नौतपा की तपिश पर बाबा की शीतल कृपा, फलों के रस से नहलाए गए विश्वेश्वर
गुलाब, लीची
और
आम
के
रस
से
प्रथम
दिवस
का
विशेष
अभिषेक,
नौ
दिनों
तक
चलेगा
अनुष्ठान
नौ दिनों तक प्रतिदिन अलग-अलग फलों के रस से होगा अभिषेक
पहले दिन
गुलाब,
लीची
और
आम
के
रस
का
हुआ
प्रयोग
गर्मी के
बीच
भक्तों
को
आध्यात्मिक
शीतलता
का
संदेश
मंदिर परिसर
में
गूंजा
हर-हर
महादेव
का
जयघोष
सुरेश गांधी
वाराणसी। ग्रीष्म ऋतु के सबसे
अधिक उष्ण माने जाने
वाले नौ दिवसीय काल
नौतपा की शुरुआत सोमवार
से हो गई। तपती
गर्मी और बढ़ते तापमान
के बीच काशी में
आस्था और परंपरा का
अद्भुत संगम देखने को
मिला, जब बाबा श्री
काशी विश्वनाथ धाम में भगवान
श्री विश्वेश्वर का विशेष फलों
के रस से अभिषेक
किया गया।
नौतपा के प्रथम दिन
भगवान श्री विश्वेश्वर का
अभिषेक गुलाब, लीची और आम
के रस से विधि-विधान के साथ संपन्न
कराया गया। इस दौरान
मंदिर परिसर में भक्तों की
भीड़ उमड़ी और हर-हर
महादेव के जयघोष से
वातावरण भक्तिमय बना रहा। मंदिर से
जुड़े लोगों के अनुसार, नौतपा
के पूरे नौ दिनों
तक प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार
के फलों के रस
से भगवान का विशेष अभिषेक
किया जाएगा। इस धार्मिक परंपरा
का उद्देश्य प्रचंड गर्मी के दौरान भगवान
को शीतलता अर्पित करना और भक्तों
के जीवन में सुख,
शांति व शीतलता की
कामना करना है।
धार्मिक मान्यता है कि नौतपा
के दौरान सूर्य की किरणों का
प्रभाव अधिक तीव्र होता
है। ऐसे में बाबा
विश्वनाथ के विशेष श्रृंगार
और अभिषेक का आयोजन केवल
धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं,
बल्कि प्रकृति और ऋतु परिवर्तन
के साथ भारतीय संस्कृति
के गहरे संबंध को
भी दर्शाता है।

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