Thursday, 20 August 2026

राजमार्गों पर टेंपो की ‘मनमानी’ पर ब्रेक, एलपीजी ऑटो भी होंगे बाहर

राजमार्गों पर टेंपो की ‘मनमानी पर ब्रेक, एलपीजी ऑटो भी होंगे बाहर 

आरटीए की बैठक में मंडलायुक्त का सख्त फरमानअनुमन्य दूरी के बाद संचालन पूरी तरह बंद, 280 ऑटो को तीन माह में सीएनजी कराने का आदेश

सुरेश गांधी

वाराणसी। शहर और राजमार्गों पर बेतरतीब सार्वजनिक परिवहन को लेकर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने साफ निर्देश दिया कि राजमार्गों पर टेंपो का संचालन अनुमन्य दूरी से आगे किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाए। नियम तोड़कर सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाए और यातायात व्यवस्था को किसी भी तरह की मनमानी के हवाले न छोड़ा जाए।

मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (आरटीए) की बैठक में परिवहन व्यवस्था से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने अधिकारियों को यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराने और उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।

280 एलपीजी ऑटो पर भी शिकंजा

बैठक में एलपीजी सिलेंडर से चलने वाले करीब 280 ऑटो रिक्शा भी प्रशासन के निशाने पर रहे। मंडलायुक्त ने इनके संचालन को रोकते हुए संबंधित वाहनों को तीन महीने के भीतर सीएनजी में कन्वर्जन कराने का निर्देश दिया। यानी निर्धारित समय में ईंधन परिवर्तन नहीं कराने वाले ऑटो के संचालन पर कार्रवाई की राह साफ कर दी गई है।

शहर में नए ऑटो परमिट पर भी रोक की कवायद

शहर में पहले से ही बड़ी संख्या में ऑटो के परमिट होने के कारण यातायात दबाव बढ़ने का मुद्दा भी बैठक में उठा। सुगम यातायात व्यवस्था को देखते हुए नए ऑटो परमिट जारी करने पर रोक के संबंध में भी चर्चा हुई। प्रशासन का जोर अब संख्या बढ़ाने के बजाय मौजूदा परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित करने पर है।

बड़ी बसों की जगह मिनी बसों की मांग पर मंथन

प्राइवेट बस संचालकों की ओर से बड़ी बसों के स्थान पर मिनी बसों के संचालन की मांग भी बैठक में रखी गई। मंडलायुक्त ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को इस प्रस्ताव पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इससे शहर और आसपास के क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को यातायात के अनुरूप ढालने की कोशिश के संकेत मिले हैं। बैठक में आरटीए से जुड़े लंबित प्रकरणों का नियमानुसार शीघ्र निस्तारण करने तथा विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। मंडलायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि परिवहन व्यवस्था का उद्देश्य केवल वाहनों का संचालन नहीं, बल्कि आमजन को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यातायात उपलब्ध कराना है। बैठक में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार समेत परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

चीनी की चढ़ती कीमत से मिठास पर संकट, छोटे कारोबारियों का कारोबार बंद

चीनी की चढ़ती कीमत से मिठास पर संकट, छोटे कारोबारियों का कारोबार बंद 

10-15 दिनों में अप्रत्याशित उछाल से बिस्किट, कन्फेक्शनरी और मिठाई कारोबारियों में रोषत्योहारों से पहले कीमतें बढ़ने की आशंका, जमाखोरी पर रोक की मांग

सुरेश गांधी

वाराणसी। चीनी के दाम में पिछले 10-15 दिनों में हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने बिस्किट, कन्फेक्शनरी, मिठाई और छोटे खाद्य कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। काशी बिस्किट एंड कन्फेक्शनरी व्यापार मंडल की गुरुवार को अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा के सिगरा स्थित आवास पर हुई आपात बैठक में व्यापारियों ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर गहरा रोष जताया। व्यापारियों का कहना था कि लागत लगातार बढ़ने से छोटे और कुटीर उद्योगों के सामने कारोबार चलाना मुश्किल हो गया है और कई इकाइयां पिछले एक सप्ताह से बंद हैं।

अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा ने कहा कि चीनी केवल कारोबार की कच्ची सामग्री नहीं, बल्कि आम आदमी की रसोई की आवश्यक वस्तु है। कीमतों में अचानक हुई वृद्धि का असर व्यापारी से लेकर उपभोक्ता तक पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बेकरी, मिठाई, टॉफी और कन्फेक्शनरी जैसे छोटे उद्योग पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। अब चीनी की कीमत ने उनकी लागत का गणित पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

त्योहारी बाजार पर पड़ेगा सीधा असर

प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश निरंकारी ने कहा कि रक्षाबंधन और दुर्गापूजा जैसे त्योहारों के कारण आने वाले दिनों में मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे समय चीनी के दाम में उछाल से मिठाई की लागत बढ़ना तय है। दूध, खोवा, घी, मैदा और ड्राई फ्रूट्स जैसी महंगी सामग्री के साथ चीनी की बढ़ी कीमत जुड़ने पर मिठाइयों के दाम बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। युवा वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने कहा कि छोटे कारोबारी लागत और बिक्री मूल्य के बीच संतुलन नहीं बना पा रहे हैं। लागत बढ़ने के बावजूद पूरा भार ग्राहक पर डालना संभव नहीं है। कीमत बढ़ाने पर बिक्री घटने का डर है और पुरानी कीमत पर बिक्री करने से मुनाफा लगातार सिमट रहा है।

बड़े भंडारण पर भी हो निगरानी

भाजपा कल्याण बोर्ड के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राजकुमार शर्मा ने कहा कि सरकार को बड़े थोक कारोबारियों और उद्योगपतियों के गोदामों में रखे चीनी के स्टॉक की भी निगरानी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह छोटे व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा निर्धारित होती है, उसी तरह बड़े भंडारकों के लिए भी प्रभावी स्टॉक सीमा तय हो, ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगे। युवा वाराणसी व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष दीप्तिमान देव गुप्ता ने कहा कि चीनी के बढ़ते दाम से आम आदमी का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए चाय से लेकर मीठी चीजों तक की लागत बढ़ गई है। सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

सस्ती चीनी उपलब्ध कराने की मांग

युवा काशी बिस्किट एंड कन्फेक्शनरी व्यापार मंडल के महामंत्री मनीष गुप्ता ने जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, चीनी के दाम तत्काल कम कराने और राशन की दुकानों के माध्यम से सस्ती चीनी उपलब्ध कराने की मांग की। व्यापारियों ने कहा कि यदि कीमतों पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ तो त्योहारों के बाजार में मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों पर इसका व्यापक असर दिखाई देगा। बैठक में रमेश निरंकारी, सुशील लखमणि, संजय गुप्ता, दीप्तिमान देव गुप्ता, मनीष गुप्ता, धर्मेंद्र सिंह, शरद गुप्ता, अंबे सिंह, जितेंद्र गुप्ता, नीरज गुप्ता, जय निहलानी, विकास गुप्ता, जीतन चौधरी, प्रिंस गुप्ता, रोशन जायसवाल सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।

पहले दिन ही 4200 वर्गमीटर बुक, विदेशी खरीदारों का भी बढ़ा रुझान

पहले दिन ही 4200 वर्गमीटर बुक, विदेशी खरीदारों का भी बढ़ा रुझान 

42 देशों के 144 खरीदारों ने कराया पंजीकरण, ग्राउंड फ्लोर का हॉल-शॉप एरिया फुल

सुरेश गांधी

भदोही। भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय कारोबारी मंच इंडिया कार्पेट एक्सपो के 50वें गोल्डन जुबली संस्करण को लेकर बाजार की हलचल तेज हो गई है। चार से सात अक्टूबर तक कार्पेट एक्सपो मार्ट, भदोही में प्रस्तावित एक्सपो की स्टॉल बुकिंग शुरू होते ही निर्यातकों ने जबरदस्त उत्साह दिखाया। बुकिंग के पहले ही दिन करीब 4200 वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र बुक हो गया। इससे साफ है कि स्वर्ण जयंती संस्करण को लेकर घरेलू निर्यातकों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की उम्मीदें भी मजबूत हैं।

बुकिंग शुरू होते ही ग्राउंड फ्लोर का हॉल और शॉप एरिया पूरी तरह बुक हो गया। ऊपरी हॉल में भी सीमित स्थान ही अब उपलब्ध है। वहीं प्रथम और द्वितीय तल के शॉप एरिया में प्रदर्शनी स्थल अभी उपलब्ध हैं, जहां बुकिंग के लिए निर्यातकों की सक्रियता लगातार बनी हुई है। सीमित स्थान को देखते हुए परिषद ने इच्छुक निर्यातकों से जल्द बुकिंग सुनिश्चित करने की अपील की है।

42 देशों से पहुंचेंगे 144 विदेशी खरीदार

परिषद के अध्यक्ष मुकेश कुमार गोम्बर ने बताया कि एक्सपो की अंतरराष्ट्रीय तस्वीर भी उत्साह बढ़ाने वाली है। अब तक 42 देशों के 144 विदेशी खरीदार इसमें शामिल होने के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में खरीदारों की संख्या और बढ़ सकती है। स्वर्ण जयंती संस्करण में भारतीय कालीनों की नई डिजाइन, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने रखने की तैयारी है।

नए बाजारों तक पहुंचेगा भदोही का हुनर

कालीन निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा आयोजित यह एक्सपो भारतीय कालीन उद्योग के लिए केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि वैश्विक कारोबार का महत्वपूर्ण संपर्क केंद्र है। विदेशी खरीदारों और भारतीय निर्यातकों की सीधी कारोबारी मुलाकातों के जरिए नए बाजार तलाशने, पुराने कारोबारी रिश्तों को मजबूत करने और निर्यात के नए अवसर खोलने की कोशिश होगी। भदोही के कालीन उद्योग के लिए 50वां संस्करण इसलिए भी खास है कि यह आयोजन जिले की हस्तनिर्मित कालीन परंपरा को वैश्विक बाजार में नई पहचान देने का अवसर लेकर आया है। परिषद को उम्मीद है कि गोल्डन जुबली इंडिया कार्पेट एक्सपो भारतीय कालीन निर्यात को नई गति देने के साथ भदोही समेत देशभर के निर्यातकों के लिए कारोबार के नए दरवाजे खोलेगा। पहले दिन की बुकिंग और विदेशी खरीदारों के पंजीकरण ने एक्सपो की शुरुआत से पहले ही उसकी संभावनाओं का संकेत दे दिया है।

गंगा की गोद में डूबा घाटों का संसार, छत पर जल रही चिताएं

गंगा की गोद में डूबा घाटों का संसार, छत पर जल रही चिताएं

जलस्तर 68.35 मीटर दर्ज, चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर, खतरे का निशान 71.262 मीटर, खतरे के निशान से 2.912 मीटर नीचे है  

नमो घाट से पुरानापुल तक पुलिस आयुक्त और डीएम की बोट से निगरानी

84 घाट जलमग्न, मणिकर्णिका में शवदाह प्लेटफार्म डूबे

वरुणा किनारे सलारपुर-सरैया समेत निचले इलाकों पर प्रशासन की पैनी नजर

सुरेश गांधी

वाराणसी। काशी में गंगा का बढ़ता पानी अब सिर्फ घाटों की सीढ़ियां नहीं ढक रहा, बल्कि शहर की सदियों पुरानी जीवन-धारा के उन दृश्यों को भी बदल रहा है, जिनमें आस्था, मृत्यु और मोक्ष एक साथ सांस लेते हैं। गंगा के उफान ने काशी के सभी 84 घाटों को अपनी जलराशि में समेट लिया है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र जैसे महाश्मशान घाटों पर बाढ़ का असर सबसे मार्मिक है। शवदाह के पारंपरिक प्लेटफार्म पानी में डूब चुके हैं और मजबूरी में ऊंचे स्थानों तथा छतों पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

गुरुवार शाम छह बजे केंद्रीय जल आयोग के राजघाट गेज स्थल पर गंगा का जलस्तर 68.35 मीटर दर्ज किया गया। चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर, खतरे का निशान 71.262 मीटर और अब तक का उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 73.901 मीटर है। इस समय नदी खतरे के निशान से 2.912 मीटर नीचे है, लेकिन घाटों और तटवर्ती निचले क्षेत्रों में पानी के फैलाव ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। शाम छह बजे की स्थिति में जलस्तर का ट्रेंड स्थिर (Steady) दर्ज किया गया है। यह स्थिरता राहत जरूर देती है, लेकिन जमीनी हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं।

पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने गुरुवार को नमो घाट से पुरानापुल तक बोट से गंगा और वरुणा तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण किया। जल पुलिस और एनडीआरएफ की नावों के साथ अधिकारियों ने नदी के बहाव, जलस्तर और उन आबादियों की स्थिति देखी, जहां पानी बढ़ने की स्थिति में जनजीवन सबसे पहले प्रभावित हो सकता है। केशव घाट से आगे बढ़ते हुए सलारपुर, सरैया, कोनिया, पुल कोहना, ढेलवरिया और सराय मोहना समेत कई संवेदनशील क्षेत्रों का जायजा लिया गया। निरीक्षण का उद्देश्य केवल पानी की ऊंचाई नापना नहीं था, बल्कि यह देखना भी था कि यदि नदी का स्तर फिर बढ़ता है तो लोगों को कितनी तेजी से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सकता है।

घाट डूबे तो काशी का रोजमर्रा भी पानी में उतर गया

गंगा के बढ़ते पानी ने घाटों के बीच की वह परिचित दुनिया बदल दी है, जहां सुबह की आरती से लेकर शाम की गंगा आरती तक जीवन अपनी परंपरागत लय में चलता है। घाटों की सीढ़ियां पानी में समा चुकी हैं और कई स्थानों पर घाटों का संपर्क भी बाधित है। सबसे कठिन दृश्य मणिकर्णिका महाश्मशान का है। यहां अंतिम संस्कार के लिए बने प्लेटफार्म गंगा में डूब गए हैं। सामान्य दिनों में जहां चिताओं की अग्नि और गंगा की धारा एक साथ दिखाई देती है, वहां अब पानी के बीच शवदाह की जगह तलाशनी पड़ रही है। ऊंची छतों पर अंतिम संस्कार किए जाने की तस्वीरें काशी की इस बाढ़ की गंभीरता का प्रतीक बन गई हैं। हरिश्चंद्र घाट की स्थिति भी प्रभावित है और वहां घाट से जुड़ी गलियों में अंतिम संस्कार किए जाने की स्थिति सामने आई है। यानी काशी में बाढ़ का असर केवल नदी किनारे रहने वाले परिवारों तक सीमित नहीं है। यहां नदी के साथ जुड़ी आस्था, संस्कार, कारोबार और रोजमर्रा की गतिविधियां भी जलस्तर के साथ ऊपर-नीचे हो रही हैं।

वरुणा ने भी बढ़ाई चिंता

गंगा के साथ वरुणा नदी के तटवर्ती इलाकों की स्थिति भी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। सलारपुर और सरैया जैसे क्षेत्रों में पानी पहुंचने से निचली आबादी पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पहले से संवेदनशील क्षेत्रों में घर-घर जागरूकता अभियान चलाने और लोगों को सुरक्षित निकासी मार्गों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी संभावित स्थिति में प्रतिक्रिया का समय न्यूनतम रखा जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से पुलिस, जल पुलिस और एनडीआरएफ को लगातार सक्रिय रहने को कहा गया है।

राहत शिविर सक्रिय, निगरानी चौबीसों घंटे

पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया कि बाढ़ राहत शिविर प्रारंभ कर दिए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। राहत शिविरों और संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तथा पुलिस एवं एनडीआरएफ को राउंड--क्लॉक पेट्रोलिंग के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों में बच्चों तथा बुजुर्गों को जाने से रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्रवाई के लिए टीमें तैयार रखी गई हैं। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने गंगा और वरुणा के जलस्तर तथा प्रवाह की निरंतर निगरानी के निर्देश दिए। जलस्तर में होने वाले हर परिवर्तन की तत्काल समीक्षा करने के साथ संबंधित अधिकारियों और नियंत्रण कक्ष को सूचना देने को कहा गया है। राहत शिविरों में पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता, आवश्यक संसाधन, पहुंच मार्ग तथा राहत सामग्री की व्यवस्था सक्रिय रखने पर जोर दिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को बिना विलंब सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।

नदी किनारे अब चेतावनी ही सुरक्षा कवच

प्रशासन ने नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि वे अफवाहों पर भरोसा करें और केवल प्रशासन द्वारा जारी अधिकृत सूचनाओं को ही मानें। नदी किनारे बच्चों और बुजुर्गों की आवाजाही रोकने, जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखने और प्रशासन के निर्देश पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। गुरुवार को नमो घाट से पुरानापुल तक चली यह बोट निगरानी दरअसल काशी की उस चिंता का प्रत्यक्ष निरीक्षण थी, जहां नदी अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन उसका पानी शहर की संवेदनशील नसों तक पहुंच चुका है। जलस्तर फिलहाल 68.35 मीटर पर स्थिर है, मगर घाटों का जलमग्न होना बता रहा है कि बाढ़ को केवल खतरे के निशान से नहीं आंका जा सकता। काशी के लिए नदी सिर्फ नदी नहीं है। यहां गंगा शहर की स्मृति, आस्था और जीवन का हिस्सा है। इसलिए जब गंगा घाटों की सीढ़ियां निगलती है तो पानी केवल पत्थरों पर नहीं चढ़ताउसका असर काशी के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन तक पहुंचता है। फिलहाल प्रशासन की नजर जलस्तर की हर हलचल पर है। पुलिस, एनडीआरएफ और जल पुलिस को चौबीस घंटे तैयार रखा गया है। राहत शिविर सक्रिय हैं और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। गंगा का जलस्तर स्थिर जरूर है, लेकिन काशी अभी सामान्य होने से दूर है।

राजमार्गों पर टेंपो की ‘मनमानी’ पर ब्रेक, एलपीजी ऑटो भी होंगे बाहर

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