Tuesday, 30 June 2026

जेई के निलंबन पर भड़का जूनियर इंजीनियर संगठन, मुख्य अभियंता से की तत्काल बहाली की मांग

जेई के निलंबन पर भड़का जूनियर इंजीनियर संगठन, मुख्य अभियंता से की तत्काल बहाली की मांग 

गलत कार्रवाई का आरोप, एसओपी की अनदेखी का दावा; 15 दिन में व्यवस्था सुधारने की चेतावनी, अन्यथा लोकतांत्रिक आंदोलन का ऐलान

सुरेश गांधी

वाराणसी। बिजली विभाग में एक जूनियर इंजीनियर (जेई) के निलंबन को लेकर राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर संगठन और प्रबंधन आमने-सामने गए हैं। मंगलवार को संगठन के पदाधिकारियों ने मुख्य अभियंता से मुलाकात कर अधिशासी अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर किए गए अवर अभियंता नितेश कुमार के निलंबन को अन्यायपूर्ण बताते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की।

संगठन का आरोप है कि संबंधित दुर्घटना जिस विद्युत लाइन पर हुई, उस पर कार्य करने वाले लाइन स्टाफ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि केवल जूनियर इंजीनियर को निशाना बनाकर निलंबित कर दिया गया। पदाधिकारियों ने मुख्य अभियंता से पूछा कि आखिर किस एसओपी के तहत यह कार्रवाई की गई।

मुख्य अभियंता ने संगठन को बताया कि कार्रवाई चेयरमैन के निर्देशों एवं निर्धारित एसओपी के अनुरूप की गई है। हालांकि संगठन ने दावा किया कि निगम के एसओपी के प्रावधानों की अनदेखी करते हुए केवल जूनियर इंजीनियर संवर्ग को लक्ष्य बनाया गया है, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।

बैठक में संगठन ने स्पष्ट कहा कि वह संसाधनों की कमी, सुरक्षित कार्य संस्कृति और बेहतर उपभोक्ता सेवा के लिए लगातार प्रयासरत रहा है, लेकिन अन्यायपूर्ण कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी। संगठन जल्द कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएगा।

संगठन ने बिजली व्यवस्था से जुड़े कई अन्य मुद्दे भी मुख्य अभियंता के समक्ष उठाए। पदाधिकारियों का कहना था कि उपभोक्ताओं की संख्या के अनुपात में संविदा कर्मियों की कमी, बार-बार ट्रांसफार्मरों का जलना तथा कार्यदायी संस्थाओं द्वारा अपर्याप्त प्रशिक्षण प्राप्त कर्मियों की तैनाती के कारण विद्युत दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। संगठन ने मांग की कि इन कमियों को 15 दिनों के भीतर दूर किया जाए।

बैठक के दौरान शीर्ष प्रबंधन से निलंबन आदेश तत्काल वापस लेने का अनुरोध भी किया गया। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि आदेश निरस्त नहीं किया गया तो कर्मचारियों में असंतोष बढ़ सकता है और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू किया जाएगा। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी औद्योगिक अशांति के लिए प्रबंधन जिम्मेदार होगा।

प्रमुख मांगें

जेई नितेश कुमार का निलंबन तत्काल वापस लिया जाए।

कार्रवाई में एसओपी का समान रूप से पालन किया जाए।

संविदा कर्मियों की संख्या बढ़ाई जाए।

प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित हो।

ट्रांसफार्मर और संसाधनों की कमी 15 दिन में दूर की जाए।

सुरक्षित कार्य संस्कृति और दुर्घटना रोकने के लिए ठोस व्यवस्था लागू की जाए।

साहस, सूझबूझ और टीमवर्क का मिला सम्मान, जांबाज पुलिसकर्मियों को सीपी ने दिया एक लाख का पुरस्कार

साहस, सूझबूझ और टीमवर्क का मिला सम्मान, जांबाज पुलिसकर्मियों को सीपी ने दिया एक लाख का पुरस्कार 

अवलेशपुर के चर्चित व्यापारी जितेंद्र पटेल हत्याकांड का शीघ्र खुलासा करने वाली एसओजी, रोहनिया थाना और वरुणा जोन की संयुक्त टीम का सम्मान, मुठभेड़ में दो बदमाशों को दबोचने वाले पुलिसकर्मियों को मिला नकद पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न

सुरेश गांधी

वाराणसी। कमिश्नरेट पुलिस द्वारा रोहनिया क्षेत्र के ग्राम अवलेशपुर में हुए चर्चित व्यापारी जितेंद्र पटेल हत्याकांड का त्वरित और सफल खुलासा करने वाली संयुक्त पुलिस टीम को मंगलवार को सम्मानित किया गया। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने उत्कृष्ट विवेचना, साहसिक कार्रवाई और पेशेवर दक्षता का परिचय देने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कुल एक लाख रुपये का नगद पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।

यह सम्मान उस संयुक्त टीम को दिया गया, जिसने घटना के बाद लगातार तकनीकी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस ने इस मामले में शामिल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें से दो को साहसिक पुलिस मुठभेड़ के दौरान दबोचा गया। कम समय में हुई इस कार्रवाई को कमिश्नरेट पुलिस की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

सम्मान समारोह में पुलिस आयुक्त ने कहा कि किसी भी जघन्य अपराध का शीघ्र अनावरण केवल आधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों की सतर्कता, समर्पण, पेशेवर दक्षता और बेहतर टीमवर्क से संभव होता है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई ने यह साबित किया है कि कमिश्नरेट पुलिस अपराधियों के विरुद्ध पूरी मजबूती के साथ कार्य कर रही है और किसी भी गंभीर अपराध में दोषियों को कानून के शिकंजे से बचने नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित करना केवल पुरस्कार देना नहीं, बल्कि पूरे पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने का माध्यम है। ऐसे सम्मान से अन्य पुलिसकर्मियों को भी बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है और जनसेवा की भावना और मजबूत होती है।

पुलिस आयुक्त ने उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने, अपराध नियंत्रण तथा आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों से भविष्य में भी इसी ईमानदारी, समर्पण, पारदर्शिता और पेशेवर दक्षता के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास पुलिस की सबसे बड़ी पूंजी है। जब किसी बड़ी घटना का शीघ्र खुलासा होता है और अपराधियों को समय रहते गिरफ्तार किया जाता है, तब समाज में सुरक्षा का वातावरण मजबूत होता है और अपराधियों में कानून का भय भी बढ़ता है। कमिश्नरेट पुलिस इसी दिशा में लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है।

पुरस्कार वितरण के दौरान एसओजी प्रभारी उपनिरीक्षक गौरव कुमार सिंह तथा प्रभारी निरीक्षक रोहनिया राजू सिंह को उनके उत्कृष्ट नेतृत्व और प्रभावी कार्रवाई के लिए 25-25 हजार रुपये का नगद पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले उपनिरीक्षक आयुष पाण्डेय, कांस्टेबल मनीष बघेल, कांस्टेबल अंकित मिश्रा, उपनिरीक्षक भरत चौधरी तथा वरुणा जोन के उपनिरीक्षक गौरव कुमार सिंह को 10-10 हजार रुपये का नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। सभी सम्मानित पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिह्न भी प्रदान किए गए।

सम्मान समारोह के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी संयुक्त टीम की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक पुलिसिंग में त्वरित सूचना संकलन, वैज्ञानिक विवेचना, तकनीकी विश्लेषण और टीमवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रोहनिया व्यापारी हत्याकांड के खुलासे में इन सभी पहलुओं का प्रभावी उपयोग देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस कम समय में पूरे गिरोह तक पहुंचने में सफल रही।

कमिश्नरेट पुलिस का मानना है कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सार्वजनिक सम्मान पुलिस बल के भीतर सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और कार्य संस्कृति को बढ़ावा देता है। इससे पुलिसकर्मियों में नई ऊर्जा का संचार होता है और वे अपराध नियंत्रण, जनसुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रेरित होते हैं। इस सम्मान समारोह ने यह संदेश भी दिया कि वाराणसी कमिश्नरेट अपराध और अपराधियों के प्रति "जीरो टॉलरेंस" की नीति पर काम कर रहा है। अपराध चाहे कितना भी गंभीर क्यों हो, पुलिस पूरी तत्परता, तकनीकी दक्षता और कानूनी मजबूती के साथ कार्रवाई करते हुए दोषियों को न्यायालय तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने की यह परंपरा भविष्य में भी जारी रहेगी, जिससे पूरे पुलिस बल का मनोबल और जनविश्वास दोनों लगातार मजबूत होंगे।

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