मणिकर्णिका पर अफवाह की साजिश: एआई तस्वीरें फैलाने वालों पर एफआईआर, आठ नामजद
महाश्मशान को
बनाया
गया
नैरेटिव
युद्ध
का
मैदान,
धार्मिक
भावनाएं
भड़काने
की
कोशिश
नाकाम
सुरेश गांधी
वाराणसी। काशी की आत्मा
मानी जाने वाली मणिकर्णिका
घाट को लेकर सोशल
मीडिया पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता
(एआई) से निर्मित चित्रों
और भ्रामक सूचनाओं के माध्यम से
जनभावनाओं को भड़काने वालों
पर पुलिस ने कठोर कार्रवाई
की है। मणिकर्णिका घाट
के सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर अफवाह
फैलाने के आरोप में
थाना चौक पर आठ
अलग-अलग अभियोग पंजीकृत
किए गए हैं। इस
मामले में आठ व्यक्तियों
और एक एक्स (पूर्व
ट्विटर) हैंडल को नामजद करते
हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 298, 299 एवं 353 के
अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया
है।
एआई से गढ़ी गई झूठी तस्वीरें, आस्था के नाम पर भ्रम फैलाया
पुलिस के अनुसार, मणिकर्णिका
घाट पर चल रहे
आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण एवं
सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर जानबूझकर
वास्तविक तथ्यों के विपरीत, असत्य
और भ्रामक सामग्री सोशल मीडिया पर
प्रसारित की गई। इन
पोस्टों में हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों
का प्रयोग कर श्रद्धालुओं को
गुमराह करने तथा समाज
में आक्रोश उत्पन्न करने का प्रयास
किया गया।
सरकार की तुलना विदेशी आक्रांता से,
सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास
शिकायत के अनुसार, एक्स
हैंडल आशुतोष पोटनिस (@daksinapathpati) द्वारा 16 जनवरी 2026 की रात 10:02 बजे
एआई से निर्मित भ्रामक
चित्र साझा किए गए,
जिनमें भारत सरकार की
तुलना विदेशी आक्रांता औरंगज़ेब से की गई।
पुलिस का कहना है
कि इस कृत्य से
सरकार में आस्था रखने
वाले नागरिकों में आक्रोश फैला
तथा सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंची।
री-पोस्ट और टिप्पणियों से फैलाई गई विषाक्तता
भ्रामक पोस्ट पर बड़ी संख्या
में पुनःप्रसारण (री-पोस्ट) और
आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आईं। पुलिस के
मुताबिक, कुछ असामाजिक तत्वों
ने अन्य सोशल मीडिया
मंचों पर भी सरकार
विरोधी और समाज को
विभाजित करने वाली टिप्पणियां
प्रसारित कीं, जिससे माहौल
बिगाड़ने की कोशिश हुई।
तमिलनाडु की कंपनी की शिकायत पर कार्रवाई
मामले में शिकायतकर्ता मानो
पुत्र पचामल, निवासी सेतुराजापुरम, थाना पेरूनाला, जनपद
रामनाथपुरम (तमिलनाडु) हैं। शिकायतकर्ता ने
बताया कि उनकी कंपनी
द्वारा 15 नवंबर 2025 से मणिकर्णिका घाट
पर आधारभूत सुविधाओं के विकास एवं
सौंदर्यीकरण का कार्य किया
जा रहा है। उन्होंने
भ्रामक पोस्ट के स्क्रीनशॉट साक्ष्य
के रूप में पुलिस
को सौंपे हैं।
पुलिस का सख्त संदेश
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया
कि—“आस्था, संस्कृति और परंपरा के
नाम पर अफवाह फैलाने,
एआई तकनीक का दुरुपयोग करने
और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कठोरतम
कार्रवाई की जाएगी। ऐसे
तत्वों को किसी भी
स्थिति में बख्शा नहीं
जाएगा।”

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