Saturday, 4 April 2026

विरासत का जीवंत उत्सव : प्रदर्शनियों ने बढ़ाया ‘विक्रमोत्सव’ का आकर्षण

विरासत का जीवंत उत्सव : प्रदर्शनियों ने बढ़ायाविक्रमोत्सवका आकर्षण 

ऋषि परंपरा से लेकर विक्रमादित्यकालीन वैभव तक, इतिहास हुआ सजीव

संस्कृति, पर्यटन और तकनीक का संगम : नई पीढ़ी को जोड़ने की अनूठी पहल

सुरेश गांधी

वाराणसी। इतिहास जब मंच से उतरकर आंखों के सामने साकार होता है, तो वह केवल कथा नहीं रह जातावह अनुभव बन जाता है।विक्रमोत्सव 2026’ के अंतर्गत आयोजित भव्य महानाट्य के साथ-साथ लगी विविध प्रदर्शनियों ने इस आयोजन को एक अद्भुत सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया है। कार्यक्रम स्थल पर लगाई गईविक्रमादित्यकालीन मुद्रा और मुद्रांकप्रदर्शनी जहां प्राचीन भारत की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था की झलक प्रस्तुत कर रही है, वहींआर्ष भारतप्रदर्शनी भारतीय ऋषि परंपरा के विराट स्वरूप को जीवंत कर रही है। 

इस प्रदर्शनी में 100 से अधिक ऋषियों के योगदान को विस्तार से दर्शाया गया है, जो दर्शकों को भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई और व्यापकता से परिचित कराता है. इन प्रदर्शनियों का उद्देश्य केवल अतीत को दिखाना नहीं, बल्कि उस गौरवशाली विरासत को वर्तमान और भविष्य से जोड़ना है। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा आयोजित ये प्रयास यह दर्शाते हैं कि किस प्रकार सम्राट विक्रमादित्य का काल भारतीय सभ्यता के स्वर्णिम युग के रूप में स्थापित हुआजहां साहित्य, ज्योतिष, आयुर्वेद, गणित और चिकित्सा विज्ञान ने अभूतपूर्व उन्नति की।

मध्यप्रदेश की झलक: पर्यटन, परंपरा और संभावनाओं का समागम

मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क, पर्यटन और उद्योग विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनियों ने आयोजन को और भी बहुआयामी बना दिया है। इन स्टॉल्स में प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं, सांस्कृतिक धरोहर, निवेश अवसरों और रोजगार सृजन की योजनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। विक्रमादित्य और अयोध्या से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ वृहत्तर भारत के सांस्कृतिक वैभव को भी चित्रित किया गया है। यह प्रयास दर्शाता है कि भारत केवल भौगोलिक सीमाओं में सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से एक व्यापक और समृद्ध परंपरा का वाहक है।

स्वाद में भी संस्कृति : फूड कोर्ट बना आकर्षण का केंद्र

परिसर में मध्यप्रदेश टूरिज्म विभाग द्वारा स्थापित फूड कोर्ट दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण बना हुआ है। यहां आने वाले लोग केवल इतिहास और संस्कृति से रूबरू हो रहे हैं, बल्कि मध्यप्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चख रहे हैं। यह पहल संस्कृति को केवल देखने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे जीने का अवसर प्रदान करती है।

तकनीक से सजी विरासत: होलोग्राफिक महाकाल ने मोहा मन

आधुनिक तकनीक का समावेश इस आयोजन की विशेषता बनकर उभरा है। बाबा महाकाल का होलोग्राफिक प्रदर्शन दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति के साथ-साथ तकनीकी नवाचार का अद्भुत संगम दिखा रहा है। इसके माध्यम से आगंतुकों को ऐतिहासिक कथाओं और सांस्कृतिक प्रसंगों को डिजिटल रूप में जानने का अवसर मिल रहा है।

अतीत से भविष्य की ओर : नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

विक्रमोत्सव 2026’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में सामने रहा है। यह कार्यक्रम केवल भारत के गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित कर रहा है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बन रहा है। सम्राट विक्रमादित्य, जिन्होंने विक्रम संवत की स्थापना कर भारतीय कालगणना को नई दिशा दी, उनके युग की उपलब्धियों को इस प्रकार जन-जन तक पहुंचाना, वास्तव में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आज जब वैश्वीकरण के दौर में सांस्कृतिक पहचान का संकट गहराता जा रहा है, ऐसे आयोजन भारतीयता के उस मूल स्वर को पुनः स्थापित करते हैं, जो हमें हमारी परंपरा, ज्ञान और गौरव से जोड़ता है।

विरासत का जीवंत उत्सव : प्रदर्शनियों ने बढ़ाया ‘विक्रमोत्सव’ का आकर्षण

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