Thursday, 19 February 2026

प्रशिक्षण से सशक्त होगा संगठन, बूथ से राष्ट्र तक भाजपा का विस्तार लक्ष्य : शिव प्रकाश

प्रशिक्षण से सशक्त होगा संगठन, बूथ से राष्ट्र तक भाजपा का विस्तार लक्ष्य : शिव प्रकाश 

सारनाथ में पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026 संपन्न

तीन राज्यों के नेताओं ने वैचारिक मजबूती और संगठनात्मक रणनीति पर किया मंथन

सुरेश गांधी

वाराणसी. सारनाथ स्थित केंद्रीय तिब्बती उच्च शिक्षण संस्थान में भारतीय जनता पार्टी के पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड एवं बिहार के उत्तर-पूर्व जोन की प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला वैचारिक संकल्प और संगठनात्मक रणनीति के साथ संपन्न हुई। कार्यक्रम में तीनों राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और संगठन के प्रमुख नेताओं ने भाग लेकर बूथ से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में मंथन किया।

उद्घाटन सत्र में अतिथियों ने भारत माता, पं. दीनदयाल उपाध्याय तथा श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर वंदे मातरम् का सामूहिक गान किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश ने उद्घाटन एवं समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति निर्माण से संगठन निर्माण और संगठन निर्माण से राष्ट्र निर्माण भाजपा का मूल ध्येय है। उन्होंने प्रशिक्षण अभियान कोराष्ट्र निर्माण का महायज्ञबताते हुए कहा कि सतत प्रशिक्षण से कार्यकर्ताओं का बौद्धिक और वैचारिक विकास होता है। उन्होंने सामाजिक समरसता, स्वदेशी चिंतन, अनुशासन और राष्ट्रभावना को संगठन की शक्ति बताया।

राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने प्रशिक्षण महाअभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि 7 मार्च से 14 अप्रैल तक मंडल स्तर तथा 15 अप्रैल से 20 मई तक जिला स्तर की कार्यशालाएं आयोजित होंगी, जिसके बाद प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न होंगे। उन्होंने कहा कि एकात्म मानववाद और अंत्योदय की विचारधारा इस अभियान की आत्मा है और यह कार्यक्रम संगठनात्मक के साथ-साथ वैचारिक सशक्तिकरण का भी माध्यम है।

चौदह विषयों पर गहन मंथन

कार्यक्रम के तृतीय एवं चतुर्थ सत्र में सात समूहों के माध्यम से कुल 14 विषयों पर चर्चा हुई। इनमें भाजपा का इतिहास एवं विकास, चुनाव प्रबंधन, संगठन विस्तार, बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ता विकास, समन्वय की भूमिका, कार्यालय संचालन, सरकार की उपलब्धियां, सोशल मीडिया रणनीति, नमो ऐप, एआई आधारित डिजिटल उपकरण तथा राष्ट्र के समक्ष चुनौतियां प्रमुख रहीं। समापन सत्र में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री एवं प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि भाजपा ही एकमात्र राजनीतिक दल है जो कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण को संगठन की रीढ़ मानता है। उन्होंने कहा कि इस अभियान से बूथ स्तर तक संगठनात्मक दक्षता और जनसेवा की भावना को नई मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम का संचालन राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य तथा सह संयोजक राजू भंडारी ने किया, जबकि समन्वय क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल ने संभाला। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेई, उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी उपस्थित रहे।

लोहता में 274 करोड़ से बनेगा 60 एमएलडी एसटीपी, 13 नाले होंगे टैप—अब वरुणा में नहीं गिरेगा गंदा पानी : सीआर पाटिल

लोहता में 274 करोड़ से बनेगा 60 एमएलडी एसटीपी, 13 नाले होंगे टैपअब वरुणा में नहीं गिरेगा गंदा पानी : सीआर पाटिल 

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने किया स्थलीय निरीक्षण, गंगा-वरुणा को प्रदूषण मुक्त करने की समयबद्ध कार्ययोजना पर जोर

सुरेश गांधी  

वाराणसी। गंगा और उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। लोहता क्षेत्र में 274.31 करोड़ रुपये की लागत से 60 एमएलडी क्षमता का आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जाएगा। इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। प्लांट के निर्माण के साथ ही वरुणा नदी में गिरने वाले 13 प्रमुख नालों को टैप किया जाएगा, जिससे अब अशोधित मलजल सीधे नदी में नहीं पहुंचेगा।

केंद्रीय स्तर पर इस परियोजना को जल शक्ति मंत्रालय की स्वीकृति मिल चुकी है। गुरुवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने लोहता के बेदौली क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर परियोजना की प्रगति और तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि गंगा और सहायक नदियों की स्वच्छता के लक्ष्य से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि लोहता एसटीपी के निर्माण से वाराणसी में गंगा-वरुणा प्रदूषण नियंत्रण अभियान को नई गति मिलने की उम्मीद है और शहर के सीवेज प्रबंधन ढांचे को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।

नमामि गंगे के तहत बढ़ी रफ्तार

यह परियोजना नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत स्वीकृत की गई है, जिसका उद्देश्य वरुणा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करना और शहरी विस्तार के कारण बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करना है। लोहता क्षेत्र से दुर्गा नाला के माध्यम से गिर रहे अशोधित सीवेज को रोकने के लिए यह एसटीपी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि जल निगम की गंगा प्रदूषण इकाई ने करीब डेढ़ वर्ष पहले सर्वे कर वर्ष 2037 तक की आबादी को ध्यान में रखते हुए लगभग 1780.86 करोड़ रुपये की लागत से चार एसटीपी निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया था। इसी योजना के तहत भगवानपुर में 55 एमएलडी और सूजाबाद में 7 एमएलडी क्षमता के प्लांट पर कार्य प्रगति पर है, जबकि लोहता का 60 एमएलडी प्लांट अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है।

गंगा-वरुणा प्रदूषण नियंत्रण पर फोकस

वरुणा नदी, गंगा नदी की प्रमुख सहायक धारा है और आदिकेशव घाट पर संगम बनाती है। ऐसे में इस परियोजना का प्रभाव सीधे गंगा की निर्मलता पर भी पड़ेगा। प्लांट बनने के बाद शहर के उत्तरी हिस्से का अधिकांश सीवेज शोधित होकर ही नदी में प्रवाहित होगा। निरीक्षण के दौरान केंद्रीय मंत्री ने भगवानपुर स्थित 55 एमएलडी एसटीपी और अस्सी नाले के डायवर्जन कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप निर्धारित समय सीमा में पूरे किए जाएं ताकि वरुणा नदी में प्रदूषण की समस्या स्थायी रूप से नियंत्रित हो सके।

अधिकारियों को सख्त निर्देश

मंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में सीवेज प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था ही नदी संरक्षण का आधार है। परियोजना के निर्माण में तकनीकी गुणवत्ता, समयबद्धता और समन्वय सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान महापौर अशोक कुमार तिवारी, मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, जल निगम के अधिशासी अभियंता आशीष सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

Wednesday, 18 February 2026

आखिर ड्रैगन के सामने क्यों कमजोर पड़ जाता है भारत का बहिष्कार मॉडल?

आखिर ड्रैगन के सामने क्यों कमजोर पड़ जाता है भारत का बहिष्कार मॉडल

सीमा पर सैनिकों का साहस, कूटनीति में सख्त बयान और जनभावनाओं में उफनता राष्ट्रवाद, इन सबके बीच एक सवाल बार-बार भारतीय जनमानस को झकझोरता है। जब राष्ट्रीय अस्मिता और सुरक्षा की बात आती है तो पूरा देश एक स्वर में खड़ा दिखाई देता है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर वही एकजुटता क्यों बिखर जाती है? यह प्रश्न तब और गहरा हो जाता है जब तुलना होती है भारत की आर्थिक नीति की चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में। पाकिस्तान के खिलाफ भारत की भावनात्मक, राजनीतिक और सामाजिक एकजुटता निर्विवाद रूप से मजबूत दिखाई देती है। लेकिन चीन के मामले में स्थिति बिल्कुल उलट नजर आती है। सीमा पर तनाव, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और वैश्विक शक्ति संघर्ष के बावजूद भारत का बाजार चीन के उत्पादों से भरा पड़ा है। यह केवल व्यापार का प्रश्न नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक संरचना, औद्योगिक नीति और राजनीतिक प्राथमिकताओं का आईना भी है 

सुरेश गांधी

भारतीय राजनीति में राष्ट्रवाद हमेशा एक प्रभावशाली मुद्दा रहा है। सीमा विवाद या सुरक्षा संकट के समय यह भावना व्यापक जनसमर्थन प्राप्त करती है। पाकिस्तान के खिलाफ आर्थिक और सांस्कृतिक बहिष्कार इसी भावना का परिणाम रहा है। भारत-पाक व्यापार 2019 के बाद लगभग समाप्त हो गया। भारत ने पाकिस्तान को व्यापारिक रूप से अलग-थलग कर दिया। यह निर्णय भावनात्मक और राजनीतिक रूप से लोकप्रिय भी साबित हुआ। लेकिन जब बात चीन की आती है, तो वही राजनीतिक इच्छाशक्ति व्यवहारिक कठिनाइयों में उलझ जाती है। यह विरोधाभास बताता है कि राष्ट्रवाद केवल भावनाओं से संचालित नहीं हो सकता, बल्कि उसके पीछे आर्थिक ताकत और औद्योगिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार होना आवश्यक है। आर्थिक आंकड़े भारत की चुनौती को स्पष्ट रूप से उजागर करते हैं। वर्ष 2024-25 में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 120 अरब डॉलर के आसपास पहुंच चुका है। इसमें भारत का व्यापार घाटा 85 अरब डॉलर से अधिक है।

भारत चीन से भारी मात्रा में आयात करता है, जिसमें शामिल हैं, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल उपकरण, सोलर पैनल और ऊर्जा उपकरण, दवा उद्योग का कच्चा माल, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, औद्योगिक मशीनरी, खिलौने और उपभोक्ता उत्पाद. औद्योगिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा चीन से आता है। फार्मा सेक्टर में उपयोग होने वाले कच्चे रसायनों का लगभग 65 प्रतिशत चीन पर निर्भर है। यह स्थिति केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक जोखिम भी पैदा करती है। चीन की औद्योगिक ताकत केवल उत्पादन क्षमता का परिणाम नहीं, बल्कि सुविचारित आर्थिक रणनीति का उदाहरण है। चीन आज वैश्विक विनिर्माण उत्पादन का लगभग 30 प्रतिशत नियंत्रित करता है। वैश्विक निर्यात में उसकी हिस्सेदारी 14 प्रतिशत के आसपास है। चीन ने उद्योगों को विकेंद्रीकृत मॉडल पर विकसित किया। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक क्लस्टर स्थापित किए गए। इससे रोजगार के अवसर व्यापक रूप से बढ़े और उत्पादन लागत कम हुई।

चीन की सरकार ने उद्योगों को व्यापक सब्सिडी, सस्ती बिजली, आधुनिक बुनियादी ढांचा और निर्यात प्रोत्साहन प्रदान किया। यही कारण है कि चीन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बन सका। भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और उसका जीडीपी लगभग 3.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। लेकिन भारत की आर्थिक संरचना सेवा क्षेत्र पर अधिक निर्भर है। सेवा क्षेत्र भारत की जीडीपी में लगभग 55 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी केवल 17 प्रतिशत के आसपास है। भारत लंबे समय से विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता रहा है, लेकिन यह लक्ष्य अभी अधूरा है। भारत का एमएसएमई क्षेत्र लगभग 11 करोड़ लोगों को रोजगार देता है, लेकिन यह क्षेत्र पूंजी, तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की चुनौतियों से जूझ रहा है। औद्योगिक विकास का लाभ बड़े कॉरपोरेट समूहों तक सीमित होने की आलोचना भी लगातार होती रही है। चीन ने औद्योगिक विस्तार के माध्यम से रोजगार के व्यापक अवसर उत्पन्न किए।

भारत में आर्थिक विकास के बावजूद रोजगार सृजन एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार भारत में शीर्ष 10 प्रतिशत लोगों के पास देश की लगभग 70 प्रतिशत संपत्ति केंद्रित है। आर्थिक असमानता औद्योगिक विस्तार और सामाजिक स्थिरता दोनों को प्रभावित करती है। भारत में युवाओं की बड़ी आबादी रोजगार की तलाश में है। यदि औद्योगिक क्षेत्र मजबूत नहीं होता तो यह जनसंख्या अवसर के बजाय चुनौती बन सकती है। भारतीय बाजार अत्यंत मूल्य संवेदनशील है। उपभोक्ता कम कीमत में अधिक विकल्प चाहता है। चीन ने इसी मनोविज्ञान को समझते हुए सस्ते और विविध उत्पादों की बड़ी श्रृंखला तैयार की। भारतीय बाजार में चीन की सफलता केवल उत्पादन लागत की वजह से नहीं है, बल्कि उसकी आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता भी महत्वपूर्ण कारण है। चीन का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क दुनिया के सबसे तेज और सस्ते परिवहन तंत्रों में शामिल है। भारतीय राजनीति में चीन के खिलाफ कठोर बयान और बहिष्कार की मांग समय-समय पर उठती रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर बाजार का व्यवहार अलग कहानी बयान करता है। यह स्थिति बताती है कि भारत का राष्ट्रवाद भावनात्मक रूप से मजबूत है, लेकिन आर्थिक स्तर पर अभी आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है।

भारत सरकार नेमेक इन इंडियाऔरआत्मनिर्भर भारतजैसे अभियानों के माध्यम से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। मोबाइल निर्माण क्षेत्र में भारत तेजी से उभरा है। रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण पर जोर दिया जा रहा है। भारत सेमीकंडक्टर, सोलर ऊर्जा और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में निवेश आकर्षित कर रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि चीन जैसी औद्योगिक क्षमता विकसित करने में भारत को अभी लंबा समय लग सकता है। भारत आज वैश्विक शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन के विकल्प के रूप में भारत की ओर देख रही हैं। भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में वैकल्पिक उत्पादन केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन इसके लिए भारत को बुनियादी ढांचे, श्रम सुधार, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक नीति में व्यापक सुधार करने होंगे। भारत को चीन की आर्थिक चुनौती का मुकाबला करने के लिए केवल राष्ट्रवादी बयानबाजी से आगे बढ़ना होगा।

इसके लिए आवश्यक है औद्योगिक विकेंद्रीकरण, एमएसएमई क्षेत्र को तकनीकी और वित्तीय सहयोग, उत्पादन लागत कम करने के लिए नीति सुधार, कौशल विकास और रोजगार विस्तार, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उद्योग विस्तार. भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपनी राष्ट्रवादी भावनाओं को आर्थिक शक्ति में परिवर्तित करे। पाकिस्तान के खिलाफ दिखाई देने वाली भावनात्मक एकजुटता चीन के मामले में इसलिए संभव नहीं हो पाती क्योंकि दोनों देशों के साथ भारत के आर्थिक संबंधों की प्रकृति अलग है। भारत यदि औद्योगिक क्षमता, रोजगार सृजन और तकनीकी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करता है तो वह वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थान हासिल कर सकता है। मतलब साफ है भारत के सामने यह प्रश्न केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता का है। यदि भारत आर्थिक रूप से मजबूत बनता है तो वह वैश्विक राजनीति में भी प्रभावशाली भूमिका निभा सकेगा। सीमा पर सैनिकों की वीरता भारत की सुरक्षा का प्रतीक है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर आत्मनिर्भरता ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति बन सकती है। भारत को भावनात्मक राष्ट्रवाद से आगे बढ़कर आर्थिक राष्ट्रशक्ति के निर्माण की दिशा में निर्णायक कदम उठाने होंगे।  

प्रशिक्षण से सशक्त होगा संगठन, बूथ से राष्ट्र तक भाजपा का विस्तार लक्ष्य : शिव प्रकाश

प्रशिक्षण से सशक्त होगा संगठन , बूथ से राष्ट्र तक भाजपा का विस्तार लक्ष्य : शिव प्रकाश  सारनाथ में पं . दीनदयाल उपाध्याय प...