हरित ऊर्जा की उड़ान में यूपी नंबर-1, पवन ऊर्जा खरीद में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड
'विंड प्रोक्योरमेंट चैंपियन'
सम्मान
से
नवाजा
गया
उत्तर
प्रदेश
• 5805 मेगावाट पवन ऊर्जा
का
दीर्घकालिक
प्रबंध
• 2030 तक 5000 मेगावाट और
खरीदने
की
तैयारी
सुरेश गांधी
वाराणसी. देश के सबसे अधिक बिजली उपभोक्ता राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश ने अब स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय नेतृत्व का परचम लहरा दिया है। पवन ऊर्जा खरीद (विंड प्रोक्योरमेंट) के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तर प्रदेश को भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की ओर से प्रतिष्ठित 'विंड प्रोक्योरमेंट चैंपियन' सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि न केवल प्रदेश की ऊर्जा नीति की सफलता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक ऊर्जा से आगे बढ़कर हरित और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
गोवा में सोमवार
को आयोजित ग्लोबल विंड डे-2026 के
राष्ट्रीय कार्यक्रम में यह सम्मान
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड
(UPPCL) की ओर से निदेशक
(कॉरपोरेट प्लानिंग) दीपक रायजादा ने
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय
ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी से प्राप्त
किया। समारोह में केंद्रीय राज्य
मंत्री श्रीपद यशो नायक सहित
विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी
भी मौजूद रहे। प्रदेश के
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री
ए. के. शर्मा ने
इस उपलब्धि पर ऊर्जा विभाग
और यूपीपीसीएल के अधिकारियों एवं
कर्मचारियों को बधाई देते
हुए कहा कि यह
सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हरित
विकास के विजन और
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के
दूरदर्शी नेतृत्व में बनाई गई
प्रभावी ऊर्जा नीति का परिणाम
है। उन्होंने कहा कि उत्तर
प्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में लगातार नई
ऊंचाइयों को छू रहा
है और आने वाले
वर्षों में देश के
ऊर्जा परिवर्तन अभियान का सबसे अग्रणी
राज्य बनने की दिशा
में तेजी से आगे
बढ़ेगा।
श्री शर्मा ने
कहा कि उत्तर प्रदेश
में पवन ऊर्जा उत्पादन
की प्राकृतिक संभावनाएं सीमित हैं, लेकिन इसके
बावजूद राज्य सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते
हुए गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु और अन्य पवन
ऊर्जा उत्पादक राज्यों से दीर्घकालिक अनुबंधों
के माध्यम से हरित ऊर्जा
खरीदने का अभिनव मॉडल
अपनाया है। यही मॉडल
आज पूरे देश में
उत्तर प्रदेश की पहचान बना
रहा है। उन्होंने बताया
कि भारतीय सौर ऊर्जा निगम
(SECI) और पावर ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन
(PTC) के माध्यम से प्रदेश ने
अब तक लगभग 5805 मेगावाट
पवन ऊर्जा क्षमता का दीर्घकालिक प्रबंध
कर लिया है। इनमें
से लगभग 1630 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं शुरू
हो चुकी हैं और
प्रदेश को नियमित रूप
से हरित बिजली उपलब्ध
करा रही हैं। इसके
अतिरिक्त वर्ष 2030 तक निर्धारित रिन्यूएबल
परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) के लक्ष्यों को
पूरा करने के लिए
यूपीपीसीएल ने 5000 मेगावाट अतिरिक्त पवन ऊर्जा खरीदने
की कार्ययोजना पर भी तेजी
से काम शुरू कर
दिया है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि
पवन ऊर्जा की सबसे बड़ी
विशेषता यह है कि
यह गर्मियों के मौसम में
तथा शाम और रात
के समय भी पर्याप्त
मात्रा में उपलब्ध रहती
है। यही वह समय
होता है जब बिजली
की मांग सबसे अधिक
रहती है। ऐसे में
पवन ऊर्जा प्रदेश की बढ़ती बिजली
आवश्यकताओं को पूरा करने
में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे महंगी पारंपरिक
बिजली पर निर्भरता कम
होगी और ऊर्जा आपूर्ति
भी अधिक संतुलित एवं
विश्वसनीय बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है
कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल उपभोक्ता
राज्य द्वारा बड़े पैमाने पर
हरित ऊर्जा खरीदने से न केवल
कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी
आएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला और
सतत विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों
को भी मजबूती मिलेगी।
यह उपलब्धि निवेशकों के लिए भी
सकारात्मक संकेत है, जिससे भविष्य
में प्रदेश में हरित ऊर्जा
क्षेत्र में नए निवेश
और रोजगार के अवसर बढ़ने
की संभावना है। ऊर्जा विभाग के अनुसार यह
सम्मान केवल एक पुरस्कार
नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा,
पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा
के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की
राष्ट्रीय स्तर पर हुई
औपचारिक मान्यता है। आने वाले
वर्षों में प्रदेश सौर,
पवन और अन्य नवीकरणीय
ऊर्जा स्रोतों के समन्वित उपयोग
से देश की ऊर्जा
क्रांति का प्रमुख केंद्र
बनने की दिशा में
तेजी से आगे बढ़
रहा है।
उपलब्धि एक नजर में
'विंड प्रोक्योरमेंट चैंपियन'
सम्मान से सम्मानित हुआ
उत्तर प्रदेश।
पवन ऊर्जा खरीद
में देश का अग्रणी
राज्य बना।
5805 मेगावाट पवन ऊर्जा का
दीर्घकालिक प्रबंध।
1630 मेगावाट क्षमता की परियोजनियों से
शुरू हुई हरित बिजली
आपूर्ति।
वर्ष 2030 तक 5000 मेगावाट अतिरिक्त पवन ऊर्जा खरीदने
की तैयारी।
हरित ऊर्जा से कार्बन उत्सर्जन घटाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने पर सरकार का फोकस।


