Sunday, 18 October 2026

दो हजार मातृशक्तियों पर पुष्पवर्षा, चुनरी ओढ़ाकर किया अभिनंदन

दो हजार मातृशक्तियों पर पुष्पवर्षा, चुनरी ओढ़ाकर किया अभिनंदन 

काशी में नारी शक्ति के सम्मान का आयोजन, डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा—सशक्त नारी वाले राष्ट्र को कोई गुलाम नहीं बना सकता

अष्टमी पर सरोजा पैलेस में मातृशक्ति अभिनंदन व फलाहार कार्यक्रम • भाजपा के राष्ट्रीय सचिव जगदीश पटेल ने आयोजन को बताया अद्भुत

सुरेश गांधी

वाराणसी। शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर रविवार को पिपलानी कटरा स्थित सरोजा पैलेस में मातृशक्ति के सम्मान का भव्य आयोजन हुआ। शहर दक्षिणी के विधायक एवं पूर्व मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने दो हजार से अधिक महिलाओं पर पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया। उन्हें चुनरी ओढ़ाई और उपहार भेंट किए। इसके बाद सभी ने फलाहार ग्रहण किया।

डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि सनातन धर्म में नारी का स्थान सर्वोच्च है। नारी सृजन की देवी है और भारतीय संस्कृति में उसे सदैव सम्मान दिया गया है। सीता-राम, राधा-कृष्ण, लक्ष्मी-नारायण और उमा-शंकर जैसे नामों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा में नारी शक्ति को विशेष महत्व प्राप्त है। जिस राष्ट्र की महिला शक्ति सशक्त होती है, उसे कोई गुलाम नहीं बना सकता। इतिहास की वीरांगनाओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नारी राष्ट्र की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने के साथ अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने का साहस भी रखती है।

धार्मिक विरासत का भी किया उल्लेख

विधायक ने कहा कि शहर दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से विशिष्ट महत्व रखता है। इसी क्षेत्र में ज्योतिर्लिंग श्रीकाशी विश्वनाथ, मां अन्नपूर्णा, काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव और नवदुर्गा व नवगौरी के मंदिर स्थित हैं। ऐसे क्षेत्र में नवरात्र के अवसर पर मातृशक्ति का सम्मान करना विशेष महत्व रखता है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव एवं प्रदेश सह प्रभारी जगदीश पटेल ने कहा कि भारतीय परंपरा में नारी सदैव पूजनीय रही है। शास्त्रों में भी नारी शक्ति के सम्मान की परंपरा का उल्लेख मिलता है। उन्होंने डॉ. नीलकंठ तिवारी की ओर से आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे मातृशक्ति के प्रति सम्मान का सराहनीय प्रयास बताया। कार्यक्रम का संचालन भाजपा महानगर मंत्री नेहा कक्कड़ ने किया। इस अवसर पर काशी क्षेत्र के अध्यक्ष अशोक चौरसिया, आलोक श्रीवास्तव, आत्मा विश्वेश्वर, संदीप चौरसिया, सुनील यादव, गोपाल जी गुप्ता, बबलू सेठ, तारकेश्वर जायसवाल, राजीव सिंह डब्बू, सुनीता राजेश सिंह, साधना वेदांती, रचना अग्रवाल, कनकलता मिश्र, पार्षद एवं क्षेत्र सह मीडिया प्रभारी संतोष सोलापुरकर, संजय केशरी, श्रवण गुप्ता, अभिजीत भारद्वाज, अनंतराज गुप्ता, अशोक यादव, मनोज यादव, नीरज जायसवाल और शुभम जायसवाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

वायुसेना के रंग में सजेगा नमो घाट, नीले कारपेट पर चलकर एयर शो देखने पहुंचेंगे मोदी

गंगा की लहरों पर शौर्य की उड़ान, आसमान में गूंजेगा भारत का दम

वायुसेना के रंग में सजेगा नमो घाट, नीले कारपेट पर चलकर एयर शो देखने पहुंचेंगे मोदी 

25 अक्तूबर को काशी में साढ़े चार घंटे रहेंगे प्रधानमंत्री, खोचवां में महिलाओं से संवाद के बाद गंगा के ऊपर आसमानी करतबों के बनेंगे साक्षी

राफेल की गर्जना, सुखोई की रफ्तार और तेजस की ताकत से रोमांचित होगी काशी; पांच ध्रुव हेलीकॉप्टरों के साथ सारंग रचेगी आसमानी आकृतियां

सुरेश गांधी

वाराणसी. गंगा की लहरों के ऊपर आसमान में वायुसेना के लड़ाकू विमानों का रोमांचक प्रदर्शन और नीचे नीले कारपेट से सजा नमो घाट। 25 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए काशी में तैयार हो रहा यह नजारा आयोजन की भव्यता को खास रंग देने जा रहा है। भारतीय वायुसेना की पहचान से जुड़े नीले रंग के कारपेट से नमो घाट के तीनों फेस सजाए जा रहे हैं। सीढ़ियों से लेकर घाट के फर्श तक कारपेट बिछाया जा रहा है। प्रधानमंत्री इसी सजे हुए रास्ते से गुजरकर एयर शो देखने के लिए कार्यक्रम स्थल तक पहुंचेंगे।

प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासनिक अमला और भाजपा पदाधिकारी तैयारियों में जुटे हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मोदी 25 अक्तूबर को सुबह 10:15 बजे बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे और दोपहर 2:45 बजे काशी से रवाना होंगे। करीब साढ़े चार घंटे के प्रवास में उनका महिलाओं से संवाद और नमो घाट पर एयर शो देखने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

खोचवां में महिलाओं से संवाद, फिर नमो घाट का रुख

बाबतपुर एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री सीधे मिर्जामुराद क्षेत्र के खोचवां स्थित अरविंद मिल जाएंगे। यहां स्थापित यूनिट में महिलाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 300 प्रशिक्षित महिलाएं यूनिट में काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री यहां महिलाओं से संवाद करेंगे। इस दौरान उनके प्रशिक्षण, कामकाज और रोजगार से जुड़े अनुभव चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। खोचवां से प्रधानमंत्री हेलिकॉप्टर से पुलिस लाइन पहुंचेंगे। वहां से सड़क मार्ग से नमो घाट जाएंगे। नमो घाट पर उनके लिए भारतीय वायुसेना के एयर शो का आयोजन किया गया है। गंगा के ऊपर होने वाले इस प्रदर्शन में वायुसेना की हवाई क्षमताओं और रोमांचक करतबों को देखने का अवसर मिलेगा।

तीनों फेस पर बिछ रहा नीला कारपेट

प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए नमो घाट पर विशेष सजावट की जा रही है। घाट के तीनों फेस पर सीढ़ियों से लेकर फर्श तक नीला कारपेट बिछाया जा रहा है। भारतीय वायुसेना की पहचान से जुड़े इस रंग के चयन से स्वागत मार्ग को आयोजन की थीम के अनुरूप रूप दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री इसी कारपेट पर चलकर एयर शो के निर्धारित स्थल तक पहुंचेंगे। घाट पर मेहमानों के स्वागत, आवागमन और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए संबंधित विभागों को व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी दी गई है।

सड़क किनारे स्वागत की तैयारी

प्रधानमंत्री के पुलिस लाइन से नमो घाट तक सड़क मार्ग से गुजरने के दौरान स्वागत की भी तैयारी की जा रही है। मार्ग के दोनों ओर भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता स्वागत के इंतजाम में जुटे हैं। प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था के साथ यातायात को सुचारु बनाए रखने की चुनौती भी होगी। प्रधानमंत्री के आगमन और वापसी के समय मार्गों पर यातायात प्रबंधन को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी होगी। काशी में प्रधानमंत्री के इस दौरे को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। एक ओर खोचवां में महिला श्रमिकों से संवाद का कार्यक्रम है तो दूसरी ओर नमो घाट पर गंगा के ऊपर वायुसेना के प्रदर्शन को देखने का आयोजन। नीले कारपेट से सजा घाट इन दोनों तैयारियों के बीच प्रधानमंत्री के स्वागत का खास केंद्र बनने जा रहा है।

भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और तेजस जैसे लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन की जानकारी सामने आई है। सूर्य किरण एरोबेटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम भी इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण होंगी। 22, 24 और 25 अक्टूबर को प्रस्तावित हवाई प्रदर्शनों को लेकर काशी में उत्सुकता बढ़ रही है।

आसमान में पांच ध्रुवों की सधी हुई सरगम

इस हवाई उत्सव में सारंग टीम का प्रदर्शन अपने आप में खास होगा। पांच स्वदेशी उन्नत हल्के हेलीकॉप्टरों यानी एएलएच ध्रुव के साथ उड़ान भरने वाली यह टीम हवा में अनुशासन, संतुलन और अद्भुत तालमेल की मिसाल पेश करती है। पलक झपकते बदलते फॉर्मेशन और एक-दूसरे के साथ सटीक सामंजस्य से उड़ते हेलीकॉप्टर दर्शकों को रोमांचित करेंगे। वर्ष 2003 में स्थापित सारंग टीम ने देश के साथ विदेशों में भी अपने प्रदर्शन से पहचान बनाई है। इसके करतब केवल उड़ान की कलात्मकता नहीं, बल्कि स्वदेशी विमानन क्षमता, तकनीकी दक्षता और वर्षों के कठोर अभ्यास का प्रमाण हैं। पांच हेलीकॉप्टरों का एक साथ हवा में थिरकना मानो गति और अनुशासन के बीच ऐसा संवाद होगा, जिसमें हर मोड़ पर सटीकता की परीक्षा होती है।

रफ्तार की गर्जना, स्वदेशी ताकत का संदेश

राफेल की शक्ति, सुखोई की फुर्ती और तेजस की आधुनिक तकनीक इस आयोजन को व्यापक आयाम दे सकती है। सूर्य किरण एरोबेटिक टीम के समन्वित हवाई करतबों के साथ आसमान में बनने वाले फॉर्मेशन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। एलसीएच प्रचंड और परिवहन विमानों की संभावित भागीदारी से भारतीय सैन्य विमानन के विविध स्वरूपों को देखने का अवसर भी मिल सकता है। यह आयोजन केवल रोमांच का प्रदर्शन नहीं होगा। इसके भीतर आधुनिक भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षा, स्वदेशी निर्माण की क्षमता और देश की सुरक्षा के लिए निरंतर तैयार रहने वाले वायुसेना के जवानों के परिश्रम की झलक भी होगी। हर उड़ान के पीछे प्रशिक्षण, तकनीक, अनुशासन और टीम भावना का लंबा अभ्यास होता है। आसमान में कुछ क्षणों के लिए दिखने वाला कौशल वर्षों की तैयारी का परिणाम होता है।

गंगा की पृष्ठभूमि में शौर्य और संस्कृति का संगम

काशी की पहचान अध्यात्म, परंपरा और ज्ञान की नगरी के रूप में रही है। ऐसे में गंगा के ऊपर होने वाला हवाई प्रदर्शन प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक भारत की सामरिक क्षमता को एक ही दृश्य में सामने लाएगा। घाटों की ऐतिहासिक छवि के ऊपर उड़ते विमान और हेलीकॉप्टर काशी के लिए एक अलग अनुभव रचेंगे। विद्यार्थियों, युवाओं और विमानन में रुचि रखने वालों के लिए भी यह आयोजन विशेष महत्व रखता है। हवाई करतबों को प्रत्यक्ष देखने से उन्हें विमानन, एयरोस्पेस तकनीक और रक्षा सेवाओं में करियर की संभावनाओं को करीब से समझने की प्रेरणा मिल सकती है। गंगा की धारा अपनी गति से बहती रहेगी, लेकिन उसके ऊपर उड़ते विमान कुछ पलों के लिए काशी की निगाहों को आसमान से बांध देंगे। यह नजारा याद दिलाएगा कि भारत की उड़ान केवल ऊंचाई नापने की कहानी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सामर्थ्य और नए क्षितिजों की ओर बढ़ते राष्ट्र के आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति भी है।

दो हजार मातृशक्तियों पर पुष्पवर्षा, चुनरी ओढ़ाकर किया अभिनंदन

दो हजार मातृशक्तियों पर पुष्पवर्षा , चुनरी ओढ़ाकर किया अभिनंदन  काशी में नारी शक्ति के सम्मान का आयोजन , डॉ . नीलकंठ तिवारी...