ज्ञानवापी पर सुलह की पहल को झटका : प्री-कंसिलेशन बैठक से मुस्लिम पक्ष ने किया किनारा
आज दोपहर दो बजे वाराणसी
में प्रस्तावित बैठक; हिंदू पक्ष बोला—कोर्ट
के समक्ष रखेंगे अपना पक्ष, समय से पहले पहुंचेंगे सदस्य
सुरेश गांधी
वाराणसी। ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद को आपसी
बातचीत के जरिए सुलझाने की सुप्रीम कोर्ट की पहल को शुरुआती झटका लगा है। मंगलवार को
वाराणसी में प्रस्तावित 'प्री-कंसिलेशन' (पूर्व-सुलह वार्ता) बैठक से पहले मुस्लिम
पक्ष ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। वहीं, हिंदू पक्ष ने स्पष्ट किया है
कि वह न्यायालय के निर्देश का पालन करते हुए निर्धारित समय पर उपस्थित होकर अपना पक्ष
रखेगा।
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की ओर
से कहा गया है कि ज्ञानवापी विवाद जैसे संवेदनशील मामले का समाधान मध्यस्थता या लोक
अदालत के माध्यम से नहीं, बल्कि न्यायालय की नियमित सुनवाई के जरिए होना चाहिए। मुस्लिम
पक्ष का कहना है कि वह अपनी कानूनी लड़ाई अदालत में जारी रखेगा और मस्जिद पर अपने दावे
से पीछे हटने का प्रश्न ही नहीं उठता। ऐसे में प्रस्तावित प्री-कंसिलेशन बैठक में शामिल
होने का कोई औचित्य नहीं है।
उधर, ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी पूजा समिति
के अध्यक्ष सोहन लाल सिंह आर्य ने बताया कि उनकी समिति के सदस्य न्यायालय के समक्ष
उपस्थित रहेंगे और अपना पक्ष पूरी मजबूती से रखेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने दोपहर
दो बजे उपस्थित होने के लिए कहा है और समिति के सदस्य निर्धारित समय से पहले ही न्यायालय
पहुंच जाएंगे। सोहन लाल सिंह आर्य ने कहा कि हिंदू पक्ष न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान
करता है और जो भी निर्देश दिए गए हैं, उनका पालन किया जाएगा। उनके अनुसार, समिति के
सदस्य अपने दावे और तथ्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपनी
75वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुरू किए गए 'समाधान समारोह-2026' के तहत कुछ चुनिंदा संवेदनशील
मामलों में आपसी सहमति से समाधान की संभावनाएं तलाशने की पहल की है। इसी क्रम में ज्ञानवापी-श्रृंगार
गौरी विवाद को भी विशेष लोक अदालत की प्रक्रिया से जोड़ने का सुझाव दिया गया था। हालांकि,
मुस्लिम पक्ष के असहयोग के चलते इस पहल के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सबकी
निगाहें मंगलवार को वाराणसी में होने वाली न्यायालयी कार्यवाही पर टिकी हैं। यदि एक
पक्ष अनुपस्थित रहता है और दूसरा अपना पक्ष रखता है, तो आगे की प्रक्रिया न्यायालय
के निर्देशों के अनुरूप तय होगी।

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