खादी बनेगी रोजगार की नई धुरी, स्वदेशी से सशक्त होगा गांव
वाराणसी में
मंडल
स्तरीय
खादी
सेमिनार,
बुनकरों-कतिनों
को
मिला
बढ़ावा
खादी : विचार,
विरासत
और
विकास
का
सूत्र,
रोजगार
क्रांति
की
नई
बुनावट
: पूनम मौर्या
सुरेश गांधी
वाराणसी. गांव, गरीब और स्वावलंबन की धुरी मानी जाने वाली खादी को नई ऊर्जा देने की दिशा में सोमवार को वाराणसी में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। ऊ.प्र. खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, वाराणसी मंडल द्वारा महमूरगंज स्थित होटल वंशी वट बैंक्वेट में मंडल स्तरीय एक दिवसीय खादी सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत वाराणसी की माननीय अध्यक्ष श्रीमती पूनम मौर्या ने की, जिसमें खादी के विस्तार, नवाचार और रोजगार सृजन के विविध आयामों पर गंभीर मंथन हुआ।
सेमिनार में वक्ताओं ने
एक स्वर में कहा
कि खादी आज केवल
अतीत की विरासत नहीं,
बल्कि भविष्य की आर्थिक आत्मनिर्भरता
का मजबूत आधार बन सकती
है। बदलते समय के साथ
खादी को आधुनिक बाजार,
डिज़ाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म
से जोड़ने की आवश्यकता पर
भी जोर दिया गया,
ताकि युवाओं को इससे जोड़ा
जा सके और रोजगार
के नए अवसर सृजित
हों।
मुख्य अतिथि श्रीमती पूनम मौर्या ने
अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि
“खादी केवल पहनने का
कपड़ा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, स्वदेशी भावना और स्वतंत्रता संग्राम
की पहचान है।” उन्होंने महात्मा
गांधी के स्वदेशी विचारों
को याद करते हुए
कहा कि खादी ने
आजादी की लड़ाई में
देश को एक सूत्र
में पिरोने का कार्य किया
था और आज वही
खादी आत्मनिर्भर भारत के सपने
को साकार करने में अहम
भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने लोगों से अपील की
कि वे विदेशी उत्पादों
के बजाय स्वदेशी खादी
उत्पादों को अपनाएं, जिससे
गांवों में रोजगार बढ़े
और कारीगरों का जीवन स्तर
सुधरे।
कार्यक्रम का संचालन परिक्षेत्रीय
ग्रामोद्योग अधिकारी यू.पी. सिंह
ने प्रभावशाली ढंग से किया।
उन्होंने खादी और ग्रामोद्योग
से जुड़ी विभिन्न योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और स्वरोजगार के
अवसरों की विस्तार से
जानकारी दी। साथ ही
यह भी बताया कि
किस प्रकार सरकार की योजनाओं के
माध्यम से बुनकरों और
कतिनों को वित्तीय सहायता,
प्रशिक्षण और विपणन सुविधा
उपलब्ध कराई जा रही
है।
इस अवसर पर
संयुक्त आयुक्त उद्योग वाराणसी मंडल मोहन कुमार
शर्मा ने कहा कि
खादी क्षेत्र में अपार संभावनाएं
हैं, जिन्हें सही दिशा और
तकनीकी सहयोग के माध्यम से
बड़े उद्योग का स्वरूप दिया
जा सकता है। सहायक
निदेशक खादी ग्रामोद्योग आयोग
के.पी. मिश्रा ने
खादी उत्पादों की गुणवत्ता और
ब्रांडिंग पर विशेष बल
देते हुए कहा कि
यदि उत्पादों को आधुनिक बाजार
की मांग के अनुरूप
ढाला जाए, तो खादी
वैश्विक स्तर पर अपनी
अलग पहचान बना सकती है।
सहायक निदेशक हथकरघा निशीथ गौड़ तथा परिक्षेत्रीय
ग्रामोद्योग अधिकारी विंध्याचल मंडल अमितेश कुमार
सिंह ने भी अपने
विचार रखते हुए कहा
कि खादी और हथकरघा
क्षेत्र को तकनीकी नवाचार
और प्रशिक्षण के साथ जोड़ना
समय की आवश्यकता है।
उन्होंने युवाओं को इस क्षेत्र
से जोड़ने पर विशेष बल
दिया। कार्यक्रम में जौनपुर, गाजीपुर,
चंदौली और भदोही के
जिला ग्रामोद्योग अधिकारियों विनोद कुमार सिंह, श्रीमती अमिता श्रीवास्तव, गिरजा प्रसाद और राजेश कुमार
सिंह—की गरिमामयी उपस्थिति
रही। इसके अलावा प्रभारी
उद्यमिता संस्थान अजय कन्नौजिया, वरिष्ठ
सहायक पवन कुमार, अमन
जायसवाल सहित अनेक अधिकारी,
कर्मचारी, खादी संस्थाओं के
पदाधिकारी, बुनकर, कतिन और खादी
में रुचि रखने वाले
गणमान्य लोग बड़ी संख्या
में उपस्थित रहे।
सेमिनार के दौरान बुनकरों और कतिनों ने भी अपने अनुभव साझा किए और खादी क्षेत्र में आ रही चुनौतियों—जैसे विपणन, उचित मूल्य, कच्चे माल की उपलब्धता और आधुनिक तकनीक की कमी—की ओर ध्यान आकर्षित किया। अधिकारियों ने इन समस्याओं के समाधान का आश्वासन देते हुए कहा कि सरकार खादी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि खादी को गांव-गांव तक पहुंचाकर इसे रोजगार का सशक्त माध्यम बनाया जाएगा। साथ ही, खादी को आधुनिकता से जोड़ते हुए इसे युवा पीढ़ी की पहली पसंद बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। इस सेमिनार ने यह स्पष्ट कर दिया कि खादी अब केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक क्रांति की बुनियाद बनने की ओर अग्रसर है।





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