Tuesday, 7 July 2026

श्रद्धा के शिखर से विकास की धरातल तक… काशी में योगी का सुशासन संकल्प

श्रद्धा के शिखर से विकास की धरातल तक काशी में योगी का सुशासन संकल्प 

कालभैरव और बाबा विश्वनाथ के चरणों में नमन, श्रावण की तैयारियों की गहन समीक्षा, विकास परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण; मुख्यमंत्री बोले"श्रद्धा भी सुरक्षित रहे, विकास भी अविराम चले"… मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वाराणसी दौरा केवल बैठकों और निरीक्षणों तक सीमित नहीं रहा। यह उस शासन दर्शन का परिचायक था, जिसमें आस्था को सम्मान, नागरिकों को सुविधा और विकास को गतितीनों को समान महत्व दिया जाता है। कालभैरव और बाबा विश्वनाथ के चरणों में नमन से लेकर चौकाघाट के विद्युत सब स्टेशन तक पहुंचना इस बात का प्रतीक है कि नई काशी केवल मंदिरों की नगरी नहीं, बल्कि आधुनिक अधोसंरचना, सुशासन और सांस्कृतिक विरासत के संतुलित संगम के रूप में विकसित हो रही है। मुख्यमंत्री का यह दौरा उसी संकल्प को और अधिक स्पष्ट तथा मजबूत करता है 

सुरेश गांधी

काशी में मंगलवार का दिन केवल एक सरकारी दौरे का दिन नहीं था, बल्कि वह दिन था जब आस्था, प्रशासन और विकास एक ही सूत्र में बंधे दिखाई दिए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दो दिवसीय वाराणसी प्रवास के पहले दिन यह स्पष्ट संदेश दिया कि विश्व की प्राचीनतम जीवंत नगरी काशी में आध्यात्मिक गरिमा और आधुनिक विकास साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। बाबा विश्वनाथ की नगरी में मुख्यमंत्री का पूरा दिन धार्मिक आस्था, प्रशासनिक अनुशासन और विकास कार्यों की गति को समर्पित रहा।

काशी पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम सर्किट हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विकास परियोजनाओं और कानून-व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्रावण मास के दौरान काशी आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में काशीवासियों के लिए अलग दर्शन मार्ग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि स्थानीय नागरिकों को अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, विद्युत विभाग, लोक निर्माण विभाग, परिवहन निगम और रेलवे पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें।

उन्होंने निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं को स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, निःशुल्क लॉकर, खोया-पाया केंद्र, पर्याप्त एम्बुलेंस, आपदा प्रबंधन तथा सुरक्षित यातायात जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध कराई जाएं। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जल पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतने, घाटों पर लाइफ जैकेट की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सीसीटीवी निगरानी को और प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने विकास परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि जल जीवन मिशन में धन की कोई कमी नहीं है, इसलिए कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी। जहां-जहां पेयजल पाइपलाइन या अंडरग्राउंड केबलिंग के लिए सड़कें खोदी गई हैं, वहां तत्काल गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कराई जाए। जनता को असुविधा और दुर्घटनाओं का सामना नहीं करना चाहिए।

बैठक में रोप-वे परियोजना, यूनिटी मॉल, आनंद काशी, रुद्र काशी, काशी स्पोर्ट्स सिटी, एकीकृत मंडलीय कार्यालय सहित सभी प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में गुणवत्ता के साथ पूरे करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री चौकाघाट स्थित निर्माणाधीन विद्युत सब स्टेशन पहुंचे। उन्होंने परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया और अधिकारियों से कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से विकसित हो रही काशी के लिए मजबूत विद्युत व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने परियोजना को समयबद्ध ढंग से पूरा करने तथा गुणवत्ता से कोई समझौता न करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाने, फुट पेट्रोलिंग तेज करने, पुलिसकर्मियों की समय-समय पर ड्यूटी बदलने तथा आईजीआरएस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था के साथ जनता का विश्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वृक्षारोपण महाअभियान की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे जनभागीदारी का अभियान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि काशी का विकास पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित होना चाहिए।

बैठक में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि वर्ष 2014 से अब तक वाराणसी में 536 परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जिन पर 36,210 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं, जबकि 25,007 करोड़ रुपये की लागत वाली 191 परियोजनाएं वर्तमान में निर्माणाधीन हैं। मुख्यमंत्री ने इन सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और समयबद्ध पूर्णता पर विशेष बल दिया।सनातन परंपरा का निर्वहन करते हुए काशी के कोतवाल श्री कालभैरव मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन किया। मान्यता है कि कालभैरव की अनुमति के बिना काशी यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और लोकमंगल की कामना करते हुए बाबा कालभैरव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इसके पश्चात मुख्यमंत्री श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने देवाधिदेव महादेव का विधिवत पूजन-अर्चन किया। श्रावण मास के आगमन से ठीक पहले बाबा विश्वनाथ के चरणों में नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश की खुशहाली, समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और सेवायतों ने उनका स्वागत किया। पूरे वातावरण में "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के उद्घोष गूंजते रहे।

दिनभर चले इस दौरे में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान, स्टाम्प एवं पंजीयन (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री रविन्द्र जायसवाल, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, महापौर अशोक तिवारी, मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

श्रावण मास केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि काशी की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा का विराट उत्सव है। हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन की चुनौती केवल भीड़ नियंत्रित करना नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित, सम्मानजनक और सहज दर्शन उपलब्ध कराना भी है। इस वर्ष की तैयारियों से स्पष्ट है कि श्री काशी विश्वनाथ धाम प्रशासन ने परंपरा और आधुनिक प्रबंधन का संतुलित मॉडल तैयार किया है। समान दर्शन की व्यवस्था, तकनीक आधारित लाइव प्रसारण, दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं, मजबूत सुरक्षा तंत्र और व्यापक स्वास्थ्य प्रबंधन इस बात का प्रमाण हैं कि काशी केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि उत्कृष्ट व्यवस्थापन का भी उदाहरण बन रही है। श्रावण के पावन महीने में जब हर-हर महादेव के उद्घोष से संपूर्ण काशी गुंजायमान होगी, तब बाबा विश्वनाथ का धाम केवल मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और सनातन संस्कृति का जीवंत केंद्र बनकर विश्व को भारतीय अध्यात्म की विराटता का संदेश देगा।

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