गंजारी में सज रहा ‘खेलों का काशीधाम’, अंतिम दौर में निर्माण
पीएम मोदी
के
जन्मदिन
पर
लोकार्पण
की
सुगबुगाहट,
सितंबर
में
उद्घाटन
की
संभावना
से
बढ़ी
हलचल
451 करोड़ की लागत से
30.66 एकड़
में
आकार
ले
रहा
पूर्वांचल
का
पहला
अंतरराष्ट्रीय
क्रिकेट
स्टेडियम
• 30 हजार दर्शकों की
क्षमता
• शिवत्व
से
सजा
स्थापत्य,
त्रिशूलनुमा
फ्लडलाइट
और
डमरू
आकार
का
पवेलियन
• मैदान,
मीडिया
सेंटर
और
प्रमुख
मंडपों
का
काम
लगभग
पूरा
सुरेश गांधी
वाराणसी। काशी की पहचान
सदियों से मंदिरों, घाटों
और आध्यात्मिक चेतना से रही है।
अब इसी शहर की
धरती पर गेंद और
बल्ले की गूंज काशी
के नए परिचय की
पटकथा लिखने जा रही है।
राजातालाब के गंजारी में
आकार ले रहा अंतरराष्ट्रीय
क्रिकेट स्टेडियम अब निर्माण के
अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका
है। रविवार को जिलाधिकारी सत्येंद्र
कुमार के निरीक्षण में
सामने आई तस्वीर बताती
है कि वर्षों से
प्रतीक्षित यह सपना अब
मूर्त रूप लेने से
कुछ ही कदम दूर
है।
अब डमरू परियोजना ही शेष
शिवत्व में ढली क्रिकेट की दुनिया
पूर्वांचल की प्रतिभाओं को मिलेगा अपना मैदान
गंजारी का महत्व केवल
अंतरराष्ट्रीय मैचों तक सीमित नहीं
रहने वाला। यह पूर्वांचल के
उन युवाओं के लिए उम्मीद
का मैदान होगा, जिन्हें अब तक बड़े
स्तर के प्रशिक्षण और
प्रतियोगिताओं के लिए दूसरे
शहरों की ओर देखना
पड़ता था। अत्याधुनिक सुविधाओं,
अभ्यास पिचों, मीडिया सेंटर और खिलाड़ियों के
लिए विकसित किए जा रहे
आधुनिक इंतजामों के साथ यह
परिसर क्रिकेट प्रतिभाओं को नया मंच
देगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैचों
की मेजबानी के साथ इसके
आसपास खेल आधारित गतिविधियों
और अधोसंरचना के विस्तार की
भी संभावनाएं बढ़ेंगी। गंजारी क्षेत्र में प्रस्तावित स्पोर्ट्स
सिटी की योजना भी
इसी बदलती तस्वीर की ओर संकेत
करती है।
स्टेडियम बदलेगा काशी की अर्थव्यवस्था का खेल
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट केवल चौके-छक्कों
का उत्सव नहीं होता। उसके
साथ होटल, परिवहन, खानपान, पर्यटन, स्थानीय कारोबार और रोजगार की
पूरी अर्थव्यवस्था चलती है। मैच
देखने आने वाले हजारों
दर्शक काशी के घाटों,
मंदिरों और बाजारों तक
पहुंचेंगे। ऐसे में गंजारी
का स्टेडियम काशी के धार्मिक
पर्यटन के साथ खेल
पर्यटन का नया केंद्र
भी बन सकता है।
एक ओर विश्वनाथ धाम
में आस्था का सैलाब होगा
तो दूसरी ओर गंजारी में
क्रिकेट का जुनून। यही
संगम आने वाले वर्षों
में काशी की नई
पहचान गढ़ सकता है।
शिलान्यास से लोकार्पण तक—तीन साल का इंतजार
23 सितंबर 2023 को जिस परियोजना की नींव रखी गई थी, उसके लोकार्पण की घड़ी अब करीब आती दिखाई दे रही है। शुरुआती समयसीमा में बदलाव और निर्माण संबंधी विभिन्न चरणों के कारण परियोजना को अपेक्षित समय से अधिक अवधि लगी, लेकिन अब निर्माण की तस्वीर तेजी से बदल रही है। काशी के लिए यह सिर्फ एक स्टेडियम का तैयार होना नहीं होगा। यह उस शहर की बदलती आकांक्षाओं का संकेत होगा, जहां आध्यात्म की ऊंचाई के साथ अब खेलों का क्षितिज भी फैल रहा है। गंगा की लहरों और मंदिरों की घंटियों के बीच जब गंजारी में पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की रोशनी जलेगी, तब काशी की सदियों पुरानी कथा में एक नया अध्याय जुड़ेगा—जहां महादेव की नगरी में खेल भी अपनी नई महाशक्ति के साथ दुनिया के सामने खड़ा होगा।




