बिजली सुधार में भ्रष्टाचार नहीं चलेगा : 550 करोड़ की योजनाओं पर मंत्री की कड़ी निगरानी
पार्षदों और
अभियंताओं
की
संयुक्त
टीम
बनाए
जाने
के
निर्देश,
विकास
प्राधिकरण
की
कार्यशैली
पर
भी
जताई
नाराजगी
सुरेश गांधी
वाराणसी। काशी की बिजली
व्यवस्था को आधुनिक और
भरोसेमंद बनाने के लिए चल
रही 550 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं
पर अब सरकार ने
कड़ी निगरानी का संकेत दे
दिया है। प्रदेश के
स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन
शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने बुधवार को
स्पष्ट शब्दों में कहा कि
विद्युत सुधार कार्यों में किसी भी
स्तर पर अनियमितता, लापरवाही
या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते
हुए कहा कि शासन
की मंशा के अनुरूप
सभी कार्य निर्धारित मानकों और गुणवत्ता के
साथ पूरे होने चाहिए।
सर्किट हाउस सभागार में
आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री
ने बिजली विभाग के अधिकारियों से
शहर भर में चल
रहे विद्युत सुधार कार्यों की प्रगति का
विस्तृत ब्यौरा लिया। बैठक के दौरान
एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया
कि कई क्षेत्रीय अभियंता
अपने क्षेत्रों में 90 प्रतिशत तक कार्य पूरा
होने का दावा कर
रहे हैं, जबकि संबंधित
पार्षदों ने इन दावों
को नकार दिया। इस
विरोधाभास पर मंत्री ने
कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा
कि कागजों और जमीन की
हकीकत में अंतर स्वीकार
नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा
कि यदि स्थलीय निरीक्षण
में किसी प्रकार की
गड़बड़ी मिली तो जिम्मेदार
अधिकारी किसी भी कीमत
पर नहीं बचेंगे। मंत्री
ने प्रबंध निदेशक, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को निर्देश
दिया कि सभी परियोजनाओं
की नियमित भौतिक समीक्षा कराई जाए और
गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच
भी सुनिश्चित की जाए।
काशी में बिजली व्यवस्था के बड़े बदलाव की तैयारी
बैठक में बताया
गया कि 550 करोड़ रुपये की लागत से
शहर में व्यापक विद्युत
सुधार कार्यक्रम चल रहा है।
इसके अंतर्गत पुराने और जर्जर तारों
के मकड़जाल को हटाकर नए
केबल बिछाए जा रहे हैं,
कमजोर पोल बदले जा
रहे हैं, पुराने ट्रांसफार्मरों
का उच्चीकरण किया जा रहा
है तथा आवश्यकता वाले
क्षेत्रों में नए ट्रांसफार्मर
स्थापित किए जा रहे
हैं। इसके अलावा कई
विद्युत उपकेंद्रों का आधुनिकीकरण और
नए उपकेंद्रों का निर्माण भी
प्रस्तावित है। मंत्री ने
कहा कि काशी जैसे
तीर्थ और पर्यटन नगरी
में बिजली व्यवस्था मजबूत होना केवल सुविधा
का विषय नहीं बल्कि
शहर की प्रतिष्ठा से
भी जुड़ा प्रश्न है। लगातार बढ़ती
आबादी, पर्यटन गतिविधियों और व्यापारिक विस्तार
को देखते हुए मजबूत विद्युत
ढांचा समय की आवश्यकता
है।
पार्षदों को निगरानी में बड़ी भूमिका
रविन्द्र जायसवाल ने विद्युत कार्यों
की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए
एक नया तंत्र बनाने
के निर्देश दिए। उन्होंने कहा
कि प्रत्येक क्षेत्र में संबंधित विभागीय
अभियंता और पार्षद की
संयुक्त टीम बनाई जाए,
जो चल रहे कार्यों
के साथ-साथ अब
तक पूरे हुए कार्यों
की भी नियमित निगरानी
करे। मंत्री ने कहा कि
जनप्रतिनिधि सीधे जनता से
जुड़े होते हैं, इसलिए
उनकी शिकायतों और सुझावों को
गंभीरता से लिया जाना
चाहिए। यदि किसी क्षेत्र
में कार्य अधूरा है, घटिया गुणवत्ता
का है या केवल
कागजों में दिखाया गया
है तो उसकी जवाबदेही
तय की जाएगी। उन्होंने यह
भी कहा कि विभागीय
उच्चाधिकारियों को केवल फाइलों
पर भरोसा करने के बजाय
नियमित स्थलीय निरीक्षण करना चाहिए।
विकास प्राधिकरण के अधिकारियों पर भी बरसे मंत्री
बैठक में विद्युत
मुद्दों के साथ विकास
प्राधिकरण की कार्यशैली भी
चर्चा का विषय बनी।
मंत्री ने जोनल अधिकारियों
और क्षेत्रीय अभियंताओं के व्यवहार पर
नाराजगी जताते हुए कहा कि
गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों
द्वारा अपने मकान की
छोटी-मोटी मरम्मत या
मामूली निर्माण कार्य कराने पर उन्हें अनावश्यक
रूप से परेशान किए
जाने की शिकायतें लगातार
मिल रही हैं। उन्होंने
कहा कि प्रशासन का
उद्देश्य लोगों को प्रताड़ित करना
नहीं बल्कि व्यवस्था बनाए रखना है।
छोटे मरम्मत कार्यों को लेकर अनावश्यक
नोटिस, दबाव या उत्पीड़न
स्वीकार्य नहीं होगा। मंत्री
ने उपाध्यक्ष, विकास प्राधिकरण को निर्देश दिया
कि ऐसे मामलों की
समीक्षा की जाए और
यह सुनिश्चित किया जाए कि
ईमानदार नागरिकों को बिना वजह
परेशान न किया जाए।
साथ ही उन्होंने स्पष्ट
किया कि बड़े और
अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई
में किसी प्रकार की
ढिलाई नहीं बरती जानी
चाहिए।
जवाबदेही और पारदर्शिता पर सरकार का जोर
बैठक का सबसे
महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि
अब विकास कार्यों की प्रगति केवल
विभागीय रिपोर्टों से नहीं मानी
जाएगी। जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया, स्थल
निरीक्षण और स्वतंत्र सत्यापन
को भी बराबर महत्व
दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि
जनता के पैसे से
चल रही परियोजनाओं में
हर रुपये का हिसाब होना
चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि
काशी में बिजली सुधार
अभियान को मिशन मोड
में पूरा किया जाए
ताकि शहर को लंबे
समय तक निर्बाध और
सुरक्षित बिजली आपूर्ति मिल सके।
जनविश्वास मजबूत करने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पार्षदों और अभियंताओं की संयुक्त निगरानी व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर शिकायतों का समाधान तेजी से हो सकेगा। बिजली ढांचे में सुधार का सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं, व्यापारियों, उद्योगों और पर्यटन क्षेत्र पर पड़ेगा। बैठक में प्रबंध निदेशक, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम, उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण, वरिष्ठ अधिकारी और अभियंताओं के साथ बड़ी संख्या में पार्षद उपस्थित रहे। पार्षद रोहित मिश्रा, सिद्धनाथ शर्मा, सुशील गुप्ता, संदीप रघुवंशी, राजेंद्र यादव, राजेंद्र मौर्य, विनय सडेजा, बलीराम कन्नौजिया, कुसुम पटेल, अमित मौर्या, अभय पांडेय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं रखीं। सरकार की इस सख्त समीक्षा के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि काशी की 550 करोड़ रुपये की विद्युत परियोजनाएं वास्तव में जमीन पर कितनी तेजी और गुणवत्ता के साथ उतरती हैं।

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