Friday, 10 April 2026

गंगा किनारे फिर सजी रोशनी की अद्भुत महफ़िल, काशी विश्वनाथ घाट पर लेज़र शो की दमदार वापसी

गंगा किनारे फिर सजी रोशनी की अद्भुत महफ़िल, काशी विश्वनाथ घाट पर लेज़र शो की दमदार वापसी 

बाढ़ में डूबे उपकरणों को तकनीकी कौशल से मिला नया जीवन

गंगा आरती के बाद रोज़ गूंजेगा काशी का गौरव

 देश के सर्वश्रेष्ठ लेज़र शो का खिताब पा चुका है यह आयोजन

सुरेश गांधी

वाराणसी। आस्था और आधुनिकता के अद्भुत संगम की नगरी काशी में एक बार फिर रोशनी, ध्वनि और संस्कृति का मोहक उत्सव जीवंत हो उठा है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गंगा घाट पर बहुप्रतीक्षित लेज़र शो का पुनः शुभारंभ हो गया है। देश के सर्वश्रेष्ठ लेज़र शो का अवॉर्ड प्राप्त कर चुका यह भव्य आयोजन अब फिर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गया है।

इस लेज़र शो में ललिता घाट और काशी के गौरवपूर्ण इतिहास को अत्यंत कलात्मक और मनोहारी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। प्रकाश और ध्वनि के समन्वय से सजी यह प्रस्तुति काशी की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर देती है, जिससे दर्शक भावविभोर हो उठते हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष गंगा के जलस्तर में अचानक आई वृद्धि के कारण लेज़र शो के उपकरण पूरी तरह जलमग्न हो गए थे। मशीनों में सिल्ट भर जाने से वे निष्क्रिय हो गई थीं और शो को बंद करना पड़ा था। महीनों तक पानी में डूबे इन उपकरणों को फिर से चालू करना किसी चुनौती से कम नहीं था।

लेकिन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने हार नहीं मानी। मुंबई से विशेषज्ञ तकनीशियन टीम को बुलाकर और विभिन्न संस्थानों के सहयोग से इस जटिल कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। तकनीकी दक्षता और प्रतिबद्धता का यह उदाहरण अब रंग लाता दिखाई दे रहा है। अब यह लेज़र शो पहले की तरह पूरी गुणवत्ता और भव्यता के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। खास बात यह है कि मंदिर घाट पर पहले से शुरू हो चुकी सायंकालीन गंगा आरती के बाद प्रतिदिन इस शो का आयोजन किया जाएगा। लगभग 10 मिनट की यह प्रस्तुति श्रद्धालुओं को आध्यात्मिकता के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का अद्भुत अनुभव कराती है।

लेज़र शो के पुनः शुरू होने से काशी विश्वनाथ घाट की रौनक और बढ़ गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस आकर्षक दृश्य का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। उपस्थित लोगों ने इस पहल की जमकर सराहना की और इसे काशी के पर्यटन को नई ऊंचाई देने वाला कदम बताया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा निरंतर किए जा रहे नवाचार यह स्पष्ट करते हैं कि धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक सुविधाओं का संतुलन बनाते हुए श्रद्धालुओं के अनुभव को और बेहतर बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। अब गंगा किनारे यह रोशनी का उत्सव केवल आस्था को आलोकित करेगा, बल्कि काशी की सांस्कृतिक पहचान को भी नई चमक देगा।

अक्षय तृतीया : रोहिणी नक्षत्र में बरसेगा सूर्य-चंद्र का अक्षय पुण्य, सौभाग्य-शोभन योग का अद्भुत संयोग, खुलेंगे भाग्य के द्वार

अक्षय तृतीया : रोहिणी नक्षत्र में बरसेगा सूर्य-चंद्र का अक्षय पुण्य, सौभाग्य-शोभन योग का अद्भुत संयोग, खुलेंगे भाग्य के द्वार

भारतीय सनातन परंपरा में अक्षय तृतीया को केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अनंत शुभता और अक्षय फल का द्वार माना गया है।अक्षयअर्थात जिसका कभी क्षय हो, इस दिन किए गए हर शुभ कार्य, दान-पुण्य, जप-तप और निवेश का फल अनंत काल तक बना रहता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा, जब ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं। कृतिका से रोहिणी नक्षत्र का परिवर्तन, सौभाग्य और शोभन योग का निर्माण, तथा चंद्रमा का वृषभ राशि में गोचर इस दिन की दिव्यता को कई गुना बढ़ा देता है। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त कहा गया है, यानी इस दिन बिना किसी पंचांग विचार के विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ, भूमि-वाहन खरीद और स्वर्ण निवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है। यही कारण है कि यह तिथि केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि जीवन में स्थायित्व, समृद्धि और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक बन जाती है

सुरेश गांधी

भारतीय सनातन परंपरा में कुछ तिथियां केवल कैलेंडर का हिस्सा नहीं होतीं, वे जीवन-दर्शन की धुरी बन जाती हैं। अक्षय तृतीया ऐसी ही एक तिथि है, एक ऐसा आध्यात्मिक पर्व, जो हमें यह विश्वास दिलाता है कि संसार भले हीक्षयके नियम पर चलता हो, लेकिन सत्कर्म और सद्भावना अक्षय होती है।अक्षयअर्थात जिसका कभी नाश हो। यही इस पर्व का मूल तत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किया गया हर शुभ कार्य, चाहे वह दान हो, जप हो, तप हो या साधना, अनंत काल तक फल देता है। इसलिए यह दिन स्वयंसिद्ध, अबूझ और ईश्वर प्रदत्त मुहूर्त माना गया है। इस साल अक्षय तृतीया 19 अप्रैल, सोमवार को मनाई जाएगी। तृतीया तिथि प्रारंभ : 18 अप्रैल, दोपहर 0101 बजे, जबकि तृतीया तिथि समाप्त : 20 अप्रैल, सुबह 1039 बजे है. ऐसे में उदयातिथि और रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव से 19 अप्रैल को ही पर्व मनाना श्रेष्ठ है। इस दिन कृतिका से रोहिणी नक्षत्र का संक्रमण, सौभाग्य और शोभन योग का निर्माण, तथा चंद्रमा का वृषभ राशि में होना, ये सभी संयोग इस तिथि को और अधिक शुभ बनाते हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन सूर्य मेष में और चंद्रमा वृषभ में स्थित होते हैं, दोनों उच्च स्थिति में। सूर्य हमारेप्राणऔर चंद्रमा हमारेमनका प्रतिनिधित्व करते हैं। जब दोनों संतुलित होते हैं, तो मनुष्य के कर्मों का फल भी अक्षय और प्रभावी हो जाता है।

अबूझ मुहूर्त : जहां गणना नहीं, आस्था चलती है

हिंदू धर्म में सामान्यतः हर शुभ कार्य के लिए मुहूर्त देखने की परंपरा है, लेकिन अक्षय तृतीया एक अपवाद है। यहअबूझ मुहूर्तहै, अर्थात इस दिन बिना किसी पंचांग या गणना के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ, भूमि या वाहन खरीद, सोना-चांदी निवेश. यह तिथि उन लोगों के लिए भी विशेष महत्व रखती है, जिनके विवाह में ग्रह-नक्षत्र बाधा बनते हैं। इस दिन ग्रह दोषों का प्रभाव नगण्य माना गया है। अक्षय तृतीया केवल ज्योतिषीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पौराणिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भगवान परशुराम का जन्म इसी दिन हुआ. नर-नारायण और हयग्रीव अवतार का प्राकट्य, सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ (कृतयुगादि तृतीया), राजा भगीरथ द्वारा मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण, बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलना, वृंदावन में बांके बिहारी के चरण दर्शन. यह तिथिचिरंजीवी तिथिभी कहलाती है, क्योंकि इससे जुड़े सभी प्रसंग अमरत्व और स्थायित्व का प्रतीक हैं।

19 अप्रैल को अक्षय तृतीया सुबह 10 बजकर 49 मिनट से शुरू हो रही है, ऐसे में आप उस समय से ही सोना, चांदी, आभूषण, कार, मोटरसाइकिल, मकान आदि की खरीदारी कर सकते हैं. यह पूरे दिन चलेगा. आप 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 49 मिनट तक खरीदारी कर सकते हैं. इस साल की अक्षय तृतीया पर सोना, चांदी आदि की खरीदारी के लिए लोगों को 19 घंटे से अधिक का शुभ मुहूर्त मिलेगा.

अक्षय तृतीया 2026 शुभ चौघड़िया मुहूर्त

दिन का चौघड़िया मुहूर्त : चर-सामान्य मुहूर्त: सुबह 07:29 बजे से 09:06 बजे तक. लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 09:06 बजे से 10:43 बजे तक. अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 10:43 बजे से 12:20 बजे तक. शुभ-उत्तम मुहूर्त: दोपहर 01:58 बजे से 03:35 बजे तक. रात का चौघड़िया मुहूर्त. शुभ-उत्तम मुहूर्त: शाम 06:49 बजे से रात 08:12 बजे तक. अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: रात 08:12 बजे से रात 09:35 बजे तक. चर-सामान्य मुहूर्त: रात 09:35 बजे से रात 10:57 बजे तक. लाभ-उन्नति मुहूर्त: मध्य रात्रि 01:43 बजे से तड़के 03:05 बजे तक. शुभ-उत्तम मुहूर्त: 20 अप्रैल, प्रात: 04:28 बजे से प्रात: 05:51 बजे तक.

मेष राशि

मेष राशि के लोगों के लिए यह समय बहुत का अच्छा परिणाम मिलेगा. सीनियर्स भी आपके काम से खुश रहेंगे. आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. रुका हुआ पैसा भी वापस मिल सकता है. जो लोग विदेश में काम कर.ने का सपना देख रहे हैं, उनकी इच्छा पूरी होने के योग बन रहे हैं. बिजनेस करने वालों को नए क्लाइंट मिल सकते हैं. परिवार का सहयोग मिलेगा. आत्मविश्वास भी बढ़ेगा. साथ ही सेहत में सुधार देखने को मिल सकता है.

तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए अक्षय तृतीया शुभ संकेत लेकर सकती है. धन लाभ के अच्छे योग बन रहे हैं. आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है. बिजनेस में फायदा मिलेगा. आय के नए स्रोत बन सकते हैं. नौकरीपेशा लोगों को भी तरक्की के मौके मिलेंगे. घर या संपत्ति खरीदने का प्लान बन सकता है. परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा. वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी. रिश्ते मजबूत होंगे. कुल मिलाकर यह समय आपके लिए कई मायनों में लाभकारी साबबित हो सकता है.

धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए यह योग खासतौर पर फायदेमंद रहेगा, खासकर व्यापार करने वालों के लिए. कमाई केनए रास्ते खुल सकते हैं और पुराने निवेश से अच्छा लाभ मिल सकता है. नौकरी करने वालों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है, जिससे करियर में ग्रोथ होगी..विदेश यात्रा या विदेश से जुड़े काम में सफलता मिल सकती है. नया बिजनेस शुरू करने का यह सही समय हो सकता है. परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और कोई शुभ ... समाचार मिल सकता है. सामाजिक मान-सम्मान भी बढ़ेगा.

समृद्धि का विज्ञान : क्यों खरीदा जाता है सोना?

अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने की परंपरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और आर्थिक भी है। शास्त्रों में कहा गया है, इस दिन स्वर्ण खरीदना हजार अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल देता है। यह मान्यता व्यक्ति को निवेश के प्रति प्रेरित करती है। सोना, जो स्थायित्व और मूल्य का प्रतीक है, इस दिन अक्षय वृद्धि का संकेत देता है। इसी कारण आभूषण, भूमि, नया व्यापार, वित्तीय निवेश, इन सभी कार्यों को इस दिन आरंभ करना शुभ माना जाता है।

पूजा, दान और अक्षय पुण्य

अक्षय तृतीया का मूल भावदानऔरसाधनाहै। इस दिन विशेष रूप से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा, अन्न, जल, वस्त्र, सत्तू, फल का दान, पितरों के लिए तर्पण और घटदान, गंगा स्नान या गंगाजल से स्नानण् मान्यता है कि इस दिन किया गया दान अलौकिक कोष में संचित होता है, जो जन्म-जन्मांतर तक फल देता है। गर्मी के मौसम में जलदान और अन्नदान का विशेष महत्व है। यह केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि मानवता की सेवा भी है।

आत्मचिंतन : अक्षय तृतीया का वास्तविक संदेश

अक्षय तृतीया केवल बाहरी समृद्धि का पर्व नहीं है। यह आत्मिक उन्नति का भी अवसर है। यह दिन हमें सिखाता है, अहंकार, क्रोध, लोभ जैसे दोषों का त्याग, प्रेम, करुणा और परोपकार का वरण, “निज मनु मुकुर सुधारि”, आत्मावलोकन. भगवद्गीता में वर्णितदैवी और आसुरी वृत्तियोंका चयन भी इसी दिन से प्रेरित होता है। अक्षय कर्म वही है, जो मानवता को ऊपर उठाए।

घर की शुद्धि : समृद्धि का पहला कदम

धार्मिक मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया से पहले घर की सफाई और शुद्धि आवश्यक है। इन वस्तुओं को घर से हटाना शुभ माना गया है, टूटी झाड़ू, फटे-पुराने कपड़े, टूटी घड़ी, बर्तन, खंडित मूर्तियां. यह केवल धार्मिक विश्वास नहीं, बल्कि ऊर्जा संतुलन का सिद्धांत है, सकारात्मक वातावरण ही समृद्धि को आकर्षित करता है।

विशेष उपाय और परंपराएं

एकाक्षी नारियल (लक्ष्मी स्वरूप) की स्थापना, श्री यंत्र और कुबेर यंत्र की पूजा, पारद लक्ष्मी और स्फटिक कछुआ, दक्षिणावर्ती शंख का पूजन. ये सभी उपाय धन, शांति और स्थायित्व के प्रतीक हैं।

गंगा स्नान और पितृ तर्पण

अक्षय तृतीया पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है, इससे सात जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। पितरों के लिए, तिल और कुश से तर्पण, जल से भरा घटदान. यह कार्य पितृ शांति और आशीर्वाद का माध्यम है।

परशुराम : शक्ति और संयम का प्रतीक

भगवान परशुराम, विष्णु के छठे अवतार, का जन्म भी इसी दिन हुआ। वे ब्राह्मण होते हुए भी क्षत्रिय तेज के प्रतीक थे। उनका जीवन धर्म रक्षा, संयम और कर्तव्य का संदेश देता है। उनकी कथा हमें यह सिखाती है, शक्ति का उपयोग केवल धर्म के लिए होना चाहिए। भगवान परशुराम का जन्म संध्या काल यानी प्रदोष काल में हुआ था. पंचांग के मुताबिक, तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगीऔर तिथि का समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा. ऐसे में परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाएगी.  परशुराम जयंती पर पूजन का समय 19 अप्रैल को शाम 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. 

सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम

अक्षय तृतीया केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ग्रामीण और कृषि जीवन का उत्सव भी है। फसलों के पकने की खुशी, नए चक्र की शुरुआत, सामूहिक दान और सहयोग. यह पर्व समाज को साझेदारी और समृद्धि का संदेश देता है।

अक्षय का अर्थ केवल धन नहीं

अक्षय तृतीया हमें यह सिखाती है, सच्चा अक्षय धन केवल सोना-चांदी नहीं, बल्कि हमारे कर्म, विचार और संस्कार हैं। यह दिन हमें अवसर देता है, नई शुरुआत का, आत्मचिंतन का और जीवन को सही दिशा देने का. जब हम अपने भीतर के दोषों को त्यागकर सद्गुणों को अपनाते हैं, तभी वास्तविकअक्षयकी प्राप्ति होती है। मतलब साफ है इस अक्षय तृतीया पर केवल स्वर्ण खरीदें, बल्कि स्वर्णिम विचार भी संचित करें, क्योंकि वही आपके जीवन को सच मेंअक्षयबनाएंगे। अक्षय तृतीया हमें यह सिखाती है कि जीवन में केवल भौतिक संपत्ति ही नहीं, बल्कि सत्कर्म, सेवा और सदाचार ही सच्चा अक्षय धन है। यह पर्व हमें अपने कर्मों को सकारात्मक दिशा देने और जीवन को समृद्ध बनाने का अवसर देता है।

गंगा किनारे फिर सजी रोशनी की अद्भुत महफ़िल, काशी विश्वनाथ घाट पर लेज़र शो की दमदार वापसी

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