Monday, 15 June 2026

हरित ऊर्जा की उड़ान में यूपी नंबर-1, पवन ऊर्जा खरीद में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

हरित ऊर्जा की उड़ान में यूपी नंबर-1, पवन ऊर्जा खरीद में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड 

'विंड प्रोक्योरमेंट चैंपियन' सम्मान से नवाजा गया उत्तर प्रदेश • 5805 मेगावाट पवन ऊर्जा का दीर्घकालिक प्रबंध • 2030 तक 5000 मेगावाट और खरीदने की तैयारी

सुरेश गांधी

वाराणसी. देश के सबसे अधिक बिजली उपभोक्ता राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश ने अब स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय नेतृत्व का परचम लहरा दिया है। पवन ऊर्जा खरीद (विंड प्रोक्योरमेंट) के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तर प्रदेश को भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की ओर से प्रतिष्ठित 'विंड प्रोक्योरमेंट चैंपियन' सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि केवल प्रदेश की ऊर्जा नीति की सफलता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक ऊर्जा से आगे बढ़कर हरित और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। 

गोवा में सोमवार को आयोजित ग्लोबल विंड डे-2026 के राष्ट्रीय कार्यक्रम में यह सम्मान उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) की ओर से निदेशक (कॉरपोरेट प्लानिंग) दीपक रायजादा ने केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी से प्राप्त किया। समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीपद यशो नायक सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री . के. शर्मा ने इस उपलब्धि पर ऊर्जा विभाग और यूपीपीसीएल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हरित विकास के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में बनाई गई प्रभावी ऊर्जा नीति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और आने वाले वर्षों में देश के ऊर्जा परिवर्तन अभियान का सबसे अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

श्री शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पवन ऊर्जा उत्पादन की प्राकृतिक संभावनाएं सीमित हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु और अन्य पवन ऊर्जा उत्पादक राज्यों से दीर्घकालिक अनुबंधों के माध्यम से हरित ऊर्जा खरीदने का अभिनव मॉडल अपनाया है। यही मॉडल आज पूरे देश में उत्तर प्रदेश की पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) और पावर ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन (PTC) के माध्यम से प्रदेश ने अब तक लगभग 5805 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता का दीर्घकालिक प्रबंध कर लिया है। इनमें से लगभग 1630 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं और प्रदेश को नियमित रूप से हरित बिजली उपलब्ध करा रही हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 2030 तक निर्धारित रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए यूपीपीसीएल ने 5000 मेगावाट अतिरिक्त पवन ऊर्जा खरीदने की कार्ययोजना पर भी तेजी से काम शुरू कर दिया है।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पवन ऊर्जा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह गर्मियों के मौसम में तथा शाम और रात के समय भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती है। यही वह समय होता है जब बिजली की मांग सबसे अधिक रहती है। ऐसे में पवन ऊर्जा प्रदेश की बढ़ती बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे महंगी पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा आपूर्ति भी अधिक संतुलित एवं विश्वसनीय बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल उपभोक्ता राज्य द्वारा बड़े पैमाने पर हरित ऊर्जा खरीदने से केवल कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला और सतत विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी। यह उपलब्धि निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत है, जिससे भविष्य में प्रदेश में हरित ऊर्जा क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। ऊर्जा विभाग के अनुसार यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की राष्ट्रीय स्तर पर हुई औपचारिक मान्यता है। आने वाले वर्षों में प्रदेश सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के समन्वित उपयोग से देश की ऊर्जा क्रांति का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उपलब्धि एक नजर में

'विंड प्रोक्योरमेंट चैंपियन' सम्मान से सम्मानित हुआ उत्तर प्रदेश।

पवन ऊर्जा खरीद में देश का अग्रणी राज्य बना।

5805 मेगावाट पवन ऊर्जा का दीर्घकालिक प्रबंध।

1630 मेगावाट क्षमता की परियोजनियों से शुरू हुई हरित बिजली आपूर्ति।

वर्ष 2030 तक 5000 मेगावाट अतिरिक्त पवन ऊर्जा खरीदने की तैयारी।

हरित ऊर्जा से कार्बन उत्सर्जन घटाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने पर सरकार का फोकस।

हर-हर महादेव' के जयघोष के बीच कैलाश धाम की ओर बढ़े आस्था के कदम

हर-हर महादेव' के जयघोष के बीच कैलाश धाम की ओर बढ़े आस्था के कदम 

गाजियाबाद के कैलाश मानसरोवर भवन से प्रथम दल रवाना, शिवभक्ति, वैदिक मंत्रोच्चार और भजनों से गूंजा परिसर | मंत्री सुनील शर्मा ने दिखाई हरी झंडी, 21 दिन की दिव्य यात्रा पर निकले 47 श्रद्धालु

सुरेश गांधी

वाराणसी. मानो स्वयं देवाधिदेव महादेव ने अपने भक्तों को कैलाश धाम का निमंत्रण भेज दिया हो। "हर-हर महादेव", "बम-बम भोले" और " नमः शिवाय" के गगनभेदी जयघोष, शिव भजनों की मधुर स्वर लहरियों, ढोल-नगाड़ों की मंगलध्वनि और श्रद्धा से भीगी आंखों के बीच सोमवार को गाजियाबाद स्थित इंदिरापुरम के कैलाश मानसरोवर भवन से कैलाश मानसरोवर यात्रा-2026 के प्रथम दल का भव्य शुभारंभ हुआ। पूरा परिसर ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो कैलाश पर्वत की दिव्य अनुभूति स्वयं धरती पर उतर आई हो।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुनील शर्मा ने श्रद्धालुओं को हरी झंडी दिखाकर विधिवत यात्रा के लिए रवाना किया। उनके साथ भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे। श्रद्धालुओं के उत्साह, भक्ति और आस्था ने पूरे वातावरण को शिवमय बना दिया। इस प्रथम दल के लिए कुल 50 श्रद्धालुओं का पंजीकरण हुआ था। विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण के बाद 47 श्रद्धालुओं को यात्रा के लिए पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया गया। इन्हें लाइजन ऑफिसरों, आईटीबीपी के जवानों और चिकित्सा दल की निगरानी में विशेष बसों के माध्यम से एयरपोर्ट के लिए रवाना किया गया, जहां से उनकी आगे की यात्रा प्रारंभ होगी।

पूजा-अर्चना के बाद लिया भोलेनाथ का आशीर्वाद

प्रस्थान से पूर्व सभी श्रद्धालुओं ने कैलाश मानसरोवर भवन स्थित शिव मंदिर में वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भगवान शिव का रुद्राभिषेक एवं आरती संपन्न हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने परिवारजनों और उपस्थित लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए भावुक क्षणों के बीच यात्रा का शुभारंभ किया। कई श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं, तो अनेक भक्त भक्ति संगीत पर झूमते हुए शिव नाम का गुणगान करते दिखाई दिए।

शिवभक्ति में डूबा रहा पूरा परिसर

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने यात्रियों की विदाई को अविस्मरणीय बनाने के लिए विशेष सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था की थी। परिसर में लगातार शिव भजनों का गायन, ताशों और ढोल की मंगलध्वनि तथा श्रद्धालुओं का सामूहिक जयघोष ऐसा वातावरण निर्मित कर रहा था, जिसे देखकर उपस्थित हर व्यक्ति आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिभूत हो उठा। बसों के प्रस्थान के समय श्रद्धालु "हर-हर महादेव" के उद्घोष के साथ भगवान भोलेनाथ का स्मरण करते हुए कैलाश यात्रा पर निकल पड़े।

विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित रहा पांच दिवसीय प्रवास

यात्रा से पूर्व श्रद्धालुओं ने कैलाश मानसरोवर भवन में पांच दिनों तक प्रवास किया। इस दौरान गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने उन्हें आधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराईं। सुरक्षित एवं आरामदायक आवास, सात्विक एवं पौष्टिक भोजन, योग एवं प्राणायाम के माध्यम से उच्च हिमालयी क्षेत्रों के अनुरूप शारीरिक तैयारी, चौबीसों घंटे चिकित्सा सुविधा, एम्बुलेंस सेवा, आध्यात्मिक साहित्य तथा यात्रा संबंधी मार्गदर्शन के लिए विशेषज्ञ टीम की व्यवस्था की गई। पूरे प्रवास के दौरान प्राधिकरण के उपाध्यक्ष स्वयं व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा करते रहे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना करना पड़े।

श्रद्धालुओं ने जताया आभार

यात्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यात्रा की व्यवस्थाएं अत्यंत उत्कृष्ट, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं के अनुरूप हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं से कठिन हिमालयी यात्रा भी अधिक सुरक्षित और सहज बन रही है।

नाथुला दर्रे से कैलाश धाम तक पहुंचेगा प्रथम दल

कैलाश मानसरोवर यात्रा-2026 का यह पहला दल सिक्किम के नाथुला दर्रे के मार्ग से भगवान शिव के परम पावन धाम कैलाश मानसरोवर की ओर अग्रसर होगा। लगभग 21 दिनों तक चलने वाली इस आध्यात्मिक यात्रा में श्रद्धालु कैलाश पर्वत की पवित्र परिक्रमा तथा मानसरोवर के दर्शन कर अपने जीवन की सबसे दुर्लभ आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करेंगे। इस अवसर पर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल, अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह, प्रभारी मुख्य अभियंता आलोक रंजन, अधिशासी अभियंता योगेश पटेल, उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव (धर्मार्थ कार्य) विश्व भूषण मिश्रा सहित अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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