Sunday, 19 July 2026

बाबा के आशीर्वाद से बनारसी चाय तक... काशी ने रेखा गुप्ता को अपने रंग में रंगा

बाबा के आशीर्वाद से बनारसी चाय तक... काशी ने रेखा गुप्ता को अपने रंग में रंगा 

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के दो दिवसीय वाराणसी प्रवास में दर्शन, संस्कृति और जनसंपर्क का दिखा संतुलित समन्वयविंध्यधाम, गंगा आरती, विश्वनाथ धाम, कालभैरव और लक्ष्मी चाय भंडार तक हर पड़ाव बना चर्चा का विषय जन्मदिन पर आस्था, स्वाद और बनारस की आत्मीयता में रहीं सराबोर दिल्लीवासियों की समृद्धि के लिए बाबा विश्वनाथ काल भैरव का लिया आशीर्वाद

सुरेश गांधी

वाराणसी. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का दो दिवसीय वाराणसी दौरा केवल एक सरकारी या शिष्टाचार यात्रा नहीं था। इसमें भारतीय राजनीति के उस बदलते स्वरूप की स्पष्ट झलक दिखाई दी, जहां विकास, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था समानांतर रूप से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं। यह यात्रा जितनी धार्मिक थी, उतनी ही प्रतीकात्मक भी। विंध्याचल की शक्ति उपासना से लेकर काशी विश्वनाथ के ज्योतिर्लिंग, कालभैरव के दर्शन, गंगा आरती में सहभागिता और अंत में बनारस की प्रसिद्ध चाय की दुकान पर आम लोगों के बीच बैठकर चाय पीनाइन सभी पड़ावों ने इस यात्रा को एक अलग पहचान दी।

काशी में प्रवेश के साथ ही मुख्यमंत्री ने राजनीतिक भाषणों की बजाय धार्मिक और सांस्कृतिक संवाद को प्राथमिकता दी। बाबतपुर से सीधे मां विंध्यवासिनी धाम पहुंचना केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारतीय परंपरा में शक्ति उपासना के महत्व को स्वीकार करने का प्रतीक भी था। इसके बाद नमो घाट पर गंगा आरती में शामिल होना आधुनिक काशी और सनातन परंपरा के संगम को महसूस करने जैसा था। यह वही काशी है, जिसकी तस्वीर पिछले एक दशक में तेजी से बदली है और जो आज देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में नई पहचान बना रही है।

दूसरे दिन जन्मदिन पर बाबा विश्वनाथ के दरबार में पूजा-अर्चना और फिर कालभैरव मंदिर में दर्शन ने इस यात्रा को आध्यात्मिक पूर्णता प्रदान की। भारतीय जनमानस में यह मान्यता है कि काशी यात्रा कालभैरव के दर्शन के बिना पूर्ण नहीं होती। ऐसे में उनका यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि स्थानीय धार्मिक परंपराओं के सम्मान का संदेश भी था।

दौरे का सबसे सहज और चर्चित दृश्य वह रहा, जब मुख्यमंत्री चैक स्थित प्रसिद्ध लक्ष्मी चाय भंडार पहुंचीं। सत्ता के औपचारिक दायरे से निकलकर एक साधारण चाय की दुकान पर बैठकर बनारसी चाय की चुस्कियां लेना, दुकान संचालक से आत्मीय बातचीत करना और आम नागरिकों के बीच सहजता से समय बिताना इस बात का संकेत था कि जननेता की पहचान केवल मंचों से नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच उनकी उपस्थिति से भी बनती है। यही दृश्य सबसे अधिक चर्चा में रहा और सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय जनमानस तक इसकी व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली।

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह दौरा भारतीय जनता पार्टी की उस रणनीति का भी हिस्सा माना जा सकता है, जिसमें सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, धार्मिक पर्यटन और जनसंपर्क को एक साथ जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में दिल्ली की मुख्यमंत्री की सक्रिय उपस्थिति केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह भाजपा शासित राज्यों के बीच वैचारिक और सांस्कृतिक समन्वय का भी संदेश देती दिखाई दी।

हालांकि इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी रहा कि मुख्यमंत्री ने अपने सार्वजनिक वक्तव्यों में किसी राजनीतिक विवाद या विपक्ष पर टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने अपने संदेश को विकास, आस्था और जनकल्याण तक सीमित रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए भी उनका स्वर टकराव का नहीं, बल्कि विश्वास और संकल्प का रहा। यही संयम इस यात्रा को राजनीतिक शोर से अलग करता है।

काशी सदियों से केवल एक नगर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता का जीवंत प्रतीक रही है। यहां आने वाला प्रत्येक जनप्रतिनिधि केवल मंदिरों के दर्शन नहीं करता, बल्कि वह उस सांस्कृतिक चेतना से भी जुड़ता है, जिसने भारत की आत्मा को सदियों तक जीवित रखा है। रेखा गुप्ता का यह प्रवास भी उसी परंपरा की एक कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। कुल मिलाकर, यह दो दिवसीय यात्रा राजनीतिक घोषणाओं से अधिक सांस्कृतिक संवाद, धार्मिक आस्था और जनसंपर्क का संतुलित उदाहरण बनकर सामने आई। विंध्यधाम की शक्ति, गंगा की आरती, बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद, कालभैरव का दर्शन और अंत में बनारसी चाय की सादगीइन सबने मिलकर इस प्रवास को ऐसा स्वरूप दिया, जिसने यह संदेश दिया कि काशी आने वाला हर व्यक्ति केवल एक शहर की यात्रा नहीं करता, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा से साक्षात्कार करता है। धार्मिक दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने चौक स्थित प्रसिद्ध लक्ष्मी चाय की दुकान पर बनारसी मलाई टोस्ट, मक्खन टोस्ट और चाय का आनंद लिया। इस दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार रविन्द्र जायसवाल, नवरतन राठी  मौजूद रहे।

काशी ने मुझे केवल दर्शन नहीं, भारत की सांस्कृतिक आत्मा का साक्षात्कार कराया

काशी ने मुझे केवल दर्शन नहीं, भारत की सांस्कृतिक आत्मा का साक्षात्कार कराया

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से विशेष बातचीतपहली बार काशी आगमन पर आध्यात्मिक अनुभव साझा कियाबोलीं- मोदी के नेतृत्व में बदली काशी, परंपरा और विकास का अद्भुत संगमराज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल ने कराया परिचय, पूरे प्रवास में कराते रहे सांस्कृतिक विरासत से रूबरू

सुरेश गांधी

वाराणसी. श्रीकाशी विश्वनाथ धाम परिसर में दर्शन-पूजन के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से उत्तर प्रदेश सरकार के स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क, पंजीयन राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल ने मेरा परिचय कराया। औपचारिक परिचय कुछ ही क्षणों का था, लेकिन उसके बाद हुई बातचीत में दिल्ली से लेकर काशी, विकास, संस्कृति, सुशासन और उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर तक अनेक विषय सहजता से सामने आए। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले कहा कि काशी उनके लिए केवल एक धार्मिक नगर नहीं, बल्कि भारत की सनातन चेतना का जीवंत केंद्र है। उन्होंने स्वीकार किया कि पहली बार काशी आने के बाद उन्हें यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विराटता को निकट से देखने का अवसर मिला। उन्होंने साफ शब्दों में कहा,काशी केवल दर्शन का विषय नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को महसूस करने का अनुभव है। प्रस्तुत है सीनियर रिपोर्टर सुरेश गांधी के साथ रेखा गुप्ता की हुई बातचीत के कुछ प्रमुख अंशः-

प्रश्न : जन्मदिन पर बाबा विश्वनाथ के दरबार में आना कितना विशेष रहा?

रेखा गुप्ता : मेरे लिए यह केवल जन्मदिन नहीं, बल्कि जीवन का एक आध्यात्मिक अवसर है। बाबा विश्वनाथ के चरणों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का सौभाग्य मिला। मैंने देश, दिल्ली और सभी नागरिकों के सुख-समृद्धि की कामना की है।

प्रश्न : पहली बार काशी आकर सबसे अधिक किस बात ने प्रभावित किया?

रेखा गुप्ता : काशी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि यहां प्राचीनता और आधुनिकता साथ-साथ चलती हैं। विश्वनाथ धाम का विस्तार, घाटों की भव्यता, स्वच्छता, बेहतर व्यवस्थाएं और श्रद्धालुओं की सुविधाएं यह बताती हैं कि विरासत को बचाते हुए विकास भी किया जा सकता है।

प्रश्न : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के रूप में काशी को किस नजर से देखती हैं?

रेखा गुप्ता : पिछले वर्षों में काशी का स्वरूप जिस तरह बदला है, वह पूरे देश के लिए एक मॉडल है। यहां विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कृति, पर्यटन, आध्यात्मिकता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। काशी आज विश्व के सामने भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रतिनिधित्व कर रही है।

प्रश्न : दिल्ली और काशी में आपको सबसे बड़ा अंतर क्या दिखाई दिया?

रेखा गुप्ता : दिल्ली देश की प्रशासनिक राजधानी है, जबकि काशी भारत की आध्यात्मिक राजधानी है। दोनों की अपनी-अपनी भूमिका है, लेकिन काशी की आत्मीयता और आध्यात्मिक वातावरण हर आने वाले को भीतर तक स्पर्श करता है।

प्रश्न : उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यों को कैसे देखती हैं?

रेखा गुप्ता : उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था, आधारभूत संरचना, धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर व्यापक कार्य हुए हैं। इसका प्रभाव अब राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई देता है।

प्रश्न : काशी प्रवास की सबसे यादगार स्मृति?

रेखा गुप्ता : बाबा विश्वनाथ के दर्शन, गंगा आरती और काशी के लोगों का अपनापन। यहां जो स्नेह मिला, वह हमेशा स्मृतियों में रहेगा। बनारस की प्रसिद्ध चाय का स्वाद भी इस यात्रा को और यादगार बना गया।

पहली बार काशी, लेकिन अपनापन वर्षों पुराना

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पहली बार काशी आईं, लेकिन दो दिनों के प्रवास में उन्होंने जिस आत्मीयता से यहां की संस्कृति, परंपरा और जनजीवन को आत्मसात किया, उसने इस यात्रा को औपचारिक दौरे से आगे बढ़ा दिया। विश्वनाथ धाम, कालभैरव मंदिर, मां विंध्यवासिनी धाम, गंगा आरती और बनारसी चायहर पड़ाव पर उन्होंने काशी को महसूस किया।

रविंद्र जायसवाल बने काशी के सांस्कृतिक मार्गदर्शक

उत्तर प्रदेश के स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क, पंजीयन राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बाबतपुर एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री का स्वागत करने से लेकर पूरे प्रवास तक उनके साथ रहकर काशी की धार्मिक परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और बदलते विकास मॉडल से परिचित कराया। विश्वनाथ धाम, विंध्याचल और गंगा तट के महत्व को उन्होंने विस्तार से समझाया।

आयुष जायसवाल की सक्रिय भूमिका भी रही चर्चा में

पूरे प्रवास के दौरान मंत्री रविंद्र जायसवाल के पुत्र आयुष जायसवाल मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के समन्वय में लगातार सक्रिय दिखाई दिए। एयरपोर्ट से लेकर विश्वनाथ धाम तक लगभग हर पड़ाव पर उनकी उपस्थिति रही। स्थानीय कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

काशी मॉडल की खुलकर सराहना

बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में काशी का जो कायाकल्प हुआ है, वह केवल आधारभूत ढांचे का विकास नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी उदाहरण है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी में हुए परिवर्तन की सराहना करते हुए कहा कि यह शहर अब पूरी दुनिया के लिए भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।

लक्ष्मी चाय भंडार पर दिखी सादगी

दर्शन-पूजन के बाद मुख्यमंत्री का चैक स्थित प्रसिद्ध लक्ष्मी चाय भंडार पहुंचना भी चर्चा का विषय बना। उन्होंने बनारसी स्पेशल चाय का स्वाद लिया, स्थानीय लोगों से बातचीत की और कहा कि किसी शहर को समझना हो तो वहां के लोगों के बीच बैठना सबसे जरूरी है। कुछ देर के लिए चाय की दुकान ही जनसंवाद का केंद्र बन गई।

काशी केवल शहर नहीं, अनुभव है

दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने जिस सहजता से आम लोगों से संवाद किया, प्रसिद्ध लक्ष्मी चाय भंडार पर चाय पी और स्थानीय लोगों का अभिवादन स्वीकार किया, उसने उनके पहले काशी प्रवास को औपचारिक कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर जनसंपर्क और सांस्कृतिक अनुभव की यात्रा बना दिया।

एक्स- पर साझा किया काशी का आध्यात्मिक अनुभव

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन के बाद अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर काशी प्रवास की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि परिवार के साथ बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ के श्रीचरणों में जलाभिषेक और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि "बाबा विश्वनाथ की असीम कृपा से आज काशी अपनी सनातन चेतना और आधुनिक वैभव के माध्यम से पूरे विश्व को आस्था का अद्भुत संदेश दे रही है। गंगा तट से बाबा के दरबार तक फैला भव्य श्रीकाशी विश्वनाथ धाम और हर-हर महादेव के गूंजते उद्घोष भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक गौरव और अविरल भक्ति के प्रतीक हैं।" मुख्यमंत्री ने बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना की कि उनकी कृपा सभी पर बनी रहे तथा भारत निरंतर वैभव, समृद्धि और यश के नए शिखर छूता रहे। उन्होंने सेवा, सुशासन और लोककल्याण की भावना को भी अपने संदेश का प्रमुख आधार बनाया।

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