काशी से बागेश्वर बाबा का विश्व को संदेश : “प्रेम से प्रकाश, युद्ध से विनाश”
अस्सी घाट
पर
गंगा
पूजन,
मछली
बंदर
मठ
में
संतों
से
लिया
आशीर्वाद
मां के
साथ
विश्वनाथ
धाम
में
दर्शन
कर
बोले—सनातन
संस्कृति
ही
दिखा
सकती
है
दुनिया
को
शांति
का
मार्ग
सुरेश गांधी
वाराणसी. बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शुक्रवार को वाराणसी पहुंचे
और काशी की धरती
से विश्व शांति का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि आज
दुनिया के कई हिस्सों
में युद्ध और तनाव की
स्थिति है, लेकिन भारत
में शांति का वातावरण है।
इसका मूल कारण भारत
की सनातन संस्कृति, संत परंपरा और
राष्ट्र की एकात्म सोच
है। उन्होंने कहा, “प्रेम से प्रकाश होगा
और युद्ध से विनाश होगा।”
यदि दुनिया को स्थायी शांति
का रास्ता चाहिए तो उसे भारत
और सनातन संस्कृति के विचारों से
सीख लेनी होगी।
काशी पहुंचने पर
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सबसे पहले अस्सी
क्षेत्र स्थित मछली बंदर मठ
पहुंचे, जहां उन्होंने मठ
के पीठाधीश्वर से आशीर्वाद लिया।
उनके आगमन पर संत-महंतों और श्रद्धालुओं ने
पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत
किया। ‘हर-हर महादेव’,
‘जय श्रीराम’ और ‘जय हनुमान’
के जयघोष से पूरा परिसर
गूंज उठा। बागेश्वर बाबा
ने भी हाथ जोड़कर
सभी का अभिवादन स्वीकार
किया और श्रद्धालुओं को
आशीर्वाद दिया।
इसके बाद वे
अस्सी घाट पहुंचे और
गंगा तट पर विधि-विधान से गंगा पूजन
किया। घाट पर भी
उनके दर्शन के लिए बड़ी
संख्या में श्रद्धालु उमड़
पड़े। भक्तों के उत्साह के
बीच उन्होंने अनुयायियों से बातचीत की
और सनातन संस्कृति की महत्ता पर
प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान
समय में दुनिया के
कई देशों में युद्ध चल
रहे हैं, लेकिन भारत
आज भी शांति का
संदेश देने वाला देश
है। इसके पीछे भारतीय
सेना की रणनीति, राष्ट्रीय
एकजुटता और सनातन संस्कृति
की मूल भावना का
बड़ा योगदान है।
इसके बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपनी मां के साथ श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे और बाबा विश्वनाथ के दरबार में दर्शन-पूजन किया। उन्होंने कहा कि सनातन की विचारधारा में वह शक्ति है जो पूरे विश्व में शांति और संतुलन स्थापित कर सकती है। इस दौरान उन्होंने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रति समर्थन भी व्यक्त किया और कहा कि संत समाज सदैव धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट रहता है।


