Friday, 6 February 2026

महाशिवरात्रि पर काशी में सजेगा ब्रज का दिव्य श्रृंगार

काशी : ब्रज का अलौकिक संगम : महाशिवरात्रि पर श्रीकृष्ण जन्मस्थली से बाबा विश्वनाथ को श्रृंगार भेंट

महाशिवरात्रि पर काशी में सजेगा ब्रज का दिव्य श्रृंगार 

श्रीकृष्ण जन्मस्थली से बाबा विश्वनाथ को पहली बार भेंट होगी पूजन सामग्री, हरि-हर परंपरा का नया अध्याय

सुरेश गांधी

वाराणसी महाशिवरात्रि का पावन पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाहोत्सव के रूप में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व काशी की आध्यात्मिक परंपरा में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ने जा रहा है। पहली बार मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थली से बाबा श्री काशी विश्वनाथ के लिए विशेष श्रृंगार एवं पूजन सामग्री भेंट स्वरूप काशी धाम पहुंचेगी। यह सांस्कृतिक और धार्मिक समन्वय केवल इस महापर्व की गरिमा को और ऊंचाई प्रदान करेगा, बल्कि सनातन परंपरा की अखंड एकात्मता का सशक्त संदेश भी देगा।

दरअसल, काशी और ब्रज धाम के मध्य धार्मिक-सांस्कृतिक आदान-प्रदान की यह परंपरा गत वर्ष रंगभरी एकादशी के अवसर पर प्रारंभ हुई थी। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष एक और अभिनव पहल की जा रही है, जिसमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर न्यास द्वारा महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ को श्रृंगार भेंट किया जाएगा। वहीं, आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से लड्डू गोपाल को विशेष उपहार प्रेषित किए जाने की परंपरा भी शुरू होगी। यह पहल सनातन संस्कृति में विभिन्न तीर्थों के आध्यात्मिक संबंधों को पुनर्जीवित करने का प्रयास मानी जा रही है।

इसी क्रम मेंपवित्र तीर्थ जल योजनाके माध्यम से काशी और रामेश्वरम धाम के बीच भी आध्यात्मिक सेतु स्थापित करने का प्रयास किया जा चुका है। अब काशी और मथुरा के मध्य यह नवाचार सनातन धर्म की उस मूल भावना को साकार करता है, जिसमें संपूर्ण भारत की तीर्थ परंपराएं एक सूत्र में पिरोई हुई दिखाई देती हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार यह आयोजन हरिदृहर के दिव्य और शाश्वत संबंध का सजीव प्रतीक है। सनातन मान्यता में हरि अर्थात भगवान विष्णु और हर अर्थात भगवान शिव को एक-दूसरे का पूरक माना गया है। जहां भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता हैं, वहीं भगवान शिव संहार और कल्याण के अधिष्ठाता माने जाते हैं। दोनों की उपासना और समन्वय सृष्टि के संतुलन और लोककल्याण का आधार माना गया है। ऐसे में श्रीकृष्ण जन्मस्थली से बाबा विश्वनाथ के श्रृंगार का आगमन इस सनातन एकत्व की दिव्य अनुभूति को मूर्त रूप देगा।

महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर आयोजित यह विशेष धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, समरसता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्वितीय संगम बनेगा। इससे केवल काशी और ब्रज के सांस्कृतिक संबंध और प्रगाढ़ होंगे, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं के बीच सनातन संस्कृति की व्यापकता और समन्वय का संदेश भी पहुंचेगा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने इस पावन भेंट के लिए श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर न्यास के प्रति आभार व्यक्त किया है। साथ ही मंदिर न्यास ने भगवान शिव के अनुरागी भक्तों और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धानत सनातन बंधुओं को इस अभिनव परंपरा में सहभागिता के लिए शुभकामनाएं भी प्रेषित की हैं।

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