'प्रकृति का कर्ज' चुकाने का संकल्प लें, हर नागरिक लगाए 'मां के नाम' एक पेड़
12 जुलाई
के वृक्षारोपण महायज्ञ की तैयारियों की
समीक्षा; हर वार्ड में
मुफ्त पौध वितरण, पान,
बेल, महुआ, अर्जुन और चिरौंजी जैसे
पौधों पर रहेगा विशेष
जोर
सुरेश गांधी
वाराणसी। 12
जुलाई को होने वाले
वृक्षारोपण महायज्ञ–2026 को जनआंदोलन का
स्वरूप देने की तैयारी
तेज हो गई है।
शुक्रवार को सर्किट हाउस सभागार में
स्टाम्प एवं शुल्क पंजीयन
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल की अध्यक्षता में
आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों
को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि
वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूरा
करने तक सीमित न
रहे, बल्कि पौधों के संरक्षण और
जनसहभागिता को सर्वोच्च प्राथमिकता
दी जाए। मंत्री ने
काशीवासियों से भावनात्मक अपील
करते हुए कहा, "हर
नागरिक 'मां के नाम'
एक पेड़ अवश्य लगाए।
क्यों न हम इतने
पेड़ लगाएं कि मरने के
बाद हमारे ऊपर प्रकृति का
कोई कर्ज न रहे।"
बैठक में वृक्षारोपण
स्थलों के चयन, गड्ढों
की खुदाई, गुणवत्तापूर्ण पौधों की उपलब्धता, सिंचाई,
सुरक्षा, जियो टैगिंग, परिवहन
और विभागवार लक्ष्यों की विस्तार से
समीक्षा की गई। मंत्री
ने कहा कि सभी
पौधारोपण स्थलों पर पहले से
आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली जाएं,
ताकि अभियान बिना किसी बाधा
के सफलतापूर्वक संपन्न हो सके। उन्होंने
स्पष्ट किया कि पौधे
लगाने के साथ उनका
संरक्षण भी उतना ही
महत्वपूर्ण है और प्रत्येक
विभाग इसकी जिम्मेदारी तय
करे। मंत्री ने निर्देश दिया
कि नगर के प्रत्येक
वार्ड में एक उपयुक्त
स्थान या प्रमुख चौराहे
पर पौध वितरण केंद्र
बनाया जाए, जहां से
वार्डवासियों को निःशुल्क पौधे
उपलब्ध कराए जाएं। उनका
कहना था कि अधिक
से अधिक लोगों की
भागीदारी से ही यह
अभियान सफल होगा। काशी
की सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में
रखते हुए उन्होंने पान
और कत्था के पौधों के
साथ बेल, महुआ, अर्जुन,
चिरौंजी और शहतूत जैसे
उपयोगी एवं पर्यावरण हितैषी
पौधों के रोपण और
वितरण पर विशेष जोर
दिया। साथ ही मुख्यालय
से जुड़ने वाली चौड़ी सड़कों,
उनके मीडियन, औद्योगिक क्षेत्रों, नई टाउनशिप, बस
स्टॉप तथा श्री काशी
विश्वनाथ धाम परिसर में
भी उपयुक्त स्थानों पर बेल के
पौधे लगाने का सुझाव दिया।
रविंद्र जायसवाल ने कहा कि
अंतिम संस्कार के लिए बड़ी
मात्रा में लकड़ी की
आवश्यकता पड़ती है, जिसके लिए
पेड़ों की कटाई होती
है। यदि हर व्यक्ति
अपने जीवन में अधिक
से अधिक पौधे लगाए
तो वह प्रकृति पर
पड़े इस बोझ को
काफी हद तक कम
कर सकता है। उन्होंने
विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण
को जनचेतना से जोड़ने के
लिए गीत, संगीत, निबंध
और चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित कराने के भी निर्देश
दिए। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने सभी विभागाध्यक्षों
को निर्देश दिया कि विद्यालयों,
ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, स्वयंसेवी संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों
की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने
प्रत्येक ग्राम पंचायत में 'पौध भंडारा'
आयोजित कर किसानों और
ग्रामीणों को पौध वितरित
करने तथा हर व्यक्ति
से कम से कम
एक पौधा लगाकर उसके
संरक्षण का संकल्प लेने
की अपील की। बैठक में
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध
निदेशक शंभू कुमार, डीएफओ
निधि चौहान सहित विभिन्न विभागों
के अधिकारी और पार्षद मौजूद
रहे।
यादगार अपील
"मौत के बाद भी प्रकृति का कर्ज न रहे"…."आदमी के अंतिम संस्कार में नौ मन लकड़ी लगती है। क्यों न हम अपने जीवन में इतने पेड़ लगा दें कि मरने के बाद प्रकृति पर कोई कर्ज बाकी न रहे।" — रविंद्र जायसवाल, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

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