Wednesday, 6 May 2026

राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने निकले जागरूकता रथ

राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने निकले जागरूकता रथ 

जिला जज ने हरी झंडी दिखाकर प्रचार-प्रसार वाहनों को किया रवाना, आमजन से विवादों के त्वरित समाधान का आह्वान

सुरेश गांधी

वाराणसी। न्याय केवल अदालतों की चारदीवारी तक सीमित रहे, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरल, सुलभ और त्वरित रूप में पहुंचे. इसी उद्देश्य के साथ 9 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए गुरुवार को जनपद न्यायालय परिसर से व्यापक जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण वाराणसी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष संजीव शुक्ला ने प्रचार-प्रसार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

न्यायालय परिसर से रवाना हुए ये जागरूकता वाहन शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचकर लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व, उसकी प्रक्रिया और त्वरित न्याय व्यवस्था के प्रति जागरूक करेंगे। कार्यक्रम के दौरान जिला जज संजीव शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत केवल मुकदमों के निस्तारण का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और न्यायिक सरलता का एक प्रभावी मंच है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति के आधार पर मामलों का समाधान होता है, जिससे वर्षों पुराने विवाद भी कम समय में समाप्त हो जाते हैं और लोगों को आर्थिक मानसिक राहत मिलती है।

उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को न्यायालयी प्रक्रियाओं में अनावश्यक विलंब और खर्च से बचाने के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत एक महत्वपूर्ण पहल है। प्रचार-प्रसार वाहनों का उद्देश्य यही है कि अधिक से अधिक लोग इस व्यवस्था से जुड़ें और अपने लंबित मामलों का समाधान आपसी सहमति से करा सकें। जागरूकता अभियान के तहत वाहन विभिन्न तहसीलों, ब्लॉकों और सार्वजनिक स्थलों पर जाकर लोगों को यह जानकारी देंगे कि राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक ऋण, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक विवाद, बिजली-पानी बिल, श्रम विवाद, राजस्व वाद तथा अन्य सुलह योग्य मामलों का निस्तारण सरल प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

कार्यक्रम में मोटर दावा एवं दुर्घटना अधिकरण के पीठासीन अधिकारी रामकेश, अपर जनपद न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी आलोक कुमार सहित जनपद वाराणसी के समस्त न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासनिक स्तर पर मुख्य राजस्व अधिकारी अजीत कुमार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के अग्रणी जिला प्रबंधक अविनाश अग्रवाल तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस अवसर पर न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि लोक अदालतें भारतीय न्याय व्यवस्था की उस मानवीय सोच का प्रतीक हैं, जहां न्याय को सरल और जनोन्मुख बनाने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है। बीते वर्षों में राष्ट्रीय लोक अदालतों के माध्यम से लाखों मामलों का निस्तारण हुआ है, जिससे अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम हुआ है और लोगों का न्यायपालिका पर विश्वास भी मजबूत हुआ है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव राजीव मुकुल पाण्डेय ने बताया कि 9 मई को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकाधिक मामलों के निस्तारण के लिए व्यापक तैयारी की गई है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर अपने मामलों का त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान कराएं।

काशी में राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर शुरू हुआ यह अभियान केवल एक औपचारिक पहल नहीं, बल्कि न्याय को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। न्यायपालिका और प्रशासन की संयुक्त सक्रियता यह संकेत दे रही है कि अब न्याय व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, सरल और सहभागी बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास तेज हो चुके हैं।

भदोही महोत्सव: हुनर को मंच, संस्कृति को सम्मान और भविष्य को उड़ान

भदोही महोत्सव: हुनर को मंच, संस्कृति को सम्मान और भविष्य को उड़ान 

कालीन नगरी भदोही एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक पहचान को नए आयाम देने के लिए तैयार है। तीन दिवसीय भदोही महोत्सव अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने वाला सशक्त माध्यम बन चुका है। वर्ष 2018 में शुरू हुई यह पहल आज एक व्यापक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है, जहां स्थानीय कलाकारों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के सितारे तक एक मंच पर अपनी प्रस्तुति देते हैं। इस महोत्सव की खासियत इसकी समावेशी सोच है, जहां हर उम्र, हर वर्ग और हर प्रतिभा को अवसर मिलता है। योग, मैराथन, कवि सम्मेलन, लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रम और बॉलीवुड नाइट जैसे विविध आयोजनों के माध्यम से यह उत्सव केवल मनोरंजन करता है, बल्कि समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने का भी कार्य करता है। भदोही महोत्सव इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो एक छोटे शहर की पहल भी राष्ट्रीय पहचान का आधार बन सकती है, और यही इसे खास बनाता है 

सुरेश गांधी

किसी भी समाज की आत्मा उसकी संस्कृति में बसती है और उस संस्कृति की वास्तविक शक्ति उसकी प्रतिभाओं में निहित होती है। जब इन प्रतिभाओं को सही मंच, दिशा और अवसर मिलता है, तब वे केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाती हैं। कालीन नगरी भदोही में आयोजित होने वाला भदोही महोत्सव आज इसी परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन चुका है, एक ऐसा मंच, जहां सपनों को आकार मिलता है, हुनर को पहचान मिलती है और संस्कृति को सम्मान। वर्ष 2018 में एक छोटे से संकल्प के रूप में शुरू हुआ यह आयोजन आज एक विशाल सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। महोत्सव सोसाइटी के अध्यक्ष कृष्णा मिश्रा और डॉ. .के. गुप्ता द्वारा बोया गया यह बीज अब वटवृक्ष बनकर हजारों युवाओं के सपनों को छांव देने लगा है। 

पिछले नौ वर्षों की निरंतरता और प्रतिबद्धता ने इस महोत्सव को पूर्वांचल के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल कर दिया है। इस वर्ष भदोही महोत्सव 2026 का आयोजन 15 से 17 मई तक अभयनपुर मैदान (वाराणसी रोड) पर किया जा रहा है। यह आयोजन केवल तिथियों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव है, जहां कला, संस्कृति, खेल, साहित्य और सामाजिक चेतना एक साथ प्रवाहित होते हैं. महोत्सव की शुरुआत योग से होगी, एक ऐसा प्रतीक जो भारतीय जीवनदर्शन में संतुलन और स्वास्थ्य का संदेश देता है। प्रतिदिन शाम 5 से 7 बजे तक आयोजित सामूहिक योग शिविर केवल शारीरिक बल्कि मानसिक सशक्तिकरण का माध्यम बनेगा। वहीं 16 मई की सुबह अभयनपुर मैदान से संदीप पैलेस, गोपीगंज तक आयोजित मैराथन दौड़ युवाओं में ऊर्जा, अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की भावना को प्रोत्साहित करेगी। हालांकि भीषण गर्मी को देखते हुए इस बार पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं को स्थगित किया गया है, लेकिन यह निर्णय भी आयोजन की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाता है। मतलब साफ है महोत्सव केवल आयोजन नहीं, बल्कि जनहित को प्राथमिकता देने वाली सोच का प्रतिनिधित्व करता है।

भदोही महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसका सांस्कृतिक विस्तार है। 15 मई की शाम से शुरू होने वाले रंगारंग कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों और स्कूली बच्चों की प्रस्तुतियां इस बात का प्रमाण हैं कि यह मंच केवल बड़े नामों के लिए नहीं, बल्कि हर उस प्रतिभा के लिए है जो अपनी पहचान बनाना चाहती है। 16 मई की रात आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन इस महोत्सव का बौद्धिक और साहित्यिक केंद्र होगा। जब देश-विदेश के ख्यातिलब्ध कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, राजनीति, प्रेम, व्यंग्य और जीवन के विविध रंगों को प्रस्तुत करेंगे, तब यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विचारों का उत्सव बन जाएगा। महोत्सव का समापन 17 मई की रात बॉलीवुड नाइट के साथ होगा, जो आधुनिकता और परंपरा के संगम का प्रतीक बनेगा। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों की प्रस्तुतियां दर्शकों को रोमांचित करेंगी और यह साबित करेंगी कि भदोही अब केवल कालीन उद्योग तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मानचित्र पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

दरअसल, भदोही महोत्सव केवल कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि एक व्यापक सांस्कृतिक दर्शन है। यह वह मंच है जहां लोकगीत, लोकनृत्य, शास्त्रीय कला, आधुनिक संगीत और साहित्य एक साथ जीवंत होते हैं। यह विविधता ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है और भदोही महोत्सव इसे पूरी गरिमा के साथ प्रस्तुत करता है। भदोही, जो विश्वभर में अपने कालीन उद्योग के लिए प्रसिद्ध है, इस महोत्सव के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक मंच तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। यहां आयोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनी और स्थानीय व्यंजनों की प्रस्तुति केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को नई पहचान भी दिलाती है। इस महोत्सव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यह युवाओं को जोखिम लेने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करता है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में सफलता उन्हीं को मिलती है, जो अपने हुनर को पहचानते हैं और उसे प्रदर्शित करने का साहस रखते हैं।

भदोही महोत्सव इसी साहस को मंच देता है। सामाजिक दृष्टि से भी यह आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि स्वच्छता, जागरूकता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है। पिछले वर्षों में स्वच्छता के प्रति बढ़ती जागरूकता इस बात का प्रमाण है कि ऐसे आयोजनों का समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सोशल मीडिया के इस दौर में महोत्सव की लाइव स्ट्रीमिंग इसकी व्यापकता को और बढ़ा रही है। जो लोग किसी कारणवश इस आयोजन में उपस्थित नहीं हो पाते, वे भी इसके माध्यम से इससे जुड़ सकते हैं। यह आधुनिक तकनीक और पारंपरिक संस्कृति के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। हाल ही में सोशल मीडिया पर महोत्सव के स्थगन की अफवाहें भी सामने आईं, लेकिन आयोजकों ने उन्हें पूरी तरह निराधार बताते हुए स्पष्ट किया कि कार्यक्रम अपने निर्धारित समय और स्थान पर ही आयोजित होगा। यह पारदर्शिता और विश्वास इस आयोजन की विश्वसनीयता को और मजबूत करता है।

महोत्सव सोसाइटी के पदाधिकारियों, आर.सी. त्रिपाठी, जाबिर बाबू और डॉ. .के. गुप्ता ने जनसहयोग को इसकी सफलता की कुंजी बताया है। उनका मानना है कि यह आयोजन तभी सफल हो सकता है जब समाज का हर वर्ग इसमें सक्रिय रूप से भागीदारी करे। बता दें, इस महोत्सव में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है। यह निर्णय इस बात को दर्शाता है कि यह आयोजन केवल किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति के लिए है। यह समावेशिता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। भदोही महोत्सव का मूल उद्देश्य शांति, एकता और सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ावा देना है। यह आयोजन हमें यह सिखाता है कि विविधताओं के बीच सामंजस्य स्थापित कर ही समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है। अंततः, भदोही महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक विचार है, एक ऐसा विचार जो कहता है कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद भी बड़े बदलाव संभव हैं। यह उन अनगिनत प्रतिभाओं की उम्मीद है, जो एक मंच की तलाश में हैं। जब खुले आसमान के नीचे कला अपनी पूरी गरिमा के साथ जीवंत होती है, जब एक छोटे शहर के मंच पर बड़े सपनों को उड़ान मिलती है, और जब संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि भविष्य का मार्गदर्शन बनती है, तब भदोही महोत्सव केवल आयोजन नहीं रहता, बल्कि एक प्रेरणा बन जाता है। और शायद यही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

स्थानीय प्रतिभाओं से लेकर बॉलीवुड तक कृसंस्कृति, कला और

संभावनाओं का संगम बनता भदोही महोत्सव : डाॅ. एके गुप्ता

जीवन दीप हास्पिटल के निदेशक एवं आयोजन के कर्ताधर्ता डाॅ. .के. गुप्ता ने बताया कि किसी भी समाज की वास्तविक ताकत उसकी प्रतिभाओं में निहित होती है, वे प्रतिभाएं जो अवसर मिलने पर केवल स्वयं को सिद्ध करती हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान भी बदल देती हैं। कालीन नगरी भदोही में आयोजित होने वाला भदोही महोत्सव अब इसी परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। धीरे-धीरे ही सही, लेकिन यह महोत्सव स्थानीय हुनर को तराशने और उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में स्थापित हो रहा है। यह सत्य है कि किसी भी प्रतिभा को निखारने में गुरुजनों की भूमिका अहम होती है, लेकिन उस प्रतिभा को मंच और मुकाम दिलाना कहीं अधिक बड़ी जिम्मेदारी है। यही जिम्मेदारी भदोही महोत्सव बखूबी निभा रहा है। महोत्सव के सांस्कृतिक आयाम इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं। कवि सम्मेलन, लोकगीत, लोकनृत्य, भोजपुरी नाइट और बॉलीवुड नाइट जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से कला और मनोरंजन का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। देश-विदेश के ख्यातिलब्ध कलाकार जब खुले मंच पर अपनी प्रस्तुति देंगे, तो वह दृश्य केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगा, बल्कि भदोही की सांस्कृतिक गरिमा को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। यह महोत्सव केवल मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता का संदेश देने वाला आयोजन भी है। यहां विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण देखने को मिलता है, जहां अलग-अलग विधाओं के कलाकार एक मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। यह भारतीय संस्कृति की उस उदारता को दर्शाता है, जो भिन्नताओं को स्वीकार कर उन्हें उत्सव में बदल देती है।

तीन दिन तक सजेगा प्रतिभाओं का मंच, कवि सम्मेलन

से लेकर बॉलीवुड नाइट तक रहेगा आकर्षण

भदोही, जो विश्वभर में अपने कालीन उद्योग के लिए प्रसिद्ध है, इस महोत्सव के जरिए अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को भी वैश्विक मंच तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हस्तशिल्प प्रदर्शनी और स्थानीय व्यंजनों की प्रस्तुति इस आयोजन को और भी जीवंत बना देती है। यह केवल स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन देता है, बल्कि उनके उत्पादों को नई पहचान भी दिलाता है। महोत्सव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यह युवाओं को जोखिम लेने और अपने हुनर को पहचानने के लिए प्रेरित करता है। आज के दौर में सफलता उन्हीं को मिलती है, जो चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ते हैं। भदोही के युवक-युवतियों के लिए यह मंच उनके सपनों को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। साथ ही, यह आयोजन स्वच्छता, जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है। सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी लाइव स्ट्रीमिंग इस बात का संकेत है कि यह महोत्सव समय के साथ कदमताल करते हुए अधिक व्यापक पहुंच बना रहा है। उनका कहना है कि भदोही की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए उसे वैश्विक पहचान दिलाना, स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना और रोजगार के नए अवसर सृजित करना। यही कारण है कि यह महोत्सव अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक आंदोलन बनता जा रहा हैकृएक ऐसा आंदोलन जो अंधेरों से लड़कर संभावनाओं की रोशनी फैलाने का काम कर रहा है। अंततः, भदोही महोत्सव यह साबित कर रहा है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो एक छोटा प्रयास भी लाखों सपनों को दिशा दे सकता है। यह महोत्सव केवल कला और संस्कृति का उत्सव है, बल्कि उन अनगिनत प्रतिभाओं की उम्मीद भी है, जो एक मंच की तलाश में हैं।

राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने निकले जागरूकता रथ

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