Friday, 17 April 2026

आस्था के अन्नक्षेत्र में ऊर्जा का नवप्रभात, अब वीएनजी से बनेगा भोजन

आस्था के अन्नक्षेत्र में ऊर्जा का नवप्रभात, अब वीएनजी से बनेगा भोजन 

पीएनजी कनेक्शन का शिलान्यास, सेवा-संस्कृति में जुड़ी आधुनिकता की नई धारा

सुरेश गांधी

वाराणसी। धर्म, सेवा और आधुनिकता जब एक सूत्र में बंधते हैं, तो वह केवल व्यवस्था नहीं, एक नई परंपरा का जन्म होता है। शुक्रवार, को इसी भावना को साकार करते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा संचालित टेढ़ीनीम स्थित अन्नक्षेत्र में स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की गई। इस अवसर पर गैस अथॉरिटी आफ इंडिया लिमिटेड गेल के माध्यम से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएजी) कनेक्शन परियोजना का विधिवत शिलान्यास संपन्न हुआकृजो केवल तकनीकी उन्नयन का प्रतीक है, बल्किसेवा में श्रेष्ठताके संकल्प का विस्तार भी है।

अन्नक्षेत्र : जहां सेवा बनती है साधना

टेढ़ीनीम का अन्नक्षेत्र केवल भोजन वितरण का केंद्र नहीं, बल्कि काशी की उस जीवंत परंपरा का प्रतीक है, जहां हर थाली में श्रद्धा परोसी जाती है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार होता है, और अब यह प्रक्रिया और अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित होने जा रही है। च्छळ कनेक्शन के माध्यम से ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे रसोई संचालन में केवल गति आएगी, बल्कि पारंपरिक ईंधनों से होने वाले धुएं और प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।

आधुनिकता और पर्यावरण का संतुलित संगम

इस पहल के पीछे केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक व्यापक दृष्टि भी है, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता की। पीएनजी के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे अन्नक्षेत्र एकग्रीन किचनकी दिशा में अग्रसर होगा। यह कदम दर्शाता है कि आस्था के केंद्र भी अब समय के साथ चलकर सतत विकास ससटेनेबुल डेवलपमेंट की राह पर अग्रसर हो रहे हैं।

गरिमामयी उपस्थिति में हुआ शिलान्यास

कार्यक्रम में प्रशासनिक और तकनीकी जगत के कई प्रमुख चेहरे उपस्थित रहे। डिप्टी कलेक्टर एवं नायब तहसीलदार के साथ गेल के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। मुख्य रूप से सुशील कुमार (महाप्रबंधक, वाराणसी), गौरी शंकर मिश्रा, सुरेश तिवारी, उदित सिन्हा, श्री कलाधर नारायण (सभी महाप्रबंधक), श्री नवाजिश (उपमहाप्रबंधक), श्री प्रवीण सिंह एवं श्री चंदन (मुख्य प्रबंधक) ने अपनी सहभागिता से इस परियोजना को नई ऊर्जा दी।

सेवा में नवाचार का सतत संकल्प

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा समय-समय पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए जा रहे नवाचार इस बात के प्रमाण हैं कि काशी केवल परंपरा का शहर नहीं, बल्कि प्रगति का भी केंद्र है। अन्नक्षेत्र में पीएनजी कनेक्शन की यह पहल भविष्य में अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रेरणा बनेगी, जहां सेवा, स्वच्छता और तकनीक का ऐसा संतुलित संगम देखने को मिलेगा।

बदलती काशी, बढ़ती आस्था

यह शिलान्यास केवल एक परियोजना की शुरुआत नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है जहांआस्थाऔरआधुनिकताएक-दूसरे के पूरक बनते हैं। काशी के इस पावन धाम में अब अन्नक्षेत्र की हर रसोई से उठती आंच, केवल श्रद्धालुओं का पेट भरेगी, बल्कि एक स्वच्छ, सुरक्षित और सशक्त भविष्य की लौ भी प्रज्वलित करेगी।

माटीकला से आत्मनिर्भरता की राह : 10 लाख तक लोन पर 25 फीसदी सब्सिडी

माटीकला से आत्मनिर्भरता की राह : 10 लाख तक लोन पर 25 फीसदी सब्सिडी 

काशी के युवाओं के लिए सुनहरा मौका

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी यू.पी. सिंह ने बताया कि यह योजना युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। उन्होंने अधिक से अधिक युवाओं से इसमें भाग लेने और अपने हुनर को रोजगार में बदलने का आह्वान किया।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम : यूपी सिंह

सुरेश गांधी

वाराणसी। परंपरागत कारीगरी को आधुनिक अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और प्रभावी कदम उठाया है। माटीकला बोर्ड द्वारा संचालितमुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजनाअब युवाओं और पारंपरिक कुम्हार समुदाय के लिए आत्मनिर्भर बनने का मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत इस योजना में जनपद के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

वाराणसी मंडल के परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी, यूपी सिंह ने बताया कि यह योजना युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। उन्होंने अधिक से अधिक युवाओं से इसमें भाग लेने और अपने हुनर को रोजगार में बदलने का आह्वान किया। उनका कहना है कि इस योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सदियों पुरानी माटीकला को नई पहचान देना भी है। मिट्टी से जुड़े उत्पाद, जैसे घड़ा, सुराही, कुल्हड़, गिलास, कटोरी, कप-प्लेट और सजावटी सामान, अब बाजार में नई संभावनाओं के साथ पेश किए जा रहे हैं। सरकार चाहती है कि यह पारंपरिक कला आधुनिक मांग के अनुरूप विकसित हो और स्थानीय कारीगरों को इसका सीधा लाभ मिले।

लोन और सब्सिडी : आर्थिक मजबूती का आधार

इस योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को 10 लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें 25 फीसदी तक की सब्सिडी (अनुदान) राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। यह प्रावधान उन युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो पूंजी के अभाव में अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर पाते। योजना के जरिए स्वरोजगार को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का भी लक्ष्य रखा गया है। इससे केवल बेरोजगारी कम होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इस योजना के तहत 18 से 55 वर्ष आयु वर्ग के इच्छुक पुरुष और महिलाएं आवेदन कर सकते हैं। खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक कारीगरों के साथ-साथ नए उद्यमियों को भी मौका दिया जा रहा है।

इच्छुक अभ्यर्थी ऑनलाइन पोर्टल यूपीमाटीकलाबोर्ड डाट इन के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं या जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, वाराणसी से संपर्क कर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन के लिए पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र शैक्षिक/तकनीकी योग्यता प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, बैंक पासबुक की छाया प्रति, प्रोजेक्ट रिपोर्ट आदि. आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 मई 2026 निर्धारित की गई है। लाभार्थियों का चयन स्कोर कार्ड प्रणाली के आधार पर किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

पारंपरिक कारीगरों पर विशेष फोकस

इस योजना के अंतर्गत माटीकला से जुड़े कारीगर परिवारों का चिन्हांकन भी किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद शिल्पकारों को इसका लाभ मिल सके। यह पहल केवल उनकी आजीविका को मजबूत करेगी, बल्कि उनकी कला को भी संरक्षित और प्रोत्साहित करेगी। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी मो. 9580503155 पर संपर्क कर सकते हैं या जिला ग्रामोद्योग अधिकारी कार्यालय से सीधे जुड़ सकते हैं।

मिट्टी से जुड़े, भविष्य गढ़े

आज जब युवा रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, ऐसे में माटीकला जैसी पारंपरिक विधाओं को आधुनिक स्वरूप देकर रोजगार का माध्यम बनाना एक दूरदर्शी सोच है। यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को बचाने का भी माध्यम है। अगर इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो वाराणसी जैसे शहर केवल अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेंगे, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को भी साकार करेंगे। अब सवाल यह नहीं कि अवसर है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या युवा इस अवसर को पहचानकर आगे बढ़ेंगे?

आस्था के अन्नक्षेत्र में ऊर्जा का नवप्रभात, अब वीएनजी से बनेगा भोजन

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