चैत में ही सतावई लागल जेठ सी तपन
कमजोर पश्चिमी
विक्षोभ,
सक्रिय
होता
अलनीनो
और
लगातार
साफ
आसमान
से
चढ़ेगा
पारा;
25 मार्च
के
आसपास
40 डिग्री
पार
करने
के
आसार
सुरेश गांधी
वाराणसी। फाल्गुन की मस्ती अभी
पूरी तरह उतरी भी
नहीं कि बनारस में
चैत की धूप जेठ
जैसी तपिश का अहसास
कराने लगी है। सुबह
की हल्की ठंडक अब दोपहर
की चुभती गर्मी में बदलने लगी
है और सूरज की
किरणें दिन चढ़ने के
साथ तेज धार की
तरह धरती को झुलसाने
लगी हैं। मौसम वैज्ञानिकों
का कहना है कि
इस बार गर्मी का
तेवर जल्दी और तीखा नजर
आएगा। अगर यही हाल
रहा तो मार्च के
अंतिम सप्ताह तक तापमान 40 डिग्री
सेल्सियस की सीमा को
पार कर सकता है।
मौसम विशेषज्ञ यह
भी मान रहे हैं
कि अलनीनो का असर केवल
गर्मी तक सीमित नहीं
रहेगा, बल्कि यह इस साल
के मानसून को भी प्रभावित
कर सकता है। यदि
अलनीनो पूरी तरह सक्रिय
रहा तो मानसून की
प्रकृति और वर्षा के
पैटर्न में बदलाव देखने
को मिल सकता है।
इधर, मार्च महीने में सामान्य तौर
पर करीब 6.8 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन
इस बार अब तक
वाराणसी में एक बूंद
भी वर्षा दर्ज नहीं की
गई है। आने वाले
सात दिनों के मौसम पूर्वानुमान
में भी बारिश की
कोई संभावना नहीं जताई गई
है। लगातार साफ आसमान और
तेज धूप के कारण
दिन के समय तापमान
तेजी से बढ़ने के
आसार हैं। मौसम के
इस बदले हुए मिजाज
ने लोगों को अभी से
गर्मी की आहट महसूस
करा दी है। दोपहर
के समय सड़कों पर
धूप की चमक और
हवा में बढ़ती तपिश
यह संकेत दे रही है
कि इस बार चैत
का महीना भी जेठ की
तरह तपने वाला है।
बनारस की लोकभाषा में कहा जाए
तो—चैत शुरू होते
ही जेठ जैसी तपन
सताने लगी है और
आने वाले दिनों में
यह गर्मी और तेज होने
के संकेत दे रही है।
मौसम वैज्ञानिक के
अनुसार, मौसम के इस
अचानक बदलते मिजाज के पीछे तीन
बड़ी वजहें काम कर रही
हैं। पहली वजह पश्चिमी
विक्षोभ का कमजोर होना
है। सामान्य तौर पर पश्चिमी
विक्षोभ उत्तर भारत में बादल,
हल्की बारिश और ठंडी हवाएं
लाता है, जिससे तापमान
नियंत्रित रहता है। लेकिन
इस बार इसका असर
बेहद कमजोर है, जिसके कारण
मौसम में राहत देने
वाली परिस्थितियां नहीं बन पा
रही हैं। दूसरी महत्वपूर्ण वजह प्रशांत महासागर
में अलनीनो की स्थिति का
धीरे-धीरे सक्रिय होना
है। अभी तक प्रशांत
महासागर में अलनीनो की
स्थिति न्यूट्रल थी और लानीना
भी कमजोर अवस्था में थी, लेकिन
अब अलनीनो का प्रभाव बढ़ने
लगा है। यह स्थिति
वैश्विक स्तर पर तापमान
को प्रभावित करती है और
इसके सक्रिय होने से गर्मी
सामान्य से अधिक महसूस
हो सकती है। तीसरा कारण
मौसम का लगातार साफ
बने रहना है। अगले
कई दिनों तक आसमान में
बादलों की मौजूदगी बेहद
कम रहने की संभावना
है। ऐसे में सूरज
की किरणें बिना किसी रुकावट
के सीधे धरती तक
पहुंच रही हैं, जिससे
दिन का तापमान तेजी
से बढ़ रहा है।
यही वजह है कि
दोपहर के समय धूप
पहले से ज्यादा तीखी
महसूस होने लगी है।







