मरम्मत की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायत पर कथित प्रतिक्रिया को लेकर है। स्थानीय नागरिक के अनुसार, ठेकेदार बताए जा रहे गौतम मिश्र से जब काम की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई गई तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि काम ऐसे ही होगा और शिकायत करनी है तो कर दीजिए, कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि नागरिक की ओर से बताई गई यह बात सही है, तो यह केवल सड़क निर्माण की गुणवत्ता का मामला नहीं, बल्कि जवाबदेही की पूरी व्यवस्था पर सवाल है। ठेकेदार को काम की गुणवत्ता पर सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि शिकायत को बेअसर बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाहिए। हालांकि, इस मामले में संबंधित ठेकेदार और गेल के जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना जरूरी है।

शहरभर में एक ही कहानी, जवाबदेही किसकी?

रानीपुर की गली कोई अकेला मामला नहीं है। शहर के अलग-अलग इलाकों में पानी की पाइपलाइन, गैस पाइपलाइन, सीवर, नाली और बिजली के तारों के लिए सड़कें खोदी जाती हैं। कई जगह काम पूरा होने के बाद सड़क की मरम्मत में देरी होती है तो कहीं मरम्मत की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। स्थानीय नागरिकों की शिकायत है कि खुदाई के बाद सड़कें लंबे समय तक बदहाल रहती हैं और मरम्मत होने पर भी पहले जैसी स्थिति बहाल नहीं हो पाती। ऐसे में सवाल केवल एक ठेकेदार या एक गली का नहीं है। पाइपलाइन बिछाने वाली एजेंसी, काम कराने वाले विभाग, ठेकेदार और गुणवत्ता की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। सड़क खोदने की अनुमति देने से लेकर मरम्मत पूरी होने और उसकी गुणवत्ता जांचने तक की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

विकास के नाम पर जनता को मिले गड्ढे क्यों?

शहर को गैस, पानी, सीवर और बेहतर बिजली व्यवस्था की जरूरत है। इसके लिए सड़क की खुदाई भी कई बार अपरिहार्य है। लेकिन विकास कार्यों का उद्देश्य नागरिकों की सुविधा बढ़ाना है, उनकी परेशानी को स्थायी बनाना नहीं। पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़क की मरम्मत करना कोई एहसान नहीं, बल्कि काम का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए। नगर निगम और संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को चाहिए कि रानीपुर की गली की जांच कराकर सड़क, चौकों, ढलान और बंद पिट की स्थिति दुरुस्त कराएं। साथ ही, शहर में जहां-जहां सड़कों की खुदाई हुई है, वहां मरम्मत की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। दोष मिलने पर जिम्मेदार एजेंसी और ठेकेदार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो। सवाल सीधा है—सड़क जनता की सुविधा के लिए बनती है या उसे खोदकर छोड़ देना ही विकास का नया मानक बन गया है?

एक नवंबर को कोरौता में जुटेंगे जदयू के कार्यकर्ता, श्रवण कुमार ने परखी तैयारी

एक नवंबर को कोरौता में जुटेंगे जदयू के कार्यकर्ता, श्रवण कुमार ने परखी तैयारी 

संजय झा और निशांत कुमार की मौजूदगी में होगा राज्यस्तरीय सम्मेलन, वाराणसी में तैयारी बैठक कर पदाधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी

सुरेश गांधी

वाराणसी। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) एक नवंबर को वाराणसी के कोरौता रामलीला मैदान में राज्यस्तरीय विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करेगा। सम्मेलन को ऐतिहासिक और सफल बनाने के लिए गुरुवार को लोहता भट्ठी स्थित शगुन पैलेस में तैयारी बैठक हुई। बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री और उत्तर प्रदेश संगठन प्रभारी श्रवण कुमार ने विभिन्न मंडलों के पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों से तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने सभी को जिम्मेदारियां सौंपते हुए सम्मेलन की सफलता के लिए पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया। सम्मेलन में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा तथा बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार शामिल होंगे। इन नेताओं की मौजूदगी में होने वाले सम्मेलन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है।

मंडलवार तैयारियों की समीक्षा

बैठक की अध्यक्षता जदयू के प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह पटेल ने की। मुख्य अतिथि श्रवण कुमार ने एक-एक कर पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों से तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने सम्मेलन को सफल बनाने के लिए संगठनात्मक स्तर पर समन्वय और व्यापक जनसंपर्क पर जोर दिया। उपस्थित पदाधिकारियों ने उन्हें अपने-अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने का भरोसा दिलाया। बैठक में वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज, आजमगढ़, गोरखपुर, बस्ती, देवीपाटन और अयोध्या मंडल समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के पदाधिकारी शामिल हुए। प्रदेश पदाधिकारियों, मंडल अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों और पार्टी के वरिष्ठ व युवा कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन की तैयारियों पर विचार-विमर्श किया।

कई वरिष्ठ पदाधिकारी रहे मौजूद

बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष कल्पनाथ वर्मा, शालिनी सिंह पटेल, सुशील कश्यप और रजनीश पटेल, प्रदेश महासचिव एवं वाराणसी मंडल प्रभारी अवधेश सिंह, मिर्जापुर मंडल प्रभारी संजय सिंह पटेल, भैया हरिशंकर पटेल, सुभाष पाठक, अभिषेक राय, सुशील पटेल और राजेश सिंह मौजूद रहे। इसके अलावा प्रदेश प्रवक्ता विनीत तिवारी, प्रदेश सचिव अतुल प्रताप सिंह पटेल, नौशाद खान, प्रवीण पटेल, जय प्रकाश पटेल, संतोष पटेल और अजय चौधरी, कार्यालय प्रभारी ओम प्रकाश वर्मा तथा प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के अध्यक्ष ओमप्रकाश उपाध्याय भी उपस्थित रहे। वाराणसी के जिलाध्यक्ष सच्चिदानंद ब्रह्मचारी, भदोही के जिलाध्यक्ष सर्वेश राय, जौनपुर के जिलाध्यक्ष साहब लाल पटेल, मिर्जापुर के जिलाध्यक्ष रामेश्वर सिंह, सोनभद्र के जिलाध्यक्ष सचिन पटेल और बस्ती के जिलाध्यक्ष राजेश चौधरी समेत अन्य पदाधिकारियों ने भी भाग लिया। भदोही किसान प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र राय, कोरौता बाजार के आसपास के गांवों के कई प्रधान और सैकड़ों कार्यकर्ता भी बैठक में शामिल हुए।

सड़क खोदने में तेजी, मरम्मत में मनमानी!

सड़क खोदने में तेजी , मरम्मत में मनमानी !  कहीं सीवर पिट बंद , कहीं उखड़े चौके ; विरोध पर ठेकेदार की दोटूक — शिकायत करिए , ...