घड़रोजों के आतंक से खेत बचाने को किसानों ने अपनाई 'सोलर झटका' सुरक्षा
मेड़बंदी पर
बिजलीयुक्त
सोलर
फेंसिंग
बनी
फसलों
की
ढाल,
रातभर
खेतों
में
घुसपैठ
पर
लगाम
नीलगाय, घड़रोज
और
छुट्टा
पशुओं
से
तबाह
हो
रही
थी
खेती,
अब
सौर
ऊर्जा
से
चलने
वाली
झटका
मशीन
से
किसानों
को
मिली
राहत
सुरेश गांधी
वाराणसी. ग्रामीण अंचलों में घड़रोज (नीलगाय)
और अन्य जंगली पशुओं
का बढ़ता आतंक किसानों के
लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
रात होते ही झुंड
के झुंड खेतों में
घुसकर धान, मक्का, अरहर,
सब्जियों और अन्य नकदी
फसलों को चंद घंटों
में बर्बाद कर देते हैं।
इससे किसानों की मेहनत और
लागत पर पानी फिर
जाता है। लगातार हो
रहे नुकसान से परेशान किसानों
ने अब आधुनिक तकनीक
का सहारा लेना शुरू कर
दिया है। खेतों की
मेड़ों पर सोलर झटका
मशीन (सोलर फेंसिंग) लगाकर
फसलों की सुरक्षा की
जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह तकनीक
तेजी से लोकप्रिय हो
रही है। खेत की
चारों ओर तार बिछाकर
उसे सोलर एनर्जी से
संचालित झटका मशीन से
जोड़ा जाता है। जैसे
ही कोई जंगली पशु
तार को छूता है,
उसे हल्का विद्युत झटका लगता है
और वह खेत में
प्रवेश किए बिना वापस
लौट जाता है। यह
झटका जानलेवा नहीं होता, बल्कि
केवल पशुओं को दूर रखने
के लिए पर्याप्त होता
है।
किसानों का कहना है
कि पहले पूरी-पूरी
रात खेतों की रखवाली करनी
पड़ती थी। कई बार
परिवार के लोग भी
रातभर खेतों में डेरा डालते
थे, फिर भी फसल
बच नहीं पाती थी।
अब सोलर फेंसिंग लगने
के बाद न केवल
फसल सुरक्षित हुई है, बल्कि
किसानों को रातभर जागने
की मजबूरी से भी राहत
मिली है।
कृषि विशेषज्ञों का
कहना है कि जंगली
पशुओं से होने वाले
नुकसान को देखते हुए
सोलर फेंसिंग प्रभावी विकल्प बनकर उभरी है।
यह पर्यावरण के अनुकूल है,
बिजली की नियमित आपूर्ति
पर निर्भर नहीं रहती और
सौर ऊर्जा से संचालित होने
के कारण संचालन खर्च
भी बेहद कम है।
समय-समय पर बैटरी
और तारों की देखरेख करने
से यह लंबे समय
तक प्रभावी रहती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कई
किसान हैं जिन्होंने सामूहिक
रूप से अपने खेतों
की मेड़बंदी कर सोलर झटका
मशीन लगाई है। इससे
पूरे क्षेत्र की फसल सुरक्षित
हो रही है और
व्यक्तिगत लागत भी कम
हो रही है। किसानों
का मानना है कि यदि
सरकार इस तकनीक पर
अनुदान उपलब्ध कराए तो अधिक
से अधिक किसान इसका
लाभ उठा सकेंगे और
जंगली पशुओं से होने वाले
करोड़ों रुपये के फसल नुकसान
पर काफी हद तक
रोक लगाई जा सकती
है।
कृषि विभाग के
अधिकारियों का भी मानना
है कि आधुनिक तकनीक
के प्रयोग से खेती को
सुरक्षित बनाया जा सकता है।
किसानों को सलाह दी
जा रही है कि
वे प्रमाणित और सुरक्षित सोलर
फेंसिंग प्रणाली का ही उपयोग
करें, जिससे पशुओं को नुकसान पहुंचाए
बिना फसलों की प्रभावी सुरक्षा
सुनिश्चित हो सके।
क्यों बढ़ रही है सोलर झटका मशीन की मांग?
घड़रोज,
नीलगाय
और
छुट्टा
पशुओं
से
फसलों
की
सुरक्षा।
रातभर
खेत
की
रखवाली
से
राहत।
सौर
ऊर्जा
से
संचालन,
बिजली
बिल
नहीं।
रखरखाव
का
खर्च
कम।
जानलेवा
नहीं,
केवल
हल्का
झटका
देकर
पशुओं
को
दूर
रखती
है।
सामूहिक मेड़बंदी से लागत में कमी और सुरक्षा अधिक।

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