सावन में शिवमय होगी काशी, आस्था के महासैलाब के स्वागत को तैयार विश्वनाथ धाम
70–80 लाख श्रद्धालुओं के
आगमन
का
अनुमान
• सुरक्षा
का
अभेद्य
चक्र,
तकनीक
की
पैनी
निगाह
और
सेवा
का
विस्तृत
तंत्र
पिछले वर्ष
63 लाख
श्रद्धालुओं
ने
टेका
था
माथा,
इस
बार
टूट
सकता
है
हर
रिकॉर्ड;
चारों
सोमवार
पर
विशेष
श्रृंगार
बनेगा
आकर्षण
का
केंद्र
सुरेश गांधी
वाराणसी। जब गंगा के
घाटों पर 'हर-हर
महादेव' का स्वर गूंजेगा,
जब कांवड़ियों के कदम काशी
की गलियों को शिवमय कर
देंगे और विश्वनाथ धाम
की ओर बढ़ती अनंत
कतारें आस्था का महासागर बन
जाएंगी, तब काशी एक
बार फिर दुनिया को
बताएगी कि सनातन केवल
परंपरा नहीं, बल्कि जीवंत अनुभव है। इसी अनुभव
को सुरक्षित और सहज बनाने
के लिए विश्वनाथ धाम
ने अब तक की
सबसे व्यापक तैयारी पूरी कर ली
है।
जी हां, कुछ ही दिनों बाद
काशी की सुबहें हर-हर महादेव के
जयघोष से गूंजेंगी। गंगा
की लहरों पर तैरती आरती,
गलियों में उमड़ती आस्था,
कांवड़ियों के कदमों की
थाप और बाबा विश्वनाथ
के दर्शन की प्रतीक्षा में
लगी अनंत कतारें... सावन
का वही अलौकिक दृश्य
एक बार फिर पूरी
भव्यता के साथ लौटने
वाला है। धर्म, परंपरा
और आधुनिक प्रबंधन के अद्भुत संगम
का प्रतीक बन चुका श्री
काशी विश्वनाथ धाम इस बार
अपने इतिहास के सबसे बड़े
श्रद्धालु समागम का साक्षी बनने
की ओर बढ़ रहा
है।
मंदिर प्रशासन ने श्रावण मास
में 70 से 80 लाख श्रद्धालुओं के
आगमन का अनुमान लगाया
है और इसके लिए
सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, चिकित्सा,
पेयजल, तकनीकी निगरानी और दर्शन व्यवस्था
का ऐसा खाका तैयार
किया गया है, जिसे
अब तक की सबसे
व्यापक तैयारी माना जा रहा
है। सिर्फ
श्रद्धालुओं की संख्या ही
नहीं, बल्कि उनकी सुविधा भी
इस बार पूरी योजना
का केंद्र है। पिछले वर्ष
श्रावण मास में 63,06,631 श्रद्धालुओं
ने बाबा विश्वनाथ के
दर्शन किए थे। इस
बार यह आंकड़ा 70 लाख
की सीमा पार कर
80 लाख तक पहुंचने का
अनुमान है। मंदिर प्रशासन
का पूरा फोकस इस
बात पर है कि
आस्था की भीड़ व्यवस्था
पर भारी न पड़े
और हर श्रद्धालु सुरक्षित,
सहज और संतोषपूर्ण दर्शन
कर सके।
हर सोमवार बढ़ेगा आस्था का ज्वार
श्रावण के चारों सोमवार
काशी की पहचान होते
हैं। पहले सोमवार भगवान
शंकर स्वरूप, दूसरे सोमवार गौरी-शंकर, तीसरे
सोमवार अर्धनारीश्वर और चौथे सोमवार
रुद्राक्ष श्रृंगार में भक्तों को
दर्शन देंगे। पूर्णिमा पर झूला श्रृंगार
और रक्षाबंधन पर विशेष दर्शन
की व्यवस्था भी रहेगी। इन
दिव्य श्रृंगारों को देखने के
लिए लाखों श्रद्धालुओं के उमड़ने की
संभावना है।
आस्था की सुरक्षा के लिए तकनीक का अभेद्य कवच
इस बार धाम
की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप
दिया गया है। पूरे
परिसर और उससे जुड़े
मार्गों पर 289 सीसीटीवी कैमरों के साथ 44 अतिरिक्त
कैमरे लगाए गए हैं।
गोदौलिया से मैदागिन तक
हर गतिविधि मंदिर कंट्रोल रूम और पुलिस
कंट्रोल रूम से चौबीसों
घंटे निगरानी में रहेगी। किसी
भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के
लिए लगातार ड्यूटी और त्वरित प्रतिक्रिया
की व्यवस्था की गई है।
सात प्रवेश मार्ग, अलग निकासी... ताकि न बने दबाव
श्रद्धालुओं की भीड़ को
वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित करने
के लिए सात प्रमुख
प्रवेश मार्ग निर्धारित किए गए हैं।
प्रत्येक मार्ग पर सुरक्षा जांच
अनिवार्य होगी और अलग-अलग प्रवेश एवं
निकास व्यवस्था लागू रहेगी। इससे
कतारों का दबाव कम
होगा और दर्शन की
गति बनी रहेगी।
गोदौलिया से मैदागिन तक सोमवार को नो-व्हीकल जोन
चारों सोमवार गोदौलिया से मैदागिन तक
वाहन प्रतिबंधित रहेंगे। वृद्ध, दिव्यांग और विशेष श्रेणी
के श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क
गोल्फ कार्ट की व्यवस्था रहेगी।
दोनों छोरों पर कर्मचारियों की
तैनाती कर यह सुनिश्चित
किया जाएगा कि किसी भी
श्रद्धालु को अनावश्यक परेशानी
न हो।
भीड़ अधिक हुई तो एलईडी पर होंगे बाबा के साक्षात दर्शन
दर्शन से कोई वंचित
न रहे, इसके लिए
धाम और प्रमुख मार्गों
पर बड़ी एलईडी स्क्रीन
लगाई गई हैं। इनमें
बाबा की आरती, पूजन
और गर्भगृह की झांकी का
सीधा प्रसारण होगा, जिससे कतार में खड़े
श्रद्धालु भी आध्यात्मिक अनुभूति
से जुड़े रहेंगे।
आस्था के साथ स्वास्थ्य और सेवा का भी पूरा ध्यान
धाम परिसर में
मेडिकल सहायता केंद्र, निःशुल्क एम्बुलेंस, प्राथमिक उपचार, एनडीआरएफ मेडिकल कैंप, शुद्ध पेयजल, आरओ वाटर कूलर,
पोर्टेबल जल केंद्र, ओआरएस
और ग्लूकोज युक्त पेय की व्यवस्था
रहेगी। धूप और उमस
से राहत के लिए
प्रमुख स्थानों पर विशाल छायादार
हैंगर भी लगाए गए
हैं।
पिछले साल के आंकड़े बढ़ा रहे उम्मीदें
पिछले वर्ष केवल चार
सोमवारों पर ही 20.53 लाख
श्रद्धालुओं ने बाबा के
दर्शन किए थे। पहले
सोमवार 3.41 लाख, दूसरे सोमवार
4.54 लाख, तीसरे सोमवार 5.66 लाख और चौथे
सोमवार 6.91 लाख श्रद्धालु पहुंचे
थे। यही कारण है
कि इस बार प्रशासन
रिकॉर्ड भीड़ को ध्यान
में रखकर तैयारी कर
रहा है।
एक नजर
पिछले
वर्ष
कुल
श्रद्धालु:
63,06,631
इस
वर्ष
अनुमानित
श्रद्धालु:
70–80 लाख
कुल
सीसीटीवी
कैमरे:
289 + 44 अतिरिक्त
प्रमुख
प्रवेश
मार्ग:
7
मेडिकल
सहायता
केंद्र:
3 प्रमुख
केंद्र,
एनडीआरएफ
कैंप
सहित
नो-व्हीकल
जोन:
गोदौलिया–मैदागिन
(चारों
सोमवार)
विशेष
आकर्षण:
चारों
सोमवार
अलग-अलग
दिव्य
श्रृंगार
सावन में काशी केवल एक शहर नहीं रहती, वह शिव की जीवंत नगरी बन जाती है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु सिर्फ दर्शन नहीं करता, बल्कि सनातन की उस अनादि परंपरा का हिस्सा बनता है जो सदियों से गंगा के तट पर प्रवाहित है। इस बार विश्वनाथ धाम की तैयारी साफ संकेत दे रही है कि प्रशासन की कोशिश केवल रिकॉर्ड भीड़ संभालने की नहीं, बल्कि हर श्रद्धालु को यह एहसास कराने की है कि वह बाबा के दरबार में एक सम्मानित अतिथि है।

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