Sunday, 10 May 2026

वैदिक मंत्रों के बीच 183 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे

वैदिक मंत्रों के बीच 183 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे 

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बड़ागांव में भव्य आयोजन, जनप्रतिनिधियों ने दिया आशीर्वाद

वाराणसी। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत रविवार को बड़ागांव स्थित श्री बलदेव इंटरमीडिएट कॉलेज परिसर में 183 जोड़ों का सामूहिक विवाह वैदिक मंत्रोच्चारण, सामाजिक रीति-रिवाज और भव्य आयोजन के बीच सम्पन्न हुआ। इसमें बड़ागांव विकासखंड के 84 और पिंडरा विकासखंड के 99 जोड़े शामिल रहे।

कार्यक्रम में विधायक डॉ. अवधेश सिंह, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। दीप प्रज्ज्वलन के साथ समारोह की शुरुआत हुई। इसके बाद पुरोहितों ने मंत्रोच्चारण, पूजन और हवन के बीच वर-वधुओं को सात वचनों का संकल्प दिलाया। मुस्लिम जोड़ों का निकाह भी परंपरागत रीति से सम्पन्न कराया गया। समारोह में नवदंपतियों को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रतीकात्मक 60 हजार रुपये का चेक, परिधान, उपहार सामग्री और विवाह प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

विधायक डॉ. अवधेश सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति परिवार और समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है। कन्यादान सबसे बड़ा पुण्य है और सरकार की यह योजना बेटियों नारी शक्ति को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने सभी नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है और जिला प्रशासन इसे पूरी प्रतिबद्धता से लागू कर रहा है। कार्यक्रम के अंत में जनप्रतिनिधियों ने नवदंपतियों पर पुष्पवर्षा कर उनके सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

काशी में गूंजेगा ‘सोमनाथ संकल्प’

काशी में गूंजेगासोमनाथ संकल्प’ 

राज्यपाल आनंदीबेन और सीएम योगी आज करेंगे सनातन स्वाभिमान का महाआवाहन

श्री काशी विश्वनाथ धाम में होगा भव्य आयोजन, सामूहिक जपऔर शंखध्वनि से गूंजेगा परिसर

सुरेश गांधी

वाराणसी। सनातन संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीकसोमनाथ स्वाभिमान पर्वके अवसर पर सोमवार को काशी आध्यात्मिक चेतना के एक विराट आयोजन की साक्षी बनेगी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर स्थित त्रयंबकेश्वर बहुउद्देशीय हॉल में आयोजितसोमनाथ संकल्प महोत्सवमें उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रमुख रूप से शामिल होंगे।

सुबह 9 बजे से शुरू होने वाले इस भव्य आयोजन में सामूहिक जप”, शंखध्वनि और सोमनाथ संकल्प के सामूहिक पाठ के जरिए सनातन परंपरा और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयंसोमनाथ संकल्पका वाचन करेंगे, जबकि उपस्थित श्रद्धालु उसका सामूहिक अनुच्चारण करेंगे।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा निर्मित पार्थिव शिवलिंग होगा, जिसे भगवान सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के प्रतीक स्वरूप स्थापित किया जाएगा। अतिथिगण पुष्पांजलि अर्पित कर भगवान सोमनाथ को नमन करेंगे। आयोजन में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक प्रस्तुतियों के साथ सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़े कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा।

कार्यक्रम में मंत्री अनिल राजभर, रविंद्र जायसवाल, दयाशंकर मिश्र 'दयालु', जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, महापौर अशोक तिवारी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। काशी में आयोजित यह महोत्सव धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर सनातन स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना के विराट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

“नूर साड़ी” शोरूम का भव्य शुभारंभ

नूर साड़ीशोरूम का भव्य शुभारंभ 

व्यापारियों गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी

सुरेश गांधी

वाराणसी। शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र ताज होटल के सामने रविवार कोनूर साड़ीशोरूम का भव्य शुभारंभ उत्साह और पारंपरिक उल्लास के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वाराणसी व्यापार मंडल अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर प्रतिष्ठान का उद्घाटन किया।

उद्घाटन समारोह के दौरान पूरे परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और व्यापारियों स्थानीय लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। शोरूम में नवीन डिजाइनों और पारंपरिक परिधानों की विशेष श्रृंखला लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। इस अवसर पर शोरूम संचालकों द्वारा मुख्य अतिथि अजीत सिंह बग्गा को राममंदिर का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

अजीत सिंह बग्गा ने कहा कि वाराणसी का व्यापारिक वातावरण लगातार मजबूत हो रहा है और नए प्रतिष्ठानों के खुलने से स्थानीय बाजार को नई ऊर्जा मिल रही है। उन्होंने कहा कि ग्राहकों का विश्वास और गुणवत्ता किसी भी व्यवसाय की सबसे बड़ी पूंजी होती है।

नूर साड़ीप्रतिष्ठान के संचालक परिवार में गुरचरण सिंह, उनके पुत्र जगजीत सिंह उर्फ राहुल एवं बहू नताशा तनेजा ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में शहर के कई प्रतिष्ठित व्यापारी एवं समाजसेवी मौजूद रहे, जिनमें कवीद्र जायसवाल, मनीष गुप्ता, संजय गुप्ता, शाहिद कुरेशी, सत्य प्रकाश जायसवाल, खुर्शीदा बेगम, रामकुमार, तृप्तिमान और सुजीत वर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल रहे। समारोह में उत्साह, अपनापन और पारिवारिक माहौल देखने को मिला।

2027 की महाबिसात: योगी का चेहरा, जातीय गणित और भाजपा की नई सोशल इंजीनियरिंग

2027 की महाबिसात: योगी का चेहरा, जातीय गणित और भाजपा की नई सोशल इंजीनियरिंग 

कैबिनेट विस्तार से भाजपा ने दिया बड़ा संदेश, पीडीए के जवाब में सत्ता का नया समीकरण तैयार, ओबीसी-दलित-ब्राह्मण समीकरण साधने की कोशिश

सुरेश गांधी

वाराणसी

यूपी की राजनीति में सत्ता केवल सरकार नहीं होती, वह समाज का आईना भी होती है। यहां मंत्रिमंडल का हर विस्तार महज विभागों का बंटवारा नहीं बल्कि आने वाले चुनावों की पटकथा माना जाता है। यही कारण है कि योगी आदित्यनाथ सरकार के ताजा मंत्रिमंडल विस्तार को राजनीतिक गलियारों में 2027 विधानसभा चुनाव की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

इस विस्तार ने एक बात साफ कर दी है कि भाजपा अब केवलमोदी-योगी मैजिकके भरोसे चुनाव नहीं लड़ना चाहती, बल्कि वह जमीन पर जातीय और सामाजिक समीकरणों को भी नए सिरे से साधने में जुट गई है। 2024 लोकसभा चुनाव ने भाजपा को यह एहसास करा दिया कि यूपी की राजनीति में केवल राष्ट्रवाद और हिंदुत्व ही पर्याप्त नहीं है। सपा के पीडीए यानीपिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यकफॉर्मूले ने भाजपा के अभेद्य माने जाने वाले किले में सेंध लगाई थी। अब भाजपा उसी सामाजिक समीकरण का जवाब अपने तरीके से तैयार कर रही है।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का ताजा मंत्रिमंडल विस्तार केवल नए मंत्रियों की शपथ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति की स्पष्ट झलक भी दे दी। भाजपा ने इस विस्तार के जरिए ओबीसी, दलित, ब्राह्मण और क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट में शामिल कर पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ओबीसी राजनीति को मजबूत करने का संकेत दिया है। वहीं रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडे को मंत्री बनाकर ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश की गई है। मनोज पांडे 2024 लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे।

2024 लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के असर के बाद भाजपा अब नई सोशल इंजीनियरिंग पर काम कर रही है। यही वजह है कि इस विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष फोकस दिखाई दिया।

भाजपा की कोशिश साफ दिख रही है कि योगी आदित्यनाथ के मजबूत हिंदुत्व चेहरे के साथ-साथ जमीन पर जातीय समीकरणों को भी मजबूती दी जाए। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक और ओबीसी से लेकर दलित व ब्राह्मण वर्ग तक हर समीकरण को साधने की कोशिश इस विस्तार में दिखाई दी।

राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा इस बात की भी है कि आने वाले दिनों में कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव हो सकता है। माना जा रहा है कि भाजपा 2027 से पहले सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर नई ऊर्जा के साथ चुनावी तैयारी में जुट चुकी है।

भाजपा अब केवल “मोदी-योगी फैक्टर के भरोसे नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों की नई रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। 2027 अभी दूर है, लेकिन उसकी आहट सत्ता के गलियारों में अभी से सुनाई देने लगी है।योगी मंत्रिमंडल के इस विस्तार में सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चैधरी को कैबिनेट में शामिल करने से गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और ओबीसी राजनीति के मजबूत चेहरे माने जाने वाले भूपेंद्र चैधरी लंबे समय से संगठन की राजनीति में सक्रिय थे। उन्हें सरकार में शामिल कर भाजपा ने साफ संकेत दिया कि संगठन और सत्ता के बीच समन्वय को अब चुनावी हथियार बनाया जाएगा।

पश्चिमी यूपी भाजपा के लिए हमेशा निर्णायक क्षेत्र रहा है। किसान आंदोलन और लोकसभा चुनाव के बाद यहां भाजपा को कुछ राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में भूपेंद्र चैधरी को कैबिनेट में लाकर पार्टी ने पश्चिमी यूपी को संदेश दिया है कि क्षेत्रीय नेतृत्व की अनदेखी नहीं होगी। भाजपा समझती है कि 2027 का रास्ता पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होकर ही गुजरता है।

दूसरी ओर रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडे को मंत्री बनाना भी बेहद रणनीतिक फैसला माना जा रहा है। मनोज पांडे समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। ब्राह्मण समाज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे समय में जब विपक्ष भाजपा पर सवर्णों की उपेक्षा का आरोप लगा रहा था, तब मनोज पांडे को मंत्री बनाकर भाजपा ने ब्राह्मण समाज को बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

मतलब साफ है भाजपा इस बार किसी एक जातीय वर्ग पर निर्भर रहने के बजायमल्टी लेयर सोशल इंजीनियरिंगपर काम कर रही है। ओबीसी, दलित, ब्राह्मण और महिला प्रतिनिधित्व को संतुलित तरीके से सामने लाकर पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि 2027 की लड़ाई केवल विचारधारा की नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों की भी होगी।

दरअसल 2024 लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए चेतावनी साबित हुआ। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन ने पीडीए फॉर्मूले के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोटों का बड़ा ध्रुवीकरण किया। भाजपा को कई सीटों पर अप्रत्याशित नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद से ही भाजपा के भीतर यह मंथन शुरू हो गया था कि केवल हिंदुत्व की राजनीति से चुनावी सफलता सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

यही वजह है कि इस मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय संतुलन सबसे बड़ा आधार दिखाई देता है। भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उसके यहां हर वर्ग और हर क्षेत्र को प्रतिनिधित्व मिलेगा। पूर्वांचल से लेकर पश्चिम तक और दलित से लेकर ब्राह्मण तक हर समीकरण को साधने की कोशिश की गई है।

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह विस्तार भाजपा कीडैमेज कंट्रोल प्लस फ्यूचर प्लानिंगरणनीति का हिस्सा है। पार्टी 2024 की गलतियों को दोहराना नहीं चाहती। भाजपा नेतृत्व को यह एहसास है कि यूपी की राजनीति में जातीय पहचान अब भी सबसे बड़ी सच्चाई है। यही कारण है कि योगी आदित्यनाथ के मजबूत हिंदुत्व चेहरे के साथ-साथ जातीय संतुलन की नई परत जोड़ी जा रही है।

योगी आदित्यनाथ आज भाजपा के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों में गिने जाते हैं। कानून व्यवस्था, बुलडोजर नीति और हिंदुत्व की आक्रामक राजनीति ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर का नेता बना दिया है। भाजपा 2027 में भी योगी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। लेकिन पार्टी यह भी जानती है कि चुनाव केवल चेहरे से नहीं जीते जाते। बूथ स्तर पर जातीय गणित और स्थानीय समीकरण ही जीत-हार तय करते हैं।

यही कारण है कि भाजपा अबयोगी प्लस सोशल इंजीनियरिंगमॉडल पर आगे बढ़ रही है। यह वही रणनीति है जिसने कभी भाजपा को उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व सफलता दिलाई थी। 2014 और 2017 में भाजपा ने गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलित वोटों को अपने साथ जोड़कर बड़ी जीत हासिल की थी। अब पार्टी उसी मॉडल को नए रूप में पुनर्जीवित करना चाहती है।

इस विस्तार का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला प्रतिनिधित्व भी है। भाजपा लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि महिलाओं की भागीदारी उसकी प्राथमिकता है। उज्ज्वला, आवास, शौचालय और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों के जरिए भाजपा पहले ही महिला वोट बैंक में मजबूत पकड़ बना चुकी है। मंत्रिमंडल में महिला चेहरों को स्थान देकर पार्टी इस समर्थन को और मजबूत करना चाहती है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह विस्तार केवल शुरुआत है? लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले समय में विभागों का पुनर्गठन और संगठन में भी बड़े बदलाव हो सकते हैं। भाजपा 2027 से पहले सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर नई ऊर्जा और नए संदेश के साथ उतरना चाहती है।

असल में भाजपा ने यह समझ लिया है कि यूपी की लड़ाई अब पहले जैसी नहीं रही। सपा जातीय समीकरणों को नए तरीके से साध रही है। कांग्रेस भी धीरे-धीरे जमीन पर सक्रिय हो रही है। ऐसे में भाजपा के लिए केवल अपने पारंपरिक वोट बैंक पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।

इसलिए योगी सरकार का यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल राजनीतिक नियुक्ति नहीं बल्कि चुनावी रणनीति का सार्वजनिक प्रदर्शन है। यह संदेश है कि भाजपा अब हर वर्ग, हर जाति और हर क्षेत्र को साथ लेकर चलने की कोशिश करेगी।

2027 अभी दूर दिखाई देता है, लेकिन सत्ता के गलियारों में उसकी आहट साफ सुनाई देने लगी है। भाजपा ने अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं। योगी का चेहरा, मोदी का नेतृत्व और जातीय संतुलन की नई रणनीति कृ यही वह त्रिकोण है जिसके सहारे भाजपा उत्तर प्रदेश में सत्ता का किला बचाए रखना चाहती है।

अब देखना यह होगा कि विपक्ष भाजपा की इस नई सोशल इंजीनियरिंग का जवाब किस तरह देता है। क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव केवल नारों से नहीं, बल्कि समाज की नब्ज पकड़ने से जीते जाते हैं। भाजपा ने इस विस्तार के जरिए ओबीसी, दलित, ब्राह्मण और क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है।

वैदिक मंत्रों के बीच 183 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे

वैदिक मंत्रों के बीच 183 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे  मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बड़ागांव में भव्य आयोजन , जनप...