लखनऊ अग्निकांड : 15 जिंदगियां लील गईं लपटें
अलीगंज के
पुरनिया
स्थित
व्यावसायिक
भवन
में
भीषण
आग,
गेमिंग
जोन
और
अध्ययन
केंद्र
में
मची
चीख-पुकार
• जान
बचाने
को
खिड़कियों
और
छज्जों
से
कूदे
लोग
• सीएम
योगी
ने
डीजीपी
और
अपर
मुख्य
सचिव
गृह
को
मौके
पर
भेजा,
पीएम
ने
जताया
शोक
और
किया
मुआवजे
का
ऐलान
सुरेश गांधी
लखनऊ। राजधानी के अलीगंज थाना
क्षेत्र के पुरनिया इलाके
में सोमवार दोपहर हुए भीषण अग्निकांड
ने पूरे प्रदेश को
झकझोर कर रख दिया।
एक बहुमंजिला व्यावसायिक भवन में लगी
आग ने देखते ही
देखते विकराल रूप धारण कर
लिया। धुएं और आग
की लपटों में घिरे लोगों
के पास जान बचाने
के लिए खिड़कियों और
छज्जों से छलांग लगाने
के अलावा कोई रास्ता नहीं
बचा। देर शाम तक
राहत एवं बचाव अभियान
पूरा होने पर 15 लोगों
की मौत की पुष्टि
हुई, जबकि कई अन्य
घायल होकर अस्पतालों में
भर्ती हैं।
हादसे के शुरुआती घंटों
में भवन में कोचिंग
सेंटर होने की बात
सामने आई, लेकिन बाद
में अधिकारियों ने स्पष्ट किया
कि भूतल पर पेट
शॉप और पेट क्लीनिक
संचालित था, जबकि ऊपरी
मंजिल पर गेमिंग जोन
और अध्ययन/प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियां
चल रही थीं। आग
के वास्तविक कारणों और भवन में
सुरक्षा मानकों के पालन की
जांच की जा रही
है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर
करीब तीन बजे अचानक
धुआं उठना शुरू हुआ।
कुछ ही मिनटों में
पूरा भवन काले धुएं
से भर गया। ऊपर
मौजूद युवक-युवतियां मदद
के लिए चीखते रहे।
कई लोगों ने अपनी जान
बचाने के लिए पहली
मंजिल और छज्जों से
छलांग लगा दी। स्थानीय
लोग बिना अपनी जान
की परवाह किए बचाव कार्य
में जुट गए और
दमकल के पहुंचने से
पहले कई लोगों को
बाहर निकाला।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग,
पुलिस, एसडीआरएफ और प्रशासन की
कई टीमें मौके पर पहुंचीं।
घना धुआं होने के
कारण राहत कार्य में
कठिनाई आई। दमकल कर्मियों
को पीछे की दीवार
तोड़कर भीतर प्रवेश करना
पड़ा। कई घंटों की
मशक्कत के बाद आग
पर पूरी तरह काबू
पाया गया और कूलिंग
ऑपरेशन चलाया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
घटना का तत्काल संज्ञान
लेते हुए राहत एवं
बचाव कार्य में तेजी लाने
के निर्देश दिए। बाद में
उन्होंने पूरे मामले की
उच्चस्तरीय जांच के आदेश
दिए तथा पुलिस महानिदेशक
और अपर मुख्य सचिव
(गृह) को घटनास्थल पर
भेजकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की। मुख्यमंत्री
ने स्पष्ट कहा कि यदि
सुरक्षा मानकों में किसी स्तर
पर लापरवाही मिली तो दोषियों
के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी
घटनास्थल पहुंचकर बचाव कार्यों की
निगरानी की और अस्पतालों
में भर्ती घायलों के समुचित उपचार
के निर्देश दिए। केजीएमयू ट्रॉमा
सेंटर और बर्न यूनिट
को अलर्ट मोड पर रखा
गया, जहां घायलों का
उपचार जारी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे
पर गहरा शोक व्यक्त
करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय
राहत कोष से प्रत्येक
मृतक के परिजनों को
दो-दो लाख रुपये
तथा प्रत्येक घायल को 50 हजार
रुपये की आर्थिक सहायता
देने की घोषणा की।
उन्होंने शोक संतप्त परिवारों
के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों
के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना
की।
यह हादसा एक
बार फिर बहुमंजिला व्यावसायिक
भवनों में अग्नि सुरक्षा
व्यवस्था पर गंभीर सवाल
खड़े कर गया है।
क्या भवन में पर्याप्त
अग्निशमन उपकरण थे? क्या आपातकालीन
निकास मार्ग सुरक्षित थे? क्या फायर
सेफ्टी ऑडिट समय पर
हुआ था? इन सभी
बिंदुओं की जांच अब
प्रशासन के सामने सबसे
बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल पूरा प्रदेश उन
परिवारों के दुख में
सहभागी है, जिन्होंने इस
दर्दनाक हादसे में अपने अपनों
को खो दिया।

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