माटीकला को मिलेगा रफ्तार का पहिया: वाराणसी में कारीगरों को मिलेंगे नि:शुल्क इलेक्ट्रॉनिक चाक
प्लास्टिक पर
रोक
के
बीच
सरकार
की
पहल—50
कुम्हारों
को
मिलेगा
आधुनिक
उपकरण,
30 मई
तक
आवेदन
सुरेश गांधी
वाराणसी. पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक माटीकला
को बढ़ावा देने के उद्देश्य
से उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी के
कुम्हारों और शिल्पकारों के
लिए एक महत्वपूर्ण कदम
उठाया है। जिले में
वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत 50 नि:शुल्क विद्युत चालित चाक (इलेक्ट्रॉनिक चाक)
वितरित किए जाएंगे। इससे
न सिर्फ प्लास्टिक के विकल्प के
रूप में मिट्टी के
उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा,
बल्कि कारीगरों की आय और
कार्यक्षमता में भी सुधार
होगा।
जिला ग्रामोद्योग विभाग
के अनुसार, इस योजना का
मुख्य उद्देश्य माटीकला से जुड़े कारीगरों
को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनके
व्यवसाय को सशक्त बनाना
है। इलेक्ट्रॉनिक चाक के माध्यम
से कम समय में
अधिक और बेहतर गुणवत्ता
के उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे,
जिससे बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा
भी बढ़ेगी।
योजना के तहत 18 से
55 वर्ष आयु वर्ग के
कुम्हार/शिल्पकार आवेदन कर सकते हैं।
हालांकि एक परिवार से
केवल एक ही व्यक्ति
को इसका लाभ मिलेगा
और जिन लाभार्थियों को
पहले इस तरह की
सहायता मिल चुकी है,
उन्हें पात्र नहीं माना जाएगा।
इच्छुक आवेदक 30 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन
कर सकते हैं। आवेदन
के बाद आवश्यक दस्तावेजों
के साथ हार्ड कॉपी
जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, टकटकपुर में जमा करना
अनिवार्य होगा। आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड,
निवास व जाति प्रमाण
पत्र, बैंक पासबुक, फोटो
और ग्राम प्रधान द्वारा प्रमाणित सिफारिश पत्र शामिल हैं।
जिला ग्रामोद्योग
अधिकारी ने बताया कि
यह योजना कुम्हार समुदाय के लिए आत्मनिर्भरता
की दिशा में एक
बड़ा कदम है। इससे
पारंपरिक कला को नई
पहचान मिलेगी और पर्यावरण के
अनुकूल उत्पादों का इस्तेमाल भी
बढ़ेगा।
महत्वपूर्ण बिंदु
50 कारीगरों को मिलेगा नि:शुल्क इलेक्ट्रॉनिक चाक. 30 मई 2026 तक आवेदन की अंतिम तिथि. एक परिवार से एक ही आवेदक पात्र. टकटकपुर स्थित कार्यालय में जमा होगी हार्ड कॉपी. सरकार की यह पहल न सिर्फ कारीगरों के जीवन में आर्थिक मजबूती लाने का माध्यम बनेगी, बल्कि ‘मिट्टी से जुड़ी विरासत’ को आधुनिक दौर में नई उड़ान भी देगी।

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