Monday, 24 August 2026

पिछली बार से ज्यादा सीटें जीतेंगे : जगदीश पटेल

पिछली बार से ज्यादा सीटें जीतेंगे : जगदीश पटेल 

राष्ट्रीय सचिव व यूपी सह प्रभारी के पहली बार काशी पहुंचने पर भव्य स्वागत, ढोल-नगाड़ों के बीच कार्यकर्ताओं ने की पुष्पवर्षा

सुरेश गांधी

वाराणसी। भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय सचिव एवं उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी जगदीश पटेल के पहली बार काशी पहुंचने पर सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। एयरपोर्ट से सर्किट हाउस तक जगह-जगह ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के बीच उनका अभिनंदन हुआ। एयरपोर्ट तिराहा, केजे होटल, महादेव वाटिका, सातो महुआ, तरना पुल, शिवपुर और संत अतुलानंद तिराहे पर कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया।

एयरपोर्ट पर प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल, क्षेत्र अध्यक्ष अशोक चौरसिया, राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु, हंसराज विश्वकर्मा, जिलाध्यक्ष राम सकल पटेल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, महापौर अशोक तिवारी समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

सर्किट हाउस में अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए जगदीश पटेल ने कहा कि काशी में किसी नए कार्य की शुरुआत बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद के बिना नहीं होती। सह प्रभारी का दायित्व मिलने के बाद पहली काशी यात्रा में बाबा विश्वनाथ और काल भैरव का दर्शन उनके लिए सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के प्रेम, स्नेह और ऊर्जा ने उन्हें नई प्रेरणा दी है।

आगामी विधानसभा चुनाव पर उन्होंने स्पष्ट लक्ष्य सामने रखा। कहा कि संगठन पूरी ताकत से चुनाव की तैयारी कर रहा है और “पिछली बार प्रदेश में भाजपा ने जितनी सीटें जीती थीं, इस बार उससे कहीं ज्यादा सीटें जीतकर आएंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को बूथ स्तर तक और मजबूत करने का आह्वान किया।

पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण काशी की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण है। पिछले 12-13 वर्षों में काशी को 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं मिली हैं। अब कार्यकर्ताओं को जनता और संगठन के प्रति अपना दायित्व निभाते हुए इसका सकारात्मक प्रतिफल देना होगा।

क्षेत्र अध्यक्ष अशोक चौरसिया ने कहा कि जगदीश पटेल ने बूथ स्तर से राजनीतिक सफर शुरू किया और अपनी कुशल संगठन क्षमता, समर्पण और मेहनत के बल पर राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश सह प्रभारी तक पहुंचे। कार्यक्रम का संचालन अनिल श्रीवास्तव ने किया और धन्यवाद महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने दिया। काशी आगमन के दौरान पटेल ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर में दर्शन-पूजन कर संगठन के नए दायित्व के लिए आशीर्वाद लिया।

रुद्राक्षमय हुए बाबा विश्वनाथ, सावन के अंतिम सोमवार पर उमड़ा आस्था का सैलाब

रुद्राक्षमय हुए बाबा विश्वनाथ, सावन के अंतिम सोमवार पर उमड़ा आस्था का सैलाब

काशी मेंहर-हर महादेवकी गूंज के बीच अंतिम सोमवारी का उल्लास  

मंगला आरती से पहले बाबा का विशेष श्रृंगार, रात से कतार में खड़े रहे कांवड़िए 

रुद्राक्ष और फूलों से दुल्हन की तरह सजा विश्वनाथ धाम

सुरेश गांधी

वाराणसी। सावन के अंतिम सोमवार पर सोमवार की भोर होते-होते काशी का कण-कण शिवमय हो उठा। बाबा विश्वनाथ के दरबार में आस्था, भक्ति और उत्सव का ऐसा संगम दिखा कि मंदिर परिसर से लेकर आसपास की गलियां तकहर-हर महादेवऔरबोल बमके जयघोष से गूंजती रहीं। अंतिम सोमवारी के लिए श्री काशी विश्वनाथ धाम को रुद्राक्ष और आकर्षक फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। मंगला आरती से पहले बाबा का विशेष श्रृंगार हुआ और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आरती के साथ ही दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ। तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी, जबकि बड़ी संख्या में कांवड़िए रात से ही कतार में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करते रहे।

रुद्राक्ष की आभा में दमके बाबा

सावन की अंतिम सोमवारी का सबसे बड़ा आकर्षण बाबा विश्वनाथ का रुद्राक्ष श्रृंगार रहा। मंदिर परिसर की सजावट में भी रुद्राक्ष की आध्यात्मिक आभा को प्रमुखता दी गई। फूलों की मनोहारी सज्जा के बीच रुद्राक्ष से सजे बाबा का स्वरूप भक्तों के लिए विशेष आकर्षण बना। 

मान्यता में रुद्राक्ष को भगवान शिव के अश्रु से उत्पन्न माना गया है। इसलिए सावन के अंतिम सोमवार पर रुद्राक्ष श्रृंगार केवल सजावट नहीं, बल्कि शिव-तत्व और साधना के प्रतीक के रूप में भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष भाव जगाता है। इस वर्ष सावन के चारों सोमवार पर बाबा विश्वनाथ के चार विशिष्ट स्वरूपों के दर्शन कराए गए। 3 अगस्त को शंकर स्वरूप, 10 अगस्त को गौरी-शंकर, 17 अगस्त को अर्धनारीश्वर और आज 24 अगस्त को रुद्राक्ष श्रृंगार हुआ। इस तरह अंतिम सोमवारी पर रुद्राक्ष स्वरूप के साथ चारों सोमवार की श्रृंखला पूर्ण हुई।

तीन सोमवारी में तीन रूप, आज रुद्राक्ष का वैभव

पहली सोमवारी को बाबा ने शंकर स्वरूप में दर्शन दिए। दूसरी सोमवारी पर गौरी-शंकर रूप ने शिव और शक्ति की एकात्मता का संदेश दिया। तीसरी सोमवारी को बाबा अर्धनारीश्वर रूप में विराजे, जिसमें शिव और शक्ति के अभिन्न स्वरूप का दर्शन हुआ। तीसरे सोमवार को शाम तक पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं द्वारा जलाभिषेक किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। अब अंतिम सोमवारी पर बाबा रुद्राक्ष स्वरूप में भक्तों के सामने हैं। चारों स्वरूपों की यह आध्यात्मिक यात्रा सावन की शिवभक्ति को अलग-अलग प्रतीकों में अभिव्यक्त करती रहीशिव से शिव-शक्ति और फिर अर्धनारीश्वर से रुद्राक्ष तक।

रात से कतार, भोर में बरसी आस्था

अंतिम सोमवार पर कांवड़ियों का उत्साह देखते ही बना। अनेक कांवड़िए रात से ही दर्शन की कतार में खड़े रहे। मंदिर में प्रवेश से पहले उनका पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। जैसे ही उन्हें बाबा के दरबार की ओर बढ़ने का अवसर मिला, ‘हर-हर महादेवऔरबोल बमके उद्घोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। मंगला आरती से पहले बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आरती हुई और इसके साथ ही काशी विश्वनाथ धाम में भक्ति का चरम दिखाई पड़ा। मंदिर परिसर को इस तरह सजाया गया कि वह दुल्हन की तरह दमकता नजर आया।

फूलों की खुशबू, रुद्राक्ष की छटा और शिवनाम की गूंज

अंतिम सोमवारी की सजावट में फूलों की रंग-बिरंगी छटा और रुद्राक्ष की प्राकृतिक आभा ने धाम की भव्यता को और बढ़ा दिया। गर्भगृह से लेकर परिसर तक धार्मिक वातावरण में एक अलग ही दिव्यता दिखाई दी। कहीं हाथों में गंगाजल लिए कांवड़िए थे तो कहीं सिर पर पूजा की थाली लिए श्रद्धालु। किसी के कंठ से महामृत्युंजय मंत्र फूट रहा था तो कोई केवलबम-बम भोलेकहते हुए बाबा की ओर बढ़ रहा था। यह केवल दर्शन की कतार नहीं थी, बल्कि काशी की उस सनातन परंपरा का जीवंत दृश्य था, जिसमें हर राह आखिरकार विश्वनाथ के द्वार पर जाकर ठहरती है।

सावन की चार सोमवारीचार संदेश

सावन के चार सोमवार पर हुए विशेष श्रृंगारों को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं देखा जा सकता। इनके पीछे शिव के विभिन्न दार्शनिक स्वरूपों की झलक भी दिखाई देती है। शंकर स्वरूप में शिव के मूल संहारक और कल्याणकारी रूप का दर्शन हुआ। गौरी-शंकर में शिव-शक्ति के मिलन का संदेश मिला। अर्धनारीश्वर ने स्त्री और पुरुष तत्व की समानता और परस्पर पूर्णता का बोध कराया। और रुद्राक्ष श्रृंगार ने शिवभक्ति, साधना और वैराग्य की ओर संकेत किया। इस तरह चारों सोमवार काशी के लिए केवल चार पर्व नहीं, बल्कि शिव के चार भावों की आध्यात्मिक यात्रा बन गए।

अभी खत्म नहीं हुआ सावन का उत्सव

हालांकि आज अंतिम सोमवार है, लेकिन सावन की धार्मिक आभा अभी बनी रहेगी। सावन पूर्णिमा के अवसर पर 27 अगस्त को बाबा काशी विश्वनाथ का भव्य झूला श्रृंगार प्रस्तावित है। इसके बाद 28 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ सावन का समापन होगा। काशी में सावन का अंतिम सोमवार इस बार फिर यही संदेश छोड़ गयायहां सावन कैलेंडर की तारीख नहीं, सांसों में बसा उत्सव है। रुद्राक्ष से सजे विश्वनाथ और फूलों से महकता धाम इसकी सबसे सुंदर तस्वीर बनकर सामने आया।


सेना के जवानों का सैल्यूट पाकर खड़े हो गए एसपी सिटी राकेश मिश्रा, समस्या के समाधान तक नहीं बैठे

वर्दी का रुतबा नहीं, संवेदना बड़ी होती है

सेना के जवानों का सैल्यूट पाकर खड़े हो गए एसपी सिटी राकेश मिश्रा, समस्या के समाधान तक नहीं बैठे 

सुरेश गांधी

वाराणसी। पुलिस की वर्दी सिर्फ अधिकार, अनुशासन और कानून की ताकत का प्रतीक नहीं है। उसके भीतर संवेदना, सम्मान और इंसानियत भी हो तो वही वर्दी जनता के दिल में भरोसा पैदा करती है। एसपी सिटी राकेश मिश्रा का सेना के दो जवानों के प्रति व्यवहार इसी मानवीय पुलिसिंग की एक ऐसी तस्वीर सामने लाता है, जिसकी चर्चा होना जरूरी है। सेना के दो जवान अपनी समस्या लेकर एसपी सिटी से मिलने पहुंचे। मुलाकात के दौरान जवानों ने उन्हें सैल्यूट किया। सैल्यूट ग्रहण करने के बाद एसपी सिटी तत्काल अपनी कुर्सी से खड़े हो गए। इसके बाद उन्होंने तब तक बैठना मुनासिब नहीं समझा, जब तक जवानों की समस्या का समाधान नहीं हो गया। यह छोटा-सा प्रसंग पुलिस और सेना के बीच सम्मान के उस रिश्ते को रेखांकित करता है, जिसमें पद से अधिक महत्व कर्तव्य और वर्दी का होता है।

सम्मान का जवाब सम्मान से

एक तरफ सेना के जवान देश की सीमाओं पर खड़े होकर राष्ट्र की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं, दूसरी तरफ पुलिस के जवान और अधिकारी कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालते हैं। दोनों वर्दियां अलग जरूर हैं, लेकिन दोनों के केंद्र में देश और समाज की सुरक्षा का संकल्प है। ऐसे में एक पुलिस अधिकारी का सैनिकों के सम्मान में खड़ा होना केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि कर्तव्य के प्रति कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान भी है। आज जब पुलिसिंग को लेकर अक्सर कठोरता, दूरी और व्यवहार को लेकर सवाल उठते हैं, ऐसे उदाहरण उम्मीद जगाते हैं। कानून की सख्ती जरूरी है, लेकिन उसके साथ मानवीय चेहरा भी उतना ही जरूरी है। आखिर पुलिस के पास आने वाला हर व्यक्ति सिर्फ एक फरियादी नहीं होता, वह अपनी उम्मीद लेकर आता है।

कुर्सी बड़ी नहीं, सामने खड़ा सम्मान बड़ा

पुलिस अधिकारी की कुर्सी अधिकार का प्रतीक है, लेकिन उस कुर्सी की गरिमा तब और बढ़ जाती है जब अधिकारी जरूरत पड़ने पर उसके सामने खड़े व्यक्ति के सम्मान में खड़ा हो जाए। एसपी सिटी राकेश मिश्रा का यह व्यवहार इसी सोच को सामने रखता है। यह संदेश भी महत्वपूर्ण है कि अधिकारी का कद कुर्सी से नहीं, उसके व्यवहार से तय होता है। फरियादी की बात सुनना व्यवस्था का दायित्व है, लेकिन उसकी गरिमा का सम्मान करना उस व्यवस्था को मानवीय बनाता है।

ऐसे अफसरों का हौसला बढ़ना चाहिए

पुलिस व्यवस्था में अच्छे काम की चर्चा केवल इसलिए नहीं होनी चाहिए कि किसी अपराध का खुलासा हुआ या किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई। पुलिसिंग का एक दूसरा पक्ष भी हैव्यवहार, संवेदना और भरोसा। यही वे छोटे-छोटे क्षण हैं जो पुलिस और जनता के बीच बनी दूरी को कम करते हैं। राकेश मिश्रा का जवानों के प्रति यह व्यवहार इसलिए उल्लेखनीय है कि इसमें किसी दिखावे की जरूरत नहीं थी। एक सैल्यूट के जवाब में खड़े हो जाना और समस्या के समाधान तक खड़े रहनायह संकेत भर है कि वर्दी के भीतर सम्मान की भावना जीवित है। पुलिस की सख्ती अपराधियों के लिए होनी चाहिए, लेकिन संवेदना आम आदमी के लिए। यही संतुलन अच्छी पुलिसिंग की पहचान बनता है। ऐसे अफसरों की पीठ थपथपाना इसलिए जरूरी है क्योंकि अच्छे उदाहरणों की सराहना केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं होती, बल्कि पूरी पुलिस व्यवस्था को यह संदेश देती है कि कानून के साथ इंसानियत भी पुलिसिंग की ताकत है। और शायद इसी एक भावना में वह पुलिसिंग छिपी है, जिसकी जनता आज सबसे ज्यादा अपेक्षा करती हैवर्दी देखकर डर नहीं, भरोसा पैदा हो।

पिछली बार से ज्यादा सीटें जीतेंगे : जगदीश पटेल

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