Monday, 4 May 2026

माटीकला को मिलेगा रफ्तार का पहिया: वाराणसी में कारीगरों को मिलेंगे नि:शुल्क इलेक्ट्रॉनिक चाक

माटीकला को मिलेगा रफ्तार का पहिया: वाराणसी में कारीगरों को मिलेंगे नि:शुल्क इलेक्ट्रॉनिक चाक 

प्लास्टिक पर रोक के बीच सरकार की पहल—50 कुम्हारों को मिलेगा आधुनिक उपकरण, 30 मई तक आवेदन

सुरेश गांधी

वाराणसी. पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक माटीकला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी के कुम्हारों और शिल्पकारों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत 50 नि:शुल्क विद्युत चालित चाक (इलेक्ट्रॉनिक चाक) वितरित किए जाएंगे। इससे सिर्फ प्लास्टिक के विकल्प के रूप में मिट्टी के उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कारीगरों की आय और कार्यक्षमता में भी सुधार होगा।

जिला ग्रामोद्योग विभाग के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य माटीकला से जुड़े कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनके व्यवसाय को सशक्त बनाना है। इलेक्ट्रॉनिक चाक के माध्यम से कम समय में अधिक और बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे, जिससे बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

योजना के तहत 18 से 55 वर्ष आयु वर्ग के कुम्हार/शिल्पकार आवेदन कर सकते हैं। हालांकि एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति को इसका लाभ मिलेगा और जिन लाभार्थियों को पहले इस तरह की सहायता मिल चुकी है, उन्हें पात्र नहीं माना जाएगा। इच्छुक आवेदक 30 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद आवश्यक दस्तावेजों के साथ हार्ड कॉपी जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, टकटकपुर में जमा करना अनिवार्य होगा। आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड, निवास जाति प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक, फोटो और ग्राम प्रधान द्वारा प्रमाणित सिफारिश पत्र शामिल हैं। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ने बताया कि यह योजना कुम्हार समुदाय के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे पारंपरिक कला को नई पहचान मिलेगी और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों का इस्तेमाल भी बढ़ेगा।

महत्वपूर्ण बिंदु

50 कारीगरों को मिलेगा नि:शुल्क इलेक्ट्रॉनिक चाक. 30 मई 2026 तक आवेदन की अंतिम तिथि. एक परिवार से एक ही आवेदक पात्र. टकटकपुर स्थित कार्यालय में जमा होगी हार्ड कॉपी. सरकार की यह पहल सिर्फ कारीगरों के जीवन में आर्थिक मजबूती लाने का माध्यम बनेगी, बल्किमिट्टी से जुड़ी विरासतको आधुनिक दौर में नई उड़ान भी देगी।

जनादेश : पांच राज्यों के नतीजों ने बदली सियासत की दिशा, 2029 की पटकथा तैयार

जनादेश : पांच राज्यों के नतीजों ने बदली सियासत की दिशा, 2029 की पटकथा तैयार 

बंगाल से केरल तक बदले समीकरण, यह सिर्फ चुनाव नहींराष्ट्रीय राजनीति का निर्णायक मोड़

सुरेश गांधी

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे केवल सरकारों के गठन का मामला भर नहीं हैं, बल्कि ये देश की बदलती राजनीतिक धारा का स्पष्ट संकेत भी हैं। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन, असम में निरंतरता, केरल में बदलाव और तमिलनाडु-पुडुचेरी में नए समीकरणइन सभी परिणामों ने मिलकर यह तय कर दिया है कि आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। सबसे बड़ा संदेश पश्चिम बंगाल से आया है, जहां लंबे समय से जमी सत्ता को मतदाताओं ने बदलने का निर्णय लिया। यह बदलाव केवल एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि उस मानसिकता को दर्शाता है जिसमें मतदाता अब स्थिरता के साथ-साथ निर्णायक नेतृत्व और स्पष्ट नीतियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। असम में सत्ता की वापसी यह बताती है कि यदि शासन में निरंतरता और विकास का भरोसा बना रहे, तो जनता उसे दोहराने में संकोच नहीं करती।

केरल में सत्ता परिवर्तन और वहां सहयोगी दलों की भूमिका यह दर्शाती है कि गठबंधन राजनीति अभी भी प्रासंगिक है, लेकिन उसका आधार अब केवल परंपरागत समीकरण नहीं, बल्कि प्रदर्शन और भरोसे पर टिक रहा है। तमिलनाडु और पुडुचेरी में बदले समीकरण यह संकेत देते हैं कि दक्षिण भारत की राजनीति भी अब नए प्रयोगों और विकल्पों के लिए तैयार है। इन चुनाव परिणामों का सबसे व्यापक प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर दिखता है। यह जनादेश उस नेतृत्व के प्रति बढ़ते विश्वास को रेखांकित करता है, जिसने पिछले एक दशक में अपनी राजनीतिक पहुंच को निरंतर विस्तार दिया है। निस्संदेह, इन नतीजों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को और मजबूत किया है। यह स्पष्ट हो रहा है कि उनका राजनीतिक प्रभाव अब केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश में गहराई तक स्थापित हो चुका है।

यही कारण है कि इन चुनावों को 2027 और 2029 के लिहाज से “सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है। मतदाताओं का रुझान यह संकेत देता है कि यदि यही प्रवृत्ति बनी रही, तो आगामी लोकसभा चुनाव में भी इसी प्रकार का प्रभाव देखने को मिल सकता है। अंततः, यह कहा जा सकता है कि 2026 का यह जनादेश केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक राजनीतिक प्रवाह का उदय हैएक ऐसा प्रवाह, जो फिलहाल रुकता हुआ नहीं दिखता। भारतीय राजनीति की दिशा और दशा दोनों को बदलने का संकेत दे दिया है। 2026 के इस जनादेश में जहां एक ओर भाजपा का विस्तार दिखा, वहीं केरल में मुस्लिम लीग जैसी क्षेत्रीय सहयोगी पार्टियों की निर्णायक भूमिका भी उभरकर सामने आई। यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि गठबंधन राजनीति के नए समीकरण भी तय कर रहा है। यह जश्न केवल चुनावी जीत का प्रतीक नहीं था, बल्कि एक नई राजनीतिक दिशा, नए संकल्प और जनविश्वास की अभिव्यक्ति भी था।

तीन राज्यों में भगवा परचम, काशी में ‘विजय-उत्सव’ की गूंज : हर तरफ छाया भगवा उल्लास

तीन राज्यों में भगवा परचम, काशी में ‘विजय-उत्सव की गूंज : हर तरफ छाया भगवा उल्लास  

पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में ऐतिहासिक जीत पर कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी से गूंजा शहर

मिठाइयों और झालमुड़ी के साथ सजी जीत की मिठास, ‘परिवर्तनके संकल्प संग गूंजे जयघोष 

पश्चिम बंगाल की जनता ने परिवर्तन का जो संदेश दिया हैवह केवल सत्ता परिवर्तन नहींबल्कि जनभावनाओं का प्रबल उद्गार है : सदस्य सरवर सिद्दीकी 

सुरेश गांधी

वाराणसी. लोकतंत्र के महापर्व में जब जनादेश स्पष्ट होता है, तो उसका उत्सव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक भी बन जाता है। कुछ ऐसा ही दृश्य सोमवार को रोहनियां, संसदीय कार्यालय गुरुधाम, गुलाब बाड़ी सिगरा स्थित राजन शाही नगर कॉलोनी से लेकर शहर के हर चट्टी चैराहों पर देखने को मिला, जहां पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड विजय के बाद कार्यकर्ताओं का उत्साह मानो आसमान छूने लगा। तीनों राज्यों में मिली जीत ने भाजपा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार किया है। काशी की गलियों से लेकर प्रमुख चौराहों तक उत्सव का माहौल बना रहा, जहां कार्यकर्ताओं ने केवल अपनी खुशी जाहिर की, बल्कि आमजन के साथ मिलकर इस जीत को साझा किया।

रोहनियां कार्यालय परिसर विजय के वंदनवारों से सजा था। हर चेहरे पर जीत की चमक, हर हाथ में मिठास और हर जुबान पर जयघोषपूरा वातावरण उल्लास की तरंगों में डूबा नजर आया। कार्यकर्ता एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर बधाइयां दे रहे थे, वहीं झालमुड़ी की सोंधी खुशबू ने इस जश्न में बंगाल की सांस्कृतिक छटा भी घोल दी। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो बनारस की धरती पर बंगाल का उत्सव उतर आया हो। इस अवसर पर क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए इस विजय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह परिणाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व, गृह मंत्री अमित शाह की रणनीतिक कुशलता और जमीनी कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत का प्रतिफल है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सरवर सिद्दीकी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने परिवर्तन का जो संदेश दिया है, वह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि जनभावनाओं का प्रबल उद्गार है।

संसदीय कार्यालय गुरुधाम कार्यालय परिसर में कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दी। इस दौरान राहगीरों और स्थानीय लोगों के बीच मिठाइयों के साथ-साथ झालमुड़ी बांटकर उत्सव का माहौल और भी खास बना दिया गया। "नरेंद्र मोदी जिंदाबाद" और "मोदी है तो मुमकिन है" जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने एक भव्य विजय जुलूस निकाला, जो संसदीय कार्यालय से प्रारंभ होकर गुरुधाम चौराहा होते हुए इस्कॉन मंदिर तक पहुंचा। जुलूस के दौरान रास्ते भर कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों पर नृत्य किया और उत्साह के साथ क्षेत्र का भ्रमण किया। इस्कॉन मंदिर पहुंचने पर वहां के सेवादार और भक्त भी जुलूस में शामिल हो गए, जिससे आयोजन और भव्य हो गया।

अंत में जुलूस पुनः कार्यालय पहुंचकर संपन्न हुआ। संसदीय कार्यालय प्रभारी शिवशरण पाठक, क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी नवरतन राठी, संतोष सोलपुरकर, नंदजी पाण्डेय, शैलेंद्र मिश्रा, साधना वेदांती, गीता शास्त्री, अजय प्रताप सिंह, जगन्नाथ ओझा, निर्मल सिंह, अरविंद, सौरभ पाठक, पवन शर्मा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। सिगरा स्थित राजन शाही नगर कॉलोनी में उत्तर प्रदेश सरकार के आयुष, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्रदयालुके कैम्प कार्यालय पर भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने जीत का जोरदार जश्न मनाया। यहां बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं ने "मोदी-मोदी" के नारों के साथ प्रधानमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व को बधाई दी. कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर अपनी खुशी जाहिर की और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की शुभकामनाएं दीं। "बधाई हो बधाई हो मोदी जी" और "अमित शाह को बधाई हो" जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। यह जश्न केवल चुनावी जीत का प्रतीक नहीं था, बल्कि एक नई राजनीतिक दिशा, नए संकल्प और जनविश्वास की अभिव्यक्ति भी था।

माटीकला को मिलेगा रफ्तार का पहिया: वाराणसी में कारीगरों को मिलेंगे नि:शुल्क इलेक्ट्रॉनिक चाक

माटीकला को मिलेगा रफ्तार का पहिया : वाराणसी में कारीगरों को मिलेंगे नि : शुल्क इलेक्ट्रॉनिक चाक  प्लास्टिक पर रोक के बीच ...