जूट की महंगाई से कालीन उद्योग पर संकट, समाधान का भरोसा
भदोही
पहुंचे पश्चिम बंगाल के कैबिनेट मंत्री
उमेश राय, उद्योग प्रतिनिधियों
ने 150 फीसदी तक बढ़ी जूट
कीमतों का उठाया मुद्दा
• उत्पादकों
और सीईपीसी की संयुक्त बैठक
कराने का दिया आश्वासन
सुरेश गांधी
भदोही। देश के हस्तनिर्मित
कालीन उद्योग पर बढ़ती जूट
कीमतों का दबाव लगातार
बढ़ रहा है। इसी
मुद्दे को लेकर सोमवार
को पश्चिम बंगाल सरकार के कैबिनेट मंत्री
उमेश राय के समक्ष
कालीन उद्योग के प्रतिनिधियों ने
चिंता जताई। उद्योग से जुड़े लोगों
ने बताया कि पिछले कुछ
वर्षों में जूट की
कीमतों में करीब 150 फीसदी
की वृद्धि हो चुकी है,
जिससे उत्पादन लागत बढ़ने के
साथ भारतीय कालीन निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा
भी प्रभावित हो रही है।
भदोही स्थित एक कालीन उत्पादन
इकाई के निरीक्षण के
बाद हुई बैठक में
कार्पेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (सीईपीसी) की प्रशासनिक समिति
के सदस्य संजय गुप्ता ने
कहा कि जूट की
बढ़ती कीमतें उद्योग के लिए गंभीर
चुनौती बन गई हैं।
उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार से जूट उत्पादकों
और मिलों के साथ समन्वय
स्थापित कर कालीन उद्योग
को उचित दर पर
कच्चा माल उपलब्ध कराने
की व्यवस्था करने का आग्रह
किया।
मंत्री उमेश राय ने
उद्योग की चिंताओं को
गंभीरता से लेते हुए
कहा कि जल्द ही
सीईपीसी, जूट उत्पादकों और
जूट मिलों की संयुक्त बैठक
पश्चिम बंगाल में आयोजित कराई
जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आपसी समन्वय
से जूट की उपलब्धता
और कीमतों से जुड़ी समस्याओं
का व्यावहारिक समाधान निकालने का प्रयास किया
जाएगा। बैठक में पूर्व नगर
अध्यक्ष प्रह्लाद दास गुप्ता, सीईपीसी
सदस्य ब्रजेश गुप्ता, विधायक विपुल दुबे, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा सहित
उद्योग जगत के कई
प्रतिनिधि मौजूद रहे।
उद्योग की प्रमुख चिंता
जूट की कीमतों
में करीब 150% की वृद्धि।
उत्पादन लागत में लगातार
इजाफा।
निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता
पर असर।
जूट की स्थिर और वाजिब कीमत पर उपलब्धता की मांग।

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