Saturday, 14 February 2026

यूपी की सियासत में ब्रह्मोस बनेगा 2027 का ब्रह्मास्त्र?

यूपी की सियासत में ब्रह्मोस बनेगा 2027 का ब्रह्मास्त्र

यूपी की राजनीति में सत्ता का संघर्ष अब केवल चुनावी गणित नहीं, बल्कि शासन के चरित्र और कानून-व्यवस्था की निर्णायक लड़ाई बन चुका है। सपा के शासनकाल में अपराध, दंगों और बाहुबलियों का दबदबा प्रदेश की पहचान बन गया था। उस दौर को भाजपाजंगलराजकी संज्ञा देती है, जहां हत्या, लूट, छिनैती, महिला अपराध और राजनीतिक संरक्षण के आरोप सत्ता की छवि पर भारी पड़ते रहे। मुकदमों की वापसी से लेकर माफिया तंत्र के फैलाव तक के मुद्दे आज भी राजनीतिक हमलों का सबसे बड़ा हथियार बने हुए हैं। 2017 के बाद जब सत्ता की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथों में आई तो भाजपा ने इसे कानून के कठोर राज और अपराधियों के खिलाफ निर्णायक युद्ध के रूप में प्रस्तुत किया। बुलडोजर कार्रवाई, गैंगस्टर एक्ट और संगठित अपराध के खिलाफ अभियान को सरकार अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताती है। भाजपा इसेडर मुक्त और सुरक्षित उत्तर प्रदेशका मॉडल बताती है। साथ ही सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दों ने भी राजनीति को नई धार दी है। वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में पूजा विवाद और अयोध्या में बने राम मंदिर अयोध्या को भाजपा सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताती है। वहीं विपक्ष इन मुद्दों को राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रयास मानता है। अब उत्तर प्रदेश की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां जनता को तय करना है कि वह सुरक्षा और सख्ती के मॉडल को स्वीकार करती है या सामाजिक संतुलन और राजनीतिक वैकल्पिक दृष्टि को प्राथमिकता देती है

सुरेश गांधी

उत्तर प्रदेश केवल एक राज्य नहीं, बल्कि भारत की राजनीति की धुरी माना जाता है। यहां की सत्ता का समीकरण अक्सर देश की राजनीति की दिशा तय करता है। यही कारण है कि जब प्रदेश की सत्ता बदली तो केवल सरकार नहीं बदली, बल्कि शासन की शैली, प्रशासनिक सोच और राजनीतिक प्रतीकों की भाषा भी बदल गई। आज उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़ा विमर्शबुलडोजर मॉडलसे आगे बढ़करब्रह्मोस मॉडलतक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसे कानून-व्यवस्था और विकास के दोहरे प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि विपक्ष के नेता अखिलेश यादव इसे चुनावी प्रचार और सत्ता के प्रदर्शन का माध्यम बता रहे हैं। मतलब साफ है यह संघर्ष केवल दो नेताओं या दो दलों के बीच नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के भविष्य, प्रशासनिक दर्शन और राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई बन चुका है।

2017 के बाद प्रदेश में जब भाजपा सत्ता में आई, तब सबसे बड़ा चुनावी वादा कानून-व्यवस्था सुधारने का था। योगी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल से ही अपराध और माफिया नेटवर्क के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई शुरू की। अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाना, अपराधियों की संपत्ति जब्त करना और पुलिस मुठभेड़ों को लेकर सरकार ने खुद को सख्त प्रशासन के रूप में स्थापित किया। भाजपा का दावा है कि पहले प्रदेश में माफिया और दबंगों का आतंक था। महिलाओं की सुरक्षा सवालों के घेरे में थी और आम नागरिक भय के माहौल में जीता था। सरकार अपने आंकड़ों के जरिए यह दिखाने की कोशिश करती रही है कि अपराध दर में कमी आई है और निवेश के लिए माहौल बेहतर हुआ है। खासकर सपा के शासनकाल में जिस अपराध और अराजकता को राजनीतिक संरक्षण मिला, वो एक-एक ढह रहा है। कट्टा उद्योग, जमीन कब्जे और अतीक मुख्यतार, विजय मिश्रा जैसे बाहुबलियों का सफाया हो चुका है.

हालांकि सपा इसे राजनीतिक बदनाम करने की साजिश बताती रही है. लेकिन हकीकत तो यही है प्रदेश की राजनीति में बुलडोजर केवल एक मशीन नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता के सख्त तेवर का प्रतीक बन गया। 2022 विधानसभा चुनाव में बुलडोजर सरकार की पहचान बन गया। भाजपा ने इसे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और आम जनता की सुरक्षा का प्रतीक बताया। समर्थकों का मानना है कि बुलडोजर कार्रवाई ने अपराधियों के मन में डर पैदा किया और प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर हुआ। बुलडोजर के बाद अब प्रदेश की राजनीति में नया प्रतीक उभरकर सामने आया है, ब्रह्मोस। यह मिसाइल भारत की रक्षा क्षमता का गौरव मानी जाती है और अब इसे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भरता से जोड़कर देखा जा रहा है। योगी सरकार का दावा है कि रक्षा उत्पादन इकाइयों और डिफेंस कॉरिडोर के जरिए प्रदेश को रक्षा उद्योग का केंद्र बनाया जा रहा है। सरकार इसे रोजगार, निवेश और तकनीकी विकास के बड़े अवसर के रूप में पेश कर रही है।

डिफेंस कॉरिडोर और औद्योगिक क्रांति का दावा

उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर परियोजना को सरकार अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनती है। लंबे समय तक रक्षा उत्पादन दक्षिण भारत और पश्चिमी राज्यों तक सीमित रहा, लेकिन अब प्रदेश को इस क्षेत्र में नई पहचान देने की कोशिश की जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे लाखों रोजगार पैदा होंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। ब्रह्मोस जैसे अत्याधुनिक हथियारों का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होना राजनीतिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।

रक्षा निर्यात और वैश्विक पहचान का दावा

भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ब्रह्मोस के निर्यात को लेकर कई देशों के साथ बातचीत चल रही है। संभावित ग्राहकों में इंडोनेशिया, मलेशिया, यूएई और अर्जेंटीना जैसे देश शामिल बताए जा रहे हैं। यदि ये समझौते सफल होते हैं तो उत्तर प्रदेश रक्षा निर्यात का बड़ा केंद्र बन सकता है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नया आयाम मिल सकता है।

2027 चुनाव : ब्रह्मोस बनाम सामाजिक मुद्दे

2022 में बुलडोजर भाजपा के लिए चुनावी ब्रांड बन गया था। अब 2027 में ब्रह्मोस को विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रतीक के रूप में पेश किया जा सकता है। भाजपा इसे मजबूत शासन और आत्मनिर्भर भारत के मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर रही है। वहीं विपक्ष सवाल उठा रहा है कि क्या ब्रह्मोस जैसे प्रतीकों के जरिए बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।

कानून-व्यवस्था बनाम लोकतांत्रिक विमर्श

योगी सरकार अपने आंकड़ों के जरिए अपराध में कमी का दावा करती रही है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में माफिया नेटवर्क को खत्म किया गया और महिलाओं की सुरक्षा मजबूत हुई। सरकार का दावा है कि उत्तर प्रदेश निवेश, उद्योग और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और औद्योगिक परियोजनाओं को राज्य की नई पहचान बताया जा रहा है। भाजपा इसेनए उत्तर प्रदेशका मॉडल बताती है, जबकि विपक्ष कहता है कि विकास के साथ सामाजिक संतुलन और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती भी जरूरी है।

प्रतीकों की राजनीति और जनता का फैसला

उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा प्रतीकों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। कभी सामाजिक न्याय, कभी हिंदुत्व, कभी विकास, हर दौर में कोई कोई राजनीतिक प्रतीक जनता के सामने रखा गया है। बुलडोजर से ब्रह्मोस तक का सफर केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि सत्ता के राजनीतिक संदेश का हिस्सा है। भाजपा इसे मजबूत शासन और राष्ट्रवाद का प्रतीक बता रही है, जबकि विपक्ष इसे सत्ता प्रदर्शन और प्रचार की राजनीति करार दे रहा है। 2027 के चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि जनता किस मॉडल को स्वीकार करती है, सख्त प्रशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा का मॉडल या सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित राजनीति। उत्तर प्रदेश का मतदाता हमेशा राजनीतिक समीकरण बदलने की क्षमता रखता है और यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

मुकदमे वापसी विवाद : राजनीति का बड़ा आरोप

भाजपा और उसके समर्थक लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि सपा सरकार ने अपने कार्यकाल में कई दंगा और आपराधिक मामलों को वापस लेने की कोशिश की थी। यह तथ्य है कि सपा सरकार के दौरान कुछ मामलों में मुकदमे वापस लेने के प्रस्ताव आए थे, जिनमें कई मामलों पर न्यायालय ने रोक भी लगाई थी। भाजपा इसे कानून व्यवस्था कमजोर करने का उदाहरण बताती रही है, जबकि सपा का तर्क रहा कि कई मामलों को राजनीतिक प्रताड़ना मानकर समीक्षा की गई थी।

पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा

राजनीतिक बहस में यह आरोप भी उठते रहे कि पहले पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमले की घटनाएं सामने आती थीं। मीडिया सुरक्षा का मुद्दा लंबे समय से राष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है और विभिन्न सरकारों के दौरान इस पर सवाल उठते रहे हैं।

अपराधियों पर सख्त कार्रवाई

योगी सरकार का कहना है कि 2017 के बाद अपराध और माफिया नेटवर्क पर व्यापक कार्रवाई की गई। सरकार के अनुसार, अपराधियों की संपत्तियों पर कार्रवाई, गैंगस्टर एक्ट और कठोर कानूनी प्रावधानों का उपयोग, पुलिस कार्रवाई और अपराध नियंत्रण अभियान, महिला सुरक्षा कार्यक्रम और निगरानी व्यवस्था. सरकार दावा है कि इससे अपराधियों के मनोबल पर असर पड़ा और आम नागरिकों में सुरक्षा का विश्वास बढ़ा। भाजपा का दावा है कि वर्तमान शासन में आम नागरिक खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। सरकार निवेश, पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि को भी बेहतर कानून व्यवस्था से जोड़ती है।

अपराध के आँकड़ों में सपा बनाम योगी

सपा शासन का प्रमुख काल : 2012 से 2016 (नेतृत्व : अखिलेश यादव)

भाजपा शासन का प्रमुख काल : 2017 से 2023 (नेतृत्व : योगी आदित्यनाथ)

वर्ष                          दर्ज मामले

2013                      लगभग 5,047 हत्या

2014                      लगभग 5,150 हत्या

2015                      लगभग 4,732 हत्या

2016                      लगभग 4,889 हत्या

2018                      लगभग 4,708 हत्या

2019                      लगभग 3,806 हत्या

2020                      लगभग 3,468 हत्या

2022                      लगभग 3,497 हत्या

ट्रेंड : हत्या के मामलों में गिरावट का रुझान देखा गया।

डकैती सपा शासन काल

2013                      लगभग 596

2014                      लगभग 572

2015                      लगभग 554

2016                      लगभग 538

2018                      लगभग 319

2019                      लगभग 266

2020                      लगभग 176

2022                      लगभग 150 के आसपास

ट्रेंड : डकैती के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई।

लूट : सपा शासन काल

2013                      लगभग 3,600

2014                      लगभग 3,467

2015                      लगभग 3,200

2016                       लगभग 3,112

योगी शासन काल

2018                      लगभग 2,900

2019                       लगभग 2,600

2020                      लगभग 2,100

2022                      लगभग 1,900

ट्रेंड : लूट की घटनाओं में लगातार गिरावट का रुझान।

महिलाओं के खिलाफ अपराध

2013                      लगभग 3,050

2014                      लगभग 3,067

2015                      लगभग 3,025

2016                      लगभग 4,816

योगी शासन काल

2018                      लगभग 4,322

2019                       लगभग 3,065

2020                       लगभग 2,769

2022                      लगभग 3,690

ट्रेंड : महिलाओं के खिलाफ अपराध में उतार-चढ़ाव देखा गया, स्पष्ट स्थायी गिरावट नहीं।

छिनैती / स्नैचिंग / चोरी

शहरी क्षेत्रों में छिनैती और चोरी की घटनाएँ अधिक दर्ज होती थीं।

एनसीआरबी के अनुसार चोरी के मामलों में यूपी शीर्ष राज्यों में रहा।

योगी शासन काल

चोरी और स्नैचिंग के मामलों में धीरे-धीरे गिरावट दर्ज हुई।

पुलिस पेट्रोलिंग और निगरानी व्यवस्था बढ़ाई गई।

गैंगस्टर और संगठित अपराध कार्रवाई

सपा शासन काल : संगठित अपराध के मामलों में कार्रवाई होती रही लेकिन विपक्ष का आरोप राजनीतिक संरक्षण का रहा।

योगी शासन काल : सरकार के अनुसार हजारों करोड़ की अपराधियों की संपत्ति जब्त।

उत्तर प्रदेश में अपराध के आँकड़े बताते हैं कि संगठित अपराध और लूट-डकैती जैसे मामलों में कमी का रुझान सामने आया है। वहीं महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे अभी भी राजनीतिक और सामाजिक चुनौती बने हुए हैं। कानून-व्यवस्था की यह तुलना केवल आंकड़ों का विषय नहीं बल्कि राजनीतिक विमर्श का केंद्रीय मुद्दा बनी हुई है।

सत्ता का शौर्य या चुनावी शस्त्र?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सवाल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि सत्ता के चरित्र का है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की राजनीति में कानून-व्यवस्था और राष्ट्रवादी विकास मॉडल को केंद्र में ला दिया है। दूसरी ओर विपक्ष के नेता अखिलेश यादव इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव और प्रचार आधारित राजनीति बताते हैं। अब राजनीति केवल जातीय समीकरण या विकास योजनाओं की नहीं रह गई है। यह शक्ति प्रदर्शन, सुरक्षा नैरेटिव और राष्ट्रीय गौरव की प्रतिस्पर्धा बन चुकी है।

यूपी की सियासत में ब्रह्मोस बनेगा 2027 का ब्रह्मास्त्र?

यूपी की सियासत में ब्रह्मोस बनेगा 2027 का ब्रह्मास्त्र ?  यूपी की राजनीति में सत्ता का संघर्ष अब केवल चुनावी गणित नहीं , बल्...