माटीकला से आत्मनिर्भरता की राह : 10 लाख तक लोन पर 25 फीसदी सब्सिडी
काशी के
युवाओं
के
लिए
सुनहरा
मौका
जिला ग्रामोद्योग
अधिकारी
यू.पी.
सिंह
ने
बताया
कि
यह
योजना
युवाओं
को
आत्मनिर्भर
बनाने
की
दिशा
में
एक
क्रांतिकारी
पहल
है।
उन्होंने
अधिक
से
अधिक
युवाओं
से
इसमें
भाग
लेने
और
अपने
हुनर
को
रोजगार
में
बदलने
का
आह्वान
किया।
आत्मनिर्भर भारत
की
दिशा
में
बड़ा
कदम
: यूपी
सिंह
सुरेश गांधी
वाराणसी। परंपरागत कारीगरी को आधुनिक अर्थव्यवस्था
से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश
सरकार ने एक बड़ा
और प्रभावी कदम उठाया है।
माटीकला बोर्ड द्वारा संचालित “मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना” अब युवाओं और
पारंपरिक कुम्हार समुदाय के लिए आत्मनिर्भर
बनने का मजबूत माध्यम
बनकर उभर रही है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत इस
योजना में जनपद के
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों
के युवाओं से आवेदन आमंत्रित
किए गए हैं।
वाराणसी मंडल के परिक्षेत्रीय
ग्रामोद्योग अधिकारी, यूपी सिंह ने
बताया कि यह योजना
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने
की दिशा में एक
क्रांतिकारी पहल है। उन्होंने
अधिक से अधिक युवाओं
से इसमें भाग लेने और
अपने हुनर को रोजगार
में बदलने का आह्वान किया।
उनका कहना है कि
इस योजना का उद्देश्य केवल
रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सदियों पुरानी माटीकला को नई पहचान
देना भी है। मिट्टी
से जुड़े उत्पाद, जैसे
घड़ा, सुराही, कुल्हड़, गिलास, कटोरी, कप-प्लेट और
सजावटी सामान, अब बाजार में
नई संभावनाओं के साथ पेश
किए जा रहे हैं।
सरकार चाहती है कि यह
पारंपरिक कला आधुनिक मांग
के अनुरूप विकसित हो और स्थानीय
कारीगरों को इसका सीधा
लाभ मिले।
लोन और सब्सिडी : आर्थिक मजबूती का आधार
इस योजना के
तहत चयनित लाभार्थियों को 10 लाख रुपये तक
का बैंक ऋण उपलब्ध
कराया जाएगा, जिसमें 25 फीसदी तक की सब्सिडी
(अनुदान) राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। यह
प्रावधान उन युवाओं के
लिए बेहद महत्वपूर्ण है
जो पूंजी के अभाव में
अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर
पाते। योजना के जरिए स्वरोजगार
को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय स्तर
पर रोजगार सृजन का भी
लक्ष्य रखा गया है।
इससे न केवल बेरोजगारी
कम होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती
मिलेगी। इस योजना के
तहत 18 से 55 वर्ष आयु वर्ग
के इच्छुक पुरुष और महिलाएं आवेदन
कर सकते हैं। खास
बात यह है कि
इसमें पारंपरिक कारीगरों के साथ-साथ
नए उद्यमियों को भी मौका
दिया जा रहा है।
इच्छुक अभ्यर्थी ऑनलाइन पोर्टल यूपीमाटीकलाबोर्ड डाट इन के
माध्यम से आवेदन कर
सकते हैं या जिला
ग्रामोद्योग कार्यालय, वाराणसी से संपर्क कर
विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
आवेदन के लिए पासपोर्ट
साइज फोटो, आधार कार्ड, जाति
प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र व शैक्षिक/तकनीकी योग्यता प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, बैंक
पासबुक की छाया प्रति,
प्रोजेक्ट रिपोर्ट आदि. आवेदन जमा
करने की अंतिम तिथि
30 मई 2026 निर्धारित की गई है।
लाभार्थियों का चयन स्कोर
कार्ड प्रणाली के आधार पर
किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
पारंपरिक कारीगरों पर विशेष फोकस
इस योजना के
अंतर्गत माटीकला से जुड़े कारीगर
परिवारों का चिन्हांकन भी
किया जा रहा है,
ताकि अधिक से अधिक
जरूरतमंद शिल्पकारों को इसका लाभ
मिल सके। यह पहल
न केवल उनकी आजीविका
को मजबूत करेगी, बल्कि उनकी कला को
भी संरक्षित और प्रोत्साहित करेगी।
योजना से संबंधित अधिक
जानकारी के लिए अभ्यर्थी
मो. 9580503155 पर संपर्क कर
सकते हैं या जिला
ग्रामोद्योग अधिकारी कार्यालय से सीधे जुड़
सकते हैं।
“मिट्टी से जुड़े, भविष्य गढ़े”
आज जब युवा
रोजगार की तलाश में
बड़े शहरों की ओर पलायन
कर रहे हैं, ऐसे
में माटीकला जैसी पारंपरिक विधाओं
को आधुनिक स्वरूप देकर रोजगार का
माध्यम बनाना एक दूरदर्शी सोच
है। यह योजना केवल
आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को बचाने का
भी माध्यम है। अगर इसे
सही ढंग से लागू
किया गया, तो वाराणसी
जैसे शहर न केवल
अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेंगे,
बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने
को भी साकार करेंगे।
अब सवाल यह नहीं
कि अवसर है या
नहीं, बल्कि यह है कि
क्या युवा इस अवसर
को पहचानकर आगे बढ़ेंगे?

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