50वें इंडिया कारपेट एक्सपो
का मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन, बोले—कारीगरों
के हाथों को विकास और अवसर से जोड़ें
‘हुनर’ को ‘बाजार’ से जोड़कर बढ़ेगा कालीन
कारोबार
निर्यातकों से
सीधा
संवाद
कर
सुनीं
समस्याएं,
विंध्य
एक्सप्रेस-वे
के
लिए
आभार
के
साथ
माधोसिंह
रेलवे
क्रॉसिंग
पर
ओवरब्रिज
की
मांग
हस्तनिर्मित कालीन
के
लिए
अलग
नीति
और
विशेष
दर्जे
की
उठी
आवाज
32 देशों के खरीदार जुटे,
223 प्रदर्शक मैदान में; एक हजार करोड़ से ज्यादा के कारोबार की उम्मीद
गोल्डन जुबली एक्सपो में
147 विदेशी खरीदार पहुंचे, 146 बाइंग रिप्रेजेंटेटिव भी कारोबार की तलाश में
सुरेश गांधी
भदोही। धागों में संस्कृति और
रंगों में भारत की
पहचान समेटे भदोही के कालीन अब
केवल दुनिया के घरों की
खूबसूरती नहीं बढ़ाएंगे, बल्कि
उत्तर प्रदेश की वैश्विक औद्योगिक
पहचान को भी और
विस्तार देंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
रविवार को 50वें इंडिया
कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती
संस्करण का फीता काटकर
उद्घाटन किया। इस अवसर पर
उन्होंने भदोही के बुनकरों और
कारीगरों के दशकों पुराने
हुनर को वैश्विक पहचान
दिलाने में उनके योगदान
को रेखांकित करते हुए कहा
कि जिन हाथों ने
भदोही की कालीन कला
को दुनिया तक पहुंचाया है,
उन्हें अब विकास, तकनीक,
डिजाइन और नए बाजारों
से जोड़ने की जरूरत है।
इस मौके पर एकमाध्यक्षअध्यक्ष
उमेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री को
मां विंध्यवासिनी का तैलचित्र भेंट
कर स्वागत किया.
जबकि सीइपीसी चेयरमैन
मुकेश कुमार गोम्बर ने कालीन का
तैलचित्र भेंट किया. चार दिवसीय
एक्सपो 7
अक्टूबर तक चलेगा। स्वर्ण
जयंती संस्करण में 223
प्रदर्शक भाग ले रहे
हैं। पहले दिन ही
32
देशों के 147
विदेशी खरीदार और 146
बाइंग रिप्रेजेंटेटिव एक्सपो पहुंचे। आयोजकों को आने वाले
दिनों में एक हजार
करोड़ रुपये से अधिक के
कारोबारी ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।
उद्घाटन समारोह में भदोही सांसद
डॉ.
विनोद बिंद,
औराई विधायक दीनानाथ
भास्कर,
ज्ञानपुर विधायक विपुल दुबे,
जिला पंचायत अध्यक्ष
अनिरुद्ध त्रिपाठी,
प्रदेश के प्रमुख सचिव
एमएसएमई शशिभूषण लाल,
आईईएमएल के
चेयरमैन राकेश कुमार समेत जनप्रतिनिधि,
अधिकारी,
निर्यातक,
उद्यमी और विदेशों से
आए खरीदार मौजूद रहे।
कारीगरों के हाथों को विकास और बाजार से जोड़ना होगा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
कहा कि भदोही के
कारीगरों ने अपने हुनर
से उत्तर प्रदेश की पहचान को
दुनिया तक पहुंचाया है।
हस्तनिर्मित कालीन केवल एक उत्पाद
नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध
सांस्कृतिक विरासत और पीढ़ियों से
चले आ रहे बुनाई
कौशल का प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक
कारीगरी को समय के
साथ आगे बढ़ाने के
लिए नई तकनीक, आधुनिक
डिजाइन और वैश्विक बाजार
से उसका जुड़ाव जरूरी
है। कारीगरों के कौशल और
समर्पण को पहचान दिलाने
के साथ उन्हें बाजार
उपलब्ध कराने और डिजाइन में
नवाचार के अवसर देने
से कालीन उद्योग के लिए नए
रास्ते खुलेंगे। योगी ने 50वें
इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती
संस्करण को इस लंबी
यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव
बताया और उद्योग से
जुड़े निर्यातकों, विक्रेताओं, उद्यमियों, बुनकरों तथा हस्तशिल्प कर्मियों
को शुभकामनाएं दीं।
सुरक्षा नहीं तो कारोबार नहीं
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन
में प्रदेश की कानून-व्यवस्था
और कारोबारी वातावरण का भी उल्लेख
किया। उन्होंने कहा कि किसी
भी क्षेत्र में उद्योग और
व्यापार के विकास के
लिए सुरक्षित वातावरण पहली आवश्यकता है।
जब सुरक्षा का भरोसा नहीं
होता तो न व्यापारी
सहज होकर निवेश कर
सकता है और न
देश-विदेश के खरीदार किसी
क्षेत्र में आने को
तैयार होते हैं। उन्होंने
2017 से पहले की परिस्थितियों
का जिक्र करते हुए कहा
कि उस दौर में
प्रदेश की छवि को
लेकर कई तरह की
आशंकाएं थीं। उद्योग और
कारोबार के लिए अनुकूल
माहौल बनाने के साथ सरकार
ने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि
उत्तर प्रदेश में आज स्थानीय
उत्पादों को राष्ट्रीय और
अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के
प्रयास किए जा रहे
हैं। इसका उद्देश्य केवल
निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार
और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करना
भी है।
ओडीओपी से भदोही के कालीन को मिला नया मंच
योगी ने एक
जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी)
योजना का उल्लेख करते
हुए कहा कि उत्तर
प्रदेश के हर जिले
में अपनी विशिष्ट कला
और उत्पाद हैं। सरकार का
प्रयास है कि इन
उत्पादों की पहचान को
मजबूत किया जाए और
उन्हें तकनीक, डिजाइन, पैकेजिंग तथा बाजार से
जोड़ा जाए। हस्तनिर्मित कालीन
को ओडीओपी से जोड़ने के
लिए उद्यमियों ने मुख्यमंत्री का
आभार भी जताया। उनका
कहना था कि इससे
भदोही के पारंपरिक उद्योग
को सरकारी योजनाओं और बाजार के
व्यापक नेटवर्क से जुड़ने का
अवसर मिला है। मुख्यमंत्री
ने कहा कि स्थानीय
हुनर को बाजार मिलने
पर उसके साथ जुड़ी
पूरी अर्थव्यवस्था को लाभ होता
है। बुनकर, कारीगर, छोटे उद्यमी, डिजाइनर,
निर्यातक और परिवहन से
जुड़े लोग—सभी इस
आर्थिक श्रृंखला का हिस्सा हैं।
उद्घाटन के बाद निर्यातकों के बीच पहुंचे योगी
एक्सपो के उद्घाटन के
बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
निर्यातकों और उद्यमियों के
साथ संवाद किया। यह कार्यक्रम केवल
औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं
रहा। उद्योग से जुड़े लोगों
ने अपनी जरूरतें और
समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री के
सामने रखीं। उद्यमी अनिल सिंह ने
मिर्जापुर में विंध्य एक्सप्रेस-वे मार्ग के
लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते
हुए माधोसिंह रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण
की मांग रखी। उन्होंने
कहा कि औद्योगिक इकाइयों
के लिए बेहतर सड़क
और रेल संपर्क जरूरी
है। उद्यमी इम्तियाज अहमद ने हस्तनिर्मित
कालीनों को ओडीओपी योजना
में शामिल करने के लिए
मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया
और उद्योग के लिए अलग
कारपेट नीति बनाने की
मांग रखी। वहीं पीयूष
कुमार बरनवाल ने हस्तनिर्मित कालीन
उद्योग की विशिष्ट उत्पादन
प्रक्रिया को देखते हुए
इसे विशेष दर्जा दिए जाने की
मांग की। उनका कहना
था कि हस्तनिर्मित कालीनों
का उत्पादन मशीन आधारित उद्योगों
से अलग है। इसमें
महीनों तक चलने वाली
बुनाई, कुशल श्रम और
विशिष्ट डिजाइन प्रक्रिया शामिल होती है। इसलिए
नीतिगत प्रावधान भी इसी प्रकृति
के अनुरूप होने चाहिए। निर्यातकों
ने सड़क, रेलवे क्रॉसिंग और विभिन्न विभागों
के बीच बेहतर समन्वय
की आवश्यकता भी बताई। उद्यमियों
का कहना था कि
बड़ी परियोजनाओं के साथ औद्योगिक
इकाइयों तक पहुंचने वाली
स्थानीय आधारभूत सुविधाएं भी मजबूत होनी
चाहिए।
एक्सपो में दुनिया, भदोही के करघों पर नजर
स्वर्ण जयंती संस्करण में 223 भारतीय प्रदर्शक अपने हस्तनिर्मित कालीन,
रग्स और अन्य फ्लोर-कवरिंग उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं।
पहले दिन 32 देशों के 147 विदेशी खरीदार पहुंचे। इसके अलावा 146 बाइंग
रिप्रेजेंटेटिव भी मौजूद रहे।
अर्जेंटीना से लेकर अमेरिका
तक और जापान से
लेकर ब्रिटेन तक के खरीदारों
ने भारतीय उत्पादों में रुचि दिखाई।
आयोजन में ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम,
ब्राजील, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, इजराइल, नीदरलैंड, रूस, सऊदी अरब,
स्पेन, तुर्किये, यूएई और यूक्रेन
समेत कई देशों के
प्रतिनिधि शामिल हैं। एक्सपो में
फॉल-विंटर के नए रंग
और डिजाइन भी प्रदर्शित किए
जा रहे हैं। उद्देश्य
यही है कि भारतीय
हस्तनिर्मित कालीनों को बदलते वैश्विक
फैशन और ग्राहकों की
पसंद के अनुरूप नए
रूप में बाजार तक
पहुंचाया जाए।
एक हजार करोड़ से ज्यादा के ऑर्डर की उम्मीद
कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन कैप्टन
मुकेश कुमार गोम्बर ने कहा कि
इंडिया कारपेट एक्सपो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, बाइंग हाउस, बाइंग एजेंट, आर्किटेक्ट और भारतीय निर्माताओं-निर्यातकों के बीच लंबे
समय के कारोबारी संबंध
स्थापित करने का महत्वपूर्ण
मंच है। उन्होंने कहा
कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों
से प्रमुख खरीदार यहां पहुंच रहे
हैं। इससे भारतीय हस्तनिर्मित
कालीनों के लिए नए
बाजार खुलने की संभावना है।
उन्होंने आने वाले समय
में एक हजार करोड़
रुपये से अधिक के
ऑर्डर मिलने की उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा कि एक्सपो
भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों के निर्यात को
नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की
दिशा में महत्वपूर्ण कदम
है।
ब्रिक्स देशों की भागीदारी ने बढ़ाई उम्मीद
सीईपीसी के वाइस चेयरमैन
असलम महबूब ने स्वर्ण जयंती
संस्करण को परिषद की
यात्रा का गौरवपूर्ण पड़ाव
बताया। उन्होंने कहा कि पांच
दशकों में यह एक्सपो
भारतीय निर्माताओं और निर्यातकों को
दुनिया भर के खरीदारों
से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण वैश्विक
मंच में विकसित हुआ
है। उन्होंने कहा कि इस
बार ब्रिक्स देशों के खरीदारों और
प्रतिनिधियों की भागीदारी नए
बाजारों के विस्तार, व्यापारिक
रिश्तों को मजबूत करने
और दीर्घकालीन कारोबारी साझेदारी के लिहाज से
महत्वपूर्ण है।
20 लाख हाथों की रोजी-रोटी से जुड़ा कारोबार
भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की सबसे बड़ी
ताकत मशीन नहीं, बल्कि
कारीगर के हाथ हैं।
यह ग्रामीण आधारित श्रमप्रधान एमएसएमई कुटीर उद्योग करीब 20 लाख बुनकरों और
कारीगरों को रोजगार से
जोड़ता है। इसीलिए एक्सपो
में होने वाली प्रत्येक
कारोबारी बातचीत का असर केवल
निर्यात आंकड़ों तक सीमित नहीं
है। नए ऑर्डर का
मतलब करघों पर बढ़ता काम,
कारीगरों के हाथों में
रोजगार और हजारों परिवारों
की आय से है।
सीईपीसी की कार्यकारी निदेशक
एवं सचिव डॉ. स्मिता
नागरकोटी ने उम्मीद जताई
कि स्वर्ण जयंती संस्करण उद्योग के लिए नए
मील के पत्थर स्थापित
करेगा और इसका अंतिम
लाभ बुनकरों तथा उनके परिवारों
तक पहुंचेगा।
पांच दशक बाद फिर वही सवाल—धागा कितना मजबूत होगा?
इंडिया कारपेट एक्सपो के पचास वर्ष
पूरे होना भदोही की
औद्योगिक यात्रा का बड़ा पड़ाव
है। लेकिन स्वर्ण जयंती का यह उत्सव
भविष्य की चुनौती भी
सामने रखता है। दुनिया
के बाजार में भारतीय कालीनों
की मांग बढ़े, नए
खरीदार आएं और निर्यात
के आंकड़े ऊपर जाएं—यह
जरूरी है। लेकिन उससे
भी जरूरी है कि वैश्विक
बाजार में भदोही की
पहचान के पीछे खड़ा
बुनकर आर्थिक रूप से मजबूत
हो। मुख्यमंत्री ने कारीगरों को
तकनीक, डिजाइन और बाजार से
जोड़ने की बात कही
है। निर्यातकों ने अलग नीति
और विशेष दर्जे की मांग रखी
है। एक्सपो ने विदेशी खरीदारों
के लिए बाजार का
दरवाजा खोला है। अब
इन तीनों सिरों—सरकार, उद्योग और कारीगर—को
एक साथ जोड़ना होगा।
क्योंकि भदोही के करघों पर
केवल कालीन नहीं बुना जाता।
वहां उत्तर प्रदेश की एक ऐसी
पहचान बुनी जाती है,
जिसे पांच दशक से
दुनिया अपने घरों में
सहेजती आ रही है।
स्वर्ण जयंती का असली अर्थ
तभी पूरा होगा, जब
इस पहचान के साथ उन
हाथों का भविष्य भी
सुरक्षित हो, जिनसे यह
पूरी दुनिया तक पहुंची है।
उद्योग को बड़ा तोहफा
वाराणसी-विंध्य क्षेत्र बनेगा सिल्क क्लस्टर : भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी को
जोड़कर विकसित होगी सिल्क क्लस्टर
की योजना; कालीन, रेशम और हस्तशिल्प
को मिलेगा बाजार
कालीन मेले में सीएम
स्टॉल-स्टॉल पहुंचे योगी, देखी कालीन की
बारीक कारीगरी : डिजाइन, निर्माण कला और हुनर
की सराहना