Wednesday, 15 July 2026

गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर पर भाजपा में जश्न, कार्यकर्ताओं ने बांटी मिठाई

गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर पर भाजपा में जश्न, कार्यकर्ताओं ने बांटी मिठाई 

कैबिनेट की मंजूरी को बताया काशी के विकास का ऐतिहासिक अध्याय, महानगर कार्यालय और संसदीय जनसंपर्क कार्यालय में ढोल-नगाड़ों के बीच मनाया उत्सव

सुरेश गांधी

वाराणसी. केंद्र सरकार की कैबिनेट द्वारा काशी के लिए लगभग 25 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली गंगा एवं वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर सहित मेगा रोड परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद बुधवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने शहर के विभिन्न स्थानों पर उत्सव मनाया। महानगर कार्यालय गुलाबबाग और कैंट विधानसभा के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य किया, एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। पूरे कार्यक्रम के दौरान 'मोदी जी जिंदाबाद', 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के नारों से वातावरण गूंजता रहा।

गुलाबबाग स्थित भाजपा महानगर कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने कहा कि गंगा एवं वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर काशी के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे शहर की यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होगी, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को राहत मिलेगी तथा आधुनिक अधोसंरचना के साथ काशी की सांस्कृतिक पहचान भी और मजबूत होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति काशीवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।

वहीं, कैंट विधानसभा के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय में आयोजित समारोह में विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि लगभग 89 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड नेटवर्क, गंगा कॉरिडोर और वरुणा कॉरिडोर के निर्माण से शहर की यातायात व्यवस्था में व्यापक सुधार होगा। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से शहर तक निर्बाध संपर्क स्थापित होगा, जबकि काशी विश्वनाथ धाम, नमो घाट और अन्य प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले की अपेक्षा अधिक आसान होगी। इससे ट्रैफिक जाम में कमी आने के साथ पर्यटन और व्यापार को भी नई गति मिलेगी।

दोनों कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के कटआउट को मिठाई खिलाकर खुशी व्यक्त की और इसे "विकसित काशी" के संकल्प को साकार करने वाला ऐतिहासिक निर्णय बताया। महानगर कार्यालय के कार्यक्रम में महापौर अशोक तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, प्रेम कपूर, मनीष कपूर, नवीन कपूर, विद्यासागर राय, आत्माविश्वेश्वर, चंद्रशेखर उपाध्याय, निर्मला सिंह पटेल, अखिलेंद्र सिंह 'सनी', प्रमील पांडेय, अजय गुप्ता, रजत जायसवाल, मधुप सिंह, विनोद गुप्ता, वैभव उपाध्याय, प्रमोद यादव 'मुन्ना', अनिल उपाध्याय, राकेश जायसवाल, विनय सिंह, अमित श्रीवास्तव, कुशाग्र श्रीवास्तव, तिरुपति मिश्रा, हीरा यादव, मनोज सोनकर, कुसुम सिंह पटेल, नेहा कक्कड़, पूजा दीक्षित, सपना सिंह, दीपक राय, राजेंद्र सिंह पटेल, शालिनी यादव, विभव सिंह, जेपी सिंह, अनुपम गुप्ता, योगेश वर्मा, साधना वेदांती, साधना पांडेय, डॉ. रचना अग्रवाल, अशोक यादव, पंकज चतुर्वेदी, अवनीश सुयश अग्रवाल, विवेक पांडेय, दीपक सेठ सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। संसदीय जनसंपर्क कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विधायक सौरभ श्रीवास्तव, प्रभारी शिवशरण पाठक, डॉ. नंदजी पांडेय, नवरत्न राठी, अभिषेक मिश्रा, अजय प्रताप सिंह, जगन्नाथ ओझा, शिवांग दुबे, पवन शर्मा, अनुराग शर्मा, विपिन ओझा, जयप्रकाश सिंह, सुमित मिश्रा, संदीप केसरी, प्रिंस द्विवेदी, रोहित साहनी, विनोद चौहान, हरिओम, राजमंगल पांडेय, कपिल त्रिपाठी, गौरव पांडेय, लाल बाबू मिश्रा, अजय श्रीवास्तव, कुशाग्र श्रीवास्तव, ऋतिक मिश्रा, अमित पांडेय, चंदन कुमार पाठक, धर्मेश, अक्षय कुमार यादव, मनीष मिश्रा, अरविंद चौधरी और अभिषेक यादव सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

न्यूजीलैंड की ऊन महंगी, भारतीय कालीन उद्योग ने मांगा समाधान

न्यूजीलैंड की ऊन महंगी, भारतीय कालीन उद्योग ने मांगा समाधान 

भारत टेक्स-2026 में भारत-न्यूजीलैंड गोलमेज बैठकसीईपीसी ने उठाया प्रीमियम ऊन की बढ़ती कीमत और कमी का मुद्दास्थिर आपूर्ति और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

सुरेश गांधी

वाराणसी। भारत के हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल मानी जाने वाली न्यूजीलैंड की प्रीमियम ऊन की लगातार बढ़ती कीमत और सीमित उपलब्धता अब निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। इस गंभीर मुद्दे को भारत टेक्स-2026 के दूसरे दिन आयोजित भारत-न्यूजीलैंड उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में प्रमुखता से उठाया गया। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने स्पष्ट किया कि यदि गुणवत्तापूर्ण न्यूजीलैंड ऊन की नियमित और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हुई तो भारतीय कालीन उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

14 से 17 जुलाई तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स-2026 के दौरान हुई इस बैठक में दोनों देशों ने व्यापारिक सहयोग को नई ऊंचाई देने और वस्त्र एवं ऊन क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। बैठक में न्यूजीलैंड प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के ग्रामीण समुदाय एवं कृषि राज्यमंत्री मार्क पैटरसन ने किया। भारतीय पक्ष की ओर से कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष कैप्टन मुकेश गोम्बर ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उनके साथ परिषद के उपाध्यक्ष असलम महबूब, कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक डॉ. स्मिता नागरकोटी तथा प्रमुख निर्यातक जफर इकबाल अंसारी (ईस्टर्न मिल्स) और कैप्टन विजेंद्र जगलान (हेरिटेज ओवरसीज) मौजूद रहे।

बैठक के दौरान सीईपीसी ने कहा कि न्यूजीलैंड की ऊन की कीमतों में लगातार वृद्धि से भारतीय कालीन निर्माताओं की उत्पादन लागत तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कालीनों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ रहा है। परिषद ने यह भी बताया कि केवल कीमत ही नहीं, बल्कि ऊन की सीमित उपलब्धता भी निर्यातकों के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है। इससे उत्पादन प्रभावित होने के साथ विदेशी खरीदारों की समयबद्ध मांग पूरी करना भी कठिन हो रहा है।

सीईपीसी ने जोर देकर कहा कि यदि प्रीमियम गुणवत्ता वाली न्यूजीलैंड ऊन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तो भारतीय निर्माता अधिक मूल्य वाले उत्कृष्ट कालीन तैयार कर सकेंगे। इससे उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ेगी, निर्यात में वृद्धि होगी और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। बैठक में दोनों देशों ने मौजूदा व्यापारिक व्यवस्था का अधिक प्रभावी उपयोग करने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने तथा वस्त्र और ऊन क्षेत्र में नए सहयोगी अवसर तलाशने पर भी विस्तार से चर्चा की।

सीईपीसी के अध्यक्ष कैप्टन मुकेश गोम्बर ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों में अपार संभावनाएं हैं। यदि कच्चे माल की कीमतों और गुणवत्तापूर्ण ऊन की नियमित आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का समाधान किया जाता है तो भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि परिषद भविष्य में भी न्यूजीलैंड के साथ निकट सहयोग के माध्यम से दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। परिषद के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बदलती परिस्थितियों के बीच विदेशी साझेदारों के साथ लगातार संवाद बेहद आवश्यक है। न्यूजीलैंड की ऊन अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसकी बेहतर उपलब्धता से मूल्य संवर्धित उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में नए अवसर प्राप्त होंगे।

प्रमुख निर्यातक जफर इकबाल अंसारी ने कहा कि ऊन की बढ़ती कीमतों से अधिक चिंता उसकी उपलब्धता को लेकर है। निर्यात बाजार की मांग पूरी करने और उत्पादन की निरंतरता बनाए रखने के लिए गुणवत्तापूर्ण ऊन की नियमित आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है। बैठक का समापन भारत और न्यूजीलैंड के बीच वस्त्र एवं कालीन क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने, सतत विकास को बढ़ावा देने तथा उद्योगों के बीच निरंतर संवाद जारी रखने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। सीईपीसी ने दोहराया कि वह अंतरराष्ट्रीय सहयोग, व्यापार संवर्धन और वैश्विक भागीदारी के माध्यम से भारत के हस्तनिर्मित कालीन उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत रहेगा।

सिर्फ सड़क नहीं, काशी के अगले सौ वर्षों का नक्शा दो एलिवेटेड कॉरिडोर से बदलेगी शहर की दिशा और दशा

सिर्फ सड़क नहीं, काशी के अगले सौ वर्षों का नक्शा दो एलिवेटेड कॉरिडोर से बदलेगी शहर की दिशा और दशा 

मंडलायुक्त बोले - जाम, प्रदूषण और अव्यवस्थित यातायात होगा अतीत; गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर से बनेगा नए बनारस का ब्लूप्रिंट

46.039 किमी गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और 43.218 किमी वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी 3 से 5 वर्ष में पूरा करने का लक्ष्यकाशी विश्वनाथ धाम, नमो घाट, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और रिंग रोड को मिलेगी निर्बाध हाई-स्पीड कनेक्टिविटी

सुरेश गांधी

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी मिलने के बाद मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने बुधवार को विस्तृत प्रस्तुतीकरण के साथ दोनों परियोजनाओं की रूपरेखा सार्वजनिक की। उन्होंने कहा कि यह केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि अगले 40-50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया वाराणसी का नया शहरी मास्टर प्लान है। दोनों परियोजनाओं पर 25,445.96 करोड़ रुपये खर्च होंगे और लगभग 89.257 किमी का एलिवेटेड नेटवर्क तैयार होगा, जो वाराणसी को जाम से स्थायी राहत देने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और भविष्य के शहरी विस्तार का आधार बनेगा।

मंडलायुक्त ने कहा कि वाराणसी विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक नगरी है। हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु, पर्यटक और तीर्थयात्री यहां पहुंचते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत प्रयासों से काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद अब शहर के परिवहन ढांचे में भी ऐतिहासिक परिवर्तन होने जा रहा है। बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या और धार्मिक आयोजनों के दबाव को देखते हुए आने वाले दशकों की जरूरतों के अनुरूप यह परियोजना तैयार की गई है।

गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर: विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग का नमूना

राजलिंगम ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (एनएच-19) से वाराणसी रिंग रोड तक लगभग 46.039 किलोमीटर लंबा छह लेन गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 14,447.64 करोड़ रुपये है। परियोजना में कई अत्याधुनिक इंजीनियरिंग संरचनाएं शामिल हैं। इनमें गंगा नदी पर लगभग 910 मीटर लंबा केबल-स्टे सिग्नेचर ब्रिज, करीब 1.32 किलोमीटर लंबा स्टील बॉक्स गर्डर फ्लाईओवर, बहुस्तरीय इंटरचेंज, रैंप, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था तथा अत्याधुनिक यातायात प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। उन्होंने बताया कि परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य काशी विश्वनाथ धाम, नमो घाट, गंगा घाटों, बीएचयू, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, कैंट स्टेशन, बनारस स्टेशन, दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित करना है।

60 मिनट का सफर घटकर 20-25 मिनट

मंडलायुक्त के अनुसार वर्तमान में शहर के विभिन्न हिस्सों से काशी विश्वनाथ धाम और गंगा घाट तक पहुंचने में कई बार एक घंटे तक का समय लग जाता है। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद यह समय घटकर 20 से 25 मिनट रह जाएगा। इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब सावन, देव दीपावली, महाशिवरात्रि या अन्य बड़े आयोजनों में लाखों श्रद्धालु आएंगे तो उन्हें शहर के भीड़भाड़ वाले मार्गों से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। एलिवेटेड कॉरिडोर से उतरकर सीधे धाम क्षेत्र तक पहुंचने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर से बदलेगी शहर की धड़कन

राजलिंगम ने बताया कि 43.218 किलोमीटर लंबा वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर एनएच-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा। इसकी लागत 10,998.32 करोड़ रुपये होगी। यह 6/4 लेन का हाइब्रिड एलिवेटेड कॉरिडोर होगा। उन्होंने कहा कि डिजाइन इस प्रकार तैयार की गई है कि न्यूनतम भूमि अधिग्रहण और न्यूनतम विस्थापन हो। जहां तक संभव हुआ है, मौजूदा संरचनाओं को बचाते हुए मार्ग तय किया गया है। कई स्थानों पर नदी के समानांतर एलिवेटेड मार्ग बनाया जाएगा ताकि आबादी वाले क्षेत्रों पर कम से कम प्रभाव पड़े।

गंगा पार भी विकसित होगा नया शहरी क्षेत्र

मंडलायुक्त ने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल ट्रैफिक कम करना नहीं है। गंगा के उस पार और वरुणा किनारे भविष्य में विकसित होने वाले नए शहरी क्षेत्रों को भी ध्यान में रखकर कॉरिडोर की योजना बनाई गई है। जहां-जहां भविष्य में आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत विकास होगा, वहां एलिवेटेड कॉरिडोर से कनेक्टिविटी उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि "आज हम केवल वर्तमान की समस्या का समाधान नहीं कर रहे, बल्कि अगले कई दशकों के बनारस की नींव रख रहे हैं।"

ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी

मंडलायुक्त ने बताया कि दोनों परियोजनाओं के पूरा होने पर वाहनों की औसत गति बढ़ेगी। बार-बार रुकने और जाम में फंसने से होने वाली ईंधन की बर्बादी कम होगी। प्रारंभिक आकलन के अनुसार प्रतिवर्ष एक करोड़ लीटर से अधिक ईंधन की बचत होगी तथा कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।

आपातकालीन सेवाओं को मिलेगा लाभ

उन्होंने कहा कि शहर में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया समय (रिस्पॉन्स टाइम) भी काफी कम होगा। मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचाने में आसानी होगी और आपदा प्रबंधन अधिक प्रभावी बन सकेगा।

तीन से पांच वर्ष में पूरा करने की तैयारी

राजलिंगम ने बताया कि दोनों परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को लगभग तीन वर्ष तथा गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर को चार से पांच वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य के दौरान शहर में यातायात बाधित हो, इसके लिए भी अलग कार्ययोजना बनाई जाएगी।

'विकसित भारत-2047' का महत्वपूर्ण अध्याय

मंडलायुक्त ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत-2047' के संकल्प में वाराणसी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। गंगा और वरुणा के दोनों एलिवेटेड कॉरिडोर केवल सड़क परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि यह काशी को विश्वस्तरीय, सुरक्षित, सुगम और आधुनिक महानगर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने कहा, "विरासत हमारी पहचान है, लेकिन आधुनिक सुविधाएं भविष्य की आवश्यकता हैं। इन दोनों का संतुलन ही नए बनारस की पहचान बनेगा।"

दोनों परियोजनाएं एक नजर में

परियोजना

गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर

वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर

लंबाई

46.039 किमी

43.218 किमी

लागत

₹14,447.64 करोड़

₹10,998.32 करोड़

कुल लागत - ₹25,445.96 करोड़

कुल लंबाई - 89.257 किमी

लक्ष्य - जाम से मुक्ति, हाई-स्पीड कनेक्टिविटी, पर्यटन आर्थिक विकास

समयसीमा

3 से 5 वर्ष (चरणबद्ध)

गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर पर भाजपा में जश्न, कार्यकर्ताओं ने बांटी मिठाई

गंगा - वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर पर भाजपा में जश्न , कार्यकर्ताओं ने बांटी मिठाई  कैबिनेट की मंजूरी को बताया काशी के विकास क...