महिलाओं की आवाज बनी जनसुनवाई, संवेदनशील प्रशासन का दिखा चेहरा
कारागार से
चौपाल
तक
महिला
सशक्तिकरण
का
संदेश,
आयोग
की
सदस्या
गीता
विश्वकर्मा
ने
अधिकारियों
को
दिए
सख्त
निर्देश
कुल 35 प्रकरण
में
से
पांच
मामलों
का
मौके
पर
ही
समाधान
महिला बंदियों
के
लिए
कौशल
विकास
और
पुनर्वास
संबंधी
प्रशिक्षण
कार्यक्रम
नियमित
रूप
से
संचालित
किए
जाएं,
ताकि
जेल
से
बाहर
आने
के
बाद
वे
आत्मनिर्भर
जीवन
की
ओर
बढ़
सकें
: गीता विश्वकर्मा
सुरेश गांधी
वाराणसी। समाज में महिलाओं
की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता केवल
सरकारी नारों तक सीमित न
रहे, बल्कि उसका लाभ अंतिम
पंक्ति में खड़ी महिला
तक पहुंचे, इसी उद्देश्य के
साथ उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्या
गीता विश्वकर्मा ने गुरुवार को
वाराणसी में जनसुनवाई और
निरीक्षण कार्यक्रम के माध्यम से
प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक मजबूत
संदेश दिया। जिला कारागार चौकाघाट से लेकर सर्किट
हाउस सभागार तक दिनभर चले
कार्यक्रमों में महिलाओं से
जुड़े मामलों की सुनवाई, पुनर्वास,
कौशल विकास और सुरक्षा जैसे
मुद्दे प्रमुखता से उठे। इस
दौरान आयोग की सदस्या
ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
महिलाओं से संबंधित मामलों
में लापरवाही किसी भी स्तर
पर स्वीकार नहीं की जाएगी
और हर शिकायत का
प्राथमिकता के आधार पर
निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
महिला बंदियों के बीच पहुंची संवेदना
कार्यक्रम की शुरुआत जिला
कारागार चौकाघाट के निरीक्षण से
हुई। यहां महिला बैरक
में निरुद्ध महिलाओं और उनके साथ
रह रहे बच्चों से
संवाद कर उनका कुशलक्षेम
जाना गया। जेल के
वातावरण में भी मानवीय
संवेदना का स्पर्श दिखाई
दिया, जब महिला बंदियों
और बच्चों को मिष्ठान, फल
और खिलौनों का वितरण किया
गया। निरीक्षण के दौरान गीता
विश्वकर्मा ने जेल प्रशासन
को निर्देश दिया कि महिला
बंदियों के लिए कौशल
विकास और पुनर्वास संबंधी
प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से संचालित
किए जाएं, ताकि जेल से
बाहर आने के बाद
वे आत्मनिर्भर जीवन की ओर
बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि आर्थिक
आत्मनिर्भरता ही महिलाओं को
सामाजिक शोषण और असुरक्षा
से बचाने का सबसे प्रभावी
माध्यम है। उन्होंने बंदियों
को यह भी प्रेरित
किया कि यदि वे
किसी प्रकार की आय अर्जित
कर रही हैं तो
उसे स्वयं सुरक्षित रखें और आत्मविश्वास
के साथ अपने भविष्य
को संवारें। यह संदेश केवल
जेल परिसर तक सीमित नहीं
था, बल्कि समाज में महिलाओं
की बदलती भूमिका और आत्मनिर्भर भारत
की परिकल्पना को भी प्रतिबिंबित
करता दिखा।
जनसुनवाई में उमड़ी महिलाओं की पीड़ा
कारागार निरीक्षण के बाद सर्किट
हाउस सभागार में आयोजित महिला
जनसुनवाई में बड़ी संख्या
में महिलाएं अपनी समस्याएं लेकर
पहुंचीं। कुल 35 प्रकरण प्राप्त हुए, जिनमें से
पांच मामलों का मौके पर
ही समाधान कर दिया गया।
बाकी मामलों को संबंधित विभागों
को तत्काल कार्रवाई के निर्देश के
साथ अग्रसारित किया गया। प्राप्त
शिकायतों में भूमि विवाद,
महिला उत्पीड़न, नौकरी दिलाने के नाम पर
ठगी, मकानों पर अवैध कब्जा
और उपचार संबंधी समस्याएं प्रमुख रहीं। जनसुनवाई के दौरान कई
महिलाओं ने अपनी व्यक्तिगत
पीड़ा साझा की। किसी
की जमीन पर अवैध
कब्जा था, तो कोई
घरेलू हिंसा और प्रताड़ना से
परेशान थी। कुछ महिलाएं
रोजगार के नाम पर
ठगी का शिकार हुई
थीं। इन शिकायतों ने
यह भी उजागर किया
कि महिलाओं के सामने सामाजिक
और आर्थिक दोनों प्रकार की चुनौतियां अब
भी गंभीर रूप से मौजूद
हैं।
सिर्फ सुनवाई नहीं, समाधान पर जोर
राज्य महिला आयोग की सदस्या
ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश
दिए कि महिला संबंधित
प्रकरणों में केवल औपचारिक
कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि
पीड़ितों को वास्तविक न्याय
दिलाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि सरकारी
योजनाएं तभी सार्थक मानी
जाएंगी, जब उनका लाभ
वास्तव में जरूरतमंद महिलाओं
तक पहुंचे। इसके लिए गांव-गांव और मोहल्लों
तक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
बैठक में उपस्थित विभिन्न
विभागों के अधिकारियों से
उन्होंने विभागीय योजनाओं की प्रगति और
उनके प्रभाव की जानकारी भी
ली। विशेष रूप से महिला
कल्याण, समाज कल्याण, श्रम,
पंचायत, स्वास्थ्य और दिव्यांगजन सशक्तिकरण
विभागों को समन्वय बनाकर
कार्य करने पर जोर
दिया गया।
कौशल विकास और आत्मनिर्भरता पर विशेष फोकस
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश
कौशल विकास मिशन और राष्ट्रीय
ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों
को निर्देशित किया गया कि
महिलाओं के लिए संचालित
प्रशिक्षण योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। घोषणा
की गई कि 8 मई
को कौशल विकास योजनाओं
के प्रचार-प्रसार हेतु जागरूकता चौपाल
आयोजित की जाएगी। इसका
उद्देश्य महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण
और स्वरोजगार के अवसरों से
जोड़ना है। दरअसल, वर्तमान
समय में महिला सशक्तिकरण
केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं
है। आर्थिक स्वतंत्रता और कौशल विकास
इसके सबसे मजबूत स्तंभ
बन चुके हैं। सरकार
और आयोग की कोशिश
भी अब इसी दिशा
में केंद्रित दिखाई दे रही है
कि महिलाएं सहायता पाने वाली नहीं,
बल्कि आत्मनिर्भर नागरिक बनें।
साइबर अपराध से बचाव का भी दिया संदेश
कार्यक्रम के अंत में
पुलिस विभाग द्वारा साइबर अपराध से बचाव संबंधी
पुस्तिकाओं का वितरण किया
गया। डिजिटल युग में महिलाओं
के खिलाफ बढ़ते ऑनलाइन अपराधों को देखते हुए
यह पहल महत्वपूर्ण मानी
जा रही है। महिलाओं
को सोशल मीडिया, ऑनलाइन
बैंकिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म
पर सतर्क रहने के उपाय
बताए गए। इससे यह
संदेश भी गया कि
महिलाओं की सुरक्षा अब
केवल भौतिक दुनिया तक सीमित नहीं,
बल्कि साइबर स्पेस में भी उतनी
ही आवश्यक है।
प्रशासनिक मौजूदगी ने बढ़ाया भरोसा
बैठक में प्रशासन
और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी
मौजूद रहे। इनमें एसीएम
प्रथम शिवानी सिंह, अपर पुलिस उपायुक्त
महिला अपराध नम्रता श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम अधिकारी
डी.के. सिंह, सहायक
जिला विद्यालय निरीक्षक राजन सिंह, संरक्षण
अधिकारी निरूपमा सिंह समेत विभिन्न
विभागों के प्रतिनिधि शामिल
रहे। अधिकारियों की मौजूदगी और
आयोग की सक्रियता ने
यह संदेश दिया कि महिलाओं
की समस्याओं को लेकर शासन
और प्रशासन अब अधिक संवेदनशील
और जवाबदेह बनने की कोशिश
कर रहा है।
महिला सशक्तिकरण का बदलता स्वरूप
वाराणसी में आयोजित यह जनसुनवाई केवल शिकायतों का मंच नहीं थी, बल्कि यह उस बदलती सामाजिक सोच का प्रतीक भी बनी, जहां महिलाओं को दया नहीं, अधिकार और अवसर देने की बात हो रही है। कारागार में बंद महिला से लेकर गांव की पीड़ित महिला तक, हर किसी को यह भरोसा दिलाने का प्रयास किया गया कि शासन उनके साथ खड़ा है। आज आवश्यकता केवल योजनाएं बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की है। यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सामाजिक जागरूकता इसी तरह साथ चलती रही, तो महिला सशक्तिकरण केवल सरकारी दस्तावेजों का विषय नहीं रहेगा, बल्कि समाज की वास्तविक तस्वीर बन सके.


