स्मार्ट मीटर पर संग्राम | रियायती बिजली पर वार | निजीकरण की आहट से बिजली कर्मियों का पलटवार
वाराणसी में स्मार्ट मीटर पर बवाल : समझौते
को ‘शून्य’ करने की साजिश का आरोप
26 को निर्णायक बैठक,
आंदोलन
तेज
होने
के
संकेत
सुरेश गांधी
वाराणसी. रियायती बिजली सुविधा समाप्त करने और निजीकरण
की तैयारी के आरोपों के
बीच प्रदेश के बिजली कर्मियों
ने स्मार्ट मीटर अभियान के
खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने
मुख्य अभियंता वाराणसी क्षेत्र प्रथम/द्वितीय को ज्ञापन सौंपते
हुए चेतावनी दी कि कर्मचारियों
के घरों पर जबरन
स्मार्ट मीटर लगाने की
कार्रवाई किसी भी कीमत
पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया
कि बिजली कर्मियों को पूर्व से
मिल रही रियायती बिजली
समाप्त करने तथा विद्युत
व्यवस्था के निजीकरण/फ्रेंचाइजीकरण
की जमीन तैयार करने
के उद्देश्य से यह अभियान
चलाया जा रहा है।
इसे मुख्यमंत्री के साथ हुए
लिखित समझौते और पावर सेक्टर
रिफॉर्म एक्ट का खुला
उल्लंघन बताया गया है। मतलब साफ है स्मार्ट मीटर अब
सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि बिजली व्यवस्था के भविष्य और
कर्मचारियों की सेवा शर्तों
की जंग बन चुका
है।
प्रदेशभर में प्रदर्शन, जिला मुख्यालयों पर सौंपे गए ज्ञापन
संघर्ष समिति के आह्वान पर
प्रदेश के विभिन्न जनपदों
में बिजली कर्मियों ने एकजुट होकर
जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया
और अधिकारियों को ज्ञापन देकर
विरोध दर्ज कराया। वक्ताओं
ने कहा कि कर्मचारियों
की सेवा शर्तों से
छेड़छाड़ औद्योगिक अशांति को जन्म दे
सकती है।
25 जनवरी 2000 का समझौता बना आंदोलन का आधार
संघर्ष समिति ने कहा कि
25 जनवरी 2000 को तत्कालीन मुख्यमंत्री
राम प्रकाश गुप्त के साथ हुए
लिखित समझौते में बिजली कर्मियों
को रियायती बिजली सुविधा जारी रखने का
स्पष्ट प्रावधान किया गया था।
इसी आधार पर बनी
ट्रांसफर स्कीम-2000 में भी कर्मचारियों
की सुविधाओं को संरक्षित रखा
गया। संघर्ष समिति के अनुसार पावर
सेक्टर रिफॉर्म एक्ट और इलेक्ट्रिसिटी
एक्ट 2003 की धारा 133(2) में
भी कर्मचारियों की सेवा शर्तों
को कमतर न करने
का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान
कार्रवाई इन नियमों के
विपरीत बताई जा रही
है।
निजीकरण की तैयारी का आरोप, फ्रेंचाइजी मॉडल पर सवाल
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया
कि लखनऊ में वर्टिकल
व्यवस्था लागू कर विद्युत
ढांचे को फ्रेंचाइजी मॉडल
की ओर धकेला जा
रहा है। कर्मचारियों के
आवासों पर स्मार्ट मीटर
लगाने की कार्रवाई को
उसी रणनीति का हिस्सा बताया
गया।
26 फरवरी को निर्णायक बैठक, आंदोलन तेज होने के संकेत
संघर्ष समिति की प्रांतीय कार्यकारिणी
की बैठक 26 फरवरी को लखनऊ में
प्रस्तावित है, जिसमें रियायती
बिजली समाप्त करने के प्रयास,
निजीकरण विरोधी आंदोलन और कर्मचारियों के
उत्पीड़न के मुद्दों पर
आगे की रणनीति तय
की जाएगी। ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल
में ई. मायाशंकर तिवारी,
राजेंद्र सिंह, राजेश सिंह, मनोज जैसवाल, मनोज
सोनकर, कृष्णमोहन सहित अन्य पदाधिकारी
शामिल रहे।

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