Saturday, 24 October 2026

राफेल की गर्जना पर भारी पड़ा सूर्यकिरण का रोमांच!

राफेल की गर्जना पर भारी पड़ा सूर्यकिरण का रोमांच! 

नौ विमानों ने आसमान में रची शौर्य, सटीकता और अद्भुत तालमेल की इबारत

‘विंग्स ओवर गंगा’ के दूसरे दिन सूर्यकिरण के नाम रहा शो; गंगा के ऊपर एक साथ उड़ते विमानों की कलाबाजियों ने थाम दीं दर्शकों की निगाहें

सुरेश गांधी

वाराणसी। गंगा की लहरों पर सुनहरी धूप, आसमान में लड़ाकू विमानों की गर्जना और घाटों पर उमड़ा जनसैलाब। कहीं राफेल की रफ्तार, कहीं सुखोई की ताकत तो कहीं स्वदेशी तेजस का पराक्रम। लेकिन नमो घाट पर शनिवार को सजे भारतीय वायुसेना के हवाई प्रदर्शन ‘विंग्स ओवर गंगा’ की सबसे यादगार तस्वीर बनी सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम। नौ विमानों की एक साथ उड़ान, पलक झपकते बदलती संरचनाएं और आसमान में बनती धुएं की रंगीन लकीरों ने ऐसा रोमांच रचा कि निगाहें आसमान से हटाना मुश्किल हो गया। 

कहने को यह भारतीय वायुसेना की ताकत और आधुनिक युद्धक क्षमता का प्रदर्शन था, लेकिन सूर्यकिरण ने इसे आसमान में सधे हुए नृत्य जैसा बना दिया। 

जहां लड़ाकू विमानों की गर्जना उनकी ताकत का अहसास करा रही थी, वहीं सूर्यकिरण के विमानों का एक-दूसरे के बेहद करीब रहकर दिशा और ऊंचाई बदलना पायलटों के असाधारण कौशल, अनुशासन और आपसी भरोसे की मिसाल बन गया।

एक साथ नौ विमान, लेकिन तालमेल ऐसा कि एक ही आकृति दिखे

सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम भारतीय वायुसेना की विशिष्ट प्रदर्शन टीम है। इसके नौ हॉक एमके-132 विमानों ने हवा में ऐसे करतब दिखाए, जिनमें गति के साथ संतुलन और सटीकता की भी कठिन परीक्षा होती है। लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और चर्चित डीएनए करतब इस टीम की पहचान हैं। इन करतबों की असली खूबसूरती सिर्फ विमानों की कलाबाजी में नहीं, बल्कि उस अनुशासन में छिपी है, जिसके सहारे कई विमान एक साथ उड़ते हुए अपनी निर्धारित दूरी, दिशा और स्थिति बनाए रखते हैं। 

एक विमान का मामूली विचलन भी पूरी संरचना को प्रभावित कर सकता है। इसलिए हर करतब के पीछे घंटों का अभ्यास, बारीक योजना, निरंतर प्रशिक्षण और पायलटों के बीच अटूट समन्वय होता है। 

जब ये विमान एक साथ दिशा बदलते, घूमते और आसमान में नई आकृतियां बनाते हैं तो दर्शकों के लिए यह किसी रोमांचक दृश्य से कम नहीं होता। केसरिया, सफेद और हरे रंग के धुएं की लकीरें इस दृश्य

में देशभक्ति के रंग भर देती हैं।

सूर्यकिरण की खासियत क्या है?

भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण टीम की स्थापना वर्ष 1996 में हुई थी। यह टीम देश-विदेश में हवाई प्रदर्शन के जरिये भारतीय वायुसेना के अनुशासन, दक्षता और पेशेवर उत्कृष्टता का परिचय देती रही है। 

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, टीम अब तक 850 से अधिक प्रदर्शन कर चुकी है। इसकी उड़ान का उद्देश्य केवल दर्शकों का मनोरंजन करना नहीं है। 

ऐसे प्रदर्शन उच्चस्तरीय उड़ान कौशल, विमान नियंत्रण, परिस्थितियों के अनुरूप त्वरित निर्णय और टीम के सदस्यों के बीच समन्वय को भी सामने लाते हैं। 

नमो घाट पर इसका प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा कि गंगा के विस्तृत प्रवाह और काशी के ऐतिहासिक घाटों की पृष्ठभूमि ने हवाई करतबों को एक अलग दृश्यात्मक पहचान दी। आसमान में बनती रंगीन लकीरों और नीचे गंगा की लहरों का मेल इस आयोजन को सामान्य एयर शो से अलग बनाता है।

राफेल, सुखोई और तेजस ने भी दिखाई ताकत

शनिवार के प्रदर्शन में सूर्यकिरण अकेला आकर्षण नहीं था। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000 और स्वदेशी तेजस जैसे लड़ाकू विमानों ने भी अपनी उड़ान और हवाई कौशल से दर्शकों को रोमांचित किया। चिनूक हेलीकॉप्टर का प्रदर्शन भी आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा। इन विमानों की क्षमताएं अलग-अलग हैं। 

राफेल आधुनिक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जबकि सुखोई-30 एमकेआई अपनी लंबी दूरी, बहुमुखी भूमिका और हवा में युद्धक क्षमता के लिए जाना जाता है। तेजस भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान कार्यक्रम की उपलब्धि है। मिराज-2000 भी भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल रहा है। इनकी गर्जना और तेज गति ने जहां वायुसेना की

युद्धक क्षमता का अहसास कराया, वहीं सूर्यकिरण ने यह दिखाया कि आसमान में सटीकता और तालमेल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितनी गति और शक्ति।

काशी के आसमान में देशभक्ति के रंग

भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ के लिए 22, 24 और 25 अक्टूबर की तिथियां निर्धारित की गई हैं। 23 अक्टूबर को विधान परिषद चुनाव के कारण प्रदर्शन नहीं हुआ था। पहले दिन भी गंगा के दोनों किनारों और घाटों पर बड़ी संख्या में दर्शक जुटे थे। शनिवार को दूसरे दिन भी नमो घाट से लेकर राजघाट और अस्सी घाट तक लोगों में उत्साह दिखाई दिया। 

आसमान में विमानों की आवाज सुनाई देते ही लोगों की निगाहें ऊपर उठ जातीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए यह आयोजन रोमांच और गौरव का अवसर बना। अब रविवार, 25 अक्टूबर को कार्यक्रम का अंतिम दिन है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत अन्य विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना है। अंतिम दिन के प्रदर्शन पर भी सबकी निगाहें रहेंगी। नमो घाट पर शनिवार का संदेश साफ था—लड़ाकू विमानों ने भारत की सैन्य शक्ति दिखाई, लेकिन सूर्यकिरण ने उस शक्ति के पीछे छिपे अनुशासन, साधना और सामूहिक कौशल को सबसे खूबसूरती से सामने रखा।

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