Tuesday, 21 July 2026

काशी की पावन धरती से उठेगी समरसता की ज्योति, 131 कलशों में देशभर पहुंचेगा संत रविदास का संदेश

काशी की पावन धरती से उठेगी समरसता की ज्योति, 131 कलशों में देशभर पहुंचेगा संत रविदास का संदेश 

·         650वीं जयंती वर्ष का राष्ट्रव्यापी अभियान

·         29 जुलाई को सीरगोवर्धनपुर में संत समाज, भाजपा नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी की मौजूदगी में होगा 131 कलशों का पूजन 

सुरेश गांधी

वाराणसी. काशी एक बार फिर ऐसे ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है, जब संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की जन्मस्थली सीरगोवर्धनपुर से सामाजिक समरसता, समानता और मानवता का संदेश पूरे देश में प्रवाहित होगा। भारतीय जनता पार्टी ने संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष को राष्ट्रीय जनअभियान का स्वरूप देते हुए उनकी जन्मभूमि की पवित्र मिट्टी को 131 कलशों में भरकर देश के विभिन्न राज्यों, जिलों, गांवों और बस्तियों तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। इस अभियान का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था का प्रसार नहीं, बल्कि संत रविदास के उस जीवन-दर्शन को जन-जन तक पहुंचाना है जिसने सदियों पहले जाति, ऊंच-नीच और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध समरस समाज की कल्पना प्रस्तुत की थी।

29 जुलाई, गुरु पूर्णिमा के अवसर पर संत रविदास की जन्मस्थली पर होने वाला यह भव्य आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व रखेगा। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संत समाज के प्रमुख प्रतिनिधि तथा पार्टी के वरिष्ठ नेता एक साथ 131 कलशों का पूजन और आरती करेंगे। इसके साथ विशाल जनसभा भी आयोजित होगी, जहां संत रविदास के विचारों को समाज के वर्तमान संदर्भों से जोड़ते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया जाएगा। इस ऐतिहासिक अभियान की जानकारी भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने मंगलवार को वाराणसी सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में दी। जनप्रतिनिधियों, क्षेत्रीय एवं जिला पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संत रविदास केवल एक संत नहीं, बल्कि भारतीय समाज में समानता और मानवता के सबसे प्रखर प्रतीकों में से एक हैं। उनका संदेश किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र और विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। इसी भावना के साथ उनकी 650वीं जयंती वर्ष को देशव्यापी स्तर पर मनाने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने बताया कि 28 जुलाई को देश के विभिन्न हिस्सों से 131 टोलियां संत रविदास की जन्मस्थली सीरगोवर्धनपुर पहुंचेंगी। इन टोलियों द्वारा जन्मस्थली की पवित्र मिट्टी 131 कलशों में भरी जाएगी। अगले दिन 29 जुलाई को वैदिक मंत्रोच्चार और संत समाज की उपस्थिति में इन कलशों का विधिवत पूजन एवं आरती होगी। इसके बाद 30 जुलाई को विशेष रूप से सजाए गए वाहनों के माध्यम से ये कलश अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना होंगे। इस अभियान की विशेषता यह है कि इन 131 कलशों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिलों, देश के 27 राज्यों और छह संगठनात्मक जोनों को संत रविदास की जन्मस्थली से जोड़ा जाएगा। जहां-जहां ये कलश पहुंचेंगे, वहां स्थानीय स्तर पर उनका पूजन होगा और संत रविदास के सामाजिक समरसता, समानता, श्रम की प्रतिष्ठा और मानवता के संदेश पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा इसे देशव्यापी सामाजिक जागरण अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

तरुण चुग ने कहा कि काशी से निकलने वाली यह पवित्र मिट्टी केवल धार्मिक प्रतीक नहीं होगी, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकात्मता और सामाजिक समरसता की जीवंत अभिव्यक्ति बनेगी। संत रविदास के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। ऐसे में जन्मस्थली की मिट्टी को देशभर तक पहुंचाना उनके विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. लाल सिंह आर्य ने कहा कि भारतीय इतिहास के कठिन दौर में जब समाज अनेक प्रकार के अंधकार और विभाजनों से जूझ रहा था, तब भक्ति आंदोलन ने नई चेतना का संचार किया। संत रविदास उसी परंपरा के ऐसे महान संत थे जिन्होंने बिना किसी आडंबर के मानवता, समानता और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 29 जुलाई का आयोजन केवल एक स्मृति समारोह नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला राष्ट्रीय आयोजन सिद्ध होगा। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए 23 जुलाई को लखनऊ में प्रदेशस्तरीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसके बाद 25 से 27 जुलाई तक सभी जिलों में कार्यशालाएं आयोजित कर अभियान को अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि संत रविदास के संदेश को व्यापक स्तर पर समाज तक पहुंचाया जा सके।

उधर, आयोजन की तैयारियों को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग, प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह, डॉ. लाल सिंह आर्य, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण, प्रदेश महामंत्री रामप्रताप सिंह चौहान, राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, काशी क्षेत्र अध्यक्ष अशोक चौरसिया, जिलाध्यक्ष रामसकल पटेल, महापौर अशोक तिवारी, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने मंगलवार को संत रविदास जन्मस्थली परिसर का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। काशी, जिसने सदियों से भारतीय आध्यात्मिक चेतना को दिशा दी है, अब संत रविदास की जन्मभूमि से एक बार फिर सामाजिक समरसता का संदेश पूरे देश तक पहुंचाने की तैयारी में है। यदि यह अभियान अपने उद्देश्य के अनुरूप जनभागीदारी प्राप्त करता है, तो संत रविदास के विचार केवल स्मरण का विषय नहीं रहेंगे, बल्कि सामाजिक चेतना के नए अभियान का आधार भी बन सकते हैं।

कार्यक्रम की प्रमुख रूपरेखा

️ 28 जुलाई : देशभर से 131 टोलियों का सीरगोवर्धनपुर आगमन, जन्मस्थली की मिट्टी कलशों में भरी जाएगी।

️ 29 जुलाई : गुरु पूर्णिमा पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी एवं संत समाज की उपस्थिति में 131 कलशों का पूजन, आरती और विशाल जनसभा।

️ 30 जुलाई : 131 कलश विशेष वाहनों से देशभर के लिए रवाना होंगे।

पहुंचेंगे : उत्तर प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिलों, देश के 27 राज्यों और छह संगठनात्मक जोनों तक।

उद्देश्य : संत रविदास के सामाजिक समरसता, समानता, मानवता और भाईचारे के संदेश को गांव-गांव और बस्ती-बस्ती तक पहुंचाना।

'बूथ से बनेगा भविष्य' : 2027 के रण की पहली बिगुल, भाजपा ने संगठन को चुनावी मोर्चे पर उतारा

2027 का रण... भाजपा ने फूंक दिया चुनावी शंखनाद, बूथ तक पहुंचेगा जीत का मंत्र 

22 जुलाई को उत्तर प्रदेश के सभी 98 संगठनात्मक जिलों में एक साथ सम्मेलन, काशी क्षेत्र के 16 संगठनात्मक जिलों 71 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचेगा संदेश; बूथ को जीत की सबसे बड़ी ताकत बनाने की रणनीति पर रहेगा पूरा फोकस

सुरेश गांधी

वाराणसी। भाजपा भले ही स्वयं को वर्षभर चुनावी मोड में रहने वाला राजनीतिक दल मानती हो, लेकिन बुधवार, 22 जुलाई का दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में विशेष महत्व रखने जा रहा है। प्रदेश के सभी 98 संगठनात्मक जिलों में एक साथ होने वाले संगठनात्मक सम्मेलन केवल नियमित संगठनात्मक गतिविधि नहीं हैं, बल्कि इन्हें वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की औपचारिक रणनीतिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा का संदेश साफ है—2027 का रास्ता सत्ता के गलियारों से नहीं, बल्कि बूथों से होकर जाएगा। 

इसी सोच के साथ पार्टी ने पूरे प्रदेश में संगठन को फिर से सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने और बूथ स्तर तक चुनावी तैयारी को धार देने का अभियान शुरू कर दिया है। सम्मेलन का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि प्रदेश का प्रत्येक कार्यकर्ता स्वयं को केवल पार्टी का सदस्य नहीं, बल्कि 2027 की चुनावी लड़ाई का सबसे महत्वपूर्ण योद्धा माने। भाजपा की चुनावी रणनीति हमेशा से संगठन आधारित रही है। पार्टी का अनुभव रहा है कि चुनावी सफलता बड़े मंचों, विशाल रैलियों या नारों से अधिक बूथों की मजबूती पर निर्भर करती है। यही कारण है कि इस बार भी शीर्ष नेतृत्व ने बूथ प्रबंधन को ही अपनी रणनीति का केंद्र बनाया है। सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि सरकार की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और संगठन के विस्तार को प्रत्येक घर तक पहुंचाना अब उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह सम्मेलन कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव में अभी समय अवश्य है, लेकिन भाजपा किसी प्रकार की ढिलाई के पक्ष में दिखाई नहीं दे रही। संगठन चाहता है कि चुनावी वर्ष आने से पहले ही प्रत्येक बूथ समिति पूरी तरह सक्रिय हो, पन्ना प्रमुखों का नेटवर्क मजबूत हो, लाभार्थियों से संपर्क निरंतर बना रहे और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में संगठन की सक्रियता लगातार दिखाई दे। काशी क्षेत्र इस पूरी रणनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जा रहा है। संगठनात्मक दृष्टि से यहां 16 संगठनात्मक जिले, 14 लोकसभा क्षेत्र और 71 विधानसभा क्षेत्र हैं। प्रत्येक विधानसभा में लगभग 300 से 400 बूथ हैं। इन बूथों तक संगठन की सक्रियता सुनिश्चित करना सम्मेलन का प्रमुख लक्ष्य रहेगा।

वाराणसी का राजनीतिक महत्व अलग ही है। संगठनात्मक रूप से वाराणसी महानगर और वाराणसी जिला दो अलग-अलग इकाइयां हैं, लेकिन संसदीय प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक ही लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ऐसे में काशी क्षेत्र का प्रदर्शन केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी संदेशवाहक माना जाता है। यही कारण है कि यहां होने वाले संगठनात्मक सम्मेलन पर प्रदेश नेतृत्व की विशेष नजर रहेगी। वाराणसी में आयोजित सम्मेलन के मुख्य अतिथि भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह होंगे, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। प्रदेश के अन्य संगठनात्मक जिलों में भी मंत्री स्तर के नेता, सांसद, विधायक और वरिष्ठ संगठन पदाधिकारी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। पूरे प्रदेश में एक ही दिन, एक ही स्वर और एक ही संदेश के साथ संगठन को सक्रिय करने का यह प्रयास भाजपा की सुनियोजित चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार सम्मेलन में केवल राजनीतिक भाषण नहीं होंगे, बल्कि बूथ समितियों की सक्रियता, सदस्यता विस्तार, पन्ना प्रमुखों की भूमिका, लाभार्थी संपर्क अभियान, सोशल मीडिया नेटवर्क, युवा एवं महिला मोर्चा की भागीदारी और आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी। संगठन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि चुनाव की घोषणा से बहुत पहले प्रत्येक कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी और लक्ष्य को स्पष्ट रूप से समझ ले। भाजपा की राजनीति का सबसे मजबूत पक्ष उसका संगठन माना जाता है। पिछले एक दशक में पार्टी ने कई चुनावों में इसी संगठनात्मक ताकत के दम पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व इस बढ़त को बनाए रखने के लिए लगातार संगठन को सक्रिय रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि भाजपा चुनावी अभियान की शुरुआत हमेशा संगठन से करती है और बाद में उसे जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास करती है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2027 का चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का सामान्य चुनाव नहीं माना जा रहा। यह चुनाव प्रदेश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मुकाबला होगा। ऐसे में भाजपा अभी से संगठन को पूरी क्षमता के साथ मैदान में उतारकर यह संदेश देना चाहती है कि उसकी चुनावी तैयारी केवल उम्मीदवारों या नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि बूथ स्तर तक सुनियोजित ढंग से संचालित होगी। 22 जुलाई के संगठनात्मक सम्मेलन इसी व्यापक रणनीति की पहली औपचारिक कड़ी बनते दिखाई दे रहे हैं। पार्टी की कोशिश है कि प्रदेश के लाखों कार्यकर्ताओं तक एक साथ यह संदेश पहुंचे कि "बूथ मजबूत होगा, तभी संगठन मजबूत होगा और संगठन मजबूत होगा तो 2027 की जीत का मार्ग भी मजबूत होगा।" यही कारण है कि इन सम्मेलनों को भाजपा के आगामी विधानसभा चुनाव अभियान का औपचारिक शंखनाद माना जा रहा है।

एक नजर में संगठनात्मक सम्मेलन

🔹 तिथि: 22 जुलाई

🔹 प्रदेश के संगठनात्मक जिले: 98

🔹 उद्देश्य: 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी को बूथ स्तर तक गति देना

🔹 फोकस: बूथ सशक्तीकरण, संगठन विस्तार और कार्यकर्ता सक्रियता

काशी क्षेत्र क्यों है खास?

16 संगठनात्मक जिले

14 लोकसभा क्षेत्र

71 विधानसभा क्षेत्र

प्रत्येक विधानसभा में लगभग 300 से 400 बूथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व

सम्मेलन में क्या रहेगा एजेंडा?

बूथ समितियों की समीक्षा

पन्ना प्रमुखों की सक्रियता

लाभार्थी संपर्क अभियान

नए मतदाताओं तक पहुंच

सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार

आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा

कौन होंगे मुख्य अतिथि?

वाराणसी में प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे।

अन्य संगठनात्मक जिलों में मंत्री, सांसद, विधायक एवं वरिष्ठ संगठन पदाधिकारी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।

भाजपा का चुनावी फॉर्मूला

"मजबूत बूथ, सुनिश्चित जीत" : भाजपा की चुनावी रणनीति का मूल आधार बूथ प्रबंधन माना जाता है। पार्टी का मानना है कि यदि प्रत्येक बूथ पर संगठन सक्रिय रहेगा, लाभार्थियों और मतदाताओं से सतत संवाद बना रहेगा तथा कार्यकर्ता नियमित रूप से जनसंपर्क करेंगे, तो चुनावी सफलता की संभावना मजबूत होगी। इसी रणनीति को 22 जुलाई के संगठनात्मक सम्मेलनों के माध्यम से बूथ स्तर तक पहुंचाने की तैयारी की गई है।

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