अब प्यास नहीं बनेगी परेशानी : काशी के चौराहों पर बहेगी राहत की ठंडी धार
भीषण गर्मी
के
बीच
आमजन
को
बड़ी
सौगात
• उत्तरी
विधानसभा
क्षेत्र
में
आर
ओ
युक्त
14 वाटर
कूलर
होंगे
संचालित
• राहगीरों,
मजदूरों
और
व्यापारियों
को
मिलेगा
शुद्ध
व
शीतल
पेयजल
सुरेश गांधी
वाराणसी। तपती दोपहर... आग
उगलती सड़कें... और आसमान से
बरसती धूप। ऐसे मौसम
में यदि किसी प्यासे
राहगीर को सार्वजनिक स्थान
पर ठंडे और शुद्ध
पानी का एक घूंट
मिल जाए तो वह
किसी राहत से कम
नहीं होता। धर्म और संस्कृति
की नगरी काशी में
इसी राहत को जनसेवा
का स्वरूप देने की पहल
शुरू हुई है। शहर
के प्रमुख चौराहों, व्यस्त बाजारों और घनी आबादी
वाले क्षेत्रों में अब आरओ
तकनीक से युक्त आधुनिक
वाटर कूलर लगाए जा
रहे हैं, ताकि भीषण
गर्मी के बीच लोगों
को सहज और नि:शुल्क शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सके।
प्रदेश के स्टाम्प एवं
न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने शनिवार को
गुलाबबाग स्थित अपने कार्यालय से
छह नए आरओ युक्त
वाटर कूलरों का वितरण किया।
इसके साथ ही उत्तरी
विधानसभा क्षेत्र में लगाए जा
रहे सार्वजनिक वाटर कूलरों की
संख्या बढ़कर 14 हो जाएगी। इससे
पहले आठ स्थानों पर
यह सुविधा शुरू की जा
चुकी है। मंत्री ने
कहा कि लगातार बढ़ते
तापमान और आम नागरिकों
की आवश्यकता को देखते हुए
यह निर्णय लिया गया है।
गर्मी के मौसम में
सार्वजनिक स्थानों पर शुद्ध एवं
ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना केवल सुविधा नहीं,
बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। उन्होंने
बताया कि प्रत्येक वाटर
कूलर में आधुनिक रिवर्स
ऑस्मोसिस (RO) प्रणाली लगी है, जिससे
लोगों को स्वच्छ, सुरक्षित
और शीतल पेयजल मिल
सकेगा। इसका लाभ प्रतिदिन
हजारों राहगीरों, रिक्शा एवं ई-रिक्शा
चालकों, मजदूरों, दुकानदारों, विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं को
मिलेगा।
काशी देश-विदेश
से आने वाले लाखों
पर्यटकों और श्रद्धालुओं का
शहर है। ऐसे में
सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की
बेहतर व्यवस्था न केवल नागरिक
सुविधा को मजबूत करती
है, बल्कि शहर की मानवीय
संवेदनशीलता और आतिथ्य संस्कृति
को भी नई पहचान
देती है। गर्मी के
दिनों में अक्सर लोग
प्यास बुझाने के लिए बोतलबंद
पानी खरीदने को मजबूर होते
हैं। ऐसे समय में
यह पहल आर्थिक रूप
से कमजोर वर्ग के लिए
भी बड़ी राहत साबित
होगी। इस अवसर पर
मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने जल संरक्षण
का संदेश देते हुए कहा
कि पानी प्रकृति का
अमूल्य उपहार है और इसका
विवेकपूर्ण उपयोग समय की सबसे
बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने लोगों
से अपील की कि
गर्मी में पर्याप्त मात्रा
में पानी अवश्य पिएं,
लेकिन इसकी एक-एक
बूंद का महत्व भी
समझें। सड़कों पर अनावश्यक पानी
बहाना, वाहनों की धुलाई में
अत्यधिक जल खर्च करना
तथा जल की बर्बादी
भविष्य के लिए गंभीर
संकट को जन्म दे
सकती है। यदि आज
समाज जल संरक्षण के
प्रति सजग होगा, तभी
आने वाली पीढ़ियों के
लिए पर्याप्त जल संसाधन सुरक्षित
रह पाएंगे।
क्षेत्र में सार्वजनिक वाटर
कूलर लगाए जाने की
इस पहल का स्थानीय
नागरिकों ने स्वागत किया
है। लोगों का कहना है
कि चिलचिलाती धूप में बाजार
आने वाले ग्राहक, रोजाना
मेहनत करने वाले श्रमिक,
रिक्शा चालक, दुकानदार, विद्यार्थी और राहगीरों को
इससे बड़ी राहत मिलेगी।
कई नागरिकों ने इसे जनसहभागिता
और जनसेवा का सकारात्मक उदाहरण
बताया। नागरिकों का कहना हैं कि बढ़ते
तापमान और लगातार पड़
रही लू के बीच
सार्वजनिक पेयजल केंद्र किसी भी शहर
की बुनियादी नागरिक सुविधाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा
बन चुके हैं। यदि
ऐसे प्रयासों का विस्तार अन्य
क्षेत्रों में भी किया
जाए तो गर्मी से
होने वाली स्वास्थ्य संबंधी
समस्याओं को काफी हद
तक कम किया जा
सकता है। कार्यक्रम में
अरविंद सिंह, पूर्व मंडल अध्यक्ष वी.सी. जायसवाल, रतन
मौर्य, कमलेश सोनकर, पार्षद रोहित मिश्रा, पार्षद प्रत्याशी महेंद्र सिंह गौतम, जितेंद्र
मिश्रा, विकास सिंह, सौरभ सिंह, सत्यप्रकाश
जायसवाल, सुमित जायसवाल तथा पूर्व पार्षद
रोहित मौर्या सहित अनेक जनप्रतिनिधि
और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
प्यास बुझाने के साथ जल बचाने का भी संदेश
भीषण गर्मी केवल मौसम की चुनौती नहीं, बल्कि जल संकट की चेतावनी भी है। ऐसे समय में सार्वजनिक स्थानों पर आरओ युक्त वाटर कूलर लगाना मानवीय संवेदना और सुशासन का सराहनीय उदाहरण है। लेकिन इसके साथ यह भी उतना ही आवश्यक है कि समाज जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए। यदि नागरिक सुविधाओं का विस्तार जल बचाने की सामूहिक जिम्मेदारी के साथ हो, तो यह पहल केवल राहत नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा का भी आधार बनेगी। काशी की यह शुरुआत अन्य शहरों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।

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