Saturday, 21 February 2026

अग्नि को साक्षी मान एक दूजे के हुए अतुल व निधि

अग्नि को साक्षी मान एक दूजे के हुए अतुल निधि 

बनारसी आभा में सजा वैवाहिक उत्सव, आशीर्वाद से आलोकित हुआ नवदंपति का जीवन

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से महाराष्ट्र के नेता ने दिया आशीष, सांस्कृतिक रंगों से महका काशी का विवाह समारोह

सुरेश गांधी  

वाराणसी. काशी की सांस्कृतिक परंपरा, संगीत और आत्मीयता से सराबोर एक भव्य वैवाहिक समारोह में अतुल उमरवैश्य पुत्र अनुसूईया उमरवैश्य का विवाह निधि पुत्री सीता मुकेश चंद उमरवैश्य के साथ अत्यंत हर्षोल्लास और वैदिक रीति-विधान के साथ संपन्न हुआ। ऐतिहासिक परिवेश से सुसज्जित वाराणसी किला परिसर में आयोजित इस समारोह ने पारंपरिक बनारसी वैभव और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम को साकार कर दिया। 

जयमाला के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा उनकी धर्मपत्नी लता एकशिंदे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नवविवाहित जोड़े को सुखमय वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया। दूर रहकर भी उनके स्नेह और शुभकामनाओं की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया। बता दें, दोनों अतिथियों का विवाह समारोह में आना था, लेकिन कुछ कारणों से एनवक्त पर उनका कार्यक्रम निरस्त हो गया. अतुल एकनाथ शिंदे के पारीवारिक पीआरओं हैं. उनका गहजनपद प्रतापगढ़ है, लेकिन वे मुंबई में ही शिंदे के परिवार का मैनेजमेंट देखते हैं.

समारोह में विभिन्न राज्यों से आए जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों, विधायकों, नगर सेवकों तथा सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र की अनेक नामचीन हस्तियों ने वर-वधू को आशीष प्रदान किया। पारिवारिक आत्मीयता और सामाजिक सहभागिता का यह समागम काशी की जीवंत परंपरा का सुंदर उदाहरण बनकर उभरा। बनारसी आभा से सजे इस विवाह समारोह का वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो काशी की आध्यात्मिक आत्मा स्वयं इस शुभ रात्रि को अपनी मधुरता से आलोकित कर रही हो। दूल्हा-दुल्हन के चेहरे पर झलकती प्रसन्नता, परिवारजनों का उल्लास और अतिथियों की रौनक ने पूरे आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।

बारात के आगमन के साथ ही उत्सव अपने चरम पर पहुंच गया। शहनाई की मधुर धुनें और बैंड-बाजों की गूंज ने काशी की संगीत परंपरा को जीवंत कर दिया। पारंपरिक बनारसी पगड़ी, शेरवानी और सांस्कृतिक परिधानों में सजे युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई उत्सव की लय में थिरकता नजर आया। यह दृश्य केवल एक विवाह नहीं, बल्कि संस्कृति और संबंधों का उत्सव प्रतीत हो रहा था।

समारोह की भव्यता और आकर्षण का प्रभाव सोशल मीडिया पर भी स्पष्ट दिखाई दिया। विवाह की झलकियां तेजी से फेसबुक, वाट्स्प, ट्वीटर सहित सोशल मीडिया पर साझा की जाने लगीं। तस्वीरों और वीडियो को लाखों लोगों ने देखा और नवदंपति के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं दीं।

काशी की परंपरा, आधुनिक तकनीक और सामाजिक आत्मीयता के संगम से सजा यह वैवाहिक समारोह इस बात का प्रतीक बना कि भारतीय संस्कृति में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और सामाजिक संबंधों का पवित्र उत्सव होता हैकृजिसमें आशीर्वाद, परंपरा और आनंद की निरंतर धारा बहती रहती है।

मौन साधना से राष्ट्रकल्याण तक : सेना परिवार ने बाबा विश्वेश्वर का किया पावन जलाभिषेक

मौन साधना से राष्ट्रकल्याण तक : सेना परिवार ने

बाबा विश्वेश्वर का किया पावन जलाभिषेक 

मौनी अमावस्या पर श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक समर्पण का अद्भुत संगम

सुरेश गांधी

वाराणसी। आस्था और अध्यात्म की अनादि परंपरा को जीवंत करते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन हुआ। प्रयागराज स्थित आयुध भंडार से जुड़े भारतीय सेना के सेना परिवार के सदस्यों ने पवित्र तिथि पर श्रद्धा और अनुशासन के साथ भगवान श्री विश्वेश्वर का विधि-विधानपूर्वक जलाभिषेक किया।

इस अवसर पर संगम नगरी से लाए गए पवित्र जल तथा मंदिर परिसर स्थित सरस्वती कूप के जल से अभिषेक संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और रुद्रपाठ के बीच वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। मौनी अमावस्या के शुभ नक्षत्र में किए गए इस अभिषेक में राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति और समग्र कल्याण की कामना विशेष रूप से की गई।

सेना परिवार के सदस्यों ने अत्यंत अनुशासित और श्रद्धामय भाव से पूजन-अर्चन करते हुएसर्वे भवन्तु सुखिनःके सनातन मंत्र को आत्मसात किया। उनके लिए यह अनुष्ठान केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म और आध्यात्मिक चेतना का संगम भी रहा। देश की सीमाओं पर तैनात वीर सैनिकों की सुरक्षा, उनके परिवारों के मंगल और समस्त देशवासियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई।

पूजन के दौरान उपस्थित सदस्यों ने यह संकल्प भी लिया कि वे राष्ट्रसेवा के साथ-साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए निरंतर सक्रिय रहेंगे। उनके अनुसार, आध्यात्मिक ऊर्जा ही वह आधार है जो कर्तव्यनिष्ठा को शक्ति देती है और राष्ट्रप्रेम को स्थायी बनाती है।

मौनी अमावस्या का यह पावन अनुष्ठान काशी की उस जीवंत परंपरा का प्रतीक बन गया, जहां भक्ति और राष्ट्रभाव एक साथ प्रवाहित होते हैं। शिवनगरी में गूंजते वैदिक मंत्रों के बीच सेना परिवार की यह उपस्थिति इस संदेश को पुनः स्थापित करती दिखी कि जब श्रद्धा और सेवा का संगम होता है, तब आध्यात्मिकता स्वयं राष्ट्रशक्ति का स्वरूप धारण कर लेती है।

रुद्राभिषेक, वैदिक अनुष्ठान और ब्रज के रसिया से गूंजेगा श्रीकाशी विश्वनाथ धाम

रंगभरी एकादशी महोत्सव : काशी से ब्रज तक भक्ति और रंगों का सेतु

रुद्राभिषेक, वैदिक अनुष्ठान और ब्रज के रसिया से गूंजेगा श्रीकाशी विश्वनाथ धाम 

श्रद्धालुओं के लिए होगा कार्योक्रमों का विशेष आयोजन

सुरेश गांधी

वाराणसी. काशी विश्वनाथ धाम में रंगभरी एकादशी महोत्सव को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। 23 फरवरी, सोमवार को धाम परिसर में विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन होगा, जिसमें काशी की परंपरा और ब्रज की भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस अवसर पर प्रातःकाल संकल्पित सोमवासरीय रुद्राभिषेक का आयोजन विधि-विधानपूर्वक संपन्न किया जाएगा। रुद्राभिषेक के उपरांत होली पर्व की परंपरा के तहत भगवान श्री विश्वेश्वर के पावन स्थान से श्री कृष्ण जन्मभूमि, मथुरा स्थित लड्डू गोपाल के लिए पारंपरिक उपहार एवं अबीर-गुलाल ससम्मान प्रेषित किए जाएंगे। यह आयोजन काशी और ब्रज की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकता का प्रतीक माना जाता है।

इसी क्रम में मंदिर न्यास की पंचबदन प्रतिमा के साथ माता पार्वती एवं बाल स्वरूप भगवान श्री गणेश का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर परिसर में श्री लक्ष्मी-नारायण जी के विग्रह के समीप नव-निर्मित कक्ष में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर विधिवत प्रतिष्ठा संपन्न होगी।

इसके बाद 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी के शुभ अवसर पर ब्रज से भगवान श्री विश्वेश्वर के लिए प्रेषित उपहारों को समारोहपूर्वक स्वीकार किया जाएगा। इस दौरान ब्रज के रसियारे कलाकारों द्वारा पारंपरिक रास और होली रसिया की मनोहारी प्रस्तुति धाम स्थित सांस्कृतिक मंचशिवार्चनम्पर दी जाएगी, जिससे पूरा परिसर भक्तिरस और उत्सवी रंगों से सराबोर हो उठेगा।

परंपरा के अनुसार बाबा की चल प्रतिमा का आगमन हर्षोल्लास के साथ धाम में होगा और वैदिक विधि से गर्भगृह में विराजमान कराया जाएगा। मंदिर न्यास एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने वाराणसी सहित देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन में सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित करें।

अग्नि को साक्षी मान एक दूजे के हुए अतुल व निधि

अग्नि को साक्षी मान एक दूजे के हुए अतुल व निधि  बनारसी आभा में सजा वैवाहिक उत्सव , आशीर्वाद से आलोकित हुआ नवदंपति का ...