‘जय श्रीराम’, उद्घोष के बीच हिन्दू एकता
शोभायात्रा ने जगाई संगठन की चेतना
संतों व
संगठनों
ने
रामराज्य
के
संकल्प
के
साथ
किया
समापन
सुरेश गांधी
वाराणसी। रामनवमी के पावन अवसर
पर हिन्दू जनजागृति समिति के तत्वावधान में
भव्य ‘हिन्दू एकता शोभायात्रा’ का
आयोजन किया गया। यह
शोभायात्रा न केवल धार्मिक
उल्लास का प्रतीक बनी,
बल्कि हिन्दू समाज को एकजुट
करने का सशक्त संदेश
भी देती नजर आई।
शोभायात्रा का आरंभ धर्मध्वज
पूजन और शंखनाद के
साथ हुआ। जैसे ही
यात्रा आगे बढ़ी, ‘श्रीराम
जय राम जय जय
राम’ के अखंड नामजप
और ‘एक ही नारा,
एक ही नाम, जय
श्रीराम’ जैसे घोषों से
पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।
श्रद्धालुओं का उत्साह इस
कदर था कि मार्ग
के दोनों ओर खड़े लोगों
ने भगवान श्रीराम की प्रतिमा पर
पुष्पवर्षा कर अपनी आस्था
प्रकट की। यह शोभायात्रा
मैदागिन चौराहे से प्रारंभ होकर
नीचीबाग, चौक, बांसफाटक और
दशाश्वमेध चौराहे से गुजरते हुए
विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर चितरंजन
पार्क में संपन्न हुई।
काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट संख्या
4 पर श्रीराम द्वारा रचित शिव स्तुति
के पाठ ने पूरे
वातावरण को भक्तिरस में
डुबो दिया। कार्यक्रम में समाज के
विभिन्न वर्गों का व्यापक प्रतिनिधित्व
देखने को मिला। व्यापार,
उद्योग, सामाजिक और धार्मिक संगठनों
से जुड़े अनेक गणमान्य
लोग इसमें शामिल हुए। वाराणसी व्यापार
मंडल के अध्यक्ष अजीत
सिंह बग्गा ने अयोध्या में
श्रीराम मंदिर निर्माण को 500 वर्षों के संघर्ष का
प्रतीक बताते हुए इसे हिन्दू
समाज की ऐतिहासिक विजय
बताया। उन्होंने कहा कि हिन्दू
धर्म ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश देता
है, जो सम्पूर्ण विश्व
के कल्याण की भावना से
ओतप्रोत है।
उन्होंने आह्वान किया कि जिस
प्रकार रामसेतु निर्माण में गिलहरी ने
भी अपना योगदान दिया
था, उसी प्रकार प्रत्येक
रामभक्त को प्रतिदिन ‘श्रीराम
जय राम जय जय
राम’ का नामजप करना
चाहिए और राष्ट्र व
धर्मकार्य के लिए समय
देना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में
संतों एवं विभिन्न हिन्दू
संगठनों के प्रतिनिधियों ने
सामूहिक रूप से प्रभु
श्रीराम के चरणों में
प्रार्थना कर भारत में
रामराज्य की स्थापना के
लिए कार्य करने का संकल्प
लिया। शोभायात्रा ने यह संदेश
स्पष्ट रूप से दिया
कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ
सामाजिक संगठन ही किसी भी
बड़े लक्ष्य की प्राप्ति का
आधार बन सकता है।
समापन हिन्दू जनजागृति समिति के धर्मप्रचारक सद्गुरु
नीलेश सिंगबाळजी ने की. कविन्द्र
जायसवाल, रवि झुनझुनवाला, अनिल
भाई शास्त्री, रविशंकर सिंह सहित अनेक
गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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