Friday, 15 May 2026

उम्रकैद के बाद अब 10 साल की सजा, विजय मिश्र परिवार पर कानून का डबल अटैक

देर से ही सही, कर्मों का हिसाब शुरू. 48 घंटे में दूसरी सजा 

उम्रकैद के बाद अब 10 साल की सजा, विजय मिश्र परिवार पर कानून का डबल अटैक  

हत्या के बाद अब रिश्तेदार की संपत्ति हड़पने के मामले में भी दोषी, पत्नी-बेटे को 10-10 साल, बहू को 4 साल कारावास

दबंगई पर न्याय का डंडा : रसूख टूटा, रौब बिखरा

रसूख, रुतबा और बाहुबल कानून से ऊपर नहीं : विजय मिश्र परिवार को कोर्ट का कड़ा संदेश

आरोप : अपराध, रसूख और संपत्ति कब्जा

सुरेश गांधी

भदोही. ज्ञानपुर विधानसभा के पूर्व विधायक बाहुबली विजय मिश्र पर कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। 46 वर्ष पुराने चर्चित कचहरी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा मिलने के महज 48 घंटे बाद अब रिश्तेदार की पैतृक संपत्ति पर अवैध कब्जा और दबाव बनाकर वसीयतनामा कराने के मामले में भी अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

एमपी-एमएलए कोर्ट की अपर जिला जज पुष्पा सिंह की अदालत ने पूर्व विधायक विजय मिश्र, उनकी पत्नी पूर्व एमएलसी रामलली मिश्र और बेटे विष्णु मिश्र को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं बहू रूपा मिश्र को चार वर्ष के साधारण कारावास की सजा दी गई। अदालत ने सभी दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया है। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को ही सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस फैसले के बाद पूर्वांचल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक समय क्षेत्र में दबंग छवि और राजनीतिक प्रभाव के लिए चर्चित रहे विजय मिश्र अब लगातार न्यायिक फैसलों के घेरे में आते दिख रहे हैं।

पैतृक संपत्ति पर कब्जे का आरोप

गोपीगंज कोतवाली क्षेत्र के कवलापुर निवासी कृष्ण मोहन तिवारी ने अगस्त 2020 में मुकदमा दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि विजय मिश्र और उनके परिवार ने उनकी पैतृक संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लिया और जबरन वसीयतनामा पर हस्ताक्षर कराने के लिए धमकियां दीं। मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अदालत ने साक्ष्यों, गवाहों और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद चारों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

अदालत का संदेश: अपराध पुराना हो सकता है, न्याय नहीं

न्यायालय के इस फैसले को सिर्फ एक आपराधिक मामले की सजा नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था के सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि राजनीतिक प्रभाव, बाहुबल और रसूख कानून से ऊपर नहीं हो सकते। कानूनी जानकारों का मानना है कि लगातार दो बड़े मामलों में सजा मिलने से विजय मिश्र की शेष कानूनी लड़ाइयां और कठिन हो सकती हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार विजय मिश्र के खिलाफ हत्या, रंगदारी, जमीन कब्जा, अपहरण और धोखाधड़ी समेत 80 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज रहे हैं।  

46 साल पुराने हत्याकांड में भी मिली उम्रकैद

इससे पहले प्रयागराज की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने 1980 के चर्चित कचहरी हत्याकांड में विजय मिश्र समेत अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह मामला प्रयागराज कचहरी परिसर में प्रकाश नारायण पांडेय की हत्या से जुड़ा था। लंबे समय तक केस की फाइल और केस डायरी गायब रहने के कारण सुनवाई प्रभावित रही, लेकिन बाद में रिकॉर्ड पुनर्निर्मित होने पर मुकदमे का ट्रायल पूरा हुआ।

पूर्वांचल की राजनीति में बड़ा संदेश

लगातार दो सजाओं के बाद यह मामला अब सिर्फ एक नेता की कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि पूर्वांचल की उस राजनीति पर भी बड़ा सवाल बन गया है जिसमें वर्षों तक बाहुबल और भय का प्रभाव देखा जाता रहा। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि अदालत के इन फैसलों ने साफ कर दिया है कि न्याय में भले देर हो जाए, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया अंततः अपराध और दबंगई के खिलाफ खड़ी होती है। देर से ही सही, कर्मों का हिसाब शुरू हो चुका हैभदोही और प्रयागराज के राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है।

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