हर-हर महादेव बोले जापानी गवर्नर, बाबा से मांगी विश्व शांति
सारनाथ से
विश्वनाथ
धाम
तक
काशी
की
संस्कृति
में
रमे
जापानी
मेहमान,
ग्रीन
हाइड्रोजन
से
निवेश-रोजगार
तक
यूपी-जापान
रिश्तों
को
नई
धार
सुरेश गांधी
वाराणसी। काशी में रविवार
को जब ‘हर-हर
महादेव’ का जयघोष गूंजा
तो उसमें जापान की आवाज भी
शामिल हो गई। जापान
के यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो
नागासाकी करीब 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ श्री
काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। बाबा
विश्वनाथ का विधिवत दर्शन-पूजन कर उन्होंने
आशीर्वाद लिया और विश्व
शांति की प्रार्थना की।
मंदिर पहुंचने पर जापानी मेहमानों
का रुद्राक्ष की माला और
अंगवस्त्र पहनाकर पारंपरिक स्वागत किया गया।
सावन में उमड़ी
श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की
भारी भीड़ के बीच
‘हर-हर महादेव’ का
उद्घोष हुआ तो जापानी
प्रतिनिधिमंडल भी श्रद्धालुओं के
साथ उसी उत्साह से
इस जयघोष में शामिल हो
गया। काशी की आस्था
से जुड़ा यह दृश्य सांस्कृतिक
रिश्तों की उस गहराई
का प्रतीक बना, जिसमें भाषा
अलग होने के बावजूद
भाव एक था।
मंदिर न्यास के एसडीएम शंभू
शरण के अनुसार प्रतिनिधिमंडल
ने बाबा के दर्शन
के साथ काशी की
धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं
को समझा। सावन में इतनी
बड़ी भीड़ के बीच
श्रद्धालुओं की सुविधा और
सुरक्षा के लिए की
गई व्यवस्थाओं ने जापानी मेहमानों
को खास तौर पर
प्रभावित किया। धाम की प्राचीन
विरासत, भव्यता और आधुनिक सुविधाओं
के तालमेल को भी उन्होंने
करीब से देखा।
बाबा के दरबार से विश्व शांति का संदेश
दर्शन-पूजन के बाद
गवर्नर कोटारो नागासाकी ने कहा कि
उत्तर प्रदेश, यामानाशी और जापान के
बीच संबंध आने वाले समय
में और मजबूत किए
जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के
साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों
में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताते
हुए उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन सिस्टम को यूपी और
यामानाशी के विकास के
लिए महत्वपूर्ण पहल बताया। ऊर्जा
सुरक्षा के जरिए विश्व
शांति की स्थापना में
योगदान देने की इच्छा
भी उन्होंने जताई। गवर्नर ने कहा कि
काशी आकर उन्हें लोगों
की ईश्वर के प्रति श्रद्धा
और सम्मान की भावना को
करीब से समझने का
अवसर मिला। बाबा विश्वनाथ से
विश्व शांति की प्रार्थना करना
उनके लिए इस यात्रा
का विशेष अनुभव रहा।
सारनाथ में बुद्ध, काशी में शिव
जापानी प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा
केवल निवेश और उद्योग की
तलाश तक सीमित नहीं
रही। शनिवार को दल ने
सारनाथ पहुंचकर भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेशस्थली
और बौद्ध विरासत को करीब से
जाना। शाम को नमो
घाट पर गंगा आरती
में शामिल होकर काशी की
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा
का अनुभव किया। रविवार को विश्वनाथ धाम
में दर्शन के बाद दल
वाराणसी से रवाना हो
गया। काशी की यह
यात्रा अपने आप में
भारत-जापान रिश्तों की दो धाराओं—बुद्ध की शांति और
बाबा विश्वनाथ की आध्यात्मिकता—को
जोड़ती दिखाई दी।
यूपी को जापान से क्या मिलेगा?
यामानाशी और उत्तर प्रदेश
की साझेदारी अब महज औपचारिक
मुलाकातों से आगे बढ़
रही है। दोनों पक्ष
ग्रीन हाइड्रोजन, स्वच्छ ऊर्जा, उद्योग, पर्यटन और कौशल विकास
जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा
रहे हैं। अगस्त 2026 की
यूपी-जापान निवेश पहल में ऑटोमोबाइल,
उन्नत विनिर्माण, तकनीक, नवाचार और स्वास्थ्य क्षेत्र
भी प्रमुख संभावनाओं के रूप में
सामने आए हैं।
पहला
लाभ—निवेश
और
रोजगार
: जापानी कंपनियों के आने से
विनिर्माण इकाइयों, सप्लाई चेन और सहायक
उद्योगों का विस्तार हो
सकता है। इससे प्रत्यक्ष
के साथ अप्रत्यक्ष रोजगार
के अवसर भी बढ़ेंगे।
दूसरा—ग्रीन
हाइड्रोजन
की
तकनीक
: जापान और खासकर यामानाशी
के अनुभव से यूपी को
स्वच्छ ऊर्जा, हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और उपयोग की
तकनीक विकसित करने में मदद
मिल सकती है। दोनों
पक्षों के बीच ग्रीन
हाइड्रोजन सहयोग को आगे बढ़ाने
पर सहमति भी बनी है।
तीसरा—जापानी
तकनीक
और
यूपी
का
बाजार
: जापान की तकनीकी दक्षता
और यूपी के विशाल
बाजार, युवा मानव संसाधन
तथा बढ़ते औद्योगिक ढांचे का मेल ऑटोमोबाइल,
इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और आधुनिक विनिर्माण
को नई गति दे
सकता है।
चौथा—कौशल
विकास
: जापानी उद्योगों की जरूरत के
अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करने
से रोजगार की गुणवत्ता बढ़
सकती है। तकनीकी संस्थानों
और कंपनियों के बीच प्रशिक्षण
तथा मानव संसाधन आदान-प्रदान के रास्ते भी
खुल रहे हैं।
पांचवां—काशी
और
यूपी
का
पर्यटन
: सारनाथ, काशी विश्वनाथ, गंगा
आरती और बौद्ध विरासत
जापानी पर्यटकों के लिए विशेष
आकर्षण हैं। सांस्कृतिक संबंध
मजबूत होने से जापान
से यूपी आने वाले
पर्यटकों की संख्या बढ़ाने
की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
छठा—वैश्विक
निवेश
की
विश्वसनीयता
: जापानी कंपनियों का भरोसा दूसरे
अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी
सकारात्मक संकेत बन सकता है।
यूपी की बेहतर कनेक्टिविटी,
बड़ा बाजार, मानव संसाधन और
निवेश सुविधा तंत्र इस साझेदारी को
आधार दे रहे हैं।
600 करोड़ की प्रतिबद्धता से आगे बढ़ी साझेदारी
यामानाशी ने यूपी में
अपनी एमएसएमई कंपनियों के निवेश को
सुगम बनाने के लिए करीब
600 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई
है। प्रस्तावित सहयोग में जापान सिटी,
ग्रीन हाइड्रोजन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, तकनीकी
सहयोग और औद्योगिक निवेश
जैसे आयाम भी शामिल
हैं। यानी काशी में
बाबा विश्वनाथ के दरबार में
गूंजा ‘हर-हर महादेव’
केवल आस्था का स्वर नहीं
था। इसके पीछे निवेश,
तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, रोजगार, पर्यटन और विश्व शांति
की साझी आकांक्षा भी
सुनाई दी। काशी की
धरती पर जापान का
यह जुड़ाव अब संस्कृति से
कारोबार और कारोबार से
विकास की ओर बढ़ता
दिखाई दे रहा है।

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