Thursday, 30 April 2026

सारनाथ में गूंजेगा शांति का संदेश : बुद्ध पूर्णिमा पर ‘बौद्ध महोत्सव’ का वैश्विक संगम

सारनाथ में गूंजेगा शांति का संदेश : बुद्ध पूर्णिमा परबौद्ध महोत्सवका वैश्विक संगम

धर्म, संस्कृति और करुणा का संगम | 12 देशों से आएंगे लाखों अनुयायी | धम्म, ध्यान और विश्व शांति का संकल्प

सुरेश गांधी

वाराणसी.  काशी की पवित्र धरती पर स्थित सारनाथ एक बार फिर करुणा, शांति और आध्यात्मिक चेतना के महापर्व का साक्षी बनने जा रहा है। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर 1 मई को यहां भव्यबौद्ध महोत्सवका आयोजन होगा, जो केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि वैश्विक शांति के संदेश को भी नई ऊर्जा देगा। अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया और इंडो-श्रीलंका इंटरनेशनल बौद्धिस्ट एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में मूलगंध कुटी विहार में आयोजित इस महोत्सव में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। सुबह से ही यहां धम्म देशना, विपश्यना साधना, विचार-परिचर्चा और गौतम बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेषों के दर्शन की व्यवस्था होगी, जो श्रद्धालुओं के लिए दुर्लभ आध्यात्मिक अनुभव होगा।

महोत्सव का एक विशेष आकर्षण युवाओं के लिए आयोजित निबंध और चित्रकला प्रतियोगिता भी है, जिसका विषयविश्व शांति के प्रतीकभगवान बुद्धरखा गया है। आयोजकों का उद्देश्य स्पष्ट हैनई पीढ़ी को बुद्ध के विचारों से जोड़ना और समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करना।

शाम होते-होते यह आध्यात्मिक उत्सव एक बौद्धिक विमर्श का रूप ले लेगा। केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के शान्तरक्षित लॉन में संगोष्ठी का आयोजन होगा, जिसमें देश-विदेश के विद्वान बुद्ध के जीवन, उनके दर्शन और वैश्विक प्रासंगिकता पर अपने विचार रखेंगे। यह संवाद केवल अतीत की चर्चा नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन का प्रयास होगा।

दरअसल, आज जब पूरी दुनिया अशांति, संघर्ष और असहिष्णुता के दौर से गुजर रही है, तब बुद्ध कामध्यम मार्गऔर करुणा का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो उठा है। यही कारण है कि इस बार बुद्ध पूर्णिमा पर सारनाथ में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। अनुमान है कि 12 से अधिक देशों के करीब ढाई लाख अनुयायी यहां पहुंचकर अपनी आस्था अर्पित करेंगे। ये श्रद्धालु धमेख स्तूप की परिक्रमा करेंगे, धम्म सूत्र का पाठ करेंगे और धम्म यात्रा में भाग लेंगे।

विदेशों से आने वाले अनुयायियों में कंबोडिया, थाईलैंड, वियतनाम, लाओस, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश, मलेशिया, कोरिया, चीन, तिब्बत और भूटान जैसे देशों के श्रद्धालु शामिल होंगे। वहीं भारत के विभिन्न राज्योंमहाराष्ट्र, बिहार, मध्यप्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और उत्तरप्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचेंगे। सारनाथ में स्थित करीब 15 देशों के मठ और बौद्ध मंदिर इस अवसर पर विशेष रूप से सजाए जाएंगे और हर जगह उल्लास का वातावरण रहेगा।

मूलगंध कुटी विहार में सुबह 6 से 11 बजे तक तथागत बुद्ध के पवित्र अस्थि धातु के दर्शन कराए जाएंगे। दोपहर में धम्म सभा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे, जबकि शाम को डॉ. आंबेडकर स्मारक स्थल से सारनाथ तक भव्य धम्म यात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान भिक्षुओं द्वारा धम्मदेशना दी जाएगी, जो श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति की ओर प्रेरित करेगी।

इसके साथ ही चिकित्सा शिविर और सामूहिक भोजन दान कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जो बुद्ध केकरुणा और सेवाके संदेश को साकार रूप देंगे। महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया परिसर में सुबह से रात तक चलने वाला यह अन्नदान कार्यक्रमबहुजन हिताय, बहुजन सुखायकी भावना को जीवंत करेगा।

बुद्ध पूर्णिमा का यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानवता के लिए आत्ममंथन का अवसर है। यह हमें याद दिलाता है कि शांति बाहर नहीं, भीतर से जन्म लेती है। सारनाथ की यह धरती, जहां से बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था, आज भी उसी संदेश को दोहराती हैदुख का अंत करुणा से होता है, और करुणा का आरंभ आत्मबोध से। ऐसे में यहबौद्ध महोत्सवकेवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उस शाश्वत संदेश का उत्सव है, जो सदियों से मानवता को दिशा देता आया है और आगे भी देता रहेगा।

‘डिजिटल दर्शन’ की ओर बढ़ी काशी : अब ऐप से आसान होंगे बाबा विश्वनाथ के दरबार के द्वार

डिजिटल दर्शनकी ओर बढ़ी काशी : अब ऐप से आसान होंगे बाबा विश्वनाथ के दरबार के द्वार 

भाषा, सुरक्षा और सुगमता का संगमन्यास की नई व्यवस्था से बदलेगा श्रद्धालुओं का अनुभव

सुरेश गांधी

वाराणसी। आस्था की राजधानी काशी अब परंपरा के साथ तकनीक का ऐसा संगम रचने जा रही है, जो श्रद्धालुओं के अनुभव को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन व्यवस्था को और अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए मंदिर न्यास ने ऐप-आधारित नई प्रणाली लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। धर्मनगरी में प्रतिदिन देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की विविध भाषाएं, अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमियां और अपेक्षाएं अक्सर दर्शन अनुभव में चुनौती बन जाती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए न्यास ने अब एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था तैयार की है, जो श्रद्धालुओं को उनकी भाषा और क्षेत्र के अनुरूप बेहतर सुविधा उपलब्ध कराएगी। 

मंदिर के मुख्यकार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत विशेष सेवाओंजैसे सुगम दर्शन, अभिषेक और आरतीके लिए आने वाले श्रद्धालुओं को ऐप के माध्यम से पंजीकरण कराना होगा। इस प्रक्रिया में आधार संख्या सहित आवश्यक विवरण दर्ज किए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं का भाषाई और क्षेत्रीय वर्गीकरण संभव हो सकेगा। इसके आधार पर मंदिर परिसर में बहुभाषी प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती की जाएगी, ताकि हर भक्त को सहज संवाद और संतोषजनक दर्शन का अनुभव मिल सके।

विश्वभूषण मिश्रा के अनुसार यह व्यवस्था सिर्फ सुविधा ही नहीं, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण कदम है। सीमित अवधि तक सुरक्षित रखी जाने वाली पहचान संबंधी जानकारी से भीड़ प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि आम श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क दर्शन की वर्तमान व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

काशीवासियों के लिए विशेष द्वार से प्रातः और सायंकाल होने वाले दर्शन भी पूर्ववत जारी रहेंगे। यह नई प्रणाली फिलहाल विशेष अनुरोधों और विशिष्ट सेवाओं के लिए चरणबद्ध तरीके से 1 मई 2026 के बाद लागू की जाएगी। न्यास ने स्थानीय नागरिकों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से इस नई पहल में सहयोग और सहभागिता की अपील की है। साथ ही सुझावों के लिए आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से संवाद का रास्ता भी खुला रखा गया है। काशी में यह पहल केवल व्यवस्था का बदलाव नहीं, बल्कि उस परंपरा का आधुनिक विस्तार है, जहांहर-हर महादेवके उद्घोष के साथ अब तकनीक भी आस्था की सहयात्री बन रही है।

नगाड़ा बजा ‘मिशन 2027’ का : नारी शक्ति, विकास और सियासत के संग्राम में तपेगा यूपी

नगाड़ा बजामिशन 2027’ का : नारी शक्ति, विकास और सियासत के संग्राम में तपेगा यूपी 

गेस्ट हाउससेगैरंटीतक, नारी मुद्दे पर सुलगा यूपी, लड़ाई का ट्रेलर शुरू

नारी शक्ति बीजेपी के लिए बना सियासी ब्रह्मास्त्र

चट्टी-चैराहा से लेकर शहर की गलियों तक होगीविकसित यूपीबनामसामाजिक न्याय यानी पीडीएके नैरेटिव की टक्कर

सुरेश गांधी

वाराणसी. पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के चुनावी शोर के थमते ही देश की सियासत का धुरी बिंदु एक बार फिर उत्तर प्रदेश बनता दिख रहा है। 2027 का विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपने-अपने शंखनाद कर दिए हैं। भाजपा नेविकसित यूपीका नगाड़ा बजाते हुए संगठन और सरकार, दोनों स्तर पर कमर कस ली है, तो सपा, बसपा और अन्य दल भी अपने-अपने मुद्दों के साथ मैदान में उतरते दिख रहे हैं। संकेत साफ हैं, अब असली समर की आहट शुरू हो चुकी है। इस बार की लड़ाई केवल सत्ता परिवर्तन या पुनरावृत्ति की नहीं होगी, बल्कि यह नैरेटिव की जंग होगी, विकास बनाम सामाजिक समीकरण, नारी सशक्तिकरण बनाम राजनीतिक प्रतीकवाद, और सुशासन बनाम असंतोष के मुद्दों की टकराहट। गुरुवार को विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर बुलाए गए विशेष सत्र ने इस चुनावी दिशा को और स्पष्ट कर दिया। सदन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवर और विपक्ष की आक्रामकता ने यह संकेत दे दिया कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीतिनारी शक्तिके इर्द-गिर्द ही घूमने वाली है। 

सदन में सियासी प्रहारःगेस्ट हाउससेगिरगिटतक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेआधी आबादीको समर्पित इस सत्र को राजनीतिक और वैचारिक दोनों स्तर पर साधने की कोशिश की। उन्होंने 1995 के गेस्ट हाउस कांड का जिक्र कर सपा पर सीधा हमला बोला और इसे महिलाओं के प्रति उसकेवास्तविक आचरणका प्रतीक बताया। उनका यह कथन, “दिल्ली में एक रुख, लखनऊ में दूसरा, इनके बदलते रंग देखकर गिरगिट भी शर्मा जाए”, यह सिर्फ तंज नहीं, बल्कि विपक्ष के कथित दोहरे चरित्र को चुनावी मुद्दा बनाने की रणनीति का हिस्सा है। दूसरी ओर अखिलेश यादव और उनकी पार्टी ने इस हमले को राजनीतिक आरोप बताते हुए बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था के सवालों को आगे बढ़ाने की कोशिश की। यानी, सत्ता और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने मोर्चे तय कर लिए हैं।

काशी से संदेश: आस्था, विकास और महिला सशक्तिकरण का संगम

वाराणसी में पीएम नरेन्द्र मोदी का दौरा, नारी शक्ति सम्मेलन, और काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन, सिर्फ धार्मिक या प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं थे, बल्कि गहरे राजनीतिक संकेत भी समेटे हुए थे। त्रिशूल और डमरू के प्रतीकात्मक प्रदर्शन से लेकर महिला सम्मेलन में बड़ी भागीदारी तक, हर दृश्य एक संदेश देता दिखा, भाजपासंस्कृति विकास महिला सशक्तिकरणके त्रिकोण पर चुनावी रणनीति गढ़ रही है। एक ओर एक्सप्रेस-वे, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और ग्लोबल समिट की बातें हैं, तो दूसरी ओर सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आस्था का उभार, यह मिश्रण भाजपा के चुनावी मॉडल का केंद्र बनता जा रहा है।

नारी शक्ति : मुद्दा नहीं, चुनावी धुरी

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है किनारी शक्तिअब केवल एक सामाजिक या नीतिगत विषय नहीं रह गया, बल्कि चुनावी धुरी बन चुका है। मुख्यमंत्री ने केंद्र की योजनाओं:- जनधन, उज्ज्वला, शौचालय, का हवाला देते हुए दावा किया कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा मिली है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में महिलाओं को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था। यहां भाजपा का स्पष्ट संदेश है, विकास और महिला सशक्तिकरण को एक साथ जोड़कर प्रस्तुत करना।

विपक्ष की रणनीति, सामाजिक समीकरण और असंतोष का समीकरण

विपक्ष के लिए चुनौती यह है कि वह भाजपा के इस बहुस्तरीय नैरेटिव का मुकाबला कैसे करे। सपा जहां पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समीकरणों को साधने में जुटी है, वहीं बसपा भी अपने पारंपरिक वोट बैंक को पुनर्जीवित करने की कोशिश में है। मायावती की रणनीति अपेक्षाकृत शांत लेकिन गणितीय मानी जाती है, वह सीधे टकराव से बचते हुए सामाजिक समीकरणों को साधने पर फोकस करती हैं। अखिलेश यादव की चुनौती दोहरी है, एक तरफ भाजपा के मजबूत संगठन और संसाधन, दूसरी ओर बसपा के साथ वोट कटाव की आशंका। ऐसे में सपास्थानीय मुद्दोंऔरसरकारी विफलताओंको उभारने की रणनीति पर काम कर रही है।

भाजपा का ब्लूप्रिंट: ‘डबल इंजनसेडबल नैरेटिवतक

भाजपा 2027 के लिए जिस रणनीति पर काम कर रही है, उसमें दो स्पष्ट स्तंभ दिखते हैं, विकास का विजन: एक्सप्रेस-वे, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर, निवेश, रोजगार. सामाजिक-सांस्कृतिक विमश: नारी शक्ति, धार्मिक आस्था, कानून-व्यवस्थ. ‘डबल इंजन सरकारका नारा अबडबल नैरेटिवमें बदलता दिख रहा है, जहां विकास और पहचान की राजनीति साथ-साथ चल रही है। यही कारण है कि काशी जैसे शहर को प्रतीकात्मक केंद्र बनाया जा रहा है, जहां से पूरे प्रदेश को संदेश दिया जा सके। मतलब साफ है भाजपा जहांडबल इंजन सरकारके जरिए विकास, कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता का दावा कर रही है, वहीं विपक्षडबल सवालखड़े कर रहा है, रोजगार, महंगाई, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही पर। मुख्यमंत्री ने इंसेफेलाइटिस नियंत्रण, आवास योजना और स्टार्टअप वृद्धि जैसे आंकड़ों के जरिए सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, जबकि विपक्ष इन दावों की जमीनी सच्चाई पर सवाल उठा रहा है।

सियासी हकीकत

यूपी की राजनीति का इतिहास बताता है कि यहां चुनाव केवल मुद्दों से नहीं, बल्कि माहौल से भी तय होते हैं। कई बारसाइलेंट वोटरने चैंकाने वाले परिणाम दिए हैं। बिहार, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के हालिया चुनावों की तरह यूपी में भी चुप्पी बड़ा संकेत बन सकती है।

2027: किन मुद्दों पर होगी निर्णायक जंग?

आगामी चुनाव में कुछ प्रमुख मुद्दे निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, नारी सुरक्षा और सशक्तिकरण. रोजगार और युवाओं की अपेक्षाएं. कानून-व्यवस्था और सुशासन. सामाजिक समीकरण (जाति आधारित राजनीति): धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान. इन सभी के बीचविकसित यूपीबनामसमान अवसर और न्यायका नैरेटिव टकराएगा। मतलब साफ है इस बार चुनाव केवल जातीय समीकरणों का नहीं, बल्कि भरोसे और धारणा का होगा, कौन जनता को अपने नैरेटिव पर विश्वास दिला पाता है।

जंग का आगाज, परिणाम अनिश्चित

विधानसभा का यह विशेष सत्र केवल एक दिन की कार्यवाही नहीं, बल्कि 2027 के महासंग्राम का उद्घोष है। यानी यूपी की सियासत में नगाड़ा बज चुका है। भाजपा अपने मजबूत संगठन, नेतृत्व और बहुस्तरीय नैरेटिव के साथ मैदान में है, तो विपक्ष भी अपनी जमीन तलाशने में जुटा है। 2027 का चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि राजनीतिक दिशा का चुनाव होगा, जहां यह तय होगा कि प्रदेश विकास और पहचान की राजनीति के किस संतुलन को स्वीकार करता है। कहा जा सकता हैआधी आबादीके सम्मान से शुरू हुई यह बहस अबविकसित यूपीबनामसामाजिक न्यायकी व्यापक लड़ाई में बदल चुकी है। भाजपा ने नगाड़ा बजा दिया है, विपक्ष ने मोर्चा संभाल लिया है, अब नजर उस जनता पर है, जो चुप रहकर भी इतिहास लिखती है। या यूं कहे यूपी तैयार है, एक और निर्णायक जंग के लिए। फिलहाल, इतना तय है कि यह जंग लंबी चलेगी, तीखी होगी और हर दिन नए मोड़ लेगी। यूपी एक बार फिर देश की राजनीति का केंद्र बनने जा रहा है, औरजंग--उत्तर प्रदेशका यह नगाड़ा अब थमने वाला नहीं

विपक्ष की चुनौती

विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह इस बहुस्तरीय नैरेटिव का जवाब कैसे दे। मायावती ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए इसे लागू कर पाने पर चिंता जताई, जबकि सपा ने मौजूदा सीटों पर 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर भाजपा पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया। अखिलेश यादव के लिए चुनौती दोहरी है, एक ओर भाजपा का मजबूत संगठन और आक्रामक नैरेटिव, दूसरी ओर बसपा के साथ संभावित वोट कटाव। ऐसे में सपाजमीनी मुद्दोंको उभारकर मुकाबला करना चाहती है।

सारनाथ में गूंजेगा शांति का संदेश : बुद्ध पूर्णिमा पर ‘बौद्ध महोत्सव’ का वैश्विक संगम

सारनाथ में गूंजेगा शांति का संदेश : बुद्ध पूर्णिमा पर ‘ बौद्ध महोत्सव ’ का वैश्विक संगम धर्म , संस्कृति और करुणा का संगम |...