Tuesday, 3 November 2026

आसमान से एक फ्रेम में सिमटी काशी, अब गंडोले में बैठकर निहारेंगे बनारस!

काशी में अब जाम के सीने पर दौड़ेगा गंडोला!

आसमान से एक फ्रेम में सिमटी काशी, अब गंडोले में बैठकर निहारेंगे बनारस! 

807 करोड़ की परियोजना से बदलेगा काशी का परिवहन और पर्यटन मानचित्र

कैंट से गोदौलिया तक 3.85 किमी का सफर 16 मिनट में; 50 रुपये किराया, एक गंडोले में 10 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था  

एयरपोर्ट जैसी चेकिंग, सफर के दौरान नहीं खुलेंगे दरवाजे

गंजारी स्टेडियम के साथ दिसंबर में प्रधानमंत्री के हाथों लोकार्पण की संभावना

कॉरिडोर में पांच स्टेशन और 150 गंडोले, तकनीकी परीक्षण के बाद आम यात्रियों के लिए खुलने की तैयारी

सुरेश गांधी 

वाराणसी. काशी की गलियों, घाटों और मंदिरों को अब तक जमीन से निहारा जाता रहा है, लेकिन जल्द ही बनारस को आसमान से देखने का रोमांच भी पर्यटकों और शहरवासियों को मिलेगा। गंडोले में बैठते ही नीचे बसी काशी का नजारा कुछ ऐसा दिखा मानो पूरा शहर एक ही फ्रेम में सिमट आया हो। सड़कें, इमारतें और भागती जिंदगी ऊपर से एक अलग ही तस्वीर पेश कर रही थीं। करीब तीन किमी की इस सवारी में सबसे खास अनुभव इसकी सहजता और आरामदायक सफर रहा। न सड़कों का शोर, न जाम में फंसे वाहनों की बेचैनी और न ही भागती जिंदगी की आपाधापी। हवा में बेहद आरामदायक सफर के दौरान शहर की इमारतें, सड़कें और बदलता बनारस एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहे थे। चारों ओर पारदर्शी शीशों से घिरे गंडोले में बैठकर काशी को निहारना अपने आप में अनूठा अनुभव है।

यह सिर्फ एक नई सवारी नहीं, बल्कि काशी के परिवहन और पर्यटन के बदलते स्वरूप की दस्तक है। कैंट से गोदौलिया तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना अब अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रही है। मंगलवार को पत्रकारों के लिए निर्धारित विशेष ट्रायल राइड में गंडोले की सवारी कर इसकी सुविधाओं और कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिला। इस अनुभव ने साफ किया कि रोपवे आने वाले समय में काशी के पर्यटन मानचित्र पर एक नया आकर्षण बन सकता है। करीब तीन किमी के इस अनुभव ने अहसास कराया कि काशी अब अपनी पारंपरिक पहचान के साथ आधुनिक परिवहन के एक नए युग में प्रवेश करने जा रही है। रोपवे यानी गंडोला अब केवल जाम से निजात दिलाने वाली परिवहन परियोजना भर नहीं रह जाएगा। यह काशी आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का नया केंद्र भी बनने जा रहा है। अब तक काशी विश्वनाथ धाम, गंगा आरती, संकट मोचन, सारनाथ और गंगा घाट पर्यटकों की यात्रा सूची में प्रमुखता से शामिल रहे हैं। आने वाले समय में गंडोले की सवारी भी इस सूची में एक नया आकर्षण जोड़ सकती है। पर्यटक अब सिर्फ काशी को देखेंगे नहीं, बल्कि आसमान से उसे निहारने का अनुभव भी अपने साथ लेकर जाएंगे।

16 मिनट में 3.85 किलोमीटर का सफर

करीब 807 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लंबाई 3.85 किमी है। कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक का सफर लगभग 16 मिनट में पूरा करने की योजना है। पूरे कॉरिडोर में पांच स्टेशन बनाए गए हैं। इनमें कैंट रेलवे स्टेशन, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया शामिल हैं। मार्ग में 29 टावर स्थापित किए गए हैं। कुल 150 गंडोले संचालित करने की योजना है। प्रत्येक गंडोले में एक साथ 10 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है। इसकी अधिकतम गति छह मीटर प्रति सेकंड बताई गई है। प्रस्तावित किराया प्रति यात्री 50 रुपये है।

दरवाजे खुद होंगे लॉक, सुरक्षा एयरपोर्ट जैसी

गंडोले की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी सुरक्षा व्यवस्था है। चारों तरफ पारदर्शी शीशों से घिरे केबिन को देखकर स्वाभाविक सवाल उठता है कि सफर के दौरान कोई व्यक्ति दरवाजा खोलने या बाहर निकलने की कोशिश करे तो क्या होगा? अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों का भरोसा दिलाया। गंडोले में बैठने के बाद यात्रियों को दरवाजा बंद करने की जरूरत नहीं होगी। स्टेशन से रवाना होने से पहले दरवाजे स्वतः बंद हो जाएंगे और अगले स्टेशन पर पहुंचने के बाद ही खुलेंगे। यानी सफर के दौरान यात्री अपनी ओर से दरवाजा नहीं खोल सकेंगे। गंडोले में लगे पारदर्शी पैनल भी सामान्य कांच जैसे नहीं हैं। अधिकारियों के मुताबिक, ये विशेष रूप से मजबूत बनाए गए हैं और सामान्य मुक्के से नहीं टूट सकते।

स्टेशन पर होगी एयरपोर्ट जैसी जांच

सुरक्षा की व्यवस्था गंडोले में बैठने से पहले ही शुरू हो जाएगी। स्टेशन पर यात्रियों की जांच एयरपोर्ट की तर्ज पर मशीनों से की जाएगी। पान, गुटखा, खैनी और अस्त्र-शस्त्र समेत प्रतिबंधित वस्तुएं ले जाने की अनुमति नहीं होगी। स्कैनिंग मशीनों के जरिए ऐसी वस्तुओं की पहचान की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने की कार्रवाई भी हो सकती है। यात्रियों के चढ़ने और उतरने की व्यवस्था भी नियंत्रित होगी, ताकि स्टेशनों पर भीड़ और अव्यवस्था न हो। इस तरह सुरक्षा जांच से लेकर गंडोले के स्वचालित दरवाजों तक यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

काशी की पर्यटन सूची में जुड़ेगा नया आकर्षण

अब तक काशी आने वाले पर्यटकों की सूची में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम, गंगा आरती, संकट मोचन मंदिर, सारनाथ और गंगा घाट प्रमुख आकर्षण रहे हैं। रोपवे शुरू होने के बाद गंडोले की सवारी भी इस सूची में शामिल हो सकती है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक अब केवल मंदिरों और घाटों का दर्शन ही नहीं करेंगे, बल्कि हवा में चलते केबिन से काशी का विहंगम दृश्य भी देख सकेंगे। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि पर्यटकों को एक नया अनुभव मिलेगा। काशी की छतें, सड़कें, ऐतिहासिक इमारतें और शहर का फैलाव ऊपर से देखने का अवसर पर्यटन को नया आयाम दे सकता है। खासकर कम समय में अधिक स्थल देखने की इच्छा रखने वाले पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

जाम से राहत के साथ कारोबार को भी मिलेगी गति

कैंट रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों को सीधे शहर के प्रमुख हिस्सों तक पहुंचने का वैकल्पिक माध्यम मिलेगा। कैंट, मलदहिया, लहुराबीर, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया जैसे व्यस्त इलाकों में यातायात का दबाव कम करने में भी रोपवे मददगार हो सकता है। सावन, महाशिवरात्रि और देवदीपावली जैसे बड़े आयोजनों में इसकी उपयोगिता और बढ़ जाएगी। आर्थिक दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होटल, गेस्ट हाउस, खानपान, स्थानीय परिवहन और हस्तशिल्प कारोबार को अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं। यदि पर्यटक रोपवे को काशी यात्रा का अनिवार्य अनुभव मानने लगते हैं तो शहर में उनके ठहराव और खर्च में भी वृद्धि की संभावना है।

गंजारी स्टेडियम के साथ उद्घाटन की चर्चा  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में देखी जा रही रोपवे परियोजना के साथ गंजारी में बन रहे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को भी काशी के विकास की बड़ी सौगात माना जा रहा है। चर्चा है कि दिसंबर तक दोनों परियोजनाओं का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों एक साथ कराया जा सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक तारीख और कार्यक्रम की घोषणा अभी बाकी है।  गंजारी स्टेडियम खेल पर्यटन और बड़े आयोजनों के जरिए पूर्वांचल को नई पहचान दे सकता है, वहीं रोपवे धार्मिक पर्यटन और शहरी परिवहन को नया आयाम देगा। दोनों परियोजनाएं मिलकर काशी की अर्थव्यवस्था और पर्यटन की संभावनाओं का विस्तार कर सकती हैं।

घाटों की नगरी को मिला आसमान का रास्ता

काशी की पहचान उसकी प्राचीनता, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत से है। अब उसी नगरी में आधुनिक तकनीक के सहारे आसमान में सफर करने की सुविधा आकार ले रही है। गंडोले में बैठकर महसूस हुआ कि सड़क पर चलते हुए जो शहर अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देता है, वह ऊपर से एक साथ जुड़ा हुआ नजर आता है। यही इस परियोजना की सबसे बड़ी खूबी है। यदि सुरक्षा, नियमित संचालन और यात्री सुविधाओं के सभी मानक पूरे होते हैं तो गंडोला आने वाले समय में काशी की पहचान का नया हिस्सा बन सकता है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन, गंगा आरती और घाटों की सैर के साथ अब आसमान से बनारस को निहारना भी पर्यटकों की यात्रा का यादगार हिस्सा होगा।

आसमान से एक फ्रेम में सिमटी काशी, अब गंडोले में बैठकर निहारेंगे बनारस!

काशी में अब जाम के सीने पर दौड़ेगा गंडोला ! आसमान से एक फ्रेम में सिमटी काशी , अब गंडोले में बैठकर निहारेंगे बनारस !  8...