Thursday, 11 June 2026

होटलों में 'ग्लास ट्रैप' का जाल, लोग हो रहे खून से लाल!

होटलों में 'ग्लास ट्रैप' का जाल, लोग हो रहे खून से लाल! 

हर शहर में बढ़ रहे हादसे, सिर फूट रहे, हाथ-पैर टूट रहे; सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवाल

होटलों की चमक-दमक के अंधी दौड़ में छिपा बड़ा खतरा

हर शहर में लोग हो रहे घायल, हादसों के बाद भी नहीं चेता सिस्टम

बार-बार हादसे, बार-बार सवाल, लेकिन जिम्मेदार अब भी बेफिक्र

होटलों के खतरनाक कांच के दरवाजों पर विशेष पड़ताल 

सुरेश गांधी

वाराणसी। आधुनिकता, आकर्षक इंटीरियर और आलीशान लुक की होड़ में शहरों के होटल, रेस्टोरेंट, मॉल और कैफे बड़ी संख्या में कांच के दरवाजों का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन यही पारदर्शी कांच अब लोगों की जान और सुरक्षा पर भारी पड़ने लगे हैं। आए दिन ऐसे मामले सामने रहे हैं, जिनमें लोग कांच के दरवाजे से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। किसी का सिर फट रहा है, किसी के हाथ-पैर में गहरी चोट लग रही है तो कई मामलों में कांच टूटने से शरीर के विभिन्न हिस्सों में गंभीर कटाव तक हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश प्रतिष्ठानों में लगाए गए कांच के दरवाजों पर तो पर्याप्त चेतावनी संकेत होते हैं और ही सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाता है। परिणामस्वरूप ग्राहक अक्सर दरवाजे को पहचान नहीं पाते और सीधे उससे टकरा जाते हैं।

विनायक प्लाजा स्थित रेस्टोरेंट पर उठ रहे सवाल

शहर के व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित विनायक प्लाजा के पांचवें तल पर संचालित एक रेस्टोरेंट के कांच के दरवाजे को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्राहकों का कहना है कि यहां लगा पूर्ण पारदर्शी कांच का दरवाजा कई बार हादसों का कारण बन चुका है। लोगों के अनुसार कई ग्राहक दरवाजे को खुला रास्ता समझकर उससे टकरा चुके हैं, जिससे उन्हें चोटें आई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ऐसे मामलों में अक्सर वास्तविक कारणों को सार्वजनिक नहीं किया जाता और घटनाओं को अन्य वजहों से जोड़कर मामला शांत कराने का प्रयास किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार सामने रही शिकायतों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

सिर्फ वाराणसी नहीं, देशभर के शहरों की समस्या

यह समस्या किसी एक होटल या एक शहर तक सीमित नहीं है। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, जयपुर, भोपाल, पटना, इंदौर और वाराणसी जैसे अनेक शहरों में पारदर्शी कांच के दरवाजों से जुड़े हादसे सामने चुके हैं। कई बार बच्चे, बुजुर्ग और पहली बार आने वाले ग्राहक सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, होटल लॉबी और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में लगे बिना मार्किंग वाले कांच के दरवाजे दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रहे हैं।

सुरक्षा मानकों का कितना हो रहा पालन?

भवन निर्माण और अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार कांच के दरवाजों पर स्पष्ट स्टिकर, रंगीन पट्टी, लोगो या चेतावनी चिह्न लगाना आवश्यक माना जाता है, ताकि दूर से ही उसकी पहचान हो सके। इसके अलावा टेम्पर्ड या सेफ्टी ग्लास का उपयोग, नियमित निरीक्षण और पर्याप्त रोशनी भी जरूरी है। दुर्भाग्य से अनेक प्रतिष्ठानों में सौंदर्य के नाम पर पूरी तरह पारदर्शी शीट लगा दी जाती है, जिससे ग्राहक भ्रमित हो जाते हैं।

सबसे अधिक खतरा किन्हें?

बच्चों को, जो दौड़ते हुए कांच से टकरा जाते हैं। बुजुर्गों को, जिनकी दृष्टि अपेक्षाकृत कमजोर होती है। भीड़भाड़ के समय ग्राहकों को। मोबाइल फोन देखते हुए चलने वालों को। पहली बार आने वाले आगंतुकों को।

प्रशासन कब करेगा व्यापक जांच?

लगातार बढ़ती घटनाओं के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या नगर निगम, विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और श्रम-सुरक्षा से जुड़े विभाग ऐसे प्रतिष्ठानों की नियमित जांच करते हैं? यदि करते हैं तो बिना चेतावनी चिन्ह वाले कांच के दरवाजे कैसे संचालित हो रहे हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि जिस प्रकार लिफ्ट, फायर सिस्टम और आपातकालीन निकास की जांच होती है, उसी प्रकार सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में लगे कांच के दरवाजों की सुरक्षा ऑडिट भी अनिवार्य की जानी चाहिए।

हादसे रोकने के लिए क्या जरूरी?

कांच के दरवाजों पर स्पष्ट मार्किंग या स्टिकर लगाना

टेम्पर्ड एवं सेफ्टी ग्लास का उपयोग

प्रवेश और निकास पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था

नियमित सुरक्षा ऑडिट

हादसा होने पर अनिवार्य रिपोर्टिंग व्यवस्था

होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की जवाबदेही तय करना

सवाल जो जवाब मांगते हैं

क्या आकर्षक डिजाइन लोगों की सुरक्षा से अधिक महत्वपूर्ण है? जिन स्थानों पर बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हैं, वहां अब तक सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए? क्या सुरक्षा मानकों का पालन केवल कागजों तक सीमित है? किसी बड़ी जनहानि के बाद ही प्रशासन जागेगा? कांच के ये पारदर्शी दरवाजे आधुनिकता का प्रतीक जरूर हैं, लेकिन यदि सुरक्षा उपायों की अनदेखी होती रही तो यह चमक किसी दिन बड़ी त्रासदी का कारण भी बन सकती है। प्रशासन, भवन स्वामियों और होटल प्रबंधन को समय रहते चेतना होगा, क्योंकि अगला हादसा किसके साथ होगा, यह कोई नहीं जानता।

Wednesday, 10 June 2026

दीप जले, संकल्प जागे; मोदी के 4399 दिन पर काशी हुई उत्सवमय

दीप जले, संकल्प जागे; मोदी के 4399 दिन पर काशी हुई उत्सवमय 

शहरभर में हवन-पूजन, स्वच्छता अभियान, मरीजों में फल वितरण, सफाईकर्मियों का सम्मान

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी बोले मोदी के 12 वर्ष भारत के स्वर्णिम अध्याय

सुरेश गांधी

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार 4399 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने के ऐतिहासिक अवसर पर बुधवार को उनके संसदीय क्षेत्र काशी में सेवा, स्वच्छता, सम्मान और आध्यात्मिक आयोजनों की श्रृंखला देखने को मिली। शहर के विभिन्न हिस्सों में भाजपा कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने कार्यक्रम आयोजित कर प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा राष्ट्र की समृद्धि की कामना की। 

दिनभर चले आयोजनों के क्रम में सायंकाल लहुराबीर स्थित काशी अनाथालय में बच्चों के बीच फल एवं वस्त्र वितरित किए गए। इस अवसर पर काशी प्रवास पर आए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बच्चों से संवाद कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए सेवा ही संगठन का मूल मंत्र है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना ही पार्टी की कार्यशैली का आधार है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों ने भारत के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है। उन्होंने कहा कि सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण मोदी सरकार की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरे हैं। आज भारत विश्व पटल पर आत्मविश्वास के साथ अपनी भूमिका निभा रहा है और विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।  

दूसरी ओर संसदीय जनसंपर्क कार्यालय में विशेष हवन-पूजन का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए अनुष्ठान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और राष्ट्र की निरंतर प्रगति की कामना की गई। कार्यक्रम का नेतृत्व कार्यालय प्रभारी शिवशरण पाठक ने किया जबकि वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. नंद जी पाण्डेय यजमान के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान सफाई कर्मियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित भी किया गया। वक्ताओं ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक बदलावों का उल्लेख करते हुए डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, गरीब कल्याण योजनाओं, महिला सशक्तिकरण, नई शिक्षा नीति तथा काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर जैसी उपलब्धियों को देश के विकास की नई पहचान बताया।

प्रदेश सरकार के स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने भी विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया। उन्होंने अर्दली बाजार स्थित महावीर मंदिर में कार्यकर्ताओं के साथ पूजा-अर्चना कर प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। इसके बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय, पांडेयपुर में मरीजों के बीच फल वितरित किए। वहीं स्वच्छता अभियान के अंतर्गत शास्त्री घाट एवं वरुणापुल क्षेत्र में कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों के साथ सफाई अभियान चलाकर स्वच्छता का संदेश दिया।

संध्या समय प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर बाबा विश्वनाथ का विधिवत दर्शन-पूजन एवं रुद्राभिषेक किया। इसके बाद महाआरती तथा ललिता घाट पर आयोजित दीपोत्सव में शामिल होकर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति एवं निरंतर विकास की कामना की। पूरे दिन चले इन आयोजनों ने काशी में सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान की।

होटलों में 'ग्लास ट्रैप' का जाल, लोग हो रहे खून से लाल!

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