Sunday, 20 September 2026

गंजारी में अब बल्ला बोलेगा, गेंद गूंजेगी

 गंजारी में अब बल्ला बोलेगा, गेंद गूंजेगी 

अक्तूबर में उद्घाटन की तैयारियां अंतिम दौर में, बीसीसीआई की हरी झंडी के बाद रणजी मुकाबले से हो सकता है क्रिकेट का श्रीगणेश

सुरेश गांधी

वाराणसी। काशी में अब तक क्रिकेट के बड़े मुकाबले की जो कमी खलती थी, वह जल्द दूर होने की उम्मीद है। गंजारी में आकार ले रहा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां निर्माण की आहट के बाद क्रिकेट की आवाज सुनाई देने का इंतजार है। अक्तूबर के तीसरे सप्ताह में स्टेडियम के उद्घाटन की तैयारियां तेज हैं। इसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की निरीक्षण टीम मैदान और क्रिकेट से जुड़ी व्यवस्थाओं को परखेगी। मानक पूरे मिले तो नवंबर में रणजी ट्रॉफी के मुकाबले से काशी के इस नए क्रिकेट केंद्र में चौके-छक्कों की शुरुआत हो सकती है।

हालांकि, बीसीसीआई ने अभी गंजारी को रणजी ट्रॉफी के किसी मुकाबले के आधिकारिक वेन्यू के रूप में घोषित नहीं किया है। इसलिए नवंबर में मैच की संभावना को फिलहाल तैयारियों और प्रस्तावित योजना के रूप में ही देखा जा रहा है। बीसीसीआई के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार 2026-27 की रणजी ट्रॉफी का पहला चरण 11 अक्तूबर से पांच नवंबर तक चलेगा। दूसरा चरण 17 जनवरी से चार फरवरी 2027 तक होगा और नॉकआउट मुकाबले फरवरी-मार्च में खेले जाएंगे।

पहले परीक्षा, फिर मुकाबला

स्टेडियम का उद्घाटन हो जाने के बाद असली परीक्षा बीसीसीआई के स्तर पर होगी। निरीक्षण टीम मैदान की आउटफील्ड, पिच, ड्रेनेज, फ्लड लाइट, ड्रेसिंग रूम, खिलाड़ियों की सुविधाओं, मेडिकल और फिजियो व्यवस्था, मीडिया सेंटर, प्रसारण से जुड़ी सुविधाओं के साथ दर्शकों के लिए उपलब्ध इंतजामों को परखेगी। क्रिकेट के किसी आधिकारिक मुकाबले की मेजबानी से पहले इन सभी व्यवस्थाओं का मानकों पर खरा उतरना जरूरी होगा। यही वजह है कि गंजारी में संभावित पहला रणजी मुकाबला केवल एक क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि नए स्टेडियम की पहली बड़ी परीक्षा भी माना जा रहा है। नई पिच पर गेंद का व्यवहार, आउटफील्ड की गुणवत्ता, जल निकासी और मैच संचालन की व्यवस्थाएं इस मुकाबले के जरिये परखी जा सकेंगी।

1788 मैचों के घरेलू सत्र में काशी की दस्तक

बीसीसीआई ने 2026-27 के घरेलू क्रिकेट सत्र में कुल 1,788 मुकाबलों का कार्यक्रम जारी किया है। इसमें पुरुष और महिला क्रिकेट के साथ अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 स्तर की प्रतियोगिताएं भी शामिल हैं। रणजी ट्रॉफी में 32 टीमें चार एलीट समूहों में और छह टीमें प्लेट समूह में खेलेंगी। उत्तर प्रदेश को रणजी ट्रॉफी के एलीट ग्रुप ए में रखा गया है। ऐसे में गंजारी में रणजी मुकाबला होने की स्थिति में काशी को सीधे उत्तर प्रदेश की शीर्ष घरेलू क्रिकेट टीमों की मेजबानी का अवसर मिलेगा।

अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के लिए अभी करना होगा इंतजार

टीम इंडिया के 2026-27 घरेलू अंतरराष्ट्रीय सत्र के घोषित कार्यक्रम में नवंबर में वाराणसी का कोई मुकाबला नहीं है। दिसंबर में श्रीलंका के खिलाफ तीन वनडे दिल्ली, बेंगलुरु और अहमदाबाद में तथा तीन टी-20 राजकोट, कटक और पुणे में प्रस्तावित हैं। इसके बाद जनवरी 2027 में जिम्बाब्वे और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले निर्धारित हैं। ऐसे में गंजारी में पहला मुकाबला यदि नवंबर में होता है तो उसके रणजी ट्रॉफी का घरेलू मुकाबला होने की संभावना अधिक स्वाभाविक है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए स्टेडियम को बीसीसीआई के मानकों और भविष्य के कार्यक्रम में जगह मिलने का इंतजार करना होगा।

450 करोड़ में खड़ा हुआ काशी का क्रिकेट सपना

गंजारी में करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2023 को इसकी आधारशिला रखी थी। 30 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित हो रहे स्टेडियम की प्रस्तावित दर्शक क्षमता करीब 30 हजार है। इसकी वास्तुकला में काशी की सांस्कृतिक पहचान को भी स्थान दिया गया है। अर्धचंद्राकार छत, त्रिशूल आकार की फ्लड लाइट, घाट की सीढ़ियों जैसी दर्शक दीर्घा और बेलपत्र से प्रेरित डिजाइन इसे दूसरे क्रिकेट स्टेडियमों से अलग पहचान देते हैं। निर्माण की प्रगति लगातार तेज हुई है। अगस्त में हिन्दुस्तान ने 15 अक्तूबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य बताया था। सितंबर की रिपोर्टों में स्टेडियम का करीब 95 प्रतिशत काम पूरा होने और प्रधानमंत्री के संभावित दौरे के लिए तैयारियां किए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, प्रधानमंत्री का दौरा और उद्घाटन कार्यक्रम अंतिम रूप से आधिकारिक घोषित होना बाकी बताया गया था।

रणजी के बाद महिला क्रिकेट की बारी

गंजारी की कहानी सिर्फ पुरुष क्रिकेट तक सीमित रहने वाली नहीं है। स्टेडियम तैयार होने के बाद यहां महिला क्रिकेट के बड़े मुकाबलों की मेजबानी की संभावनाएं भी बन रही हैं। अगले वर्ष महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) के मुकाबलों के लिए वाराणसी का नाम सामने आना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, इसकी अंतिम मेजबानी भी संबंधित क्रिकेट बोर्ड और आयोजन संस्था के आधिकारिक कार्यक्रम पर निर्भर करेगी।

काशी के खिलाड़ियों को मिलेगा नया आसमान

गंजारी का सबसे बड़ा अर्थ केवल यह नहीं कि काशी में अब अंतरराष्ट्रीय आकार का स्टेडियम होगा। इसका असर यहां के स्थानीय क्रिकेट पर भी पड़ेगा। बड़े मैदान, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की संभावित मेजबानी से काशी और पूर्वांचल के खिलाड़ियों को अपने ही शहर में उच्च स्तर की क्रिकेट देखने और सीखने का अवसर मिलेगा। अब तक बड़े मुकाबलों के लिए खिलाड़ियों और दर्शकों की निगाहें दूसरे शहरों की ओर रहती थीं। गंजारी के तैयार होने के बाद यह तस्वीर बदल सकती है। काशी, जो धर्म और संस्कृति की वैश्विक राजधानी के रूप में अपनी पहचान रखती है, उसके पास खेल की दुनिया में भी अपना एक नया मंच होगा। अक्तूबर में उद्घाटन की तैयारी और उसके बाद बीसीसीआई का निरीक्षणदोनों पड़ाव पार होते ही गंजारी के मैदान पर क्रिकेट की पहली गेंद का इंतजार खत्म होने की दिशा साफ हो जाएगी। अगर नवंबर में रणजी मुकाबले की मेजबानी मिलती है तो वह मैच केवल चार दिन का प्रथम श्रेणी मुकाबला नहीं होगा, बल्कि काशी के क्रिकेट इतिहास में एक नए अध्याय की पहली पारी होगी।

25 स्पोर्ट्स कारों में दिखा 25 साल की जनसेवा का सफर

25 स्पोर्ट्स कारों में दिखा 25 साल की जनसेवा का सफर 

पटना से काशी पहुंचीसेवा संकल्पकार रैली, आयुष्मान से उज्ज्वला तक योजनाओं के संदेश से सजी थीं कारें

सुरेश गांधी

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर रविवार को पटना से काशी तक निकली कार रैली ने विकास और जनकल्याण की योजनाओं को अनूठे अंदाज में सामने रखा। 25 स्पोर्ट्स कारों का यह काफिला पटना से चलकर काशी पहुंचा। हर कार केंद्र सरकार की एक जनकल्याणकारी योजना के पोस्टर, स्टीकर और स्लोगन से सजी थी। बाबतपुर स्थित विलेज रिसोर्ट में रैली का समापन हुआ, जहां विभिन्न श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर आयोजित इस रैली को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना से फ्लैग ऑफ किया। रैली की संयोजक एवं बिहार भाजपा की उपाध्यक्ष डॉ. अमृता भूषण राठौर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर चल रहेसेवा संकल्प अभियानके तहत रैली आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार पर अलग-अलग जनकल्याणकारी योजना को प्रदर्शित किया गया। इनमें महिला सशक्तीकरण, स्वास्थ्य, कृषि और गरीब कल्याण से जुड़ी योजनाओं को प्रमुखता दी गई।

उन्होंने कहा कि पटना से वाराणसी के बीच सड़क, चौड़ीकरण, फ्लाईओवर और रिंग रोड जैसी परियोजनाओं के कारण यात्रा का समय कम हुआ है। रैली में शामिल प्रतिभागियों ने यात्रा के दौरान विकास कार्यों को देखा और काशी पहुंचकर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना भी की गई।

25 कारों में दिखा सेवा का सिलसिला

जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या ने कहा कि पटना से काशी पहुंची 25 कारें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा कार्यों का संदेश लेकर आई हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में महिलाओं, बेटियों और गरीब परिवारों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की गईं। भाजपा जिलाध्यक्ष रामसकल पटेल ने कहा कि नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 वर्ष आगामी सात अक्टूबर को पूरे हो रहे हैं। इन वर्षों में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद लोगों तक लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।

आयुष्मान से लखपति दीदी तक

कारों पर आयुष्मान योजना, निशुल्क आवास एवं शौचालय, जनधन खाते, पेंशन योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, उज्ज्वला योजना और लखपति दीदी जैसी योजनाओं के पोस्टर और स्लोगन लगाए गए थे। इस तरह चलते-फिरते वाहनों ने सरकारी योजनाओं की जानकारी देने वाले संदेशवाहक का रूप ले लिया।

विजेताओं को मिला सम्मान

बाबतपुर स्थित विलेज रिसोर्ट में आयोजित समापन समारोह में रैली के विजेताओं को अंगवस्त्रम और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के अलावा बेस्ट कार डेकोरेटेड, बेस्ट कपल, बेस्ट ड्राइवर और यंगेस्ट ड्राइवर जैसी श्रेणियों में भी प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम में क्षेत्र उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता नवरतन राठी, डॉ. राकेश शर्मा, क्षेत्र सह मीडिया प्रभारी संतोष सोलापुरकर समेत बड़ी संख्या में समाजसेवी और प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

काशी में 30 लाख का इनामी नक्सली कमांडर ढेर

काशी में 30 लाख का इनामी नक्सली कमांडर ढेर 

रामनगर में भोर के सन्नाटे को गोलियों ने चीर दिया, यूपी एटीएस से मुठभेड़ में टीपीसी कमांडर बृजेश गंझू मारा गया

झारखंड के चतरा का रहने वाला था बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता  

टीपीसी का कमांडर और एनआईए का वांछित बताया गया 

झारखंड सरकार ने 25 और एनआईए ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया था

मुठभेड़ में एटीएस के डिप्टी एसपी और हेड कांस्टेबल की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी गोली, दोनों सुरक्षित

सुरेश गांधी

वाराणसी। काशी की सुबह रविवार को गोलियों की आवाज से जागी। रामनगर थाना क्षेत्र में लंका मैदान के पास भोर में यूपी एटीएस और पुलिस की टीम का सामना झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) के 30 लाख रुपये के इनामी कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता से हो गया। पुलिस के मुताबिक रोकने की कोशिश पर उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से वह घायल हो गया। एटीएस टीम उसे अस्पताल लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ में खतरा सिर्फ एक तरफ नहीं था। पुलिस के अनुसार, बृजेश की ओर से चली गोलियां यूपी एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट में लगीं। दोनों जैकेट की वजह से सुरक्षित रहे। घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के क्षेत्र में जांच शुरू कर दी।

टेंगरा मोड़ से मुगलसराय की ओर जा रहा था

पुलिस के अनुसार, रविवार तड़के बृजेश गंझू अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल से टेंगरा मोड़ की ओर से रामनगर होते हुए मुगलसराय की तरफ जा रहा था। एटीएस को उसके वाराणसी में होने की सूचना मिली थी। टीम ने लंका मैदान के समीप उसे रोकने का प्रयास किया। पुलिस का दावा है कि बृजेश बाइक से कूद गया और फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की। इसके बाद दोनों ओर से गोलियां चलीं और वह गोली लगने से गिर पड़ा। घायल बृजेश को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। पहचान के बाद पुलिस ने उसके झारखंड कनेक्शन की पुष्टि की। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक उसका मूल पता चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र का लुटू गांव बताया गया है।

25 लाख झारखंड का, पांच लाख एनआईए का

बृजेश गंझू की तलाश केवल झारखंड पुलिस तक सीमित नहीं थी। उस पर झारखंड सरकार ने 25 लाख रुपये और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। यानी उसके सिर पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस के मुताबिक वह प्रतिबंधित टीपीसी का सक्रिय कमांडर था और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की नजर में था। एनआईए की ओर से उसकी तलाश से जुड़े मामलों में टेरर फंडिंग समेत गंभीर आरोपों का उल्लेख सामने आया है। अन्य रिपोर्टों में उस पर रंगदारी, विकास कार्यों में बाधा डालने और सुरक्षा बलों पर हमले जैसे आरोपों का भी जिक्र है। इन मामलों की विस्तृत कानूनी स्थिति संबंधित एजेंसियों के रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।

काशी में क्यों था बृजेश?

मुठभेड़ के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि झारखंड का यह वांछित नक्सली कमांडर वाराणसी तक कैसे पहुंचा और यहां उसका नेटवर्क कितना फैला था। पुलिस अब इसी कड़ी को जोड़ने में जुटी है। बृजेश जिस व्यक्ति के साथ बाइक पर था, उसे हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की सूचना है। उससे बृजेश के वाराणसी आने के उद्देश्य, ठहरने की जगह, संपर्कों और संभावित नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि वाराणसी में उसका कोई स्थानीय मददगार या संपर्क था या नहीं। यानी मुठभेड़ के साथ ऑपरेशन का एक अध्याय खत्म हुआ है, लेकिन जांच की दूसरी कहानी अब शुरू हुई है। सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि 30 लाख रुपये का यह इनामी कमांडर काशी तक किस रास्ते और किस मकसद से पहुंचा था।

गोलियों के बीच बची दो जिंदगियां

मुठभेड़ की सबसे गंभीर तस्वीर पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी गोलियों ने दिखाई। एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण कार्रवाई में अग्रिम पंक्ति में थे। पुलिस के अनुसार दोनों को निशाना बनाकर चलाई गई गोलियां उनकी जैकेट पर लगीं, लेकिन सुरक्षात्मक जैकेट ने दोनों की जान बचा ली। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने मुठभेड़ स्थल की जांच की। वहां से मिले साक्ष्यों, फायरिंग की दिशा और घटनाक्रम की कड़ियों को जांच में शामिल किया जा रहा है।

एक मुठभेड़, कई सवाल

रामनगर की इस कार्रवाई ने झारखंड के नक्सल नेटवर्क की उस कड़ी को सामने ला दिया है, जिसका सिरा अब काशी तक पहुंचा दिखाई दे रहा है। पुलिस के मुताबिक मुठभेड़ में बृजेश गंझू मारा गया, लेकिन उसके वाराणसी आने की वजह और यहां उसके संपर्कों की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। 30 लाख रुपये का इनाम, टीपीसी की कमान और एनआईए की तलाशइन तीन पहचान के साथ काशी पहुंचा बृजेश अब नहीं है। मगर वह काशी क्यों आया था, किससे मिलने आया था और उसके पीछे कौन-सा नेटवर्क था, जांच की असली कहानी अब इन्हीं सवालों के जवाब में छिपी है।

गंजारी में अब बल्ला बोलेगा, गेंद गूंजेगी

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