तेजतर्रार अफसर आलोक कुमार वर्मा को फिर मिली काशी की कमान
प्रशासनिक फेरबदल
में
गाजीपुर-जौनपुर
मंडल
को
भी
नए
अधिकारियों
की
जिम्मेदारी
सुरेश गांधी
वाराणसी। पूर्वांचल के प्रशासनिक ढांचे में एक बार फिर बड़ा फेरबदल हुआ है। शासन ने अनुभवी और तेजतर्रार अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपते हुए वाराणसी मंडल के प्रशासनिक समीकरणों को नया आकार दिया है। शासन के आदेश के तहत यस सुधाकरण को एडिशनल कमिश्नर द्वितीय बनाते हुए गाजीपुर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि विवेक कुमार यादव को एडिशनल कमिश्नर प्रथम बनाकर जौनपुर जिले का प्रभार दिया गया है। वहीं सबसे अधिक चर्चा आलोक कुमार वर्मा की नई तैनाती को लेकर है, जिन्हें एडिशनल कमिश्नर प्रशासन बनाया गया है। उनके जिम्मे वाराणसी और चंदौली जिले की प्रशासनिक व्यवस्था रहेगी। काशी में आलोक कुमार वर्मा की वापसी को प्रशासनिक हलकों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले वह वाराणसी में एडीएम सिटी के पद पर तैनात रह चुके हैं और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था, संवेदनशील मामलों के समाधान और प्रशासनिक नियंत्रण में अलग पहचान बनाई थी। हाल ही में उनका तबादला सुलतानपुर हुआ था, लेकिन शासन ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें काशी की अहम जिम्मेदारी सौंप दी।
कानून-व्यवस्था संभालने में माने जाते हैं माहिर
आलोक कुमार वर्मा उन चुनिंदा अधिकारियों में गिने जाते हैं, जो कठिन से कठिन विवाद को बिना टकराव के समाधान तक पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। प्रशासनिक सख्ती और संवाद की संतुलित शैली उनकी सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है। वाराणसी जैसे संवेदनशील और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिले में कई बार ऐसे हालात बने, जब छोटी घटनाएं बड़े विवाद का रूप ले सकती थीं, लेकिन आलोक वर्मा ने अपनी सूझबूझ से हालात को नियंत्रित किया।
उनकी कार्यशैली का सबसे बड़ा उदाहरण हाल का दालमंडी चौड़ीकरण अभियान माना जा रहा है। दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर भारी विरोध, राजनीतिक बयानबाजी और विपक्षी दलों की सक्रियता के बीच प्रशासन के सामने चुनौती बेहद कठिन थी।स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और कई राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को बड़ा आंदोलन बनाने की कोशिश की, लेकिन आलोक कुमार वर्मा ने लगातार संवाद, रणनीतिक प्लानिंग और प्रशासनिक दृढ़ता के दम पर पूरे मामले को बेहद शांत तरीके से संभाला।
बताया जाता
है कि उन्होंने एक
ओर व्यापारियों और स्थानीय लोगों
से कई दौर की
बातचीत की, वहीं दूसरी
ओर कानून-व्यवस्था पर भी मजबूत
पकड़ बनाए रखी। परिणाम
यह रहा कि जिस
चौड़ीकरण अभियान को लेकर बड़े
टकराव की आशंका जताई
जा रही थी, वही
कार्य बिना किसी बड़े
विवाद के शुरू हो
गया। प्रशासनिक गलियारों में इसे उनकी
बड़ी सफलता माना जा रहा
है।
वाराणसी सिर्फ एक जिला नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक और धार्मिक राजधानी मानी जाती है। यहां हर प्रशासनिक निर्णय का सामाजिक और राजनीतिक असर दूर तक दिखाई देता है। ऐसे में शासन ने ऐसे अधिकारी को जिम्मेदारी दी है, जो काशी की संवेदनशीलता, यहां की सामाजिक संरचना और धार्मिक महत्व को गहराई से समझता हो। आलोक कुमार वर्मा का पिछला कार्यकाल इसी वजह से चर्चा में रहा था। त्योहारों, धार्मिक आयोजनों, वीआईपी कार्यक्रमों और संवेदनशील इलाकों में उनकी मॉनिटरिंग क्षमता को प्रशासनिक स्तर पर काफी सराहा गया था।
कानून-व्यवस्था के मामलों में उनकी त्वरित निर्णय क्षमता और मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने की शैली ने उन्हें जनता और शासन दोनों के बीच भरोसेमंद अधिकारी की छवि दी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था, अतिक्रमण हटाओ अभियान, त्योहारों की व्यवस्थाओं और शहर की प्रशासनिक निगरानी में सक्रिय भूमिका निभाई थी।शहर में
उनकी कार्यशैली को लेकर आम
लोगों और प्रशासनिक हलकों
में सकारात्मक चर्चा होती रही। कुछ समय
पहले उनका तबादला मुख्य
राजस्व अधिकारी सुल्तानपुर के पद पर
किया गया था। अब
एक बार फिर सरकार
ने उन्हें वाराणसी मंडल में महत्वपूर्ण
जिम्मेदारी देकर जिले और
मंडल स्तर के प्रशासनिक
कार्यों की कमान सौंपी
है। अधिकारियों और कर्मचारियों के
बीच भी उनकी छवि
एक शांत, सरल और कार्यकुशल
अफसर के रूप में
रही है।
पूर्वांचल के प्रशासनिक ढांचे में नए समीकरण
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा
काशी के राजनीतिक गलियारों में भी इस फेरबदल की व्यापक चर्चा है। खासकर आलोक कुमार वर्मा की वापसी को लेकर यह माना जा रहा है कि शासन आने वाले समय में वाराणसी में विकास परियोजनाओं और संवेदनशील मामलों पर तेज गति से काम चाहता है। दालमंडी चौड़ीकरण जैसे जटिल मामले को संभालने के बाद उनकी प्रशासनिक क्षमता को लेकर शासन का भरोसा और मजबूत हुआ है। फिलहाल नई तैनातियों के बाद पूर्वांचल के प्रशासनिक ढांचे में नई सक्रियता दिखाई देने लगी है और अब सबकी नजर इस बात पर है कि नए अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को किस अंदाज में आगे बढ़ाते हैं।






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