काशी ने कृतज्ञता के फूलों से किया अहिल्याबाई का वंदन
विश्वनाथ धाम
में
पुण्यस्मरण,
अर्चन
और
आरती
के
साथ
याद
किया
गया
सनातन
पुनर्जागरण
की
महानायिका
का
योगदान
सुरेश गांधी
वाराणसी। काशी ने रविवार
को अपनी उस पुण्यात्मा
पुत्री के प्रति कृतज्ञता
व्यक्त की, जिसने सदियों
के संघर्ष और विध्वंस के
बाद बाबा विश्वनाथ के
धाम को पुनः गौरव
प्रदान करने का ऐतिहासिक
कार्य किया था। श्री
काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धेय
माता अहिल्याबाई होल्कर की पुण्य स्मृति
में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में श्रद्धा, आस्था
और इतिहास एक साथ सजीव
हो उठे।
धाम परिसर स्थित
माता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर
पुष्प अर्पित कर उनके अद्वितीय
योगदान का स्मरण किया
गया। इसके उपरांत अर्चन,
पूजन एवं आरती के
माध्यम से उस महान
लोकमाता को नमन किया
गया, जिनकी दूरदर्शिता और धर्मनिष्ठा ने
काशी विश्वनाथ मंदिर को नया जीवन
प्रदान किया। कार्यक्रम में श्री काशी
विश्वनाथ मंदिर न्यास के अधिकारियों, कर्मचारियों
तथा बड़ी संख्या में
श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर
श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इस अवसर पर
वक्ताओं ने कहा कि
माता अहिल्याबाई होल्कर केवल एक शासक
नहीं थीं, बल्कि सनातन
संस्कृति की ऐसी युगद्रष्टा
थीं, जिन्होंने धर्म, समाज और लोककल्याण
को शासन का मूल
आधार बनाया। भारतीय संस्कृति और आस्था के
अनेक केंद्रों के संरक्षण एवं
पुनर्निर्माण में उनका योगदान
आज भी प्रेरणा का
स्रोत बना हुआ है।
काशी विश्वनाथ मंदिर
के इतिहास में माता अहिल्याबाई
का नाम स्वर्णाक्षरों में
अंकित है। मंदिर ने
अनेक बार विध्वंस और
पुनर्निर्माण का दौर देखा,
किंतु वर्तमान स्वरूप की आधारशिला रखने
का श्रेय लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को ही जाता
है। उनके प्रयासों ने
काशी की आध्यात्मिक चेतना
को नया संबल दिया
और विश्वनाथ धाम को पुनः
भव्यता प्रदान की।
मंदिर न्यास ने इस अवसर
पर संकल्प दोहराया कि सनातन परंपरा
के महापुरुषों और महनीय मातृशक्ति
की गौरवगाथाओं को संरक्षित, प्रचारित
और जन-जन तक
पहुंचाने का अभियान निरंतर
जारी रहेगा। न्यास का मानना है
कि ऐसी विभूतियों की
स्मृतियां केवल इतिहास का
हिस्सा नहीं, बल्कि समाज को दिशा
देने वाली प्रेरणा-ज्योति
हैं। विश्वनाथ धाम में आयोजित
यह श्रद्धास्मरण कार्यक्रम केवल एक औपचारिक
आयोजन नहीं था, बल्कि
काशी की ओर से
उस महान लोकमाता को
विनम्र प्रणाम था, जिनकी तपस्या,
त्याग और धर्मनिष्ठा के
कारण आज भी बाबा
विश्वनाथ का यह पावन
धाम अपनी दिव्यता और
गरिमा के साथ विश्वभर
के श्रद्धालुओं का मार्ग आलोकित
कर रहा है।

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